प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ से कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मौका था मेरठ में ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेट्रो सेवा के ऐतिहासिक उद्घाटन का, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर रही दिल्ली की वो घटना, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है और देश के लिए बोझ बन गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ से कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मौका था मेरठ में ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेट्रो सेवा के ऐतिहासिक उद्घाटन का, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर रही दिल्ली की वो घटना, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है और देश के लिए बोझ बन गई है।
उन्होंने कहा कि हम उस संस्कृति से आते हैं जहां गांव की शादी में भी पूरा गांव मेहमानों की खातिरदारी में जुट जाता है, लेकिन कांग्रेस अपने ही देश को बदनाम करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि जहां पूरा देश मेहमानों के स्वागत में जुटा था, वहीं कांग्रेस देश को बदनाम करने की साजिश रच रही थी।
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष के अन्य दलों और मीडिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस हरकत से उनके साथी दल भी हैरान हैं और उन्होंने इससे किनारा कर लिया है। पीएम ने मीडिया से आग्रह किया कि ‘मोदी ने विपक्ष को धो डाला’ जैसी हेडलाइन न बनाएं, बल्कि सीधे कांग्रेस का नाम लें। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ऐसी हरकतें करती है, तो हेडलाइन ‘विपक्ष’ के नाम से नहीं बल्कि ‘कांग्रेस’ के नाम से बननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘विपक्ष’ शब्द का इस्तेमाल कर मीडिया अनजाने में कांग्रेस के पापों पर पर्दा डाल देता है।
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस द्वारा संसद में महिला सांसदों को आगे कर विरोध प्रदर्शन करवाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि क्या आप इतने खोखले हो गए हैं कि माताओं-बहनों को इस तरह आगे करना पड़ रहा है? उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर प्रधानमंत्री बनना है, तो जनता का दिल जीतना पड़ता है, इस तरह की ओछी हरकतों से कोई नेता नहीं बनता। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस अब देश के लिए एक ‘बोझ’ बन चुकी है।
सियासी हमले के बाद तकनीकी उपलब्धि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत में पहली बार एक ही प्लेटफॉर्म और एक ही ट्रैक पर ‘नमो भारत’ और ‘मेट्रो’ दोनों चलेंगी। इससे दिल्ली और मेरठ के बीच की दूरी कम हो जाएगी। इससे दिल्ली-मेरठ के बीच रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लोगों को दिल्ली में महंगे किराए के कमरे लेकर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि 2014 से पहले देश के सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो थी, जबकि आज 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो का जाल बिछ चुका है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है।
मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, कैंची उद्योग और मुरादाबाद के पीतल उद्योग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने MSMEs के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष फंड की व्यवस्था की है। अब छोटे कारीगर बिना किसी सीमा के अपना सामान विदेशों में कूरियर कर सकेंगे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह जी को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार किसानों और छोटे उद्यमियों के विजन को धरातल पर उतार रही है।
उन्होंने कहा कि 10 साल पहले पश्चिमी यूपी की पहचान दंगों, गुंडों और खराब सड़कों से होती थी। सपा राज में अपराधी बेखौफ थे, लेकिन आज योगी जी के राज में वही अपराधी जेलों में दिन काट रहे हैं। आज मेरठ की पहचान ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और अत्याधुनिक मेट्रो से हो रही है। पीएम मोदी ने दोहराया कि जब तक उत्तर प्रदेश विकसित नहीं होगा, भारत विकसित नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट और सेमीकंडक्टर फैक्ट्री जैसे प्रोजेक्ट्स यहां के युवाओं के लिए लाखों रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Whatsapp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta को लगाई कड़ी फटकार (साभार: आज तक, एनडीटीवी) सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को वाट्सऐप (WhatsApp) और मेटा (Meta) की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कह दिया कि भारत के लोगों के निजी डेटा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्याकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कंपनी से पूछा कि वह भारतीय ग्राहकों की जानकारी दूसरी कंपनियों के साथ कैसे और क्यों साझा कर रही है? कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आप देश के संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं और डेटा चुराना आपका धंधा बन गया है।
‘बिहार के गाँव का व्यक्ति कैसे समझेगा आपकी भाषा?’
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्याकांत ने वाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कंपनी के वकीलों से पूछा, “क्या बिहार या तमिलनाडु के किसी दूर-दराज गाँव में रहने वाला व्यक्ति आपकी इस मुश्किल भाषा को समझ पाएगा? सड़क पर फल बेचने वाली एक गरीब महिला या घर में काम करने वाली बाई क्या आपकी शर्तों को समझ सकती है?”
CJI: a person sitting in remote village in Bihar...
Rohatgi: we had given newspaper ads earlier, anyways...that means in the interim, you allow the appeal, the law says I have to come back in 18 months
Counsel; this act is not in force, it will be in May 2027
CJI ने आगे कहा कि आपकी पॉलिसी की भाषा इतनी चालाकी से लिखी गई है कि हम में से कुछ लोग भी उसे नहीं समझ पाते। उन्होंने कहा कि पॉलिसी साधारण ग्राहकों के नजरिए से होनी चाहिए। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “आपने करोड़ों लोगों का डेटा ले लिया होगा। यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक शालीन तरीका है। हम इसे इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे।”
‘डेटा साझा करना या वाट्सऐप छोड़ना- ये कोई विकल्प नहीं, एकाधिकार है’
जब वाट्सऐप की ओर से कहा गया कि ग्राहकों के पास पॉलिसी से बाहर निकलने (Opt-out) का विकल्प है, तो CJI सूर्याकांत ने इसे ‘मजाक’ बताया। उन्होंने कहा, “मार्केट में आपका पूरा एकाधिकार (Monopoly) है और आप कह रहे हैं कि आप विकल्प दे रहे हैं? आपका विकल्प यह है कि या तो वाट्सऐप छोड़ दो या हम डेटा साझा करेंगे। लोग इस सिस्टम के आदी हो चुके हैं और वे मजबूर हैं।”
CJI ने टिप्पणी की कि आप देश की प्राइवेसी के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “आज फेसबुक ने आपको खरीदा है, कल फेसबुक को कोई और खरीद लेगा और आप डेटा ट्रांसफर कर देंगे। आप इस देश के संविधानवाद का मजाक बना रहे हैं।”
Behaviroual डेटा और विज्ञापन का खेल: CJI ने साझा किया अपना अनुभव
जस्टिस बागची ने इस बात पर जोर दिया कि कोर्ट यह देखना चाहता है कि लोगों के व्यवहार (Behaviour) और रुझानों का विश्लेषण करके डेटा को कैसे ‘किराए’ पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डेटा के हर छोटे हिस्से की एक कीमत है और मेटा इसका इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापनों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कर रहा है।
इस पर CJI सूर्यकांत ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहा, “अगर वाट्सऐप पर किसी डॉक्टर को मैसेज भेजा जाए कि तबीयत ठीक नहीं है और डॉक्टर कुछ दवाएँ लिख दे, तो तुरंत ही मुझे वैसे ही विज्ञापन आने लगते हैं। 5-10 मिनट के भीतर ईमेल और यूट्यूब पर उन दवाओं के मैसेज मिलने शुरू हो जाते हैं। यह कैसे हो रहा है?”
