Showing posts with label #D company. Show all posts
Showing posts with label #D company. Show all posts

उत्तर प्रदेश : कैसे-कैसे होना चाहिए संभल में दंगा… व्हॉट्सऐप ग्रुप पर सब तय हुआ: एडमिन समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क निकला, 1000+ पन्नों की चार्जशीट में दुबई तक का कनेक्शन उजागर

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (बाएँ), संभल हिंसा (बीच में), शारिक साठा (दाएँ), (फोटो साभार : Aajtak & Organiser)
अनेकों बार लिखा जा रहा है कि हिन्दू हितों की रक्षा करने वालों की जेहादी बेशक जान लेकर सात समुन्दर पार भाग जाएं, लेकिन जाँच होने पर ईश्वर सामने ले ही आता है। जिस तरह आतताइयों के क्रूर राज में हिन्दू मन्दिरों और देवी-देवताओं को धरती माता में दबा दिया गया था, आज वही मूर्तियां चीख-चीखकर अपने दबे होने के संकेत दे रही है। इसीलिए जहाँ खुदा वहीं मंदिरों के अवशेष निकल रहे हैं। और जितने भी दंगे-फसाद हो रहे हैं सच्चाई को बाहर आने से रोकने के लिए होते रहे हैं, भविष्य में भी होते रहेंगे। यहाँ सनातनियों को वोट देते समय सतर्क होना पड़ेगा कि किसी सनातन विरोधी नेता और पार्टी को वोट न दे। दूसरे, चुनाव आयोग और निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सबको इस गंभीर मुद्दे पर गंभीरता से चिंतन करना चाहिए। Victim card खेलने वालों पर तो और भी सतर्कता बरतनी चाहिए।         

दंगाग्रस्त क्षेत्रों के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को सभी सरकारो और पुलिस को सख्त आदेश देने चाहिए कि दंगा होने पर सबसे पहले दो राउंड अश्रुगैस फिर blind fire और आखिर में ढोल पीटने के लिए लाठीचार्ज। अक्सर यही सुनने में आता है कि बाहरी लोग आकर यहाँ का माहौल ख़राब कर दिया। जब blind fire होने पर जो जख्मी होंगे स्थानीय ही होंगे और उनको रोने वाले भी स्थानीय कोई बाहरी नहीं होगा।    

संभल हिंसा की गहराई में जाने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं, जो पहले की रिपोर्टों में नहीं थीं। SIT की चार्जशीट के अनुसार, इस खूनी खेल का साजिशकर्ता दुबई में बैठा गैंगस्टर शारिक साठा है, जिसे संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का खुला प्रोटेक्शन मिला था।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने दावा किया कि साठा ने सीधे तौर पर मुस्लिम भीड़ को भड़काया था। शारिक साठा ने मुस्लिमों को उकसाया कि वे जामा मस्जिद के सर्वे को रोकें, क्योंकि यह उनकी ‘500 साल पुरानी बाबर की निशानी’ है, जिसे बचाना उनका फर्ज़ है।

इस साज़िश का सबसे घिनौना पहलू यह है कि शारिक साठा के इशारे पर ही हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन की हत्या की साज़िश रची गई थी। इस काम के लिए शारिक साठा गैंग से जुड़े मोहम्मद गुलाम को सुपारी दी गई थी, जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर लिया था।

 मोहम्मद गुलाम के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार भी बरामद हुए, जो इस साज़िश की गंभीरता को दिखाते हैं। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि शारिक साठा गैंग का संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की D कंपनी से है, जिससे इस हिंसा के पीछे एक गहरी और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय साज़िश की बू आती है।

व्हाट्सएप ग्रुप में साजिश का पटकथा

संभल हिंसा की साज़िश एक व्हाट्सएप ग्रुप ‘सांसद संभल’ से रची गई थी, जिसके एडमिन खुद सांसद जियाउर्रहमान बर्क थे। पुलिस को पक्के सबूत मिले हैं कि 22 और 24 नवंबर को इसी ग्रुप में हिंसा भड़काने के मैसेज भेजे गए। इन मैसेज में भारी भीड़ जुटाने और सरकारी सर्वे को किसी भी कीमत पर रोकने का निर्देश था।

दुबई में बैठा गैंगस्टर शारिक साठा ने भी 23 नवंबर को फोन पर निर्देश दिए थे कि सर्वे नहीं होना चाहिए। इस भीड़ का मुख्य निशाना हिंदू वकील विष्णु शंकर जैन थे, जिनकी हत्या की साज़िश रची गई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गए।

