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बांग्लादेश मुद्दा ‘टफ नेगोशिएटर’ PM मोदी के हाथों में, मुंबई हमलों का आरोपित US से भेजा जाएगा भारत: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा

                                           मोदी और डोनाल्ड ट्रंप (साभार: इंडिया टुडे)
दो दिवसीय अमेरिका दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भव्य स्वागत किया है। दोनों वैश्विक नेताओं की मुलाकात के दौरान क्षेत्रीय संतुलन, व्यापार, रक्षा, आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। ट्रंप ने पीएम मोदी को टफ नेगोशिएटर बताते हुए कहा कि वे बांग्लादेश से खुद निपट लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई हमलों के आरोपित तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने का ऐलान किया है।

भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की तख्तापलट के बाद अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जारी है। इस मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बांग्लादेश में अमेरिकी डीप स्टेट की भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का ख्याल पीएम मोदी रख लेंगे। यानी बांग्लादेश में किसी भी तरह की हिंसा या साजिश के खिलाफ भारत कार्रवाई करता है तो अमेरिका तटस्थ या भारत के साथ खड़ा रह सकता है।

दरअसल, एक पत्रकार ने राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल किया था कि बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बारे में क्या कहना चाहेंगे? पत्रकार ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार के दौरान अमेरिका का डीप स्टेट वहां काम कर रहा था। इसके बाद बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस अमेरिकी जॉर्ज सोरोस के बेटे एलेक्स सोरोस से भी मिले।

इस पर ट्रंप ने कहा, “हमारे डीप स्टेट का वहाँ (बांग्लादेश में) कोई भूमिका नहीं है। यह एक ऐसा मसला है जिस पर प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) लंबे समय से काम कर रहे हैं और इस पर काफी वर्षों से काम कर चुके हैं… मैं इसके बारे में पढ़ रहा हूँ। मैं बांग्लादेश को अब प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के हाथों में छोड़ता हूँ।” इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रपति ट्रंप के बगल में बैठे हुए थे।

दरअसल, बांग्लादेश की स्थिति पर दोनों देशों के बीच विस्तार से चर्चा हुई है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसकी जानकारी दी है। मिस्री ने कहा कि पीएम मोदी ने बांग्लादेश में हाल की घटनाओं और भारत के रूख के बारे में अपनी चिंताएँ साझा कीं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम आशा करते हैं कि बांग्लादेश में स्थिति भी उस दिशा में आगे बढ़ेगी जहाँ हम उनके साथ रचनात्मक और स्थिर तरीके से संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं।”

दोनों नेताओं के मुलाकात के दौरान गुरुवार (13 फरवरी 2025) को व्हाइट हाउस के पास बांग्लादेशियों ने मुहम्मद यूनुस के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुहम्मद यूनुस के ‘असंवैधानिक’ शासन को खत्म करने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने की माँग की। विरोध प्रदर्शन का आयोजन अवामी लीग और उसके सहयोगी संगठन शामिल थे।

वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने मुंबई हमले में वांछित तहव्वुर राणा को भारत के हाथों में सौंपने की घोषणा की है। पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक तहव्वुर इस समय अमेरिका के लॉस एंजिल्स की एक जेल में बंद है। उसे साल 2008 में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का साथी रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (13 फरवरी 2025) को कहा, “मुझे घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे लोगों में से एक एवं मुंबई के भयानक आतंकवादी हमले से जुड़े एक साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण को भारत में न्याय का सामना करने की मंजूरी दी है। वह भारत जा रहा है।”

ट्रंप की घोषणा की बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उनका आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और अमेरिका साथ खड़े रहेंगे। हम इस बात पर सहमत हैं कि सीमा पार आतंकवाद के उन्मूलन के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है। मैं राष्ट्रपति का आभारी हूँ कि उन्होंने 2008 में भारत में नरसंहार करने वाले अपराधी को भारत के हवाले करने का निर्णय लिया है। भारत की अदालतें उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगी।”

दूसरी बार सत्ता सँभाल रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोगेशिएशन स्किल्स (बातचीत कौशल) की तारीफ की। उन्होंने कहा, “वह (पीएम मोदी) मुझसे कहीं ज़्यादा कुशल वार्ताकार हैं और मुझसे कहीं बेहतर वार्ताकार भी हैं। इसमें कोई मुक़ाबला भी नहीं है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘लंबे समय से एक बेहतरीन दोस्त’ भी बताया।

