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चंद्रचूड़ जी, अरविन्द केजरीवाल का “लोकतंत्र” देख लीजिए; Youtuber रचित कौशिक को उठा लिया; मीडिया खामोश, क्यों? योगी जी, कार्रवाई करें

रचित कौशिक को उठा ले गई पंजाब पुलिस (चित्र साभार: Daily Excelsior)
सुभाष चन्द्र

अभी एक दिन पहले की ही बात है जब “आप” का मेयर चंडीगढ़ में न चुने जाने पर CJI चंद्रचूड़ पीठासीन अधिकारी पर दोष लगाते हुए कह रहे थे कि वह तो “लोकतंत्र की हत्या” कर रहे हैं जो हम स्वीकार नहीं करेंगे।  

अब चंद्रचूड़ जी अपने लाड़ले केजरीवाल की पार्टी का “लोकतंत्र” देख लीजिए जिसकी कथित पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर से Youtuber रचित कौशिक को बिना लोकल पुलिस को सूचित किए उठा लिया ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया रिपोर्ट आप तक न पहुंचती हों और यह खबर भी आप के पास आई होगी जिस पर आपको स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। 

लेखक 
CJI चंद्रचूड़ जिस तरह “आम आदमी पार्टी” के लिए कल परेशान हुए थे, उसे देखते हुए आज उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह तुरंत रचित कौशिक को मुक्त कराने के आदेश दें। रचित कौशिक का कसूर केवल इतना था कि उसने केजरीवाल के बेटे पुलकित का भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश की थी। 

एक ट्विटर हैंडल से उसका वीडियो पोस्ट किया गया था जिसे आधार बना कर रचित को उठा लिया गया जबकि FIR में न रचित का नाम हैं और न उसके Youtube चैनल “सब लोकतंत्र” का, शिकायत करने वाली लुधियाना की अलीशा सुल्तान है जिसने खुद को कथित तौर पर एक पादरी बताते हुए 17 जनवरी, 2024 को आरोप लगाया था कि @noconversion नाम के X पर ईसाई महिलाओं और ननों का अपमान किया गया है। लेकिन “OpIndia” के पास उपलब्ध  FIR में “नो कन्वर्जन” का भी नाम नहीं है मगर फिर भी रचित कौशिक को उठा लिया गया। 

दिलचस्प यह है कि पादरी की शिकायत पर दर्ज FIR में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का जिक्र नहीं है। न ही इसमें केजरीवाल के उस वीडियो का जिक्र है जिसे सोशल मीडिया में उनकी गिरफ्तारी का आधार बताया जा रहा है। यह एफआईआर ‘नो कन्वर्जन’ नामक ट्विटर हैंडल पर धार्मिक भावना आहत करने का आरोप लगाती है। इसी ट्विटर हैंडल से यह वीडियो साझा किया गया था।

जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी 2024 की शाम 7 बजे के आसपास रचित कौशिक को एक सफ़ेद रंग की स्कार्पियो में आए चार सिख पुलिसकर्मी उठा ले गए। पुलिसकर्मियों ने वर्दी नहीं पहन रखी थी और ना ही उनके साथ स्थानीय पुलिस थी। पादरी ने लुधियाना में इसी साल जनवरी में मामला दर्ज कराया था।

सबसे बड़ी ताज्जुब की बात तो यह है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रचित कौशिक के अपहरण के बारे में कोई खबर नहीं है, सब खामोश हैं। मीडिया का मुंह इस तरह कैसे बंद रह सकता है। क्या केजरीवाल ने गोदी मीडिया को प्रभावित कर रखा है कि "मेरे पक्ष में समाचार प्रसारित करो, खिलाफ नहीं।" आखिर मीडिया एक निर्दोष पत्रकार के अपहरण पर खामोश क्यों है? क्या कारण है? 