सुनियोजित थी संबल हिंसा साजिश

24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा ने पूरे नॉर्थ इंडिया को हिला दिया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि विवादित मस्जिद उस जगह बनी है, जहाँ पहले श्रीहरिहर मंदिर था। कोर्ट के आदेश पर जब एडवोकेट कमिश्नर की टीम सर्वे के लिए पहुँची, तो मुस्लिम भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया।
पुलिस की जाँच में सामने आया है कि यह हिंसा कोई अचानक नहीं हुई, बल्कि एक सुनियोजित साज़िश का नतीजा थी। SIT ने अपनी 11वीं चार्जशीट में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 23 लोगों को आरोपित बनाया है, जबकि विधायक पुत्र सुहैल इकबाल को क्लीनचिट मिली है।
इस सुनियोजित हमले में चार लोगों की जान गई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। शाही जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने पुलिस को बताया कि सपा सांसद बर्क की इसमें बड़ी भूमिका थी। पहले 3000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई थी, और अब 1200 पन्नों की एक और चार्जशीट दाखिल की गई है।

पंजाब : भगवंत मान की AAP सरकार के बाद बढ़ी भारत में ड्रोन से अरबों की ड्रग्स की सप्लाई, Pakistan लश्कर, जैश और डी कंपनी की भी ले रहा मदद


आर्थिक कंगाली और तंगहाली के मुहाने पर खड़ा पाकिस्तान अपनी ऐसे बदहाली के बावजूद नापाक इरादों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती भारतीय राज्यों में ड्रोन से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। ताकि भारत के युवाओं को नशे की लत लगाई जा सके। पहले कांग्रेस और फिर पंजाब में आप की मान सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान की ओर से भारत में ड्रोन के जरिए ड्रग्स भेजने का अभियान और तेज हुआ है। चार साल में पंजाब के सीमावर्ती गांवों में पकड़े गए 391 ड्रोन पाकिस्तान से नार्को टेरर अभियान के तहत लॉन्च हुए हैं। हैरानी की बात है कि पाकिस्तान के जहरीले इरादों में कुख्यात तस्कर, आतंकी सरगना और संगठन शामिल हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों को इन्वेस्टिगेशन के दौरान कुछ प्रमुख तस्करों और संगठनों के नाम जांच में मिले हैं। जो भारत में ड्रग्स भेजकर इसकी अवैध कमाई को हवाला के जरिए नेपाल और चीन में जुटाते हैं। इसके बाद पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए शेल कंपनियों को पैसे ट्रांसफर करते हैं।

पंजाब में भगवंत मान सरकार के बाद ड्रग्स तस्करी और तेजी से बढ़ी
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से सीमा पार से ड्रग्स का आना बेहद आम हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय किसान बताते हैं कि “ड्रग्स का बहुत अच्छे से संचालन किया जा रहा है, क्योंकि जो लोग इससे जुड़े हुए हैं, उन्हें वो इलाके पता हैं जहां सीमा के उस पार से ड्रग्स को फेंकना है।” किसानों या मजदूरों को बस उन पैकेटों को अपने घर ले जाना होता है। एक बार जब ये उनकी सीमा में पहुंच गए तो भारतीय कुरियर या ‘पांधी’, जैसा कि स्थानीय रूप से इन्हें जाना जाता है, इन्हें उनके घरों से ले जाते हैं। वो कहते हैं कि ये ‘पांधी’ ड्रग्स के इन पैकेटों को पास के शहरों में पहले से तय जगहों पर ले जाते हैं जहां दूसरा कुरियर वाला आता है। वहां से इसे बेचने वालों तक ले जाया जाता है। फिर वो इसे वितरकों तक पहुंचाते हैं और वहां से यह ग्राहकों तक पहुंचता है। सीमा पर गुप्तचरी में लगे एक अधिकारी के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को कमीशन मिलता है। इन्हें इसके सरगना या इस धंधे शामिल अन्य लोगों की कोई जानकारी नहीं होती और यही कारण है कि ड्रग्स के सरगना को पकड़ना आसान नहीं है।

