AAP को हरप्रीत कौर बाबला ने हराया (साभार: Millenium Post & Times Now)
दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव में AAP को भाजपा ने पटखनी दी है। भाजपा की हरप्रीत कौर बाबला ने AAP की प्रेम लता को चुनाव हरा कर मेयर की सीट कब्जाई है। भाजपा ने यह झटका तब दिया है जब चंडीगढ़ में AAP और कांग्रेस एक साथ थे।
30 जनवरी, 2025 को हुई वोटिंग में भाजपा प्रत्याशी हरप्रीत कौर बाबला को 19 वोट मिले जबकि प्रेम लता 17 वोट ही इकट्ठा कर सकीं। यह चुनाव 1 वर्ष के कार्यकाल के लिए हुआ है। इस बार के चुनाव में सीट को महिला के लिए आरक्षित किया गया था। अभी तक AAP का मेयर चंडीगढ़ में था।
अरविन्द केजरीवाल ने समझा था कि यमुना पानी जहर मिलाने की बात कहकर दिल्ली चुनाव जीत जायेंगे। लेकिन इस झूठ का उल्टा ही असर पड़ता दिख रहा है। चंडीगढ़ जहाँ बीजेपी का बहुमत से दूर होने के बावजूद मेयर बनना साबित कर दिया है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस बीजेपी के पक्ष में वोट कर दिया।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव का दिल्ली चुनाव में स्पष्ट संकेत दे रहा है। यमुना पानी में जहर मिलाने के दुष्प्रचार से केजरीवाल पार्टी में ही दो फाड़ हो गए हैं। पार्टी में ही लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जहर वाला पानी कहाँ रोका गया और उसका क्या हुआ? जल बोर्ड के ही कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कई सालों से यमुना तो क्या water treatment plant तक की सफाई नहीं होने के कारण सप्लाई होने वाले पानी की गुणवत्ता में गिरावट होने से पानी माफिया फलफूल रहा है। यमुना की सफाई से पहले water treatment plant की सफाई बहुत जरुरी है। पानी में जहर मिलाने की झूठी खबर फैलाकर जनता में डर बैठाने का असर उल्टा पड़ रहा है, चंडीगढ़ मेयर चुनाव में इसका असर साफ दिख रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भाजपा प्रत्याशी बाबला को 3 वोट दूसरी पार्टियों के भी मिले हैं। चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद मेयर का चुनाव करते हैं। यहाँ भाजपा के पास 16 पार्षद हैं जबकि AAP के 13 पार्षद हैं। 6 पार्षद कांग्रेस के हैं। बताया गया कि कांग्रेस-AAP के तीन लोगों ने क्रॉस वोट किया है।
35 सदस्यों वाले चंडीगढ़ नगर निगम में जीत के लिए 19 वोट चाहिए होते हैं। वोटिंग में चंडीगढ़ का सांसद भी हिस्सा लेता है। वह चंडीगढ़ नगर निगम का पदेन सदस्य होता है। वर्तमान में चंडीगढ़ के सांसद कांग्रेस के मनीष तिवारी हैं। हालाँकि, उनके रहने से भी कोई फायदा नहीं हुआ।
AAP और कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने पार्षदों को शहर के बाहर भी भेज दिया था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और AAP-कांग्रेस जीत दर्ज करने में नाकाम रही। इससे पहले 2024 में हुआ चुनाव विवादों में घिर गया था। पहले इसमें भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर ने जीत हासिल की थी।
बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया था जहाँ पर अनिल मसीह द्वारा बेईमानी किए जाने की बात सामने आई थी। दोबारा हुए चुनाव में AAP के कुलदीप कुमार जीते थे। चंडीगढ़ में AAP एक बार फिर सत्ता से बाहर हो गई है। 2024 में AAP से हारने से पहले भाजपा लगातार 9 बार यहाँ मेयर पद पर काबिज रही थी।
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