इस्लामी उम्माह के नाम पर भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे इस्लामी कट्टरपंथी, हैदराबाद के अडानी-एलबिट प्लांट की जानकारियाँ की सार्वजनिक: दुश्मन मुल्कों तक पहुँचा रहे डिफेंस सीक्रेट

    भारतीय इस्लामिस्ट हैदराबाद में अडानी-एलबिट JV की गलत तस्वीर पेश कर रहे (साभार- TNM, एलबिट सिस्टम्स )
इस्लामिस्टों की वफादारी दूसरे देशों और नेताओं के लिए एक्सपोर्ट की जाती है। यह वफादारी अक्सर धर्म के आधार पर देशों और नेताओं के लिए बिना किसी शर्म के सपोर्ट और एकजुटता दिखाने के लिए दिखती है। इसके बदले भले ही भारत की विदेश नीति और नेशनल सिक्योरिटी को नुकसान उठाना पड़े।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की इजरायली हमलों में हत्या पर आँसू बहाने वाले ये लोग अब अपनी इजरायल विरोधी भडास को भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर आक्रमण कर निकाल रहे हैं। हैदराबाद में भारत-इजरायल जॉइंट अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया ड्रोन समेत डिफेंस से जुड़े कई हथियार बनाती है। इस पर ये लोग अब हमलावर हैं।

भारत के खिलाफ नफरत फैलाने के दौरान ये भूल जाते हैं कि वे भारत में रहते हैं और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग उनके अपने देश को बाहरी खतरों से सुरक्षा मुहैया कराती है।

भारतीय इस्लामिस्ट हैदराबाद में अडानी-एलबिट जॉइंट वेंचर की खतरनाक रूप से तोड़-मरोड़कर तस्वीर पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट पटे पड़े हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत किस तरह ईरान के खिलाफ इजरायल को हथियार, खासकर हर्मीस 900 UAV ड्रोन एक्सपोर्ट कर रहा है।

वे इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते झगड़े के बीच भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं। बताया जा रहा है कि अडानी-एलबिट जॉइंट वेंचर की हैदराबाद फैक्ट्री में बनने वाली ड्रोन का इस्तेमाल इजरायल हमले में कर रहा है। पहले इसका इस्तेमाल गाजा में हुआ और अब ईरान में हो रहा है।

इस्लामिस्ट पोस्ट लिख रहे हैं और इमोशनल वीडियो बना रहे हैं, जिनमें अक्सर अडानी-एलबिट ज्वाइंट वेंचर की हैदराबाद फैक्ट्री की सही लोकेशन की डिटेल्स होती हैं। ऐसी ही एक पोस्ट में, मुशीर खान नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया कि इजरायल पिछले 11 सालों से भारत में ड्रोन और मिसाइल बना रहा है और इन ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल पहले इजराइल के फिलिस्तीन के खिलाफ युद्ध में किया गया था और अब ईरान के खिलाफ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “किसी को यह पसंद नहीं आता, जब आपके पड़ोस में किसी दूसरे देश के लिए हथियार बनाने वाली फैक्ट्री हो।”  

अनीस अहमद नाम के एक यूजर ने X पर यही वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “अगर पिछले 11 सालों से गौतम अडानी और इजरायल हैदराबाद में ड्रोन-मिसाइल बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं… और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल गाजा पट्टी में नरसंहार और ईरान के खिलाफ किया जा रहा है… तो सवाल यह है कि एक नाजायज देश के साथ पार्टनरशिप करके दुनिया को क्या मैसेज दिया जा रहा है? असदुद्दीन ओवैसी साहब और राहुल गाँधी जी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? क्या यह सिर्फ एक अफवाह है… या एक बड़ा सच है जिसे दबाया जा रहा है?”

एक आदिल सिद्दीकी ने भी मुशीर खान का वीडियो शेयर करते हुए इस गलत दावे को आगे बढ़ाया कि इजरायल भारत में मिसाइल और ड्रोन बना रहा है, ताकि गाजा और ईरान को निशाना बनाया जा सके।

कविश अजीज, जो खुद को पत्रकार कहता है और एक घोर कट्टरपंथी है। उसने दावा किया कि इजरायल भारत में हथियार बना रहा है, जिनका इस्तेमाल फिलिस्तीन के बाद ईरान में किया जा रहा है।

अजीज ने 9 मार्च 2026 के पोस्ट में लिखा, “क्या आप जानते हैं??? इज़राइल पिछले 11 सालों से हैदराबाद में मिसाइल और ड्रोन बना रहा है। अडानी डिफेंस ने 2016 में इजरायल के एल्बिट सिस्टम्स के साथ मिलकर हर्मीस 900 ड्रोन बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर बनाया था। ये वो ड्रोन हैं जिनका इस्तेमाल फिलिस्तीन युद्ध में किया गया था और अब ईरान युद्ध में किया जा रहा है। अडानी डिफेंस इजरायली हथियार इंडस्ट्री के साथ मिलकर Tavor TAR-21, X-95 Tavor, नेगेव लाइट मशीन गन, गैलिल ACE असॉल्ट राइफ़ल, गैलिल DMR, और मसाडा पिस्टल जैसे छोटे हथियार भी बनाती है। 2020 में भारतीय सेना के लिए 16,479 Negev NG-7 LMGs के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था।”

क्या भारत ने फिलिस्तीन और ईरान के खिलाफ इजरायल को अडानी-एलबिट के बनाए ड्रोन और मिसाइल सप्लाई किए? इन इस्लामिस्टों की सोच को समझने से पहले, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे मामलों को भी इस्लामिक उम्माह के नजरिए से देखते हैं, उनके बारे में कुछ बातें साफ करना जरूरी है।हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी जरूरी नहीं कि मिसाइल ही बनाती हो।

2016 में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इजरायली डिफेंस मैन्युफैक्चरर एलबिट सिस्टम्स ने भारत में हर्मीस 900 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस अनमैन्ड एरियल व्हीकल बनाने के लिए एक जॉइंट वेंचर, अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड बनाया था। 2018 में अडानी एलबिट JV ने तेलंगाना के हैदराबाद में अपनी पहली मानवरहित UAV मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी खोली। JV द्वारा भारत में बनाए गए हर्मीस 900 के वर्शन को दृष्टि 10 कहा जाता है। हालाँकि भारतीय सेना कंपनी की मुख्य कस्टमर है, लेकिन यह ड्रोन एक्सपोर्ट करने के लिए भी आजाद है।

यह याद रखना चाहिए कि 2024 में, भारतीय इस्लामो-लेफ्टिस्ट ग्रुप इस बात से नाराज था कि भारत ने हैदराबाद अडानी-एलबिट फैसिलिटी में बने 20 हर्मीस 900 ड्रोन इजरायल को सप्लाई किए थे। हालाँकि, ये भारत के पूरे डिफेंस इकोसिस्टम का बहुत छोटा हिस्सा था। अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री मुख्य रूप से भारतीय डिफेंस जरूरतों को पूरा करती है, इजरायल की नहीं।

ये ड्रोन खास तौर पर भारत की सुरक्षा कर रहे हैं, जहाँ ये इस्लामिस्ट रहते हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए संयंत्र बनाया गया है।

भारत को इजरायल के लिए एक बड़े हथियार एक्सपोर्टर के तौर पर दिखाना असलियत से बिल्कुल अलग है। भारत पहले फिलिस्तीन और अब ईरान के खिलाफ इजरायल को हथियार दे रहा है, ये कहना बिलकुल गलत है। भारत इजरायल से सबसे ज्यादा हथियार खरीदता है, जो इजरायल के कुल डिफेंस एक्सपोर्ट का 34% है। इजरायल ने हाल के सालों में भारत को बराक-8 मिसाइलें और हेरॉन ड्रोन सप्लाई किए हैं।

गाजा युद्ध के वक्त भारत ने साफ तौर पर कहा था कि वह गाजा में इस्तेमाल के लिए इजराइल को हथियार या गोला-बारूद सप्लाई नहीं करेगा। सभी एक्सपोर्ट एक एंड-यूजर एग्रीमेंट के तहत होंगे। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने पहले ही तय कर दिया था कि हर्मीस 900 ड्रोन निगरानी और टोही मिशन के लिए बनाए गए थे और इन्हें हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

