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मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग; व्हाट्सएप्प ग्रुप से बड़ा खुलासा, CJP के प्रदर्शन में मौत की प्लानिंग, प्रदर्शनकारियों को JNU से मिले हिंसा के निर्देश


कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई, 2026 को संसद मार्च के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई। इस हिंसा में 6 आईपीएस अधिकारी और 118 पुलिस के जवान घायल हुए। पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई है और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस व्हाट्सएप्प ग्रुप, मोबाइल वीडियो, CCTV, ड्रोन कैमरे और पुलिस बॉडी कैमरे की फुटेज की जांच कर रही है। इस जांच में जो बातें अब तक खुलकर सामने आ रही हैं, वो काफी हैरान और परेशान करने वाली है। कुछ व्हाट्सएप्प ग्रुप में केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए मौत की प्लानिंग की गई थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मारने की बात कही जा रही थी।
जो-जो लोग भी आज के हिंसक आंदोलन में शामिल थे और खूब उपद्रव किए, अब उनकी पिता की सात पीढ़ियाँ याद आ जाएंगी।
जो-जो उछलने गए थे, वहाँ अब तुम उछल लिए। अब तुम्हें एक-एक करके पुलिस और कानून सबक सिखाएगा। अब पूरी उम्र तुम कोर्ट-कचहरी दौड़ोगे। और जो-जो उपद्रवी नेता तुम्हें उकसाए थे, वे तुम्हारा हाल तक नहीं पूछेंगे।
और अब पुलिस ने 70 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। जिन-जिन ने हिंसक उपद्रव किया है, अब सबका घर-परिवार बर्बाद हो जाएगा। पुलिस उपद्रवियों की पहचान भी वीडियो के माध्यम से कर रही है।
मीडिया चैनल बता रहे हैं कि इस उपद्रव में पाकिस्तान कनेक्शन की भी जाँच कर रही है पुलिस।
हम लोग इसीलिए सामान्य वर्ग को समझा रहे थे कि यह छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि उपद्रवियों का आंदोलन है। उपद्रव ये जरूर करेंगे, लेकिन उपद्रव खत्म होते ही पुलिस एक-एक को ढूँढेगी और फिर उसका घर-परिवार तबाह हो जाएगा।
अब पुलिस जिन जिन उपद्रवियों को चिन्हहित करके FIR कर रही है अब आप लोग बताओ इनका मुकदमा पूरी उमर ये और इनका परिवार लड़ेगा या वो वो नेता लड़ेंगे जो इनको उकसाकर उपद्रव करवाये।
और समान्यवर्ग के लोग ये ध्यान देंगे कि यदि कोई समान्यवर्ग का इस उपद्रव में यदि पकड़ा गया या FIR हुआ तो उसकी मदत किसी समान्यवर्ग को नही करना है इनके अकेले ही झेलने दो

चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप में मौत की प्लानिंग
छात्रोंं के नाम पर प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से निर्देश दिए जा रहे थे। उन्हें समझाया जा रहा था कि कैसे प्रदर्शन करना है। सोशल मीडिया में चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप का चैट वायरल हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे। एक चैट में akak नाम के हैंडल ने कहा, “भाई अगर किसी की मौत होती है तो उसमें तो सरकार पर ज्यादा दबाव आएगा।” 

akak के हैंडल से आगे लिखा गया, ” देखो यार जो जान देने तक को तैयार वो ये सुन लो, कम से कम तुम्हारा एहसान तो रहेगा आने वाली पीढ़ियों पर, आने वाले बच्चों पर, वो सुनेंगे की मेरा भाई उस प्रोटेस्ट में मारा गया, उस लड़ाई में मारा गया। याद किए जाओंगे। बहुत अच्छा लग रहा है ये देखकर वो जान तक देने को तैयार है भाई लोग।” इस चैट से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों की कितनी खतरनाक साजिश थी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस के धैर्य ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। 

JNU से संचालित हो रहा था CJP का प्रदर्शन
एक दूसरे व्हाट्सएप्प ग्रुप का नाम JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन है, जिसमें कई आपत्तिजनक पोस्ट किए गए हैं। पुनीत सुलाख के हैंडल से प्रदर्शनकारियों यानी वामपंथी छात्रों यानी कॉमरेड्स को कई निर्देश दिए गए। इसमें जो लिखा गया, आप खुद पढ़ सकते हैं…

मित्रों और कॉमरेड,
पुलिस विरोध प्रदर्शन को रोकने/कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रही है। हमें पता चला है कि पुलिस हमें रोकने के लिए सुबह-सुबह जेएनयू (JNU) के सभी गेट बंद कर सकती है। सभी से अनुरोध है कि यदि आप अगले 2-3 घंटों में कैंपस छोड़ दें और रात 2-3 बजे तक जंतर-मंतर पहुंच जाएं, तो बहुत अच्छा होगा। इसके विकल्प के रूप में, जेएनयूएसयू (JNUSU) और हमारे संगठन का नेतृत्व सुबह 4 बजे से गंगा ढाबा पर मौजूद रहेगा, वहां से हम 4-5 लोगों के छोटे समूहों में बाहर निकल सकते हैं।

सामान्य निर्देश:

जूते और आरामदायक कपड़े पहनें।

फोन को अच्छी तरह चार्ज रखें और यदि संभव हो तो पावर बैंक साथ रखें।

इसके बाद भी समूहों में रहें…

कौन हैं पुनीत सुलाख ?
प्रदर्शनकारियों को निर्देश देने वाले पुनीत सुलाख जेएनयू के बी-टेक फाइनल ईयर के छात्र हैं। ये School of Engineering के ‘पर्सपेक्टिव्स – वाद-विवाद क्लब’ [Perspectives – Debating Club] में उपाध्यक्ष भी रहे हैं।

Briar और Bitchat ऐप डाउनलोड करने और जुड़े रहने का निर्देश
JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन व्हाट्सएप्प ग्रुप के एक अन्य सदस्य अंजलि ने निर्देश दिया, ” विरोध प्रदर्शन (प्रदर्शन स्थल) वाली जगह पहुँचने के बाद शायद आपके डिवाइस (मोबाइल) में नेटवर्क न मिले। पिछली बार भी पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था और इस बार भी वे ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, आप जिस समूह के साथ आए हैं, उसके साथ जुड़े रहना बहुत ज़रूरी है। Briar, bitchat या ऐसी ही कोई अन्य ऐप डाउनलोड कर लें। ये नेटवर्क बंद होने पर भी ब्लूटूथ सिग्नल पर काम करते हैं, ताकि कोई भी आपके कनेक्शन को न देख सके। सुनिश्चित करें कि आपके समूह के सभी लोगों के पास एक ही ऐप इंस्टॉल हो और प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने से पहले ही वे आपस में जुड़ (कनेक्ट हो) चुके हों।”

प्रदर्शनकारियों को मरने के लिए उकसाने की कोशिश
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को गाली देते हुए प्रदर्शनकारियों को भड़काने की कोशिश की गई है। वीडियो में एक नकाबपोश व्यक्ति को कहते सुना जा सकता है, “जब पुलिस लाठीचार्ज करे तो तुम लोग भाग क्यों रहे हो…अरे कायर हो क्या तुम…इन हिजड़े पुलिस वालों की लाठियों से तुम मर जाओंगे क्या ? अरे, मर भी जाओंगे तो देश के लिए प्रोटेस्ट करने के लिए गए हो शहीद हो जाओंगे…मेरे भाइयों पीठ दिखाकर मत भागो तुम…इतिहास तुम्हें कायर बोलेगा कायर…तो फिर तुम्हारे बाल बचे देखेंगे तो कायर बोलेंगे। मेरे पापा मेरे भाई पुलिस की लाठी देखकर पीठ दिखाकर भागे थे।”

पीएम मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी पीएम मोदी को गाली दे रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी तो प्रधानमंत्री मोदी को मारने की प्लानिंग कर रहा है। उसे कहते सुना जा सकता है, “मोदी या तो इस्तीफा दे दें…उसके खाने में जहर का इंतजाम करो और खत्म करो कहानी।
मोदी का इलाज यही है कि यहां भेज दो एकबार…या कोई जुगाड़ करो खाने का…जहर मिलाओ…जो हार्ट अटैक में भी पोस्टमार्टम में पता नहीं चले कि कैसे मर गया।”

इस प्लानिंग का असर किस तरह सड़कों पर दिखाई दिया…प्रदर्शनकारी  किस तरह मरने और मारने पर उतारू थे…