रचित कौशिक के इन्स्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, हाल ही में उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया है। रचित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है। 

यह जरूरी नहीं है कि रचित को उठाने वाले आधिकारिक पंजाब पुलिस वाले ही हों, वे लोग “आम आदमी पार्टी” के अपने लोग भी हो सकते हैं जिन्होंने रचित का अपहरण किया है और यदि वे पुलिस अधिकारी थे तो पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए वैसे जिस तरह चंद्रचूड़ जी कल तड़प रहे थे, संज्ञान तो उन्हें लेना चाहिए। 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस को भी पंजाब पुलिस के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि उसके संज्ञान में लाए बिना पंजाब पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। 

कुछ दिन पहले आपको याद होगा, पंजाब पुलिस ने भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा को भी इसी तरह गैर कानूनी तरीके से उनके दिल्ली स्थित निवास से उठाने के कोशिश की थी जिस पर हरियाणा सरकार की कार्रवाई के बाद ही बग्गा की गिरफ़्तारी रुकी थी। इसके अलावा Times Now की पत्रकार भावना किशोर को भी पंजाब पुलिस ने फर्जी आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया था जब उसने केजरीवाल के “शीश महल” के बारे में रिपोर्टिंग की थी। 

इतना सब होने के बाद भी एक दिन पहले CJI चंद्रचूड़ केजरीवाल की पार्टी “आप” के लिए लोकतंत्र को लेकर परेशान हो रहे थे। मैंने कल ही लिखा था कि एक दिन केजरीवाल की वजह से CJI चंद्रचूड़ को कलंकित होना पड़ सकता है और यह आज नज़र आ गया। 

अवलोकन करें:-

ED की जाँच में घोटाला बताने वाले घोटालेबाज़ों की पंजाब सरकार ने केजरीवाल के बेटे पुलकित के घोटाले

 

ED की जाँच में घोटाला बताने वाले घोटालेबाज़ों की पंजाब सरकार ने केजरीवाल के बेटे पुलकित के घोटाले को उजागर करने वाले रजित कौशिक को उठा लिया


सब लोकतंत्र’ न्यूज पोर्टल के फाउंडर रचित कौशिक को बुधवार (6 फरवरी, 2024) को पंजाब के चार पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से उठा लिया। कौशिक एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। घटना शाम के करीब 7 बजे की बताई जा रही है। कौशिक अपनी भांजी को पार्लर से लेकर विवाह स्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।

6 फरवरी 2024 की रात सोशल मीडिया में ‘दिल्ली के एक पत्रकार’ को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से ‘किडनैप’ करने की खबरें आई। फिर पता चला कि जिनलोगों ने पत्रकार को उठाया है, वे आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब पुलिस से थे। पंजाब पुलिस ने जिस जिस पत्रकार को उठाया है, वे यूट्यूबर रचित कौशिक हैं। वे ‘सब लोकतंत्र’ नाम से सोशल मीडिया में चैनल चलाते हैं।

रचित कौशिक के इन्स्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, हाल ही में उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया है। रचित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है।

इस अकाउंट के विरुद्ध खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A, 153A, 153, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उसने रचित कौशिक का एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो में रचित ने केजरीवाल के बेटे के भ्रष्टाचार को लेकर खुलासा कर रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने केजरीवाल के बेटे पुलकित पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के बंगले में जिम का सामान किराए पर बाजार भाव से कहीं ज्यादा कीमत पर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ लगी चार ट्रेडमिल को उन्होंने किराए पर दिया और इससे ₹10 लाख/माह वसूले। दावा किया जा रहा है कि इसी आधार पर रचित कौशिक को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब पुलिस से उन्हें छोड़े जाने के लिए अब सोशल मीडिया पर आवाज उठ रही है।

ऑपइंडिया से रचित कौशिक की माँ ने बताया है कि उनका बेटा अपनी भांजी को लेकर शादी वाली जगह पर जा रहा था। अचानक से एक स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। इस गाड़ी से एक सिख व्यक्ति सामान्य कपड़ों में बाहर निकला।

कौशिक ने समझा कि उनकी कार स्कॉर्पियो को टच कर गई है, इसलिए उन्होंने इस व्यक्ति से बात करने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया। लेकिन सिख व्यक्ति ने बिना किसी चेतावनी के उनकी गाड़ी का दरवाजा खोला और कौशिक को बाहर खींच लिया। इससे पहले कि कौशिक के साथ वाले लोग कुछ समझ पाते वह उन्हें खींचकर अपनी गाड़ी में ले गया।

कुछ ही मिनटों में कौशिक के रिश्तेदार और चश्मदीद यहाँ जमा हो गए। कौशिक की माँ ने बताया कि उनलोगों ने स्थानीय पुलिस से सम्पर्क किया। थोड़ी देर बाद पता चला कि इसके बारे में पंजाब पुलिस ने स्थानीय थाने को जानकारी दी थी। इसके बाद पंजाब पुलिस ने कौशिक को हिरासत में ले लिया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कौशिक के परिवार को इस सम्बन्ध में कोई वारंट नहीं मिला।

FIR में सब लोकतंत्र या रचित कौशिक का नाम तक नहीं

इस मामले में दर्ज एफआईआर की काॅपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। ध्यान देने वाली बात है कि इस एफआईआर में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का नाम नहीं है। यह एफआईआर लुधियाना के सलेम टाबरी थाना क्षेत्र की अलीशा सुल्तान की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।
                                               FIR की प्रति (स्रोत: रचित कौशिक का परिवार)
शिकायतकर्ता ने खुद को पादरी बताते हुए कहा कि 17 जनवरी 2024 को उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ एक पोस्ट ‘नो कन्वर्जन (@noconversion)’ नाम के एक्स/ट्विटर हैंडल पर देखी। सुल्तान ने इस अकाउंट के खिलाफ ईसाई महिलाओं और ननों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसे पोस्ट सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं, जिससे देश में अशान्ति हो सकती है।
FIR में बताया गया है कि उन पोस्टों की प्रतियाँ शिकायत के साथ संलग्न थी, लेकिन उन पोस्ट के लिंक एफआईआर में नहीं थे। इस FIR को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए, 153ए, 153, 504 और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है। लेकिन एफआईआर में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि ‘नो कन्वर्जन’ नामक हैंडल के किस पोस्ट से शिकायतकर्ता की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
ऑपइंडिया से बात करते हुए कौशिक की माँ ने बताया है कि हो सकता है कौशिक को इसलिए गिरफ्तार किया गया हो क्योंकि उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बेटे पुलकित के खिलाफ वीडियो बनाए थे। ऐसी ही एक वीडियो ‘नो कन्वर्जन’ नाम के हैंडल से 16 जनवरी 2024 को साझा की गई थी। इसमें रचित कौशिक केजरीवाल के बेटे पुलकित के विषय में बात कर रहे थे। उन्होंने इस वीडियो में पुलकित केजरीवाल पर जिम का सामान किराए पर देकर सरकारी खजाने से पैसा लेने का आरोप लगाया था।
इसके अलावा ऐसा कोई अन्य वीडियो नहीं है जो कि इस अकाउंट पर कौशिक को दिखाता हो। कौशिक की माँ के अनुसार गिरफ्तारी के समय पंजाब पुलिस को यह कहते सुना गया, “तुमको लम्बे समय से ढूँढ रहे थे, आखिर में पकड़ लिया।” ध्यान देने वाली बात है कि ‘नो कन्वर्जन’ हैंडल से कौशिक की जो क्लिप साझा की गई है उसमें कहीं भी ईसाइयों या धर्मांतरण के विषय में बात नहीं है। ऑपइंडिया को ऐसी कोई वीडियो नहीं मिली है जिसे ‘नो कन्वर्जन’ ने पोस्ट किया हो और उसमें कौशिक इस विषय में बात कर रहे हों।
                        नो कन्वर्जन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर की गई रचित कौशिक की वीडियो (चित्र स्रोत: X)
लिहाजा यह स्पष्ट नहीं है कि कौशिक को पुलिस ने इसी वीडियो के आधार पर उठाया है। यह भी साफ़ नहीं कि कौशिक को ‘नो कन्वर्जन’ द्वारा की गई किस पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया है।
सबसे हैरानी वाली बात ये है कि पीड़ित परिवार को जो FIR दी गई है, उसमें रचित कौशिक का कहीं नाम तक नहीं है। इसमें सिर्फ और सिर्फ ‘नो कन्वर्जन’ ट्विटर हैंडल का ही नाम है। इस वीडियो में अरविन्द केजरीवाल वाले वीडियो का भी जिक्र नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि कौशिक को इसी बात के लिए उठा लिया गया है क्योंकि उनकी वीडियो को ‘नो कन्वर्जन’ ने साझा किया था। ऑपइंडिया ने पंजाब पुलिस से भी इस विषय में बात करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका।