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झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार क्यों हैं खामोश? कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब गला फाड़ रहे थे

रवीश कुमार… यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। खुद को निष्पक्ष पत्रकार कहने वाले रवीश कुमार असल में प्रोपोगेंडा की दुकान चलाने वाले पत्रकार हैं। ये अपनी छवि चमकाने और मोटी कमाई करने के लिए सिर्फ वही मुद्दे उठाते हैं जिससे इनका एजेंडा पूरा हो सके। जब बात इनके आकाओं को खुश करने की हो, तो यह अपनी कलम और माइक का पूरा इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जहाँ इनके मालिकों को गुस्सा आने का डर होता है, वहाँ इनकी बोलती बंद हो जाती है। दिल्ली में हुए हालिया कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और झारखंड के पेपर लीक मामले पर इनकी चुप्पी इस दोमुँही पत्रकारिता का सबसे बड़ा सबूत है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब बहाए थे आँसू

 दिल्ली में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान रवीश कुमार का असली रंग पूरी तरह से सामने आ गया था। इस प्रदर्शन को हवा देने के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का जमकर इस्तेमाल किया। उनके यूट्यूब चैनल पर सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़े 15 से ज्यादा वीडियो भरे पड़े हैं। इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम पर अलग से Reels शेयर की गईं और X पर लगातार भ्रामक पोस्ट किए गए।

इन वीडियोज के जरिए आम जनता को भड़काने की पूरी कोशिश की गई। प्रधानमंत्री को निशाना बनाया गया और विरोध प्रदर्शन के नाम पर उत्पात मचाने वाले दंगाइयों का खुला समर्थन किया गया। हद तो तब हो गई जब दिल्ली पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले उपद्रवियों को रवीश कुमार ने बेचारा और लाचार साबित करते हुए बचाने की पूरी कोशिश की। सच्चाई से कोसो दूर रहकर उन्होंने इस पूरे ड्रामे को ऐसे दिखाया जैसे वे कोई बहुत बड़े क्रांतिकारी हों। हाथों में पत्थर-लाठी लिए और मुँह में भरी गाली-गलौज के साथ उत्पात मचाने वालों को ये छात्र कहते नजर आए थे।

इसके अलावा, रवीश कुमार ने सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। संसद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और जवानों पर पथराव करने वाले, मॉब लिंचिंग करने वाले, सड़क पर घेरकर मारपीट करने वाले और तो और हथियार लहराकर धमकी देने वाले उपद्रवियों को प्रोपेगेंडाई रवीश कुमार छात्र कहते रहे। रवीश कुमार ने एक X पर पोस्ट, Video या अपनी Reel में दिल्ली पुलिस का कहीं बचाव या उनके काम की सराहना नहीं की थी। उल्टा देश की सुरक्षा करने वालों को ही अपराधी कहकर लोगों को घुमराह करते रहे।

झारखंड पेपर लीक पर अचानक क्यों सूंघ गया साँप?

रवीश कुमार का एक नजरिया यहाँ भी देख लेते हैं। जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन खत्म हुआ, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, दिल्ली का माहौल जमकर खराब किया, उसके बाद इन भाईसाहब को साँप सूंघ गया। और अब देश में युवाओं के भविष्य से जुड़ा झारखंड पेपर लीक का गंभीर मुद्दा सामने आया, रवीश कुमार की सारी पत्रकारिता हवा हो गई। इनके किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झारखंड से जुड़ा एक भी शब्द लिखा नहीं मिलेगा।

रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल को खंगालकर देखा। उनके पिछले कुछ दिनों के वीडियोज की लिस्ट देखी। पिछले 8 दिनों में उनके चैनल पर अपलोड किए गए आखिरी 9 वीडियोज के टॉपिक आपको इन मुद्दों पर मिलेंगे, जिनमें उनकी पत्रकारिता चमकेगी। इसमें प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, संसद से क्यों गायब रहे अमित शाह?, क्यों डूब रहा असम?, अमित शाह इस्तीफा दें- राहुल गाँधी, यही हैं हमारे नए शिक्षा मंत्री, संसद में पेपर लीक पर बहस, पुलिस हिंसा पर नई रिपोर्ट, जेनरेशन गटर!? यह क्या कंगना?, झुक गई बिहार सरकार, जेन जी होंगे रिहा और भगवा भरोसे बीजेपी…

