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हिम्मत है तो सैयदा घुसपैठिया बन बांग्लादेश में रहकर दिखाए ; ‘यहाँ रह सकते हैं बांग्लादेशी’: कांग्रेस सरकार में योजना आयोग की सदस्य रहीं सैयदा हमीद घुसपैठियों के समर्थन में उतरीं, कहा- अल्लाह ने इंसानों के लिए बनाई है धरती

                                                    सैयदा हमीद बनीं घुसपैठियों को नई पैरोकार

भारत में घुसपैठियों के नए-नए पैरोकार सामने आ रहे हैं। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली सैयदा हमीद का कहना है कि बांग्लादेशियों को भारत में रहने का पूरा हक है। सैयदा इससे पहले मनमोहन सिंह सरकार के समय योजना आयोग की सदस्य रही थीं। सैयदा का यह बयान उनके असम दौरे के समय आया है। असम सरकार इन दिनों सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों को वापस भेजने की कोशिशों में जुटी हुई है।

सैयदा हमीद पूरे वामपंथी गिरोह के साथ असम दौरे पर पहुँची हैं। इस दौरे पर उनके साथ जाने-माने वामपंथी प्रशांत भूषण, हर्ष मंदर, जवाहर सरकार और अन्य लोग शामिल हैं। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि असम सरकार ने वहाँ के मुसलमानों पर आफत ला दी है और उन्हें बांग्लादेशी कहकर निशाना बनाया जा रहा है।

सैयदा ने कहा, “अगर वे (घुसपैठिए) बांग्लादेशी भी हैं तो इसमें गलत क्या है? बांग्लादेशी भी इंसान हैं। धरती इतनी बड़ी है, बांग्लादेशी यहाँ भी रह सकते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कहना कि अवैध घुसपैठिए असली नागरिकों का हक छीन रहे हैं, बहुत ही परेशान करने वाली बात है। सैयदा ने इसे भ्रामक है और इंसानियत के लिए पूरी तरह नुकसानदायक बताया है।

सैयदा हमीद ने आगे कहा, “अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, हैवानों के लिए नहीं। अगर कोई इंसान जमीन पर खड़ा है और उसे वहाँ से खदेड़ा जाता है, तो यह मुसलमानों के लिए कयामत जैसा है।” उन्होंने यह भी कहा कि सबको मिलकर गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की मिली-जुली संस्कृति के लिए खड़ा होना होगा।

सैयदा हमीद ने एक और जहाँ यह माना कि असम सरकार बांग्लादेश से आए अवैध लोगों को वापस भेज रही है। वहीं, प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि भारत के मुसलमानों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली असम सरकार हर तरह की गैरकानूनी हरकत कर रही है। खासकर नागरिकों को जबरन बांग्लादेश और देश से बाहर धकेल रही है, उनको जमीन से बेदखल कर रही है और उनके घर गिरा रही है।”

यह टीम असम नागरिक सम्मेलन नामक एक मंच के निमंत्रण पर असम आई थी। इस मंच के सदस्य और राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां का कहना है कि वे बाहर से जानी-मानी हस्तियों को बुलाते हैं ताकि वे ताजा हालात पर अपनी राय दे सकें।

इस टीम के दौरे को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि जमतीय द्वारा उनका इस्तीफा माँगे जाने के बाद दिल्ली से आई एक टीम असम में डेरा डाले हुए है। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर्ष मंदर, वजाहत हबीबुल्लाह, फैयाज शाहीन, प्रशांत भूषण और जवाहर सरकार शामिल हैं।”

सरमा ने आगे कहा कि इस टीम एक ही मकसद है कि किसी तरह कानूनी तौर पर की जा रही बेदखली को तथाकथित ‘मानवीय संकट’ बताकर बदनाम किया जाए। उन्होंने कहा, “यह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। हम सतर्क हैं और मजबूती से खड़े हैं, कोई भी प्रोपेगेंडा या दबाव हमें अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा करने से रोक नहीं पाएगा।”

दिल्ली : आम आदमी पार्टी उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने मुस्लिम वक़ार चौधरी को परोस दिया सूअर का मीट

                  वकार चौधरी के घर पहुँच कर AIMIM नेता शोएब जमाई व अन्य ने सहानुभूति जताई
दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेता वकार चौधरी ने आरोप लगाया है कि पूर्वी दिल्ली से पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी कुलदीप कुमार ने उन्हें जंगली मीट परोस दिया। उन्होंने एक वीडियो के जरिए ये जानकारी दी और कहा कि वो बहुत दुःखी और आहत हैं। वकार चौधरी ने कहा कि वो सो नहीं पा रहे हैं, उन्हें सुकून नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि रात के समय चुनाव प्रचार निपटा कर वो कुलदीप कुमार के दफ्तर पहुँचे, उन्हें काफी तेज़ भूख लगी हुई थी तो कुलदीप कुमार से पूछा कि क्या कुछ खाने को है?

वक़ार ही नहीं समस्त मुस्लिम समाज को अब जान जाना चाहिए कि anarchy मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का विधायक, वर्तमान लोक सभा उम्मीदवार, शरीफ कैसे हो सकता है। संभव है, पूर्व में हुई दावत में यही मीट खिलाया गया हो, भेद अब खुला है।  

 वकार चौधरी ने बताया कि कोंडली से AAP विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि नॉनवेज है, खा लीजिए। बकौल वकार चौधरी, कुलदीप कुमार ने कहा कि सब नॉनवेज एक तरह का ही होता है। वकार चौधरी का कहना है कि इसके बाद उन्हें शक हुआ, क्योंकि एक बार कुलदीप कुमार उनके घर भी आए थे और पूछा था कि आप तो जंगली का मांस खा लेते होंगे। वकार चौधरी के अनुसार, उन्होंने जवाब दिया कि इस तरह का मजाक ठीक नहीं है। वकार चौधरी ने कुलदीप कुमार की सोच को छोटी बताते हुए पूछा कि आप एक मुस्लिम को जंगली का गोश्त ऑफर कर रहे हैं?

वकार चौधरी ने कहा कि इसका नाम तक लेने से कई दिनों तक दुआएँ कबूल नहीं होती, और आप एक हाजी को जंगली का गोश्त खिलाना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी आलाकमान से कहा कि कुलदीप कुमार को हटा कर किसी भी अन्य नेता को प्रत्याशी बना दिया जाए। इस मामले के सामने आने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई अपने साथी नेताओं के साथ वकार चौधरी के यहाँ पहुँचे और उनके प्रति सहानुभूति जताई।

AIMIM नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया। बता दें कि मुस्लिमों में सूअर का मांस हराम माना जाता है। इस दौरान वहाँ जुटे मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने ‘कुलदीप कुमार वापस जाओ’ और ‘कुलदीप कुमार माफ़ी माँगो’ के नारे भी लगाए। वकार चौधरी ने समर्थन के लिए शोएब जमाई का समर्थन भी दिया। इसी तरह आंध्र प्रदेश के ‘नव रंग पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जलील शेख़ ने कुलदीप कुमार के विरोध में वकार चौधरी को अपना और पूरी पार्टी का समर्थन दिया।

वकार चौधरी ने ट्विटर के माध्यम से कहा, “कुलदीप कुमार क्या खाते हैं, मुझे इससे कोई एतराज नहीं है पर में चाहता हूँ की वो मेरे मजहब की भी उसी तरह से इज्जत करे जैसे कि मैं उनके धर्म की इज्जत करता हूँ। मैं अपने हक़ और अपने मजहब को बचाने की लड़ाई लड़ रहा हूँ, आपसे दरखास्त है इस मुहीम में आप मेरा साथ दे मुझे इंसाफ चाहिए आप मेरा साथ देंगे।” उन्होंने कुलदीप कुमार को ‘मुस्लिमों का गुनहगार’ करार दिया। सभा में मंत्री आतिशी भी आने वाली थीं, लेकिन विरोध के कारण वो नहीं आईं।

महाराष्ट्र : हाजी मलंग की दरगाह के नीचे गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर: हिंदू समूहों का दावा, बोले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री - मैं इसे मुक्त कराऊँगा

                              एकनाथ शिंदे और दरगाह (चित्र साभार: NDTV & Fiazan E qadir/FB)
रामजन्मभूमि विवाद के समय हिन्दू संगठनों ने मुस्लिम कट्टरपंथियों से कहा था कि "हिन्दुओं के तीन तीर्थ-अयोध्या, काशी और मथुरा- दे दो, हम बाकि मस्जिद अथवा दरगाह से अपना अधिकार छोड़ देंगे।" लेकिन कट्टरपंथी और इनके छद्द्म सेक्युलरिस्ट्स विवादों को जिन्दा रख अपनी तिजोरियां भरने पर लगे रहे। यह लगभग सभी राजनीतिज्ञों का मानना था कि जब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकारें नहीं बनती, ये विवाद समाप्त नहीं होंगे। कालचक्र ऐसा घूमा कि 2014 में बीजेपी सरकार आ गयी और अयोध्या मुद्दा सुलझ गया, काशी और मथुरा बाकि हैं। लेकिन इनके अलावा अब तक 4 और निशाने पर आ गए हैं। संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि 2024 चुनावों के बाद कोर्ट में इस विवादित मुद्दों की एक लम्बी कतार लगने वाली है। आखिर कब तक कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स वास्तविकता को छुपाकर जनमानस को गुमराह करते रहेंगे। 

महाराष्ट्र के ठाणे जिला में स्थित हाजी अब्दुल रहमान उर्फ़ मलंग शाह की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिन्दू संगठनों का दावा है कि इस दरगाह के नीचे हिन्दू मंदिर हैं। उन्होंने इसकी जाँच की माँग को तेज कर दिया है। हिंदू संगठनों की इस कोशिश में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ मिला है।

क्या है इस हाजी मलंग शाह की दरगाह को लेकर विवाद?

मलंग शाह दरगाह ठाणे की माथेरान पहाड़ियों पर स्थित एक दुर्ग (किला) में स्थित है। दुर्ग का नाम मलंगगढ़ है। यहीं पर हाजी मलंग शाह नाम की यह दरगाह स्थित है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह दरगाह 12वीं शताब्दी में यमन से भारत आए सूफी फकीर अब्द उल रहमान या अब्दुल रहमान की है।
दूसरी तरफ हिन्दू पक्ष इस तर्क से सहमत नहीं है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुस्लिमों का दरगाह नहीं, बल्कि गुरु गोरखनाथ के गुरु और नवनाथों में से एक गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि नाथ परम्परा को समर्पित यह हिंदू मंदिर इस दरगाह के नीचे स्थित है।

कहाँ से शुरू हुआ विवाद?

इस दरगाह को लेकर सदियों से विवाद चला आ रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वीं शताब्दी में यहाँ मराठाओं ने इस धार्मिक स्थल का प्रबन्धन करने के लिए काशीनाथ पन्त केतकर को भेजा था। तब से आज तक काशीनाथ पंत केतकर नाम के ब्राह्मण का परिवार ही इस दरगाह का प्रबंधन देखता है।
हालाँकि, स्थानीय मुस्लिमों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यहाँ दरगाह है और इसका प्रबन्धन एक हिंदू नहीं कर सकता। हालाँकि, बाद में इसका निर्णय एक लॉटरी के जरिए किया गया, जिसमें निर्णय केतकर के पक्ष में गया। इसके बाद इस दरगाह पर 1980 के दशक में दोबारा विवाद हुआ।
दरगाह के साथ में मंदिर होने का दावा लेकर शिवसेना के नेता आनंद दीघे ने आवाज उठाई और मछिन्द्रनाथ के मंदिर को लेकर शिवसैनिकों को यहाँ 1996 में पूजा की। इस पूजा में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी भी शामिल हुए थे। यहाँ पर हिन्दू मछिन्द्रनाथ की पूजा, आरती और रोज भोग लगाते हैं। हर पूर्णिमा को यहाँ विशेष पूजा होती है।
हिंदुओँ के साथ-साथ यहाँ मलंग शाह के अनुयायी भी पहुँचते हैं। कई बार हिन्दू श्रद्धालुओं के साथ यहाँ बदसलूकी और पूजा में व्यवधान डालने के मामले में भी सामने आए हैं। मार्च 2021 में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब आरती कर रहे हिन्दू श्रद्धालुओं के सामने 50-60 मुस्लिमों ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए थे। इसके अलावा भी समय-समय पर यहाँ इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हिन्दू भक्तों से कहा है, “मलंगगढ़ को लेकर आपकी भावनाओं को मैं समझता हूँ। आनंद दीघे ने इस मंदिर को मुक्त करवाने को लेकर अभियान शुरू किया था। उन्होंने हमें ‘जय मलंग, श्री मलंग’ के नारे लगवाये थे। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि कुछ मामले ऐसे होते हैं, जो जनता में बात करने के लिए नहीं होते। मैं मलंगगढ़ के विषय में आपकी भावनाएँ जानता हूँ और कहना चाहता हूँ कि एकनाथ शिंदे आपकी इच्छाओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।”
महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आनंद दीघे के राजनीतिक शिष्य हैं। आनंद दीघे महाराष्ट्र में शिवसेना के बड़े नेता थे और जहाँ बाल ठाकरे पार्टी का करिश्माई चेहरा थे तो वहीँ आनंद दीघे का संगठन बनाने में बड़ा हाथ माना जाता है।

बाबा रामदेव का पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को समर्थन, कहा : ‘जो आँखों से दिख रहा, वो तो बस 1% है’: सब जगह पाखंड मत देखो

महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर विवाद होना स्वाभाविक है। जो हिन्दू अयोध्या में रामजन्मभूमि पर कुर्सी के भूखे तुष्टिकरण का पालन करने वाले के दुष्प्रचार के आगे नतमस्तक होता हो, श्रीराम को काल्पनिक कहने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्षों को शांतिदूत मानते हों, उनकी बुद्धि को क्या कहा जा सकता है? ऐसे बेशर्म और बुद्धिविहीन हिन्दुओं को मुसलमानों से धर्म सीखना चाहिए, जो फरेब को सच साबित करने को आमादा है। जबकि पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक के के मोहम्मद, जिनकी निगरानी में कोर्ट के आदेश पर मंदिर के सबूत जुटाने खुदाई हुई थी, ने सेवानिर्वित होने उपरांत लिखी अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि "अयोध्या में राम मंदिर कभी का बन गया होता, अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने खुदाई में मिले मंदिर के इतने अधिक मिले सबूतों को छिपाकर केवल एक खम्बा ही नहीं दिखाया होता।" 

इतने चैनल महंत की सच्चाई जानने गए, लेकिन सभी उनका गुणगान करते नज़र आए। ABP News जो दुष्प्रचार करने में पीछे नहीं था, "जब महंत जी भरे दरबार में पूछा कि क्या कोई मेरे चाचा जानता है तो बताए, सन्नाटा छाते देख बोले, यहाँ जिस रिपोर्टर के चाचा का ये नाम है, सामने आए।" रिपोर्टर बिन बोले उसके प्रश्नों का उत्तर देने के बाद उसको दुष्प्रचार बंद करने के लिए कहा। 

इतना ही नहीं, महंत शास्त्री का विरोध करने वालों को शायद रामभक्त हनुमान के चमत्कारों का ज्ञान नहीं। रामभक्त हनुमान के एक चमत्कार, पत्थरवाले, चांदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर के महंत गौरव शर्मा का पिछले लेख में उल्लेख किया था। अब कटनी, मध्य प्रदेश में हनुमान मंदिर है, जहाँ टूटी हड्डियों को जड़ीबूटियों के खिलाने से तुरंत जोड़ा जाता है। जबकि किसी भी उपचार में संभव नहीं कि दवाई खाते ही टूटी हड्डी जुड़ जाए, लेकिन रामभक्त हनुमान इसे संभव कर रहे हैं। जड़ीबूटी खाने के बाद पंडित जी कहते हैं कि जिनके प्लास्टर चढ़ा है, एक्सरे करवा लो हड्डी जुड़ गयी है। यह मंदिर हड्डी वाले मंदिर के नाम से मशहूर है। दोनों में व्यक्तिगत अनुभव है।    

बाबा रामदेव ने बागेश्वर धाम के महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कुछ पाखंडी लोग टूट के उनके पीछे पड़ गए हैं। ऐसे लोग पूछ रहे हैं कि ये भगवान की कृपा क्या होती है? बालाजी की कृपा क्या होती है? पूछते हैं हनुमान जी की कृपा क्या है? स्वामी रामदेव ने कहा, जिन्हें बाहर की आंखों से देखना हो वो धीरेन्द्र शास्त्री से पूछें. जिन्हें तर्क-वितर्क करना हो वो रामभद्राचार्य जी के पास आ जाओ और जिन्हें चमत्कार देखना हो तो इनके शिष्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास चले जाओ.

दरअसल बाबा रामदेव धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के गुरु रामभद्राचार्य जी के पास पहुँचे थे और वहीं मंच से उन्होंने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “ये सब अगर बिना आँखों की देखनी हो तो आप पूज्य भद्राचार्य जी में देख लो। अगर आपको बाहर की आँखों से देखना हो तो यह आप धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री में देख लो। भगवान के अनुग्रह से व्यक्ति को सूक्ष्म जगत की अनुभूति होती है। लेकिन यह गुरु की कृपा और भगवत की कृपा से होता है। गुरु की कृपा, भगवत कृपा से बालाजी महाराज की कृपा होती है।”

उन्होंने आगे कहा, ”जब गुरु और भगवान की शरण में रहने वाला और दैवीय कृपा संपन्न जब कोई महापुरुष आशीर्वाद दे देता है तो व्यक्ति संकटों से मुक्त हो जाता है। यही काम धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी कर रहे हैं।” बाबा रामदेव ने कहा कि जहाँ तक बात रही तर्क-वितर्क की जिनको तर्क करना है तो वह महाराज जी (रामभद्राचार्य जी) के पास आ जाएँ। जिनको चमत्कार देखना हे वह महाराज जी के चेले (महंत धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) के पास चले जाएँ।

बाबा ने आगे कहा, “मैं तो ज्यादा मीडिया के लोगों को फोन नहीं करता हूँ। लेकिन, मैंने कुछ को बोला है कि सब जगह पाखंड मत देखो। कुछ यह भी देख लो कि जो सच है, जो दिख रहा है आँखों से – वह केवल एक प्रतिशत है। अदृष्ट 99 प्रतिशत है।” उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले जब महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराष्ट्र गए थे तो वहाँ कथा के समापन के बाद ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

अवलोकन करें:-

घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम
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घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश : महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम

साथ ही, उन्होंने कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए। वहीं पूरे विवाद पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं। इसलिए मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वे इन साजिशों से नहीं डरते हैं। उन्होंने कहा था कि अब जनजातीय इलाकों में दरबार लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से उनके खिलाफ हमले बढ़ गए हैं और वामपंथी पीछे पड़ गए हैं।

‘क्या किसी ने ज़ाकिर नाइक से कहा माफी माँगने के लिए?’: नूपुर शर्मा को मिला राज ठाकरे का समर्थन, हलाल मीट के खिलाफ MNS का अभियान

MNS (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) सुप्रीमो राज ठाकरे ने भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा ने जो बात कही वही बात ज़ाकिर नाइक ने भी कही थी, लेकिन उससे कोई माफ़ी की माँग क्यों नहीं कर रहा? राज ठाकरे ने कहा कि जब से नूपुर शर्मा का बयान आया है, काफी राजनीति हो रही है और कोई उनका समर्थन नहीं कर रहा। बता दें कि राज ठाकरे कुछ दिनों से स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।
केवल नूपुर शर्मा ही नहीं, अब तो सोशल मीडिया पर The Jaipur Dialogue, Face to Face और Sach Wala के अतिरिक्त News Nation चैनल ने तो 'इस्लाम क्या कहता है' नाम से शो शुरू किया हुआ है, जहाँ कुरान, हदीस, और शरीयत पर खुलकर बहस होती है, बाल की खाल निकाली जाती है, जिस पर कुछ में तो कई बार मौलानाओं को पसीने पोंछते या फिर बहस छोड़कर जाते देखा जाता है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की काज़मी आरज़ू भारतीय मौलाना से पूछती है कि "मर्दों को 72 हूरें मिल गयी, औरत को क्या?"(देखिए वीडियो) लेकिन कोई फतवा नहीं और न ही 'सिर तन से जुदा' का उन्मादी शोर, न ही कोई मुस्लिम देश बोल रहा, क्योकि बहस होती है मुस्लिमों के बीच। हाँ, अगर वही बातें कोई हिन्दू बोल रहा होता, निश्चित रूप से सडकों पर खूब हंगामा हो रहा होता। अभी कल (23 अगस्त 2022)ही हैदराबाद में क्या हुआ, सबने देखा। कोई हिन्दू नाम लिए बिना ही कुछ बोल दे, वह कट्टरपंथियों को बर्दाश्त नहीं।
दूसरे, 'सिर तन से अलग' नारे लगाने वालों पर गृह मंत्री ने क्या कार्यवाही की? यदि यही नारे हिन्दुओं ने लगाए होते तो क्या ऐसे नारे लगाने वाले खुले घूम रहे होते? जब हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी की जाने पर सरकार से लेकर समस्त हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाएं क्यों नहीं तुरंत सड़क पर आकर, उनकी गिरफ़्तारी की मांग करतीं?

 

उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय बाद हुई बैठक में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा पर माफ़ी माँगने के लिए काफी दबाव बनाया गया, लेकिन ज़ाकिर नाइक से किसी ने माफ़ी माँगने के लिए नहीं कहा। बीमारी से ठीक होने के बाद पार्टी कैडर के बीच पहुँचे राज ठाकरे ने लंबी लड़ाई का आह्वान किया है। उनके कूल्हे की सर्जरी हुई थी। लेकिन, अब निकाय चुनावों से पहले वो सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन के उस बयान का जिक्र करते हुए उस पर भी हमला बोला, जिसमें उसने हिन्दुओं को दी थी।

राज ठाकरे ने इस दौरान अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे पर भी हमला बोला और उन्हें याद दिलाया कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने ही ये नियम बनाया था कि गठबंधन में जिस पार्टी के ज्यादा विधायक होंगे, मुख्यमंत्री भी उसी का बनेगा। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कह दिया था कि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे, तब शिवसेना ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

राज ठाकरे की पार्टी ने ये भी ऐलान किया है कि वोहलाल मांस के खिलाफ भी अभियान चलाएगी। उसने इसे टेरर फंडिंग से जोड़ते हुए कहा कि हिन्दुओं की आजीविका और राजस्व पर भी इसके कारण गलत असर पड़ा है। मनसे ने कहा कि हलाल मीट आतंकियों को वित्तीय मदद पहुँचाने वाला सबसे बड़ा तंत्र है, ऐसे में न सिर्फ झटका कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि शाकाहारी लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। मनसे के ‘व्यापारी सेना’ ने एक खुले खत के माध्यम से अपील की है कि हमारा पैसा आतंकियों की मदद के लिए नहीं जाना चाहिए।