महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जनता की नव्ज पढ़ने में पूर्णरूप से असफल हैं। 2014 चुनाव के मतदान ने देश में तुष्टिकरण पुजारी पार्टियों को हाशिए पर लाने की मन बना लिया था। इसी लिए महाराष्ट्र में जो कुछ भी हो रहा है इसकी पटकथा तो उसी दिन लिख दी गयी थी, जिस दिन शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के लालच में भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का दामन थामा था। बालासाहब के कारण शिव सेना की महाराष्ट्र में तूती बोलती थी, उसे उन्ही के पुत्र उद्धव ने मट्टी में मिला दिया। एक कहावत है जहां पैर पड़े भटकन के वहीं बंटा धार यानि कांग्रेस ने जब भी जिस पार्टी से गठबंधन किया, अपने साथ उस पार्टी को भी ले डूबी। इतिहास गवाह है। यही कारण है भाजपा विरोधी कांग्रेस को साथ लेने को तैयार नहीं। लेकिन उद्धव ने कहा "आ बैल मुझे मार", यानि गठबंधन से जितना अधिक नुकसान शिव सेना को हुआ है उससे कहीं अधिक फायदा अन्य पार्टियों को हुआ है।
महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। असम में डेरा डाले एकनाथ शिंदे के पास 7 और विधायकों के पहुँचने की खबर है। इनमें से 3 विधायक 23 जून 2022 की सुबह पहुँचे, जबकि चार बुधवार की रात ही गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल पहुँच गए थे। शिंदे का दावा है कि उनके साथ 48 विधायक हैं। हालाँकि नंबर को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही है।
शिंदे समर्थक विधायकों की लगातार बढ़ती संख्या ने उद्धव ठाकरे के सामने दोहरा खतरा पैदा कर दिया है। न केवल उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में है, बल्कि शिवसेना भी हाथ से निकलने की आशंका बढ़ गई है। यह आशंका तब पैदा हुई, जब 22 जून को शिंदे ने शिवसेना के व्हिप पर सवाल उठाते हुए नया व्हिप नियुक्त कर दिया था। इतना ही नहीं बागी विधायकों ने उन्हें शिवसेना विधायक दल का नेता भी चुन लिया था।
#WATCH | Assam: Three more Shiv Sena's rebel MLAs reach Radisson Blu Hotel in Guwahati amid political instability in the ruling Maha Vikas Aghadi government in Maharashtra pic.twitter.com/AkYfw15nhV
— ANI (@ANI) June 23, 2022
एक तरफ शिंदे लगातार शिकंजा कसते जा रहे हैं, दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की हर चाल बेअसर दिख रही है। 22 जून की रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर वे अपने निजी घर मातोश्री चले गए थे। उससे पहले एक फेसबुक लाइव में उन्होंने पार्टी संस्थापक और अपने पिता बाल ठाकरे की दुहाई दी। यहाँ तक कहा कि पार्टी नेता कहें तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं। लेकिन, इनका कोई असर अब तक नहीं दिखा है। उल्लेखनीय है कि 1992 में इसी तरह की स्थिति में बाल ठाकरे ने शिवसेना से इस्तीफे की बात कह पार्टी में बगावत शांत कर ली थी। तब उनके पुराने साथी माधव देशपांडे ने पार्टी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे।
बग्गा ने की उद्धव ठाकरे के खिलाफ शिकायत
Copy of complaint against @OfficeofUT pic.twitter.com/j7K3n7MjeF
— Tajinder Pal Singh Bagga (@TajinderBagga) June 22, 2022
शिवसेना विधिमंडळ मुख्य प्रतोद पदी शिवसेना आमदार श्री.भरत गोगावले यांची नियुक्ती करण्यात आली आहे. सबब, श्री.सुनील प्रभू यांनी आजच्या आमदारांच्या बैठकीबद्दल काढलेले आदेश कायदेशीरदृष्ट्या अवैध आहेत.
— Eknath Shinde - एकनाथ शिंदे (@mieknathshinde) June 22, 2022

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