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जर्मनी में भी UK जैसे ग्रूमिंग गैंग: नाबालिग लड़कियों को ड्रग्स के बहाने फँसाकर किया यौन शोषण, कई सीरियाई-पाकिस्तानी गिरफ्तार

                                            जर्मनी में ग्रूमिंग गैंग एक्टिव (फोटो साभार-alamy)
जर्मनी के नूर्नबर्ग में महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण करने और उन्हें ड्रग्स के धँधे में फँसाने के आरोप में दो पाकिस्तानी नागरिकों को जर्मनी की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मिडिल फ्रैंकोनिया पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अब तक कुल छह लोगों को इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें दो पाकिस्तानी और 4 सीरियाई शामिल हैं।

ये लोग नूर्नबर्ग रेलवे स्टेशन के आस-पास के इलाकों में लड़कियों और महिलाओं का भरोसा जीतते थे और फिर उन्हें ड्रग्स की धंधे में धकेल देते थे। ये लोग उनका यौन शोषण भी करते थे और फिर ड्रग्स की आदत लगा कर उनसे ड्रग्स की सप्लाई करवाते थे।

इससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, इनलोगों ने नूर्नबर्ग सेंट्रल स्टेशन के आस-पास लड़कियों और युवतियों का भरोसा जीता और फिर उन्हें नशे की लत में धकेल दिया।

जर्मनी में फलता-फूलता ग्रूमिंग रिंग’ और नशे की चपेट में लड़कियाँ

मई 2026 में गोस्टेनहोफ जिले के एक अपार्टमेंट में पुलिस ने ऐसे ही ग्रूमिंग गैंग के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया। ये दोनों सीरिया के नागरिक हैं। इनकी उम्र मात्र 26 साल और 24 साल है। 26 साल का ग्रूमिंग गैंग का व्यक्ति नाबालिगों को नशीले पदार्थ सप्लाई करता था। उसके अपार्टमेंट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को क्रिस्टल मेथ और कोकीन जैसी चीजें मिलीं। साथ ही करीब 2000 यूरो नकद भी बरामद हुए।

पुलिस रिपोर्ट से पता चलता है कि दूसरा सीरिया का 24 वर्षीय नागरिक बच्चों के खिलाफ यौन शोषण का दोषी पाया गया है। उसे शक के आधार पर हिरासत में लिया गया था। मामले की जाँच करने वाले जज ने दोनों लोगों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया। नूर्नबर्ग सेंट्रल स्टेशन के आस-पास ‘ग्रूमिंग गैंग’ से निपटने के लिए उसका बही खाता निकालने में पुलिस जुट गई है। इसके लिए मई महीने में जाँच आयोग का गठन किया था।

पाकिस्तान, सीरिया, गाजा, सर्बिया के नागरिकों पर पैनी नजर

यह जाँच उन शरणार्थियों पर केन्द्रित है जो पिछले कुछ सालों में सीरिया, पाकिस्तान, सर्बिया और गाजा पट्टी से आए हैं। संदिग्धों की उम्र 18 से 35 साल के बीच है। ये लोग नाबालिगों को गैर-कानूनी तरीके से नशीले पदार्थ सप्लाई करते हैं। इस मामले में कम से कम एक साल जेल की सजा हो सकती है।
जाँच में यौन अपराध भी शामिल हैं, खासकर 14 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों का यौन शोषण और बलात्कार का मामला, जो तेजी से देश में बढ़ा है। जाँचकर्ताओं का मानना है कि पीड़ितों की संख्या शुरुआती अनुमान से अधिक हो सकती है। फिलहाल अधिकारियों ने कितनी लड़कियाँ या महिलाएँ इस गैंग का शिकार बनीं, इसका अंतिम आधिकारिक आँकड़ा जारी नहीं किया है। यूरोप के कई देशों खासकर जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और बेल्जियम में पिछले कुछ सालों से संगठित ग्रूमिंग नेटवर्क सामने आया है। इन मामलों में सामान्य पैटर्न यह पाया गया है कि ये लोग कमजोर, गरीब, असुरक्षित नाबालिगों को पहले विश्वास में लेते हैं, उन्हें प्रेमजाल में फँसाते हैं, फिर नशे, धमकी या भावनात्मक दबाव के जरिए उनका शोषण किया जाता है।

136 करोड़ रूपए के इनामी एल मैंचो की मौत के बाद मेक्सिको में भड़की हिंसा: भारत ने अपने नागरिकों से कहा- अगले आदेश तक घर से न निकलें

                  खूंखार ड्रग तस्कर एल मेंचो की मौत के बाद भड़की हिंसा (साभार: इंडिया टीवी, नवभारत टाइम्स)
मेक्सिको इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में से एक से गुजर रहा है। देश के कई राज्यों में अचानक भड़की हिंसा, आगजनी, गोलीबारी, सड़क जाम और व्यापक दहशत ने आम जनजीवन को लगभग ठप कर दिया है। सार्वजनिक परिवहन से लेकर हवाई सेवाएँ तक प्रभावित हुई हैं। बाजार बंद हैं, स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गई हैं और लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में है मेक्सिको के सबसे कुख्यात ड्रग माफिया एल मेंचो की मौत। एक बड़े सैन्य ऑपरेशन में उसकी मौत के बाद उसके संगठन जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) ने पूरे देश में जवाबी हिंसा छेड़ दी। हालात इतने बिगड़ गए कि भारत, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों को भी अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।

मेक्सिको में अचानक क्यों भड़क उठी हिंसा?

रविवार (22 फरवरी 2026) की देर रात मेक्सिको के पश्चिमी राज्य जालिस्को के छोटे से कस्बे Tapalpa में सेना और सुरक्षा बलों ने एक अत्यंत गोपनीय और बड़े स्तर का ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन का मकसद था CJNG के सरगना एल मेंचो को पकड़ना या मार गिराना।
मुठभेड़ के दौरान एल मेंचो गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत हेलीकॉप्टर से इलाज के लिए मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर फैली, CJNG के लड़ाकों ने बड़े पैमाने पर हिंसक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
कार्टेल के हथियारबंद गुर्गों ने सड़कों पर गाड़ियाँ जला दीं, हाईवे जाम कर दिए, दुकानों और पेट्रोल पंपों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षा बलों पर हमले किए। देखते ही देखते हालात जालिस्को से निकलकर कई अन्य राज्यों तक फैल गए।

कौन था एल मेंचो और दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग लॉर्ड्स में क्यों गिना जाता था?

एल मेंचो का असली नाम नेमेसियो रूबेन ओसेगुएरा सर्वेंटेस था। उसका जन्म 1966 में मेक्सिको के मिचोआकान राज्य के एक गरीब गाँव में हुआ था। बेहतर जिंदगी की तलाश में वह 1980 के दशक में अमेरिका चला गया, लेकिन वहाँ अपराध की दुनिया में फँस गया।
अमेरिका में वह हेरोइन तस्करी के मामलों में पकड़ा गया, जेल गया और बाद में मेक्सिको डिपोर्ट कर दिया गया। स्वदेश लौटने के बाद उसने कुछ समय तक स्थानीय पुलिस में नौकरी की, लेकिन जल्दी ही संगठित अपराध की ओर मुड़ गया।
उसने मिलेनियो कार्टेल के जरिए अपनी पहचान बनाई और फिर 2009 में जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) की स्थापना की। कुछ ही वर्षों में CJNG मेक्सिको का सबसे ताकतवर और हिंसक ड्रग कार्टेल बन गया। यह संगठन अमेरिका और अन्य देशों में फेंटानिल, मेथामफेटामीन, कोकीन और हेरोइन की बड़े पैमाने पर तस्करी करता था।
एल मेंचो अपने अत्यंत क्रूर तरीकों, खुलेआम सैन्य टकराव और भारी हथियारों के इस्तेमाल के लिए कुख्यात था। अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी पर 1.5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था। उस पर अमेरिका में कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और वह दुनिया के सबसे वांछित अपराधियों में शुमार था।

कैसे ढेर हुआ एल मेंचो?

