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बंगाल : पाकिस्तानी औरत से निकाह कर कोलकाता का जफर रियाज बना ISI का जासूस, 20 साल तक भारत के इनपुट आतंकी मुल्क को बेचे: सरकार बदलने के बाद NIA ने दबोचा


जिस तरह बंगाल में सत्ता बदलने के बाद मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी काम कर रहे हैं उनसे दिल्ली की महिला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सीखने की जरुरत है। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान केन्द्रीय मंत्री "मामाजी" शिवराज सिंह के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा अपने काम के बलबूते पर मोदी के हाथ मजबूत कर मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। जिस तरह बंगाल में वामपंथी सरकारों से लेकर ममता बनर्जी के राज में हुए अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा हुआ, उसी तरह दिल्ली में भी शीला दीक्षित से लेकर अरविन्द केजरीवाल तक जो अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्जे हुए हैं लेकिन रेखा गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री बनने के इतने दिनों राज करने पर भी कोई कार्रवाही नज़र नहीं आ रही। यमुना नदी वही गन्दी।  

क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स का? कहाँ गए बांग्लादेशी, रोहिंग्या और पाकिस्तानी घुसपैठिये? चुनावों में बहुत शोर मचाया था। कुर्सी मिल गयी जाए जनता भाड़ में। लगभग हर मेट्रो और लाल बत्ती(चौक)पर रिक्शाओं और थ्री-व्हीलर का जमावड़ा। चावड़ी बाजार, लाल कुआँ, नई सड़क, जामा मस्जिद और अन्य क्षेत्रों में पटरियों पर कब्जे। जनता पटरी पर चलने की बजाए सड़क पर चलने को मजबूर। पुराने समय में निकले छज्जों के नीचे सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर दुकानों, ढाबे और होटलों में शामिल आदि आदि।   

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले जफर रियाज उर्फ रिजवी को गिरफ्तार किया है। वह कोलकाता का रहने वाला है और उसने पाकिस्तानी से निकाह किया है। फिलहाल जफर की बीवी और बच्चे पाकिस्तान में ही रहते हैं।

मंगलवार (20 मई 2026) देर रात NIA ने जानकारी दी कि जफर रियाज के खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर जारी था। साथ ही उसे अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी। इसी दौरान एजेंसी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) , आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया है।

पाकिस्तानी एजेंसियों से कैसे बिठाए संपर्क?

जाँच एजेंसी के अनुसार जफर रियाज का निकाह एक पाकिस्तानी औरत से हुआ था और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के नागरिक हैं। NIA की जाँच में सामने आया कि वह साल 2005 से लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्रा करता रहा। इसी दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने उसे अपने संपर्क में लिया और जासूसी की ट्रेनिंग दी।

पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने जफर को पैसों का लालच दिया था। इसके अलावा उसे पाकिस्तान की नागरिकता दिलाने का भी वादा किया गया था। इसके बदले आरोपित भारत से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय सुरक्षा जानकारियाँ पाकिस्तान तक पहुँचाने का काम कर रहा था।

जासूसी के आरोप में पहले भी गिरफ्तार हो चुका जफर

NIA ने बताया कि जफर रियाज पहले भी जासूसी के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उस समय उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी। इसके बावजूद वह लगातार पाकिस्तान के संपर्क में बना रहा।

NIA अब इस पूरे जासूसी नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और भारत-विरोधी साजिश कितनी बड़ी थी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

देश जानता है आप(कांग्रेस) पहले से ही नंगे हो, फिर कपड़े उतारने की क्या जरूरत थी?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ से कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मौका था मेरठ में ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेट्रो सेवा के ऐतिहासिक उद्घाटन का, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर रही दिल्ली की वो घटना, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है और देश के लिए बोझ बन गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ से कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मौका था मेरठ में ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेट्रो सेवा के ऐतिहासिक उद्घाटन का, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर रही दिल्ली की वो घटना, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है और देश के लिए बोझ बन गई है।

उन्होंने कहा कि हम उस संस्कृति से आते हैं जहां गांव की शादी में भी पूरा गांव मेहमानों की खातिरदारी में जुट जाता है, लेकिन कांग्रेस अपने ही देश को बदनाम करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि जहां पूरा देश मेहमानों के स्वागत में जुटा था, वहीं कांग्रेस देश को बदनाम करने की साजिश रच रही थी।

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष के अन्य दलों और मीडिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस हरकत से उनके साथी दल भी हैरान हैं और उन्होंने इससे किनारा कर लिया है। पीएम ने मीडिया से आग्रह किया कि ‘मोदी ने विपक्ष को धो डाला’ जैसी हेडलाइन न बनाएं, बल्कि सीधे कांग्रेस का नाम लें। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ऐसी हरकतें करती है, तो हेडलाइन ‘विपक्ष’ के नाम से नहीं बल्कि ‘कांग्रेस’ के नाम से बननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘विपक्ष’ शब्द का इस्तेमाल कर मीडिया अनजाने में कांग्रेस के पापों पर पर्दा डाल देता है।

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस द्वारा संसद में महिला सांसदों को आगे कर विरोध प्रदर्शन करवाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि क्या आप इतने खोखले हो गए हैं कि माताओं-बहनों को इस तरह आगे करना पड़ रहा है? उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर प्रधानमंत्री बनना है, तो जनता का दिल जीतना पड़ता है, इस तरह की ओछी हरकतों से कोई नेता नहीं बनता। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस अब देश के लिए एक ‘बोझ’ बन चुकी है।