ईरान-इजरायल युद्ध पर वापस आते हैं, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि भारत ने ईरान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए इजरायल को हर्मीस 900 ड्रोन या कोई भी ‘मिसाइल’ एक्सपोर्ट की है। यह पूरा दावा कि हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ईरान के खिलाफ इजरायल के युद्ध के लिए ड्रोन बना रही है, पूरी तरह से एक प्रोपेगैंडा है और देश को जनता को गुमराह करने वाला है।

हर्मीस 900 एक इजरायली ड्रोन है, और इजरायली डिफेंस फोर्स पहले से ही बड़ी संख्या में हर्मीस 900 ड्रोन और उनके पुराने वर्जन हर्मीस 450 ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं। हर्मीस असल में दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मिलिट्री ड्रोन में से एक है। कई देशों ने इसे अपनी फोर्स के लिए खरीदा है। सिर्फ इसलिए कि हैदराबाद अडानी-एलबिट फैसिलिटी हर्मीस 900 ड्रोन बनाती है, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ईरान में लड़ाई में इस्तेमाल के लिए इन ड्रोन को इजरायल को एक्सपोर्ट कर रहा है।

कट्टरपंथी सोच वाले मुशीर खान ने ईरान के खिलाफ अपने हमले में इजरायल द्वारा हर्मीस 900 सर्विलांस ड्रोन का इस्तेमाल करने के बारे में अपने सवाल पर ChatGPT के जवाब पर भरोसा किया। लेकिन, चैटबॉट में कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि ईरान विरोधी ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन भारत में बने हैं। यह साफ है कि इजरायल लोकल बने हर्मीस 900 UAVs का इस्तेमाल कर रहा है। फिर भी मुशीर खान और दूसरे इस्लामी कट्टरपंथी झूठी और डरावनी स्टोरी बनाकर सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं, ये पूरी तरह गैरजिम्मेदाराना रवैया है। इसमें साजिश की बू आती है क्योंकि इस दौरान बड़ी चालाकी से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

भारत की सोच संतुलित रहा है, चाहे वह इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध हो या ईरान और इजरायल-US के बीच चल रहा युद्ध। मोदी सरकार ने इजरायल के साथ डिफेंस टेक पार्टनरशिप के जरिए, ईरान के साथ एनर्जी और लॉजिस्टिक्स संबंधों के जरिए, और अरब देशों के साथ बड़े आर्थिक संबंधों के जरिए संबंधों को संतुलित बना कर रखा है। भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके उन देशों के साथ अच्छे संबंध हैं जिनके साथ पुरानी दुश्मनी है या जो युद्ध में हैं, चाहे वह रूस-यूक्रेन हो, इजरायल-फिलिस्तीन हो, थाईलैंड-कंबोडिया हो, और इजरायल-ईरान हो या ईरान-गल्फ देश हों।

हालाँकि हैदराबाद में अडानी-एलबिट डिफ़ेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की लोकेशन सीक्रेट नहीं है, लेकिन मैप इमेज को हाईलाइट करना, हमला करने के लिए उकसाने जैसा है।

भारत और इजरायल के बीच अडानी-एलबिट डिफ़ेंस मैन्युफ़ैक्चरिंग जॉइंट वेंचर को ईरान के साथ किसी तरह का ‘धोखा’ बताना बेबुनियाद, बेईमानी भरा और असल में भारतीय इस्लामिस्टों द्वारा भारत के साथ धोखा है। भारतीय इस्लामिस्ट जो प्रोपेगैंडा चला रहे हैं, वह एक कुत्ते के भोंकने जैसा है, जिसे कम IQ वाली सांप्रदायिक नफरत भड़काने, हैदराबाद में अडानी-एलबिट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी को टारगेट बनाने, भारत के अपने डिफेंस सेक्टर को नुकसान पहुँचाने और भारत के खिलाफ देश और दुनिया भर में गुस्सा भड़काने के लिए बनाया गया है।

इस्लामिस्ट भूल जाते हैं कि वे एक सुरक्षित और मजबूत भारत में रह रहे हैं, न कि युद्ध से जूझ रहे गाजा या ईरान में। किसी देश में बने हथियार न सिर्फ उस देश को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि वे जरूरी मिलिट्री लेवरेज और स्ट्रेटेजिक रिलेशन भी खरीदते हैं, जिससे वह देश लड़ाई और डिप्लोमेसी में मजबूत बनता है। भारत में कोई भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, जो भारतीय मिलिट्री को सप्लाई करता है और दूसरे देशों को एक्सपोर्ट करता है, वह एक जरूरी पिलर है, जो भारत को दुनिया में सुरक्षित और मजबूत बनाए रखता है।

