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उत्तर प्रदेश : क्या सनातन विरोधियों की उलटी गिनती शुरू हो गयी है? समाजवादी पार्टी MLA इकबाल महमूद ने काँवड़ यात्रा को ‘महापर्व’ बताने की आड़ में की बदजुबानी, काँवड़ियों को बताया ‘गुंडा-मवाली’: कहा- 2027 में सपा सरकार में किए जाएँगे ‘अलग इंतजाम’

समाजवादी पार्टी के मुखिया अगर इस मुगालते हैं कि राहुल गाँधी की खटाखट रेवड़ी से अगर बीजेपी को से ज्यादा सीटें लेकर जो सुरमा भोपाली बने घूम रहे हैं, उन्हें नहीं मालूम ये सनातन के विरुद्ध जो बयानबाज़ी हो रही है, पार्टी को अंदरखाने उस तरह ख़त्म कर रही है जिस तरह लकड़ी में लगी दीमक। राममन्दिर के जीणोद्धार पर, महाकुंभ पर किस तरह उपद्रव किया और अब कांवड़ यात्रा पर। जिस तरह मायावती की बहुजन पार्टी का हाल हुआ है, अब उसी तरह समाजवादी पार्टी का होने वाला है। वह दिन दूर नहीं जब समाजवादी पार्टी परिवार तक भी सीमित नहीं रहने वाली।    
उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा के पावन अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के संभल से विधायक इकबाल महमूद ने एक बार फिर अपनी जहरीली जुबान से सनातन धर्म और शिवभक्तों को अपमानित करने का घिनौना काम किया है। काँवड़ यात्रा को आस्था का महापर्व बताने की आड़ में इकबाल महमूद ने शिवभक्तों को ‘गुंडा’ और ‘मवाली’ करार दे दिया।

इतना ही नहीं इकबाल महमूद ने 2027 में सपा की सरकार बनने की धमकी देते हुए कहा कि तब काँवड़ियों के लिए ‘अलग इंतजाम’ किए जाएँगे। यह बयान न सिर्फ सपा की सांप्रदायिक मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यह पार्टी गुंडागर्दी और नफरत की राजनीति की असली पोषक है।

इकबाल महमूद ने एक चैनल से बातचीत में काँवड़ यात्रा को निशाना बनाते हुए कहा, “इसमें शिवभक्तों से ज्यादा गुंडे और मवाली हैं, जो सड़कों पर बदतमीजी और तोड़फोड़ करते हैं।” उन्होंने मुजफ्फरनगर की एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि काँवड़ियों ने स्कूल वैन पर हमला किया।

यह बयान न सिर्फ शिवभक्तों की आस्था पर चोट है, बल्कि लाखों काँवड़ियों की श्रद्धा को बदनाम करने की साजिश भी है। इकबाल ने धमकी भरे लहजे में कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनेगी और तब काँवड़ियों को ‘सबक’ सिखाया जाएगा। यह साफ है कि सपा की नजर में श्रद्धालु नहीं, बल्कि सिर्फ वोटबैंक की राजनीति मायने रखती है।

सपा की यह करतूत कोई नई बात नहीं है। पार्टी के नेता पहले भी हिंदू धर्म, मंदिरों और आस्था के प्रतीकों पर विवादित बयान देकर माहौल बिगाड़ते रहे हैं। चाहे वह महबूब अली का मुस्लिम आबादी बढ़ने का दंभ हो या इंद्रजीत सरोज का मंदिरों और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सपा बार-बार साबित करती है कि वह सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति की असली ठेकेदार है। इकबाल महमूद का ताजा बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जो काँवड़ यात्रा जैसे पवित्र आयोजन को बदनाम करने की कोशिश है।

इस बीच, सीएम योगी आदित्यनाथ ने काँवड़ यात्रा को बदनाम करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है, ताकि अराजक तत्वों को बेनकाब किया जाए। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गुंडागर्दी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि सपा जैसे दल जो खुद को ‘गुंडों की पार्टी’ साबित कर चुके हैं, क्या ऐसी कार्रवाई से सबक लेंगे?

इकबाल महमूद का यह बयान न सिर्फ काँवड़ियों, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए अपमानजनक है। सपा की हरकत दिखाती है कि वह आस्था और संस्कृति का सम्मान करने के बजाय, समाज को बाँटने और नफरत फैलाने में विश्वास रखती है। साल 2027 की धमकी देकर सपा ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।

कागज तो दिखाना ही पड़ेगा: बेचना है खाना, तो जरूरी है नाम दिखाना; FSSAI अब चलाए डंडा; सुप्रीम कोर्ट हलाल सर्टिफिकेशन पर खामोश क्यों?

नाम बताने से सेकुलरिज्म को खतरा चिल्लाने वाले बताएं कि क्या हलाल सर्टिफिकेट किसी सरकारी संस्था द्वारा दिया जाता है? साल में लाखों-करोड़ों की कमाई की जा रही है, कौन कर रहा है यह कमाई? इस कमाई का कहाँ, किस काम में खर्च किया जा रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट इस अति गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेकर ED और CBI को जाँच देगी? बांग्ला देश सरकार द्वारा हलाल प्रमाणित रूहअफजा को यह तर्क देकर बैन कर दिया कि इसमें लिखित कोई भी चीज शामिल नहीं, सेहत के लिए नुकसानदेह है। रामदेव के विरुद्ध तो IMA सुप्रीम कोर्ट पहुँच सकती है लेकिन रूहअफजा पर बांग्लादेश के फैसले पर नहीं।   
सुप्रीम कोर्ट में सावन महीने के पहले दिन यानी सोमवार (22 जुलाई, 2024) को एक गंभीर मामला गया। मामला सावन में बम भोले का नारा लगा गंगाजल उठाने वाले कांवड़ियों से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेसी वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका लगाई थी कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर दुकानदारों को नाम दिखाने का आदेश ठीक नहीं है।

जैसा कि अक्सर ऐसे हाई प्रोफाइल वकीलों के मामले में होता है, यह मामला भी तुरंत सुना गया। सुप्रीम कोर्ट में न्याय की राह तक रहे बाक़ी 65,000 मामले अपनी प्रतीक्षा जारी रख सकते हैं। मामला चूंकि हाई प्रोफाइल वकील ने दाखिल किया था और इसलिए दाखिल किया था कि कहीं सेक्युलरिज्म ना खतरे में पड़ जाए, इसलिए एक अंतरिम आदेश भी जारी हो गया।

आदेश सुनाने से पहले जज साहब ने एक कहानी सुनाई, कहानी में बताया कि केरल का एक मुस्लिम मालिक वाला रेस्टोरेंट, हिन्दू मालिक वाले रेस्टोरेंट से बढ़िया खाना खिलाता था। यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर अगर कांवडियो को यह पता चल गया कि दुकान अब्दुल की है या फिर अभिमन्यु की, तो सेक्युलरिज्म और संविधान के आर्टिकल 14,15 और 17 का उल्लंघन हो जाएगा।

