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झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार क्यों हैं खामोश? कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब गला फाड़ रहे थे

रवीश कुमार… यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। खुद को निष्पक्ष पत्रकार कहने वाले रवीश कुमार असल में प्रोपोगेंडा की दुकान चलाने वाले पत्रकार हैं। ये अपनी छवि चमकाने और मोटी कमाई करने के लिए सिर्फ वही मुद्दे उठाते हैं जिससे इनका एजेंडा पूरा हो सके। जब बात इनके आकाओं को खुश करने की हो, तो यह अपनी कलम और माइक का पूरा इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जहाँ इनके मालिकों को गुस्सा आने का डर होता है, वहाँ इनकी बोलती बंद हो जाती है। दिल्ली में हुए हालिया कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और झारखंड के पेपर लीक मामले पर इनकी चुप्पी इस दोमुँही पत्रकारिता का सबसे बड़ा सबूत है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर खूब बहाए थे आँसू

 दिल्ली में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान रवीश कुमार का असली रंग पूरी तरह से सामने आ गया था। इस प्रदर्शन को हवा देने के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का जमकर इस्तेमाल किया। उनके यूट्यूब चैनल पर सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़े 15 से ज्यादा वीडियो भरे पड़े हैं। इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम पर अलग से Reels शेयर की गईं और X पर लगातार भ्रामक पोस्ट किए गए।

इन वीडियोज के जरिए आम जनता को भड़काने की पूरी कोशिश की गई। प्रधानमंत्री को निशाना बनाया गया और विरोध प्रदर्शन के नाम पर उत्पात मचाने वाले दंगाइयों का खुला समर्थन किया गया। हद तो तब हो गई जब दिल्ली पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले उपद्रवियों को रवीश कुमार ने बेचारा और लाचार साबित करते हुए बचाने की पूरी कोशिश की। सच्चाई से कोसो दूर रहकर उन्होंने इस पूरे ड्रामे को ऐसे दिखाया जैसे वे कोई बहुत बड़े क्रांतिकारी हों। हाथों में पत्थर-लाठी लिए और मुँह में भरी गाली-गलौज के साथ उत्पात मचाने वालों को ये छात्र कहते नजर आए थे।

इसके अलावा, रवीश कुमार ने सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। संसद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और जवानों पर पथराव करने वाले, मॉब लिंचिंग करने वाले, सड़क पर घेरकर मारपीट करने वाले और तो और हथियार लहराकर धमकी देने वाले उपद्रवियों को प्रोपेगेंडाई रवीश कुमार छात्र कहते रहे। रवीश कुमार ने एक X पर पोस्ट, Video या अपनी Reel में दिल्ली पुलिस का कहीं बचाव या उनके काम की सराहना नहीं की थी। उल्टा देश की सुरक्षा करने वालों को ही अपराधी कहकर लोगों को घुमराह करते रहे।

झारखंड पेपर लीक पर अचानक क्यों सूंघ गया साँप?

रवीश कुमार का एक नजरिया यहाँ भी देख लेते हैं। जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन खत्म हुआ, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, दिल्ली का माहौल जमकर खराब किया, उसके बाद इन भाईसाहब को साँप सूंघ गया। और अब देश में युवाओं के भविष्य से जुड़ा झारखंड पेपर लीक का गंभीर मुद्दा सामने आया, रवीश कुमार की सारी पत्रकारिता हवा हो गई। इनके किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झारखंड से जुड़ा एक भी शब्द लिखा नहीं मिलेगा।

रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल को खंगालकर देखा। उनके पिछले कुछ दिनों के वीडियोज की लिस्ट देखी। पिछले 8 दिनों में उनके चैनल पर अपलोड किए गए आखिरी 9 वीडियोज के टॉपिक आपको इन मुद्दों पर मिलेंगे, जिनमें उनकी पत्रकारिता चमकेगी। इसमें प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, संसद से क्यों गायब रहे अमित शाह?, क्यों डूब रहा असम?, अमित शाह इस्तीफा दें- राहुल गाँधी, यही हैं हमारे नए शिक्षा मंत्री, संसद में पेपर लीक पर बहस, पुलिस हिंसा पर नई रिपोर्ट, जेनरेशन गटर!? यह क्या कंगना?, झुक गई बिहार सरकार, जेन जी होंगे रिहा और भगवा भरोसे बीजेपी…

इन सभी वीडियोज में आपको सरकार को घेरने वाले तमाम मसाले मिल जाएँगे, लेकिन झारखंड के छात्रों के दर्द पर एक भी वीडियो नहीं मिलेगा। बता दें कि फिल्हाल रवीश कुमार के यूट्यूब चैनल पर 14.8 मिलियन सब्सक्राइबर है और कुल वीडियो 1.6K डाली गई है। बात करें इंस्टाग्राम की तो रवीश कुमार के इंस्टाग्राम पर फॉलोवर्स 4.9 मिलियन है और कुल पोस्ट 2900 से ज्यादा है। इसके अलावा, रवीश कुमार के X हैंडल (पहले ट्विटर) पर फॉलोवर्स की संख्या 4.2 मिलियन है और 49.2K पोस्ट है।