अदालत ने माँगा हलफनामा, मंत्रालय को बनाया पक्षकार
कंपनियों की दलीलों के बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि हमारा निजी डेटा न केवल बेचा जा रहा है, बल्कि उसका व्यावसायिक शोषण भी हो रहा है। कोर्ट ने अंततः मेटा और वाट्सऐप को अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल करने के लिए अगले सोमवार (9 फरवरी 2026) तक का समय दिया है। साथ ही, कोर्ट ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया है।
अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि कंपनियों के व्यावसायिक हित भारतीयों के मौलिक अधिकारों की कीमत पर नहीं हो सकते। यह पूरा मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपए के जुर्माने से जुड़ा है, जिसे CCI ने वाट्सऐप की दबंगई और प्राइवेसी पॉलिसी के दुरुपयोग के कारण लगाया था।
कॉन्ग्रेस नेता उमंग सिंघार ने कहा कि जनजातीय समाज हिंदू नहीं है (साभार: Facebook-umang singhar) मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने विवादित बयान दिया है। सिंघार ने कहा कि जनजातीय समाज हिंदू नहीं है। अब इस बयान पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बीजेपी ने भी इस बयान पर कांग्रेस को घेरा है।
दरअसल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने छिंदवाड़ा में मध्य प्रदेश जनजातीय समाज विकास परिषद की बैठक के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने कहा, “मैं गर्व से कहता हूँ कि हम जनजातीय हैं, हिंदू नहीं। मैं यह बात कई सालों से कहता आ रहा हूँ।”
VIDEO | Madhya Pradesh LoP Umang Singhar addresses the meeting and felicitation ceremony of the Madhya Pradesh Adivasi Vikas Parishad at the local District Congress office.
He says, “I say with pride that we are Adivasis, not Hindus. I have been saying this for many years. And… pic.twitter.com/f7MyQrEBiX
उमंग सिंघार ने आगे कहा, “शबरी, जिन्होंने भगवान राम को बचा हुआ बेर खिलाया था, वह भी जानजातीय समुदाय से थे। जो आदिकाल से वास कर रहे हैं, वही जनजातीय हैं। हमें हमारे समाज को अपनी पहचान दिलानी होगी। चाहे सरकार कोई भी हो, उसे जनजातीय समाज का मान-सम्मान बनाए रखना होगा।”
सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सिंघार के इस बयान पर प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस हमेशा हिंदू और हिंदुत्व के विरोध में ही काम करती है। मुख्यमंत्री ने कहा, “राहुल गाँधी ने हिंदुत्व का मजाक बनाया। अब उमंग सिंघार कह रहे हैं आदिवासियों में हिंदुत्व नहीं है।”
दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस हमेशा हिंदू और हिंदुत्व के विरोध में काम करती है। राहुल गांधी ने हिंदू के बारे में जो बात कही, वह अत्यंत बचकानापन था।
अब कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कह रहे हैं कि आदिवासियों में हिंदुत्व नहीं है। उन्हें शर्म आनी चाहिए।
सीएम ने आगे कहा, “कमाल हो गया, शर्म आती है। ऐसा नहीं होना चाहिए। राजनीति जरूर करो लेकिन हिंदुत्व पर प्रश्न उठाना, ये जनता माफ नहीं करेगी।”
आदिवासियों के गले में क्रॉस लटकाने का पाप मत करो: BJP नेता
उमंग सिंघार के ‘जनजातीय समाज हिंदू नहीं’ वाले बयान को लेकर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, “जनजातीय समाज के गले में क्रॉस लटकाने और सोनिया गाँधी को खुश करने के लिए उमंग जी पाप मत करो। हिंदुस्तान आपसे नाराज हो जाएगा। जनजातीय हमारी सभ्यता के ध्वजवाहक हैं।”
आदिवासी भाई-बहन अपने गले में क्रॉस नहीं लटकाएंगे उमंग सिंघार जी, तुम भले ही सोनिया गांधी जी को खुश करने के लिए कितने भी प्रयास कर लो...#RameshwarSharmapic.twitter.com/LKvozGQlch
बीजेपी विधायक ने आगे कहा, “आजादी की लड़ाई में लोहा लेने वाला आदिवासी समाज, जय जोहार का जयकारा लगाने वाला समाज, बड़े देव को पूजने वाला आदिवासी समाज हमारी आत्मा है।”
मध्य प्रदेश में जनजातीय समाज धर्मांतरण को मजबूर
मध्य प्रदेश में जनजातीय समाज धर्म परिवर्तन की समस्या से जूझ रहा है, जहाँ मुख्य रूप से ईसाई मिशनरी सामाजिक सेवाओं, शिक्षा और आर्थिक सहायता के बहाने धर्मांतरण को बढ़ावा देते हैं। ऐसे कई मामले अब तक सामने आए हैं।
दमोह जिले के हटा ब्लॉक के सूरजपुरा गाँव में ईसाई मिशनरियों ने गाँव के कई लोगों को बहकाकर धर्म परिवर्तन करवा दिया। यहाँ गाँव के कई परिवारों ने धर्म बदलकर ईसाई नाम रख लिए थे, जिसके बाद गाँव के अन्य लोगों ने इनका विरोध किया था।
इससे सटे छतरपुर जिले के भारतीपुरा गाँव में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। यहाँ भील समाज के लोगों को पैसों का लालच देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया। गाँव के 8 परिवारों ने धर्म परिवर्तन कर लिया।
गुना जिले में दो ईसाई दंपति रुठियाई क्षेत्र में प्रार्थना सभाएँ आयोजित कर लोगों का ब्रेनवॉश करते पकड़े गए। यहाँ लोगों को धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था। हिंदू संगठन की पुलिस शिकायत के बाद मामला उजागर हुआ था।
कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार ( फोटो साभार: Bar and Bench) आज मोबाइल युग से चिट्ठी लिखने का युग था। जब मन अपने किसी भी रिश्तेदार या परिचित को पत्र लिख लेटर बॉक्स में डालने चले जाते/जाती, लेकिन पोस्टकार्ड आदि लेने के लिए डाकखाने में लम्बी लाइन में लगना पड़ता था। लेकिन कपिल सिबल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण जैसे वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को ही पोस्टऑफिस बना डाला। और लोग समझते हैं कि देखो कितने बड़े वकील हैं। दरअसल अगर इनकी सेटिंग नहीं हो तो इनसे बढ़िया वकील तो किसी भी जिला कोर्ट का समझदार वकील होता है। अगर इस वकील गैंग की सेटिंग नहीं हो, हर केस जीत नहीं सकते। यशवंत वर्मा के घर मिले/जले नोट बहुत कुछ चीख-चीखकर कह रहा है। जाँच तो उन जजों की भी होने चाहिए जिन्होंने देर रात सीतलवार और आतंकियों के लिए अदालत खोली।
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को फटकार लगाई। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि CJI को पोस्ट ऑफिस मत समिझए, जो सिर्फ फाइलें आगे बढ़ाते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में यशवंत वर्मा की रिट याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया है।
