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इस्लामी उम्माह के नाम पर भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे इस्लामी कट्टरपंथी, हैदराबाद के अडानी-एलबिट प्लांट की जानकारियाँ की सार्वजनिक: दुश्मन मुल्कों तक पहुँचा रहे डिफेंस सीक्रेट

    भारतीय इस्लामिस्ट हैदराबाद में अडानी-एलबिट JV की गलत तस्वीर पेश कर रहे (साभार- TNM, एलबिट सिस्टम्स )
इस्लामिस्टों की वफादारी दूसरे देशों और नेताओं के लिए एक्सपोर्ट की जाती है। यह वफादारी अक्सर धर्म के आधार पर देशों और नेताओं के लिए बिना किसी शर्म के सपोर्ट और एकजुटता दिखाने के लिए दिखती है। इसके बदले भले ही भारत की विदेश नीति और नेशनल सिक्योरिटी को नुकसान उठाना पड़े।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की इजरायली हमलों में हत्या पर आँसू बहाने वाले ये लोग अब अपनी इजरायल विरोधी भडास को भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर आक्रमण कर निकाल रहे हैं। हैदराबाद में भारत-इजरायल जॉइंट अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया ड्रोन समेत डिफेंस से जुड़े कई हथियार बनाती है। इस पर ये लोग अब हमलावर हैं।

भारत के खिलाफ नफरत फैलाने के दौरान ये भूल जाते हैं कि वे भारत में रहते हैं और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग उनके अपने देश को बाहरी खतरों से सुरक्षा मुहैया कराती है।

भारतीय इस्लामिस्ट हैदराबाद में अडानी-एलबिट जॉइंट वेंचर की खतरनाक रूप से तोड़-मरोड़कर तस्वीर पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट पटे पड़े हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत किस तरह ईरान के खिलाफ इजरायल को हथियार, खासकर हर्मीस 900 UAV ड्रोन एक्सपोर्ट कर रहा है।

वे इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते झगड़े के बीच भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। बताया जा रहा है कि अडानी-एलबिट जॉइंट वेंचर की हैदराबाद फैक्ट्री में बनने वाली ड्रोन का इस्तेमाल इजरायल हमले में कर रहा है। पहले इसका इस्तेमाल गाजा में हुआ और अब ईरान में हो रहा है।

इस्लामिस्ट पोस्ट लिख रहे हैं और इमोशनल वीडियो बना रहे हैं, जिनमें अक्सर अडानी-एलबिट ज्वाइंट वेंचर की हैदराबाद फैक्ट्री की सही लोकेशन की डिटेल्स होती हैं। ऐसी ही एक पोस्ट में, मुशीर खान नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया कि इजरायल पिछले 11 सालों से भारत में ड्रोन और मिसाइल बना रहा है और इन ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल पहले इजराइल के फिलिस्तीन के खिलाफ युद्ध में किया गया था और अब ईरान के खिलाफ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “किसी को यह पसंद नहीं आता, जब आपके पड़ोस में किसी दूसरे देश के लिए हथियार बनाने वाली फैक्ट्री हो।”  

अनीस अहमद नाम के एक यूजर ने X पर यही वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “अगर पिछले 11 सालों से गौतम अडानी और इजरायल हैदराबाद में ड्रोन-मिसाइल बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं… और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल गाजा पट्टी में नरसंहार और ईरान के खिलाफ किया जा रहा है… तो सवाल यह है कि एक नाजायज देश के साथ पार्टनरशिप करके दुनिया को क्या मैसेज दिया जा रहा है? असदुद्दीन ओवैसी साहब और राहुल गाँधी जी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? क्या यह सिर्फ एक अफवाह है… या एक बड़ा सच है जिसे दबाया जा रहा है?”

एक आदिल सिद्दीकी ने भी मुशीर खान का वीडियो शेयर करते हुए इस गलत दावे को आगे बढ़ाया कि इजरायल भारत में मिसाइल और ड्रोन बना रहा है, ताकि गाजा और ईरान को निशाना बनाया जा सके।

कविश अजीज, जो खुद को पत्रकार कहता है और एक घोर कट्टरपंथी है। उसने दावा किया कि इजरायल भारत में हथियार बना रहा है, जिनका इस्तेमाल फिलिस्तीन के बाद ईरान में किया जा रहा है।