पाकिस्तान से ड्रग्स की डिलीवरी लेकर आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े
इसका खुलासा सुरक्षा बलों के एक्शन में साफ नजर आता है। पिछले चार साल में ही पाकिस्तान से आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े हैं। 2020 से 2023 तक 266 और 2024 के शुरुआती 8 महीनों में ऐसे 125 ड्रोन बीएसएफ ने पकड़े हैं, जिनमें 2023 तक तीन सालों में 1500 किग्रा हेरोइन भेजी गई। 2024 में 2400 किग्रा से ज्यादा का हेरोइन और गांजा पकड़ा जा चुका है, जो बताता है कि नार्को टेरर कितनी तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान ड्रोन से ड्रग्स भेज रहा है। बीएसएफ ने 840 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी है। ड्रोन के जरिए तस्करी में सबसे पहले नाम पंजाब का है। पंजाब राज्य पाकिस्तान के बॉर्डर से जुड़ा है। जैसा की सबको मालूम है कि अफगानिस्तान में अफीम की खेती की जाती है। अफगानिस्तान के रास्ते अफीम, गांजा और हेरोइन जैसे अन्य नशीले पदार्थ पाकिस्तान आते हैं। इसके बाद बॉर्डर में ड्रोन के सहारे इसे पंजाब पहुंचाया जाता है। यहां पर ड्रग्स के गिरोह के बड़े-बड़े सरगना इस अवैध अफीम, कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों को दिल्ली समेत पूरे देश में पहुंचाने का काम करते हैं।

साल में ही 40 हजार तस्कर गिरफ्तार, 30 करोड़ रु. बरामद
एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन और ड्रग्स की यह केवल 15-20% ही रिकवरी है। बाकी की ड्रग्स की खेप तस्करी के स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचने की आशंका है। दरअसल, पाक का नरोवाल गुरदासपुर जिले से सटा है। कसूर इलाका फिरोजपुर और सियालकोट व बहावलपुर भारतीय सीमा के पास हैं। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स और हथियार लदे ड्रोन इन्हीं इलाकों से लॉन्च किए जा रहे हैं। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि सितंबर 2024 तक ढाई वर्षों में कुल 2,546 किग्रा हेरोइन, 2,457 किग्रा अफीम, 1,156 क्विंटल पोस्त और 42.9 मिलियन टैबलेट्स, कैप्सूल्स, इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। इन अभियानों में कुल 39,840 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से ड्रग्स तस्करी से अर्जित 30.83 करोड़ की नकदी बरामद की। एनआईए ने खालिस्तानी और पाकिस्तानी आतंकी समूहों के कनेक्शन का पता लगाया है, जो आईएसआई के मार्गदर्शन में एक्टिव रहते हैं।

ड्रग्स की तस्करी में इस्तेमाल हो रहे चार तरह के ड्रोन
1. फिक्स्ड-विंग ड्रोनः अधिकतम दूरी तक उड़ान भरकर बड़ी मात्रा में ड्रग्स लाते हैं।
2. मल्टीरोटर ड्रोनः वर्टिकल उड़ान भरने, छोटे पैकेट लाने और कहीं भी उतरने में सक्षम।
3. हाइब्रिड ड्रोनः फिक्स्ड-विंग और मल्टीरोटर दोनों गुणों को मिलाते हैं और लंबी दूरी तय कर दुर्गम स्थानों पर उड़ान भरते हैं। इन ड्रोन पर चीनी कंपनियों के लेबल लगे मिले हैं।
4. ऑटोनॉमस ड्रोनः ये ड्रोन बिना मानव नियंत्रण के उड़ान में सक्षम हैं। तस्कर इनका उपयोग पूर्व-निर्धारित मार्ग पर करते हैं, जिससे इनकी गतिविधियां छिप जाती हैं।

तस्करी का ‘गोल्डन क्रिसेंट’ से चार साल में बदल गई क्रॉस बॉर्डर स्मगलिंग
अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश है और वहां से ड्रग्स पाक के रास्ते भारत में पहुंचाई जाती हैं। तस्करी के इस नेटवर्क को ‘गोल्डन क्रिसेंट’ कहते हैं, जो अफगानिस्तान, पाक और ईरान से होकर गुजरता है। भारतीय सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सतर्कता चलते चार सालों में पाकिस्तान से ड्रग्स तस्करी का पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है। 2022 में एनआइए ने हरविंदर सिंह को अटारी से गिरफ्तार किया था। अटारी सीमा पर लगभग 100 किग्रा हेरोइन जब्त की गई थी, जो पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए 10 से अधिक में भेजी गई थी। एक स्टडी में सामने आया है कि 2020 में दुनिया में मैक्सिकन तस्करी संगठनों ने अमेरिकी सीमा के पास और पाकिस्तानी ड्रग्स तस्करों ने भारत में ड्रग्स तस्करी के लिए ड्रोन जैसे एडवांस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया।