इसके बाद कोर्ट ने कलम उठाई और कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के इस आदेश को रोक दिया जाए, भले ही अंतरिम तौर पर रोका जाए। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कांवड़ियों वाले रास्ते पर कोई भी दुकान लगाए, उसका नाम नहीं पता चलना चाहिए। कोर्ट ने अपनी कलम से यह भी लिखा कि पुलिस ऐसा करने के लिए किसी को मजबूर ना करे।

कोर्ट ने यह किस्से-कहानी और आदेश सुनाने के दौरान प्रबुद्ध कांग्रेसी वकील के अलावा दूसरी तरफ नहीं देखा। दरअसल, दूसरी तरफ देखने के लिए कोई था ही नहीं। ना उत्तर प्रदेश के वकील और ना ही उत्तराखंड सरकार का पक्ष रखने के लिए कोई यहाँ था। था इसलिए नहीं क्योंकि जिस याचिका पर सुनवाई हुई वह एक दिन पहले ही दाखिल हुई थी।

याचिका दाखिल हुई और सुनवाई हो गई, लखनऊ और देहरादून से वकील दिल्ली नहीं आ सके। खैर इन सब बातों के बीच कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नाम दिखने पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन कागज दिखाने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकारें सभी दुकानदारों को कागज दिखाने का आदेश दे सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस वाले डंडे के जोर से दुकानदारों को नाम छाती पर लटकाने को ना कहे लेकिन यूपी सरकार कानून के रास्ते पर चले। उसने तरीका भी बताया। कोर्ट ने बताया कि जिस कॉन्ग्रेस के वकील सिंघवी यह याचिका लाए हैं, उसी की सरकार 2006 और 2014 में पहले ही इस बात का इलाज कर चुकी है।

कोर्ट ने बताया कि 2006 में भारत खाद्य सुरक्षा के लिए एक कानून लाया गया था। इसका नाम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट था। इस कानून में कहा गया कि कोई ढाबा, रेस्टोरेंट या होटल जो खाने के नाम पर कुछ भी बेचता हो, उसे FSSAI से सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा। लेने के बाद इसे दुकान पर साफ़ अक्षरों में दिखाना भी पड़ेगा। इस सर्टिफिकेट में दुकानदार का नाम चाहे अब्दुल हो अभिषेक, लिखा होना चाहिए और साथ ही उसका पता और क्या बेचता है, यह सब बताना पड़ेगा।

कोर्ट ने एक और कानून बताया। इसको स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट कहा जाता है। यह कानून 2014 में सरकार लाई थी। इसके तहत रेहड़ी पटरी वालों को एक सर्टिफिकेट दिया जाना था। चाहे कोई फल का ठेला हो या घर घर जाकर सब्जी बेचने वाले, इन सबको नाम और क्या बेचते हैं ये बताते हुए सर्टिफिकेट में जानकारी देनी होगी। इसको माँगे जाने पर दिखाना भी होगा।

अब अगर कोई भले ही नाम ना बताए, कागज तो दिखाना ही पड़ेगा और जरूर दिखाना पड़ेगा। कांवड़ रूट के होटल-ढाबे पर अगर अब भोले के भक्त किसी से सर्टिफिकेट माँग बैठें तो फिर सिंघवी किस अदालत का रुख करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का कर नहीं सकते क्योंकि उसी ने कहा है कि कागज़ तो दिखाना पड़ेगा।

ऐसे में यूपी सरकार अब नासिर फल वाले को अपने नाम की तख्ती हटा कर अपना सर्टिफिकेट चिपकाने को बोल सकती है। इससे नाम क्या गाँव-पता भी मालूम हो जाएगा और सेक्युलरिज्म भी सुरक्षा के घेरे में रहेगा। कोर्ट को यूपी सरकार को यह राह दिखाने के लिए धन्यवाद तो देना ही चाहिए।

अब जब कागज दिखाने की बारी आएगी तो फिर से शायद फैज की नज्में गई जाएँ। कोई क्रांतिकारी यह भी लिख सकता है कि कांवड़ से अपना धंधा चलाएँगे पर कागज नहीं दिखाएँगे। अब नाम दिखाने से चालू हुई यह बहस कागज़ के रास्ते होते हुए कहाँ तक पहुँचती है, ये तो समय ही बताएगा। 

वाह सुप्रीम कोर्ट वाह ; एक तरफ़ा फैसला बना मजाक ;सुप्रीम कोर्ट ने दुकानदारों के नाम दर्शाने के आदेश पर रोक लगा दी है ; कोर्ट ने यूपीए सरकार द्वारा बनाए कानून का संज्ञान क्यों नहीं लिया?


सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कांवड़ रूट पर दुकानदारों के नाम दर्शाने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ दोनों राज्यों को नोटिस जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुकानों को सिर्फ यह बताना होगा कि वह मांसाहार बेंचते हैं या शाकाहारी खाना।
मुजफ्फरनगर में दो दशक बाद संगम ढाबा सलीम भोजनालय बन गया।अनमोल फ्रूट आइसक्रीम ने अपने मालिक का नाम मोहम्मद कमर आलम बताया है। शीतल ढाबा बन गया अब्दुल ढाबा। मुजफ्फरनगर में चाय लवर पॉइंट का नाम बदलकर अब "वकील अहमद टी स्टॉल" कर दिया गया है। वही नीलम ढाबा अब अरशद ढाबा बन चुका है। मै खुद देहरादून, प्रयागराज के होटलों मे नाम के ठगी का शिकार हो चुका हूँ। और लोग कहते है नाम मे क्या रखा है....
सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं देखा कि हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने वाले किस तरह हिन्दुओं के देवी-देवताओं के नाम पर होटल या ढाबा खोले हुए हैं? दूसरे, कोर्ट को यूपीए सरकार द्वारा बनाए कानून का संज्ञान लेना चाहिए था। क्या यह कानून का अपमान नहीं?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (22 जुलाई, 2024) को जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस SVN भट्टी ने इस मामले की सुनवाई की। इस संबंध में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका दाखिल की थी। अभिषेक मनु सिंघवी ने दावा किया कि यात्रा के दौरान नाम दिखाने वाला यह आदेश अल्पसंख्यकों के बायकाट का जरिया बनेगा।

सिंघवी ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि इस संबंध में स्पष्ट आदेश नहीं है बल्कि आदेश को अस्पष्ट भाषा में लिखा गया है। कोर्ट ने इस पर कहा कि अगर किसी को स्वेच्छा से अपना नाम दुकान पर बताने को कहा गया है कि तो इसमें क्या समस्या है। सिंघवी ने इस पर मामले को बढ़ा चढ़ा कर बताया।

कोर्ट ने कहा कि मामले को तूल देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट में जस्टिस रॉय ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि वह केरल में एक मुस्लिम द्वारा चलाए जाने वाले मुस्लिम रेस्टोरेंट में जाते थे जबकि हिन्दू द्वारा चलाए जाने वाले में जाने कतराते थे। उन्होंने इसके पीछे साफ़ सफाई का हवाला दिया।

 

 कोर्ट ने कहा कि दुकानों को शाकाहारी या मांसाहारी खाने का प्रकार और उसकी कैलोरी बतानी होंगी। इसके अलावा उन्हें अपना लाइसेंस भी प्रदर्शित करना होगा। कोर्ट ने इसके बाद कहा कि इस आदेश से यह बात पक्की नहीं हो जाएगी कि कांवड़ रूट पर शुद्ध खाना मिले।

कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों राज्यों के इस आदेश को लागू होने से नहीं रोका गया तो इससे सेक्युलरिज्म और संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने यह भी कहा प्रशासन कांवड़ रूट पर शुद्ध भोजन के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आदेश जारी कर सकता है। कोर्ट ने इसी के साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश को नोटिस जारी कर दिया और इन सरकारों के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

सावन मास में कांवड़ रूट पर खाने की शुद्धता बनाए रखने और काँवड़ियों की सुविधा के लिए दुकानदारों के नाम दिखाने का आदेश उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकार ने दिया था। उत्तर प्रदेश में पहले इसे मुजफ्फरनगर और फिर पूरे प्रदेश में जारी किया गया था जबकि बाद में यह उत्तराखंड में भी लागू किया गया था।

उत्तराखंड पुलिस ने बताया था कि इससे पहले पहचान छुपाने के कारण कई बार विवाद हुए हैं इसलिए नाम दर्शाए जाने चाहिए। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ सिंघवी और कुछ संस्थाएँ कोर्ट चली गई थीं, अब इस मामले में यह निर्णय आया है।

I.N.D.I. गठबंधन की यूपीए सरकार के बनाए कानून को लागू करने पर योगी-मोदी का विरोध क्यों? विपक्ष अपने ही बनाए कानून के विरोध की नौटंकी क्यों कर रहा है? जब थूक वीडियो चल रहे थे, तब मुस्लिम कट्टरपंथी और विपक्ष क्यों चुप बैठा रहा?

हम कई बार इस बात को देख चुके हैं कि काँवड़ यात्रा के दौरान मजहबी भीड़ काँवड़ियों के ऊपर हमले भी करते हैं, उनके रास्ते में मांस भी फेंकते हैं और यही नहीं, भगवान शिव और उनके पूरे परिवार का मजाक भी बनाते हैं। इन्हीं सबके मद्देनज़र इस प्रकार के सांप्रदायिक दंगों और झगड़ों से निपटने के लिए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने एक नियम बनाया कि रास्ते में जितने भी ठेले और ढाबे आदि होंगे वो सब अपने सही और असली नाम के साथ ही दुकान लगाएँगे ताकि किसी भी प्रकार से भक्तों को असुविधा ना हो। 

इतना ही नहीं केंद्र में मोदी सरकार को हलाल प्रमाणित उत्पादों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए। इस हलाल प्रमाण पर हो रही कमाई कहां जा रही है? उस कमाई का कहां इस्तेमाल हो रहा है?

और, यह नियम किसी एक मजहब के लिए नहीं बल्कि प्रत्येक दुकानदार के लिए है। क्योंकि, कई बार इस बात को देखा गया है कि तीर्थयात्री काँवड़िए वहाँ पर जाकर भोजन तो कर लेते हैं लेकिन बाद में पता लगता है कि यह तो कोई ‘थूक नान’ स्पेशलिस्ट वालों का ढाबा था। मुजफ्फरनगर प्रशासन के इसी नियम पर बहुत सारे ऐसे सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि मुस्लिम लोगों द्वारा अपने ढाबों पर बनाए जाने वाले खानों में थूकने के कई वीडियो सामने आए हैं।

जब थूक वीडियो चल रहे थे, तब मुस्लिम कट्टरपंथी और विपक्ष क्यों चुप बैठा रहा?

हमने रोटियों पर थूकते हुए कई वीडियो देखे हैं। आम पर पेशाब करते हुए मुहम्मदिनों को कौन नहीं जानता है? खीरों को थूक में लपेटकर पॉलिथीन में भरने वाली वीडियो अभी हमारी आँखों के सामने आ जाती है तो मन में घृणा पैदा हो जाती है। बर्तनों को चाटने वाले वीडियो, सब्जियों को नाली में धोने वाले वीडियो, हिंदू बहुल क्षेत्र में गौमांस के समोसे खिलौने वाले दीनी व्यक्ति के वीडियो। दूध में थूकने वाले दीन के पक्के दूधिए का वीडियो। होटल में काम करने वाले मुस्लिम लड़कों द्वारा भोजन पर थूकने वाले वीडियो। दिल्ली का वह वीडियो जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति पानी की बोतलों में थूक रहा है।

एक बूढ़े बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति द्वारा सेबों पर थूकने वाला वीडियो या फिर इसी प्रकार कपड़ों पर इस्त्री करने वाले बुजुर्ग का वह वीडियो जिसमें वह मुँह में पानी भरकर कपड़ों पर थूक रहा है। या फिर ड्राई फ्रूट्स के ऊपर ऐसे ही मुँह में पानी भरकर छिड़काव करता अधेड़ नमाजी हो। या वह छोटे बच्चों का वीडियो जिसमें वह लोग उज्जैन महाकाल की यात्रा के ऊपर थूक रहे हैं। ऐसे तमाम वीडियो हमें बताते हैं कि किस प्रकार हिंदुओं को अपना जूठा खिलाने की सड़ी हुई घिनौनी मानसिकता इस रेगिस्तानी कैंसर रूपी कल्ट के दिमाग में पनपती रहती है।

इसके अलावा काँवड़ियों पर हमला करना, उनके ऊपर थूकना, भगवान शिव के पूरे परिवार पर आपत्तिजनक फब्तियाँ कसना, काँवड़ियों के रास्ते में मांस के लोथडे फेंकना – यह सब घटनाएँ बहुत आम है। हम अभी रियासी की घटना भूले नहीं जिसमें 6000 रुपए के लिए 9 देवी भक्तों की जान लेने वाला इसी कैंसर रूपी मजहब का व्यक्ति था। गद्दार पुलिस अधिकारी DSP शेख आदिल मुस्ताक जो भारत की सुरक्षा की शपथ लेकर आतंकवादियों को हमारी सेना की सभी जानकारियां देता रहता था और किस प्रकार कानून के हाथों से बचना चाहिए वह सब हथकंडे भी आतंकवादियों को बताता था।