ये इस्लामिस्ट युद्ध में झुलस रहे गाजा और ईरान से दूर भारत में सुरक्षित हैं। ये एक मजबूत और स्थिर भारत में रह रहे है, जिसके अच्छे डिप्लोमैटिक और स्ट्रेटेजिक रिलेशन हैं। इसके बदौलत यहाँ शांति है।

भारत की विदेश और रक्षा नीति उन लोगों की भावनाओं या ‘धार्मिक’ भावनाओं से तय नहीं होती और न ही होनी चाहिए, जो विदेशी नेताओं और देशों को अपने देश और उसके हितों से ज्यादा अहमियत देते हैं।

हैदराबाद में चल रहे भारत-इजरायल जॉइंट वेंचर के खिलाफ भारतीय इस्लामी कैंपेन उस प्रोपेगैंडा कैंपेन जैसा है जो पाकिस्तानी जिहादी फरवरी 2026 के आखिर में ईरान और इजरायल+अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से कर रहे हैं। पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के वीडियो बनाए और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए, जिसमें वे ‘मान रहे’ थे कि भारत ने ईरान के खिलाफ इजराइल की मदद की।

इन झूठे बयानों को ईरान के खिलाफ भारत का ‘खुला धोखा’ बताया, ताकि भारत के खिलाफ दुनिया भर में नफरत फैलाई जा सके। ये लोग यह साबित करने में लगे हैं कि भारत ने ईरान को धोखा दिया। इसके लिए झूठ प्रपंच और प्रोपेगेंडा सबकुछ फैला रहे हैं। यह तब भी फैलाई जा रही है, जब भारत ने कम से कम तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों को पनाह देने की पेशकश की, और ईरान ने नई दिल्ली को धन्यवाद भी दिया।

भारतीय इस्लामिस्ट भारत से नफरत करने वाले पाकिस्तानी जिहादियों से अलग नहीं हैं। उनका बर्ताव असल में ईरान और फिलिस्तीन के साथ ‘इस्लामिक उम्मा सॉलिडैरिटी’, मोदी-विरोधी झुकाव, दंगा भड़काने की मंशा रखने वाले हैं, वे अपने देश के हितों को भूल जाते हैं। इस्लामिस्टों को पक्का पता है कि मोदी सरकार को ‘प्रो-इजरायल’ दिखाने से वे अपने आप ‘एंटी-मुस्लिम’ लगेंगे। चल रहे प्रोपेगैंडा का असली मकसद सिर्फ भारत की डिफस मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ नफरत पैदा करने तक ही सीमित नहीं लगता, बल्कि देश में अशांति फैलाना भी इसका मकसद है।

यह देखा गया कि कैसे, इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के मारे जाने की खबरें आने के बाद, लखनऊ, जम्मू और कश्मीर, कारगिल और दूसरे इलाकों में शिया मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई लोगों ने तो युद्ध से जूझ रहे ईरान जाकर खामेनेई के लिए इजरायल और अमेरिका से लड़ने की इच्छा भी जताई। इनमें से ज्यादातर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की कभी निंदा नहीं की। भारत की आधिकारिक विदेश नीति के खिलाफ जाकर भी विदेशी नेताओं और देशों को इस तरह का धर्म के आधार पर सपोर्ट करना खतरनाक और देशद्रोह जैसा है।

हालाँकि बातें अलग-अलग है। लेकिन, 2022 में नूपुर शर्मा के ‘ईशनिंदा’ वाले मामले में भी ऐसी ही कोहराम मचाया गया था। इन्हीं इस्लामिस्ट लोगों ने कुरान की एक बात कोट करने पर BJP की पूर्व प्रवक्ता के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग की थी। कुछ ही समय में देश भर में दंगाई कट्टरपंथी भीड़ ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। ये गुस्सा खाड़ी देशों तक फैल गया। ऐसा लगता है कि नूपुर शर्मा वाले मामले की तरह ही कट्टरपंथी अब अडानी-एलबिट जॉइंट डिफेंस वेंचर के पीछे पड़ गए हैं और हैदराबाद फैक्ट्री के खिलाफ डॉग-व्हिसलिंग कर रहे हैं।

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