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सड़कों को बनाया युद्ध का मैदान 
सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस की गाड़ी पर पत्थराव करते हुए देखा जा सकता है…वो जिस तरह गाड़ी पर पत्थरों की बारिश कर रहे हैं…उससे पता चलता है कि उन्हें जो निर्देश दिया गया है, उसे वो बखूबी पालन करते हुए दिख रहे हैं।

 

कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पर पत्थरबाजी

बाउंड्री और फुटपाथ में लगी ईंटें तोड़ते प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन से भागते हुए पकड़ा गया विजेता दहिया
जब प्रदर्शनकारी दिल्ली की सड़कों को युद्ध का मैदान बना रखे थे, तब सीजेपी का प्रवक्ता विजेता दहिया प्रदर्शन से गायब था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विजेता दहिया को भागते हुए पकड़ लिया और पूछा, “आप प्रदर्शन में क्यों नहीं गए…मैं जंतर-मंतर पर गया, आप क्यों नहीं गए। वहां सब लाठी खा रहे हैं और आप घूम रहे हों। ये कौन सा सपोर्ट कर रहे हो। बाबा को गाली दे रहे हो…आप कर क्या रहो हो ? आप गाली दे रहो और यहां क्या कर रहे हो।”

अवलोकन करें:-

CJP वालों के तंबू उखाड़ दिए; मौज कर रहे थे, समोसे खा रहे थे, अब पहचान हो रही है और फिर जेल की रोटी तोड़ें
nigamrajendra.blogspot.com
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सुभाष चन्द्र सोनिया गांधी ने 2 दिन पहले कांग्रेस को कहा सोनम वांगचुक और CJP का साथ दो और आज CJP के भेड़ियों ने आतंक मचा दिय...

पकड़े जाने के बाद बोला विजेता दहिया- प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ?
विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें उसे कहते हुए सुना जा सकता है कि प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ? तुमने इसे इलेक्ट किया है, इस पोजिशन के लिए, सरकार अकाउंटेबल ठहराते, तुम्हारी जो नॉनसेंस थिंकिंग है तो उसमें मुझे नहीं फंसना, मुझे कोई पॉलिटिक्स में नहीं आना। तुम्हारे जैसे बेवकूफों को अपिज करूं।

प्रदर्शन में शामिल हुआ ‘हिस्ट्रीशीटर’ हाजी अफजल


हाजी अफजल उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके से संबंधित हैं और पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें ‘हिस्ट्रीशीटर’ के रूप में दर्ज किया गया है। उन पर मकोका (MCOCA) और अन्य आपराधिक मामलों के तहत आरोप लगे हैं। हाल ही में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवकों के साथ उनकी मौजूदगी की खबरों और वीडियो के कारण वे चर्चा में रहे थे।

जंतर-मंतर पर ऑपइंडिया के पत्रकार अनुराग मिश्रा पर हमला, CJP के लोगों ने की सरेआम गुंडागर्दी


दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के दौरान एक बेहद चिंताजनक और निंदनीय घटना सामने आई है। प्रदर्शन कवर करने पहुंचे ‘ऑपइंडिया’ (OpIndia) के पत्रकार अनुराग मिश्रा के साथ वहाँ मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े गुंडों द्वारा न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि उन पर शारीरिक हमला भी किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदर्शन के ‘शांतिपूर्ण’ होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, अनुराग मिश्रा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से सामान्य सवाल पूछ रहे थे। इसी दौरान वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके काम में बाधा डालनी शुरू कर दी। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और पत्रकार पर हमला कर दिया गया।

 पत्रकार अनुराग मिश्रा ने घटना के बावजूद अपना काम नहीं रोका और बेखौफ होकर अपना काम करते रहे। उन्होंने कहा, “हम वहाँ सिर्फ अपना काम कर रहे थे और निष्पक्षता से सवाल पूछ रहे थे। लेकिन कुछ लोगों को सवाल पसंद नहीं आए। उन्होंने मुझे घेरा, धक्का-मुक्की की और मुझ पर हमला कर दिया। अगर देश की राजधानी में पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं और सवाल पूछने पर उन पर हमले होंगे, तो लोकतंत्र और प्रेस की आजादी का क्या मतलब रह जाता है?”