मेक्सिको की सेना, नेशनल गार्ड और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर Tapalpa में यह विशेष ऑपरेशन अंजाम दिया। खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और एल मेंचो के ठिकाने पर छापा मारा। भीषण मुठभेड़ के दौरान एल मेंचो घायल हो गया।
इस कार्रवाई में छह संदिग्ध कार्टेल सदस्य मारे गए, तीन सैनिक घायल हुए और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए, जिनमें रॉकेट लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल थे, जो हेलीकॉप्टर गिराने और बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह करने में सक्षम हैं।
अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को जोआक्विन ‘एल चापो’ गुजमान और इस्माइल जाम्बादा जैसे बड़े ड्रग लॉर्ड्स की गिरफ्तारी के बाद संगठित अपराध पर सबसे बड़ी कार्रवाई बताया।

मौत के बाद बेकाबू हुई हिंसा: कई राज्यों में आगजनी और अराजकता

एल मेंचो की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल गई। जालिस्को, मिचोआकान, गुआनाहुआतो, तमाउलीपास, गुएरेरो और न्यूवो लियोन जैसे राज्यों में हिंसा की खबरें सामने आईं। 20 से ज्यादा सड़कों पर जलती हुई गाड़ियाँ खड़ी कर हाईवे जाम कर दिए गए।
ग्वाडलहारा और पुएर्तो वायार्ता जैसे बड़े शहरों में दुकानें, फार्मेसियाँ और पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए। कई जगहों पर आगजनी की घटनाएँ हुईं और आम लोग जान बचाकर घरों में दुबक गए। पर्यटन केंद्र पुएर्तो वायार्ता में हालात इतने खराब हो गए कि पर्यटकों ने इसे ‘युद्ध जैसे दृश्य’ बताया। हवाई अड्डों पर भगदड़ के माहौल में कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

स्कूल, खेल और उड़ानों पर असर: जनजीवन पूरी तरह ठप

हालात बिगड़ने के चलते कई राज्यों में स्कूल बंद कर दिए गए और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप के तहत होने वाले कुछ आयोजनों को भी स्थगित करना पड़ा। मैक्सिको की घरेलू फुटबॉल लीग के कई मैच टाल दिए गए, महिला लीग और अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली मुकाबले भी रद्द हुए।
अमेरिका और कनाडा की प्रमुख एयरलाइनों ने पुएर्तो वायार्ता और आसपास के इलाकों के लिए उड़ानें निलंबित कर दीं, जिससे हजारों यात्री फँस गए।

भारत की एडवाइजरी: भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत के दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया कि जालिस्को (पुएर्तो वायार्ता, चापाला, ग्वाडलहारा), तमाउलीपास, मिचोआकान, गुएरेरो और न्यूवो लियोन में रह रहे भारतीय नागरिक अगले आदेश तक घर के अंदर ही रहें।
दूतावास ने आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी करते हुए बतायै है कि मेक्सिको में रह रहे भारतीय नागरिक +52 55 4847 7539 इस नंबर कॉल करके संपर्क कर सकते हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

अमेरिका और कनाडा की चेतावनी: ‘शेल्टर इन प्लेस’ का आदेश

भारत के अलावा अमेरिका ने भी अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि प्रभावित राज्यों में रह रहे अमेरिकी नागरिक जहाँ हैं वहीं सुरक्षित स्थान पर रुकें, गैर-जरूरी यात्रा से बचें, कानून व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों से दूरी बनाए रखें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें।
कनाडा सरकार ने भी अपने नागरिकों को खासतौर पर पुएर्तो वायार्ता और ग्वाडलहारा में घरों के अंदर रहने और भीड़भाड़ से दूर रहने की सलाह दी।

अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का बयान

एल मेंचो की मौत के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने लिखा है, वी आर वीनिंग टू मच” “ने वॉशिंगटन की भूमिका पर अटकलें तेज कर दीं। कई लोगों ने इसे इस ऑपरेशन में अमेरिका की सीधी भूमिका से जोड़कर देखा।

हालाँकि मेक्सिको स्थित अमेरिकी दूतावास ने सफाई दी कि यह ऑपरेशन पूरी तरह मेक्सिको के विशेष बलों द्वारा किया गया था और अमेरिका ने केवल खुफिया सहयोग दिया। व्हाइट हाउस ने भी यही कहा कि यह संयुक्त खुफिया समन्वय का परिणाम था, न कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई।

मेक्सिको सरकार की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति ने की शांति की अपील

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम (Claudia Sheinbaum) ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ मिलकर हालात को काबू में करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और जल्द ही हालात सामान्य किए जाएँगे। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि एल मेंचो की मौत संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता है, लेकिन इसके बाद भड़की हिंसा गंभीर चिंता का विषय है।

CJNG का खौफ और आगे की चुनौती

जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे ताकतवर आपराधिक संगठन बन चुका है। भारी हथियार, सैन्य शैली के काफिले और खुलेआम हिंसा इसके प्रमुख हथकंडे रहे हैं। एल मेंचो की मौत से संगठन को बड़ा झटका लगा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंसा और अंदरूनी सत्ता संघर्ष बढ़ सकता है।
एल मेंचो की मौत मेक्सिको के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन इसके बाद भड़की हिंसा ने यह साफ कर दिया है कि ड्रग कार्टेल की जड़ें कितनी गहरी हैं। सड़कों पर जलती गाड़ियाँ, बंद बाजार, रद्द उड़ानें और दहशत का माहौल इस बात का संकेत हैं कि मेक्सिको को शांति बहाल करने के लिए अभी लंबा और कठिन संघर्ष करना होगा।

असम से लेकर म्यांमार सीमा तक 220 बीघा में लगी अफीम की खेती की गई नष्ट : बोले मुख्यमंत्री सरमा- ड्रग्स के बारे में सोचने से पहले पुलिस को याद कर लेना

                      असम पुलिस ने अफीम की खेती को किया नष्ट (साभार: NDTV/X @Goalpara_Police)
असम पुलिस ने राज्य में लगभग 170 बीघे में लगी अफीम की खेती को नष्ट कर दिया। इस ड्रग्स की अनुमानित कीमत 27 करोड़ रुपए है। इसकी जानकारी ग्वालपाड़ा पुलिस और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दी है। वहीं, असम राइफल्स ने मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर लगभग 30 एकड़ (लगभग 50 बीघा) की अवैध अफीम की खेती को नष्ट कर दिया।

असम के सीएम सरमा ने सोशल मीडिया साइट X पर अपने पोस्ट में लिखा, “प्रिय स्थानीय पाब्लो एस्कोबार्स (कोलंबिया का कुख्यात ड्रग माफिया), आपकी योजनाबद्ध उड़ता असम पार्टी को बिगाड़ने के लिए क्षमा करें! क्योंकि ग्वालपाड़ा पुलिस ने जनवरी में चार इलाकों में 27.20 करोड़ रूपए मूल्य की 170 बीघा अफीम की खेती नष्ट कर दी थी। तो अगली बार जब आप ड्रग्स के बारे में सोचें तो सबसे पहले असम पुलिस के बारे में सोचें।”

वहीं, ग्वालपाड़ा पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा, “नशीली दवाओं के खिलाफ अपने अभियान को जारी रखते हुए चुनारी थाने के अंतर्गत सीतलमारी चार में 100 बीघा भूमि पर अवैध अफीम की खेती को एएसपी (मुख्यालय) जीएलपी और ओसी एलपीआर पीएस के नेतृत्व में ग्वालपाड़ा पुलिस टीम ने सीओ लखीपुर, आबकारी निरीक्षक और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में नष्ट कर दिया।”

पिछले सप्ताह 30 जनवरी 2025 को ग्वालपाड़ा पुलिस ने सोनारी सर में 40 बीघा क्षेत्र में अफ़ीम की खेती को नष्ट कर दिया था। ग्वालपाड़ा प्रशासन ने 2021 और 2023 में शियालमारी में बड़े पैमाने पर अफ़ीम की खेती को नष्ट किया था। सर क्षेत्र में अफ़ीम की खेती सबसे पहले 2010 में दरंग ज़िले के मगुरमारी सर में सामने आई थी।

सूत्रों के अनुसार, राज्य के बाहर का एक गिरोह राज्य में सर की दुर्गमता का फायदा उठाकर स्थानीय निवासियों के एक वर्ग के साथ मिलकर अफीम की खेती करता है। यह गिरोह स्थानीय निवासियों को अफीम के बीज और अन्य सामग्री सहित हर चीज की आपूर्ति करता है। दरअसल, सर के इलाकों में रहने वाले लोगों को असल पता ही नहीं है कि अफीम वास्तव में होता क्या है।

द सेंटिनेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सर निवासी अशरफ अली ने कहा, “लोगों को लगता है कि यह फूलों की खेती है। सर के इलाकों के कुछ नेता इसका फायदा उठाकर स्थानीय लोगों को मज़दूर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। अगर ज़िला प्रशासन अफीम की खेती देखने के लिए बाहर से आने वाले रैकेट के लोगों और उन्हें पनाह देने वाले लोगों पर नज़र रखे तो उनके ठिकानों का पता लगाया जा सकता है।”

पंजाब : भगवंत मान की AAP सरकार के बाद बढ़ी भारत में ड्रोन से अरबों की ड्रग्स की सप्लाई, Pakistan लश्कर, जैश और डी कंपनी की भी ले रहा मदद


आर्थिक कंगाली और तंगहाली के मुहाने पर खड़ा पाकिस्तान अपनी ऐसे बदहाली के बावजूद नापाक इरादों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती भारतीय राज्यों में ड्रोन से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। ताकि भारत के युवाओं को नशे की लत लगाई जा सके। पहले कांग्रेस और फिर पंजाब में आप की मान सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान की ओर से भारत में ड्रोन के जरिए ड्रग्स भेजने का अभियान और तेज हुआ है। चार साल में पंजाब के सीमावर्ती गांवों में पकड़े गए 391 ड्रोन पाकिस्तान से नार्को टेरर अभियान के तहत लॉन्च हुए हैं। हैरानी की बात है कि पाकिस्तान के जहरीले इरादों में कुख्यात तस्कर, आतंकी सरगना और संगठन शामिल हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों को इन्वेस्टिगेशन के दौरान कुछ प्रमुख तस्करों और संगठनों के नाम जांच में मिले हैं। जो भारत में ड्रग्स भेजकर इसकी अवैध कमाई को हवाला के जरिए नेपाल और चीन में जुटाते हैं। इसके बाद पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए शेल कंपनियों को पैसे ट्रांसफर करते हैं।

पंजाब में भगवंत मान सरकार के बाद ड्रग्स तस्करी और तेजी से बढ़ी
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से सीमा पार से ड्रग्स का आना बेहद आम हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय किसान बताते हैं कि “ड्रग्स का बहुत अच्छे से संचालन किया जा रहा है, क्योंकि जो लोग इससे जुड़े हुए हैं, उन्हें वो इलाके पता हैं जहां सीमा के उस पार से ड्रग्स को फेंकना है।” किसानों या मजदूरों को बस उन पैकेटों को अपने घर ले जाना होता है। एक बार जब ये उनकी सीमा में पहुंच गए तो भारतीय कुरियर या ‘पांधी’, जैसा कि स्थानीय रूप से इन्हें जाना जाता है, इन्हें उनके घरों से ले जाते हैं। वो कहते हैं कि ये ‘पांधी’ ड्रग्स के इन पैकेटों को पास के शहरों में पहले से तय जगहों पर ले जाते हैं जहां दूसरा कुरियर वाला आता है। वहां से इसे बेचने वालों तक ले जाया जाता है। फिर वो इसे वितरकों तक पहुंचाते हैं और वहां से यह ग्राहकों तक पहुंचता है। सीमा पर गुप्तचरी में लगे एक अधिकारी के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को कमीशन मिलता है। इन्हें इसके सरगना या इस धंधे शामिल अन्य लोगों की कोई जानकारी नहीं होती और यही कारण है कि ड्रग्स के सरगना को पकड़ना आसान नहीं है।

पाकिस्तान से ड्रग्स की डिलीवरी लेकर आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े
इसका खुलासा सुरक्षा बलों के एक्शन में साफ नजर आता है। पिछले चार साल में ही पाकिस्तान से आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े हैं। 2020 से 2023 तक 266 और 2024 के शुरुआती 8 महीनों में ऐसे 125 ड्रोन बीएसएफ ने पकड़े हैं, जिनमें 2023 तक तीन सालों में 1500 किग्रा हेरोइन भेजी गई। 2024 में 2400 किग्रा से ज्यादा का हेरोइन और गांजा पकड़ा जा चुका है, जो बताता है कि नार्को टेरर कितनी तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान ड्रोन से ड्रग्स भेज रहा है। बीएसएफ ने 840 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी है। ड्रोन के जरिए तस्करी में सबसे पहले नाम पंजाब का है। पंजाब राज्य पाकिस्तान के बॉर्डर से जुड़ा है। जैसा की सबको मालूम है कि अफगानिस्तान में अफीम की खेती की जाती है। अफगानिस्तान के रास्ते अफीम, गांजा और हेरोइन जैसे अन्य नशीले पदार्थ पाकिस्तान आते हैं। इसके बाद बॉर्डर में ड्रोन के सहारे इसे पंजाब पहुंचाया जाता है। यहां पर ड्रग्स के गिरोह के बड़े-बड़े सरगना इस अवैध अफीम, कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों को दिल्ली समेत पूरे देश में पहुंचाने का काम करते हैं।

साल में ही 40 हजार तस्कर गिरफ्तार, 30 करोड़ रु. बरामद
एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन और ड्रग्स की यह केवल 15-20% ही रिकवरी है। बाकी की ड्रग्स की खेप तस्करी के स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचने की आशंका है। दरअसल, पाक का नरोवाल गुरदासपुर जिले से सटा है। कसूर इलाका फिरोजपुर और सियालकोट व बहावलपुर भारतीय सीमा के पास हैं। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स और हथियार लदे ड्रोन इन्हीं इलाकों से लॉन्च किए जा रहे हैं। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि सितंबर 2024 तक ढाई वर्षों में कुल 2,546 किग्रा हेरोइन, 2,457 किग्रा अफीम, 1,156 क्विंटल पोस्त और 42.9 मिलियन टैबलेट्स, कैप्सूल्स, इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। इन अभियानों में कुल 39,840 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से ड्रग्स तस्करी से अर्जित 30.83 करोड़ की नकदी बरामद की। एनआईए ने खालिस्तानी और पाकिस्तानी आतंकी समूहों के कनेक्शन का पता लगाया है, जो आईएसआई के मार्गदर्शन में एक्टिव रहते हैं।

ड्रग्स की तस्करी में इस्तेमाल हो रहे चार तरह के ड्रोन
1. फिक्स्ड-विंग ड्रोनः अधिकतम दूरी तक उड़ान भरकर बड़ी मात्रा में ड्रग्स लाते हैं।
2. मल्टीरोटर ड्रोनः वर्टिकल उड़ान भरने, छोटे पैकेट लाने और कहीं भी उतरने में सक्षम।
3. हाइब्रिड ड्रोनः फिक्स्ड-विंग और मल्टीरोटर दोनों गुणों को मिलाते हैं और लंबी दूरी तय कर दुर्गम स्थानों पर उड़ान भरते हैं। इन ड्रोन पर चीनी कंपनियों के लेबल लगे मिले हैं।
4. ऑटोनॉमस ड्रोनः ये ड्रोन बिना मानव नियंत्रण के उड़ान में सक्षम हैं। तस्कर इनका उपयोग पूर्व-निर्धारित मार्ग पर करते हैं, जिससे इनकी गतिविधियां छिप जाती हैं।

तस्करी का ‘गोल्डन क्रिसेंट’ से चार साल में बदल गई क्रॉस बॉर्डर स्मगलिंग
अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश है और वहां से ड्रग्स पाक के रास्ते भारत में पहुंचाई जाती हैं। तस्करी के इस नेटवर्क को ‘गोल्डन क्रिसेंट’ कहते हैं, जो अफगानिस्तान, पाक और ईरान से होकर गुजरता है। भारतीय सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सतर्कता चलते चार सालों में पाकिस्तान से ड्रग्स तस्करी का पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है। 2022 में एनआइए ने हरविंदर सिंह को अटारी से गिरफ्तार किया था। अटारी सीमा पर लगभग 100 किग्रा हेरोइन जब्त की गई थी, जो पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए 10 से अधिक में भेजी गई थी। एक स्टडी में सामने आया है कि 2020 में दुनिया में मैक्सिकन तस्करी संगठनों ने अमेरिकी सीमा के पास और पाकिस्तानी ड्रग्स तस्करों ने भारत में ड्रग्स तस्करी के लिए ड्रोन जैसे एडवांस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया।

ड्रग्स की कमाई से आतंकियों की फंडिंग कर रहा है पाकिस्तान
माध्यम लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन सीधे तौर पर अपनी गतिविधियों की फंडिंग के लिए इसे एक बड़ा आर्थिक स्रोत बना चुके हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से जुड़ा एक कुख्यात ड्रग तस्कर हाफिज मुहम्मद अंसार है उसका नाम भारत में ड्रग्स तस्करी में सामने आता रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में सक्रिय मक्की ड्रग कार्टेल भी भारत में ड्रग तस्करी में जुटा हुआ है। स्थानीय अपराधी गिरोहों और शेल कंपनियों के जरिए दूसरे प्रदेशों के नेटवर्क तक ड्रग्स पहुंचाई जाती है। हवाला के अलावा इसकी अवैध कमाई को ट्रांसफर करने के कई तरीके हैं। गैरकानूनी वित्तीय चैनलों से नेपाल व चीन और फिर पाकिस्तान में ट्रांसफर किया जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस पहले चरण में ड्रग्स की अवैध व नकद कमाई को वैध व्यवसायों, बैंक खातों या अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा किया जाता है। नकदी को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते हैं। बड़ी राशि और संदेह से बचने का यह रास्ता ‘स्मर्किंग’ कहलाता है। चीन और नेपाल के कैसीनो के माध्यम से भी इसे वैध किया गया है, जहां बड़ी धनराशि को गेम में वैध जीत से प्राप्त दिखाते हैं। लेयरिंग के दूसरे चरण में पैसा कई जटिल लेन-देन के जरिए घुमाया जाता है ताकि इसके स्त्रोत का पता लगाना मुश्किल हो। नकदी का एक हिस्सा खास तौर पर पंजाब और महाराष्ट्र में टारगेट किलिंग और रंगदारी वसूलने के लिए भी खर्च करने में भी उजागर हुए हैं।

डी कंपनी से लेकर बलूच तस्करों की भी मदद ले रहा है पाकिस्तान
पंजाब में पकड़ी गई ड्रग्स की जड़ें पाकिस्तान के अलावा यूरोप और यूएई में संचालित वैश्विक नेटवकों तक पहुंचती हैं। जसमीत हकीमजादा जैसे प्रमुख व्यक्तियों को नाकों आतंक के संचालक के तौर पर पहचाना गया है, जो स्थानीय युवाओं को इस धंधे और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए प्रलोभन देता है। वे एनआईए के रडार पर हैं। दाऊद इब्राहिम का डी-कंपनी नेटवर्क आतंकी गतिविधियों और ड्रग्स तस्करी में भी शामिल है। पाकिस्तान का एक और कुख्यात ड्रग तस्कर ताहिर महमूद उर्फ ‘चाचा’ भी अफगानिस्तान से हेरोइन को भारत पहुंचाता है। वहीं, बलूचिस्तान में सक्रिय कई तस्कर गुट भी अफगानिस्तान से ड्रग्स को पाकिस्तान के पंजाब और सिंध के जरिए भारत भेजते हैं।

अवैध ड्रग्स सप्लाई से कमाई के उदाहरण…

  • 2020 में 1,212 किग्रा ड्रग्स की भारत में तस्करी का पता चला। जिन तस्करों को पकड़ा, उनसे हवाला के जरिए जुटाए गए 7.21 करोड़ रु. मिले।
  • 2021 में तस्करों ने पंजाब में 1,504 किग्रा ड्रग्स भेजी। हवाला से जुटाए गए 8.54 करोड़ के साथ तस्कर पकड़े गए तो इस बात का खुलासा हुआ।
  • 2022 में 1854 किग्रा ड्रग्स गुप्त नेटवर्क के जरिए सप्लाई की। इसकी एवज में 8.54 करोड़ रुपए शेल कंपनियों के माध्यम से जुटाए गए।
  • 2023 और अब तक 2005 किग्रा ड्रग्स सप्लाई के एवज में स्थानीय गिरोहों ने हवाला और क्रिप्टोकरंसी के जरिए 30.83 करोड़ रुपए की राशि को सफेद धन में बदला गया।
  • सूत्रों के मुताबिक पंजाब की आप सरकार में पुलिस के एक बड़े हिस्से को तस्करों के साथ गठजोड़ में शामिल पाया गया है, जो कानून प्रवर्तन प्रयासों की कमजोरी बना है। यही वजह है कि संदिग्ध 10 हजार पुलिस कर्मियों का सीमावर्ती जिलों से ट्रांसफर किया गया है।
                                        ड्रग बेचती लड़की 

वर्ष     कौनसा ड्रग्स          ड्रग्स मात्रा     कीमत

2020  हेरोइन, गांजा, एमडीएम  1707 किलो    403 करोड़
2021  हेरोइन, गांजा               1686 किलो    303 करोड़
2022  हेरोइन, गांजा               1821 किलो    236 करोड़
2023  हेरोइन, गांजा               1548 किलो    209 करोड़
2024  हेरोइन, गांजा               2400 किलो    840 करोड़

5600 करोड़ रूपए की कोकीन तस्करी का सरगना कांग्रेस सदस्य, RTI सेल का पूर्व चेयरमैन तुषार गोयल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया : रिपोर्ट में दावा- पहले sex racket भी चलाता था

                              कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा के साथ आरोपित तुषार गोयल (साभार: एनडीटीवी/आजतक)
दिल्ली पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी में 5600 करोड़ रुपए की कोकीन की एक बड़ी खेप को पकड़ा है। इस ड्रग सिंडिकेट का सरगना तुषार गोयल है। तुषार गोयल कांग्रेस का नेता है और वह साल 2022 में दिल्ली प्रदेश 
कांग्रेस की RTI सेल का चेयरमैन रह चुका है। उसने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इसका जिक्र किया है।

सरगना तुषार गोयल के कई कांग्रेस नेताओं के साथ फोटो भी सामने आए हैं। इस बात का खुलासा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की पूछताछ में हुआ है। खुद तुषार गोयल ने स्पेशल सेल की पूछताछ में इसका खुलासा किया है कि वह 2022 में कांग्रेस दिल्ली का RTI सेल प्रमुख था। उसने बताया कि वह साल 2002 में यूथ कांग्रेस का सदस्य बना था।

पुलिस तुषार गोयल के बैकग्राउंड को खंगाल रही है। कहा जा रहा है कि 40 वर्षीय तुषार गोयल ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वह दिल्ली के वसंत विहार में रहता है। उसके पिता दिल्ली में तुषार पब्लिकेशन और ट्यूलिप पब्लिकेशन के मालिक हैं। तुषार ने साल 2008 में शादी की और उसके बाद देह व्यापार का काम शुरू कर दिया और सेक्स रैकेट चलाने लगा।

इसी दौरान तुषार गोयल की मुलाकात दुबई के एक गिरोह से हुई। तभी से वह देह व्यापार के साथ-साथ ड्रग्स के धंधे में जुड़ गया और ड्रग्स की तस्करी करने लगा। दिल्ली पुलिस को अगस्त में इसकी भनक लगी थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस पिछले दो महीने से उस पर और उसके गिरोह पर नजर रख रही है। आखिरकार उसे दबोच लिया गया।

 

                                               तुषार गोयल द्वारा डाला गया RTI (साभार: आजतक)

तुषार गोयल का साथी हिमांशु पहले बाउंसर था। वहीं, तुषार का ड्राइवर औरंगजेब सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के देवरिया का रहने वाला है। चौथा आरोपित भरत जैन ही मुंबई से 15 किलोग्राम कोकीन दिल्ली लाया था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से पहले 15 किलोग्राम कोकिन बरामद की थी। इसके बाद उनकी निशानदेही पर महिपालपुर के गोदाम में छापा मारकर बाकी की ड्रग्स जब्त की गई।

दरअसल, दिल्ली के महिपालपुर में 550 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तुषार गोयल, भरत कुमार जैन, औरंगजेब सिद्दीकी और हिमांशु कुमार शामिल है। लगभग 5600 करोड़ रुपए की कोकीन के तार दुबई से जुड़े हैं। सप्लायर के तौर पर दुबई के एक बड़े कारोबारी का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग्स मुंबई के बंदरगाह तक पहुँचा और वहाँ से इसे दिल्ली लाया गया था। इसे महिपालपुर के गोदाम में रखा गया था। कोकीन के साथ-साथ वहाँ से 40 किलोग्राम गाँजा भी बरामद किया गया है। कहा जा रहा है कि इन ड्रग्स से 50 लाख डोज बनाई जा सकती हैं। इस खेप को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड पहुँचाया जाना था।

त्रिपुरा : कैंपसों में पसरा AIDS, स्कूल-कॉलेज के 828 छात्र HIV पीड़ित, 47 की हो चुकी है मौत: कई संक्रमित दूसरे राज्यों में जाकर भी कर रहे पढ़ाई


भारत के पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा में एचआईवी-एड्स से जुड़ी गंभीर जानकारी सामने आ रही है। त्रिपुरा में हजारों लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इसमें छात्रों की संख्या भी काफी ज्यादा है। हैरानी की बात है कि त्रिपुरा में अब तक HIV-AIDS संक्रमित छात्रों की संख्या 828 तक पहुँच चुकी है, जिसमें 47 छात्रों की जान भी जा चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, त्रिपुरा में साल 1999 से अब तक एड्स के आँकड़ों से पता चला है कि मई 2024 तक राज्यों में एआरटी- एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी केंद्रों में 8,729 लोगों को रजिस्टर्ड किया गया है। इनमें एचआईवी से पीड़ित लोगों की कुल संख्या 5,674 है और इनमें भी 4,570 पुरुष, 1103 महिलाएँ और केवल एक मरीज ट्रांसजेंडर है। लेकिन जो संख्या सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है, वो है छात्रों की।

त्रिपुरा पत्रकार यूनियन, वेब मीडिया फोरम और टीएसएसीएस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वर्कशॉप में टीएसएसीएस के संयुक्त निदेशक ने बताया कि राज्य में 828 छात्रों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। एड्स कंट्रोल सोसायटी ने 828 छात्रों को एचआईवी संक्रमण के लिए रजिस्टर्ड किया है। इनमें से 47 छात्रों की मौत हो चुकी है। टीएसएसीएस ने राज्य के 220 स्कूल, 24 कॉलेज और यूनिवर्सिटी के ऐसे छात्रों की पहचान की है जो नशे के लिए इंजेक्शनों का इस्तेमाल करते हैं।

त्रिपुरा राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के संयुक्त निदेशक ने कहा, “हमने अप्रैल 1999 से राज्य में काम करना शुरू किया है। अब तक बीते 25 वर्षों में हमें छात्रों में 828 मामले एचआईवी-एड्स के मिले हैं। इनमें से 47 छात्रों की मौत हो चुकी है। हालाँकि 572 छात्र अब तक जीवित हैं, जिसमें से बड़ी संख्या में छात्र दूसरे राज्यों में पढ़ाई कर रहे हैं।”