सियासी हमले के बाद तकनीकी उपलब्धि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत में पहली बार एक ही प्लेटफॉर्म और एक ही ट्रैक पर ‘नमो भारत’ और ‘मेट्रो’ दोनों चलेंगी। इससे दिल्ली और मेरठ के बीच की दूरी कम हो जाएगी। इससे दिल्ली-मेरठ के बीच रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लोगों को दिल्ली में महंगे किराए के कमरे लेकर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि 2014 से पहले देश के सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो थी, जबकि आज 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो का जाल बिछ चुका है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है।
मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, कैंची उद्योग और मुरादाबाद के पीतल उद्योग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने MSMEs के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष फंड की व्यवस्था की है। अब छोटे कारीगर बिना किसी सीमा के अपना सामान विदेशों में कूरियर कर सकेंगे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह जी को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार किसानों और छोटे उद्यमियों के विजन को धरातल पर उतार रही है।
उन्होंने कहा कि 10 साल पहले पश्चिमी यूपी की पहचान दंगों, गुंडों और खराब सड़कों से होती थी। सपा राज में अपराधी बेखौफ थे, लेकिन आज योगी जी के राज में वही अपराधी जेलों में दिन काट रहे हैं। आज मेरठ की पहचान ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और अत्याधुनिक मेट्रो से हो रही है। पीएम मोदी ने दोहराया कि जब तक उत्तर प्रदेश विकसित नहीं होगा, भारत विकसित नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट और सेमीकंडक्टर फैक्ट्री जैसे प्रोजेक्ट्स यहां के युवाओं के लिए लाखों रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।




SBI रिसर्च: दो साल में जेट स्पीड से हम तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनेंगे, 2030 तक अपर मिडल इनकम वाला बनेगा देश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में भारत ने बीते एक दशक में जिस तेज आर्थिक छलांग को अंजाम दिया है, वह अब आंकड़ों की भाषा में बोल रही है। भारत की अर्थव्यवस्था आज जिस गति से दौड़ रही है, वह किसी संयोग का परिणाम नहीं है और न ही केवल वैश्विक परिस्थितियों की देन है, बल्कि यह उस दूरदर्शी नेतृत्व का नतीजा है, जिसने नीति, नीयत और नजर, इन तीनों को एक ही दिशा में साध दिया है। आज भारत की जीडीपी ग्रोथ न केवल दुनिया में सबसे तेज है, बल्कि यह स्थायी, संतुलित और भविष्य-उन्मुख भी है। यही वजह है कि वैश्विक मंदी, युद्ध और अस्थिरताओं के बीच भी भारत की इकोनॉमी जेट स्पीड से आगे बढ़ रही है, जबकि कई विकसित देश रनवे पर ही हांफते दिख रहे हैं। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यह वही भारत है, जो 2014 में 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की सीमाओं में घिरा हुआ था। आज वही भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की दहलीज पार करने को तैयार है और 2028 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने जा रहा है। यह परिवर्तन केवल आकार का नहीं, बल्कि संरचना का है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने भारत को “वेलफेयर स्टेट” से आगे बढ़ाकर “वर्कफेयर स्टेट” की दिशा में मोड़ा, जहां सब्सिडी भी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनी और सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ समावेशी विकास हुआ।

देश में विकास अब कोई नारा नहीं, बल्कि रोजमर्रा का अनुभव

दुनिया की प्रमुख रेटिंग एजेंसियां और वित्तीय संस्थान आज जिस भरोसे के साथ भारत की ओर देख रही हैं, वह भरोसा अचानक पैदा नहीं हुआ। जीएसटी, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, पीएलआई स्कीम, रिकॉर्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और वित्तीय अनुशासन आदि उपायों ने मिलकर भारत की आर्थिक नींव को इतना अधिक मजबूत कर दिया है कि अब झटके उसे गिरा नहीं सकते। मूडीज द्वारा 7.3 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का अनुमान और एसबीआई रिसर्च का यह आकलन कि भारत दो वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, उसी भरोसे की आधिकारिक मुहर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह विकास केवल कॉरपोरेट बैलेंस शीट तक सीमित नहीं है। बढ़ता मिडिल क्लास, उभरता अपर मिडिल इनकम समूह और 2030 तक भारत का अपर मिडिल इनकम वाला देश बनने का अनुमान इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास अब आम जीवन में उतर चुका है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने भारत को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां विकास कोई नारा नहीं, बल्कि रोजमर्रा का अनुभव बनता जा रहा है।

2014 से 2028: इकोनॉमी की लंबी छलांग, आंकड़ों की सीढ़ी चढ़ता भारत

भारत की आर्थिक कहानी अब अनुमानों, आकांक्षाओं या राजनीतिक बहसों तक सीमित नहीं रही। यह कहानी अब ठोस आंकड़ों की है। ऐसे आंकड़े, जो देश के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता को मजबूत कर रहे हैं। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट, मूडीज़ का ग्रोथ अनुमान और ऑक्सफैम की रिपोर्ट, तीनों मिलकर यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 2014 में जब नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, तब भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की थी। उस समय भारत दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और “ब्रिक्स” जैसे मंचों पर भी उसे ना उभरती ताकत के रूप में देखा जाता था, ना ही निर्णायक शक्ति के रूप में। लेकिन पिछले एक दशक में पीएम मोदी की विजनरी नीतियों ने सारी तस्वीर बदलकर रख दी है। अब स्पेस से लेकर टेक्नोल़ॉजी तक हर सेक्टर में तेजी बढ़ते भारत की ओर दुनिया देख रही है।

जर्मनी-जापान को पीछे छोड़ तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, 2021 तक यह अर्थव्यवस्था करीब 3 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को छू चुकी थी। महामारी के झटकों के बावजूद भारत ने जो रिकवरी दिखाई, उसने दुनिया को चौंकाया। पिछले साल में भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को पार करने की दहलीज पर था, जिसे अब बड़ी छलांग लगाकर पार करना है। एक अनुमान के मुताबिक भारत 2028 तक 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य पूरा कर लेगा। एसबीआई रिसर्च का यह निष्कर्ष कि भारत अगले दो वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, केवल आकार का सवाल नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की विकास दर, निवेश प्रवाह और घरेलू मांग, तीनों एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। जर्मनी और जापान जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाएं जहां जनसंख्या, मांग और उत्पादकता की सीमाओं से जूझ रही हैं, वहीं भारत युवा जनसंख्या और बढ़ती खपत के बल पर आगे निकलने को तैयार है।