इस घटना के बाद प्रदर्शन के मुख्य चेहरों और आयोजकों पर उंगलियाँ उठने लगी हैं। सोशल मीडिया पर लोग सोनम वांगचुक, विजेता दहिया, अभिजीत दिपके और सौरव दास जैसे नेताओं को टैग करके सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यही उनके तथाकथित शांतिपूर्ण आंदोलन की सच्चाई है? क्या वे अपने प्रदर्शन में शामिल इन अराजक तत्वों की गुंडागर्दी की जिम्मेदारी लेंगे? आलोचकों का कहना है कि असहमति की आवाज को हिंसा के दम पर दबाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।

इस हमले ने एक बार फिर फील्ड पर काम करने वाले ग्राउंड पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। लोगों ने दिल्ली पुलिस से माँग की है कि वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार के साथ ऐसी हरकत न हो सके।

UN दफ्तर के बाहर प्रदर्शन, अमेरिकी सांसदों ने भी उठाई आवाज़: जान बचा कर निकले हिन्दुओं ने बताया – हमारे घरों पर किया हमला

                             संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन (फोटो साभार : News18)
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के नाम पर जो उत्पात हो रहा है, उसकी आवाज पूरी दुनिया में सुनी जा रही है। बांग्लादेश में हिदुओं का सफाया हो रहा है, तो आवामी लीग के समर्थकों को भी मारा जा रहा है। पार्षद से लेकर सांसद तक मार दिए जा रहे हैं। भारत में हिंदू बांग्लादेशी हिंदुओं को बचाने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो ये प्रदर्शन अब संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय तक पहुँच गया है। यही नहीं, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी सरकार से भी हस्तक्षेप की माँग की है कि वो बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए कोई कदम उठाए।

संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की माँग करते हुए शनिवार (10 अगस्त 2024) को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व वॉशिंगटन स्थित एक एनजीओ हिंदू एक्शन ने किया। एनजीओ हिंदू एक्शन ने न्यूयॉर्क में भी कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। एनजीओ ने बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा के खिलाफ बोलने के लिए कई अमेरिकी प्रतिनिधियों की प्रशंसा की।

अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद पैट फॉलन ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और इनकी निंदा की। रिपब्लिकन सांसद पैट फॉलन ने कहा था, “मैं बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक हिंसा और धार्मिक उत्पीड़न की कड़ी निंदा करता हूं। मैं अंतरिम सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह बांग्लादेशी लोगों के साझा हित में काम करे और इस हिंसा को तुरंत खत्म करे।” उन्होंने कहा, “हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और किसी भी अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक को निशाना बनाना निंदनीय है। जिन लोगों ने हिंसा के इन कृत्यों को भड़काया और उनमें भाग लिया, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद श्रीथानेदार ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर उनसे देश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने में बांग्लादेशी सरकार की सहायता करने का आग्रह किया। कृष्णमूर्ति ने ब्लिंकन से अनुरोध किया कि वह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से बात करें और हिंसा को समाप्त करें तथा अपराधियों को न्याय के दायरे में लाएँ।

बांग्लादेश के जेसोर में होटल फूँका, 25 लोगों की मौत, बचकर भागे लोगों ने सुनाई आपबीती

इस बीच, बांग्लादेश में हो रही हिंसा से बचकर भारत भाग आए कुछ लोगों ने अपनी आपबीती भास्कर के साथ साझा की है। असम से बांग्लादेश अपने बिजनेस के सिलसिले में गए रजिउल इस्लाम बेहद बुरी हालत में भारत लौट पाए हैं। वो जेसोर में थे, जब साबिर होटल इंटरनेशनल पर बीएनपी के गुंडों और प्रदर्शनकारियों ने हमला बोल दिया। होटल साबिर इंटरनेशनल आवामी लीग के सांसद और पार्टी महासचिव शाहीन चकलाघर का है। दंगाइयों ने इस होटल में आग लगा दी। इस आग से बचकर निकले रजिउल ने बताया कि लोग डरे हुए थे, हर तरफ चीख पुकार मची थी। मैं और मेरे भाई ने रूप की खिड़की से छलाँग लगा दी।
रजिउल इस्लाम असम के हैं। उनके साथ उनका भाई भी बांग्लादेश से बचकर निकलने में सफल रहे। दोनों होटल साबिर इंटरनेशनल में थे, जब 5 अगस्त को भीड़ ने उन पर धावा बोला। दोनों के पैर टूट गए हैं। रजिउल ने कहा, “बांग्लादेश में हालात भयावह हैं। हर तरफ हिंसा हो रही है। मैं अपने भाई के साथ होटल की चौथी मंजिल पर था, जब साबिर इंटरनेशनल होटल को दंगाइयों ने फूँक दिया। भाई ने खिड़की से छलाँग लगा दी। कई अन्य लोगों ने भी लगाई। लोग टूट-फूट गए, लेकिन जिन कमरों में खिड़की नहीं थी, उनमें लोग बाहर नहीं निकल पाए। 2 दर्जन से ज्यादा लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। अब हम कोलकाता जाकर अपना इलाज कराएँगे। हालत बेहद खराब है। हम बचकर आ गए, यही बहुत है।”
रजिउल इस्लाम अपने भाई के साथ जब असम पहुँचे, तो कुल 65 लोगों ने उनके साथ असम में एंट्री की। इनमें से कुछ बांग्लादेशी भी हैं। जो अवामी लीग पार्टी से जुड़े हुए हैं। बांग्लादेशी नागरिक रियाज भी उनमें से एक हैं। वो बिजनेस वीजा पर भाग निकले हैं। उन्होंने कहा कि आवामी लीग से जुड़े होने की वजह से बीएनपी के लोग उन्हें नुकसान पहुँचाते। बीवी-बच्चों और परिवार के पास वीजा नहीं है, तो वो वहीं फँसे हैं। किसी तरह से अभी जान बचानी प्राथमिकता है।

हिंदुओं और मंदिरों को बनाया गया निशाना

जेसोर में रहने वाले एक हिंदू परिवार ने अपनी पहचान छिपाते हुए बताया, “हमलावरों की भीड़ मेरे घर में घुस गई। वो करीब 15-20 लोग थे। हम पड़ोसी के घर में छिपे हुए थे। उन्होंने खिड़कियाँ तोड़ी और घर को तोड़ा। उन्होंने मंदिर तोड़े और हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए ढूँढते रहे।” बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे लगातार अत्याचारों की वजह से बड़ी संख्या में पलायन की भी खबर आ रही है। भारत से लगी सीमा पर कई जगहों पर हिंदू पहुँचे हुए हैं और वो भारत में एंट्री के लिए अनुमति माँग रहे हैं। हालाँकि भारत सरकार ने एक बड़ी कमेटी का गठन किया है, जो इन मामलों पर नजर रख रही हैं।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अपराधों पर हिंदू-बौद्ध-ईसाई-ओइक्या परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता ने कहा, “भीड़ के निशाने पर सिर्फ सरकारी संस्थाएं और मुक्ति संग्राम की उपलब्धियाँ ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक भी हैं। अल्पसंख्यकों पर देश के कई हिस्सों में हमले हुए। कालीगंज से लेकर खुलना तक हमले किए गए। मंदिरों-दुकानों को निशाना बनाया गया। जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है।”

कथित किसान आंदोलन और समर्थक हो रहे बेनकाब : ‘इनके चुतड़ा पर कील गाड़नी चाहिए’: बोले हरियाणा के किसान- पंजाब के लोगों ने हमारे बच्चों को बनाया नशेड़ी

                                    हरियाणा के किसान (फोटो साभार : Youtube/NewsViews)
किसान आंदोलन 1.0 में लाल किले पर चढ़कर हंगामा करने से जनता को मालूम हो गया कि ये किसान नहीं गुंडे हैं, क्योकि कोई किसान ऐसी शर्मनाक गिरी हुई हरकत नहीं कर सकता। और अब चल रहे किसान आंदोलन के नाम पर देश में अराजकता फ़ैलाने की घिनौनी हरकत से ये सभी बेनकाब हो गए हैं, जो शांति के नाम अशांति फैला रहे हैं। इनकी मानसिकता के जगजाहिर होने पर आंदोलनकारी मझधार में फंस चुके हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार इन्हे उकसाने से बाज नहीं आ रही। 

किसान आंदोलन 1.0 से लेकर वर्तमान में चल रहे उपद्रवी आंदोलन को समर्थन देने वाली पार्टियां देश को बताएं कि क्या विश्व में ऐसा उपद्रवी आंदोलन देखा है, जिसमे प्रधानमंत्री के मौत की  नारेबाजी हो? दूसरे शब्दों में कहा जाये कि विपक्ष अपनी विफलता का ढोल पीट रहा है। 


एक तरफ ये तथाकथित किसान कर्जा माफ़ करने को कह रहे हैं, फिर इस जमावड़े में लोगों को देने के लिए रूपए कहाँ से आ रहे और कौन दे रहा है? 