त्रिपुरा में एड्स फैलने के पीछे संक्रमित सुई से नशा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एचआईवी-एड्स से जुड़े ज्यादातर मामलों में बच्चे संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे परिवार जहाँ माता-पिता दोनों सरकारी सेवा में हैं और बच्चों की माँगों को पूरा करने में कोई संकोच नहीं करते। जब तक उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चे ड्रग्स के शिकार हो गए हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
दरअसल, एचआईवी/एड्स एक महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, जिसका नसों में इंजेक्शन लगाकर नशा करने से सीधा संबंध है। ड्रग यूजर्स के बीच इंजेक्शन शेयर करना एचआईवी ट्रांसमिशन का एक प्राइमरी तरीका है, जो ब्लड-टू-ब्लड संपर्क के जरिए से वायरस को फैलाने में मददगार होती है। त्रिपुरा में अधिकतर मामलों में ये चीज कॉमन पाई गई है।

जिस कानून के नियम को लेकर घिरे बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण, सुप्रीम कोर्ट में उसी पर उठा सवाल; ‘पतंजलि’ केस में अब IMA ही फँस गया

अवैध विज्ञापन के मामले में ‘पतंजलि आयुर्वेद’ और ‘दिव्य फार्मेसी’ की तरफ से मंगलवार (7 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में उन अख़बारों को पेश किया गया, जिनमें बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनियों की तरफ से माफ़ीनामा जारी किया गया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो राज्यों की लाइसेंसिंग ऑथोरिटीज और केंद्र सरकार द्वारा भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के संबंध में उठाए जा रहे क़दमों का विश्लेषण करेगी। सुप्रीम कोर्ट इस दौरान अख़बार के उन पन्नों को देख कर संतुष्ट हुआ, जिनके माध्यम से माफ़ीनामा जारी किया गया था।

 इससे पहले कई बार बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत पेशी के दौरान फटकार लगाया गया था। इस दौरान ‘पतंजलि’ की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्होंने IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के अध्यक्ष के बयान को लेकर अप्लीकेशन (IA) दायर कर दिया है। उन्होंने इसे हानि पहुँचाने के उद्देश्य से की गई अपमानजनक टिप्पणी करार दिया। IMA अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एलोपैथिक डॉक्टरों पर टिप्पणी पर सवाल उठाए थे।

मुकुल रोहतगी ने इसे गंभीर मामला बताया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि अगर IMA आरोपों पर जवाब नहीं देता है तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने ध्यान दिलाया कि ये बयान सुनवाई से 1 दिन पहले दिया गया था, ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि अनजान/बेखबर होने के कारण ये टिप्पणी की गई। वहीं भारत सरकार की तरफ से ASG केएम नटराज ने बात रखी। उन्होंने बताया कि ‘ड्रग्स एन्ड कॉस्मेटिक्स रूल्स’ के नियम संख्या 170 को कई उच्च न्यायालयों में चुनौती दी गई है।

उन्होंने बताया कि 2018 में नियम संख्या 170 की अधिसूचना जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ 8-9 याचिकाएँ दायर हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस नियम के तहत कोई कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था, बाद में केरल हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसे दोहराया। उन्होंने इस दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय का वो आदेश भी पढ़ कर सुनाया, जिसमें इस कानून के नियम-170 पर पुनर्विचार के लिए केंद्र सरकार को कहा गया था।

इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि भारत सरकार को इस सलाह का फायदा मिला। वहीं जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पूछा कि केंद्र सरकार को इस पर निर्णय लेने के लिए कहा गया था, फिर भी ये नियम यहाँ पर है। उन्होंने पूछा कि बिना कोई निर्णय लिए बिना आप कड़ी कार्रवाई न करने को कैसे कह सकते हैं? वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि ये एक अच्छा कानून है, जब तक इसे हटाया नहीं जाता, ये लागू है। केंद्र सरकार ने राज्यों को पत्र भेज इसके तहत एक्शन न लेने को कहा था। ASG ने इस कानून पर पुनर्विचार के लिए समय माँगा।


कथित किसान आंदोलन और समर्थक हो रहे बेनकाब : ‘इनके चुतड़ा पर कील गाड़नी चाहिए’: बोले हरियाणा के किसान- पंजाब के लोगों ने हमारे बच्चों को बनाया नशेड़ी

                                    हरियाणा के किसान (फोटो साभार : Youtube/NewsViews)
किसान आंदोलन 1.0 में लाल किले पर चढ़कर हंगामा करने से जनता को मालूम हो गया कि ये किसान नहीं गुंडे हैं, क्योकि कोई किसान ऐसी शर्मनाक गिरी हुई हरकत नहीं कर सकता। और अब चल रहे किसान आंदोलन के नाम पर देश में अराजकता फ़ैलाने की घिनौनी हरकत से ये सभी बेनकाब हो गए हैं, जो शांति के नाम अशांति फैला रहे हैं। इनकी मानसिकता के जगजाहिर होने पर आंदोलनकारी मझधार में फंस चुके हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार इन्हे उकसाने से बाज नहीं आ रही। 

किसान आंदोलन 1.0 से लेकर वर्तमान में चल रहे उपद्रवी आंदोलन को समर्थन देने वाली पार्टियां देश को बताएं कि क्या विश्व में ऐसा उपद्रवी आंदोलन देखा है, जिसमे प्रधानमंत्री के मौत की  नारेबाजी हो? दूसरे शब्दों में कहा जाये कि विपक्ष अपनी विफलता का ढोल पीट रहा है। 


एक तरफ ये तथाकथित किसान कर्जा माफ़ करने को कह रहे हैं, फिर इस जमावड़े में लोगों को देने के लिए रूपए कहाँ से आ रहे और कौन दे रहा है? 

हकीकत यह है कि विपक्ष के पास मोदी के विरुद्ध कोई मुद्दा ही नहीं होने के कारण उपद्रवियों को मैदान में उतार दिया, जो आंदोलन के चलते इसी विपक्ष को कमजोर कर रहा है। वास्तव में केजरीवाल ने पंजाब में सरकार बनाने के लिए किसानों से 22 फसलों पर MSP देने के लिए 5 मिनट में कानून बनाने का झूठा वायदा कर सत्ता हथाई थी, जिसे पूरा करने अपना ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ने की असलियत सामने आ चुकी है। दूसरे, यह आंदोलन चंडीगढ़ तक सीमित रहना था, लेकिन अपने ही बुने जाल में फंसते देख पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों भगवंत सिंह मान और अरविन्द केजरीवाल ने अपनी खाल बचाने इसे दिल्ली की मोड़ दिया। और इसे कांग्रेस सहित अन्य दल भी समर्थन दे रहे हैं। जबकि फरवरी 21 को मल्लिकार्जुन खड़के ने भी कह दिया कि सभी फसलों पर MSP देना संभव नहीं।  

किसान आंदोलन 2.0 चर्चा में है। दरअसल, साल 2020 से साल 2021 के आखिर तक दिल्ली में देश भर के किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। करीब डेढ़ तक चले प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने तीन कानूनों को वापस ले लिया था। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के किसानों ने दिल्ली को लगभग बंधक लिया था। अब उन प्रदर्शनों को दोहराने की कोशिश में पंजाब के किसान फिर से दिल्ली का रूख कर चुके हैं। हरियाणा के बॉर्डर पर पंजाब से आ रहे किसानों को शंभू प्वॉइंट पर रोक लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली में उनके घुसने की कोशिशों को विफल किया जा रहा है। इस बीच, केंद्र सरकार पूरी तरह से सक्रिय है और किसानों से लगातार बातचीत कर रही है। वहीं, 20 फरवरी 2024 को एक यू-ट्यूब चैनल से हरियाणा के किसानों ने किसान आंदोलन 1.0 को लेकर गहरी नाराजगी जताई है।

यूट्यूब चैनल न्यूज व्यूज से बातचीत में हरियाणा के किसानों ने पंजाब के किसानों को लेकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पंजाब से आए लोगों ने हरियाणा के युवाओं को उनकी राह से भटका दिया। उन्होंने उन्हें बहकाया और नशे का आदी बना दिया। किसानों ने बताया, “किसान आंदोलन 1.0 से पहले हरियाणा के युवाओं में ‘चित्ता’ का कोई नशा नहीं था। वो जानते भी नहीं थे कि ये आखिर है क्या चीज? हमारे बच्चे उन प्रदर्शनों के दौरान नसे के आदी बन गए। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?” जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि हेरोइन के नशे को ‘चित्ता’ कहते हैं, जो पंजाब में काफी गहरे तक जड़ें जमा चुका है।

