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‘इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को AIDS’: सोशल मीडिया पर नेटिजन्स समलैंगिक संबंधों को बता रहे वजह; बकरी फार्म मलेशियाई पुलिस के कब्जे में

                                                                   (फोटो साभार: Grok_AI)
भगोड़े इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को AIDS होने की खबर सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से जमकर वायरल है। भारत में धार्मिक कट्टरता फैलाने का आरोपित जाकिर इन दिनों मलेशिया में रह रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि उसे AIDS होने के बाद मलेशिया के ही किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

लोगों के क्या हैं दावे?

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने X पर इससे जुड़े पोस्ट किए हैं। फातिमा खान नामक एक X यूजर ने दावा किया, “कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को AIDS होने का पता चला है! कथित तौर पर वह फिलहाल मलेशिया के सनवे मेडिकल सेंटर में भर्ती हैं।”

एक अन्य यूजर ने तो उसके शागिर्दों को भी अपनी जाँच कराने की सलाह दे दी। यूजर ने लिखा, “सुना है जाकिर नाइक को एड्स हो गया है। अब इसके शागिर्दों को भी अपनी जाँच करवा लेनी चाहिए आपको नहीं लगता? बेचारा संबंध बना बनाकर बीमार हो गया।”

एक अन्य यूजर ने तो इसकी वजह समलैंगिक संबंध बता दी। यूजर ने लिखा, “इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक को AIDS डायग्नोस हुआ है! एड्स के ज्यादातर मामलों की वजह समलैंगिक यौन संबंध हैं। जाकिर नाइक के मजहब में समलैंगिक रिश्ते की मनाही है! फिर उसे एड्स क्यों?”

एक अन्य यूजर ने उसकी बकरियों की भी जाँच कराए जाने का दावा कर दिया। उसने लिखा, “मलेशिया जाकिर नाइक के घर के सभी सदस्यों, यहाँ तक कि उसके बकरी फार्म की भी जाँच कर रहा है। जाकिर के एड्स से संक्रमित होने के बाद, उसका बकरी फार्म मलेशियाई पुलिस के कब्जे में है।”

जाकिर नाइक ने क्या कहा?

इस खबर के वायरल होने के बाद भगौड़ा कट्टरपंथी भी सामने आया और उसने भी अपना पक्ष रहा है। ‘फ्री मलेशिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी ने इन दावों को खारिज किया है। नाइक ने कहा, “यह फर्जी खबर है।”
गौरतलब है कि जाकिर नाइक पर भारत में नफरत फैलाने वाले भाषण देने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर उकसाने और आतंकवाद के लिए प्रेरित करने जैसे गंभीर आरोप हैं। भारतीय एजेंसियाँ लंबे समय से उसकी गिरफ्तारी की कोशिश कर रही हैं लेकिन वह 2016 से भारत से फरार है और मलेशिया में शरण लिए हुए है। भारत ने उसे प्रत्यर्पित करने की कई बार कोशिश की है लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।

"लड़की को 20 मिनट देखकर वासना महसूस नहीं करते, तो आप स्वस्थ नहीं हैं": ज़ाकिर नाइक ; जिसे दिग्विजय सिंह ने कहा ‘शांति का मसीहा’, उसे ‘घटिया-घिनौना-बीमार’ कह रहीं सुप्रिया श्रीनेत


शनिवार (12 अक्टूबर) को कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस्लामिक कट्टरपंथी और नफरत फैलाने वाले उपदेशक ज़ाकिर नाइक की महिलाओं पर की गई यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणी को लेकर कड़ी आलोचना की।

सुप्रिया ने ट्वीट किया, “इतनी घटिया घिनौनी सोच, बीमार असल में यह खुद हैं।” उन्होंने ज़ाकिर नाइक की उस ताजा टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें नाइक ने महिलाओं, खासकर एंकरों को लेकर अपमानजनक बातें कही थीं।

यह जानना जरूरी है कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले सुप्रिया श्रीनेत ने 17 साल तक बतौर पत्रकार काम किया था, और उन्होंने ईटी नाउ पर न्यूज एंकर के तौर पर भी सेवाएँ दी थीं।

