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नाम छुपाकर व्यापार करने वाले की हिमायत करने वाले महामूर्खों को नहीं मालूम इमरजेंसी में संजय गाँधी ने शुरू किया था; महामूर्खों पहलगाम से तुलना मत करों जेहादियों ; Victim Card मत खेलो; सनव्वर चला रहा था ‘पंडित जी शुद्ध वैष्णो भोजनालय’, गोपाल नाम वाला निकला तजम्मुल: UP पुलिस ने मालिक सनव्वर, आदिल, जुबैर समेत 5 पर FIR; मुजफ्फरपुर की घटना

आज देश में राजनीति नहीं बल्कि राजनीति के नाम पर सियासत हो रही है। वो भी निचले स्तर की। और जनता भी इन जेहादी प्रवित्ति वालों को नेता मान इनकी तिजोरियां भर अपना नुकसान कर रही है। मेरी आयु वालों को-आम नागरिक से लेकर जजों तक-देश में इमरजेंसी का दौर याद करना चाहिए। ऐसा अपराध करने वालो और उनके हिमायतियों शुक्र मनाओ संजय गाँधी नहीं है। वरना कभी का तुम दोनों का ढोल बना दिया होता। याद है, जब संजय गाँधी की एक आवाज़ पर हर दुकानदार को सबकुछ उजागर करने के साथ-साथ हर पदार्थ की कीमत उस पदार्थ के डिब्बे/कनस्तर पर लगानी जरुरी थी। ऐसा नहीं करने दुकानदार पर कार्यवाही की जाती थी। नाम छुपाकर कर व्यापार करने वाला अपनी दुर्भावना अपने आप जाहिर कर रहा है। ऐसे जेहादियों का समर्थन सबसे बड़े जेहादी है। ऐसे लोगों से देश चलाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए और ना ही नाम छुपाकर कोई भी व्यापार करने वालों की हिमायत लेने वालों को एक भी वोट देना चाहिए। आने वाली तुम्हारी पीढ़ियां कोसेंगी तुम्हे। जीते जी ही मरने के बाद का जीवन भी सुधार लो। सनातन को अपमानित भी करेंगे और सनातन के नाम से धंधा भी करेंगे। करना है करो अपनी पहचान क्यों छुपा रहे हो?  
उत्तर प्रदेश में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे के बाईपास पर मुस्लिम संचालक द्वारा हिंदू नाम से भोजनालय चलाने का मामला गर्माता जा रहा है। ताजा खबर यह है कि ‘पंडित जी शुद्ध वैष्णो भोजनालय’ के संचालक सनव्वर सहित पांच लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब बघरा स्थित योग साधना यशवीर आश्रम के महंत स्वामी यशवीर महाराज बीती 28 जून को कांवड़ यात्रा मार्ग पर संचालित ढाबों और होटलों पर चेकिंग करने निकले थे। यशवीर महाराज एक-एक होटल और ढाबे में जा रहे थे और संचालकों के साथ ही कर्मचारियों के पहचान-पत्र देख रहे थे।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर मुस्लिम लोग ‘पंडित जी वैष्णो’ नाम से ढाबा चला रहे थे। पुलिस ने हिंदू संगठन के विरोध के बाद मालिक सनव्वर, उसके बेटे आदिल, जुबैर और दो अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

दरअसल, मामला रविवार (29 जून 2025) का है। जब हिंदू संगठन की टीम काँवड़ के रूट पर स्थित होटलों और ढाबों की जाँच कर रही थी। इस दौरान सामने आया कि हिंदू नाम की पहचान से दिल्ली-देहरादून NH-58 स्थित पंडित जी वैष्णो ढाबा सनव्वर नाम का एक मुस्लिम व्यक्ति चला रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहाँ हिंदू संगठन ने ढाबे के मालिक से आधार कार्ड माँगा, लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ऑनलाइन पेमेंट वाले स्कैनर में ‘जाबिर’ नाम लिखा था, जबकि बाहर ‘दीक्षा शर्मा’ नाम का बोर्ड लगा था। का मालिक का असली नाम पता लगा।

ढाबे के मालिक और अन्य कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिम होने की पुष्टि करने के लिए उनकी पैंट भी उतरवाई गई। जबकि हिंदू संगठन से सुमित बजरंगी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

QR Code से हुई पहचान

यशवीर महाराज के समर्थकों ने ‘पंडित जी शुद्ध वैष्णो भोजनालय’ पहुंचकर वहां लगे QR Code को स्कैन किया, तो एक कोड सनव्वर के नाम से मिला। वहीं दूसरा क्यूआर कोड अनीता के नाम से था। इसके बाद समर्थक भड़क गए और हंगामा करने लगे। इन लोगों ने अन्य ढाबों पर भी भगवा झंडे लगाए और भगवान वराह के चित्र चस्पा किए।