अजीज ने 9 मार्च 2026 के पोस्ट में लिखा, “क्या आप जानते हैं??? इज़राइल पिछले 11 सालों से हैदराबाद में मिसाइल और ड्रोन बना रहा है। अडानी डिफेंस ने 2016 में इजरायल के एल्बिट सिस्टम्स के साथ मिलकर हर्मीस 900 ड्रोन बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर बनाया था। ये वो ड्रोन हैं जिनका इस्तेमाल फिलिस्तीन युद्ध में किया गया था और अब ईरान युद्ध में किया जा रहा है। अडानी डिफेंस इजरायली हथियार इंडस्ट्री के साथ मिलकर Tavor TAR-21, X-95 Tavor, नेगेव लाइट मशीन गन, गैलिल ACE असॉल्ट राइफ़ल, गैलिल DMR, और मसाडा पिस्टल जैसे छोटे हथियार भी बनाती है। 2020 में भारतीय सेना के लिए 16,479 Negev NG-7 LMGs के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था।”

क्या भारत ने फिलिस्तीन और ईरान के खिलाफ इजरायल को अडानी-एलबिट के बनाए ड्रोन और मिसाइल सप्लाई किए? इन इस्लामिस्टों की सोच को समझने से पहले, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे मामलों को भी इस्लामिक उम्माह के नजरिए से देखते हैं, उनके बारे में कुछ बातें साफ करना जरूरी है।हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी जरूरी नहीं कि मिसाइल ही बनाती हो।

2016 में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इजरायली डिफेंस मैन्युफैक्चरर एलबिट सिस्टम्स ने भारत में हर्मीस 900 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस अनमैन्ड एरियल व्हीकल बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर, अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड बनाया था। 2018 में अडानी एलबिट JV ने तेलंगाना के हैदराबाद में अपनी पहली मानवरहित UAV मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी खोली। JV द्वारा भारत में बनाए गए हर्मीस 900 के वर्शन को दृष्टि 10 कहा जाता है। हालाँकि भारतीय सेना कंपनी की मुख्य कस्टमर है, लेकिन यह ड्रोन एक्सपोर्ट करने के लिए भी आजाद है।

यह याद रखना चाहिए कि 2024 में, भारतीय इस्लामो-लेफ्टिस्ट ग्रुप इस बात से नाराज था कि भारत ने हैदराबाद अडानी-एलबिट फैसिलिटी में बने 20 हर्मीस 900 ड्रोन इजरायल को सप्लाई किए थे। हालाँकि, ये भारत के पूरे डिफेंस इकोसिस्टम का बहुत छोटा हिस्सा था। अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री मुख्य रूप से भारतीय डिफेंस जरूरतों को पूरा करती है, इजरायल की नहीं।

ये ड्रोन खास तौर पर भारत की सुरक्षा कर रहे हैं, जहाँ ये इस्लामिस्ट रहते हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए संयंत्र बनाया गया है।

भारत को इजरायल के लिए एक बड़े हथियार एक्सपोर्टर के तौर पर दिखाना असलियत से बिल्कुल अलग है। भारत पहले फिलिस्तीन और अब ईरान के खिलाफ इजरायल को हथियार दे रहा है, ये कहना बिलकुल गलत है। भारत इजरायल से सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है, जो इजरायल के कुल डिफेंस एक्सपोर्ट का 34% है। इजरायल ने हाल के सालों में भारत को बराक-8 मिसाइलें और हेरॉन ड्रोन सप्लाई किए हैं।

गाजा युद्ध के वक्त भारत ने साफ तौर पर कहा था कि वह गाजा में इस्तेमाल के लिए इजराइल को हथियार या गोला-बारूद सप्लाई नहीं करेगा। सभी एक्सपोर्ट एक एंड-यूजर एग्रीमेंट के तहत होंगे। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने पहले ही तय कर दिया था कि हर्मीस 900 ड्रोन निगरानी और टोही मिशन के लिए बनाए गए थे और इन्हें हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

ईरान-इजरायल युद्ध पर वापस आते हैं, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि भारत ने ईरान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए इजरायल को हर्मीस 900 ड्रोन या कोई भी ‘मिसाइल’ एक्सपोर्ट की है। यह पूरा दावा कि हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ईरान के खिलाफ इजरायल के युद्ध के लिए ड्रोन बना रही है, पूरी तरह से एक प्रोपेगैंडा है और देश को जनता को गुमराह करने वाला है।

हर्मीस 900 एक इजरायली ड्रोन है, और इजरायली डिफेंस फोर्स पहले से ही बड़ी संख्या में हर्मीस 900 ड्रोन और उनके पुराने वर्जन हर्मीस 450 ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं। हर्मीस असल में दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मिलिट्री ड्रोन में से एक है। कई देशों ने इसे अपनी फोर्स के लिए खरीदा है। सिर्फ इसलिए कि हैदराबाद अडानी-एलबिट फैसिलिटी हर्मीस 900 ड्रोन बनाती है, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ईरान में लड़ाई में इस्तेमाल के लिए इन ड्रोन को इजरायल को एक्सपोर्ट कर रहा है।