30 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “भारत के CJI का काम केवल पोस्ट ऑफिस की तरह चिट्ठी भेजना नहीं है। अगर उनके पास किसी जज के गलत आचरण का सबूत है तो वे उसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सूचित करना उनका अधिकार है।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ जस्टिस यशवंत वर्मा की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान की। जिसमें उन्होंने आंतरिक जाँच रिपोर्ट को चुनौती दी थी। इस रिपोर्ट में CJI संजीव खन्ना की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से यशवंत वर्मा को हटाने की सिफारिश की गई थी। सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने की।
इस दौरान कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इन-हाउस कमेटी के जज की बर्खास्तगी की सिफारिश करना गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 124 के तहत ही महाभियोग प्रक्रिया हो सकती है। सिब्बल ने कहा कि ऐसा करके CJI संसद के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं, यह ‘अस्वीकार्य’ है। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें लताड़ लगाई।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ‘कैश कांड’ वाले जस्टिस यशवंत वर्मा के रवैए पर भी प्रश्न उठाए। कोर्ट ने कहा, “आप जो मुद्दे उठा रहे हैं, वे महत्वपूर्ण हैं लेकिन पहले भी उठाए जा सकते थे, इसलिए आपका आचरण विश्वास पैदा नहीं करता और आपका आचरण बहुत कुछ कहता है। आप नहीं चाहते कि यहाँ कुछ भी उजागर हो। संसद को फैसला करने दीजिए। हम यह क्यों तय करें कि यह आपका पैसा है या नहीं? यह आंतरिक समिति का काम नहीं था।”
साथ ही जस्टिस दत्ता ने इन-हाउस रिपोर्ट पर कहा कि यह केवल शुरुआती जाँच का निष्कर्ष है और CJI की सिफारिश केवल एक ‘सलाह’ है। कोर्ट ने कहा कि निष्कासन केवल संसद की प्रक्रिया के अनुसार हो सकता है, इन-हाउस रिपोर्ट के अनुसार बिल्कुल भी नहीं हो सकता।
यशवंत वर्मा के घर से मिले थे अधजले नोट
जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित निवास स्थान पर 14 मार्च 2025 को आग लग गई थी। इस आगजनी में घर के स्टोर रूप में बड़ी मात्रा में अधजले नोट मिले थे। इसको लेकर जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कई गवाहों, वीडियो और तस्वीरों से यह साबित होता है कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली वाले घर के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में कैश खासकर 500 रुपए के नोट मिले थे, जिनमें से कुछ आधे जले हुए थे।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद ना तो जस्टिस वर्मा और ना ही उनके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी और ना ही अपने किसी वरिष्ठ को सूचना दी थी।
साभार पहलगाम में आतंकियों द्वारा धर्म पूछकर हुए नरसंहार पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को क्यों clean chit को दी जा रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मोदी विरोधी तक किसी ने पूरी बहस में अब्दुल्ला का नाम तक नहीं लिया, क्यों? जबकि पहलगाम जम्मू-कश्मीर में आता है। अगर जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की सरकार होती मीडिया से लेकर सारा INDI allaince बीजेपी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे होते। क्यों नहीं उमर अब्दुल्ला ने इस नरसंहार की जिम्मेदारी ली? जब कश्मीर में इतने पर्यटक जा रहे हैं उन्हें सुरक्षा प्रदान करना राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की जिम्मेदारी थी। अगर हिन्दुओं की बजाए मुसलमानों का नरसंहार हुआ होता तब अब्दुल्ला का क्या रवैया होता? इस नरसंहार के लिए जितना पाकिस्तान जिम्मेदार है जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी काम दोषी नहीं।
पाकिस्तान को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब दे दिया, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कब कटघरे में खड़ा किया जाएगा? कश्मीर में आतंकवादियों पर मोदी सरकार कार्यवाही कर रही है, राज्य का मुख्यमंत्री क्या कर रहा है? क्यों नहीं आतंकवादियों को घरों में रखने वालों पर कार्यवाही की जाती? देश में पल रहे पाकिस्तान और आतंकवादियों के sleeper cells पर आतंकवादियों की तरह कार्यवाही होनी चाहिए। अब्दुल्ला से पूछा जाए कि कितने आतंकवादी कश्मीर में छिपे हुए हैं? छिपे हुए आतंकवादियों और उनको पनाह देने वालों पर क्या कार्यवाही की? अगर पाकिस्तान से निपटने का काम केंद्र सरकार का है तो घरों में छिपे आतंकवादियों को पकड़ने का काम राज्य सरकार का है।
जो भारत का पक्ष नहीं देख पा रहे हैं, उन्हें आईना दिखाने आया हूं- पीएम मोदी
2014 चुनावों से पहले तक कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों ने देश को पाकिस्तान के नाम से डराकर रखा हुआ था। जगह-जगह लिखा और घोषणा की जाती थी कि "किसी लावारिस चीज को न छुए, बम हो सकता है।" जनता में पाकिस्तान का ऐसा डर बैठ चुका था कि जैसे किसी बच्चे को सुलाने यह खाना नहीं खाने पर माएं अपने बच्चे से कहती थी कि "सो जा, चुपचाप खाना खाले नहीं तो गब्बर आ जाएगा।" लेकिन चुनावों के कालचक्र ऐसा घूमना शुरू कि पाकिस्तान और भारत में उसकी समर्थक पार्टियां डरी हुई है। पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक आतंकी हमले को बचाने "हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद" देकर देश को गुमराह किया जाता था। यह कुकर्म जनहित में नहीं सिर्फ मुस्लिमों को खुश कर उनके वोट लेकर अपनी कुर्सी और तिजोरियों के भंडार भरने के लिए किया जा रहा था। और अक्ल से पैदल मुसलमान इन पार्टियों को अपना शुभचिन्तक मानती है। इन अक्ल से पैदल मुसलमानों को नहीं मालूम कि तुम्हारी इन हरकतों से कोई भी मुस्लिम देश इन्हे सम्मान से नहीं देखता, यहाँ तक पाकिस्तान भी नहीं। अगर कोई देश आतंकी घटनाओं के लिए फंडिंग करने का मतलब नहीं कि उनको भारतीय मुसलमानों की फ़िक्र है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 जुलाई को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैं इस सदन में भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूं।
मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना वक्तव्य इन लाइनों के साथ चालू किया। उन्होंने इस दौरान जहाँ भारतीय सेनाओं की सफलता पर बात की तो वहीं कॉन्ग्रेस को लगातार उलटे-सीधे प्रश्न उठाने पर आइना भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।
#WATCH ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "22 अप्रैल को पहलगाम में जो क्रूर घटना घटी, जिस तरह आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों से उनका धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी, वो क्रूरता की पराकाष्ठा थी। ये भारत को हिंसा की आग में झोंकने का एक सोचा-समझा प्रयास था। ये भारत… pic.twitter.com/C5E89Avkpc
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "मैंने कहा था कि यह भारत के 'विजयोत्सव' का एक सत्र है...जब मैं 'विजयोत्सव' की बात कर रहा हूं, तो मैं कहना चाहूंगा - ये 'विजयोत्सव' आतंकी मुख्यालयों को मिट्टी में मिलाने का है, ये 'विजयोत्सव' सिन्दूर की सौगंध को पूरा करने का है।" pic.twitter.com/ky4yCqsP3h
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं 22 अप्रैल को विदेश में था। मैं तुरंत लौट आया और वापस आने के तुरंत बाद मैंने एक बैठक बुलाई और हमने स्पष्ट निर्देश दिए कि आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना है और यह हमारा राष्ट्रीय संकल्प है। सेना को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई और यह भी कहा गया कि सेना को यह तय करना चाहिए कि कब, कहां, कैसे और किस तरीके से कार्रवाई करनी है। ये सारी बातें उस बैठक में स्पष्ट रूप से कही गईं।
During Operation Sindoor, the synergy of the Navy, Army and Air Force shook Pakistan to its core. pic.twitter.com/GZMPpfz5KN
उन्होंने कहा कि सेना को कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई और यह भी कहा गया कि सेना को यह तय करना चाहिए कि कब, कहां, कैसे और किस तरीके से कार्रवाई करनी है। हमें गर्व है कि आतंकवादियों को सजा दी गई, और यह ऐसी सजा थी कि आतंक के उन आकाओं की आज भी रातों की नींद उड़ी हुई है।
India has made it clear that it will respond to terror on its own terms, won't tolerate nuclear blackmail and will treat terror sponsors and masterminds alike. pic.twitter.com/r4T3mBUWs4
पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया का समर्थन तो मिला, लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल 2025 के बाद 3-4 दिन में ही यह उछल रहे थे। ये लोग अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए मुझ पर निशाना साध रहे थे, लेकिन इनकी बयानबाजी और इनका छिछोरापन देश के सैनिकों का मनोबल गिराती रही।”
ऑपरेशन सिंदूर पर कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाने काम किया है। इस पर पीएम ने कहा, “10 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की। इसको लेकर यहाँ भांति-भांति की बातें कही गईं। यह वही प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।”
पीएम ने आगे कहा, “देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होता जा रहा है। कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान के मुद्दे इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। जब बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई तो कॉन्ग्रेस वाले पूछने लगे कि फोटो दिखाई, पाकिस्तान भी यही पूछता था, ये भी यही पूछते थे। आतंकवादी रो रहे हैं, उनके आका रो रहे हैं और उनको रोते देख यहाँ भी कुछ लोग रो रहे हैं।”
पीएम ने कॉन्गेस के लिए कहा, “पाकिस्तान के बयान और हमारा विरोध करने वालों के बयान फुल स्टॉप और कॉमा के साथ एक हैं। देश हैरान है कि कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस को भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कॉन्ग्रेस के उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को जमकर घेरा। पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर इन्होंने (विपक्ष) कहा कि रोक क्यों दिया, पहले मानते ही नहीं थे और पूछते हैं कि रोक क्यों दिया। वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कारगिल की लड़ाई में भारत की जीत को भी अब तक नहीं अपनाया है।
कॉन्ग्रेस की गलती याद दिलाईं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार को उनकी गलती याद दिलाईं। इनमें सिंधु जल समझौता से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होंने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है।
पीएम ने आगे कहा, “1971 में पाकिस्तान के 93 हजार फौजी हमारे पास बंदी थे, उसका हजारों किलोमीटर एरिया हमने कब्जा किया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे। उस दौरान थोड़ी समझ होती तो POK वापस लिया जा सकता था। इतना सारा जब सामने टेबल पर था तो करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे।”
सिंधु जल समझौते पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “सिंधु नदी से भारत जाना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस पर पंचायत करने का अधिकार वर्ल्ड बैंक को दिया। सिंधु जल समझौता भारत के स्वाभिमान के साथ बहुत बड़ा धोखा था। राज्यों के भीतर पानी को लेकर विवाद होता रहा और पाकिस्तान मौज मनाता रहा। अगर सिंधु जल समझौता ना होता तो कई बड़ी परियोजनाएँ बनतीं। सिंधु जल समझौते के बाद नेहरूजी ने करोड़ों रूपए भी दिए ताकि पाकिस्तान नहर बना सके।”
पीएम ने आगे कहा, “बाँध हमारा है, पानी हमारा है लेकिन पाकिस्तान का निर्णय है कि आप उसकी सफाई (डीसिल्टिंग) नहीं कर सकते। नेहरू ने कहा था कि सिंधु जल समझौता बाकी समस्याओं के लिए रास्ता खोलेगा। उन्होंने बाद में कहा लेकिन हम वहीं के वहीं हैं।”
कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान देश में असुरक्षा के माहौल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “2014 से पहले असुरक्षा का जो माहौल था, उसे याद करके लोग सिहर जाते हैं… हर जगह पर घोषणा होती थी कि कोई भी लावारिस चीज दिखे छूना मत, ये बम हो सकता है। देश के कोने-कोने में यही हाल था।”
बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान सोनिया गाँधी के आँसूओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “दिल्ली में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता के आँख में आसू थे, वोट पाने के लिए इसे देश भर में प्रसारित किया गया।”
पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिंदुत्व का अपमान किया है। पीएम ने बताया, “कॉन्ग्रेस दुनिया को हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अमेरिका के राजनयिक को कह दिया था कि लश्कर से बड़ा खतरा हिंदुत्व हैं।”
लोकसभा से पाकिस्तान को लताड़ा
प्रधानमंत्री ने लोकसभा से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैलाई गई झूठी साजिशों का पर्दाफाश किया। पाकिस्तान को ‘आतंकियों का आका’ बताकर पीएम ने कहा कि उनकी रूह काँप रही है।
पीएम ने कहा, “सेना को कार्रवाई की खुली छूट दी गई कि कब, कहाँ और कैसे जवाब दिया जाए। आतंकियों के आकाओं को ऐसी सजा मिली कि उनकी अब तक रूह काँप रही है। ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट में 22 अप्रैल 2025 का बदला सेना ने निर्धारित लक्ष्य के साथ ले लिया।”
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और ना ही अब इसके सामने भारत झुकेगा। आज तक पाकिस्तान के कई एयरबेस ICU में पड़े हैं… ऑपरेशन सिंदूर तकनीक की महारत में सफल सिद्ध हुआ है, पिछले 10 साल में हमने जो तैयारियाँ की हैं, वह ना की होती तो तकनीक के युग में हमारा कितना नुकसान हो सकता था, इसका अंदाजा लगा सकते है।”
पाकिस्तान को धमकी देते हुए पीएम ने कहा, “पहले दिन से क्लियर था कि हमारा लक्ष्य आतंकी और उनके आका हैं, उनके अड्डे हैं… उनको हम ध्वस्त करना चाहते हैं, हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने अपना काम कर दिया है। पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती ना करता, उसने निर्लज्ज होकर आतंकियों के साथ खड़े होने का फैसला किया… हम पूरी तरह तैयार थे और मौके की तलाश में थे।”
प्रधानमंत्री ने सीजफायर पर बोलते हुए कहा, “पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो। उसी दौरान 9 मई, 2025 को रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात का प्रयास किया।”
पीएम ने आगे कहा, “वह घंटे भर प्रयास कर रहे थे, लेकिन सेना के साथ मीटिंग के चलते मैं फोन उठा नहीं पाया। मैंने उन्हें कॉल बैक किया… तब उन्होंने फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था- अगर पाकिस्तान का यह इरादा है तो उसे बहुत महँगा पड़ेगा। मैंने कहा था- हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”
अंत में पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।”
सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई 2025 को पीलीभीत में समाजवादी पार्टी के कार्यालय की जगह को सिर्फ 115 रुपए में हथियाने को लेकर धोखाधड़ी की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे राजनीतिक शक्ति का दुरुपयोग बताते हुए समाजवादी पार्टी को कड़ी फटकार लगाई।
जब तक उत्तर प्रदेश में समाजवादी को राज रहा सभी जानते हैं कि मुलायम सिंह से लेकर अखिलेश यादव तक सभी ने सत्ता का जी-भरकर दुरूपयोग किया। हिन्दू अपने त्यौहार उस उत्साह से मना सकते थे जितनी उत्साह से आज मनाता। शुक्रवार को होली पड़ने पर मुस्लिम क्षेत्रों में रहने वाले हिन्दुओं को सुबह 11 बजे के बाद रंग खेलने की इजाजत नहीं होती थी। 84 कोसी यात्रा पर अंकुश था। मुज़फ्फरनगर में मुस्लिम उपद्रवी हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे थे लेकिन पार्टी सैफई में मौज-मस्ती में मस्त थी। पुलिस आज़म खान की भैंस को ढूंढने में लग जाती थी।
पीलीभीत नगरपालिका परिषद ने अपने परिसर से सपा कार्यालय के बेदखली आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट पीलीभीत नगर पालिका परिषद के बेदखली के आदेश पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। समाजवादी पार्टी की ओर से इस मामले पर सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने अपना पक्ष रखा था।
दवे ने अपनी दलील में कहा था कि कार्यालय का किराया चुकाने के बाद भी नगरपालिका उसे बेदखल करना चाहती है। बेदखली के आदेश को रोकने के लिए याचिका भी डाली गई थी।
पीठ ने वकील से पूछा, “आपने परिसर कैसे लिया था?” इस पर वकील दवे की ओर से नगरपालिका की ओर से ‘आवंटित’ किए जाने की बात कही गई। इस पर पीठ ने कहा, “क्या आपने कभी नगरपालिका क्षेत्र में 115 रुपए पर कार्यालय की जगह के बारे में सुना है? यह सत्ता के दुरुपयोग को साफ तौर पर दिखलाता है।”
इसके बाद दवे ने दलील दी कि नगरपालिका अधिकारी इस तरह से हमारे परिसर पर ताला नहीं लगा सकते। उनकी दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “आप एक राजनीतिक पार्टी हैं। एक जगह पर कब्जा करने के लिए अपने पद और राजनीतिक शक्ति का दुरुपयोग किया। उस दौरान आपको प्रक्रिया नहीं याद रही। जब कार्रवाई होती है तो आपको सब कुछ याद आने लगता है।”
इसके बाद पार्टी के वकील ने 6 हफ्ते के लिए बेदखली रोकने की माँग कर डाली। इस पर पीठ ने कहा,” ये फर्जी आवंटन नहीं बल्कि फर्जी कब्जा है। आप एक धोखाधड़ी वाले कब्जे हैं।” इसके साथ ही कोर्ट ने सपा को सिविल कोर्ट जाने की हिदायत दी।
क्या है मामला
समाजवादी पार्टी में पीलीभीत नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी कार्यालय की परिसर में 2005 में अपना कार्यालय बनाया था। उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान उसे समय के अधिकारियों ने पार्टी को इस जगह को अस्थाई रूप से आमंत्रित भी कर दिया था। इसके बाद सपा नेताओं ने वहाँ पर जिला कार्यालय खोलकर निर्माण कर लिया।
इसके बाद 2018 से ही नगरपालिका इस जगह पर कब्जा हटवाने का प्रयास कर रही है। इसके खिलाफ सपा नेता स्थानीय कोर्ट और हाई कोर्ट तक जा चुके हैं। हाई कोर्ट ने 18 जून 2025 को नगर पालिका के पक्ष में अपना आदेश दिया। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी ने अपना कब्जा नहीं हटाया।
इस साल कोर्ट की ओर से 10 जून 2025 को पार्टी को 17 जून तक कब्जा हटाने की नोटिस जारी की गई। 18 जून को जिला मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर कब्जा हटाने की कार्रवाई के लिए पहुँचे तो सपा नेताओं ने इसका विरोध कर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए अपनी टिप्पणी दी है।
क्या बांग्लादेश Operation Save Hindus, Hindu Sanskriti चाहता है?