ड्रग्स की कमाई से आतंकियों की फंडिंग कर रहा है पाकिस्तान
माध्यम लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन सीधे तौर पर अपनी गतिविधियों की फंडिंग के लिए इसे एक बड़ा आर्थिक स्रोत बना चुके हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से जुड़ा एक कुख्यात ड्रग तस्कर हाफिज मुहम्मद अंसार है उसका नाम भारत में ड्रग्स तस्करी में सामने आता रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में सक्रिय मक्की ड्रग कार्टेल भी भारत में ड्रग तस्करी में जुटा हुआ है। स्थानीय अपराधी गिरोहों और शेल कंपनियों के जरिए दूसरे प्रदेशों के नेटवर्क तक ड्रग्स पहुंचाई जाती है। हवाला के अलावा इसकी अवैध कमाई को ट्रांसफर करने के कई तरीके हैं। गैरकानूनी वित्तीय चैनलों से नेपाल व चीन और फिर पाकिस्तान में ट्रांसफर किया जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस पहले चरण में ड्रग्स की अवैध व नकद कमाई को वैध व्यवसायों, बैंक खातों या अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा किया जाता है। नकदी को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते हैं। बड़ी राशि और संदेह से बचने का यह रास्ता ‘स्मर्किंग’ कहलाता है। चीन और नेपाल के कैसीनो के माध्यम से भी इसे वैध किया गया है, जहां बड़ी धनराशि को गेम में वैध जीत से प्राप्त दिखाते हैं। लेयरिंग के दूसरे चरण में पैसा कई जटिल लेन-देन के जरिए घुमाया जाता है ताकि इसके स्त्रोत का पता लगाना मुश्किल हो। नकदी का एक हिस्सा खास तौर पर पंजाब और महाराष्ट्र में टारगेट किलिंग और रंगदारी वसूलने के लिए भी खर्च करने में भी उजागर हुए हैं।

डी कंपनी से लेकर बलूच तस्करों की भी मदद ले रहा है पाकिस्तान
पंजाब में पकड़ी गई ड्रग्स की जड़ें पाकिस्तान के अलावा यूरोप और यूएई में संचालित वैश्विक नेटवकों तक पहुंचती हैं। जसमीत हकीमजादा जैसे प्रमुख व्यक्तियों को नाकों आतंक के संचालक के तौर पर पहचाना गया है, जो स्थानीय युवाओं को इस धंधे और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए प्रलोभन देता है। वे एनआईए के रडार पर हैं। दाऊद इब्राहिम का डी-कंपनी नेटवर्क आतंकी गतिविधियों और ड्रग्स तस्करी में भी शामिल है। पाकिस्तान का एक और कुख्यात ड्रग तस्कर ताहिर महमूद उर्फ ‘चाचा’ भी अफगानिस्तान से हेरोइन को भारत पहुंचाता है। वहीं, बलूचिस्तान में सक्रिय कई तस्कर गुट भी अफगानिस्तान से ड्रग्स को पाकिस्तान के पंजाब और सिंध के जरिए भारत भेजते हैं।

अवैध ड्रग्स सप्लाई से कमाई के उदाहरण…

  • 2020 में 1,212 किग्रा ड्रग्स की भारत में तस्करी का पता चला। जिन तस्करों को पकड़ा, उनसे हवाला के जरिए जुटाए गए 7.21 करोड़ रु. मिले।
  • 2021 में तस्करों ने पंजाब में 1,504 किग्रा ड्रग्स भेजी। हवाला से जुटाए गए 8.54 करोड़ के साथ तस्कर पकड़े गए तो इस बात का खुलासा हुआ।
  • 2022 में 1854 किग्रा ड्रग्स गुप्त नेटवर्क के जरिए सप्लाई की। इसकी एवज में 8.54 करोड़ रुपए शेल कंपनियों के माध्यम से जुटाए गए।
  • 2023 और अब तक 2005 किग्रा ड्रग्स सप्लाई के एवज में स्थानीय गिरोहों ने हवाला और क्रिप्टोकरंसी के जरिए 30.83 करोड़ रुपए की राशि को सफेद धन में बदला गया।
  • सूत्रों के मुताबिक पंजाब की आप सरकार में पुलिस के एक बड़े हिस्से को तस्करों के साथ गठजोड़ में शामिल पाया गया है, जो कानून प्रवर्तन प्रयासों की कमजोरी बना है। यही वजह है कि संदिग्ध 10 हजार पुलिस कर्मियों का सीमावर्ती जिलों से ट्रांसफर किया गया है।
                                        ड्रग बेचती लड़की 

वर्ष     कौनसा ड्रग्स          ड्रग्स मात्रा     कीमत

2020  हेरोइन, गांजा, एमडीएम  1707 किलो    403 करोड़
2021  हेरोइन, गांजा               1686 किलो    303 करोड़
2022  हेरोइन, गांजा               1821 किलो    236 करोड़
2023  हेरोइन, गांजा               1548 किलो    209 करोड़
2024  हेरोइन, गांजा               2400 किलो    840 करोड़