फायदे की पत्रकारिता और आकाओं को खुश करने की मजबूरी

सवाल यह उठता है कि आखिर झारखंड पेपर लीक पर रवीश कुमार ने पूरी तरह चुप्पी क्यों साध रखी है? इसका सीधा सा जवाब है कि इस मुद्दे से उन्हें या उनके आकाओं को कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलने वाला है। अगर वे इस पर बोलेंगे, तो शायद उनके अपने लोग ही नाराज हो जाएँगे।

रवीश कुमार केवल उन्हीं मुद्दों पर अपना गला फाड़ते है जहाँ उन्हें लगता है कि इससे बीजेपी को बदनाम किया जा सकता है। जहाँ हिंसा करने वालों या हंगामा मचाने वालों को हीरो बनाया जा सकता है, वहाँ ये सबसे आगे रहते हैं। लेकिन जहाँ सचमुच देश के युवाओं का नुकसान हो रहा हो, वहाँ ये अपनी आँखें मूँद लेते हैं।

इस पूरी स्थिति से यह साफ हो जाता है कि रवीश कुमार जैसे लोग पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ अपना दुकान चला रहे हैं। दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, दंगाइयों के सिर पर हाथ रखना और पुलिस का अपमान करना इनके एजेंडे का हिस्सा था। लेकिन झारखंड के युवाओं के भविष्य की जब बात आई, तो इनका मौन इनकी असलियत बयाँ कर रहा है। जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है और ऐसे चेहरों के दोगलेपन को अच्छी तरह पहचानती है।

US-इजरायली हमले के बाद भारतीयों ने खुलकर की ईरान की मदद, लेकिन ईरानी जला रहे तिरंगा झंडा: Video पर भड़के आम लोग, नमकहरामी का लगा रहे आरोप

                                                         साभार: एक्स @SouleFacts
ईरान के लिए छाती पीटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों और खुलकर मदद करने वालों अगर जरा भी शर्म बची है तो कहीं डूब मरो। जिन नमकहरामों के लिए तुमने मदद भेजी देखो तुम्हारे ही देश के झंडे को जलाया जा रहा है। क्या भारतीय झंडे के अपमान के लिए ईरान के लिए छाती पीट रहे हो और अपनी मेहनत की कमाई लुटा रहे हो? यहाँ तो बोलते हो हम गरीब हैं, मजलूम हैं और आतंकवाद को पालने वाले को मदद भेज रहे हो? क्या किसी ने ईरान उच्चायोग से विरोध जताया?      

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद भारत में कई कट्टरपंथियों ईरान के समर्थन में आवाज उठाई थी। सोशल मीडिया पर ईरान के पक्ष में पोस्ट किए गए, मदद की अपील की गई और कुछ लोगों ने आर्थिक सहायता भेजने की भी बात कही। लेकिन अब X पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो भारतीय यूजर्स के बीच नाराजगी की वजह बन गए हैं।

वायरल वीडियो में कुछ लोग भारत का झंडा जलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन्हें लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कई यूजर्स का कहना है कि भारत ने कभी ईरान पर हमला नहीं किया और न ही अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान का हिस्सा बना, फिर भी भारत का झंडा जलाना समझ से परे है।

पहले वायरल पोस्ट में एक यूजर ने लिखा, “हिंदुओं और हिंदू धर्म से अब्राहमिक पंथों के लोग स्वाभाविक रूप से नफरत करते हैं।” ऐसे ही एक दूसरे पोस्ट में सवाल उठाया गया कि जब भारत ने ईरान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, तब आखिर भारतीय तिरंगे को क्यों जलाया जा रहा है।

यूजर ने कहा कि भारत कभी भी अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने वालों में शामिल नहीं रहा। एक अन्य पोस्ट में एक यूजर ने दावा किया कि ऐसे वीडियो साबित करते हैं कि भारत विरोधी मानसिकता रखने वाले लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पोस्ट में कहा गया कि भारत के प्रति नफरत कुछ लोगों की स्वाभाविक सोच बन चुकी है।

ऐसे ही एक यूजर ने लिखा कि भारतीयों ने ईरान की मदद के लिए धन और समर्थन दिया, लेकिन बदले में भारतीय झंडे का अपमान देखने को मिला।

यूजर ने इसे नमकहरामी बताते हुए उन लोगों की आलोचना की जो अभी भी ईरान के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं।