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क्या राहुल गाँधी+आदित्य ठाकरे ने रची साजिश, फिर कुणाल कामरा ने कहा ‘गद्दार’?

                                   राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में कुणाल कामरा भी शामिल हुए थे
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अपमान मामले में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ भी शिकायत दी गई है। शिवसेना नेता राहुल कनाल ने इन तीनों नेताओं पर एकनाथ शिंदे की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाल ने अपनी शिकायत में कहा कि एकनाथ शिंदे की प्रतिष्ठा, छवि और साख को धूमिल करने के लिए राहुल गाँधी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत ने यह अपराधिक साजिश रची है और उनके नेता के खिलाफ ‘पेड कैम्पेन’ चलाया है। टाइम्स नाउ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस संबंध में दर्ज FIR में इन तीनों नेताओं का नाम है।

इस शिकायत में कहा गया है, “कुणाल कामरा द्वारा किए गए कृत्य, जिनमें आम जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयान देना, विवादित बातें बोलना और एकनाथ शिंदे पर आरोप लगाना शामिल हैं, यह अपमानजनक होने के साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 के प्रावधानों के तहत गैरकानूनी भी हैं।”

शिवसेना के नेताओं ने कुणाल कामरा के खिलाफ जल्द कार्रवाई की माँग की है। वहीं मुंबई पुलिस ने बताया है कि उसने इस अपमानजनक बयान और शिकायतों का संज्ञान लेते हुए कामरा को ढूँढना चालू कर दिया है। कई शिवसेना नेताओं ने कामरा को धमकी भी दी है। शिवसेना के एक नेता ने कहा है कि कुणाल कामरा का कहीं भी जाना मुश्किल हो जाएगा।

रविवार (23 मार्च, 2025) को मुंबई में एक लाइव कार्यक्रम के दौरान कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ बताया था और उन पर एक अपमानजनक गाना गया था। उन्होंने एकनाथ शिंदे को रिक्शावाला बताया और कहा कि अगर उनकी नजर से देखा जाए तो शिंदे गद्दार नजर आएँगे।

कामरा ने कहा था कि एकनाथ शिंदे ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया। कामरा ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे ने ‘बाप चुराया है।’ उनका इशारा बालासाहेब ठाकरे की तरफ था। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे लगातार बालासाहेब की राजनीति के आदर्शों से समझौता करने का आरोप उद्धव ठाकरे पर लगाते हैं।

कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे के विरुद्ध बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया। 2 मिनट के इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं में गुस्सा भर गया। इसके बाद शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उस जगह पर तोड़फोड़ की थी, जहाँ कुणाल कामरा ने यह लाइव किया था।

महाराष्ट्र : हाजी मलंग की दरगाह के नीचे गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर: हिंदू समूहों का दावा, बोले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री - मैं इसे मुक्त कराऊँगा

                              एकनाथ शिंदे और दरगाह (चित्र साभार: NDTV & Fiazan E qadir/FB)
रामजन्मभूमि विवाद के समय हिन्दू संगठनों ने मुस्लिम कट्टरपंथियों से कहा था कि "हिन्दुओं के तीन तीर्थ-अयोध्या, काशी और मथुरा- दे दो, हम बाकि मस्जिद अथवा दरगाह से अपना अधिकार छोड़ देंगे।" लेकिन कट्टरपंथी और इनके छद्द्म सेक्युलरिस्ट्स विवादों को जिन्दा रख अपनी तिजोरियां भरने पर लगे रहे। यह लगभग सभी राजनीतिज्ञों का मानना था कि जब तक केंद्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकारें नहीं बनती, ये विवाद समाप्त नहीं होंगे। कालचक्र ऐसा घूमा कि 2014 में बीजेपी सरकार आ गयी और अयोध्या मुद्दा सुलझ गया, काशी और मथुरा बाकि हैं। लेकिन इनके अलावा अब तक 4 और निशाने पर आ गए हैं। संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि 2024 चुनावों के बाद कोर्ट में इस विवादित मुद्दों की एक लम्बी कतार लगने वाली है। आखिर कब तक कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स वास्तविकता को छुपाकर जनमानस को गुमराह करते रहेंगे। 

महाराष्ट्र के ठाणे जिला में स्थित हाजी अब्दुल रहमान उर्फ़ मलंग शाह की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिन्दू संगठनों का दावा है कि इस दरगाह के नीचे हिन्दू मंदिर हैं। उन्होंने इसकी जाँच की माँग को तेज कर दिया है। हिंदू संगठनों की इस कोशिश में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ मिला है।

क्या है इस हाजी मलंग शाह की दरगाह को लेकर विवाद?

मलंग शाह दरगाह ठाणे की माथेरान पहाड़ियों पर स्थित एक दुर्ग (किला) में स्थित है। दुर्ग का नाम मलंगगढ़ है। यहीं पर हाजी मलंग शाह नाम की यह दरगाह स्थित है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह दरगाह 12वीं शताब्दी में यमन से भारत आए सूफी फकीर अब्द उल रहमान या अब्दुल रहमान की है।
दूसरी तरफ हिन्दू पक्ष इस तर्क से सहमत नहीं है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुस्लिमों का दरगाह नहीं, बल्कि गुरु गोरखनाथ के गुरु और नवनाथों में से एक गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि नाथ परम्परा को समर्पित यह हिंदू मंदिर इस दरगाह के नीचे स्थित है।

कहाँ से शुरू हुआ विवाद?

इस दरगाह को लेकर सदियों से विवाद चला आ रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वीं शताब्दी में यहाँ मराठाओं ने इस धार्मिक स्थल का प्रबन्धन करने के लिए काशीनाथ पन्त केतकर को भेजा था। तब से आज तक काशीनाथ पंत केतकर नाम के ब्राह्मण का परिवार ही इस दरगाह का प्रबंधन देखता है।
हालाँकि, स्थानीय मुस्लिमों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यहाँ दरगाह है और इसका प्रबन्धन एक हिंदू नहीं कर सकता। हालाँकि, बाद में इसका निर्णय एक लॉटरी के जरिए किया गया, जिसमें निर्णय केतकर के पक्ष में गया। इसके बाद इस दरगाह पर 1980 के दशक में दोबारा विवाद हुआ।
दरगाह के साथ में मंदिर होने का दावा लेकर शिवसेना के नेता आनंद दीघे ने आवाज उठाई और मछिन्द्रनाथ के मंदिर को लेकर शिवसैनिकों को यहाँ 1996 में पूजा की। इस पूजा में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी भी शामिल हुए थे। यहाँ पर हिन्दू मछिन्द्रनाथ की पूजा, आरती और रोज भोग लगाते हैं। हर पूर्णिमा को यहाँ विशेष पूजा होती है।
हिंदुओँ के साथ-साथ यहाँ मलंग शाह के अनुयायी भी पहुँचते हैं। कई बार हिन्दू श्रद्धालुओं के साथ यहाँ बदसलूकी और पूजा में व्यवधान डालने के मामले में भी सामने आए हैं। मार्च 2021 में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब आरती कर रहे हिन्दू श्रद्धालुओं के सामने 50-60 मुस्लिमों ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए थे। इसके अलावा भी समय-समय पर यहाँ इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हिन्दू भक्तों से कहा है, “मलंगगढ़ को लेकर आपकी भावनाओं को मैं समझता हूँ। आनंद दीघे ने इस मंदिर को मुक्त करवाने को लेकर अभियान शुरू किया था। उन्होंने हमें ‘जय मलंग, श्री मलंग’ के नारे लगवाये थे। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि कुछ मामले ऐसे होते हैं, जो जनता में बात करने के लिए नहीं होते। मैं मलंगगढ़ के विषय में आपकी भावनाएँ जानता हूँ और कहना चाहता हूँ कि एकनाथ शिंदे आपकी इच्छाओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।”
महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आनंद दीघे के राजनीतिक शिष्य हैं। आनंद दीघे महाराष्ट्र में शिवसेना के बड़े नेता थे और जहाँ बाल ठाकरे पार्टी का करिश्माई चेहरा थे तो वहीँ आनंद दीघे का संगठन बनाने में बड़ा हाथ माना जाता है।

महाराष्ट्र सरकार ने मिटा दी निज़ाम शाही की निशानी : अहमदनगर अब अहिल्यनगर

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार (31 मई 2023) को कहा कि अहमदनगर (Ahmednagar) जिले को अहिल्या बाई होलकर के नाम पर अहिल्यानगर (Ahilyanagar) के रूप में जाना जाएगा।

सीएम शिंदे ने इसकी घोषणा एक कार्यक्रम में की। इस कार्यक्रम में इस महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा विधायक गोपीचंद पाडलकर सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।

अहमदनगर के चोंडी में आयोजित 18वीं सदी में मालवा के होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई होलकर की 298वीं जयंती के अवसर पर सीएम शिंदे ने यह घोषणा की। निजामशाही के अंतर्गत आने के कारण निजामों ने इस शहर का नाम बदल दिया था और इसका नाम अहमदनगर रख दिया था।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगे कहा, “यह फैसला राज्य सरकार ने लिया है और मुझे गर्व है कि देवेंद्र जी (देवेंद्र फडणवीस) और मैं दोनों इस ऐतिहासिक क्षण के हिस्सा बने हैं।” देवेंद्र फडणवीस ने भी इस निर्णय पर खुशी जाहिर की।

अहमदनगर इस साल का तीसरा शहर है, जिसका नाम बदला गया है। इसके पहले फरवरी 2023 में महाराष्ट्र की सरकार ने औपचारिक रूप से औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव कर दिया था।

अहमदनगर का नाम बदलने की माँग लंबे समय से की जा रही थी। महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने दिसंबर 2022 में विधान परिषद को बताया था कि अहमदनगर जिले का नाम बदलकर पुण्यश्लोक अहिल्यानगर करने के लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव माँगा गया है।

इसके पहले भाजपा नेता गोपीनाथ पाडलकर ने अहमदनगर का नाम बदलने के लिए एक पत्र लिखा था। उस पत्र में कहा गया था कि अहिल्याबाई होलकर का जन्म अहमदनगर के चौंडी गाँव में हुआ था। इसलिए इस गाँव का नाम उनके नाम पर होना चाहिए।


वीर सावरकर के नाम से जाना जाएगा बांद्रा-वर्सोवा समुद्र सेतु: एकनाथ शिंदे का ऐलान, बोले – स्वातंत्र्य वीर से भयभीत हैं कुछ लोग, बंद हो सकती है उनकी दुकानें

वीर सावरकर की जयंती पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनके नाम पर पुरस्कार दिए जाने का भी किया ऐलान
स्वातन्त्र्य वीर सावरकर की जयंती पर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक ब्रिज का नाम वीर सावरकर के नाम पर होगा। इसके अलावा उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को वीर सावरकर वीरता पुरस्कार दिए जाने का भी ऐलान किया।

दरअसल, रविवार (28 मई, 2023) को पूरा देश वीर सावरकर की 140वीं जयंती मना रहा था। इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “वीर सावरकर जयंती को सरकार ‘वीर सावरकर गौरव दिवस’ के रूप में मना रही है। सरकार ने बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक का नाम बदलकर ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर बांद्रा-वर्सोवा समुद्र सेतु’ करने का फैसला किया है। अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को वीर सावरकर वीरता पुरस्कार देने का भी फैसला किया गया है।”

वहीं, इससे पहले दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए जानबूझकर वीर सावरकर का नाम बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को डर सता रहा है यदि सावरकर के विचार समाज में लोकप्रिय हो गए, तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी। अंदाजा लगाइए कि ये लोग कितना अधिक भयभीत हैं। सावरकर के निधन के 57 साल बाद भी वे उनका विरोध करते जा रहे हैं।

बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक ब्रिज का नाम वीर सावरकर के नाम पर रखे जाने पर महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीएम शिंदे के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही फडणवीस कहा है कि उन्होंने पत्र लिखकर इस बारे में माँग भी की थी।

देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट कर कहा “स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर मुंबई में बांद्रा-वर्सोवा ब्रिज का नामकरण ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर बांद्रा-वर्सोवा समुद्र सेतु’ करने की घोषणा करने के लिए मैं मुख्यमंत्री एकनाथराव शिंदे का हृदय से आभारी हूँ। 16 मार्च 2023 को मैंने पत्र के माध्यम से इस संबंध में माँग की थी।  हमारे महापुरुषों के कार्यों को नई पीढ़ी याद करती रहेगी और आने वाले कल के सशक्त भारत के लिए गौरवशाली पीढ़ियों का निर्माण करेगी।”

मुंबई : चर्च में घुस दाऊद अंसारी ने क्रॉस उखाड़े-कब्रें तोड़ी

                                             चर्च में तोड़ी कब्रें (तस्वीर साभार: फ्री प्रेस जर्नल)
मुंबई के सेंट माइकल चर्च में शनिवार (7 जनवरी 2023) को 18 कब्रें और उन पर लगे क्रॉस तोड़ने के इल्जाम में महीम पुलिस ने दाऊद अंसारी नाम के 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दाऊद को उसके चाचा के घर से रविवार को (8 जनवरी 2023) गिरफ्तार किया। चर्च प्रशासन द्वारा घटना की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को दिए जाने के बाद से दाऊद को ढूँढा जा रहा था।

डीसीपी मनोज पाल ने बताया, पुलिस ने कालंबोली निवासी दाऊद अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है। उसने चर्च की कब्रों में तोड़फोड़ की थी। वह अपने चाचा के साथ नवी मुंबई में गद्दों की दुकान पर नौकरी करता है। फिलहाल उसने ऐसा क्यों किया इसका पता नहीं चल पाया है।

सेंट माइकल चर्च के पादरी फादर लैंसी पिंटू ने कहा, “घटना सुबह 5 बजे के आसपास की है। चौकीदार ने ये बाद में देखा। सुबह भीड़ होती है इसलिए मुझे भी घटना का 8:30 बजे पता चला। इसके बाद घटना के बारे में फौरन पुलिस को इन्फॉर्म किया गया।”

बताया जा रहा है कि ये चर्च 400 वर्ष पुराना है और कब्रगाह भी तभी बनाई गई थी। अंसारी को फुटेज में देखने के बाद उसको पकड़ा गया। वह सीसीटीवी में तोड़फोड़ के बाद चर्च में घुटनों पर बैठकर प्रार्थना करते हुए भी देखा जा सकता है।

पुलिस का कहना है कि ये मामला गंभीर है क्योंकि इसमें धार्मिक एंगल भी है। वह लोग घटना के पीछे की मंशा पता करने में जुटे हैं। सीसीटीव में दिख रहा है अंसारी चर्च में करीबन 5:30 बजे घुसा। जब प्रार्थना शुरू हुई तो वो बाहर आ गया और उसने कब्रगाह में बड़ा पत्थर उठाकर करीबन 18 कब्रें तोड़ीं। इसके बाद वह चर्च में गया। वहाँ उसने अपना बस्ता नहीं पाया और इसकी शिकायत सुरक्षाकर्मियों से की।

वॉचमैन जब उसका बस्ता खोज रहा था तभी उन्हें कब्रगाह में हुई तोड़फोड़ का पता चला। शक होने पर अंसारी को पकड़ा गया। चर्च प्रशासन ने पुलिस को बुलाया। लेकिन उस समय अंसारी किसी तरह वहाँ से भाग निकला। बाद में पुलिस ने सीसीटीवी देख उसकी तलाश शुरू की।