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज की मुहर: 7.3 प्रतिशत की ग्रोथ
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज़ द्वारा 2025 के लिए 7.3 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का अनुमान वैश्विक संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। आज जब अमेरिका और यूरोप 1–2 प्रतिशत की वृद्धि को भी उपलब्धि मान रहे हैं, भारत का 7 प्रतिशत से ऊपर रहना उसकी आंतरिक मजबूती का संकेत है। यह ग्रोथ “बबल” नहीं, बल्कि निवेश, खपत और सुधारों के साझा असर का परिणाम है। पिछले एक दशक में भारत की सबसे बड़ी ताकत पीएम मोदी की विजनरी नीतियों की निरंतरता रही है। जीएसटी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, डिजिटल इंडिया और इन्फ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स, इन सभी ने मिलकर अर्थव्यवस्था को औपचारिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया है। एसबीआई रिसर्च स्पष्ट करता है कि भारत अब “रीफॉर्म थकान” के दौर से निकलकर “रीफॉर्म डिविडेंड” के चरण में प्रवेश कर चुका है।

भारत में 2030 तक अपर मिडिल क्लास का तेजी से विस्तार
भारत 2030 तक एक ऐसा देश बनने की ओर अग्रसर है, जहां अपर मिडिल क्लास की संख्या ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी। औसत आय में वृद्धि, औपचारिक रोजगार का विस्तार और वित्तीय समावेशन ने खपत को मजबूत किया है। यही कारण है कि वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की घरेलू मांग अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निवेश भारत के सुनहरे भविष्य की नींव रख रहा है। सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे और डिजिटल नेटवर्क, इन पर हुआ निवेश अब केवल खर्च नहीं, बल्कि उत्पादक पूंजी बन चुका है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, सरकार के कैपेक्स ने निजी निवेश को आकर्षित किया है और रोजगार सृजन को गति दी है। यह वही मॉडल है, जिसने पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को उछाल दिया था।

ऑक्सफैम रिपोर्ट और मेक इन इंडिया एवं पीएलआई की सफलता
भारत अब केवल सेवाओं की अर्थव्यवस्था नहीं रहा। पीएलआई योजनाओं के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल, फार्मा और रक्षा उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है। मूडीज़ का आकलन भी बताता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में ग्रोथ का अहम स्तंभ बनेगा। ऑक्सफैम की हालिया रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि भारत में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और लक्षित सब्सिडी ने असमानता के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया है। मुफ्त राशन, स्वास्थ्य बीमा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी योजनाओं ने निचले तबके की खपत क्षमता को बनाए रखा, जो आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है।

टैक्स कलेक्शन में वृद्धि और सब्सिडी के लक्षित वितरण से इकोनॉमी मजबूत
डिजिटल भुगतान और जीएसटी नेटवर्क ने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक दायरे में लाया है। इससे टैक्स बेस बढ़ा, राजस्व में स्थिरता आई और नीति निर्माण अधिक डेटा-आधारित हुआ। एसबीआई रिसर्च इसे दीर्घकालिक उत्पादकता वृद्धि का आधार मानता है। तेज ग्रोथ के साथ घाटे को नियंत्रित रखना आसान नहीं होता, लेकिन भारत ने इस संतुलन को साधा है। टैक्स कलेक्शन में वृद्धि, सब्सिडी का लक्षित वितरण और खर्च की प्राथमिकताओं ने अर्थव्यवस्था को विश्वसनीय बनाया है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक सप्लाई चेन बाधाओं के बीच भारत का स्थिर रहना उसकी आंतरिक शक्ति का प्रमाण है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है। 2 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर तक की यात्रा केवल आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की यात्रा है। एसबीआई रिसर्च, मूडीज और ऑक्सफैम, तीनों संकेत देते हैं कि भारत सही दिशा में, सही गति से आगे बढ़ रहा है। इसलिए अब तो तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना भारत के लिए लक्ष्य नहीं, केवल एक पड़ाव होगा।

आजाद भारत में पैदा होने वाले पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाहरलाल नेहरू के बाद दूसरे स्थान पर, इंदिरा गाँधी को भी पीछे छोड़ा

इंदिरा गाँधी से आगे निकले नरेन्द्र मोदी

इंदिरा गाँधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक लगातार 4077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं। इस दौरान 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने का आपातकाल का दौर भी आया। 16 मार्च 1977 को लोकसभा चुनाव में इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस की करारी हार के बाद उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा।

लगातार 6 बार नरेन्द्र मोदी को मिला जनता का आशीर्वाद

प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह अभी भी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए गठबंधन को जीत दिलाई। इस मामले में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की बराबरी की है, जिनके नेतृत्व में कॉन्ग्रेस लगातार सत्तासीन रही।

राज्य और केंद्र मिलाकर बात करें तो नरेन्द्र मोदी के समान कोई दूसरा नेता भारत के इतिहास में नहीं है, जो 6 बार लगातार मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बने। एक निर्वाचित सरकार के मुखिया के तौर पर पीएम मोदी का कार्यकाल सबसे लंबे कार्यकालों में एक है।

गुजरात में 7 अक्टूबर 2001 से मुख्यमंत्री पद पर विराजमान नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2002, 2007 और 2012 का विधानसभा चुनाव बीजेपी ने लड़ा और जीत हासिल की।

मुख्यमंत्री रहते हुए उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2014 का चुनाव लड़ा और जबरदस्त जीत हासिल की। इसके बाद 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव भी एनडीए ने उनके नेतृत्व में लड़ा और सत्ता पर काबिज हुई।

आजाद भारत में पैदा होने वाले पहले पीएम

देश की आजादी के बाद पैदा होने वाले नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री होने के साथ साथ सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर रहने वाले गैर कॉन्ग्रेसी नेता भी हैं, जो लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बने हैं।

उन्होंने दो लगातार बार 5 साल का कार्यकाल भी पूरा किया और तीसरा कार्यकाल चल रहा है।

यमुना पानी में जहर के झूठे आरोप का असर चंडीगढ़ में, दिल्ली चुनावों से पहले BJP से हारी AAP, हरप्रीत कौर बाबला बनीं चंडीगढ़ की मेयर

                          AAP को हरप्रीत कौर बाबला ने हराया (साभार: Millenium Post & Times Now)
दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव में AAP को भाजपा ने पटखनी दी है। भाजपा की हरप्रीत कौर बाबला ने AAP की प्रेम लता को चुनाव हरा कर मेयर की सीट कब्जाई है। भाजपा ने यह झटका तब दिया है जब चंडीगढ़ में AAP और कांग्रेस एक साथ थे।

30 जनवरी, 2025 को हुई वोटिंग में भाजपा प्रत्याशी हरप्रीत कौर बाबला को 19 वोट मिले जबकि प्रेम लता 17 वोट ही इकट्ठा कर सकीं। यह चुनाव 1 वर्ष के कार्यकाल के लिए हुआ है। इस बार के चुनाव में सीट को महिला के लिए आरक्षित किया गया था। अभी तक AAP का मेयर चंडीगढ़ में था।

अरविन्द केजरीवाल ने समझा था कि यमुना पानी जहर मिलाने की बात कहकर दिल्ली चुनाव जीत जायेंगे। लेकिन इस झूठ का उल्टा ही असर पड़ता दिख रहा है। चंडीगढ़ जहाँ बीजेपी का बहुमत से दूर होने के बावजूद मेयर बनना साबित कर दिया है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस बीजेपी के पक्ष में वोट कर दिया। 

चंडीगढ़ मेयर चुनाव का दिल्ली चुनाव में स्पष्ट संकेत दे रहा है। यमुना पानी में जहर मिलाने के दुष्प्रचार से केजरीवाल पार्टी में ही दो फाड़ हो गए हैं। पार्टी में ही लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जहर वाला पानी कहाँ रोका गया और उसका क्या हुआ? जल बोर्ड के ही कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कई सालों से यमुना तो क्या water treatment plant तक की सफाई नहीं होने के कारण सप्लाई होने वाले पानी की गुणवत्ता में गिरावट होने से पानी माफिया फलफूल रहा है। यमुना की सफाई से पहले water treatment plant की सफाई बहुत जरुरी है। पानी में जहर मिलाने की झूठी खबर फैलाकर जनता में डर बैठाने का असर उल्टा पड़ रहा है, चंडीगढ़ मेयर चुनाव में इसका असर साफ दिख रहा है।    

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भाजपा प्रत्याशी बाबला को 3 वोट दूसरी पार्टियों के भी मिले हैं। चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद मेयर का चुनाव करते हैं। यहाँ भाजपा के पास 16 पार्षद हैं जबकि AAP के 13 पार्षद हैं। 6 पार्षद कांग्रेस के हैं। बताया गया कि कांग्रेस-AAP के तीन लोगों ने क्रॉस वोट किया है।

35 सदस्यों वाले चंडीगढ़ नगर निगम में जीत के लिए 19 वोट चाहिए होते हैं। वोटिंग में चंडीगढ़ का सांसद भी हिस्सा लेता है। वह चंडीगढ़ नगर निगम का पदेन सदस्य होता है। वर्तमान में चंडीगढ़ के सांसद कांग्रेस के मनीष तिवारी हैं। हालाँकि, उनके रहने से भी कोई फायदा नहीं हुआ।

AAP और कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने पार्षदों को शहर के बाहर भी भेज दिया था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और AAP-कांग्रेस जीत दर्ज करने में नाकाम रही। इससे पहले 2024 में हुआ चुनाव विवादों में घिर गया था। पहले इसमें भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर ने जीत हासिल की थी।

बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया था जहाँ पर अनिल मसीह द्वारा बेईमानी किए जाने की बात सामने आई थी। दोबारा हुए चुनाव में AAP के कुलदीप कुमार जीते थे। चंडीगढ़ में AAP एक बार फिर सत्ता से बाहर हो गई है। 2024 में AAP से हारने से पहले भाजपा लगातार 9 बार यहाँ मेयर पद पर काबिज रही थी।

18 साल बाद कानून लागू होने पर ‘संगम शुद्ध शाकाहारी ढाबा’ बना ‘सलीम ढाबा’, ‘चाय लवर प्वॉइंट’ हो गया ‘वकील अहमद टी-स्टॉल’; गाली खा रहे योगी और मोदी

एक बहुत पुरानी कहावत है कि चोर आईने में अपनी ही शक्ल देख डरने लगता है। ठीक वही हालत कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन का है। दुकानों और ढाबों पर मालिक का नाम लिखे जाने के कानून को उत्तर प्रदेश पुलिस या योगी आदित्यनाथ का नहीं, बल्कि 2006 में सोनिया गाँधी की सलाहकार समिति द्वारा बनाए इस कानून पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी मोहर लगाई थी, जनता गुमराह हो गयी कि सरकार जनता की कितनी चिंता करती है। लेकिन कानून बनाकर ठंठे बस्ते में डाल दिया, गुमराह हुई जनता भी कहीं गुम हो गयी। अब जब उसी कानून को लागू जमीन पर लाए जाने पर वही कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन ही विरोध कर रही है। अब कोई इनसे पूछे कि कानून पाखंड को बेनकाब करने वाला था तो बनाया ही क्यों था? कानून में सिर्फ नाम ही नहीं और बहुत कुछ सार्वजनिक करने को कहा गया है। केंद्र सरकार को इस कानून को पूरे देश में लागू करना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने कांवड़ यात्रा रूट पर खाने-पीने की सभी दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का आदेश जारी किया। 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले मुजफ्फरनगर जिले के सभी दुकानदारों, ढाबों, फल विक्रेताओं और चाय की दुकानों ने प्रशासन के निर्देशानुसार अपने प्रतिष्ठानों या वेंडिंग ठेलों पर मालिकों या कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस निर्देश का उद्देश्य धार्मिक यात्रा के दौरान भ्रम से बचना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। लेकिन प्रशासन के इस कदम से तुष्टिकरण के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन सहित लेफ्ट लिबरल गैंग को मिर्ची लग गई। यहां तक कि इस पहल को विवाद बनाने में जावेद अख्तर जैसे बुद्धिजीवी भी कूद पड़े हैं। जावेद अख्तर ने इसकी तुलना जर्मनी के नाजी शासन से कर डाली और कहा कि नाजी शासन में दुकानों पर निशान लगते थे। इनका दोगलापन देखिए कि खुद के लिए ‘हलाल’ सिस्टम चाहिए, लेकिन कांवड़ रूट पर ‘पहचान’ सिस्टम से भी परेशानी हो रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में काँवड़ यात्रा मार्ग पर के दुकानदारों को अपने दुकान पर नाम लिखना होगा। इसके पहले मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने जिले के लिए यह आदेश जारी किया था। इसके बाद इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था। हालाँकि, सीएम योगी के आदेश के बाद अब काँवड़ मार्ग पर काफी कुछ बदला हुआ नजर आने लगा है।

मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।

इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।

दिल्ली-देहरादून हाइवे पर ही स्थित ‘साक्षी होटल’ के मालिक लोकेश भारती ने बताया, “कल हमारे पास दो पुलिस वाले आए और कहा कि दुकान के आगे नाम लिखना है। इसके साथ ही होटल में काम करने वाले कर्मचारियों के भी नाम डिस्प्ले होना चाहिए। पुलिस के आदेश के बाद हमने दुकान पर काम करने वाले चार मुस्लिमों को फिलहाल हटा दिया है।”

दरअसल, काँवड़ यात्रियों की आस्था एवं शुद्धता की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह सभी दुकानों, ढाबों, होटलों और ठेला वालों को आदेश दिया है कि वे अपनी दुकान के बाहर एक सूची लटकाएँ। उस पर दुकान के मालिक और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों का नाम अंकित हो। इस आदेश के बाद कई दुकानों के नाम बदल गए।

आदेश हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। आदेश में सभी दुकानों, ढाबा, ठेलों पर अपना नाम लिखना होगा, ताकि काँवड़ यात्री जान सकें कि वो किस दुकान से सामान खरीद रहे हैं। बता दें कि काँवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु शुद्धता को लेकर खानपान में काफी परहेज करते हैं। इसको लेकर ही योगी सरकार ने यह कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में बड़ी संख्या में काँवड़ में गंगाजल भरने के लिए काँवडिये आते हैं। इसको देखते हुए हरिद्वार के SSP ने आदेश दिया है कि जिले में सभी काँवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह आदेश हरिद्वार के SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने दिया है।

SSP के अनुसार, जिले में जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में इस आदेश का राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किए जाने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लोग पहचान छिपाकर धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र करते हैं। देवी-देवताओं के नाम पर ऐसा नहीं होना चाहिए। खतौली के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता विक्रम सैनी ने कहा है कि मुस्लिम के ढाबों में लहसुन-प्याज का प्रयोग होता है, जबकि इस दौरान शिवभक्त इससे परहेज रखते हैं। 

भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने वाली न्यूजक्लिक जैसी मीडिया संस्था को चीन से मिले 38 करोड़ रुपये ; HR हेड ने लगाई सरकारी गवाह बनने की गुहार

चीन की फंडिंग से भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने वाली समाचार कंपनी न्यूजक्लिक के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। कंपनी के एचआर विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती ने दिल्ली कोर्ट का रुख किया है। चक्रवर्ती ने दिल्ली कोर्ट से यूएपीए के तहत लगे आरोपों के बाद सरकारी गवाह बनने की इजाजत मांगी है। इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि न्यूजक्लिक कंपनी पर लगे चीन से फंडिंग के आरोप के राज से जल्द पर्दा उठ सकता है। कंपनी पर चीन से फंडिंग लेकर उसके पक्ष में खबरें चलाने का आरोप है। इस मामले में पिछले दिनों गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत न्यूजक्लिक के संस्थापक व प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ व अमित चक्रवर्ती की गिरफ्तारी हुई थी। अब राज से पर्दा उठने पर ‘राष्ट्र विरोध में चीनी एजेंडा’ चलाने वाले पत्रकारों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इस मामले में पत्रकार अभिसार शर्मा और उर्मिलेश से पहले ही दो बार पूछताछ हो चुकी है।

न्यूजक्लिक के HR हेड खोलेगा चीन से फंडिंग का राज
न्यूजक्लिक के एचआर विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती ने पिछले सप्ताह विशेष न्यायाधीश हरदीप कौर की कोर्ट में आवेदन दायर कर मामले में माफी की मांग की है और दावा किया है कि उनके पास महत्वपूर्ण जानकारी है, जिसका वह दिल्ली पुलिस को खुलासा करना चाहते हैं, जो मामले की जांच कर रही है। न्यायाधीश ने चक्रवर्ती का बयान दर्ज करने के लिए मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट से सामने भेज दिया है। जांच एजेंसी उनके बयान को देखने के बाद इस पर फैसला लेगी कि कोर्ट के सामने उनके आवेदन का समर्थन किया जाए या नहीं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तीन अक्टूबर को चक्रवर्ती और न्यूज पोर्टल के संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तार किया था। फिलहाल, अभी दोनों ही न्यायिक हिरासत में हैं।

न्यूज़क्लिक पर लगी है UAPA की धाराएं
न्यूज़क्लिक पर UAPA की कई धाराएं लगाई गईं हैं. जैसे गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सेक्शन 13, आतंकी कृत्य के लिए सेक्शन 16, आतंकी कृत्यों के लिए पैसा जुटाने के लिए सेक्शन 17, साजिश के लिए सेक्शन 18, कंपनी या ट्रस्ट द्वारा अपराध किए जाने पर 22(C) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही IPC की धारा 153A (पहचान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 120B (आपराधिक साजिश) भी लगाई गई हैं। UAPA क़ानून साल 1967 में बना। 2008 और 2012 में इसे और मजबूत किया गया। UAPA सरकार और प्रशासन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की तुलना में ज्यादा शक्तियां देता है। इसके तहत बनाए गए प्रावधान कई सामान्य आपराधिक क़ानूनों से ज्यादा सख्त हैं। UAPA के तहत सरकार को किसी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के लिए ज्यादा वक़्त मिल जाता है, जमानत की शर्तें और सख्त होती हैं।

