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‘CJI कोई पोस्ट ऑफिस नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को लगाई लताड़, जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में CJI के ‘एक्शन’ पर उठा रहे थे सवाल

                           कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार ( फोटो साभार: Bar and Bench)
आज मोबाइल युग से चिट्ठी लिखने का युग था। जब मन अपने किसी भी रिश्तेदार या परिचित को पत्र लिख लेटर बॉक्स में डालने चले जाते/जाती, लेकिन पोस्टकार्ड आदि लेने के लिए डाकखाने में लम्बी लाइन में लगना पड़ता था। लेकिन कपिल सिबल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण जैसे वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को ही पोस्टऑफिस बना डाला। और लोग समझते हैं कि देखो कितने बड़े वकील हैं। दरअसल अगर इनकी सेटिंग नहीं हो तो इनसे बढ़िया वकील तो किसी भी जिला कोर्ट का समझदार वकील होता है। अगर इस वकील गैंग की सेटिंग नहीं हो, हर केस जीत नहीं सकते। यशवंत वर्मा के घर मिले/जले नोट बहुत कुछ चीख-चीखकर कह रहा है। जाँच तो उन जजों की भी होने चाहिए जिन्होंने देर रात सीतलवार और आतंकियों के लिए अदालत खोली।      
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को फटकार लगाई। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि CJI को पोस्ट ऑफिस मत समिझए, जो सिर्फ फाइलें आगे बढ़ाते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में यशवंत वर्मा की रिट याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया है।

30 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “भारत के CJI का काम केवल पोस्ट ऑफिस की तरह चिट्ठी भेजना नहीं है। अगर उनके पास किसी जज के गलत आचरण का सबूत है तो वे उसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सूचित करना उनका अधिकार है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ जस्टिस यशवंत वर्मा की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान की। जिसमें उन्होंने आंतरिक जाँच रिपोर्ट को चुनौती दी थी। इस रिपोर्ट में CJI संजीव खन्ना की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से यशवंत वर्मा को हटाने की सिफारिश की गई थी। सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने की।

इस दौरान कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इन-हाउस कमेटी के जज की बर्खास्तगी की सिफारिश करना गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 124 के तहत ही महाभियोग प्रक्रिया हो सकती है। सिब्बल ने कहा कि ऐसा करके CJI संसद के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं, यह ‘अस्वीकार्य’ है। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें लताड़ लगाई।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ‘कैश कांड’ वाले जस्टिस यशवंत वर्मा के रवैए पर भी प्रश्न उठाए। कोर्ट ने कहा, “आप जो मुद्दे उठा रहे हैं, वे महत्वपूर्ण हैं लेकिन पहले भी उठाए जा सकते थे, इसलिए आपका आचरण विश्वास पैदा नहीं करता और आपका आचरण बहुत कुछ कहता है। आप नहीं चाहते कि यहाँ कुछ भी उजागर हो। संसद को फैसला करने दीजिए। हम यह क्यों तय करें कि यह आपका पैसा है या नहीं? यह आंतरिक समिति का काम नहीं था।”

साथ ही जस्टिस दत्ता ने इन-हाउस रिपोर्ट पर कहा कि यह केवल शुरुआती जाँच का निष्कर्ष है और CJI की सिफारिश केवल एक ‘सलाह’ है। कोर्ट ने कहा कि निष्कासन केवल संसद की प्रक्रिया के अनुसार हो सकता है, इन-हाउस रिपोर्ट के अनुसार बिल्कुल भी नहीं हो सकता।

यशवंत वर्मा के घर से मिले थे अधजले नोट

जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित निवास स्थान पर 14 मार्च 2025 को आग लग गई थी। इस आगजनी में घर के स्टोर रूप में बड़ी मात्रा में अधजले नोट मिले थे। इसको लेकर जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कई गवाहों, वीडियो और तस्वीरों से यह साबित होता है कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली वाले घर के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में कैश खासकर 500 रुपए के नोट मिले थे, जिनमें से कुछ आधे जले हुए थे।

सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद ना तो जस्टिस वर्मा और ना ही उनके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी और ना ही अपने किसी वरिष्ठ को सूचना दी थी।