कट्टरपंथी सोच वाले मुशीर खान ने ईरान के खिलाफ अपने हमले में इजरायल द्वारा हर्मीस 900 सर्विलांस ड्रोन का इस्तेमाल करने के बारे में अपने सवाल पर ChatGPT के जवाब पर भरोसा किया। लेकिन, चैटबॉट में कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि ईरान विरोधी ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन भारत में बने हैं। यह साफ है कि इजरायल लोकल बने हर्मीस 900 UAVs का इस्तेमाल कर रहा है। फिर भी मुशीर खान और दूसरे इस्लामी कट्टरपंथी झूठी और डरावनी स्टोरी बनाकर सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं, ये पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना रवैया है। इसमें साजिश की बू आती है क्योंकि इस दौरान बड़ी चालाकी से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

भारत की सोच संतुलित रहा है, चाहे वह इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध हो या ईरान और इजरायल-US के बीच चल रहा युद्ध। मोदी सरकार ने इजरायल के साथ डिफेंस टेक पार्टनरशिप के जरिए, ईरान के साथ एनर्जी और लॉजिस्टिक्स संबंधों के जरिए, और अरब देशों के साथ बड़े आर्थिक संबंधों के जरिए संबंधों को संतुलित बना कर रखा है। भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके उन देशों के साथ अच्छे संबंध हैं जिनके साथ पुरानी दुश्मनी है या जो युद्ध में हैं, चाहे वह रूस-यूक्रेन हो, इजरायल-फिलिस्तीन हो, थाईलैंड-कंबोडिया हो, और इजरायल-ईरान हो या ईरान-गल्फ देश हों।

हालाँकि हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफ़ेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की लोकेशन सीक्रेट नहीं है, लेकिन मैप इमेज को हाईलाइट करना, हमला करने के लिए उकसाने जैसा है।

भारत और इजरायल के बीच अडानी-एलबिट डिफ़ेंस मैन्युफ़ैक्चरिंग जॉइंट वेंचर को ईरान के साथ किसी तरह का ‘धोखा’ बताना बेबुनियाद, बेईमानी भरा और असल में भारतीय इस्लामिस्टों द्वारा भारत के साथ धोखा है। भारतीय इस्लामिस्ट जो प्रोपेगैंडा चला रहे हैं, वह एक कुत्ते के भोंकने जैसा है, जिसे कम IQ वाली सांप्रदायिक नफरत भड़काने, हैदराबाद में अडानी-एलबिट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को टारगेट बनाने, भारत के अपने डिफेंस सेक्टर को नुकसान पहुँचाने और भारत के खिलाफ देश और दुनिया भर में गुस्सा भड़काने के लिए बनाया गया है।

इस्लामिस्ट भूल जाते हैं कि वे एक सुरक्षित और मजबूत भारत में रह रहे हैं, न कि युद्ध से जूझ रहे गाजा या ईरान में। किसी देश में बने हथियार न सिर्फ उस देश को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि वे जरूरी मिलिट्री लेवरेज और स्ट्रेटेजिक रिलेशन भी खरीदते हैं, जिससे वह देश लड़ाई और डिप्लोमेसी में मजबूत बनता है। भारत में कोई भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, जो भारतीय मिलिट्री को सप्लाई करता है और दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करता है, वह एक जरूरी पिलर है, जो भारत को दुनिया में सुरक्षित और मजबूत बनाए रखता है।

ये इस्लामिस्ट युद्ध में झुलस रहे गाजा और ईरान से दूर भारत में सुरक्षित हैं। ये एक मजबूत और स्थिर भारत में रह रहे है, जिसके अच्छे डिप्लोमैटिक और स्ट्रेटेजिक रिलेशन हैं। इसके बदौलत यहाँ शांति है।

भारत की विदेश और रक्षा नीति उन लोगों की भावनाओं या ‘धार्मिक’ भावनाओं से तय नहीं होती और न ही होनी चाहिए, जो विदेशी नेताओं और देशों को अपने देश और उसके हितों से ज्यादा अहमियत देते हैं।

हैदराबाद में चल रहे भारत-इजरायल जॉइंट वेंचर के खिलाफ भारतीय इस्लामी कैंपेन उस प्रोपेगैंडा कैंपेन जैसा है जो पाकिस्तानी जिहादी फरवरी 2026 के आखिर में ईरान और इजरायल+अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से कर रहे हैं। पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के वीडियो बनाए और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए, जिसमें वे ‘मान रहे’ थे कि भारत ने ईरान के खिलाफ इजराइल की मदद की।

इन झूठे बयानों को ईरान के खिलाफ भारत का ‘खुला धोखा’ बताया, ताकि भारत के खिलाफ दुनिया भर में नफरत फैलाई जा सके। ये लोग यह साबित करने में लगे हैं कि भारत ने ईरान को धोखा दिया। इसके लिए झूठ प्रपंच और प्रोपेगेंडा सबकुछ फैला रहे हैं। यह तब भी फैलाई जा रही है, जब भारत ने कम से कम तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों को पनाह देने की पेशकश की, और ईरान ने नई दिल्ली को धन्यवाद भी दिया।