आज उसी के कारण हमारे सेना के अधिकारी और जवान बलिदान हुए। और यह लोग सोचते हैं कि हम फिर भी इन्हें अपना भाई माने और उनके थूक नान खाएँ, गौंमांस मिश्रित समोसे खाएँ और जब यह हमारी बहन बेटियों को छेड़े, हमारे भाइयों पर हमला करें तो हम चुपचाप अपने घर के ऊपर यह लिखकर भाग जाएँ कि यह मकान बिकाऊ है। अब थोड़ी विवेचना उन ढाबों पर भी करते हैं जहाँ यह लोग हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट करने का पूरा षड्यंत्र चलाते होंगे अन्यथा अगर किसी को उनके ढाबे या होटल में खाना है तो वह वैसे भी चला जाएगा लेकिन नाम बदलकर ठीक उसी प्रकार से धोखा दिया जाता है जिस प्रकार ‘लव जिहाद’ करने वाला अब्दुल हिंदू बहन बेटियों को धोखे में रखकर उनका मजहब परिवर्तित करता है।

अभी कुछ दिन पहले ही लखनऊ के एक व्यापारी के साथ घटी दुर्घटना सामने आई थी जिसमें हिंदू व्यापारी ने एक मुस्लिम व्यक्ति को अपने यहाँ नौकर रखा था और इस नौकर ने व्यापारी की इकलौती बेटी के बाथरूम में कैमरा लगाकर उसके वीडियो बनाए और फिर उसे काफी लंबे समय तक ब्लैकमेल करता रहा था। अभी उसे घटना को बीते ज्यादा समय नहीं हुआ एक और घटना हमारे सामने है बिहार के VIP पार्टी के संस्थापक व पूर्व मंत्री मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी का केस नया ताजा ही है।

जीतन ने ताउम्र हिंदू-मुस्लिम एकता की बात की, उन्होंने हिंदुओं को भले ही पीछे धकेल दिया लेकिन मुस्लिमों को हमेशा प्राथमिकता पर रखा, इसी के चलते जीतन ने एक नौकर रखा हुआ था जिसका नाम था काजिम अंसारी। पिछले दिनों काजिम ने जतन से डेढ़ लाख रूपए उधार लिए थे समय से न लौटने पर जीतन ने उसे बीच-बीच में कई बार पैसे वापस करने के लिए टोका जिससे काजिम को गुस्सा आ गया और वह अपने साथियों को लेकर एक रात जीतन के घर में घुस गया और उसके साथ वही हश्र किया जैसा काजिम हर बकरा ईद पर एक बकरे के साथ किया करता है।

अर्थात, तुम लोग उन्हें भाई मानकर गरीब मानकर मजलूम मानकर नौकरी पर तो रखते हो लेकिन उनकी नजर या तो तुम्हारी बेटियों पर होती है या फिर तुम्हारे धन ऐश्वर्य और पैसे पर होती है। फिर ऐसे में सामान्य लोग जो यह खबरें सुनते और पढ़ते हैं या अपने आस पड़ोस में ऐसी घटनाओं को होते हुए देखते हैं क्या वह उनके हाथ का पानी भी पीना मंजूर करेंगे ऐसे में इन लोगों ने कैसे सोच लिया कि शिव भक्त और भोजन में पवित्रता रखने वाले लोग उनके हाथ का थूका हुआ खाना खाएँगे या फिर मांस मिश्रित पकवान ग्रहण करेंगे?

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ‘जनता वैष्णो ढाबा’ चलता है। लोग सोचते हैं कि यह कोई शाकाहारी ढाबा है जिसका मालिक कोई हिंदू होगा। लेकिन 15 साल से चल रहे इस ढाबे का मालिक मोहम्मद अनस सिद्की है। आगरा मथुरा रोड पर ‘श्री खाटू श्याम ढाबा’ वर्षों से चल रहा है। लोग धोखे में यहां पर शुद्ध शाकाहारी भोजन खोजते हुए पहुँच जाते हैं जबकि इसके मालिक का नाम मोहम्मद इरशाद है। बरेली में ‘चौधरी स्वीट्स’ के मालिक का नाम अहमद मियाँ है।

अब तो ‘अग्रवाल स्वीट्स’ के मालिक भी मुस्लिम बने बैठे हैं जहाँ से हिंदू बड़े चाव से अपने मनपसंद व्यंजन खरीदना है जबकि उसे पता ही नहीं किस में कितने मोमिनो का थूक मिला हुआ है। बिहार में चलने वाली एक दुकान जिसका नाम ‘अर्जुन सिंह’ था यहाँ पर इसका मालिक मोहम्मद उजियार आलम निकला जो हिंदू बनकर अपनी दुकान पर हिंदू लड़कियों से छेड़छाड़ किया करता था। हरिद्वार रोड पर ‘न्यू गणपति टूरिस्ट ढाबा’ चलता है जिसका मालिक मोहम्मद वसीम है।

मुजफ्फरनगर के हाईवे NH 58 पर स्थित ‘ओम शिव वैष्णव ढाबा’ चलता है जिसका मालिक मोहम्मद आदिल है। खुलासा होने के बाद आजकल इसने अपने ढाबे का नाम बदलकर ‘वेलकम टू पिकनिक पॉइंट टूरिस्ट ढाबा’ कर दिया है। हर की पैड़ी पर बहुत सारे भोजनालय चलते हैं जबकि उनके मालिक भी मुस्लिम है। इसी प्रकार एक आरोपी को जब पकड़ा गया तो उसने अपना नाम चुन्नू बताया लेकिन आधार कार्ड पर देखने के बाद पता लगता है कि इसके अब्बा का नाम मोहम्मद मुनीर था, जबकि नगर निगम के उप नियमों के अनुसार हर की पैड़ी क्षेत्र में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।

खतौली में ‘शिव पंजाबी ढाबा’ चलता है जिसका मालिक भी मुस्लिम ही निकला। दिल्ली के किशनगंज बाजार में एक मुस्लिम युवक द्वारा राम मीट शॉप खोली गई बाद में खुलासा होने पर यह भी विक्टिम कार्ड खेलने लगा। उत्तर प्रदेश में ही राज मेहंदी स्टोर के नाम से बहुत सी दुकान चलती हैं जो हिंदू बहुल क्षेत्र में जानबूझकर खोली जाती हैं और हिंदू लड़कियों को मेहंदी लगाने के नाम पर खुल्लम-खुल्ला ‘लव जिहाद’ को प्रमोट करते हैं।

मथुरा में ताजमहल नाम से एक होटल चलता है जिसका मालिक जमील अहमद है जबकि मथुरा के मंदिर एरिया में नॉनवेज की बिक्री प्रतिबंधित है। लेकिन नाम बदलकर यह लोग नॉनवेज का धंधा भी चलाते हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ‘श्री लक्ष्मी शुद्ध फैमिली ढाबा’ दिखाई दे रहा था जबकि इसका मालिक मोहम्मद शमशेर था। धार मध्य प्रदेश में हिंदू देवता साँवड़िया के नाम से मोहम्मद इलियास दुकान चलाता था।

अब एक बात सोचिए कि जब एक मुस्लिम झटके का मीट नहीं खा सकता, जब एक मौलाना अपनी भीड़ को यह कह रहा है कि तुम हिंदुओं की पूजा पाठ का प्रसाद मत खाओ यह हमारे दीन में हराम है पाप है। जब वह लोग टूथपेस्ट से लेकर चड्डी-बनियान, भोजन और साबुन-शैंपू व कपड़े, यहाँ तक की टूरिज्म भी हलाल सर्टिफाइड ही इस्तेमाल करते हैं ताकि इनकी अर्थव्यवस्था, इस्लामी अर्थव्यवस्था मजबूत हो और ये लोग यहाँ पर पूरी तरह कब्जा कर सके।

ये लोग जो भी हमसे कमाते हैं उससे ही तो इनकी आर्थिक व्यवस्था और स्थिति मजबूत होती है, उसी का इस्तेमाल ये हमारे खिलाफ करते हैं तो फिर हिंदू क्यों मजबूर हो कि वह उनके हाथ का खाए। ईद के दौरान मुस्लिम घूम-घूम कर अपनी कम्युनिटी में कहते हैं कि वो सिर्फ मुस्लिमों की दुकानों से ही सामान खरीदे, हिंदुओं की दुकान से सामान ना खरीदें। जब उस पर किसी को कोई एतराज नहीं है तो फिर इन चीजों पर क्यों ऐतराज़ है? जिनके कारण अब तक काँवड़ यात्रा के दौरान काफी सारे सांप्रदायिक झगड़े पनप चुके हैं क्योंकि काँवड़िया यह सोचकर किसी भोजनालय में प्रवेश करता है कि यह किसी हिंदू का होगा लेकिन जैसे कि वीडियो की शुरुआत में ही बताया कि कई ऐसे उदाहरण है कि यह लोग हमारे धर्म के खिलाफ काम करते हैं, हमारे लोगों को जूठा खिलाते हैं, हमारे लोगों को पूज्य गाय माता का मांस खिलाते हैं हमारी बहन-बेटियों को झूठा नाम बात कर ‘लव जिहाद’ करते हैं, और उनको इस्लाम में कन्वर्ट करते हैं।

यही लोग हिंदुओं के घरों में पहले नौकरी करते हैं और फिर उनकी बहन बेटियों के बाथरूम में कैमरा लगाकर वीडियो बनाते हैं उन्हें ब्लैकमेल करते हैं तो फिर जब एक शिव भक्त को पता लगेगा कि इसका असली मालिक एक मुस्लिम है तो क्या वह प्रतिक्रिया नहीं देगा। झूठ बोलकर व्यापार क्यों करना है हिंदुओं के साथ? इस बात पर कोई बात नहीं कर रहा है। इसी कारण फिर झगड़ा होते हैं और फिर यही अब्दुल जो वैष्णो देवी के नाम से ढाबा खोल कर बैठा है यही फिर विलाप करता है। किसी ने सोशल मीडिया पर मुजफ्फरनगर पुलिस के इस आदेश की मुखालफत करते हुए कहा कि हमारे मुस्लिम देशों में भी हिंदू जाते हैं वहाँ पर वह लोग व्यापार करते हैं लेकिन उनके साथ तो ऐसा नहीं होता लेकिन सवाल यह है कि क्या हिंदू लोग मक्का-मदीना या हिजरत के रास्ते में ढाबे खोलकर बैठे हुए हैं क्या उन्होंने हाजियों को कभी धोखा हुआ खिलाया क्या उन्होंने कभी हजरत करने वालों को थूक कर पानी पिलाया?

यह सब तो छोड़िए, हिंदू जिनको कि मुस्लिम की किताबों में काफिर प्रजाति बताया गया है वह लोग तो उसे रास्ते पर भी कम नहीं रख सकते, मक्का मदीना की तो बात ही छोड़ दो और यही नहीं भारत के मुस्लिम भी इस बात का पक्ष लेते हैं कि जब हिंदू इस्लाम को मानते नहीं या फिर उनकी आस्था हमारे मजहब में नहीं है तो फिर वह उसे स्थान पर जाएँ ही क्यों? वही भारतीय मुस्लिम आज दोगलेपन की हद मचाकर रोना-पीटना मचा रहा है?

क्या यह लोग कभी खुद को आईने में नहीं देखते? क्यों उनके भोजन में थूकते हैं? या फिर इस्लाम में अभक्ष्य जानवर के गोश्त के समोसे उनको खिलाते हैं? इन बातों का जवाब किसी के पास नहीं होता। ये लोग सिर्फ विरोध करने के लिए पैदा हुए हैं। ये लोग सिर्फ हिंदुओं के देवी-देवताओं को गाली देने के लिए पैदा हुए हैं।

और अगर कोई इनको इन्हीं की दवाई चखा दे तो फिर इनका रोना स्टार्ट हो जाता है। संविधान से पहले कुरान बताने वाले देश से पहले इस्लाम बताने वाले आज सही सुनता और भाईचारा पर बड़े-बड़े भाषण दे रहे हैं तो ऐसा लगता है जैसे इनकी फूफी मियाँ खलीफा ब्रह्मचर्य पर तकरीर कर रही हो। मेरा तो बस इसे इतना ही कहना है कि तुमको हिन्दू नामों से, भगवानों से इतना ही प्यार है तो क्यों नहीं तुम हिन्दू ही बन जाते हो घर-वापसी कर के? सारा झगड़ा ही खतम हो जाएगा।

हर साल ‘शिव ढाबे’ वाला सलमान भी काँवड़ लेकर जाए, ‘शिव शक्ति ढाबे’ वाला शाहरूख घर में जगराता करवाए और वैष्णो ढाबे वाला जफरूल अपने घर हवन करवाए। जगह-जगह पर काँवड़ियों के लिए जल के प्याऊ लगवाए जैसे हिंदू उनके लिए निशुल्क भंडारे और छोटे-छोटे चिकित्सालय खुलवाते हैं। उससे भी अधिक पवित्रता के साथ भोजन परोसने का इंतजाम करवाए तो कितना अच्छा भाईचारे का माहौल बने और हिंदू चाह कर भी इनके ढाबों का विरोध ना कर पाए।

अवलोकन करें:-

18 साल बाद कानून लागू होने पर ‘संगम शुद्ध शाकाहारी ढाबा’ बना ‘सलीम ढाबा’, ‘चाय लवर प्वॉइंट’ हो गय

या फिर यह भाईचारा केवल तभी बनता है जब कोई पुजारी अपने मंदिर में इफ्तारी पार्टी करवाता है या फिर हिंदू जालीदार टोपी पहनकर ईद की मुबारकबाद देता घूमता है या फिर एंबुलेंस और स्कूल बसें एक साइड रोक कर इनकी नमाज के लिए सड़क पर जगह देता है। हिंदू समाज आज उस दोगलेपन को जानना चाहता है जिसके तहत हमारी आस्था का मजाक बनाना और फिर हमसे ही पैसा कमाना… सिर्फ यही उन्हें अच्छा लगता है। 

18 साल बाद कानून लागू होने पर ‘संगम शुद्ध शाकाहारी ढाबा’ बना ‘सलीम ढाबा’, ‘चाय लवर प्वॉइंट’ हो गया ‘वकील अहमद टी-स्टॉल’; गाली खा रहे योगी और मोदी