हकीकत यह है कि विपक्ष के पास मोदी के विरुद्ध कोई मुद्दा ही नहीं होने के कारण उपद्रवियों को मैदान में उतार दिया, जो आंदोलन के चलते इसी विपक्ष को कमजोर कर रहा है। वास्तव में केजरीवाल ने पंजाब में सरकार बनाने के लिए किसानों से 22 फसलों पर MSP देने के लिए 5 मिनट में कानून बनाने का झूठा वायदा कर सत्ता हथाई थी, जिसे पूरा करने अपना ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ने की असलियत सामने आ चुकी है। दूसरे, यह आंदोलन चंडीगढ़ तक सीमित रहना था, लेकिन अपने ही बुने जाल में फंसते देख पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों भगवंत सिंह मान और अरविन्द केजरीवाल ने अपनी खाल बचाने इसे दिल्ली की मोड़ दिया। और इसे कांग्रेस सहित अन्य दल भी समर्थन दे रहे हैं। जबकि फरवरी 21 को मल्लिकार्जुन खड़के ने भी कह दिया कि सभी फसलों पर MSP देना संभव नहीं।  

किसान आंदोलन 2.0 चर्चा में है। दरअसल, साल 2020 से साल 2021 के आखिर तक दिल्ली में देश भर के किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। करीब डेढ़ तक चले प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने तीन कानूनों को वापस ले लिया था। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के किसानों ने दिल्ली को लगभग बंधक लिया था। अब उन प्रदर्शनों को दोहराने की कोशिश में पंजाब के किसान फिर से दिल्ली का रूख कर चुके हैं। हरियाणा के बॉर्डर पर पंजाब से आ रहे किसानों को शंभू प्वॉइंट पर रोक लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली में उनके घुसने की कोशिशों को विफल किया जा रहा है। इस बीच, केंद्र सरकार पूरी तरह से सक्रिय है और किसानों से लगातार बातचीत कर रही है। वहीं, 20 फरवरी 2024 को एक यू-ट्यूब चैनल से हरियाणा के किसानों ने किसान आंदोलन 1.0 को लेकर गहरी नाराजगी जताई है।

यूट्यूब चैनल न्यूज व्यूज से बातचीत में हरियाणा के किसानों ने पंजाब के किसानों को लेकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पंजाब से आए लोगों ने हरियाणा के युवाओं को उनकी राह से भटका दिया। उन्होंने उन्हें बहकाया और नशे का आदी बना दिया। किसानों ने बताया, “किसान आंदोलन 1.0 से पहले हरियाणा के युवाओं में ‘चित्ता’ का कोई नशा नहीं था। वो जानते भी नहीं थे कि ये आखिर है क्या चीज? हमारे बच्चे उन प्रदर्शनों के दौरान नसे के आदी बन गए। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?” जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि हेरोइन के नशे को ‘चित्ता’ कहते हैं, जो पंजाब में काफी गहरे तक जड़ें जमा चुका है।

हमें बेवकूफ बनाया

मीडिया से बातचीत करते हुए हरियाणा के किसाों ने कहा कि ये प्रदर्शन सिर्फ आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं। उन किसानों में से एक ने कहा, “उन्हें विदेशों से पैसे मिल रहे हैं। देश विरोधी गतिविधियाँ हो रही हैं। लेकिन हम वो सब फिर से नहीं (जो पिछली बार हुआ-नशे का फैलाव इत्यादि) होने देंगे। उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया। ऐसे में इस बार हम उन्हें समर्थन नहीं दे रहे।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पंजाब में अपने प्रधानमंत्री को खतरे में डाला, लेकिन ऐसा फिर से नहीं होगा।”
हरियाणा के किसानों ने प्रदर्शनकारियों के लगातार दिल्ली जाने की बात पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “सरकार जो कह (सरकार का ऑफर) रही, वो मान नहीं रहे। वो सिर्फ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ की रट लगाए पड़े हैं।” उन्होंने अन्ना आंदोलन के समय को याद करते हुए आगे कहा, “उस समय जो भी प्रदर्शन वाली जगह जा रहे थे, उनकी जाँच हो रही थी। सबकुछ आराम से चल रहा था। मैं गारंटी लेकर कहता हूँ कि शराब और ड्रग्स की सल्पाई रोक दी जाए, फिर देखो 4 दिन में सारे गायब हो जाएँगे।”
इस दौरान जब पत्रकार ने उसके पूछा कि किसान सरकार से भिड़ने की प्लानिंग कर चुके हैं, वो उन्हें रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेटिंग को उखाड़ने की तैयारी कर चुके हैं, इस पर किसान ने कहा, “अगर कोई देश में अव्यवस्था फैलाना चाहता है, तो सरकार भी कुछ सुरक्षा के कदम उठाती है। अगर उनके लिए रोड खोल दिए जाए, तो वो (प्रदर्शनकारी) उस रोड को जाम कर देंगे और अर्थव्यवस्था को ठप कर देंगे। इस क्षेत्र की हजारों कंपनियाँ ने इस इलाके को छोड़ (पहले किसान आंदोलन के समय) दिया। हजारों लोग बेरोजगार हो गए। उन (प्रदर्शनकारियों) ने पूरे इलाके को बर्बाद कर दिया। जो कंपनियाँ वापस नहीं आई, जो यहाँ से चली गई। हरियाणा के लोग एक बार फिर से इसके लिए (इन प्रदर्शनों के लिए, नुकसान के लिए) तैयार नहीं हैं।”
पत्रकार ने जब किसानों ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान ‘अन्नदाता’ हैं, तो हरियाणा के किसानों ने जवाब में कहा, ‘हर कोई दाता है। ड्राइवर भी दाता है। घर बनाने वाला मजदूर भी दाता है। अर्थव्यवस्था में सभी लोग अहम किरदार निभाते हैं। हर किसी का रोल अलग-अलग है।’ एक किसान ने इंडी गठबंधन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘विपक्षी गठबंधन और कॉन्ग्रेस ने I.N.D.I.A. नाम रख लिया, इसका मतलब ये नहीं कि वो चुनाव जीत ही जाएँगे।’ किसान ने आगे कहा, “सोचिए, अगर झारखंड देश को कोयला देना बंद कर दे, तो ये तथाकथित ‘पंजाब के अन्नदाता’ अपना कोई काम नहीं कर पाएँगे।”
किसानों ने कहा कि सरकार ने चौथे दौर की वार्ता के बाद एक बेहतरीन प्लान (4 फसलों पर 5 साल के लिए गारंटी) बनाया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उसे नकार दिया। उन्होंने कहा, “वो देश भर में अगले 15 दिनों में अव्यवस्था फैलान चाहते हैं। प्रदर्शन करने वाले लोग पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। वो सिर्फ वोट काटने आए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में जो मजदूर किसानों के खेतों में काम करते हैं, क्या उनके लिए भी इन लोगों (प्रदर्शनकारियों) ने पेंशन की माँग की? ये मामला सिर्फ किसानी का नहीं है। पंजाब में सबसे ज्यादा बंधुआँ मजदूर मिले हैं, उनके लिए क्या माँग कर रहे हैं?”
प्रदर्शन के दौरान किसानों की मौत से जुड़े सवाल पर किसान ने कहा, “हमारे गाँव में भी 4 लोगों की मौत हुई। अगर उनकी जान शराब पीकर या हार्ट अटैक से गई है, तो उन्हें शहीद नहीं कर सकते। एक काम करिए, आप 2 लाख लोगों को इकट्ठा करिए, कम से कम 4 लोग प्राकृतिक तरीके से दम तोड़ देंगे, इसका मतलब ये नहीं है कि उन सभी को शहीद बोला जाए।”

सभी तबकों का ध्यान रखे सरकार

एमएसपी के सवाल पर किसान ने कहा, “सरकार ने फसलों पर एमएसपी दी, जिसकी उसे जरूरत लगी। सरकार को पूरे देश के बारे में सोचना पड़ता है। सरकार को समाज के हर तबके के लिए काम करना पड़ता है। हर सवात किसानों के लिए फायदा चाहता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि समाज के अन्य वर्गों को अनदेखा कर दिया जाए।”

‘प्रधानमंत्री कोई तानाशाह नहीं’