भारतीय इस्लामिस्ट भारत से नफरत करने वाले पाकिस्तानी जिहादियों से अलग नहीं हैं। उनका बर्ताव असल में ईरान और फिलिस्तीन के साथ ‘इस्लामिक उम्मा सॉलिडैरिटी’, मोदी-विरोधी झुकाव, दंगा भड़काने की मंशा रखने वाले हैं, वे अपने देश के हितों को भूल जाते हैं। इस्लामिस्टों को पक्का पता है कि मोदी सरकार को ‘प्रो-इजरायल’ दिखाने से वे अपने आप ‘एंटी-मुस्लिम’ लगेंगे। चल रहे प्रोपेगैंडा का असली मकसद सिर्फ भारत की डिफस मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ नफरत पैदा करने तक ही सीमित नहीं लगता, बल्कि देश में अशांति फैलाना भी इसका मकसद है।

यह देखा गया कि कैसे, इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के मारे जाने की खबरें आने के बाद, लखनऊ, जम्मू और कश्मीर, कारगिल और दूसरे इलाकों में शिया मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई लोगों ने तो युद्ध से जूझ रहे ईरान जाकर खामेनेई के लिए इजरायल और अमेरिका से लड़ने की इच्छा भी जताई। इनमें से ज्यादातर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की कभी निंदा नहीं की। भारत की आधिकारिक विदेश नीति के खिलाफ जाकर भी विदेशी नेताओं और देशों को इस तरह का धर्म के आधार पर सपोर्ट करना खतरनाक और देशद्रोह जैसा है।

हालाँकि बातें अलग-अलग है। लेकिन, 2022 में नूपुर शर्मा के ‘ईशनिंदा’ वाले मामले में भी ऐसी ही कोहराम मचाया गया था। इन्हीं इस्लामिस्ट लोगों ने कुरान की एक बात कोट करने पर BJP की पूर्व प्रवक्ता के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग की थी। कुछ ही समय में देश भर में दंगाई कट्टरपंथी भीड़ ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। ये गुस्सा खाड़ी देशों तक फैल गया। ऐसा लगता है कि नूपुर शर्मा वाले मामले की तरह ही कट्टरपंथी अब अडानी-एलबिट जॉइंट डिफेंस वेंचर के पीछे पड़ गए हैं और हैदराबाद फैक्ट्री के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग कर रहे हैं।

आखिर ‘हिंदुस्तान’ में हिंदू कब तक होगा इस्लामी आतंक का शिकार? 34 सालों में 36+ हमले… अमरनाथ यात्रा बार-बार निशाने पर

भारत हिन्दुओं को में संगीनों के साये में अपने त्यौहार मनाने की आदत पड़ गयी है। कहीं शोभा यात्राओं पर पत्थरबाज़ी, पेट्रोल बम फेंकना आदि बहाना ये कि मस्जिद के पास या मुस्लिम मौहल्ले के पास से DJ बजाते निकल रहे थे, तो यह यह पूछने वाला नहीं कि आखिर एकदम इतने पत्थर कहाँ से आ गए? ये उपद्रवी कोई और नहीं आतंकियों के sleeper cell है, इन पर भी उसी तरह कानूनी कार्यवाही होनी जैसी आतंकियों के साथ होती है। दूसरे आज कल एक और फैशन चल गया है नकाबपोश, बच्चो और महिलाओं को आगे करना आदि। हिन्दू नाम रख हिन्दू लड़कियों को फंसाना। कोर्ट, राज्य और केंद्र सरकारों को इस गंभीर मसले को संज्ञान में लेना चाहिए।          

हिमालय की गोद में बसा अमरनाथ धाम एक बार फिर श्रद्धालुओं के जयकारों से गूँजने को तैयार है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अनुसार, इस बार यात्रा 3 जुलाई 2025 से शुरू होकर 9 अगस्त 2025 तक चलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष 5 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु ‘बाबा बर्फानी’ के दर्शन के लिए पहुँचेंगे।

इस बीच वर्ष 2025 की अमरनाथ यात्रा की तैयारियों ने रफ़्तार पकड़ ली है और प्रशासन सुरक्षा, सुविधा और श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर हर मोर्चे पर मुस्तैद दिखाई दे रहा है। हाल ही हुए पहलगाम आतंकी हमले के कारण इस यात्रा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

अमरनाथ यात्रा के सुरक्षा इंतजाम

कहते हैं जब आस्था पर्वतों से टकराती है, तो वह अमर बन जाती है। श्री अमरनाथ यात्रा न सिर्फ धार्मिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और भक्ति भावना की जीवंत मिसाल भी है, इसलिए देशभर से श्रद्धालु ‘बाबा बर्फानी’ के दर्शन को उत्साहित हैं और प्रशासन उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी कर रहा है।