हमें बेवकूफ बनाया

मीडिया से बातचीत करते हुए हरियाणा के किसाों ने कहा कि ये प्रदर्शन सिर्फ आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं। उन किसानों में से एक ने कहा, “उन्हें विदेशों से पैसे मिल रहे हैं। देश विरोधी गतिविधियाँ हो रही हैं। लेकिन हम वो सब फिर से नहीं (जो पिछली बार हुआ-नशे का फैलाव इत्यादि) होने देंगे। उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया। ऐसे में इस बार हम उन्हें समर्थन नहीं दे रहे।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पंजाब में अपने प्रधानमंत्री को खतरे में डाला, लेकिन ऐसा फिर से नहीं होगा।”
हरियाणा के किसानों ने प्रदर्शनकारियों के लगातार दिल्ली जाने की बात पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “सरकार जो कह (सरकार का ऑफर) रही, वो मान नहीं रहे। वो सिर्फ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ की रट लगाए पड़े हैं।” उन्होंने अन्ना आंदोलन के समय को याद करते हुए आगे कहा, “उस समय जो भी प्रदर्शन वाली जगह जा रहे थे, उनकी जाँच हो रही थी। सबकुछ आराम से चल रहा था। मैं गारंटी लेकर कहता हूँ कि शराब और ड्रग्स की सल्पाई रोक दी जाए, फिर देखो 4 दिन में सारे गायब हो जाएँगे।”
इस दौरान जब पत्रकार ने उसके पूछा कि किसान सरकार से भिड़ने की प्लानिंग कर चुके हैं, वो उन्हें रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेटिंग को उखाड़ने की तैयारी कर चुके हैं, इस पर किसान ने कहा, “अगर कोई देश में अव्यवस्था फैलाना चाहता है, तो सरकार भी कुछ सुरक्षा के कदम उठाती है। अगर उनके लिए रोड खोल दिए जाए, तो वो (प्रदर्शनकारी) उस रोड को जाम कर देंगे और अर्थव्यवस्था को ठप कर देंगे। इस क्षेत्र की हजारों कंपनियाँ ने इस इलाके को छोड़ (पहले किसान आंदोलन के समय) दिया। हजारों लोग बेरोजगार हो गए। उन (प्रदर्शनकारियों) ने पूरे इलाके को बर्बाद कर दिया। जो कंपनियाँ वापस नहीं आई, जो यहाँ से चली गई। हरियाणा के लोग एक बार फिर से इसके लिए (इन प्रदर्शनों के लिए, नुकसान के लिए) तैयार नहीं हैं।”
पत्रकार ने जब किसानों ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान ‘अन्नदाता’ हैं, तो हरियाणा के किसानों ने जवाब में कहा, ‘हर कोई दाता है। ड्राइवर भी दाता है। घर बनाने वाला मजदूर भी दाता है। अर्थव्यवस्था में सभी लोग अहम किरदार निभाते हैं। हर किसी का रोल अलग-अलग है।’ एक किसान ने इंडी गठबंधन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘विपक्षी गठबंधन और कॉन्ग्रेस ने I.N.D.I.A. नाम रख लिया, इसका मतलब ये नहीं कि वो चुनाव जीत ही जाएँगे।’ किसान ने आगे कहा, “सोचिए, अगर झारखंड देश को कोयला देना बंद कर दे, तो ये तथाकथित ‘पंजाब के अन्नदाता’ अपना कोई काम नहीं कर पाएँगे।”
किसानों ने कहा कि सरकार ने चौथे दौर की वार्ता के बाद एक बेहतरीन प्लान (4 फसलों पर 5 साल के लिए गारंटी) बनाया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उसे नकार दिया। उन्होंने कहा, “वो देश भर में अगले 15 दिनों में अव्यवस्था फैलान चाहते हैं। प्रदर्शन करने वाले लोग पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। वो सिर्फ वोट काटने आए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में जो मजदूर किसानों के खेतों में काम करते हैं, क्या उनके लिए भी इन लोगों (प्रदर्शनकारियों) ने पेंशन की माँग की? ये मामला सिर्फ किसानी का नहीं है। पंजाब में सबसे ज्यादा बंधुआँ मजदूर मिले हैं, उनके लिए क्या माँग कर रहे हैं?”
प्रदर्शन के दौरान किसानों की मौत से जुड़े सवाल पर किसान ने कहा, “हमारे गाँव में भी 4 लोगों की मौत हुई। अगर उनकी जान शराब पीकर या हार्ट अटैक से गई है, तो उन्हें शहीद नहीं कर सकते। एक काम करिए, आप 2 लाख लोगों को इकट्ठा करिए, कम से कम 4 लोग प्राकृतिक तरीके से दम तोड़ देंगे, इसका मतलब ये नहीं है कि उन सभी को शहीद बोला जाए।”

सभी तबकों का ध्यान रखे सरकार

एमएसपी के सवाल पर किसान ने कहा, “सरकार ने फसलों पर एमएसपी दी, जिसकी उसे जरूरत लगी। सरकार को पूरे देश के बारे में सोचना पड़ता है। सरकार को समाज के हर तबके के लिए काम करना पड़ता है। हर सवात किसानों के लिए फायदा चाहता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि समाज के अन्य वर्गों को अनदेखा कर दिया जाए।”

‘प्रधानमंत्री कोई तानाशाह नहीं’

इस दौरान पत्रकार ने जब पूछा कि कॉन्ग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहती है, तो किसानों ने कहा, “अगर किसी तरह की तानाशाही होती, तो किसान साल भर से ज्यादा समय नहीं बैठ पाते। लोगों को चौटाला का राज याद है? 50 गोलियाँ और 100 पुलिस वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन को खत्म कर देती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर पीएम मोदी तानाशाह होते, तो वो उन्हें पंजाब के एक फ्लाइओवर पर नहीं रोक पाते। क्या तुम्हें लगता है कि पीएम मोदी के पास ताकत नहीं है?” किसानों ने आरोप लगाया कि ये प्रदर्शन सिर्फ एक ही परिवार को फायदा पहुँचाने के लिए जुटे हुए हैं, ऐसे लोग भ्रष्टाचारी हैं और भ्रष्टाचार का समर्थन करते हैं।
किसानों ने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में जो जिस लायक है, उसे उस तरह का काम मिल रहा है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक विचारधारा का है। किसानों ने कहा, “कोई काबिल है, तो उसे काम मिल रहा है। ये सरकार ऐसी नहीं है, जिसमें सिर्फ घूसखोरों को नौकरी मिले।”

राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को न मिले अनुमति

एक किसान ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो लोग भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहिए। हमारे सामने कोई खालिस्तानी नारे लगाएगा या हमारे प्रधानमंत्री के लिए अभद्र बातें करेगा, तो हम उसे छोड़ेगे नहीं। राष्ट्र ध्वज और लाल किला हमारे गर्व हैं। हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि कोई लाल किले पर जाए और अपनी पसंद का झंडा फहरा आए।” उन किसानों में से एक ने कहा, “हरियाणा के किसान इस बात को समझ चुके हैं कि पंजाब सरकार हमारे साथ धोखा कर रही है। वो हमारा इस्तेमाल कर रही है। वो हमें सामने रखकर सबकुछ करना चाहती है, पता है क्यों? क्योंकि हम लोग इमोशनल हैं।”

किसान आंदोलन 1.0 के दौरान हरियाणा के युवा हुए बर्बाद

किसान ने आगे कहा, ‘मैंने एक लोकल नेता का इंटरव्यू सुना, उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे नशेड़ी बन गए। पिछले प्रदर्शन से पहले कोई भी लड़का ‘चिट्टा’ का नशेड़ी नहीं था। उन्हें तो पता भी नहीं था कि ये होता क्या है? हमारे बच्चे इन प्रदर्शनों के दौरान नशे में डूब घए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हम उन्हें इसलिए नहीं सपोर्ट कर रहे, क्योंकि हमें अपने बच्चों को नशे से बचाना है। ‘
उन्होंने कहा कि अगर इन प्रदर्शनों के दौरान हरियाणा के किसी युवा की जान जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? “वो लोग तो उसे शहीद बता देंगे, लेकिन किसान घोषित कर देने भर से हम उसे वापस नहीं ला पाएँगे न?” उन्होंने आगे कहा, “प्रदर्शनकारी पेंशन चाहते हैं। वो लोन माफी चाहते हैं। ठीक है, हम ये बात समझते हैं। लेकिन आम नागरिकों पर इसके बदले में जो 14-20 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा, उसका क्या? हमें लिखित में दें कि टैक्स पेयर्स की पैसों से लोनमाफी नहीं दी जाएगी, फिर उन लोगों को एमएसपी दे दें।”
एक किसान ने कहा, “पिछली बार उन लोगों ने (पंजाब के किसानों ने) कहा था कि वो SYL मुद्दे पर भी बातचीत करेंगे, लेकिन उन्होंने नहीं किया। उन्होंने फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। पहले वो पानी समझौते के मुद्दे पर बात करें, फिर हम प्रदर्शनों के बारे में बात करेंगे। “

केंद्र सरकार और किसानों के बीच पाँचवें दौर की वार्ता जल्द

किसानों के साथ चौथे दौर की वार्ता में केंद्र सरकार ने रविवार (18 फरवरी 2024) को नए प्रस्ताव दिए थे, जिसके बाद किसानों ने कहा था कि वो बातचीत करके सरकार को सूचित कर देंगे। सरकार ने अपनी तरफ से चौथे दौर की वार्ता के दौरान जो प्रस्ताव दिया था, उसमें एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट की बात कही थी। जिसमें ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होनी थी। इसमें खरीद की लिमिट भी नहीं रहेगी। सरकार ने इसमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास को जोड़ने और खरीद के लिए पाँच साल की गारंटी की बात कही थी।
इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। हालाँकि बाद में किसानों ने कहा था कि उन्हें एमएसपी से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है।

हेरोइन से 50 गुना ज़्यादा खतरनाक है ‘चाइना गर्ल’: USA में 1 साल में 70000 मौतों के बाद बायडेन-जिनपिंग की बैठक