इस दौरान पत्रकार ने जब पूछा कि कॉन्ग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहती है, तो किसानों ने कहा, “अगर किसी तरह की तानाशाही होती, तो किसान साल भर से ज्यादा समय नहीं बैठ पाते। लोगों को चौटाला का राज याद है? 50 गोलियाँ और 100 पुलिस वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन को खत्म कर देती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर पीएम मोदी तानाशाह होते, तो वो उन्हें पंजाब के एक फ्लाइओवर पर नहीं रोक पाते। क्या तुम्हें लगता है कि पीएम मोदी के पास ताकत नहीं है?” किसानों ने आरोप लगाया कि ये प्रदर्शन सिर्फ एक ही परिवार को फायदा पहुँचाने के लिए जुटे हुए हैं, ऐसे लोग भ्रष्टाचारी हैं और भ्रष्टाचार का समर्थन करते हैं।
किसानों ने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में जो जिस लायक है, उसे उस तरह का काम मिल रहा है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक विचारधारा का है। किसानों ने कहा, “कोई काबिल है, तो उसे काम मिल रहा है। ये सरकार ऐसी नहीं है, जिसमें सिर्फ घूसखोरों को नौकरी मिले।”

राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को न मिले अनुमति

एक किसान ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो लोग भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहिए। हमारे सामने कोई खालिस्तानी नारे लगाएगा या हमारे प्रधानमंत्री के लिए अभद्र बातें करेगा, तो हम उसे छोड़ेगे नहीं। राष्ट्र ध्वज और लाल किला हमारे गर्व हैं। हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि कोई लाल किले पर जाए और अपनी पसंद का झंडा फहरा आए।” उन किसानों में से एक ने कहा, “हरियाणा के किसान इस बात को समझ चुके हैं कि पंजाब सरकार हमारे साथ धोखा कर रही है। वो हमारा इस्तेमाल कर रही है। वो हमें सामने रखकर सबकुछ करना चाहती है, पता है क्यों? क्योंकि हम लोग इमोशनल हैं।”

किसान आंदोलन 1.0 के दौरान हरियाणा के युवा हुए बर्बाद

किसान ने आगे कहा, ‘मैंने एक लोकल नेता का इंटरव्यू सुना, उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे नशेड़ी बन गए। पिछले प्रदर्शन से पहले कोई भी लड़का ‘चिट्टा’ का नशेड़ी नहीं था। उन्हें तो पता भी नहीं था कि ये होता क्या है? हमारे बच्चे इन प्रदर्शनों के दौरान नशे में डूब घए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हम उन्हें इसलिए नहीं सपोर्ट कर रहे, क्योंकि हमें अपने बच्चों को नशे से बचाना है। ‘
उन्होंने कहा कि अगर इन प्रदर्शनों के दौरान हरियाणा के किसी युवा की जान जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? “वो लोग तो उसे शहीद बता देंगे, लेकिन किसान घोषित कर देने भर से हम उसे वापस नहीं ला पाएँगे न?” उन्होंने आगे कहा, “प्रदर्शनकारी पेंशन चाहते हैं। वो लोन माफी चाहते हैं। ठीक है, हम ये बात समझते हैं। लेकिन आम नागरिकों पर इसके बदले में जो 14-20 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा, उसका क्या? हमें लिखित में दें कि टैक्स पेयर्स की पैसों से लोनमाफी नहीं दी जाएगी, फिर उन लोगों को एमएसपी दे दें।”
एक किसान ने कहा, “पिछली बार उन लोगों ने (पंजाब के किसानों ने) कहा था कि वो SYL मुद्दे पर भी बातचीत करेंगे, लेकिन उन्होंने नहीं किया। उन्होंने फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। पहले वो पानी समझौते के मुद्दे पर बात करें, फिर हम प्रदर्शनों के बारे में बात करेंगे। “

केंद्र सरकार और किसानों के बीच पाँचवें दौर की वार्ता जल्द

किसानों के साथ चौथे दौर की वार्ता में केंद्र सरकार ने रविवार (18 फरवरी 2024) को नए प्रस्ताव दिए थे, जिसके बाद किसानों ने कहा था कि वो बातचीत करके सरकार को सूचित कर देंगे। सरकार ने अपनी तरफ से चौथे दौर की वार्ता के दौरान जो प्रस्ताव दिया था, उसमें एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट की बात कही थी। जिसमें ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होनी थी। इसमें खरीद की लिमिट भी नहीं रहेगी। सरकार ने इसमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास को जोड़ने और खरीद के लिए पाँच साल की गारंटी की बात कही थी।
इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। हालाँकि बाद में किसानों ने कहा था कि उन्हें एमएसपी से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है।