पहचान उजागर करने पर हुई थी मैनेजर की पिटाई

  • यशवीर महाराज अपने समर्थकों के साथ ‘पंडित जी शुद्ध वैष्णो भोजनालय’ पहुंचे, तो पता चला कि इसका संचालन एक मुस्लिम द्वारा किया जा रहा है। यहां हंगामे के बीच मैनेजर की पिटाई कर दी है।
  • होटल संचालक और उसके साथियों ने अपने ही कर्मचारी मैनेजर को इस आरोप के साथ पीटा कि उसने यशवीर महाराज के सामने यह खुलासा कर दिया कि यहां का संचालक मुस्लिम है।
  • खुद होटल मैनेजर ने यह आरोप लगाया। मैनेजर धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि यशवीर महाराज ने उससे होटल मालिक का नाम पूछा तो उसने सच-सच बता दिया। इस पर उसकी पिटाई कर दी गई।
  • इसके बाद 30 जून को होटल मैनेजर और यशवीर महाराज ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना बताई। उन्होंने बताया कि 29 जून की रात लगभग 9 बजे होटल संचालक सनव्वर, जुबेर पुत्र सनव्वर, आदिल खान और एक अज्ञात व्यक्ति ने मैनेजर को पीटा और बाद में नौकरी से भी निकाल दिया गया।

उत्तर प्रदेश : सपा और AIMIM के गुंडों की लड़ाई, पुलिस पर जानलेवा हमला और पथराव: मीरापुर मतदान के दिन हिंसा मामले में 28 (सभी मुस्लिम) नामजद+120 अज्ञात के खिलाफ FIR

                                                 आत्मरक्षा में पिस्टल ताने एसएचओ (साभार: NBT)
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित मीरापुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के दौरान पथराव करने वाले आरोपितों पर FIR दर्ज की है। पुलिस ने 28 नामजद और 120 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपितों में 3 महिलाएँ भी हैं और ये सभी मुस्लिम समुदाय की हैं। ये सभी समाजवादी पार्टी और AIMIM से जुड़े हैं। इसके अलावा AIMIM के प्रत्याशी के बेटे को हिरासत में लिया गया है।

जिन आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, उनके नाम हैं- शेर अली, शाह आलम, दानिश, मट्टू, गुड्डू, जब्बार, शाहनवाज, सावेज, अव्वलीन, सद्दाम, सादाब, औरंगजेब, अंजीम, दीनू, गुलशेर, शाहनजर, जावेद, परवेज, कय्यूम, इनाम, सलमान, सद्दाम-2, अनीस, मौसम, नजर, सुल्ताना बीबी, तोहिदा बीबी और तनजिला बीबी है।

इन आरोपितों के खिलाफ BNS की धारा 109, 115(2), 121(1), 121(2), 125, 131, 132, 190, 191(2), 191(3), 223, 351(2), 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, इन पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम (CrPC) की धारा 7 पर लगाया गया है। इसके अलावा, FIR में अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR में कहा गया है कि शेर अली, शाह आलम, दानिश सहित समाजवादी पार्टी से जुड़े 15 आरोपित और AIMIM से जुड़े दूसरे पक्ष के अजीम, दीनू, गुलशेर सहित 10 आरोपित वोट देने को लेकर आपस में लड़ रहे थे। समाजवादी पक्ष की ओर से 15 आरोपितों के साथ 60-70 अज्ञात लोग थे। वहीं, AIMIM पक्ष की ओर से 10 आरोपितों के साथ 40-50 अज्ञात लोग थे।

पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो वो टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों पक्ष मिलकर पुलिस के साथ गाली-गलौच करने लगे। फिर उन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। FIR में कहा गया है कि इन लोगों ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से हमला किया। उनके द्वारा किए गए पथराव में थाना प्रभारी सहित कई लोग घायल हो गए।

पथराव के कारण सड़क पर दोनों तरफ का ट्रैफिक जाम हो गया और गाड़ियों में बैठे महिलाएँ एवं बच्चे चीखने-चिल्लाने लगे। इसके बाद पुलिस को मजबूर होकर बल करना पड़ा। पुलिस के बल प्रयोग करने के बाद दोनों पक्ष के लोग तितर-बितर हुए और ट्रैफिक जाम हटा। मीरापुर सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) की प्रत्याशी सुम्बुल राणा हैं। वह पूर्व सांसद कादिर राणा की बहू हैं। वहीं, AIMIM से अरशद राणा हैं।

पुलिस ने अरशद राणा के बेटे को हिरासत में ले लिया है। आरोप है कि वो मोबाइल फोन लेकर बूथ के पास जा रहे थे। वहीं, दोनों पक्षों ने पुलिस पर इस तरह हमला किया कि पहले तो पुलिस को जान बचाकर भागनी पड़ी। इसके बाद एसएचओ ने पिस्टल निकाल कर भीड़ को खदेड़ा और कहा, “यहाँ से चली जाओ नहीं तो गोली मार दूँगा।” इसकी सूचना मिलते ही SSP भी फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे।

इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने राजनीति करने की कोशिश की। उन्होंने इसे वोटरों को धमकाने की कोशिश बताते हुए इंस्पेक्टर राजीव शर्मा को सस्पेंड करने की माँग की। अखिलेश यादव ने बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया है। 28 सेकेंड के इस वीडियो में पुलिसकर्मियों के आगे कई महिलाएँ खड़ी हैं।