पुलिस ने कहा कि ये सब उसने जानबूझकर किया है। इस बीच मिड डे की रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से दाऊद को मानसिक रूप से बीमार बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी दावा है कि पुलिस ने कहा कि आरोपित अपनी अम्मी के जाने के बाद से मानसिक रूप से तनाव में था। उसने भगवान में विश्वास करना बंद कर दिया था।

सवाल यह है कि अगर दाऊद मानसिक रूप से बीमार है, चर्च में ही क्यों गया, किसी मुस्लिम कब्रिस्तान में क्यों नहीं गया? मानसिक बीमार है तो अपना घर क्यों नहीं तोडा? मानसिक रूप से बीमार है, फिर कब्रें तोड़ भागा क्यों? इस मानसिक रोगी के बैंक खातों की जाँच की जाए। रिमांड पर लेकर इससे कबूलवाया जाए कि किसके कहने पर ऐसी हरकत की है? ये मानसिक रोगी नहीं, बल्कि मुंबई का माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहा था। सारे छद्दम धर्म-निरपेक्ष, गंगा-जमुनी तहजीब की दुहाई देने वाले, इसलिए चुप्पी साधे हुए हैं, शायद सभी के घर मातम है।  

NDTV के पूर्व पत्रकार ने शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पर की अपमानजनक टिप्पणी, चैनल की भी उधेड़ी बखिया

                                                     नदीम अहमद काज़मी के ट्विटर बायो का स्क्रीनशॉट
महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच पत्रकार नदीम अहमद काजमी ने ट्विटर पर शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे का अपमान किया और उनका मजाक उड़ाया। हालाँकि, जब यह बताया गया कि वह NDTV के लिए काम नहीं करता है, तो पत्रकार अपने पूर्व चैनल की ही बखिया उधेड़ने लगा। दरअसल, काजमी इस वक्त एनडीटीवी में काम नहीं करते हैं। चैनल ने उन्हें (काजमी) वर्ष 2017 में ही निकाल दिया था, लेकिन उनके ट्विटर बायो में अभी भी वर्किंग विद एनडीटीवी लिखा हुआ है, जिससे किसी को भी भ्रम हो सकता है कि वह इस विवादास्पद चैनल के लिए काम कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में मचे घमासान से सेक्युलरिस्ट्स में बैचेनी होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें नहीं मालूम की पटकथा तो भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाने वाले दिन ही लिख दी गयी थी। जिस तरह से महाराष्ट्र में हिन्दू विरोधी हरकतें होनी शुरू हुई थी, वह इस पटकथा को और अधिक शक्ति दे रही थी। सेक्युलरिस्ट्स यह भूल गए कि एकतरफा सेकुलरिज्म चलने के दिन लद चुके हैं।  

खैर, नदीम अहमद काजमी ने 22 जून 2022 को शिंदे के खिलाफ एक अपमानजनक ट्वीट किया था, जो इस वक्त अपने सभी विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी में रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं। पत्रकार ने ट्वीट किया, “शालीनता मायने रखती है… शिंदे फिर से एक ऑटो चालक बनेंगे… बस मेरे शब्दों पर गौर करें।”

एनडीटीवी के तथाकथित पूर्व पत्रकार ने शिंदे को नीचा दिखाने के लिए उनके अतीत का सहारा लिया। एकनाथ शिंदे कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में एक ऑटो-रिक्शा चालक थे। 1980 में, वह शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे से प्रभावित हुए थे। वह राज्य की राजनीति में अपनी सफलता के पीछे पार्टी संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का कई बार आभार जता चुके हैं। शिंदे ने एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। वह अपने संगठनात्मक कौशल और जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए। चार बार विधायक रह चुके शिंदे, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभागों को संभालते हैं। 58 वर्षीय शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में महाराष्ट्र के ठाणे-पालघर में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है।