दरअसल, अमरनाथ यात्रा के लिए दो रास्तों से होते हुए यात्री गुफा तक जाते हैं, जिसमें एक रास्ता पहलगाम मार्ग का है जो 48 किलोमीटर लंबा और आसान है, मगर कुछ दिनों पहले ही वहाँ आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई। वहीं दूसरा, बालटाल मार्ग है जो 14 किलोमीटर छोटा लेकिन ज्यादा कठिन है। इस हमले के बाद सरकार ने यात्रा की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में यात्रा कर सकें।

इसी क्रम में, इस साल 38 दिन की इस यात्रा में सबसे ज्यादा सुरक्षाकर्मी, श्रद्धालुओं की सुरक्षा में तैनात किए जाएँगे। लगभग 50 हजार। इनमें जम्मू कश्मीर पुलिस, CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB जैसी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हैं। इसके अलावा जगह-जगह बम स्क्वॉड भी होगा और यात्रा पर निगरानी केवल सीसीटीवी कैमरों से नहीं, बल्कि ड्रोन समेत AI तकनीक आदि से रखी जाएगी। वहीं, जब श्रद्धालुओं का काफिला जाएगा तो नेशनल हाईवे की ओर जाने वाले रास्ते भी ब्लॉक होंगे। हर काफिले पर जैमर लगा होगा। सीआरपीएफ जवानों के हाथ में सैटेलाइट फोन भी होंगे। इतना ही नहीं, यात्रियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी वाली आईडी दी जाएगी जो उनके साथ काफिले पर भी होग और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।

कुल मिलाकर, इस बार अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए सरकार ने हर जरूरी कदम उठाए हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी डर के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।

अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमलों का इतिहास

अमरनाथ यात्रा 1990 से ही इस्लामिक आतंकियों के निशाने पर रही है। 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 32 साल में यात्रा के बीच करीबन 36 बार आतंकी हमले हुए हैं। सबसे पहला हमला 1993 में हुआ था और इसके बाद लगातार चार सालों तक, यानी 1996 तक, आतंकियों ने हर साल लगतार हमले किए। सबसे बड़ा हमला साल 2000 में हुआ।

उस वक्त लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पहलगाम बेस कैंप पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई और करीब 60 लोग घायल हो गए। इसके बाद 2001 में फिर हमला हुआ। इस बार शेशनाग झील के पास यात्रियों के कैंप पर ग्रेनेड फेंके गए, जिसमें 12 लोगों की जान गई और 15 लोग घायल हुए।

2002 में भी ग्रेनेड हमला हुआ और 2006 में अमरनाथ यात्रियों की बस को निशाना बनाया गया। फिर 2017 में एक बार फिर हमला हुआ, आतंकियों ने यात्रियों की बस पर फायरिंग कर दी, जिसमें 7 लोगों की मौत हुई और 32 लोग घायल हो गए। इसके बाद से सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत हो गई कि पिछले 6 सालों में (2017 के बाद से) कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। लेकिन अब, जब यात्रा शुरू होने में सिर्फ दो महीने बचे हैं, पहलगाम आतंकी हमले ने फिर से कश्मीर घाटी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है।

क्यों है हिंदुओं की आस्था पर इतना खतरा?