अखिलेश यादव ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “मीरापुर के ककरौली थाना क्षेत्र के SHO को चुनाव आयोग द्वारा तुरंत निलंबित किया जाए, क्योंकि वो रिवॉल्वर से धमकाकर वोटर्स को वोट डालने से रोक रहे हैं।” अपने ट्वीट में अखिलेश ने चुनाव आयोग सहित कई अन्य हैंडलों को टैग किया है। इसके बाद नेटिजन्स उन पर भड़क गए और मामले के छिपाने का आरोप लगाया।

उत्तर प्रदेश : ‘आज बांग्लादेश है, कल भारत होगा’: महताब अंसारी ने शेयर किया भीड़ से घिरी चीखती महिला का वीडियो; क्या 2014 में अगर मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते भारत इस्लामिक राष्ट्र बन गया होता? देखिए वीडियो

                  आज बांग्लादेश कल भारत जैसी रील शेयर करने वाला महताब मुज़फ्फरनगर में गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में एक युवक ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में एक महिला को चीखते हुए सुना जा सकता है। वीडियो शेयर करने का आरोप महताब अंसारी पर लगा है। उसने लिखा कि जो बांग्लादेश में हुआ वो भारत में होगा। हिन्दू संगठनों ने महताब पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई। रविवार (11 अगस्त, 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए महताब को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर के थाना क्षेत्र भोपा का है। यहाँ के गाँव तिस्सा में महताब अंसारी नाम का युवक रहता है। आरोप है कि महताब ने 10 अगस्त (शनिवार) को अपने फेसबुक पर एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में कुछ लोगों से घिरी एक महिला बाहर चीख रही है। वहीं घर के अंदर से कोई व्यक्ति उस घटनाक्रम का वीडियो बना रहा है। जिन लोगों से महिला घिरी है उनके हाथों में हथियार नजर आ रहे हैं। आसपास कुछ बच्चों के भी रोने की आवाज बीच में सुनाई दे रही है।

मुज़फ्फरनगर के पत्रकार समर ठाकुर ने रविवार (11 अगस्त, 2024) को इस वीडियो को अपने ‘@SudarshanTvMzn’ वाले हैंडल से ‘X’ प्रोफ़ाइल पर शेयर किया। मुज़फ्फरनगर पुलिस को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, “बांग्लादेश का यह वीडियो मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र से सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया बताया जा रहा है। जिसमें दर्शाया गया है कि आज जो बांग्लादेश में हो रहा है कल भारत में होगा।” वीडियो के कैप्शन में मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा हुआ है कि ‘आज बांग्लादेश है, कल भारत होगा।’

मुज़फ्फरनगर पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कर के गिरफ्तारी कर ली गई है। वहीं स्वामी यशवीर ने बताया कि पहले आरोपित पर हल्की धाराएँ लगा कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया लेकिन जब आंदोलन की चेतावनी दी गई तो पुलिस ने कड़ी धाराओं में कार्रवाई की। स्वामी यशवीर ने एलान किया था कि अगर महताब अंसारी पर गंभीर धाराओं में एक्शन नहीं हुआ तो वो आरोपित के घर तक जाएँगे।

18 साल बाद कानून लागू होने पर ‘संगम शुद्ध शाकाहारी ढाबा’ बना ‘सलीम ढाबा’, ‘चाय लवर प्वॉइंट’ हो गया ‘वकील अहमद टी-स्टॉल’; गाली खा रहे योगी और मोदी

एक बहुत पुरानी कहावत है कि चोर आईने में अपनी ही शक्ल देख डरने लगता है। ठीक वही हालत कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन का है। दुकानों और ढाबों पर मालिक का नाम लिखे जाने के कानून को उत्तर प्रदेश पुलिस या योगी आदित्यनाथ का नहीं, बल्कि 2006 में सोनिया गाँधी की सलाहकार समिति द्वारा बनाए इस कानून पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी मोहर लगाई थी, जनता गुमराह हो गयी कि सरकार जनता की कितनी चिंता करती है। लेकिन कानून बनाकर ठंठे बस्ते में डाल दिया, गुमराह हुई जनता भी कहीं गुम हो गयी। अब जब उसी कानून को लागू जमीन पर लाए जाने पर वही कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन ही विरोध कर रही है। अब कोई इनसे पूछे कि कानून पाखंड को बेनकाब करने वाला था तो बनाया ही क्यों था? कानून में सिर्फ नाम ही नहीं और बहुत कुछ सार्वजनिक करने को कहा गया है। केंद्र सरकार को इस कानून को पूरे देश में लागू करना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने कांवड़ यात्रा रूट पर खाने-पीने की सभी दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का आदेश जारी किया। 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले मुजफ्फरनगर जिले के सभी दुकानदारों, ढाबों, फल विक्रेताओं और चाय की दुकानों ने प्रशासन के निर्देशानुसार अपने प्रतिष्ठानों या वेंडिंग ठेलों पर मालिकों या कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस निर्देश का उद्देश्य धार्मिक यात्रा के दौरान भ्रम से बचना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। लेकिन प्रशासन के इस कदम से तुष्टिकरण के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन सहित लेफ्ट लिबरल गैंग को मिर्ची लग गई। यहां तक कि इस पहल को विवाद बनाने में जावेद अख्तर जैसे बुद्धिजीवी भी कूद पड़े हैं। जावेद अख्तर ने इसकी तुलना जर्मनी के नाजी शासन से कर डाली और कहा कि नाजी शासन में दुकानों पर निशान लगते थे। इनका दोगलापन देखिए कि खुद के लिए ‘हलाल’ सिस्टम चाहिए, लेकिन कांवड़ रूट पर ‘पहचान’ सिस्टम से भी परेशानी हो रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में काँवड़ यात्रा मार्ग पर के दुकानदारों को अपने दुकान पर नाम लिखना होगा। इसके पहले मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने जिले के लिए यह आदेश जारी किया था। इसके बाद इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था। हालाँकि, सीएम योगी के आदेश के बाद अब काँवड़ मार्ग पर काफी कुछ बदला हुआ नजर आने लगा है।

मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।

इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।

दिल्ली-देहरादून हाइवे पर ही स्थित ‘साक्षी होटल’ के मालिक लोकेश भारती ने बताया, “कल हमारे पास दो पुलिस वाले आए और कहा कि दुकान के आगे नाम लिखना है। इसके साथ ही होटल में काम करने वाले कर्मचारियों के भी नाम डिस्प्ले होना चाहिए। पुलिस के आदेश के बाद हमने दुकान पर काम करने वाले चार मुस्लिमों को फिलहाल हटा दिया है।”

दरअसल, काँवड़ यात्रियों की आस्था एवं शुद्धता की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह सभी दुकानों, ढाबों, होटलों और ठेला वालों को आदेश दिया है कि वे अपनी दुकान के बाहर एक सूची लटकाएँ। उस पर दुकान के मालिक और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों का नाम अंकित हो। इस आदेश के बाद कई दुकानों के नाम बदल गए।

आदेश हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। आदेश में सभी दुकानों, ढाबा, ठेलों पर अपना नाम लिखना होगा, ताकि काँवड़ यात्री जान सकें कि वो किस दुकान से सामान खरीद रहे हैं। बता दें कि काँवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु शुद्धता को लेकर खानपान में काफी परहेज करते हैं। इसको लेकर ही योगी सरकार ने यह कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में बड़ी संख्या में काँवड़ में गंगाजल भरने के लिए काँवडिये आते हैं। इसको देखते हुए हरिद्वार के SSP ने आदेश दिया है कि जिले में सभी काँवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह आदेश हरिद्वार के SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने दिया है।

SSP के अनुसार, जिले में जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में इस आदेश का राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किए जाने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लोग पहचान छिपाकर धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र करते हैं। देवी-देवताओं के नाम पर ऐसा नहीं होना चाहिए। खतौली के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता विक्रम सैनी ने कहा है कि मुस्लिम के ढाबों में लहसुन-प्याज का प्रयोग होता है, जबकि इस दौरान शिवभक्त इससे परहेज रखते हैं। 

काँवड़ यात्रा पर किसी भी हमले के लिए मोहम्मद जुबैर होगा जिम्मेदार: यशवीर महाराज ने ‘सेकुलर’-इस्लामी रुदालियों पर बोला हमला, ढाबों मालिकों की सूची लगाने का दिया गया था निर्देश

                             यशवीर महाराज/मोहम्मद जुबैर (फोटो साभार : X/Yashveer Maharaj/File)
स्वामी यशवीर महाराज ने 18 जुलाई 2024 को एक  वीडियो बयान जारी कर इस्लामिक कट्टरपंथियों और तथाकथित ‘सेकुलरों’ को आड़े हाथों लिया, जो यूपी के मुजफ्फरनगर के काँवड़ रूट पर दुकानों और ठेलों पर उनके मालिकों के नाम लिखने के मुजफ्फरनगर पुलिस के निर्देश का विरोध कर रहे हैं।

काँवड़ यात्रियों के बीच दुकानों के मालिक को लेकर किसी तरह के भ्रम की स्थिति न हो, इसके लिए ये निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि लंबे समय से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम का इस्तेमाल कर होटल, दुकानें, ढाबे और फल के ठेले चला रहे हैं। यशवीर महाराज लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।

स्वामी यशवीर महाराज ने वीडियो में कहा, “हमने सवाल उठाए कि मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग पर खाने-पीने की दुकानें, फलों के ठेले आदि चलाने वाले मुस्लिम दुकानदार अपनी दुकानों के नाम हिंदू देवी-देवताओं के नामों पर क्यों रखते हैं। जब हमने माँग की कि सभी दुकानों और ठेलों पर मालिकों/कर्मचारियों के नाम बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखे होने चाहिए, तो पुलिस ने हमारी माँग मान ली और इसके लिए निर्देश जारी कर दिए। दुकानदार निर्देशों के अनुसार मालिकों के नाम मोटे अक्षरों में लिख रहे हैं। हालाँकि ओवैसी जैसे कट्टरपंथी पुलिस के निर्देशों पर आपत्ति जता रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “एक तथाकथित पत्रकार है, मोहम्मद जुबैर। यह वही मोहम्मद जुबैर है जिसने अपनी पोस्ट से मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काया और वह कई बार जेल जा चुका है। उस पर कई मुकदमे चल रहे हैं। मुजफ्फरनगर में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। इसलिए मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि किसी काँवड़ यात्री के साथ कोई दुर्घटना न हो। अगर किसी काँवड़ यात्री को कुछ होता है, तो उसके लिए मोहम्मद जुबैर को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इसलिए, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसके खातों की भी जाँच की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि उसे विदेशी फंडिंग तो नहीं मिल रही है।”

स्वामी ने आगे कहा, “जो कट्टरपंथी और सेकुलर लोग पुलिस के निर्देशों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि अगर हिंदू उनके होटल में खाना खाते रहेंगे, जिस पर थूका गया हो, पेशाब किया गया हो और गोमाँस मिला हो, तो यह (उनके लिए) ठीक है, लेकिन अगर वे (हिंदू) विरोध करते हैं, तो यह एक समस्या बन जाती है और वे (कट्टरपंथी और सेकुलर) इसके खिलाफ अभियान शुरू कर देते हैं। हमें मुस्लिमों के होटलों और ढाबों से कोई समस्या नहीं है। वो उन्हें चलाने के लिए आजाद हैं लेकिन उन्हें हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर और हिंदुओं के भ्रामक नामों पर चलाने की जगह अपने नाम से दुकानें चलानी चाहिए। अगर किसी को लगता है कि पहले जैसे ही सबकुछ चलता रहेगा, तो ऐसा नहीं होने वाला।हम इसे कम से कम मुजफ्फरनगर में जारी नहीं रहने देंगे। अगर कोई ऐसा करना जारी रखने की कोशिश करता है, तो हम इसके खिलाफ आवाज उठाकर इसे रोकेंगे।” इस दौरान उन्होंने काँवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश देने के लिए पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

दुकानों और ठेलों पर लिखे जाएँ मालिकों के नाम: पुलिस

इस साल काँवड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगी। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थानीय प्रशासन ने आदेश जारी कर होटल , ढाबे और खाने-पीने का सामान बेचने वाले ठेलों पर दुकान या ठेला चलाने वाले मालिक और संचालक का नाम लिखने को कहा है। हालाँकि, कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और इस्लामिस्टों ने धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने मीडिया को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने प्रशासन के फैसले के बारे में जानकारी साझा की। मीडिया चैनलों से बात करते हुए एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा कि काँवड़ यात्रा के निशान पर आने वाले ढाबों, होटलों, भोजनालयों और खाद्य सामग्री बेचने वाले ठेलों को मालिकों और संचालकों के नाम लिखने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इससे कांवड़ियों के लिए भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा और बहस या टकराव से बचा जा सकेगा और साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोजनालयों ने अपनी मर्जी से आदेश का पालन करना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि काँवड़ यात्रियों को सामान खरीदने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है और वे कहीं से भी खरीदारी करने के लिए स्वतंत्र हैं। 
   

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 मुस्लिमों के दुकानों के भ्रामक नामों के खिलाफ यशवीर महाराज का अभियान
पिछले साल काँवड़ यात्रा के दौरान और इस साल की यात्रा से पहले स्वामी यशवीर महाराज ने गंभीर आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में मुस्लिम ढाबे मालिकों ने अपनी पहचान छिपाकर फर्जी हिंदू नामों वाले पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि काँवड़ यात्रा के मार्गों पर मुस्लिम ढाबे वालों ने पोस्टर लगाए हैं। इसे देखते हुए स्वामी यशवीर महाराज ने माँग की है कि प्रशासन ढाबे मालिकों से अपने मालिकों या संचालकों के नाम बोर्ड पर लिखने के लिए कहे।
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा , “काँवड़ यात्रा के दौरान एक समुदाय विशेष के कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाते हैं, जिससे शिवभक्त कांवड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुँचने की आशंका है। हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाने वाले समुदाय विशेष के लोगों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। पुलिस को इसके लिए अभियान चलाना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर एक सप्ताह के भीतर प्रशासन इस मामले में कार्रवाई नहीं करता है तो वे विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।

इस मुद्दे पर बवाल काट रहे इस्लामिक कट्टरपंथी

प्रशासन का ये आदेश ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद आया है, जिसमें मुस्लिम दुकानदारों के काँवड़ियों के धोखा देने के आरोप लगे। वो सावन के पवित्र महीने में नकली नामों वाले ढाबों, फलों के ठेलों, होटलों में व्रत के नियमों के विपरीत खाना खिलाकर भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने ये आदेश जारी किया है कि दुकानों, ढाबों के मालिकों को अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखना होगा। क्योंकि ऐसे मामलों में टकराव होने से कानून व्यवस्था की स्थिति खड़ी हो जाती है। हालाँकि, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ये आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया कि दुकान के मालिक का नाम लिखना “धार्मिक भेदभाव” है।
मोहम्मद जुबैर, जो खुद को फैक्ट चेकर कहता है, लेकिन वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फैक्ट चेक की ओट लेता है। उसने इस आदेश को खतरनाक बताते हुए ‘धार्मिक भेदभाव’ करार दिया था। इसके अलावा एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तो एक कदम आगे बढ़कर इसकी तुलना दक्षिण अफ्रीका के “रंगभेद” और जर्मनी के “यहूदी बहिष्कार” से कर दी।(साभार)

चंद्रचूड़ जी, अरविन्द केजरीवाल का “लोकतंत्र” देख लीजिए; Youtuber रचित कौशिक को उठा लिया; मीडिया खामोश, क्यों? योगी जी, कार्रवाई करें

रचित कौशिक को उठा ले गई पंजाब पुलिस (चित्र साभार: Daily Excelsior)
सुभाष चन्द्र

अभी एक दिन पहले की ही बात है जब “आप” का मेयर चंडीगढ़ में न चुने जाने पर CJI चंद्रचूड़ पीठासीन अधिकारी पर दोष लगाते हुए कह रहे थे कि वह तो “लोकतंत्र की हत्या” कर रहे हैं जो हम स्वीकार नहीं करेंगे।  

अब चंद्रचूड़ जी अपने लाड़ले केजरीवाल की पार्टी का “लोकतंत्र” देख लीजिए जिसकी कथित पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर से Youtuber रचित कौशिक को बिना लोकल पुलिस को सूचित किए उठा लिया ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया रिपोर्ट आप तक न पहुंचती हों और यह खबर भी आप के पास आई होगी जिस पर आपको स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। 

लेखक 
CJI चंद्रचूड़ जिस तरह “आम आदमी पार्टी” के लिए कल परेशान हुए थे, उसे देखते हुए आज उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह तुरंत रचित कौशिक को मुक्त कराने के आदेश दें। रचित कौशिक का कसूर केवल इतना था कि उसने केजरीवाल के बेटे पुलकित का भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश की थी। 

एक ट्विटर हैंडल से उसका वीडियो पोस्ट किया गया था जिसे आधार बना कर रचित को उठा लिया गया जबकि FIR में न रचित का नाम हैं और न उसके Youtube चैनल “सब लोकतंत्र” का, शिकायत करने वाली लुधियाना की अलीशा सुल्तान है जिसने खुद को कथित तौर पर एक पादरी बताते हुए 17 जनवरी, 2024 को आरोप लगाया था कि @noconversion नाम के X पर ईसाई महिलाओं और ननों का अपमान किया गया है। लेकिन “OpIndia” के पास उपलब्ध  FIR में “नो कन्वर्जन” का भी नाम नहीं है मगर फिर भी रचित कौशिक को उठा लिया गया। 

दिलचस्प यह है कि पादरी की शिकायत पर दर्ज FIR में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का जिक्र नहीं है। न ही इसमें केजरीवाल के उस वीडियो का जिक्र है जिसे सोशल मीडिया में उनकी गिरफ्तारी का आधार बताया जा रहा है। यह एफआईआर ‘नो कन्वर्जन’ नामक ट्विटर हैंडल पर धार्मिक भावना आहत करने का आरोप लगाती है। इसी ट्विटर हैंडल से यह वीडियो साझा किया गया था।

जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी 2024 की शाम 7 बजे के आसपास रचित कौशिक को एक सफ़ेद रंग की स्कार्पियो में आए चार सिख पुलिसकर्मी उठा ले गए। पुलिसकर्मियों ने वर्दी नहीं पहन रखी थी और ना ही उनके साथ स्थानीय पुलिस थी। पादरी ने लुधियाना में इसी साल जनवरी में मामला दर्ज कराया था।

सबसे बड़ी ताज्जुब की बात तो यह है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रचित कौशिक के अपहरण के बारे में कोई खबर नहीं है, सब खामोश हैं। मीडिया का मुंह इस तरह कैसे बंद रह सकता है। क्या केजरीवाल ने गोदी मीडिया को प्रभावित कर रखा है कि "मेरे पक्ष में समाचार प्रसारित करो, खिलाफ नहीं।" आखिर मीडिया एक निर्दोष पत्रकार के अपहरण पर खामोश क्यों है? क्या कारण है? 

रचित कौशिक के इन्स्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, हाल ही में उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया है। रचित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है। 

यह जरूरी नहीं है कि रचित को उठाने वाले आधिकारिक पंजाब पुलिस वाले ही हों, वे लोग “आम आदमी पार्टी” के अपने लोग भी हो सकते हैं जिन्होंने रचित का अपहरण किया है और यदि वे पुलिस अधिकारी थे तो पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए वैसे जिस तरह चंद्रचूड़ जी कल तड़प रहे थे, संज्ञान तो उन्हें लेना चाहिए। 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस को भी पंजाब पुलिस के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि उसके संज्ञान में लाए बिना पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। 

कुछ दिन पहले आपको याद होगा, पंजाब पुलिस ने भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा को भी इसी तरह गैर कानूनी तरीके से उनके दिल्ली स्थित निवास से उठाने के कोशिश की थी जिस पर हरियाणा सरकार की कार्रवाई के बाद ही बग्गा की गिरफ़्तारी रुकी थी। इसके अलावा Times Now की पत्रकार भावना किशोर को भी पंजाब पुलिस ने फर्जी आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया था जब उसने केजरीवाल के “शीश महल” के बारे में रिपोर्टिंग की थी। 

इतना सब होने के बाद भी एक दिन पहले CJI चंद्रचूड़ केजरीवाल की पार्टी “आप” के लिए लोकतंत्र को लेकर परेशान हो रहे थे। मैंने कल ही लिखा था कि एक दिन केजरीवाल की वजह से CJI चंद्रचूड़ को कलंकित होना पड़ सकता है और यह आज नज़र आ गया। 