एक यूजर वरुण शर्मा (@LogicalHindu_) ने अपने ट्विटर हैंडल पर काजमी के ट्विटर बायो के स्क्रीनशॉट के साथ उसका अपमानजनक ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इस बायो में वह खुद को अभी भी एनडीटीवी का पत्रकार बताता है। वरुण शर्मा ने चैनल की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह, कंसल्टिंग एडिटर निधि राजदान और न्यूज एंकर गार्गी रावत अंसारी को टैग करते हुए लिखा, “नदीम काजमी NDTV के पत्रकार हैं। अपने साथियों को शालीनता, शिष्टाचार और नैतिकता सिखाने वाली सोनिया सिंह, निधि राजदान और गार्गी रावत आप पर गर्व है।”

ट्विटर यूजर वरुण शर्मा ने अपने दूसरे ट्वीट में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि क्या वे अपने महासचिव नदीम अहमद काजमी द्वारा की गई टिप्पणी का समर्थन करते हैं।

NDTV की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह ने वरुण शर्मा के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “नदीम अहमद काज़मी 2017 से एनडीटीवी के साथ नहीं हैं।”

सोनिया सिंह के जवाब से काजमी का चैनल को लेकर पुराना जख्म फिर से ताजा हो गया और उन्होंने एनडीटीवी के लिए बेहद निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग किया। काजमी ने लिखा, “मामला विचाराधीन है। अदालत में पेश नहीं होने पर एनडीटीवी पर 10 हजार जुर्माना लगाया गया है कृपया अपने वकीलों से पता करें। धन्यवाद।” एक अन्य ट्विटर यूजर ने उनसे पूछा कि उनके और एनडीटीवी के बीच ऐसा क्या गलत हुआ है? इस पर काजमी ने दावा किया कि 2017 में चैनल ने ​उन्हें निकाल दिया था, जबकि उन्होंने दो दशक तक चैनल में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।

वह यही नहीं रुके उन्होंने अपने दर्द बयाँ करते हुए आगे कहा, “मैं संस्थान के साथ पूरी ईमानदारी के साथ 2 दशक तक मजबूती से खड़ा रहा। अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटा। लेकिन आप जानते हैं.. उस वक्त मुझे बहुत कष्ट हुआ जब मुझे दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 58 साल की उम्र में जीवन के अंतिम पड़ाव पर मेरे पास आय का कोई साधन नहीं है।”                                              

काजमी ने खुद शिकायत की थी कि चैनल ने उन्हें गलत तरीके से निकाल दिया था। ऐसे में यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि वह फिर भी खुद को एनडीटीवी का पत्रकार बताते हैं। उनके ट्विटर बायो में 2017 के बाद से यानी 5 सालों से एनडीटीवी लिखा हुआ है। यही नहीं उनके लिंक्डइन प्रोफाइल में भी लिखा है कि वह ‘एनडीटीवी में असाइनमेंट‘ पर हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे के खास मानें जाने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का सारा खेल बिगाड़ दिया है। विधायकों के पाला बदलने से शिवसेना प्रमुख एक तरफ छटपटा रहे हैं और विधायकों की तलाश में मुंबई का चप्पा-चप्पा छान मार रहे हैं। उद्धव ठाकरे की नाक के नीचे से निकल बागी नेता एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो रहे हैं, लेकिन शिवसेना प्रमुख को इसकी भनक भी नहीं लग पा रही है। इस बौखलाहट में शिवसेना को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और क्या बोले? शिवसेना ने अपने मुख पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को ‘स्वप्न दोष’ की तरह बताया है। पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएँ, वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा।

उद्धव ने मुख्यमंत्री बनने के लालच में पिता बालासाहब की जमापूंजी(साख) को मिट्टी में मिला दिया

महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जनता की नव्ज पढ़ने में पूर्णरूप से असफल हैं। 2014 चुनाव के मतदान ने देश में तुष्टिकरण पुजारी पार्टियों को हाशिए पर लाने की मन बना लिया था। इसी लिए महाराष्ट्र में जो कुछ भी हो रहा है इसकी पटकथा तो उसी दिन लिख दी गयी थी, जिस दिन शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के लालच में भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का दामन थामा था। बालासाहब के कारण शिव सेना की महाराष्ट्र में तूती बोलती थी, उसे उन्ही के पुत्र उद्धव ने मट्टी में मिला दिया। एक कहावत है जहां पैर पड़े भटकन के वहीं बंटा धार यानि कांग्रेस ने जब भी जिस पार्टी से गठबंधन किया, अपने साथ उस पार्टी को भी ले डूबी। इतिहास गवाह है। यही कारण है भाजपा विरोधी कांग्रेस को साथ लेने को तैयार नहीं। लेकिन उद्धव ने कहा "आ बैल मुझे मार", यानि गठबंधन से जितना अधिक नुकसान शिव सेना को हुआ है उससे कहीं अधिक फायदा अन्य पार्टियों को हुआ है। 

महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। असम में डेरा डाले एकनाथ शिंदे के पास 7 और विधायकों के पहुँचने की खबर है। इनमें से 3 विधायक 23 जून 2022 की सुबह पहुँचे, जबकि चार बुधवार की रात ही गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल पहुँच गए थे। शिंदे का दावा है कि उनके साथ 48 विधायक हैं। हालाँकि नंबर को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही है।

शिंदे समर्थक विधायकों की लगातार बढ़ती संख्या ने उद्धव ठाकरे के सामने दोहरा खतरा पैदा कर दिया है। न केवल उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में है, बल्कि शिवसेना भी हाथ से निकलने की आशंका बढ़ गई है। यह आशंका तब पैदा हुई, जब 22 जून को शिंदे ने शिवसेना के व्हिप पर सवाल उठाते हुए नया व्हिप नियुक्त कर दिया था। इतना ही नहीं बागी विधायकों ने उन्हें शिवसेना विधायक दल का नेता भी चुन लिया था।

एक तरफ शिंदे लगातार शिकंजा कसते जा रहे हैं, दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की हर चाल बेअसर दिख रही है। 22 जून की रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर वे अपने निजी घर मातोश्री चले गए थे। उससे पहले एक फेसबुक लाइव में उन्होंने पार्टी संस्थापक और अपने पिता बाल ठाकरे की दुहाई दी। यहाँ तक कहा कि पार्टी नेता कहें तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं। लेकिन, इनका कोई असर अब तक नहीं दिखा है। उल्लेखनीय है कि 1992 में इसी तरह की स्थिति में बाल ठाकरे ने शिवसेना से इस्तीफे की बात कह पार्टी में बगावत शांत कर ली थी। तब उनके पुराने साथी माधव देशपांडे ने पार्टी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे।

बग्गा ने की उद्धव ठाकरे के खिलाफ शिकायत

दिल्ली के भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ 22 जून 2022 रात कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि सीएम ठाकरे ने अपने सरकारी आवास से निजी आवास की ओर जाते समय समर्थकों से मुलाकात कर कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। बग्गा ने पुलिस को दी शिकायत ट्वीट भी की है।
शिकायत में कहा गया है, “कोविड प्रोटोकॉल  के अनुसार मरीज किसी से भी नहीं मिल सकता। उसे आइसोलेशन में रहना चाहिए। सीएम उद्धव ठाकरे ने कोविड प्रोटोकॉल तोड़ा और अपने समर्थकों से मुलाकात की।” बता दें कि उद्धव ठाकरे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने की खबरें कल सामने आई थी। हालाँकि बाद में बताया गया कि उन्होंने आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में दलबदल में शामिल सभी विधायकों पर कार्रवाई की माँग की है। दलबदल करने वाले विधायकों के चुनाव लड़ने पर 5 साल के लिए रोक की माँग की है।