इन सभी वीडियोज में आपको सरकार को घेरने वाले तमाम मसाले मिल जाएँगे, लेकिन झारखंड के छात्रों के दर्द पर एक भी वीडियो नहीं मिलेगा। बता दें कि फिल्हाल रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल पर 14.8 मिलियन सब्सक्राइबर है और कुल वीडियो 1.6K डाली गई है। बात करें इंस्टाग्राम की तो रवीश कुमार के इंस्टाग्राम पर फॉलोवर्स 4.9 मिलियन है और कुल पोस्ट 2900 से ज्यादा है। इसके अलावा, रवीश कुमार के X हैंडल (पहले ट्विटर) पर फॉलोवर्स की संख्या 4.2 मिलियन है और 49.2K पोस्ट है।

फायदे की पत्रकारिता और आकाओं को खुश करने की मजबूरी

सवाल यह उठता है कि आखिर झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार ने पूरी तरह चुप्पी क्यों साध रखी है? इसका सीधा सा जवाब है कि इस मुद्दे से उन्हें या उनके आकाओं को कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला है। अगर वे इस पर बोलेंगे, तो शायद उनके अपने लोग ही नाराज हो जाएँगे।

रवीश कुमार केवल उन्हीं मुद्दों पर अपना गला फाड़ते है जहाँ उन्हें लगता है कि इससे बीजेपी को बदनाम किया जा सकता है। जहाँ हिंसा करने वालों या हंगामा मचाने वालों को हीरो बनाया जा सकता है, वहाँ ये सबसे आगे रहते हैं। लेकिन जहाँ सचमुच देश के युवाओं का नुकसान हो रहा हो, वहाँ ये अपनी आँखें मूँद लेते हैं।

इस पूरी स्थिति से यह साफ हो जाता है कि रवीश कुमार जैसे लोग पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ अपना दुकान चला रहे हैं। दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, दंगाइयों के सिर पर हाथ रखना और पुलिस का अपमान करना इनके एजेंडे का हिस्सा था। लेकिन झारखंड के युवाओं के भविष्य की जब बात आई, तो इनका मौन इनकी असलियत बयाँ कर रहा है। जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है और ऐसे चेहरों के दोगलेपन को अच्छी तरह पहचानती है।

CJP आम आदमी पार्टी की B-टीम है : कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व समर्थक ने खोली सारी पोल

        कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने खोली AAP नेताओं की पोल (फोटो साभार : News18
वो कहावत है ना… देर आए, दुरुस्त आए। ये ही कहावत अब कॉकरोच जनता पार्टी में देखने को मिल रही है। जी हाँ, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग का मुद्दा अब कहीं भटकता दिखाई दे रहा है। तिलचट्टों के ग्रुप में अब कलह पैदा होती दिख रही है। सीजेपी में अब उनके ही प्रदर्शनकारी पार्टी पर आरोप लगाते दिखाई नजर आ रहे हैं। आंदोलन में लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने संगठन और उसके AAP नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत में वीरू भाई ने खुलासा किया कि वह करीब एक महीने तक इस आंदोलन से जुड़े रहे, लेकिन अब उन्होंने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन से अलग कर लिया है। उनका सीधा आरोप है कि खुद को गैर-राजनीतिक बताने वाली सीजेपी असल में आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने आंदोलन में असामाजिक तत्वों के घुसने का भी दावा किया है। 

इस पार्टी के बनने पर सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि इसमें छात्र कम असामाजिक तत्वों का जमावड़ा है। राहुल गाँधी पहले ही देश में माजिस दिखाने की देर की बात कर रहा था, इस आदमी ने मिले LoP पद की गरिमा को ही तार-तार कर दिया है।   

टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि वे एक महीने पहले बिहार में अपना घर छोड़कर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। उनके परिवार ने बार-बार उन्हें इसमें शामिल न होने की सलाह दी थी और कहा था कि सीजेपी ‘केवल नाटक कर रही है’, लेकिन वे इस उम्मीद में अड़े रहे कि सीजेपी शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्ष कर रही है।

आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत के दौरान वीरू भाई ने बताया कि आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को काफी उम्मीदें थीं। उन्हें लगता था कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेता इस प्रदर्शन में उनका साथ देंगे। लोगों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेता मार्च में समर्थन करने जरूर आएँगे।

लेकिन ऐन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोई भी बड़ा नेता वहाँ नहीं पहुँचा। पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने गद्दार पार्टी AAP से सवाल किया कि अगर आम आदमी पार्टी सच में इस आंदोलन का समर्थन कर रही थी, तो फिर उसका कोई भी सांसद प्रदर्शन में शामिल होने क्यों नहीं आया।

छात्रों और महिलाओं को आगे कर खुद पीछे छुपे सीजेपी वाले

पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य मुख्य नेताओं पर आंदोलनकारियों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ झड़प के समय कोई भी बड़ा नेता आगे नहीं आया। आयोजकों ने खुद पीछे रहकर महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे आगे धकेल दिया।

इसी कारण भटके नौजवानों और युवाओं ने पहली बार आंदोलन में भाग लिया और अंत में उन्हें परेशानी का सामना खुद करना पड़ा। सही नेतृत्व न मिलने के कारण छात्रों को पुलिस की कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ी। नेताओं की इस रणनीति से कई युवा छात्र जख्मी हो गए।

संसद मार्च की अनुमति न होने के बावजूद जोखिम लेने पर सवाल

पूर्व प्रदर्शनकारी ने पुलिस कार्रवाई के दौरान नेताओं की भूमिका पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि ‘संसद चलो’ मार्च की कोई अनुमति नहीं है। पुलिस ने रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग भी कर रखी थी।

इसके बावजूद आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए उकसाया। जब सब जानते थे कि आगे खतरा है, तब भी आम लोगों को बैरिकेड्स तोड़ने के लिए आगे क्यों भेजा गया। नेताओं की इस लापरवाही के कारण ही स्थिति इतनी खराब हुई।

20 जुलाई के संसद मार्च में हुई हिंसा का पूरा लेखा-जोखा

यह पूरा विवाद 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के बाद शुरू हुआ है। सीजेपी के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर सड़क पर उतरे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई थी।

दिल्ली पुलिस के अनुसार इस हिंसा में कुल 178 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा था।

मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग; व्हाट्सएप्प ग्रुप से बड़ा खुलासा, CJP के प्रदर्शन में मौत की प्लानिंग, प्रदर्शनकारियों को JNU से मिले हिंसा के निर्देश


कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई, 2026 को संसद मार्च के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई। इस हिंसा में 6 आईपीएस अधिकारी और 118 पुलिस के जवान घायल हुए। पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई है और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस व्हाट्सएप्प ग्रुप, मोबाइल वीडियो, CCTV, ड्रोन कैमरे और पुलिस बॉडी कैमरे की फुटेज की जांच कर रही है। इस जांच में जो बातें अब तक खुलकर सामने आ रही हैं, वो काफी हैरान और परेशान करने वाली है। कुछ व्हाट्सएप्प ग्रुप में केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए मौत की प्लानिंग की गई थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मारने की बात कही जा रही थी।
जो-जो लोग भी आज के हिंसक आंदोलन में शामिल थे और खूब उपद्रव किए, अब उनकी पिता की सात पीढ़ियाँ याद आ जाएंगी।
जो-जो उछलने गए थे, वहाँ अब तुम उछल लिए। अब तुम्हें एक-एक करके पुलिस और कानून सबक सिखाएगा। अब पूरी उम्र तुम कोर्ट-कचहरी दौड़ोगे। और जो-जो उपद्रवी नेता तुम्हें उकसाए थे, वे तुम्हारा हाल तक नहीं पूछेंगे।
और अब पुलिस ने 70 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। जिन-जिन ने हिंसक उपद्रव किया है, अब सबका घर-परिवार बर्बाद हो जाएगा। पुलिस उपद्रवियों की पहचान भी वीडियो के माध्यम से कर रही है।
मीडिया चैनल बता रहे हैं कि इस उपद्रव में पाकिस्तान कनेक्शन की भी जाँच कर रही है पुलिस।
हम लोग इसीलिए सामान्य वर्ग को समझा रहे थे कि यह छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि उपद्रवियों का आंदोलन है। उपद्रव ये जरूर करेंगे, लेकिन उपद्रव खत्म होते ही पुलिस एक-एक को ढूँढेगी और फिर उसका घर-परिवार तबाह हो जाएगा।
अब पुलिस जिन जिन उपद्रवियों को चिन्हहित करके FIR कर रही है अब आप लोग बताओ इनका मुकदमा पूरी उमर ये और इनका परिवार लड़ेगा या वो वो नेता लड़ेंगे जो इनको उकसाकर उपद्रव करवाये।
और समान्यवर्ग के लोग ये ध्यान देंगे कि यदि कोई समान्यवर्ग का इस उपद्रव में यदि पकड़ा गया या FIR हुआ तो उसकी मदत किसी समान्यवर्ग को नही करना है इनके अकेले ही झेलने दो

चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप में मौत की प्लानिंग
छात्रोंं के नाम पर प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से निर्देश दिए जा रहे थे। उन्हें समझाया जा रहा था कि कैसे प्रदर्शन करना है। सोशल मीडिया में चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप का चैट वायरल हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे। एक चैट में akak नाम के हैंडल ने कहा, “भाई अगर किसी की मौत होती है तो उसमें तो सरकार पर ज्यादा दबाव आएगा।” 

akak के हैंडल से आगे लिखा गया, ” देखो यार जो जान देने तक को तैयार वो ये सुन लो, कम से कम तुम्हारा एहसान तो रहेगा आने वाली पीढ़ियों पर, आने वाले बच्चों पर, वो सुनेंगे की मेरा भाई उस प्रोटेस्ट में मारा गया, उस लड़ाई में मारा गया। याद किए जाओंगे। बहुत अच्छा लग रहा है ये देखकर वो जान तक देने को तैयार है भाई लोग।” इस चैट से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों की कितनी खतरनाक साजिश थी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस के धैर्य ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। 

JNU से संचालित हो रहा था CJP का प्रदर्शन
एक दूसरे व्हाट्सएप्प ग्रुप का नाम JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन है, जिसमें कई आपत्तिजनक पोस्ट किए गए हैं। पुनीत सुलाख के हैंडल से प्रदर्शनकारियों यानी वामपंथी छात्रों यानी कॉमरेड्स को कई निर्देश दिए गए। इसमें जो लिखा गया, आप खुद पढ़ सकते हैं…

मित्रों और कॉमरेड,
पुलिस विरोध प्रदर्शन को रोकने/कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रही है। हमें पता चला है कि पुलिस हमें रोकने के लिए सुबह-सुबह जेएनयू (JNU) के सभी गेट बंद कर सकती है। सभी से अनुरोध है कि यदि आप अगले 2-3 घंटों में कैंपस छोड़ दें और रात 2-3 बजे तक जंतर-मंतर पहुंच जाएं, तो बहुत अच्छा होगा। इसके विकल्प के रूप में, जेएनयूएसयू (JNUSU) और हमारे संगठन का नेतृत्व सुबह 4 बजे से गंगा ढाबा पर मौजूद रहेगा, वहां से हम 4-5 लोगों के छोटे समूहों में बाहर निकल सकते हैं।

सामान्य निर्देश:

जूते और आरामदायक कपड़े पहनें।

फोन को अच्छी तरह चार्ज रखें और यदि संभव हो तो पावर बैंक साथ रखें।

इसके बाद भी समूहों में रहें…

कौन हैं पुनीत सुलाख ?
प्रदर्शनकारियों को निर्देश देने वाले पुनीत सुलाख जेएनयू के बी-टेक फाइनल ईयर के छात्र हैं। ये School of Engineering के ‘पर्सपेक्टिव्स – वाद-विवाद क्लब’ [Perspectives – Debating Club] में उपाध्यक्ष भी रहे हैं।

Briar और Bitchat ऐप डाउनलोड करने और जुड़े रहने का निर्देश
JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन व्हाट्सएप्प ग्रुप के एक अन्य सदस्य अंजलि ने निर्देश दिया, ” विरोध प्रदर्शन (प्रदर्शन स्थल) वाली जगह पहुँचने के बाद शायद आपके डिवाइस (मोबाइल) में नेटवर्क न मिले। पिछली बार भी पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था और इस बार भी वे ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, आप जिस समूह के साथ आए हैं, उसके साथ जुड़े रहना बहुत ज़रूरी है। Briar, bitchat या ऐसी ही कोई अन्य ऐप डाउनलोड कर लें। ये नेटवर्क बंद होने पर भी ब्लूटूथ सिग्नल पर काम करते हैं, ताकि कोई भी आपके कनेक्शन को न देख सके। सुनिश्चित करें कि आपके समूह के सभी लोगों के पास एक ही ऐप इंस्टॉल हो और प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने से पहले ही वे आपस में जुड़ (कनेक्ट हो) चुके हों।”

प्रदर्शनकारियों को मरने के लिए उकसाने की कोशिश
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को गाली देते हुए प्रदर्शनकारियों को भड़काने की कोशिश की गई है। वीडियो में एक नकाबपोश व्यक्ति को कहते सुना जा सकता है, “जब पुलिस लाठीचार्ज करे तो तुम लोग भाग क्यों रहे हो…अरे कायर हो क्या तुम…इन हिजड़े पुलिस वालों की लाठियों से तुम मर जाओंगे क्या ? अरे, मर भी जाओंगे तो देश के लिए प्रोटेस्ट करने के लिए गए हो शहीद हो जाओंगे…मेरे भाइयों पीठ दिखाकर मत भागो तुम…इतिहास तुम्हें कायर बोलेगा कायर…तो फिर तुम्हारे बाल बचे देखेंगे तो कायर बोलेंगे। मेरे पापा मेरे भाई पुलिस की लाठी देखकर पीठ दिखाकर भागे थे।”

पीएम मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी पीएम मोदी को गाली दे रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी तो प्रधानमंत्री मोदी को मारने की प्लानिंग कर रहा है। उसे कहते सुना जा सकता है, “मोदी या तो इस्तीफा दे दें…उसके खाने में जहर का इंतजाम करो और खत्म करो कहानी।
मोदी का इलाज यही है कि यहां भेज दो एकबार…या कोई जुगाड़ करो खाने का…जहर मिलाओ…जो हार्ट अटैक में भी पोस्टमार्टम में पता नहीं चले कि कैसे मर गया।”

इस प्लानिंग का असर किस तरह सड़कों पर दिखाई दिया…प्रदर्शनकारी  किस तरह मरने और मारने पर उतारू थे…

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सड़कों को बनाया युद्ध का मैदान 
सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस की गाड़ी पर पत्थराव करते हुए देखा जा सकता है…वो जिस तरह गाड़ी पर पत्थरों की बारिश कर रहे हैं…उससे पता चलता है कि उन्हें जो निर्देश दिया गया है, उसे वो बखूबी पालन करते हुए दिख रहे हैं।

 

कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पर पत्थरबाजी

बाउंड्री और फुटपाथ में लगी ईंटें तोड़ते प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन से भागते हुए पकड़ा गया विजेता दहिया
जब प्रदर्शनकारी दिल्ली की सड़कों को युद्ध का मैदान बना रखे थे, तब सीजेपी का प्रवक्ता विजेता दहिया प्रदर्शन से गायब था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विजेता दहिया को भागते हुए पकड़ लिया और पूछा, “आप प्रदर्शन में क्यों नहीं गए…मैं जंतर-मंतर पर गया, आप क्यों नहीं गए। वहां सब लाठी खा रहे हैं और आप घूम रहे हों। ये कौन सा सपोर्ट कर रहे हो। बाबा को गाली दे रहे हो…आप कर क्या रहो हो ? आप गाली दे रहो और यहां क्या कर रहे हो।”

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पकड़े जाने के बाद बोला विजेता दहिया- प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ?
विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें उसे कहते हुए सुना जा सकता है कि प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ? तुमने इसे इलेक्ट किया है, इस पोजिशन के लिए, सरकार अकाउंटेबल ठहराते, तुम्हारी जो नॉनसेंस थिंकिंग है तो उसमें मुझे नहीं फंसना, मुझे कोई पॉलिटिक्स में नहीं आना। तुम्हारे जैसे बेवकूफों को अपिज करूं।

प्रदर्शन में शामिल हुआ ‘हिस्ट्रीशीटर’ हाजी अफजल


हाजी अफजल उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके से संबंधित हैं और पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें ‘हिस्ट्रीशीटर’ के रूप में दर्ज किया गया है। उन पर मकोका (MCOCA) और अन्य आपराधिक मामलों के तहत आरोप लगे हैं। हाल ही में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवकों के साथ उनकी मौजूदगी की खबरों और वीडियो के कारण वे चर्चा में रहे थे।

न सरकार ने ‘CJP’ से साधा कोई संपर्क, न तय हुई कोई मुलाकात: साख बचाने के लिए झूठ बोल रहा सौरव दास; संसद तक पहुँची ‘कॉकरोचों’ की भीड़, पुलिस पर भी CJP समर्थकों ने किया हमला: देखें Videos

20 जुलाई को जंतर मंतर से लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट तक INDI गठबंधन के सहयोग से जो उपद्रव मचा उसे विपक्ष खासतौर से आम आदमी पार्टी अपनी जीत मान रहा है। जबकि उसने इस उपद्रव से बांग्लादेश और नेपाल में मची खुलेआम हुई गुंडागर्दी को अंजाम देने के मंसूबों को जाहिर कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी दे मारी है। अंग्रेजी दैनिक 'द हिन्दू' भी आग में घी डालने से पीछे नहीं रहा। विपक्ष और 'द हिन्दू' ने यह भी साबित कर दिया कि भारत विरोधी ताकतों को हवा देकर भारत में उपद्रवियों की हर संभव मदद करने में पीछे नहीं रहेंगे। अभी तक यह सच्चाई भी सामने नहीं कि आखिर इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' का संरक्षण कौन है?  

जिस तरह कांग्रेस की स्थापना उस विदेशी अंग्रेज़ ने की थी उसी तरह इस उपद्रवी पार्टी की स्थापना भी एक विदेशी ने ही की है। गौरतलब बात यह है कि जब विदेशी अंग्रेज़ द्वारा कांग्रेस की स्थापना की गयी थी ब्रिटिश सरकार ने उसे देश विरोधी नहीं कहा क्योकि कांग्रेस का गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आज़ाद और भगतसिंह पार्टी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी जा रही थी उससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया था। ठीक उसी तरह विकासशील भारत में अड़चने डालने के लिए इस उपद्रवी पार्टी का गठन किया गया है। देखना यह है कि क्या यह पार्टी अपने साथ विपक्ष को भी लेकर डूबेगी? यह भविष्य के गर्भ में छिपा है।

          