अवलोकन करें:-

ED की जाँच में घोटाला बताने वाले घोटालेबाज़ों की पंजाब सरकार ने केजरीवाल के बेटे पुलकित के घोटाले

 

ED की जाँच में घोटाला बताने वाले घोटालेबाज़ों की पंजाब सरकार ने केजरीवाल के बेटे पुलकित के घोटाले को उजागर करने वाले रजित कौशिक को उठा लिया


सब लोकतंत्र’ न्यूज पोर्टल के फाउंडर रचित कौशिक को बुधवार (6 फरवरी, 2024) को पंजाब के चार पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से उठा लिया। कौशिक एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। घटना शाम के करीब 7 बजे की बताई जा रही है। कौशिक अपनी भांजी को पार्लर से लेकर विवाह स्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।

6 फरवरी 2024 की रात सोशल मीडिया में ‘दिल्ली के एक पत्रकार’ को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से ‘किडनैप’ करने की खबरें आई। फिर पता चला कि जिनलोगों ने पत्रकार को उठाया है, वे आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब पुलिस से थे। पंजाब पुलिस ने जिस जिस पत्रकार को उठाया है, वे यूट्यूबर रचित कौशिक हैं। वे ‘सब लोकतंत्र’ नाम से सोशल मीडिया में चैनल चलाते हैं।

रचित कौशिक के इन्स्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, हाल ही में उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया है। रचित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है।

इस अकाउंट के विरुद्ध खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A, 153A, 153, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उसने रचित कौशिक का एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो में रचित ने केजरीवाल के बेटे के भ्रष्टाचार को लेकर खुलासा कर रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने केजरीवाल के बेटे पुलकित पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के बंगले में जिम का सामान किराए पर बाजार भाव से कहीं ज्यादा कीमत पर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ लगी चार ट्रेडमिल को उन्होंने किराए पर दिया और इससे ₹10 लाख/माह वसूले। दावा किया जा रहा है कि इसी आधार पर रचित कौशिक को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब पुलिस से उन्हें छोड़े जाने के लिए अब सोशल मीडिया पर आवाज उठ रही है।

ऑपइंडिया से रचित कौशिक की माँ ने बताया है कि उनका बेटा अपनी भांजी को लेकर शादी वाली जगह पर जा रहा था। अचानक से एक स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। इस गाड़ी से एक सिख व्यक्ति सामान्य कपड़ों में बाहर निकला।

कौशिक ने समझा कि उनकी कार स्कॉर्पियो को टच कर गई है, इसलिए उन्होंने इस व्यक्ति से बात करने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया। लेकिन सिख व्यक्ति ने बिना किसी चेतावनी के उनकी गाड़ी का दरवाजा खोला और कौशिक को बाहर खींच लिया। इससे पहले कि कौशिक के साथ वाले लोग कुछ समझ पाते वह उन्हें खींचकर अपनी गाड़ी में ले गया।

कुछ ही मिनटों में कौशिक के रिश्तेदार और चश्मदीद यहाँ जमा हो गए। कौशिक की माँ ने बताया कि उनलोगों ने स्थानीय पुलिस से सम्पर्क किया। थोड़ी देर बाद पता चला कि इसके बारे में पंजाब पुलिस ने स्थानीय थाने को जानकारी दी थी। इसके बाद पंजाब पुलिस ने कौशिक को हिरासत में ले लिया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कौशिक के परिवार को इस सम्बन्ध में कोई वारंट नहीं मिला।

FIR में सब लोकतंत्र या रचित कौशिक का नाम तक नहीं

इस मामले में दर्ज एफआईआर की काॅपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। ध्यान देने वाली बात है कि इस एफआईआर में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का नाम नहीं है। यह एफआईआर लुधियाना के सलेम टाबरी थाना क्षेत्र की अलीशा सुल्तान की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।
                                               FIR की प्रति (स्रोत: रचित कौशिक का परिवार)
शिकायतकर्ता ने खुद को पादरी बताते हुए कहा कि 17 जनवरी 2024 को उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ एक पोस्ट ‘नो कन्वर्जन (@noconversion)’ नाम के एक्स/ट्विटर हैंडल पर देखी। सुल्तान ने इस अकाउंट के खिलाफ ईसाई महिलाओं और ननों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसे पोस्ट सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं, जिससे देश में अशान्ति हो सकती है।
FIR में बताया गया है कि उन पोस्टों की प्रतियाँ शिकायत के साथ संलग्न थी, लेकिन उन पोस्ट के लिंक एफआईआर में नहीं थे। इस FIR को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए, 153ए, 153, 504 और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है। लेकिन एफआईआर में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि ‘नो कन्वर्जन’ नामक हैंडल के किस पोस्ट से शिकायतकर्ता की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
ऑपइंडिया से बात करते हुए कौशिक की माँ ने बताया है कि हो सकता है कौशिक को इसलिए गिरफ्तार किया गया हो क्योंकि उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बेटे पुलकित के खिलाफ वीडियो बनाए थे। ऐसी ही एक वीडियो ‘नो कन्वर्जन’ नाम के हैंडल से 16 जनवरी 2024 को साझा की गई थी। इसमें रचित कौशिक केजरीवाल के बेटे पुलकित के विषय में बात कर रहे थे। उन्होंने इस वीडियो में पुलकित केजरीवाल पर जिम का सामान किराए पर देकर सरकारी खजाने से पैसा लेने का आरोप लगाया था।
इसके अलावा ऐसा कोई अन्य वीडियो नहीं है जो कि इस अकाउंट पर कौशिक को दिखाता हो। कौशिक की माँ के अनुसार गिरफ्तारी के समय पंजाब पुलिस को यह कहते सुना गया, “तुमको लम्बे समय से ढूँढ रहे थे, आखिर में पकड़ लिया।” ध्यान देने वाली बात है कि ‘नो कन्वर्जन’ हैंडल से कौशिक की जो क्लिप साझा की गई है उसमें कहीं भी ईसाइयों या धर्मांतरण के विषय में बात नहीं है। ऑपइंडिया को ऐसी कोई वीडियो नहीं मिली है जिसे ‘नो कन्वर्जन’ ने पोस्ट किया हो और उसमें कौशिक इस विषय में बात कर रहे हों।
                        नो कन्वर्जन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर की गई रचित कौशिक की वीडियो (चित्र स्रोत: X)
लिहाजा यह स्पष्ट नहीं है कि कौशिक को पुलिस ने इसी वीडियो के आधार पर उठाया है। यह भी साफ़ नहीं कि कौशिक को ‘नो कन्वर्जन’ द्वारा की गई किस पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया है।
सबसे हैरानी वाली बात ये है कि पीड़ित परिवार को जो FIR दी गई है, उसमें रचित कौशिक का कहीं नाम तक नहीं है। इसमें सिर्फ और सिर्फ ‘नो कन्वर्जन’ ट्विटर हैंडल का ही नाम है। इस वीडियो में अरविन्द केजरीवाल वाले वीडियो का भी जिक्र नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि कौशिक को इसी बात के लिए उठा लिया गया है क्योंकि उनकी वीडियो को ‘नो कन्वर्जन’ ने साझा किया था। ऑपइंडिया ने पंजाब पुलिस से भी इस विषय में बात करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका।

उत्तर प्रदेश : सुविधानुसार संविधान की दुहाई देने वाले शांतिदूतों द्वारा राष्ट्रगान का अपमान

                                  मुज़फ्फरनगर में राष्ट्रगीत के दौरान बैठी रहीं मुस्लिम पार्षद
उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में नगरपालिका की बैठक में मुस्लिम पार्षदों पर राष्ट्रीय गीत के अपमान के आरोप लगे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब ‘वन्दे मातरम्’ बजाय जा रहा है, तब सभी पार्षद राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े हैं लेकिन 4 बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएँ बैठी हुई हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान करार दिया। बैठक में केंद्रीय पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग मंत्री संजीव बालियान भी मौजूद थे।

संजीव बालियान मुज़फ्फरनगर के स्थानीय सांसद भी हैं। नगरपालिका बोर्ड की बैठक में मुस्लिम महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत के अपमान का मामला तूल पकड़ रहा है। शनिवार (18 जून, 2022) को दोपहर में नगरपालिका सभागार में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार वोकेशनल एजुकेशन एवं स्किल डेवलपमेंट मंत्री कपिलदेव अग्रवाल भी मौजूद थे, जो मुज़फ्फरनगर नगरपालिका के अध्यक्ष भी रहे हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में ऐसा हुआ।

जिस बैठक में शहर के विकास के लिए 196 करोड़ रुपए का प्रस्ताव पास हुआ, उसमें महिला मुस्लिम सभासदों के अलावा पूरा सदन राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के सम्मान में खड़ा हुआ। सदन के लोग भी इस हरकत से नाराज़ दिखे। कार्यवाही शुरू होने से पहले राष्ट्रगीत बजाया गया था। केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने सभी को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान की सलाह दी। पार्षदों ने इस पर चर्चा भी की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब महिला ही राष्ट्रीय गीत का अपमान करेगी तो समाज को कैसे मजबूत करेगी?

राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का माला अदालत में चल रहा है और मई 2022 के अंतिम हफ्ते में दिल्ली उच्च-न्यायालय ने इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार की राय भी माँगी थी।

भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने इस सम्बन्ध में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर कोई दिशानिर्देश न होने के कारण असभ्य रूप से इसका इस्तेमाल हो रहा है और फिल्मों-पार्टियों में भी इसका अपमान किया जा रहा है।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सभापति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ गीत ने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी और इसे ‘जन-गण-मन’ के साथ समान रूप से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा सभी संस्थानों में दोनों को समान रूप से बजाने की माँग की है।

राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का माला अदालत में चल रहा है और मई 2022 के अंतिम हफ्ते में दिल्ली उच्च-न्यायालय ने इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार की राय भी माँगी थी। भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने इस सम्बन्ध में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर कोई दिशानिर्देश न होने के कारण असभ्य रूप से इसका इस्तेमाल हो रहा है और फिल्मों-पार्टियों में भी इसका अपमान किया जा रहा है।