आखिर जेहादी हिन्दू शोभा यात्राओं, त्यौहारों, मन्दिरों और हिन्दू संस्कृति पर ही क्यों हमला करती है? जिसका तुष्टिकरण करने और कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियां समर्थन करते हैं। इन हिन्दू हितैषी और देशप्रेमी पाखंडी नेताओं से पूछो कि पागलों जब तुम्हारी संस्कृति ही नहीं रहेगी, कुर्सी भी हाथ नहीं आने वाली। तुम सबका वही हाल होगा जो जयचन्द और मीर ज़ाफ़र का हुआ था। याद रखो जो देश अपनी संस्कृति नहीं संभाल सकता वह देश बर्बाद हो जाता है। आज अगर भारत नाम है तो अपनी हिन्दू संस्कृति के कारण। तुष्टिकरण करने वालों घूमते कालचक्र को ध्यान से देखो।
जब कोई भीड़ किसी कवि के घर पर हमला करती है, तो वह केवल ईंट-पत्थर को नुकसान नहीं पहुंचाती। वह स्मृति पर हमला करती है, पहचान को चुनौती देती है और सहिष्णुता को खामोश करने की कोशिश करती है। 8 जून को यही हुआ बांग्लादेश के सिराजगंज जिले में। जहां रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास रवींद्र कचहरीबाड़ी पर उन्मादी भीड़ ने हमला बोला और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।
रबीन्द्रनाथ टैगोर का क्षतिग्रस्त घर
इस घटना के बाद भारत सरकार ने बेहद सख्त तेवर अपनाते हुए बांग्लादेश की यूनुस सरकार को साफ शब्दों में चेताया—“कट्टरपंथियों को अब लगाम दो, नहीं तो इसके अंजाम गंभीर हो सकते हैं।”
भारत की चेतावनी क्यों मायने रखती है? भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा: यह हमला गुरुदेव टैगोर की समावेशी विचारधारा और सांस्कृतिक विरासत पर एक संगठित प्रहार है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को अब कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों।
बांग्लादेश में रबीन्द्रनाथ टैगोर के घर में हुई तोड़फोड़ को लेकर भारत ने लताड़ लगाई है। भारत ने बांग्लादेश को इस मामले में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने इसे रबीन्द्रनाथ टैगोर की स्मृति का अपमान करार दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार (12 जून, 2025) को इस घटना पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “हम 8 जून 2025 को रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर पर भीड़ द्वारा किए गए घृणित हमले और तोड़फोड़ की कड़ी निंदा करते हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने इस हिंसक कृत्य को नोबेल पुरस्कार विजेता की स्मृति और समावेशी दर्शन का अपमान बताया। विदेश मंत्रालय देश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को इस घटना में शामिल चरमपंथी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है।
गौरतलब है कि मंगलवार (10 जून, 2025) को 50-60 लोगों की भीड़ ने रवींद्र कचहरी बाड़ी में घुसकर तोड़फोड़ की, जिसमें एक संग्रहालय भी शामिल है। इतना ही नहीं सभागार और संरक्षक कार्यालय में तोड़फोड़ की गई, जिससे ऐतिहासिक इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है।
टैगोर—जिन्हें भारत ही नहीं, बांग्लादेश भी अपना मानता है
रवींद्रनाथ टैगोर कोई साधारण लेखक नहीं थे। वे पहले एशियाई नोबेल पुरस्कार विजेता, भारत के राष्ट्रगान के रचयिता और बांग्लादेश के राष्ट्रीय गान “आमार सोनार बांग्ला” के रचनाकार भी थे। यानी टैगोर दोनों देशों की आत्मा में बसे हुए हैं। लेकिन जब उन्हीं की विरासत पर हमला होता है तो उसका असर सिर्फ दीवारों पर नहीं देशों के रिश्तों पर भी होता है।
हमला कैसे हुआ? स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना पार्किंग विवाद से शुरू हुई थी। लेकिन जल्दी ही हालात बिगड़े और भीड़ ने टैगोर के स्मृति स्थल पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ‘घृणित नारे’ और हिंसक व्यवहार साफ नजर आया।
टैगोर का घर सिर्फ एक मकान नहीं ‘रवींद्र कचहरीबाड़ी’ वह जगह है जहां टैगोर ने ना सिर्फ अपना समय बिताया बल्कि कई कालजयी रचनाएं भी लिखीं। यह स्थान एक तरह से भारत और बांग्लादेश की साझा चेतना का स्मारक है। इसलिए जब यहां हमला होता है, तो भारत सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं देता—वह अपनी सांस्कृतिक चेतना की रक्षा करता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI_Bing) बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे नगर निगम को जमकर लताड़ लगाई है। एक अवैध मस्जिद को तोड़ने में देरी पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस एएस गडकरी और कमल खाता की बेंच ने कहा कि कानून का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में साफ निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कुछ मुस्लिम समूह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि विरोध के नाम पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
इस केस में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी। कंपनी के पास कासरवडवली के बोरिवडे गाँव में 18,000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन है। कंपनी ने ठाणे नगर निगम (टीएमसी) से कहा कि उनकी जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को तोड़ा जाए। ठाणे नगर निगम ने 1 जनवरी 2025 को जाँच की, तो पता चला कि ये 3,600 वर्ग फुट की ग्राउंड-प्लस-वन मस्जिद है, जिसमें नमाज हॉल भी है। इसका संचालन परदेसी बाबा ट्रस्ट करता है।
मस्जिद के पक्ष वालों का कहना था कि ये तब बनी थी, जब इलाका ग्राम पंचायत के अधीन था, लेकिन ठाणे नगर निगम के रिकॉर्ड में इसके लिए कोई ऑर्डर नहीं मिला। इस मामले में नोटिस और सुनवाई के बाद 27 जनवरी को थाणे नगर निगम ने इसे अवैध ठहराया और तोड़ने का ऑर्डर दिया। हालाँकि दूसरा पक्ष कोर्ट पहुँच गया और अब हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ठाणे नगर निगम को जल्द से जल्द ये मस्जिद ढहाना चाहिए।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “लोकतंत्र में कोई व्यक्ति, समूह या संगठन यह नहीं कह सकता कि वह कानून नहीं मानेगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो प्रशासन को सख्ती से उसे कानून का पालन करवाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि लोगों के मन में यह बात बैठे कि कानून तोड़ने या उसका विरोध करने की इजाजत नहीं मिलेगी।”
पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला सुनाते हुए पुणे के हाजी मोहम्मद जवाद इस्पाहानी इमामबाड़ा ट्रस्ट का वक्फ दर्जा रद्द कर दिया। महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने 2023 में इसे वक्फ संगठन माना था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया। जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने 2016 में गलत तरीके से इसे वक्फ एक्ट 1995 की धारा 43 के तहत दर्ज किया था। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत रजिस्ट्रेशन से कोई ट्रस्ट अपने आप वक्फ नहीं बन जाता।
पुणे का ये इमामबाड़ा 1953 से मुस्लिम पब्लिक ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड था। ट्रस्ट में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद वक्फ बोर्ड से इसे वक्फ बनाने की माँग उठी। 2016 में वक्फ बोर्ड ने इसे मंजूरी दी, लेकिन ट्रस्ट के ट्रस्टी इसके खिलाफ वक्फ ट्रिब्यूनल गए। ट्रिब्यूनल ने 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी, तो मामला हाई कोर्ट पहुँचा। अब कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को नए सिरे से मामले की सुनवाई करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अपना फैसला खुद ले, बिना हाई कोर्ट के प्रभाव के।
प्रयागराज महाकुंभ में दिन-प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है सनातन विरोधियों की नींद, रोटी और पानी हराम हो रही है। आज(फरवरी 18) news18 पर गूंज के लाइव शो में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने तो मर्यादा की सारी हदें पार कर दी। अनुराग ने शो में कहा कि शौच में लोगों को डुबकी लगवाई जा रही है। क्या अरविन्द केजरीवाल अनुराग पर इस आपत्तिजनक बयान देने पर कार्यवाही करेंगे या उसकी पीठ थप थपाएंगे। बेशर्मी की भी एक सीमा होती है। आखिर मुस्लिम तुष्टिकरण में कब तक विरोधी सनातन का विरोध करते रहेंगे? प्रयागराज महाकुंभ को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘मृत्युकुंभ’ करार दिया है। प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ पर तंज कसते हुए ममता बनर्जी ने महाकुंभ को मृत्यु कुंभ करार देते हुए कहा कि महाकुंभ में VIPs को खास सुविधाएँ दी जा रही हैं, लेकिन गरीबों को इससे वंचित रखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘महाकुंभ अब मृत्यु कुंभ में बदल चुका है। यहाँ वीआईपी लोगों को ही खास सुविधाएँ मिल रही हैं।
Kolkata: On #MahaKumbh2025, West Bengal CM Mamata Banerjee says, "This is 'Mrityu Kumbh'...I respect Maha Kumbh, I respect the holy Ganga Maa. But there is no planning...How many people have been recovered?...For the rich, the VIP, there are systems available to get camps (tents)… pic.twitter.com/6T0SyHAh0e
महाकुंभ को लेकर योगी सरकार पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, आपको इस तरह के बड़े आयोजन की योजना बनानी चाहिए थी। भगदड़ की घटना के बाद कितने आयोग कुंभ भेजे गए। बिना पोस्टमार्टम के ही शवों को बंगाल भेज दिया गया। ममता बनर्जी ने आगे कहा, आप देश को बाँटने के लिए धर्म बेचते हैं। हमने यहाँ पोस्टमॉर्टम किया क्योंकि आपने बिना डेथ सर्टिफिकेट के शव भेज दिए। इन लोगों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
ममता बनर्जी पहली विपक्षी नेता नहीं हैं, जिन्होंने ऐसी बात बोली हो। इससे पहले, अफजाल अंसारी, लालू यादव, जया बच्चन और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता भी ऐसी टिप्पणियाँ कर चुके हैं।
गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने कहा था- ‘महाकुंभ में नहाने से पाप धुलता तो नरक में कोई रहेगा ही नहीं’। उनके इस बयान के बाद काफी बवाल हुआ था, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज भी कराई गई थी।
यही नहीं, सपा की राज्यसभा सांसद जया बच्चन भी महाकुंभ और प्रयागराज को लेकर आग उगल चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि संगम सबसे अधिक गंदा है। उन्होंने दावा किया था कि भगदड़ में मारे गए लोगों के शवों को उठाकर पानी (नदी) में डाल दिया गया। यही नहीं, उन्होंने प्रयागराज पहुँचे श्रद्धालुओं की संख्या पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार और लोग झूठ बोल रहे हैं कि प्रयागराज में इतने लोग आए। इतने लोग तो आ ही नहीं सकते।
वहीं, कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाकुंभ और प्रयागराज पर सवाल उठाते हुए उसे लोगों की गरीबी से जोड़ दिया था। उन्होंने मंच से पूछा था ‘गंगा में डुबकी लगाने से गरीबी दूर होगी क्या?’ बीजेपी ने उनके भाषण को हिंदू विरोधी करार दिया था।
इन सबके बीच, आरजेडी के अध्यक्ष और सजायाफ्ता नेता लालू यादव ने भी कुंभ को लेकर अनर्गल टिप्पणी की थी। लालू यादव ने कहा था, ‘कुंभ का कोई मतलब नहीं, फालतू का कुंभ’। लालू यादव ने मौनी अमावस्या के मौके पर हुए भगदड़ को लेकर अपनी हिंदुओं से घृणा का सार्वजनिक प्रदर्शन किया था।
अरविंद केजरीवाल और गुजरात मंत्री हर्ष सांघवी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटने से बौखलाए हुए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सब चल क्या रहा है, दिल्ली चुनाव के लिए पंजाब पुलिस की सुरक्षा को हटा दिया गया है और गुजरात पुलिस को लगा दिया गया। उन्होंने एक आदेश की कॉपी शेयर करते हुए ऐसे दिखाया कि चुनाव में सिर्फ गुजरात पुलिस तैनात की गई है। हालाँकि सच्चाई ये नहीं है।
केजरीवाल के आरोपों का जवाब गुजरात के गृहमंत्री हर्ष सांघवी ने दिया है। उन्होंने केजरीवाल का झूठ दुनिया को बताते हुए लिखा– “मुझे अब समझ आया कि लोग आपको झांसेबाज क्यों कहते हैं!”