गौरतलब है कि हिंदुओं की आस्था पर हमलों की कहानी कोई अब की नहीं है। सालों से होते आए हमलों से ये बात तो साफ है कि इस्लामी आतंकवादियों को केवल हिंदू धार्मिक स्थलों और यात्राओं से समस्या नहीं है, बल्कि उन्हें हिंदुओं से ही दिक्त है। यही वजह है कि कभी वो वैष्णो देवी गए श्रद्धालुओं को अपना निशाना बनाते हैं तो कभी पहलगाम घूमने गए पर्यटकों को।
इनका प्रयास हिंदुओं के मन में खौफ को जगा कर उन्हें मानसिक तौर पर कमजोर करना है ताकि ऐसी यात्रा कभी सफल नए हो सकें, जबकि हैरान कर देने वाली बात ये है कि कभी कोई मुस्लिम त्योहार या नमाज होती है, तो क्या हमने कभी सुना है कि वहाँ आतंकी हमले हुए हों? शायद नहीं।
हमारे देश में मस्जिदों को सुरक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन मंदिरों और तीर्थ यात्राओं को किले की तरह सुरक्षा देनी पड़ती है। इससे हम ये समझ पाते है कि अपने ही देश में हिंदू असुरक्षित हैं। भारत में हिंदू बहुसंख्यक जरूर हैं, लेकिन इसके बावजूद अपनी आस्था को लेकर उन्हें बार-बार सावधानी बरतनी पड़ती है। यह स्थिति तब और विचलित करती है जब यह देश ‘हिंदुस्तान’ कहलाता है, मगर हिंदू ही अपने त्योहारों, मंदिरों और यात्राओं पर डर के साए में रहते हैं।
ये केवल अमरनाथ यात्रा तक सीमित नहीं है। काशी, अयोध्या, मथुरा जैसे स्थानों पर भी बार-बार विवाद और विरोध खड़ा किया जाता है। अगर कोई हिंदू मंदिर के लिए आवाज उठाए, तो उसे ‘कट्टरपंथी’  कहा जाता है, लेकिन कोई मजहबी संगठन खुलेआम धमकी दे, तो उसे ‘अल्पसंख्यकों का अधिकार’ बताया जाता है।
ये समस्या सिर्फ सीमा पार से फैलाए जा रहे आतंकवाद की नहीं है, बल्कि देश के भीतर पनप पही एक कट्टरपंथी मानसिकता की है, जो हिंदुओं की आस्था को बार-बार नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। इस मानसिकता वाले लोगों को हिंदुओं के पूजा-पाठ, मंदिर, और तीर्थ यात्राओं से तकलीफ होती है। ये खुलेआम कहते हैं कि अगर इनके इलाके में मंदिर बना तो उसे उन्हें जलाना या तोड़ना पड़ेगा। ये लोग कमाते तो भारत में है मगर जब मौका मिलता है तो मजहब परस्ती दिखाते हुए पाकिस्तान के प्रति अपना प्रेम जाहिर करते हैं।

पंजाब : भगवंत मान की AAP सरकार के बाद बढ़ी भारत में ड्रोन से अरबों की ड्रग्स की सप्लाई, Pakistan लश्कर, जैश और डी कंपनी की भी ले रहा मदद


आर्थिक कंगाली और तंगहाली के मुहाने पर खड़ा पाकिस्तान अपनी ऐसे बदहाली के बावजूद नापाक इरादों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती भारतीय राज्यों में ड्रोन से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। ताकि भारत के युवाओं को नशे की लत लगाई जा सके। पहले कांग्रेस और फिर पंजाब में आप की मान सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान की ओर से भारत में ड्रोन के जरिए ड्रग्स भेजने का अभियान और तेज हुआ है। चार साल में पंजाब के सीमावर्ती गांवों में पकड़े गए 391 ड्रोन पाकिस्तान से नार्को टेरर अभियान के तहत लॉन्च हुए हैं। हैरानी की बात है कि पाकिस्तान के जहरीले इरादों में कुख्यात तस्कर, आतंकी सरगना और संगठन शामिल हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों को इन्वेस्टिगेशन के दौरान कुछ प्रमुख तस्करों और संगठनों के नाम जांच में मिले हैं। जो भारत में ड्रग्स भेजकर इसकी अवैध कमाई को हवाला के जरिए नेपाल और चीन में जुटाते हैं। इसके बाद पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए शेल कंपनियों को पैसे ट्रांसफर करते हैं।

पंजाब में भगवंत मान सरकार के बाद ड्रग्स तस्करी और तेजी से बढ़ी
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से सीमा पार से ड्रग्स का आना बेहद आम हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय किसान बताते हैं कि “ड्रग्स का बहुत अच्छे से संचालन किया जा रहा है, क्योंकि जो लोग इससे जुड़े हुए हैं, उन्हें वो इलाके पता हैं जहां सीमा के उस पार से ड्रग्स को फेंकना है।” किसानों या मजदूरों को बस उन पैकेटों को अपने घर ले जाना होता है। एक बार जब ये उनकी सीमा में पहुंच गए तो भारतीय कुरियर या ‘पांधी’, जैसा कि स्थानीय रूप से इन्हें जाना जाता है, इन्हें उनके घरों से ले जाते हैं। वो कहते हैं कि ये ‘पांधी’ ड्रग्स के इन पैकेटों को पास के शहरों में पहले से तय जगहों पर ले जाते हैं जहां दूसरा कुरियर वाला आता है। वहां से इसे बेचने वालों तक ले जाया जाता है। फिर वो इसे वितरकों तक पहुंचाते हैं और वहां से यह ग्राहकों तक पहुंचता है। सीमा पर गुप्तचरी में लगे एक अधिकारी के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को कमीशन मिलता है। इन्हें इसके सरगना या इस धंधे शामिल अन्य लोगों की कोई जानकारी नहीं होती और यही कारण है कि ड्रग्स के सरगना को पकड़ना आसान नहीं है।