उर्मिलेश और अभिसार शर्मा से दो बार पूछताछ
दिल्ली पुलिस ने समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ को केंद्र सरकार के बारे में कथित तौर पर फर्जी विमर्श को बढ़ाने के लिए चीन से पैसे मिलने के मामले में 5 अक्टूबर 2023 को पत्रकार उर्मिलेश और अभिसार शर्मा से दोबारा पूछताछ की। इससे पहले अभिसार से 3 अक्टूबर को पूछताछ हुई थी।

95 लोकेशंस पर छापा मारा गया था
न्यूजक्लिक मामले में दिल्ली में 88 स्थानों और 7 अन्य यानी कुल 95 लोकेशंस पर छापा मारा गया था। स्पेशल सेल ने 37 पुरुषों, जबकि 9 महिलाओं से पूछताछ की थी। 

वेबसाइट ने अरुणाचल और कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया था
दिल्ली पुलिस ने बुधवार 4 अक्टूबर को न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी की वजह बताई। उन्होंने कहा- इनकी वेबसाइट ने अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर को भारत का हिस्सा ना दिखाने का इंटरनेशनल एजेंडा चलाया था। इसे लेकर उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं।

देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने का इरादा था
दिल्ली पुलिस ने ये भी दावा किया कि वेबसाइट ने भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ छेड़छाड़ और मैप में कश्मीर और अरुणाचल को भारत के हिस्से के रूप में नहीं दिखाया। उनकी ये कोशिश देश की एकता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के इरादे को दिखाती है।

गैर कानूनी तरीके से विदेश से धन प्राप्त किया
दिल्ली पुलिस द्वारा अदालत में सौंपी गई ‘रिमांड प्रति’ के मुताबिक पुरकायस्थ और उनके सहयोगियों जोसफ राज, अनूप चक्रवर्ती (अमित चक्रवर्ती का भाई) और बप्पादित्य सिन्हा (वर्च्यूनेट सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के प्रवर्तक) ने गैर कानूनी तरीके से विदेश से धन प्राप्त किया। पुलिस ने अदालत को बताया, ‘‘यह जानकारी मिली है कि उपरोक्त राशि गौतम नवलखा, तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े जावेद आनंद, तमारा, जिबरान, उर्मिलेश, अरात्रिका हलदर, प्रजंय गुहा ठाकुरता, त्रिना शंकर, अभिसार शर्मा आदि में वितरित की गई।’’

राजद सांसद मनोज झा ने कहा था- दूर्भावनापूर्ण कार्रवाई
एक तरफ न्यूजक्लिक से जुड़े लोग विदेशी फंड से देश को नीचा दिखाने का काम रहे थे और दूसरी तरफ राजद सांसद मनोज झा ने इसे दुर्भावनापूर्ण कर्रवाई करार दिया था। उन्होंने कहा था- कहा, “गांधी जयंती के ठीक बाद इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और दूर्भावनापूर्ण कार्रवाई नहीं हो सकती… जो लोग आप से सवाल पूछें, आपकी भजन मंडली में शामिल न हो उनके साथ यह मानक संचालन प्रक्रिया बन गई है… आज की यह कार्रवाई इतिहास में दर्ज होगी… कल बिहार की जातीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट आई है, इसके बाद आपकी(BJP) जमीन खिसक रही है इसलिए आपने यह कार्रवई की।”

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अगस्त 2023 में एक रिपोर्ट प्रकाशित कर इस पूरे इकोसिस्टम का पर्दाफाश किया था।

मेड इन चाइना है ‘न्यूज क्लिक’ मीडिया
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कांग्रेस पार्टी के बीच का रिश्ता जगजाहिर है। सबको पता है कि दोनों के बीच एक गुप्त MOU हुआ है। हालांकि MOU किस बात को लेकर हुआ है यह आज तक सार्वजनिक नहीं हो सका है, लेकिन कांग्रेस के अघोषित अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारतीय संस्थाओं, सेना और उद्योगपतियों के खिलाफ बोलते हैं, उससे लगता है वो चीन की गोद में बैठकर उसकी भाषा बोल रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत में कुछ मीडिया हाउस और एनजीओ है, जो राहुल गांधी के साथ सुर में सुर मिलाते नजर आते हैं। इनके मुद्दे, स्क्रिप्ट, टूलकिट और समय में समानता और प्रोपेगेंडा की एकरूपता देखकर पहले से आशंका व्यक्त की जा रही थी इस पूरे इकोसिस्टम को भारत के बाहर बैठी कोई बड़ी शक्ति ऑपरेट कर रही है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट ने इस पूरे इकोसिस्टम का पर्दाफाश किया था। रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है कि ये पूरा इकोसिस्टम चीनी फंडिंग से संचालित होता है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी और भारत के खिलाफ अभियान चलाता है।

न्यूजक्लिक जैसी मीडिया संस्था को चीन से मिले 38 करोड़ रुपये 

दरअसल सोमवार (7 अगस्त, 2023)को लोकसभा में उस समय जबरदस्त हंगामा हुआ जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल पार्टियों, मीडिया और टुकड़े-टुकेड़ गैंग के गठजोड़ पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूज क्लिक जैसी मीडिया संस्था को 38 करोड़ रुपये मिले हैं। इस रिपोर्ट में ईडी ने जो खुलासा किया था, वहीं बताया गया है। उन्होंने कहा कि न्यूज क्लिक टुकड़े-टुकड़े गैंग का हिस्सा और यह भारत को खंडित करना चाहता है। इसका मालिक पुरकायस्थ है, जिसका नक्सलियों से संबंध बताए जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत और मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए चीन कांग्रेस, मीडिया संस्थान और पत्रकारों को फंडिंग कर रहा है। निशिकांत दुबे ने सरकार से ऐसे पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर पाबंदी लगाने के साथ ही कांग्रेस के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की।

चीन के इशारे पर काम करते हैं कांग्रेस और कुछ पत्रकार

इस दौरान निशिकांत दुबे ने कुछ भारतीय पत्रकारों का नाम लेते हुए उन पर चीन से पैसे लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अभिसार शर्मा, रोहिणी सिंह और स्वाति चतुर्वेदी जैसे पत्रकारों को मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए चीन फंडिंग कर रहा है। निशिकांत दुबे ने कहा कि कांग्रेस चीन के साथ मिलकर भारत को टुकड़े-टुकड़े करना चाहती है। इन पत्रकारों के साथ मिलकर देश में विघटनकारी माहौल बनाना चाहती है। उन्होंने कांग्रेस को चीन से हो रही फंडिंग की जांच करने और दोषी पाये जाने पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि 2005 से लेकर 2014 तक चीन सरकार ने कांग्रेस को पैसा दिया, जिसका एफसीआरए लाइसेंस भारत सरकार ने रद्द किया। 2008 ओलंपिक के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने चीन का दौरा किया। 2017 में डोकलाम विवाद हुआ तो राहुल गांधी चीनी अधिकारियों से गुप्त मुलाकात करने में लगे थे।

नेविल राय सिंघम के जरिए न्यूज क्लिक को फंडिंग

अनुराग ठाकुर ने न्यूज क्लिक वेबसाइट का जिक्र करते हुए कहा कि इस वेबसाइट के जरिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का प्रोपेगेंडा चलाया जाता है। चीन की ग्लोबल मीडिया संस्थान से इसकी फंडिंग हुई है। 2021 में जब न्यूज क्लिक वेबसाइट के ऊपर ईडी की रेड हुई तो सामने आया कि एक विदेशी नेविल राय सिंघम ने इसकी फंडिंग की थी। अनुराग ठाकुर ने दावा किया कि नेविल राय को चीन फंडिंग करता है और उसका संबंध चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के साथ है। ये लोग मिलकर एंटी इंडिया और ब्रेक इंडिया कैंपेन चलाते हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि चाइनीज कंपनियां नेविल राय सिंघम के जरिए न्यूज क्लिक को फंडिंग कर रही थी, लेकिन कुछ लोग भारत में उनके सेल्समैन बन गए थे। चीन के नैरेटिव को बनाने के लिए स्वतंत्र मीडिया के नाम पर फेक न्यूज परोसी जा रही थी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर इनका बचाव कर रहे थे। मीडिया से बात करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस का हाथ न्यूज क्लिक के साथ, न्यूज क्लिक के ऊपर चीन का हाथ है। 

“ए ग्लोबल वेब ऑफ चाइनीज़ प्रोपेगेंडा लीड्स टू ए यूएस टेक मुगल”

कांग्रेस, न्यूज़क्लिक और चीन का नेक्सस भारत में किस तरह काम करता है और भारत को लेकर इनके कितने खतरनाक इरादे हैं, इसका खुलासा न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी उस रिपोर्ट से हुआ है, जिसका शीर्षक है- ए ग्लोबल वेब ऑफ चाइनीज़ प्रोपेगेंडा लीड्स टू ए यूएस टेक मुगल। न्यूयॉर्क टाइम्स की खोजी पत्रकारिता ने भारत में फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर किस तरह एजेंडा चलाया जाता है, उसकी परत दर परत खोलकर बता दिया है कि अपने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए कांग्रेस किस तरह देश विरोधी ताकतों के इशारों पर काम कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने शिकागो से शंघाई तक फैले एक वित्तीय नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की। इस पड़ताल में नेविल राय सिंघम का नाम सामने आया जो एक चीनी स्लीपर सेल के रूप में अमेरिका में काम कर रहा था। सिंघम धुर-वामपंथी हितों के समाजवादी हितैषी के रूप में जाना जाता है। सिंघम के नेटवर्क की जांच से पता चला कि कैसे दुष्प्रचार ने मुख्यधारा की खबरों को प्रभावित किया, क्योंकि उसके समूहों ने चीन समर्थक संदेशों को बढ़ावा देने के लिए वीडियो बनाए और यूट्यूब चैनलों के जरिए उनको प्रसारित किया।

चीनी स्लीपर सेल के रूप में अमेरिका में काम कर रहा था नेविल राय सिंघम

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि 69 वर्षीय सिंघम खुद शंघाई में बैठते हैं, जहां उनके नेटवर्क का एक आउटलेट शहर के प्रचार विभाग द्वारा वित्त पोषित एक यूट्यूब शो का सह-निर्माण कर रहा है। दो लोग एक चीनी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म दुनिया के लिए चीनी आवाज के रूप में काम करते हैं। दावा तो यहां तक किया गया है कि पिछले महीने सिंघम एक कम्युनिस्ट पार्टी के वर्कशॉप में शामिल हुए थे, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को बढ़ावा देना था। हालांकि सिंघम दावा करते हैं कि वह चीनी सरकार के निर्देश पर काम नहीं करते हैं। लेकिन उनके प्रचार तंत्र में कई ऐसी चीजें हैं, जो उनके चीनी सरकार के साथ काम करने की ओर इशारा करती है।

कौन है नेविल राय सिंघम ?