                                 सुप्रिया श्रीनेत के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हाल ही में पाकिस्तान में एक इंटरव्यू के दौरान ज़ाकिर नाइक ने महिलाओं को उन प्रोफेशन्स से दूर रहने की सलाह दी थी, जहां उन्हें कैमरे के सामने आना पड़ता है। नाइक का कहना था कि ऐसा करने से महिलाएँ पुरुषों की वासना का शिकार बनती हैं। इस्लामिक प्रचारक ने कहा, “अगर कोई मर्द महिला एंकर को देख कर वासना महसूस नहीं करता, तो वह मेडिकल रूप से ठीक नहीं है।”

नाइक जो बोल रहा है वही अनवर शेख अपनी एक पुस्तक "Islam Sex And Violence" में लिखा है, लेकिन उनका सन्दर्भ इस्लाम फ़ैलाने से है। दूसरे, अली सीना की किताब "Understanding Mohammad And Muslim" में पढ़ने को मिलता है।     

ज़ाकिर नाइक ने यह भी कहा, “अगर आप 20 मिनट तक किसी लड़की को देखकर वासना महसूस नहीं करते, तो आप स्वस्थ नहीं हैं,” और इस दौरान उन्होंने क़ुरान की आयतों का हवाला दिया।

हाल ही में ज़ाकिर नाइक को पाकिस्तान में तीखी आलोचना झेलनी पड़ी थी, जब उसने स्वतंत्र और अविवाहित महिलाओं को ‘बाज़ारू औरत’ कहा था।

सुप्रिया श्रीनेत की ज़ाकिर नाइक पर की गई आलोचना को कांग्रेस की आधिकारिक राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, भले ही वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। यह ज्यादा से ज्यादा उनकी व्यक्तिगत राय है, क्योंकि नाइक ने उनके पुराने प्रोफेशन (धंधे) को खास तौर पर निशाना बनाया था।

किसी भी अन्य कांग्रेस नेता ने ज़ाकिर नाइक के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है, भले ही उसकी यौन उत्पीड़न संबंधी टिप्पणियाँ जगजाहिर हों। असल में, पार्टी ने कभी औपचारिक रूप से इस नफरत फैलाने वाले इस्लामी कट्टरपंथी की आलोचना नहीं की।

इसके उलट, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ज़ाकिर नाइक को ‘शांति का मसीहा’ कहकर उसकी तारीफ की थी।

उन्होंने कहा था, “अस्सलाम वालेकुम। मैंने डॉ. ज़ाकिर नाइक के बारे में बहुत सुना था। अंततः मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। मैं खुश हूँ कि वह दुनिया भर में शांति का संदेश फैला रहे हैं।”

दिग्विजय सिंह ने 2012 में अपने भाषण में कहा था, “डॉ. ज़ाकिर नाइक ने सभी धर्मों की किताबें पढ़ी हैं। अब यह जरूरी है कि आपका शांति का संदेश भारत के हर कोने में पहुँचे।”

कांग्रेस, ज़ाकिर नाइक और एक छिपा हुआ रिश्ता

हालाँकि उस समय ज़ाकिर नाइक को भगोड़ा घोषित नहीं किया गया था, लेकिन उसके हिंदू धर्म पर हमला करने वाले और कट्टर इस्लामिक भाषण ऑनलाइन उपलब्ध थे।
इसके बावजूद, मुस्लिम तुष्टिकरण के लंबे इतिहास वाली कांग्रेस पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह को ज़ाकिर नाइक की तारीफ करने से कोई हिचक नहीं हुई।
यह जानकर कई लोग चौंक सकते हैं कि ज़ाकिर नाइक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) और राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) के बीच गहरे संबंध हैं। IRF ने दो बार RGCT को 50 लाख और 25 लाख रुपये का दान दिया है। और RGCT के ट्रस्टी कोई और नहीं बल्कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी हैं।

राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन, सोरोस और जाकिर नाइक की संस्था क्यों करती थी फंडिंग?

भारत के स्वतंत्र होने से लेकर तथाकथित किसान आंदोलन तक देश ने अनेकों धरने और प्रदर्शन देखे। पहले किसी भी चीज (खाद्य पदार्थ अथवा पेट्रोल) पर चवन्नी बढ़ने पर धरने एवं प्रदर्शन होते थे, उनसे विपक्ष मजबूत होता था लेकिन निर्भय कांड से लेकर किसान आंदोलन तक जितने भी धरने हुए या हो रहे हैं, विपक्ष कमजोर हो रहा है, लेकिन उतनी तेजी से नहीं, जिस तेजी से होना चाहिए। देखिए कैसे:

CAA विरोध में शामिल हिन्दुओ हिन्दुत्व 
के विरोध ऐसे बैनर पर तुम्हारी आत्मा कहाँ मर गयी थी
?
अभी कुछ दिन पहले एक अजीबोगरीब फैसला आया कि 13 वर्षीय एक अपराधी को नाबालिग को कोर्ट 33 साल लेती है, फिर जेल से रिहा करने पर 10 साल। परन्तु निर्भय केस में क्या हुआ, एक आरोपी को नाबालिग होने पर रिहा कर दिया जाता है और उसको दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सिलाई मशीन देकर सम्मानित करते हैं, इसे सम्मान ही कहा जाएगा। क्योकि वह मुसलमान था। चलो अब हाल के CAA विरोध प्रदर्शन को लें। जहां हिन्दुओं की गैर-उपस्थिति में जब तक देश इस्लामिक मुल्क न बन जाए तब तक हाथ तिरंगा और सेकुलरिज्म को बुलंद करना होगा और हिन्दुओं की गैर-हाज़िरी में अपने मकसद में काम करना है और इस आंदोलन को समस्त भाजपा विरोधियों का समर्थन था। इसी ब्लॉग पर इस विषय पर लिखे लेख शीर्षक सेकुलरिज्म सिर्फ तब तक, जब तक भारत में इस्लाम की हुकूमत नहीं ले आते : अरफ़ा खानुम, मुस्लिम पत्रकार, आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार को 1 लाख से अधिक पाठक पढ़ चुके हैं। किसी ने खंडन नहीं किया। हिन्दुत्व को कितने अपमानित शब्द बोले गए, यदि वही शब्द किसी अन्य धर्म के विरुद्ध बोले जाते, CAA विरोध किसी गुप्त स्थान में लुप्त होकर, देश में आग लग गयी होती। नूपुर शर्मा जीवित उदाहरण है। जबकि नूपुर ने वही बोला जो इस्लामिक किताबों में लिखा है, अपने मन से नहीं बोला था। एक एंकर ने तो समस्त इमामों, मुफ्तियों और इस्लामिक विद्वानों को अपने शो में खुला चैलेन्च दिया था कि 'नूपुर ने क्या गलत बोला है?' लेकिन बेशर्म हिन्दू पागलों की तरह मोदी-योगी विरोध की अंधी दौड़ में शामिल थे। 

दूसरा, भाजपा विरोधी पार्टियों द्वारा किसान आंदोलन को समर्थन था, क्या नारेबाजी हुई थी, क्या वह देशहित में थी? जो यह सिद्ध करता है कि ये आंदोलन भारत विरोधियों द्वारा प्रायोजित है, जिस पर प्रकाश डाल रही है न्यूज़ पोर्टल पर प्रकाशित निम्न रपट। फिर भी जनता इन पार्टियों को वोट देती हैं, इनकी महिमा का गुणगान करती है।  

केंद्र सरकार ने गांधी परिवार से जुड़े गैर सरकारी संगठन राजीव गांधी फाउंडेशन का विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA) का लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई 2020 में गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा की गई जांच के बाद हुई है। अब राजीव गांधी फाउंडेशन को विदेश से किसी तरह की फंडिंग नहीं हो पाएगी। कानून के उल्‍लंघन पर गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की है। पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं। राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्‍टीज में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पूर्व वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम शामिल हैं। 

राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए 1991 में की गई थी। अगस्‍त 2020 में राजीव गांधी फाउंडेशन की फंडिंग को लेकर सनसनीखेज दावे किए गए थे। आरोप था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को PNB घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी की कंपनियों से डोनेशन मिलता रहा। फाउंडेशन को जाकिर नाईक, यस बैंक के राणा कपूर और जिग्‍नेश शाह से भी डोनेशन मिला। उसी के बाद गृह मंत्रालय ने जांच शुरू की। पीएमएलए (प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट) की जांच चल ही रही थी। पहले भी राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी सरकार से मदद मिलने पर विवाद हो चुका है। फाउंडेशन की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005-06 में राजीव गांधी फाउंडेशन को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार और चीनी दूतावास से दो अलग-अलग दानकतार्ओं से दान मिला। चीनी दूतावास को सामान्य दाताओं की सूची में रखा गया

इस मुद्दे पर टि्वटर यूजर Agenda Buster ने एक ट्वीट की एक श्रृंखला प्रकाशित की है। उन्होंने लिखा है कि आज कई एनजीओ दुनिया भर में जमीनी स्तर पर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं इसलिए लोग उनका सम्मान भी करते हैं लेकिन कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि उनका भी दुरुपयोग हुआ है। आधुनिक समय के लोकतांत्रिक युद्ध टैंकों, लड़ाकू विमानों और गोलियों से नहीं लड़े जाते हैं। वे एनजीओ, कार्यकर्ताओं और विदेशी फंडों द्वारा लड़े जाते हैं। मान लीजिए कि अमेरिका भारतीय सरकार पर दबाव बनाना चाहता है कि वह किसी मुद्दे पर उसका समर्थन करे या वे भारत में कुछ बुनियादी, क्षमता निर्माण या अंतरिक्ष कार्यक्रम को रोकना चाहते हैं तो उन्हें अपने जेट भारत भेजने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें बस भारत में काम करने वाले अपने एनजीओ को पैसा ट्रांसफर करने की जरूरत है और बाकी काम ये एनजीओ उनके कार्यकर्ता, वकील और मीडियाकर्मी करेंगे। इसलिए एनजीओ की फंडिंग के बारे में जानना बहुत जरूरी है।

राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए 1991 में की गई थी। सोनिया गांधी के नेतृत्व में जुलाई 1991 में बैठक हुई और फाउंडेशन के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया था। राजीव गांधी फाउंडेशन का कहना है कि संगठन ने शिक्षा के साथही स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिलाओं और बच्चों, विकलांगता सहायता आदि सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया है।

भ्रष्ट कॉरपोरेट्स से फंडिंग

फाउंडेशन ने चेक नंबर 676400 के माध्यम से 29-8-2014 को नवराज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से 10 लाख रुपये प्राप्त किए। नवराज एस्टेट गीतांजल इंडस्ट्रीज़ की सिस्टर फर्म है, जो भगोड़े मेहुल चौकसी के स्वामित्व में है, जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग और पीएनबी धोखाधड़ी का आरोप है। उन्हें यस बैंक धोखाधड़ी के आरोपी राणा कपूर से 9.45 लाख रुपये मिले। वही राणा कपूर 2 करोड़ रुपये में प्रियंका वाड्रा से पेंटिंग लेकर आए थे जिसका भुगतान यस बैंक ने किया था। 27-10-2011 को जिग्नेश शाह से 50 लाख रुपये प्राप्त किए। वह नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड घोटाले में आरोपी है।

फाउंडेशन को 8-7-2011 को Izl@mic Research Foundation से 50 लाख रुपये की फंडिंग मिली। इस संस्था का मालिक जाकिर नाइक है। वही जाकिर नाइक जो भगोड़ा है और कट्टरपंथ और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी है। इस बात का खुलासा होने के बाद फाउंडेशन ने वह पैसा 12-7-2016 को लौटा दिया।

सत्ता का दुरुपयोग

गांधी परिवार की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने नियमों में बदलाव किया और गांधी परिवार की कांग्रेस पार्टी को लुटियंस दिल्ली में 2 एकड़ महंगी जमीन दी। कांग्रेस पार्टी ने 1995 में वह जमीन गांधी परिवार के राजीव गांधी फाउंडेशन को मुफ्त में किराए पर दी थी।

2014 में उन्होंने फिर से नियम बदल दिए और राजीव गांधी फाउंडेशन ने उस जमीन को 4 अन्य संगठनों को किराए पर दे दिया। उन्होंने उमर खालिद और सिमी कार्यकर्ताओं को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने दिया। मनमोहन सिंह सरकार ने पीएम राष्ट्रीय राहत कोष से फाउंडेशन को फंड दिया।

फाउंडेशन को चीनी दूतावास से मिला फंड

फाउंडेशन को 2006-09 के दौरान दो बार चीनी सरकार से फंड भी मिला, यही वह समय था जब कांग्रेस सरकार ने चीन के साथ गुप्त सौदा किया था।

अमेरिकी अरबपति सोरोस से फंडिंग

2020 में, अमेरिकी अरबपति n वामपंथी सोरोस ने कहा कि वह मोदी को हटा देंगे और अपने पिछले सूत्र में मैंने उनके n C1A के लिंक के बारे में भी बताया और कैसे C1A ने अमेरिकी आदेशों का पालन नहीं करने वाली सरकारों को हटाने के लिए विपक्षी दलों को फंड दिया। फाउंडेशन ने जर्मन एनजीओ फ्रेडरिक नौमन फाउंडेशन (Friedrich Nauman Foundation) से धन प्राप्त किया जो कि सोरोस (S0r0s) द्वारा वित्त पोषित किया गया। क्लिंटन फाउंडेशन ने भी राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को समर्थन दिया था और क्लिंटन फाउंडेशन को सोरोस (S0r0s) फंड करता है। राजीव गांधी फाउंडेशन 2007-08 में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क से जुड़ा था। सोरोस पर आरोप है कि वह कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन, शहरी नक्सलियों को समर्थन, रोहिंग्याओं को समर्थन, देशद्रोह विरोधी कानून का समर्थन करने के लिए फंडिंग करता है।

राजीव गांधी फाउंडेशन ने अमन बिरादरी ट्रस्ट के साथ भागीदारी की, जिसके प्रमुख हर्ष मंदर हैं जो सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के सलाहकार बोर्ड में थे। हर्ष मंदर ने 2010 में सांप्रदायिक हिंसा बिल बनाया था और सीएए के विरोध में शामिल था।

FCRA क्‍या है? विदेशी चंदा पाने के नियम क्‍या हैं?

FCRA यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम। इस कानून के जरिए विदेशी चंदे का रेगुलेशन होता है। FCRA पहली बार 1976 में अस्तित्‍व में आया। 2010 में नियम बदले गए। भारत में मौजूद वे सारे एसोसिएशन, समूह और गैर-सरकारी संगठन (NGOs) जिन्‍हें विदेश से चंदा चाहिए, उन्‍हें FCRA की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है। ऐसे सभी NGOs के लिए FCRA रजिस्‍ट्रेशन अनिवार्य है। रजिस्‍ट्रेशन पांच सांल के लिए वैध होता है, उसके बाद इसे रिन्‍यू कराया जा सकता है। रजिस्‍टर्ड संस्‍थाओं को सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों के लिए विदेशी चंदा लेने की अनुमति है। सभी को सालाना रिटर्न फाइल करने होते हैं।

गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस

2015 में MHA ने नई गाइडलाइंस जारी कीं। सभी NGOs के लिए या तो सरकारी या प्राइवेट बैंक में खाते होना अनिवार्य है ताकि सुरक्षा एजेंसियों को रियल टाइम एक्‍सेस मिल सके। अब सारे NGOs को यह प्रमाण देना पड़ता है कि विदेशी फंडिंग से भारत की संप्रभुता और अखंडता खतरे में नहीं पड़ेगी। मित्र देशों संग रिश्‍तों पर नकरात्‍मक असर नहीं पड़ेगा। सांप्रदायिक सद्भाव को कमजोर नहीं करेगी।

‘क्या किसी ने ज़ाकिर नाइक से कहा माफी माँगने के लिए?’: नूपुर शर्मा को मिला राज ठाकरे का समर्थन, हलाल मीट के खिलाफ MNS का अभियान