गुजरात पुलिस का ये आदेश पढ़िये। दिल्ली से चुनाव आयोग ने पंजाब पुलिस हटाकर गुजरात पुलिस तैनात कर दी है। ये चल क्या रहा है? pic.twitter.com/Q6c9WwuSaL
उन्होंने अरविंद केजरीवाल को लिखा, “एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में, मुझे आश्चर्य है कि आप चुनाव आयोग के मानदंडों से अवगत नहीं हैं। उन्होंने गुजरात ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों से सुरक्षा बलों का अनुरोध किया है। वास्तव में भारत के चुनाव आयोग ने विभिन्न राज्यों से एसआरपी की तैनाती का आदेश दिया है। यह एक नियमित प्रक्रिया है।”
हर्ष सांघवी ने बताया, “चुनाव आयोग के अनुरोध के अनुसार, 11/1/25 को निर्धारित चुनाव के लिए गुजरात से एसआरपी की 8 कंपनियाँ दिल्ली भेजी गईं। केजरीवाल जी सिर्फ गुजरात का चयनात्मक उल्लेख क्यों?”
मुझे अब समझ आया कि लोग आपको झांसेबाज क्यो कहते है!!
Kejriwal ji as a former Chief Minister, I'm surprised you're not aware of the Election Commission's norms.
जो दस्तावेज हर्ष सांघवी ने शेयर किया है उसमें साफ लिखा है कि चुनाव के दौरान क्षेत्र पर फ्लैग मार्च, निगरानी आदि के लिए 8 जनवरी 2025 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 70 कंपनियों की अग्रिम तैनाती की जाएगी। गृह मंत्रालय की ओर से दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (गृह) को भेजे गए फैक्स संदेश में कहा गया है कि दिल्ली में सुरक्षित, स्वतंत्र और निष्पक्ष विधानसभा चुनाव कराने के लिए सीएपीएफ/राज्य सशस्त्र पुलिस/भारतीय रिजर्व बटालियन की अतिरिक्त 75 कंपनियाँ तैनात करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, विभिन्न राज्य सशस्त्र पुलिस (एसएआर) या इंडिया रिजर्व (आईआर) बटालियनों की 65 कंपनियों का अनुरोध किया गया। कुल मिलाकर, लगभग 14,500 कर्मचारी राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव ड्यूटी पर होंगे।
अरविंद केजरीवाल की इस हरकत के बाद अब उन्हें सोशल मीडिया पर ‘झांसेबाज, झूठा’ और न जाने क्या-क्या जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि इसी तरह के झूठ बोल-बोलकर उन्होंने दिल्ली वालों को 10 साल भ्रमित किया। वहीं भाजपा में ही से गुजरात मंत्री के अलावा अन्य नेताओं ने भी केजरीवाल का पलटवार किया। अमित मालवीय ने पूछा ये आपका पहला चुनाव है क्या या आप हार से डर रहे हैं? वहीं शहजाद पूनावाला ने लिखा- झूठ बोलना बंद कर।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन और उनके अस्थि विसर्जन के दौरान कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी जारी है। रविवार (29 दिसंबर 2024) को यमुना नदी में डॉ. सिंह की अस्थियाँ विसर्जित की गईं, लेकिन इस मौके पर कांग्रेस का कोई बड़ा नेता या गाँधी परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इस पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं।
भाजपा ने इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि गाँधी परिवार और कांग्रेस के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति सवाल खड़े करती है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर राहुल गाँधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “जब देश डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक मना रहा था, तब राहुल गाँधी वियतनाम में नए साल का जश्न मना रहे थे। गाँधी परिवार ने सिख समुदाय के प्रति हमेशा अपमानजनक व्यवहार किया है।”
While the country is mourning Prime Minister Dr Manmohan Singh’s demise, Rahul Gandhi has flown to Vietnam to ring in the New Year.
Rahul Gandhi politicised and exploited Dr Singh’s death for his expedient politics but his contempt for him is unmissable.
भाजपा की आलोचना के बाद कांग्रेस ने सफाई दी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने परिवार की निजता का सम्मान करते हुए अस्थि विसर्जन से दूरी बनाए रखी। उन्होंने बताया कि सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अंतिम संस्कार के बाद परिवार से उनके आवास पर मुलाकात की थी।
खेड़ा ने कहा, “दाह संस्कार के समय परिवार को गोपनीयता का मौका नहीं मिल पाया था। कुछ सदस्य चिता स्थल तक नहीं पहुँच सके थे। ऐसे में परिवार को अस्थि विसर्जन के दौरान गोपनीयता देना उचित समझा गया। यह रस्म उनके लिए भावनात्मक रूप से कठिन और दर्दनाक थी।”
मनमोहन सिंह जी को अपना पिता जैसा बताने वाले राहुल गांधी विदेश में किसी क्लब में शैंपेन की बोतल खोलकर, डिस्को करते हुए शोक मना रहे हैं ??... धूर्तता की पराकाष्ठा! pic.twitter.com/4uUkzC2Xih
रविवार(दिसंबर 29) की सुबह डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार के सदस्य निगमबोध घाट पहुँचे, जहाँ अस्थियाँ चुनी गईं। इसके बाद मजनू का टीला गुरुद्वारा के पास यमुना नदी में सिख परंपरा के अनुसार अस्थियाँ विसर्जित की गईं। इस दौरान उनकी पत्नी गुरशरण कौर, तीन बेटियाँ उपिंदर सिंह, दमन सिंह और अमृत सिंह और अन्य करीबी रिश्तेदार मौजूद थे।
#WATCH | Delhi: Former Prime Minister Dr Manmohan Singh's wife Gursharan Kaur reaches Gurdwara Majnu Ka Tilla for Kirtan and Guru Path for the former Prime Minister.
डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 की रात नई दिल्ली के एम्स में 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। 1990 के दशक में भारत के आर्थिक सुधारों के नायक रहे डॉ. सिंह का निगमबोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन के बाद देश में 7 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की गई है।
देश में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक और राहुल गांधी पार्टी द्वारा वियतनाम जाना नई बात नहीं, पायलट राजी
फिरोज जहांगीर खान का भी अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर हुआ था
मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगमबोध पर किए जाने पर कांग्रेस और इसके पिछलग्गु विपक्ष ने भी खूब शोर मचाया, लेकिन इन लोगों का नहीं मालूम की सोनिया गाँधी के ससुर और राहुल-प्रियंका के दादा फिरोज जहांगीर खान का अंतिम संस्कार भी कांग्रेस राज में इसी निगमबोध घाट पर हुआ था। ससुर जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। उस समय निगमबोध घाट पर कोई VIP कुंड भी नहीं था। कुछ अस्थियां यमुना में प्रवाहित की और कुछ कब्रिस्तान में दफना दी गयी। जिस पर सारा मीडिया और खोजी पत्रकारों के मुंह में दही जमा हुआ है। इसका रहस्योघाटन हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रपट के आधार पर यूट्यूब चैनल Jaipur Dialogue पर हुआ, देखिए वीडियो