नेविल राय सिंघम श्रीलंकाई मूल का अमेरिकी कारोबारी हैं। 1954 में जन्में नेविल राय सिंघम खुद को कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं। सिंघम जाने माने कम्युनिस्ट प्रोफेसर आर्चीबाल्ड सिंघम के बेटे हैं। आर्चीबाल्ड सिटी यूनिवर्सिटी, ब्रुबकलिन कॉलेज, न्यूयॉर्क में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थे। नेविल राय सिंघम ने 2001 से 2008 तक दिग्गज चीनी कंपनी हुओवेई के लिए रणनीतिक तकनीकी सलाहकार के रूप में काम किया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सिंघम कुछ साल पहले अपनी कंपनी एक निजी इक्विटी फर्म को 785 मिलिनय डॉलर में बेच दी थी। सिंघम ने 2017 में पूर्व डेमोक्रेटिक राजनीतिक सलाहकार और कोड पिंक के सह-संस्थापक जोडी इवांस से शादी की।

मध्य प्रदेश : 308 वर्ष बाद इस्लामनगर पुनः बना जगदीशपुर; हलाली नदी का भी नाम बदलने की तेज होती मांग; मोहम्मद खान ने हिन्दू राजा की हत्या कर बना दिया इस्लाम नगर

                                                   इस्लामनगर बना जगदीशपुर
मध्यप्रदेश के भोपाल से 14 किलोमीटर दूर एक गाँव ‘इस्लाम नगर‘ अब ‘जगदीशपुर’ नाम से जाना गया जाएगा। केंद्र सरकार ने गाँव का नाम बदलने की अनुमति दे दी है। पिछले 30 सालों से इसे आधिकारिक रूप से जगदीशपुर बनाने की कोशिश की जा रही थी, जिसके लिए समय-समय पर कोशिशें होती रहीं। लोगों का ऐसा मानना रहा कि जो जगदीशपुर कभी मुगल आक्रांताओं के धोखे से खून में लाल होकर इस्लाम नगर हुआ उसका नाम जगदीशपुर हो जाए तो वही बेहतर है।

 30 सालों से हो रही थी इस्लाम नगर का नाम जगदीशपुर रखने की माँग

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि इस्लाम नगर का नाम वापस जगदीशपुर करने के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव पारित कर चुकी है जिसके बारे में 1993 में एक प्रतिवेदन में बता दिया गया था। पत्र में साफ था कि सभी ग्रामवासी गाँव का नाम बदलना चाहते हैं ताकि वहाँ तनाव की स्थिति न हो। ग्रामवासियों में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल है। इसके बाद साल 2008 में भी इस संबंध में एक प्रस्ताव को राज्य सरकार ने सहमति दी थी लेकिन तब कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार से इसके लिए एनओसी नहीं मिल पाई।

2014 में फिर केंद्र से एनओसी माँगी गई और 2021 में जाकर गृह मंत्रालय की ओर से सितंबर में एनओसी जारी कर दी गई। इसी क्रम में अब इस्लाम नगर का नाम जगदीशपुर किया गया। इस संबंध में मध्यप्रदेश के राजस्व विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई। लोगों ने इस फैसले के बाद यही कहा कि इस गाँव की पहचान हमेशा जगदीशपुर ही थी। गाँव के सभी लोग ये नाम चाहते थे।

वायरल होती एक कश्मीरी मुस्लिम की माफ़ी, देखिए वीडियो 

खून से नदी लाल करके बदला गया था जगदीशपुर का नाम

जिस जगदीशपुर को दोबारा जगदीशपुर बनाए जाने की जद्दोजहद 30 सालों से चल रही थी, उसका इतिहास जितना सुनहरा है उतना ही रौंगते खड़े करने वाला भी। आज भी इस जगह पर 11वीं सदी के परमार कालीन मंदिर के पत्थर मिलते हैं। इसके अलावा यहाँ एक गोंड महल भी है। गोंड शासन के बाद इस जगह पर राजपूतों का राज रहा। मगर 1715 में औरंगजेब के सैनिक दोस्त मोहम्मद खान ने धोखे से उनपर प्रहार कर दिया और जगदीशपुर को इस्लाम नगर बना कर रख दिया।
बताते हैं कि जब दोस्त मोहम्मद खान ने राजपूतों पर वार किया तो उनके खून से एक नदी लाल हो गई थी और उसके बाद से उसका नाम हलाली नदी (Halali Damn) पड़ गया। आज कई हिंदूवादी नेता इस नदी का नाम बदलने की कोशिशों में लगे हुए हैं क्योंकि ये नाम याद दिलाता है कि कैसे मित्रता का हाथ बढ़ाकर राजाओं का गला रेता गया।

दोस्त मोहम्मद खान ने भोज पर बुलाकर रेता राजपूत राजाओं का गला

बात सन् 1715 की है। जगदीशपुर के राजा देवरा चौहान का नाम पूरे भोपाल में होने लगा था। धीरे-धीरे दोस्त खान तक बात पहुँची और उसने दोस्ती का षड्यंत्र रचा। इसके बाद जगदीशपुर के राजा के आगे मित्रता का हाथ बढ़ाया गया, फिर उन्हें बेस नदी के किनारे भोज पर निमंत्रण दिया गया।
जब राजा ने ये निमंत्रण स्वीकारा तो दोनों तरफ के 16-16 लोग बेस नदी के किनारे भोज पर मिले। खाना आरंभ हुआ तभी दोस्त मोहम्मद खान पान खाने के बहाने वहाँ से निकला और टेंट काटकर उन सभी लोगों का गला रेत डाला जो वहाँ बैठकर भोज कर रहे थे। इस तरह दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर कब्जा किया और उसका नाम इस्लामनगर कर दिया गया।
कुछ लोग ऐसे क्रूर दोस्त मोहम्मद खान को भोपाल का निर्माता बताते हैं। वहाँ के ऐतिहासिक धरोहरों का श्रेय उसको देते हैं, मगर हकीकत क्या है ये मात्र हलाली नदी और इस्लाम नगर जैसे नामों के इतिहास के पता किया जा सकता है। समय के साथ इसी इस्लाम नगर को जगदीशपुर बनाने की माँगे हमेशा उठीं क्योंकि लोगों ने कभी भुलाया ही नहीं कि किस प्रकार हिंदुओं के कत्लेआम के बाद गाँव का नया नामकरण हुआ। लोगों को जितना जगदीशपुर के इस्लामनगर बनने की कहानी के बारे में पता चलता था उतना ही वह इस बात को कहते थे कि जल्द से जल्द ग्राम का नाम बदला जाना चाहिए। तमाम प्रयासों के बाद 308 साल बाद ये संभव हो पाया कि जगदीशपुर दोबारा जगदीशपुर बना।