MNS (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) सुप्रीमो राज ठाकरे ने भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा ने जो बात कही वही बात ज़ाकिर नाइक ने भी कही थी, लेकिन उससे कोई माफ़ी की माँग क्यों नहीं कर रहा? राज ठाकरे ने कहा कि जब से नूपुर शर्मा का बयान आया है, काफी राजनीति हो रही है और कोई उनका समर्थन नहीं कर रहा। बता दें कि राज ठाकरे कुछ दिनों से स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।
केवल नूपुर शर्मा ही नहीं, अब तो सोशल मीडिया पर The Jaipur Dialogue, Face to Face और Sach Wala के अतिरिक्त News Nation चैनल ने तो 'इस्लाम क्या कहता है' नाम से शो शुरू किया हुआ है, जहाँ कुरान, हदीस, और शरीयत पर खुलकर बहस होती है, बाल की खाल निकाली जाती है, जिस पर कुछ में तो कई बार मौलानाओं को पसीने पोंछते या फिर बहस छोड़कर जाते देखा जाता है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान की काज़मी आरज़ू भारतीय मौलाना से पूछती है कि "मर्दों को 72 हूरें मिल गयी, औरत को क्या?"(देखिए वीडियो) लेकिन कोई फतवा नहीं और न ही 'सिर तन से जुदा' का उन्मादी शोर, न ही कोई मुस्लिम देश बोल रहा, क्योकि बहस होती है मुस्लिमों के बीच। हाँ, अगर वही बातें कोई हिन्दू बोल रहा होता, निश्चित रूप से सडकों पर खूब हंगामा हो रहा होता। अभी कल (23 अगस्त 2022)ही हैदराबाद में क्या हुआ, सबने देखा। कोई हिन्दू नाम लिए बिना ही कुछ बोल दे, वह कट्टरपंथियों को बर्दाश्त नहीं।
दूसरे, 'सिर तन से अलग' नारे लगाने वालों पर गृह मंत्री ने क्या कार्यवाही की? यदि यही नारे हिन्दुओं ने लगाए होते तो क्या ऐसे नारे लगाने वाले खुले घूम रहे होते? जब हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी की जाने पर सरकार से लेकर समस्त हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाएं क्यों नहीं तुरंत सड़क पर आकर, उनकी गिरफ़्तारी की मांग करतीं?

 

उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय बाद हुई बैठक में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि नूपुर शर्मा पर माफ़ी माँगने के लिए काफी दबाव बनाया गया, लेकिन ज़ाकिर नाइक से किसी ने माफ़ी माँगने के लिए नहीं कहा। बीमारी से ठीक होने के बाद पार्टी कैडर के बीच पहुँचे राज ठाकरे ने लंबी लड़ाई का आह्वान किया है। उनके कूल्हे की सर्जरी हुई थी। लेकिन, अब निकाय चुनावों से पहले वो सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन के उस बयान का जिक्र करते हुए उस पर भी हमला बोला, जिसमें उसने हिन्दुओं को दी थी।

राज ठाकरे ने इस दौरान अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे पर भी हमला बोला और उन्हें याद दिलाया कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने ही ये नियम बनाया था कि गठबंधन में जिस पार्टी के ज्यादा विधायक होंगे, मुख्यमंत्री भी उसी का बनेगा। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कह दिया था कि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे, तब शिवसेना ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

राज ठाकरे की पार्टी ने ये भी ऐलान किया है कि वोहलाल मांस के खिलाफ भी अभियान चलाएगी। उसने इसे टेरर फंडिंग से जोड़ते हुए कहा कि हिन्दुओं की आजीविका और राजस्व पर भी इसके कारण गलत असर पड़ा है। मनसे ने कहा कि हलाल मीट आतंकियों को वित्तीय मदद पहुँचाने वाला सबसे बड़ा तंत्र है, ऐसे में न सिर्फ झटका कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि शाकाहारी लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। मनसे के ‘व्यापारी सेना’ ने एक खुले खत के माध्यम से अपील की है कि हमारा पैसा आतंकियों की मदद के लिए नहीं जाना चाहिए।