एक बहुत पुरानी कहावत है कि चोर आईने में अपनी ही शक्ल देख डरने लगता है। ठीक वही हालत कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन का है। दुकानों और ढाबों पर मालिक का नाम लिखे जाने के कानून को उत्तर प्रदेश पुलिस या योगी आदित्यनाथ का नहीं, बल्कि 2006 में सोनिया गाँधी की सलाहकार समिति द्वारा बनाए इस कानून पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी मोहर लगाई थी, जनता गुमराह हो गयी कि सरकार जनता की कितनी चिंता करती है। लेकिन कानून बनाकर ठंठे बस्ते में डाल दिया, गुमराह हुई जनता भी कहीं गुम हो गयी। अब जब उसी कानून को लागू जमीन पर लाए जाने पर वही कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन ही विरोध कर रही है। अब कोई इनसे पूछे कि कानून पाखंड को बेनकाब करने वाला था तो बनाया ही क्यों था? कानून में सिर्फ नाम ही नहीं और बहुत कुछ सार्वजनिक करने को कहा गया है। केंद्र सरकार को इस कानून को पूरे देश में लागू करना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने कांवड़ यात्रा रूट पर खाने-पीने की सभी दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का आदेश जारी किया। 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले मुजफ्फरनगर जिले के सभी दुकानदारों, ढाबों, फल विक्रेताओं और चाय की दुकानों ने प्रशासन के निर्देशानुसार अपने प्रतिष्ठानों या वेंडिंग ठेलों पर मालिकों या कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस निर्देश का उद्देश्य धार्मिक यात्रा के दौरान भ्रम से बचना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। लेकिन प्रशासन के इस कदम से तुष्टिकरण के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन सहित लेफ्ट लिबरल गैंग को मिर्ची लग गई। यहां तक कि इस पहल को विवाद बनाने में जावेद अख्तर जैसे बुद्धिजीवी भी कूद पड़े हैं। जावेद अख्तर ने इसकी तुलना जर्मनी के नाजी शासन से कर डाली और कहा कि नाजी शासन में दुकानों पर निशान लगते थे। इनका दोगलापन देखिए कि खुद के लिए ‘हलाल’ सिस्टम चाहिए, लेकिन कांवड़ रूट पर ‘पहचान’ सिस्टम से भी परेशानी हो रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में काँवड़ यात्रा मार्ग पर के दुकानदारों को अपने दुकान पर नाम लिखना होगा। इसके पहले मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने जिले के लिए यह आदेश जारी किया था। इसके बाद इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था। हालाँकि, सीएम योगी के आदेश के बाद अब काँवड़ मार्ग पर काफी कुछ बदला हुआ नजर आने लगा है।

मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।

इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।

दिल्ली-देहरादून हाइवे पर ही स्थित ‘साक्षी होटल’ के मालिक लोकेश भारती ने बताया, “कल हमारे पास दो पुलिस वाले आए और कहा कि दुकान के आगे नाम लिखना है। इसके साथ ही होटल में काम करने वाले कर्मचारियों के भी नाम डिस्प्ले होना चाहिए। पुलिस के आदेश के बाद हमने दुकान पर काम करने वाले चार मुस्लिमों को फिलहाल हटा दिया है।”

दरअसल, काँवड़ यात्रियों की आस्था एवं शुद्धता की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह सभी दुकानों, ढाबों, होटलों और ठेला वालों को आदेश दिया है कि वे अपनी दुकान के बाहर एक सूची लटकाएँ। उस पर दुकान के मालिक और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों का नाम अंकित हो। इस आदेश के बाद कई दुकानों के नाम बदल गए।

आदेश हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। आदेश में सभी दुकानों, ढाबा, ठेलों पर अपना नाम लिखना होगा, ताकि काँवड़ यात्री जान सकें कि वो किस दुकान से सामान खरीद रहे हैं। बता दें कि काँवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु शुद्धता को लेकर खानपान में काफी परहेज करते हैं। इसको लेकर ही योगी सरकार ने यह कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में बड़ी संख्या में काँवड़ में गंगाजल भरने के लिए काँवडिये आते हैं। इसको देखते हुए हरिद्वार के SSP ने आदेश दिया है कि जिले में सभी काँवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह आदेश हरिद्वार के SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने दिया है।

SSP के अनुसार, जिले में जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में इस आदेश का राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किए जाने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लोग पहचान छिपाकर धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र करते हैं। देवी-देवताओं के नाम पर ऐसा नहीं होना चाहिए। खतौली के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता विक्रम सैनी ने कहा है कि मुस्लिम के ढाबों में लहसुन-प्याज का प्रयोग होता है, जबकि इस दौरान शिवभक्त इससे परहेज रखते हैं। 

काँवड़ यात्रा पर किसी भी हमले के लिए मोहम्मद जुबैर होगा जिम्मेदार: यशवीर महाराज ने ‘सेकुलर’-इस्लामी रुदालियों पर बोला हमला, ढाबों मालिकों की सूची लगाने का दिया गया था निर्देश

                             यशवीर महाराज/मोहम्मद जुबैर (फोटो साभार : X/Yashveer Maharaj/File)
स्वामी यशवीर महाराज ने 18 जुलाई 2024 को एक  वीडियो बयान जारी कर इस्लामिक कट्टरपंथियों और तथाकथित ‘सेकुलरों’ को आड़े हाथों लिया, जो यूपी के मुजफ्फरनगर के काँवड़ रूट पर दुकानों और ठेलों पर उनके मालिकों के नाम लिखने के मुजफ्फरनगर पुलिस के निर्देश का विरोध कर रहे हैं।

काँवड़ यात्रियों के बीच दुकानों के मालिक को लेकर किसी तरह के भ्रम की स्थिति न हो, इसके लिए ये निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि लंबे समय से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम का इस्तेमाल कर होटल, दुकानें, ढाबे और फल के ठेले चला रहे हैं। यशवीर महाराज लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।

स्वामी यशवीर महाराज ने वीडियो में कहा, “हमने सवाल उठाए कि मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग पर खाने-पीने की दुकानें, फलों के ठेले आदि चलाने वाले मुस्लिम दुकानदार अपनी दुकानों के नाम हिंदू देवी-देवताओं के नामों पर क्यों रखते हैं। जब हमने माँग की कि सभी दुकानों और ठेलों पर मालिकों/कर्मचारियों के नाम बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखे होने चाहिए, तो पुलिस ने हमारी माँग मान ली और इसके लिए निर्देश जारी कर दिए। दुकानदार निर्देशों के अनुसार मालिकों के नाम मोटे अक्षरों में लिख रहे हैं। हालाँकि ओवैसी जैसे कट्टरपंथी पुलिस के निर्देशों पर आपत्ति जता रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “एक तथाकथित पत्रकार है, मोहम्मद जुबैर। यह वही मोहम्मद जुबैर है जिसने अपनी पोस्ट से मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काया और वह कई बार जेल जा चुका है। उस पर कई मुकदमे चल रहे हैं। मुजफ्फरनगर में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। इसलिए मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि किसी काँवड़ यात्री के साथ कोई दुर्घटना न हो। अगर किसी काँवड़ यात्री को कुछ होता है, तो उसके लिए मोहम्मद जुबैर को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इसलिए, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसके खातों की भी जाँच की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि उसे विदेशी फंडिंग तो नहीं मिल रही है।”