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जुटे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थक मार्च करते हुए सोमवार (20 जुलाई) को संसद तक पहुँच गए। इस दौरान कॉकरोचों ने न केवल पार्लिएमेंट में घुसने की कोशिश की, बल्कि बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया और पुलिस से भिड़ने की भी कोशिश की।

स्थिति बिगड़ते देख संसद भवन की सुरक्षा अत्यंत कड़ी कर दी गई है और सभी मुख्य प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया। उपद्रवी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की पूर्व नियोजित रणनीति संसद परिसर के भीतर प्रवेश करने की थी। प्रदर्शन में शामिल सीजेपी समर्थक बयान दे रहे थे कि एकजुट होकर केंद्र की मोदी सरकार को गिरा दी जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान समर्थकों के हाथों में भीम आर्मी के झंडे देखे गए। लोगों को ‘जय भीम’ के नारे लगाते हुए देखा गया

घटना के सामने आए वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारी पुलिस बल पर पथराव करते साफ नजर आ रहे हैं। इस दौरान उपद्रवियों को खुलेआम यह कहते सुना गया, “पत्थरबाजी तो होगी ही।”

कॉकरोच जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन से पहले दावा किया था कि वह एक पीसफुल प्रोटेस्ट करेंगे। हालाँकि 20 जुलाई को दिखी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि मंशा कुछ अलग है। इस प्रदर्शन में पत्रकारों से लेकर पुलिस पर हमला हुआ। तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर आ चुकी हैं। इस दौरान सुनियोजित ढंग से भीम आर्मी के एजेंडे को बढ़ाया गया।

न सरकार ने ‘CJP’ से साधा कोई संपर्क, न तय हुई कोई मुलाकात: साख बचाने के लिए झूठ बोल रहा सौरव दास, सरकारी सूत्रों ने मीडिया दावों को नकारा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने 20 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ बातचीत का जो दावा कर सुर्खियाँ बटोरीं थी वो असल में फर्जी निकली हैं। सौरव दास ने X पर पोस्ट करके कहा था कि मोदी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए संपर्क किया है और वह और आशुतोष रंका CJP की ओर से केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा से मिलने जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सुबह ही उनसे बातचीत के लिए संपर्क किया था, युवाओं का बड़ा जमावड़ा उनके साथ है और पार्टी की माँगें पूरी तरह स्पष्ट हैं।

इस खबर को ‘द हिंदू’ की पत्रकार विजइता सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर प्रमुखता से आगे बढ़ाया।

उन्होंने अपने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा केंद्र सरकार की ओर से CJP टीम से बातचीत कर रहे थे। साथ ही ये भी कहा कि CJP सदस्यों को पहले जिला मजिस्ट्रेट, फिर केंद्र सरकार के एक सचिव और उसके बाद राज्य मंत्री स्तर के अधिकारियों के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था। मगर, CJP सदस्यों ने इन सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया क्योंकि उनकी माँग थी कि उनकी सीधी बातचीत केवल प्रधानमंत्री या किसी कैबिनेट मंत्री के साथ ही हो, और उन्होंने इसके लिए डीसीपी को मंत्रियों के नामों की एक सूची भी सौंपी थी।

हालाँकि, इस पूरे घटनाक्रम में तब नया मोड़ आया जब यह स्पष्ट हुआ कि सौरव दास और उनका समर्थन करने वाले पत्रकारों के ये दावे कथित रूप से असत्य थे। ऑपइंडिया को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सौरव दास द्वारा किए गए सभी दावे पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं।

सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार की ओर से CJP या प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए ऐसा कोई संपर्क नहीं साधा गया था और न ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सौरव दास के बीच किसी भी प्रकार की कोई बैठक या मुलाकात तय थी।

गौरतलब हो कि पूरा सच सामने आने के बाद अब ये दावा हो रहा है कि प्रदर्शन की विफलता को देखते हुए जीत का झूठा दावा किया गया और अपनी साख बचाने के मकसद से यह अफवाह फैलाई गई थी।