पाकिस्तान से ड्रग्स की डिलीवरी लेकर आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े
इसका खुलासा सुरक्षा बलों के एक्शन में साफ नजर आता है। पिछले चार साल में ही पाकिस्तान से आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े हैं। 2020 से 2023 तक 266 और 2024 के शुरुआती 8 महीनों में ऐसे 125 ड्रोन बीएसएफ ने पकड़े हैं, जिनमें 2023 तक तीन सालों में 1500 किग्रा हेरोइन भेजी गई। 2024 में 2400 किग्रा से ज्यादा का हेरोइन और गांजा पकड़ा जा चुका है, जो बताता है कि नार्को टेरर कितनी तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान ड्रोन से ड्रग्स भेज रहा है। बीएसएफ ने 840 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी है। ड्रोन के जरिए तस्करी में सबसे पहले नाम पंजाब का है। पंजाब राज्य पाकिस्तान के बॉर्डर से जुड़ा है। जैसा की सबको मालूम है कि अफगानिस्तान में अफीम की खेती की जाती है। अफगानिस्तान के रास्ते अफीम, गांजा और हेरोइन जैसे अन्य नशीले पदार्थ पाकिस्तान आते हैं। इसके बाद बॉर्डर में ड्रोन के सहारे इसे पंजाब पहुंचाया जाता है। यहां पर ड्रग्स के गिरोह के बड़े-बड़े सरगना इस अवैध अफीम, कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों को दिल्ली समेत पूरे देश में पहुंचाने का काम करते हैं।

साल में ही 40 हजार तस्कर गिरफ्तार, 30 करोड़ रु. बरामद
एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन और ड्रग्स की यह केवल 15-20% ही रिकवरी है। बाकी की ड्रग्स की खेप तस्करी के स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचने की आशंका है। दरअसल, पाक का नरोवाल गुरदासपुर जिले से सटा है। कसूर इलाका फिरोजपुर और सियालकोट व बहावलपुर भारतीय सीमा के पास हैं। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स और हथियार लदे ड्रोन इन्हीं इलाकों से लॉन्च किए जा रहे हैं। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि सितंबर 2024 तक ढाई वर्षों में कुल 2,546 किग्रा हेरोइन, 2,457 किग्रा अफीम, 1,156 क्विंटल पोस्त और 42.9 मिलियन टैबलेट्स, कैप्सूल्स, इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। इन अभियानों में कुल 39,840 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से ड्रग्स तस्करी से अर्जित 30.83 करोड़ की नकदी बरामद की। एनआईए ने खालिस्तानी और पाकिस्तानी आतंकी समूहों के कनेक्शन का पता लगाया है, जो आईएसआई के मार्गदर्शन में एक्टिव रहते हैं।

ड्रग्स की तस्करी में इस्तेमाल हो रहे चार तरह के ड्रोन
1. फिक्स्ड-विंग ड्रोनः अधिकतम दूरी तक उड़ान भरकर बड़ी मात्रा में ड्रग्स लाते हैं।
2. मल्टीरोटर ड्रोनः वर्टिकल उड़ान भरने, छोटे पैकेट लाने और कहीं भी उतरने में सक्षम।
3. हाइब्रिड ड्रोनः फिक्स्ड-विंग और मल्टीरोटर दोनों गुणों को मिलाते हैं और लंबी दूरी तय कर दुर्गम स्थानों पर उड़ान भरते हैं। इन ड्रोन पर चीनी कंपनियों के लेबल लगे मिले हैं।
4. ऑटोनॉमस ड्रोनः ये ड्रोन बिना मानव नियंत्रण के उड़ान में सक्षम हैं। तस्कर इनका उपयोग पूर्व-निर्धारित मार्ग पर करते हैं, जिससे इनकी गतिविधियां छिप जाती हैं।

तस्करी का ‘गोल्डन क्रिसेंट’ से चार साल में बदल गई क्रॉस बॉर्डर स्मगलिंग
अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश है और वहां से ड्रग्स पाक के रास्ते भारत में पहुंचाई जाती हैं। तस्करी के इस नेटवर्क को ‘गोल्डन क्रिसेंट’ कहते हैं, जो अफगानिस्तान, पाक और ईरान से होकर गुजरता है। भारतीय सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सतर्कता चलते चार सालों में पाकिस्तान से ड्रग्स तस्करी का पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है। 2022 में एनआइए ने हरविंदर सिंह को अटारी से गिरफ्तार किया था। अटारी सीमा पर लगभग 100 किग्रा हेरोइन जब्त की गई थी, जो पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए 10 से अधिक में भेजी गई थी। एक स्टडी में सामने आया है कि 2020 में दुनिया में मैक्सिकन तस्करी संगठनों ने अमेरिकी सीमा के पास और पाकिस्तानी ड्रग्स तस्करों ने भारत में ड्रग्स तस्करी के लिए ड्रोन जैसे एडवांस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया।

