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18 साल बाद कानून लागू होने पर ‘संगम शुद्ध शाकाहारी ढाबा’ बना ‘सलीम ढाबा’, ‘चाय लवर प्वॉइंट’ हो गया ‘वकील अहमद टी-स्टॉल’; गाली खा रहे योगी और मोदी

एक बहुत पुरानी कहावत है कि चोर आईने में अपनी ही शक्ल देख डरने लगता है। ठीक वही हालत कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन का है। दुकानों और ढाबों पर मालिक का नाम लिखे जाने के कानून को उत्तर प्रदेश पुलिस या योगी आदित्यनाथ का नहीं, बल्कि 2006 में सोनिया गाँधी की सलाहकार समिति द्वारा बनाए इस कानून पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी मोहर लगाई थी, जनता गुमराह हो गयी कि सरकार जनता की कितनी चिंता करती है। लेकिन कानून बनाकर ठंठे बस्ते में डाल दिया, गुमराह हुई जनता भी कहीं गुम हो गयी। अब जब उसी कानून को लागू जमीन पर लाए जाने पर वही कांग्रेस और उसकी I.N.D.I. गठबंधन ही विरोध कर रही है। अब कोई इनसे पूछे कि कानून पाखंड को बेनकाब करने वाला था तो बनाया ही क्यों था? कानून में सिर्फ नाम ही नहीं और बहुत कुछ सार्वजनिक करने को कहा गया है। केंद्र सरकार को इस कानून को पूरे देश में लागू करना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने कांवड़ यात्रा रूट पर खाने-पीने की सभी दुकानों पर मालिकों का नाम लिखने का आदेश जारी किया। 22 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले मुजफ्फरनगर जिले के सभी दुकानदारों, ढाबों, फल विक्रेताओं और चाय की दुकानों ने प्रशासन के निर्देशानुसार अपने प्रतिष्ठानों या वेंडिंग ठेलों पर मालिकों या कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस निर्देश का उद्देश्य धार्मिक यात्रा के दौरान भ्रम से बचना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। लेकिन प्रशासन के इस कदम से तुष्टिकरण के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन सहित लेफ्ट लिबरल गैंग को मिर्ची लग गई। यहां तक कि इस पहल को विवाद बनाने में जावेद अख्तर जैसे बुद्धिजीवी भी कूद पड़े हैं। जावेद अख्तर ने इसकी तुलना जर्मनी के नाजी शासन से कर डाली और कहा कि नाजी शासन में दुकानों पर निशान लगते थे। इनका दोगलापन देखिए कि खुद के लिए ‘हलाल’ सिस्टम चाहिए, लेकिन कांवड़ रूट पर ‘पहचान’ सिस्टम से भी परेशानी हो रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में काँवड़ यात्रा मार्ग पर के दुकानदारों को अपने दुकान पर नाम लिखना होगा। इसके पहले मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने जिले के लिए यह आदेश जारी किया था। इसके बाद इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था। हालाँकि, सीएम योगी के आदेश के बाद अब काँवड़ मार्ग पर काफी कुछ बदला हुआ नजर आने लगा है।

मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।

इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।

दिल्ली-देहरादून हाइवे पर ही स्थित ‘साक्षी होटल’ के मालिक लोकेश भारती ने बताया, “कल हमारे पास दो पुलिस वाले आए और कहा कि दुकान के आगे नाम लिखना है। इसके साथ ही होटल में काम करने वाले कर्मचारियों के भी नाम डिस्प्ले होना चाहिए। पुलिस के आदेश के बाद हमने दुकान पर काम करने वाले चार मुस्लिमों को फिलहाल हटा दिया है।”

दरअसल, काँवड़ यात्रियों की आस्था एवं शुद्धता की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह सभी दुकानों, ढाबों, होटलों और ठेला वालों को आदेश दिया है कि वे अपनी दुकान के बाहर एक सूची लटकाएँ। उस पर दुकान के मालिक और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों का नाम अंकित हो। इस आदेश के बाद कई दुकानों के नाम बदल गए।

आदेश हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। आदेश में सभी दुकानों, ढाबा, ठेलों पर अपना नाम लिखना होगा, ताकि काँवड़ यात्री जान सकें कि वो किस दुकान से सामान खरीद रहे हैं। बता दें कि काँवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु शुद्धता को लेकर खानपान में काफी परहेज करते हैं। इसको लेकर ही योगी सरकार ने यह कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में बड़ी संख्या में काँवड़ में गंगाजल भरने के लिए काँवडिये आते हैं। इसको देखते हुए हरिद्वार के SSP ने आदेश दिया है कि जिले में सभी काँवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह आदेश हरिद्वार के SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने दिया है।

SSP के अनुसार, जिले में जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में इस आदेश का राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किए जाने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लोग पहचान छिपाकर धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र करते हैं। देवी-देवताओं के नाम पर ऐसा नहीं होना चाहिए। खतौली के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता विक्रम सैनी ने कहा है कि मुस्लिम के ढाबों में लहसुन-प्याज का प्रयोग होता है, जबकि इस दौरान शिवभक्त इससे परहेज रखते हैं।