मुंबई 26/11 का आतंकी तहव्वुर राणा होगा अब भारत की गिरफ्त में, अमेरिकी कोर्ट ने दी प्रत्यर्पण को मंजूरी

                                                 तहव्वुर राणा (साभार: फाइनेंशियल एक्सप्रेस)
साल 2008 में हुए मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है। भारत में वांछित 63 वर्षीय तहव्वुर राणा को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई व्यवसायी है। भारत प्रत्यर्पण संधि के आधार पर तहव्वुर को भारत प्रत्यर्पित करने की माँग लंबे समय से करता आ रहा था।

भारत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर राणा की अहम भूमिका को लेकर भारत ने अमेरिका के साथ जरूरी दस्तावेज साझा किए थे। इसके बाद प्रत्यर्पण का विरोध करते हुए तहव्वुर ने निचली अदालत में याचिका दी थी। निचली अदालत ने प्रत्यर्पण को मंजूरी तो तहव्वुर ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

मुंबई हमले की जाँच करने वाली एजेंसी ने 405 पन्नों की चार्जशीट में तहव्वुर राणा को आरोपित बनाया था। चार्जशीट के अनुसार, तहव्वुर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI और इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य है। वह हमले का मास्टरमाइंड एवं मुख्य आरोपित डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद सईद गिलानी की मदद कर रहा था।

चार्जशीट में कहा गया है कि तहव्वुर और हेडली ने मुंबई हमले का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। तहव्वुर ने आतंकियों को बताया था कि मुंबई में हमलावर आतंकियों को कहाँ ठहरना है और उन्हें कहाँ-कहाँ हमले करने हैं। तहव्वुर ने उसकी मदद की थी। अमेरिका में सुनवाई के दौरान तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे पता था कि हेडली लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है।

तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे जानकारी थी कि हेडली किससे मिल रहा है और उनसे क्या बात कर रहा है। उसे हमले की योजना और टारगेट के बारे में भी बता था। तहव्वुर राणा अपने बचपन के दोस्त और आतंकियों के मददगार डेविड कोलमैन हेडली की आर्थिक सहित हर तरह से मदद करके इस्लामी आतंकियों का सपोर्ट कर रहा था। यह बात उसने अमेरिकी कोर्ट में मानी है।

हेडली अमेरिकी नागरिक है। उसकी माँ अमेरिका और उसके अब्बू पाकिस्तानी मूल के थे। अमेरिकी अधिकारियों ने अक्टूबर 2009 में हेडली को अमेरिका के शिकागो से गिरफ्तार किया था। अमेरिकी कोर्ट ने 24 जनवरी 2013 को मुंबई में आतंकी हमलों में शामिल होने का दोषी मानते हुए हेडली को 35 साल जेल की सजा सुनाई थी। भारत हेडली के प्रत्यर्पण की भी लगातार माँग कर रहा है।

तहव्वुर और हेडली बचपन के दोस्त हैं। हेडली भी शुरुआती 5 साल की पढ़ाई पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में की है। इसके बाद वह परिवार के साथ अमेरिका चला गया। तहव्वुर राणा भी इसी स्कूल में पढ़ा है। बाद में वह पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के रूप में काम करने लगा। फिर वह कनाडा चला गया। कुछ साल के बाद उसे कनाडा की नागरिकता मिल गई।

तहव्वुर ने शिकागो में ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम से एक कंसल्टेंसी फर्म की शुरुआत की। इस फर्म की एक शाखा मुंबई में भी थी। इसी फर्म के सहारे हेडली भारत आया था और हमले करने वाली जगहों की रेकी की थी। तहव्वुर राणा फिलहाल अमेरिका के लॉस एंजिल्स के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में हिरासत में है। उसे एफबीआई ने साल 2009 में शिकागो से दबोचा था। 

26 नवंबर 2008 को मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई के लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज पैलेस, होटल ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज ने निशाना बनाया था। वे अपने साथ भारी मारा मात्रा में IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और AK-47 लेकर आए थे।

इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 300 लोग मारे गए थे। मृतकों में अमेरिकी सहित कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इन आतंकियों के खिलाफ NSG, मरीन कमांडो फोर्स, मुंबई पुलिस, RAF, CRPF, मुंबई फायर ब्रिगेड और रेलवे पुलिस फोर्स ने ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया था। साल 2012 में उसे फाँसी दी दे गई थी।