ड्रग्स की कमाई से आतंकियों की फंडिंग कर रहा है पाकिस्तान
माध्यम लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन सीधे तौर पर अपनी गतिविधियों की फंडिंग के लिए इसे एक बड़ा आर्थिक स्रोत बना चुके हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से जुड़ा एक कुख्यात ड्रग तस्कर हाफिज मुहम्मद अंसार है उसका नाम भारत में ड्रग्स तस्करी में सामने आता रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में सक्रिय मक्की ड्रग कार्टेल भी भारत में ड्रग तस्करी में जुटा हुआ है। स्थानीय अपराधी गिरोहों और शेल कंपनियों के जरिए दूसरे प्रदेशों के नेटवर्क तक ड्रग्स पहुंचाई जाती है। हवाला के अलावा इसकी अवैध कमाई को ट्रांसफर करने के कई तरीके हैं। गैरकानूनी वित्तीय चैनलों से नेपाल व चीन और फिर पाकिस्तान में ट्रांसफर किया जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस पहले चरण में ड्रग्स की अवैध व नकद कमाई को वैध व्यवसायों, बैंक खातों या अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा किया जाता है। नकदी को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते हैं। बड़ी राशि और संदेह से बचने का यह रास्ता ‘स्मर्किंग’ कहलाता है। चीन और नेपाल के कैसीनो के माध्यम से भी इसे वैध किया गया है, जहां बड़ी धनराशि को गेम में वैध जीत से प्राप्त दिखाते हैं। लेयरिंग के दूसरे चरण में पैसा कई जटिल लेन-देन के जरिए घुमाया जाता है ताकि इसके स्त्रोत का पता लगाना मुश्किल हो। नकदी का एक हिस्सा खास तौर पर पंजाब और महाराष्ट्र में टारगेट किलिंग और रंगदारी वसूलने के लिए भी खर्च करने में भी उजागर हुए हैं।

डी कंपनी से लेकर बलूच तस्करों की भी मदद ले रहा है पाकिस्तान
पंजाब में पकड़ी गई ड्रग्स की जड़ें पाकिस्तान के अलावा यूरोप और यूएई में संचालित वैश्विक नेटवकों तक पहुंचती हैं। जसमीत हकीमजादा जैसे प्रमुख व्यक्तियों को नाकों आतंक के संचालक के तौर पर पहचाना गया है, जो स्थानीय युवाओं को इस धंधे और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए प्रलोभन देता है। वे एनआईए के रडार पर हैं। दाऊद इब्राहिम का डी-कंपनी नेटवर्क आतंकी गतिविधियों और ड्रग्स तस्करी में भी शामिल है। पाकिस्तान का एक और कुख्यात ड्रग तस्कर ताहिर महमूद उर्फ ‘चाचा’ भी अफगानिस्तान से हेरोइन को भारत पहुंचाता है। वहीं, बलूचिस्तान में सक्रिय कई तस्कर गुट भी अफगानिस्तान से ड्रग्स को पाकिस्तान के पंजाब और सिंध के जरिए भारत भेजते हैं।

अवैध ड्रग्स सप्लाई से कमाई के उदाहरण…

  • 2020 में 1,212 किग्रा ड्रग्स की भारत में तस्करी का पता चला। जिन तस्करों को पकड़ा, उनसे हवाला के जरिए जुटाए गए 7.21 करोड़ रु. मिले।
  • 2021 में तस्करों ने पंजाब में 1,504 किग्रा ड्रग्स भेजी। हवाला से जुटाए गए 8.54 करोड़ के साथ तस्कर पकड़े गए तो इस बात का खुलासा हुआ।
  • 2022 में 1854 किग्रा ड्रग्स गुप्त नेटवर्क के जरिए सप्लाई की। इसकी एवज में 8.54 करोड़ रुपए शेल कंपनियों के माध्यम से जुटाए गए।
  • 2023 और अब तक 2005 किग्रा ड्रग्स सप्लाई के एवज में स्थानीय गिरोहों ने हवाला और क्रिप्टोकरंसी के जरिए 30.83 करोड़ रुपए की राशि को सफेद धन में बदला गया।
  • सूत्रों के मुताबिक पंजाब की आप सरकार में पुलिस के एक बड़े हिस्से को तस्करों के साथ गठजोड़ में शामिल पाया गया है, जो कानून प्रवर्तन प्रयासों की कमजोरी बना है। यही वजह है कि संदिग्ध 10 हजार पुलिस कर्मियों का सीमावर्ती जिलों से ट्रांसफर किया गया है।
                                        ड्रग बेचती लड़की 

वर्ष     कौनसा ड्रग्स          ड्रग्स मात्रा     कीमत

2020  हेरोइन, गांजा, एमडीएम  1707 किलो    403 करोड़
2021  हेरोइन, गांजा               1686 किलो    303 करोड़
2022  हेरोइन, गांजा               1821 किलो    236 करोड़
2023  हेरोइन, गांजा               1548 किलो    209 करोड़
2024  हेरोइन, गांजा               2400 किलो    840 करोड़