स्वामी ने आगे कहा, “जो कट्टरपंथी और सेकुलर लोग पुलिस के निर्देशों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि अगर हिंदू उनके होटल में खाना खाते रहेंगे, जिस पर थूका गया हो, पेशाब किया गया हो और गोमाँस मिला हो, तो यह (उनके लिए) ठीक है, लेकिन अगर वे (हिंदू) विरोध करते हैं, तो यह एक समस्या बन जाती है और वे (कट्टरपंथी और सेकुलर) इसके खिलाफ अभियान शुरू कर देते हैं। हमें मुस्लिमों के होटलों और ढाबों से कोई समस्या नहीं है। वो उन्हें चलाने के लिए आजाद हैं लेकिन उन्हें हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर और हिंदुओं के भ्रामक नामों पर चलाने की जगह अपने नाम से दुकानें चलानी चाहिए। अगर किसी को लगता है कि पहले जैसे ही सबकुछ चलता रहेगा, तो ऐसा नहीं होने वाला।हम इसे कम से कम मुजफ्फरनगर में जारी नहीं रहने देंगे। अगर कोई ऐसा करना जारी रखने की कोशिश करता है, तो हम इसके खिलाफ आवाज उठाकर इसे रोकेंगे।” इस दौरान उन्होंने काँवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश देने के लिए पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

दुकानों और ठेलों पर लिखे जाएँ मालिकों के नाम: पुलिस

इस साल काँवड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगी। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थानीय प्रशासन ने आदेश जारी कर होटल , ढाबे और खाने-पीने का सामान बेचने वाले ठेलों पर दुकान या ठेला चलाने वाले मालिक और संचालक का नाम लिखने को कहा है। हालाँकि, कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और इस्लामिस्टों ने धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने मीडिया को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने प्रशासन के फैसले के बारे में जानकारी साझा की। मीडिया चैनलों से बात करते हुए एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा कि काँवड़ यात्रा के निशान पर आने वाले ढाबों, होटलों, भोजनालयों और खाद्य सामग्री बेचने वाले ठेलों को मालिकों और संचालकों के नाम लिखने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इससे कांवड़ियों के लिए भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा और बहस या टकराव से बचा जा सकेगा और साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोजनालयों ने अपनी मर्जी से आदेश का पालन करना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि काँवड़ यात्रियों को सामान खरीदने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है और वे कहीं से भी खरीदारी करने के लिए स्वतंत्र हैं। 
   

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 मुस्लिमों के दुकानों के भ्रामक नामों के खिलाफ यशवीर महाराज का अभियान
पिछले साल काँवड़ यात्रा के दौरान और इस साल की यात्रा से पहले स्वामी यशवीर महाराज ने गंभीर आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में मुस्लिम ढाबे मालिकों ने अपनी पहचान छिपाकर फर्जी हिंदू नामों वाले पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि काँवड़ यात्रा के मार्गों पर मुस्लिम ढाबे वालों ने पोस्टर लगाए हैं। इसे देखते हुए स्वामी यशवीर महाराज ने माँग की है कि प्रशासन ढाबे मालिकों से अपने मालिकों या संचालकों के नाम बोर्ड पर लिखने के लिए कहे।
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा , “काँवड़ यात्रा के दौरान एक समुदाय विशेष के कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाते हैं, जिससे शिवभक्त कांवड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुँचने की आशंका है। हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाने वाले समुदाय विशेष के लोगों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। पुलिस को इसके लिए अभियान चलाना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर एक सप्ताह के भीतर प्रशासन इस मामले में कार्रवाई नहीं करता है तो वे विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।

इस मुद्दे पर बवाल काट रहे इस्लामिक कट्टरपंथी

प्रशासन का ये आदेश ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद आया है, जिसमें मुस्लिम दुकानदारों के काँवड़ियों के धोखा देने के आरोप लगे। वो सावन के पवित्र महीने में नकली नामों वाले ढाबों, फलों के ठेलों, होटलों में व्रत के नियमों के विपरीत खाना खिलाकर भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने ये आदेश जारी किया है कि दुकानों, ढाबों के मालिकों को अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखना होगा। क्योंकि ऐसे मामलों में टकराव होने से कानून व्यवस्था की स्थिति खड़ी हो जाती है। हालाँकि, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ये आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया कि दुकान के मालिक का नाम लिखना “धार्मिक भेदभाव” है।
मोहम्मद जुबैर, जो खुद को फैक्ट चेकर कहता है, लेकिन वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फैक्ट चेक की ओट लेता है। उसने इस आदेश को खतरनाक बताते हुए ‘धार्मिक भेदभाव’ करार दिया था। इसके अलावा एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तो एक कदम आगे बढ़कर इसकी तुलना दक्षिण अफ्रीका के “रंगभेद” और जर्मनी के “यहूदी बहिष्कार” से कर दी।(साभार)

2 साल के कोरोना ब्रेक के बाद हुई काँवड़ यात्रा पर कहीं मांस फेंका, कहीं थूका, कहीं औरतों ने चारपाई डाल रोका रास्ता

 काँवड़ियों पर कहीं थूका गया, तो कहीं मांस फेंका गया, कोई खाट लगाकर रास्ते में अड़ा, किसी को पुष्प वर्षा से लगी मिर्ची
इस वर्ष (2022) की काँवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह कोविड -19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद पूरे उत्साह के साथ हो रही है। पूरे भारत में लाखों काँवड़िया माँ गंगा की जलधारा से जलभरकर उसे भगवान महादेव को अर्पित करने के लिए कठिन यात्रा कर रहे हैं। इस बीच ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ किसी को मिर्ची लगी तो, कहीं काँवड़ियों पर हमले किए गए, उन पर मांस फेंके गए तो कहीं आतंकी हमले की धमकी भी आई। किसी भी #intolerance, #award vapsi, #not in my name, #mob lynching और गंगा-जमुनी तहजीब आदि अन्य गैंग की आवाज़ नहीं निकली, क्यों? कब तक पाखंड का ये नंगा नाच किया जाता रहेगा? ऐसी ही कुछ घटनाओं पर हम यहाँ संक्षेप में बात करेंगे।

कांवड़ यात्रा में अवरोध, रामनवमी जुलुस पर पथराव आदि होने के कारण हिन्दुओं में चर्चा है कि 'जब सरकार मंदिरों के चढ़ावे को अपने नियंत्रण में ले सकती है, फिर मस्जिदों और दरगाहों की कमाई पर नियंत्रण क्यों नहीं? किस आधार पर उन्हें मुक्त किया हुआ है? जामा मस्जिद, निजामुद्दीन दरगाह और अजमेर दरगाह आदि की एक दिन की कमाई सुनकर सब हैरान हो जाएंगे। कहाँ खर्च हो रहा है इतना धन? कौन रखता है इसका हिसाब? क्या सारे कानून और संविधान की शर्तें हिन्दुओं पर ही लागु होंगी? अगर सरकार मस्जिदों और दरगाहों की कमाई को नियंत्रण में ले ले, वक्फ बोर्ड को शायद कोई अनुदान देने की जरुरत न पड़े।' 

काँवड़ यात्रा में महंत की रेकी कर रहा था नाजिम

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में काँवड़ यात्रा के दौरान काँवड़ियों की भीड़ में से एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित का नाम नाज़िम है, जो मेरठ का ही रहने वाला है। उस पर काँवड़ यात्रा में चल रहे महंत मछेन्द्रपुरी की रेकी करने और किसी और को उनकी जानकारी देने का आरोप है। हालाँकि, इस मामले में काँवड़ियों ने नाज़िम को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। घटना 24 जुलाई 2022 (रविवार) की है। इस घटना की पुलिस में शिकायत महंत मछेन्द्र पुरी के शिष्य ब्रह्मानन्द पुरी ने दर्ज करवाई है।

कांग्रेस नेता ने की विवादित टिप्पणी

कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक रितु चौधरी ने 17 जुलाई को कहा, “किताबें उठाइए, काँवड़ उठाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।”
हालाँकि, रितु चौधरी के ट्वीट के बाद, लोगों ने उनकी टिप्पणियों की आलोचना की और सवाल किया कि वह और उनकी पार्टी हिंदुओं और सनातन धर्म से जुड़ी परंपराओं से नफरत क्यों करती हैं। एक यूजर ने उनसे यह कहने के लिए भी कहा, “एक किताब उठाओ, आपको हज नहीं जाना पड़ेगा।” अगर उनमें हिम्मत है। वैसे जैसे ही विवाद गर्माया, उन्होंने बिना किसी माफी के ट्वीट को चुपचाप डिलीट कर दिया।

काँवड़ियों पर पुष्प वर्षा से बरखा दत्त को लगी मिर्ची

सावन के महीने में काँवड़िए बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए कोई हरिद्वार तो कोई काशी निकल पड़ा है। हरिद्वार में उन पर पुष्प वर्षा भी हो रही है। इस बीच NDTV की पूर्व पत्रकार और मोजो न्यूज़ की संपादक, बरखा दत्त को पुष्प वर्षा से मिर्ची लगी है। उन्होंने ट्विटर पर इसमें प्रशासन की संलिप्तता का विरोध किया है।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “राज्य के अधिकारियों के लिए काँवड़ियों पर पंखुड़ियों की बौछार करना लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पर आपत्ति जताना कैसे ठीक है? मैं साझा सार्वजनिक स्थानों पर फैले धर्म की प्रशंसक नहीं हूँ, लेकिन यह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है।”

काँवड़ यात्रा पर फेंका गया मांस

19 जुलाई को दिल्ली के मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके में हरिद्वार से राजस्थान जा रहे काँवड़ यात्रा पर किसी ने मांस का टुकड़ा फेंक दिया। घटना शाम के वक्त हुई, जिसके बाद काँवड़ यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने एक घंटे तक सड़क जाम कर दिया। बता दें कि हरिद्वार से दिल्ली पहुँचने में इन काँवड़ियों को सात दिन का समय लगा था। लेकिन दिल्ली में उनका स्वागत मांस के टुकड़े के साथ हुआ।
ऑपइंडिया से बात करते हुए, काँवड़ियों ने कहा कि उन्हें मांस के टुकड़े के बारे में तब पता चला जब एक कंधे से दूसरे कंधे पर काँवड़ बदल रहे थे।

काँवड़ियों से भरी सड़क पर नमाज पढ़ने वाले 8 मुस्लिम गिरफ्तार

पुलिस को उत्तराखंड के शिवालिकपुर नगर, रानीपुर और हरिद्वार में नमाज अदा करने वाले मुस्लिम पुरुषों के एक समूह के बारे में सूचना मिली। जब वे नमाज अदा कर रहे थे तभी उस रास्ते से काँवड़ियों का एक बड़ा जत्था गुजर रहा था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी आठ नमाजी दुकानदार थे। उन पर कानून-व्यवस्था भंग करने का मामला दर्ज किया गया था।

मुस्लिमों ने मेरठ में काँवड़ियों पर थूका

यूपी के मेरठ में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिए मुस्लिम समुदायके युवकों ने काँवड़ियों पर थूक दिया। इससे काँवड़िए भड़क गए और युवक को जमकर कर पीट दिया। बाद में पुलिस ने मामले को शांत कराया। घटना 22 जुलाई को मेरठ में हुई। घटना के बाद काँवड़ियों ने सड़क जाम कर पुलिस से कार्रवाई की माँग की।
22 जुलाई 2022 को कुछ काँवड़िए अपने काँवड़ को रखकर शिविर में आराम कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के दो युवक बाइक से आए और काँवड़ पर थूकने का प्रयास किया। आगे चलकर इनमें से एक युवक बाइक से उतरा और काँवड़ पर थूक कर अपवित्र कर दिया।
जब काँवड़ियों ने इन्हें देखा तो एक को पकड़ लिया, जबकि दूसरा भाग गया। पकड़ने के बाद काँवड़ियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुँचकर आरोपित को भीड़ से छुड़ाकर अपने साथ लेकर चली गई।

इब्राहिमपुर में मुस्लिम महिलाओं ने काँवड़ियों का रास्ता रोका

ताजा घटना मुरादाबाद के इब्राहिमपुर गाँव की है। जहाँ मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने काँवड़ियों को इब्राहिमपुर में आगे बढ़ने से चारपाई लगाकर रोक दिया। उन्होंने सड़क पर खाट बिछा दी और माँग की कि काँवड़िए वापस जाएँ और निर्धारित मार्ग का पालन करें। यहाँ, महिलाओं ने जिन काँवड़ियों को रोका, वे उसी इब्राहिमपुर गाँव के ही थे।
हालाँकि, इस मामले में पुलिस ने आकर दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। महिलाओं ने दावा किया कि काँवड़िए मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में प्रवेश करने का एक नया चलन शुरू कर रहे हैं, और वे उन्हें वहाँ से नहीं जाने देंगे। दूसरी ओर, काँवड़ियों ने कहा कि वे एक ही गाँव के हैं। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और बुजुर्गों ने एक पंचायत की और जिसके बाद काँवड़ियों को वहाँ से गुजरने दिया।

काँवड़ियों पर हुए आतंकी हमले के इनपुट्स

काँवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सतर्क रहने को कहा था क्योंकि तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमले की सूचना भी मिली थी।