फ़ेंटालिन को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक (साभार: POTUS/Facebook)
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने बुधवार (15 नवंबर, 2023) को कहा कि चीन ने Fentanyl (फ़ेंटानिल) का प्रवाह रोकने के लिए पुनः प्रतिबद्धता जताई है। इसके बारे में बता दें कि ये ओपियम पर आधारित एक ड्रग है, जो अमेरिका में पिछले साल 70,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है। ‘एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट’ के दौरान सैन फ्रांसिस्को में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस संबंध में करार फाइनल किया गया।

इसे अमेरिका के लिए सफलता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहले बीजिंग ने पहले कहा था कि वो फ़ेंटानिल के संबंध में कोई बातचीत तब तक नहीं करेगा, जब तक अमेरिका उसके ‘इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन साइंस’ पर लगा हुआ प्रतिबंध नहीं हटाता। अमेरिका की विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी भी लगातार आरोप लगा रही थी कि जो बायडेन फ़ेंटानिल की सप्लाई रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। इस करार से ड्रग्स विरोधी एजेंसियों को राहत मिलेगी।

अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी फ़ेंटानिल एक मुद्दा रहने वाला है। चीन ने 5-6 वर्ष पहले ही इस ड्रग्स की सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी थी, लेकिन अब ये इसे बनाने वालों पर भी कार्रवाई करेगा। व्हाइट हाउस ने कहा है कि न सिर्फ ड्रग्स को बनाने और इसकी सप्लाई किए जाने को रोका जाएगा, बल्कि इससे आगे आने वाले ड्रग्स को लेकर भी कार्टेल पर दबाव पड़ेगा। बायडेन ने कहा कि चीन ने अमेरिकी के लोगों के ऊपर फ़ेंटानिल थोपे जाने को लेकर सहानुभूति जताई है।

साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर उस पर विश्वास करेगा, लेकिन साथ ही इसकी पुष्टि भी करेगा। पिछले महीने अमेरिका के 6 सीनेटर चीन पहुँचे थे। इनमें अमेरिका के दोनों दलों से आधे-आधे सदस्य थे। इससे पहले चीन ने कहा था कि अमेरिका अपनी नीतियों की विफलता के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। सीनेटरों के दौरे से पहले अमेरिका ने चीन की 9 कंपनियों और कई अधिकारियों को फ़ेंटानिल की सप्लाई के लिए आरोपित बनाया था।

अमेरिका में आने वाली फ़ेंटानिल की अधिकतर सप्लाई चीन और मेक्सिको से आती है। चीन से आने वाले ड्रग्स को ऐसे पैक किया जाता है कि पता ही नहीं चलता कि ये कहाँ से आया है। कार्रवाई के बाद ड्रग्स सप्लाई करने वालों को थोड़े-बहुत बदलाव कर के अन्य रूपों में फ़ेंटानिल को बेचना शुरू कर दिया था। फ़ेंटानिल के बारे में बता दें कि ये मॉर्फिन से 100 गुना ज़्यादा और हेरोइन से 50 गुना ज़्यादा प्रभावशाली हैं। इसे अमेरिका में आम बातचीत की भाषा में ‘चाइना गर्ल’ और ‘चाइना टाउन’ भी कहा जाता है।

फ़ेंटानिल काफी खतरनाक भी है। इससे बेचैनी, हैरानी, पाचन तंत्र संबंधित गड़बड़ियाँ, उलटी और पेशाब संबंधित रोग भी हो सकते हैं। अमेरिकी की एजेंसियों ने इसे काफी खतरनाक करार दिया है। इसके ओवरडोज के कारण आँख की पुतलियाँ सिकुड़ने लगती हैं और साँस लेने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। बायडेन-जिनपिंग के बीच ताइवान को लेकर भी चर्चा हुई और अमेरिका ने वहाँ यथास्थिति बनाए रखने की वकालत की। अमेरिका ने कहा कि वो ताइवान को चीन में शांति से मिलाए जाने के पक्ष में है और वहाँ हथियार भेजे जाने की निंदा करता है।

पंजाब की जनता की आवाज- AAP को वोट देकर बहुत गलत किया, AAP को वोट देने का मतलब बच्चों का भविष्य खराब करना

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी झूठे वादों की राजनीति करने में देश में सबसे टॉप पार्टी बन गई है। दिल्ली की जनता इनके झूठे वादो से तो पीड़ित ही है अब पंजाब के लोगों को यह बात समझ आ गई है कि केजरीवाल की पार्टी को जिताकर उन्होंने कितनी बड़ी भूल की है। आज पूरा पंजाब रो रहा है। विकास की बात तो छोड़िए, वहां कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है, दिनदहाड़े हत्या हो रही है, समूचा पंजाब नशे की गिरफ्त में है, किसान, टीचर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। केजरीवाल ने जिन वादों का लॉलीपॉप थमाकर पंजाब में जीत दर्ज की थी, अब वे वादे हवा-हवाई हो गए हैं।

जब पंजाब में AAP की सरकार नहीं थी तब केजरीवाल ने पराली को सोना बताया था और अब सरकार बन गई है तो इसका समाधान उनके पास नहीं है। अब वह इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार से मदद मांग रहे हैं। केजरीवाल के झूठे वादों की राजनीति अब पंजाब की जनता को समझ आ गई है इसीलिए वह सड़कों पर है। अब पंजाब लोग खुद कह रहे हैं- पूरा पंजाब रो रहा है, हमने AAP को वोट देकर बहुत गलत किया, AAP को वोट देने का मतलब बच्चों का भविष्य खराब करना है।

पराली को सोना बताने वाले केजरीवाल को अब नहीं मिल रहा समाधान

दिल्ली में प्रदूषण से लोगों का जीना दूभर हो गया है। प्रदूषण हमारी जिंदगी पर कितना असर डाल रहा है, इस पर कुछ समय पहले एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि प्रदूषण का बढ़ता लेवल हर दिल्ली वाले की जिंदगी 10 साल कम कर रहा है। लेकिन सात से अधिक वर्षों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसका कोई समाधान नहीं निकाल पाए हैं। जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं थी तब वह साल दर साल दिल्ली में प्रदूषण के लिए पंजाब को जिम्मेदार ठहरा कर पल्ला झाड़ लेते थे। पंजाब में AAP की सरकार बनने के पहले दिल्ली प्रदूषण के लिए पंजाब की पराली जिम्मेदार थी, तब केजरीवाल को पराली से सोना, कोयला, बिजली, गत्ता फैक्टरी सब बनाने आता था। जब पंजाब में उनकी सरकार नहीं थी तब उन्होंने पराली के निपटान के कई समाधान पेश किए थे। लेकिन अब जब सरकार उन्हीं की है तो उन समाधान पर काम क्यों नहीं हो रहा है। कल तक दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब को जिम्मेदार ठहराने वाले केजरीवाल के सुर अब बदल गए हैं। अब वह फिर वही बात दोहरा रहे हैं कि केंद्र सरकार को इसका समाधान निकालना चाहिए।

पंजाब में केजरीवाल की गारंटी- तीन महीने के अंदर नशा खत्म कर देंगे, 8 महीने हो गए, गारंटी की हवा निकल गई

पंजाब चुनाव के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि कभी पंजाब के नौजवानों का पूरी दुनिया में डंका बोलता था लेकिन पंजाब के घर-घर में नशा पहुंच गया और नौजवानों को इससे बहुत नुकसान पहुंचा है। केजरीवाल ने कहा था कि कुछ बच्चे कनाडा चले गए और बाकी जवानी नशे में डूबी हुई है। गांव-गांव के अंदर खुलेआम नशा बिक रहा है। पिछली बार जब कांग्रेस की सरकार आई थी, तब उन्होंने कहा था कि हम नशा बंद करेंगे। लेकिन कोई नशा बंद नहीं हुआ और आज भी नशा उसी तरह बिक रहा है। क्योंकि इन सबकी सांठगांठ हैं। सारी पार्टियों की और नशा बेचने वाले सारे गिरोह की आपस में सांठगांठ हैं। हम इस पूरे सिंडिकेट को खत्म करेंगे। नशा बेचने वाले पूरे गिरोह को खत्म करेंगे। नशा माफिया को खत्म करेंगे और नशे से अपने बच्चों को बाहर निकाल कर पंजाब को नशा मुक्त करेंगे। लेकिन तीन महीने में ड्रग्स का नशा खत्म करने का उनका वादा खोखला ही साबित हुआ और अब आठ महीने हो गए हैं उल्टे नशा बढ़ ही गया है। दूसरी तरफ शराब सस्ती कर दी गई है।

पंजाब में नशा खत्म करने की गारंटी की हवा निकल गई

नशा खत्म करने की गारंटी करने वाले केजरीवाल ने दिल्ली की तरह पंजाब में भी आबकारी नीति (Liquor Policy) में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिसके बाद शराब करीब 40 प्रतिशत सस्ती हो गई। पंजाब की नई सरकार ने अपनी पहली आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है, जिसमें कई नियमों में बदलाव किया गया है। इन नियमों के बदलाव के बाद अब शराब की रेट के साथ ही कंपनियों के प्रोडक्शन को लेकर कुछ बदलाव होने वाले है। साल 2022-23 की नई आबकारी नीति को मंजूरी मिलने के बाद बताया जा रहा है कि शराब की कीमतें करीब आधी हो गई हैं।

पंजाब के युवा एक दिन में ड्रग्स पर करीब 17 करोड़ रुपए करते हैं खर्च

नशे की गिरफ्त में फंसे पंजाब के युवा करीब एक दिन में ड्रग्स पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। यानी युवा एक महीने में करीब 6500 करोड़ रुपए ड्रग्स पर लुटा रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजाब में नशे के व्यापार का आकार कितना बड़ा होगा। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में ड्रग्स का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 2,32,856 है। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि सर्वाधिक 53 फीसदी (123413) लोग हेरोइन और चिट्टे का नशा करते हैं। हेरोइन और चिट्टे का नशा करने के लिए औसतन एक युवक को 1400 रुपए प्रतिदिन की आवश्यकता पड़ती है। इस हिसाब से पंजाब में नशे की गिरफ्त में फंसे युवक एक दिन में करीब 17 करोड़ रुपए चिट्टे और हेरोइन पर खर्च करते हैं। साल में यह राशि 6300 करोड़ रुपए के करीब बनती है।

पंजाब में जिसे बहन बनाया उसे ही दिया धोखा

पंजाब चुनाव के दौरान केजरीवाल ने स्थायी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे टीचर्स और अन्य कर्मचारियों को स्थायी करने के सपने दिखाए। लेकिन जब सपने को सच में बदलने की बारी आई तो उन अस्थायी टीचर्स और कर्मचारियों को तारीख पे तारीख मिली। जब टीचर्स ने प्रदर्शन किया तो उन्हें पुलिस की लाठियां खानी पड़ी। इससे नाराज टीचर्स और कर्मचारी केजरीवाल के चुनाव पूर्व किए गए वादे की याद दिला कर इन दिनों प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब चुनाव के दौरान भी टीचर सिप्पी शर्मा ने पानी टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन किया था और उस दौरान केजरीवाल ने उसे बहन बोलकर नीचे उतरने की अपील की और वादा किया कि सरकार बनते ही उसकी मांग पूरी की जाएगी। लेकिन अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बने सात महीने हो चुके हैं और उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया।

पंजाब में सरकार बने 8 महीने हुए, वादा नहीं हुआ पूरा

पंजाब के सोहाना स्थित पानी की टंकी पर चढ़ी दो PTI टीचर नौकरी नहीं मिलने पर लगातार पंजाब सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। कांग्रेस सरकार के समय से विरोध कर रही फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर, सिप्पी शर्मा ने कहा कि AAP की पंजाब सरकार 8 महीने से उन्हें गोली दे रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले दिल्ली के CM एवं AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मोहाली, पानी की टंकी के पास आकर उन्हें AAP की सरकार बनने पर सभी 646 PTI को नौकरी देने का भरोसा दिया था। लेकिन नौकरी के नाम पर उनसे धोखा किया गया है। पंजाब में अब तक की सरकारों से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही सिप्पी शर्मा पेट्रोल से भरी बोतल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ी। इसका पता लगने पर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। लेकिन सिप्पी शर्मा ने विरोध खत्म करने से इनकार कर दिया। उन्होंने CM भगवंत मान, दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री से मेरिट लिस्ट जारी करने की अपील की है।

केजरीवाल ने कहा था- मुझे शर्म आ रही है पूरे समाज पर, अब शर्म कहां गई?

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोहाली में कुछ टीचर्स पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। ये संविदा शिक्षक तत्कालीन चन्नी सरकार से सेवाओं को नियमित करने सहित कई मागों को लेकर दबाव बना रहे थे। जिनसे बातचीत करने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान पहुंचे थे। इस दौरान केजरीवाल ने सिप्पी शर्मा को कहा था कि वह उन्हें अपना भाई मानती है, तो नीचे आ जाए। केजरीवाल ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार बहरी हो चुकी है और कोई आपकी बात नहीं सुनने वाला। केजरीवाल ने प्रदर्शनकारी टीचर्स से कहा था, “मैं आपसे गुजारिश करने के लिए आया हूं, मुझे शर्म आ रही है पूरे समाज पर, पूरी व्यवस्था के ऊपर कि हमारे शिक्षकों को आज ऐसे टंकी के ऊपर बैठकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। मैं आपसे विनती करने आया हूं कि आप लोग नीचे आ जाओ, मैं आपसे वादा करता हूं कि हमारी सरकार आने के बाद दिल्ली में जैसे शिक्षकों की सारी परेशानियां दूर हो गईं। वैसे ही पंजाब में भी सारी सुविधाएं दी जाएंगी।”

केजरीवाल ने कहा था-पंजाब में 24 घंटे पानी का इंतजाम करेंगे, चुनाव बाद कहा- यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी

पंजाब चुनाव से पहले केजरीवाल ने कहा था पंजाब के कई जिलों में पानी की किल्लत है। हम सत्ता में आएंगे तो 24 घंटे पानी का इंतजाम करेंगे। लेकिन अब चुनाव के बाद कह रहे हैं पानी की समस्या दूर करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के मुद्दे पर बुरी तरह घिर चुकी आम आदमी पार्टी के मुखिया ने अब पीएम नरेंद्र मोदी से मांग की कि वह इसका समाधान करें।

‘विज्ञापनबाज सरकारों’ ने जनता के टैक्स के 1200 करोड़ से ज्यादा रुपये विज्ञापनों पर फूंके

आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली की हो या पंजाब की, इन्हें यदि विज्ञापनबाजी की सरकारें कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। केजरीवाल दिल्ली में ऐसा कई बार कर चुके हैं कि काम कुछ लाख का होता है और उसके गुणगान के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च कर दिए जाते हैं। केजरीवाल के नक्शेकदम पर चलते हुए पंजाब में मान सरकार भी अपनी मशहूरी के लिए जनता के करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर पानी की तरह बहा रही है। अपने राज्य में ही नहीं, बल्कि गुजरात और हिमाचल में छवि बनाने के लिए करोड़ों के विज्ञापन दिए जा रहे हैं। कभी पॉलिटिकल एडवरटाइजमेंट की आलोचना करने वाले केजरीवाल और उनकी पार्टी अब विज्ञापनबाजी में सबसे आगे है।

राजस्थान : सरकारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर अफीम का नशा

                                                                                             फोटो साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट
राजस्थान में आजादी के 75वें वर्षगाँठ के मौके पर भले ही ड्राई डे की गई थी, लेकिन इसके बावजूद यहाँ पर जमकर अफीम परोसी गई। हद तो तब हो गई जब राजस्थान के एक सरकारी स्कूल में नशा करने के लिए बैठे करीब एक दर्जन लोग करीब 1 से 2 घंटे तक अफीम का नशा करते दिखे। स्कूल में बैठकर अफीम सेवन करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसके बाद स्कूल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में स्कूल कैंपस में एक-दो छात्र भी दिखाई दे रहे हैं।

पूरा घटनाक्रम बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी उपखंड स्थित रावली नाड़ी स्कूल का है। स्कूल में सुबह स्वतंत्रता दिवस के प्रोग्राम का आयोजन हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। करीब 12:00 बजे प्रोग्राम पूरा हो चुका था। इसके बाद करीब एक दर्जन ग्रामीण और जनप्रतिनिधि स्कूल के बरामदे में ही दरी बिछाकर बैठ गए। इसके बाद वह अफीम बाँटने लगे और स्कूल में ही नशा करने लगे। इस दौरान स्कूल में कुछ बच्चे भी नजर आए। बताया जा रहा है कि वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है।  

हालाँकि, अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है शिक्षा विभाग की माने तो मामले में बच्चों के बयान होने के बाद ही पूरे मामले का पता चल पाएगा। वहीं घटना के बाद कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से स्कूल में दी जाने वाली सहयोग राशि से डोडा-पोस्त (अफीम) लाया गया था। जिसे स्कूल में ही परोसा गया। हालाँकि, अभी तक इस बात की पुष्टि शिक्षा विभाग की तरफ से नहीं की गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी जाँच कर रहे हैं और इसके बाद ही सच्चाई का पता चल पाएगा।

सीबीईईओ ओमप्रकाश विश्नोई ने घटना को लेकर बताया कि अफीम पीने का वीडियो संज्ञान में आया है। उन्होंने मंगलवार (16 अगस्त 2022) को छात्र, शिक्षक और अभिभावकों से बयान लेने के बाद रिपोर्ट बनाकर गुड़ामालानी एसडीएम को सौंपने की बात कही।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरी घटना की 4 वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिनमें किसी में नशा करने की तो किसी में ब्याज पर पैसे की बात भी कही जा रही है। एक वीडियो में एक सरकारी शिक्षक भी दिखाई दे रहा है, जो रजिस्टर में वहाँ पर बैठे लोगों के हस्ताक्षर करवा रहा है।