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आखिर कब तक जेहादी उर्फ़ आतंकी हिन्दू त्यौहारों पर उपद्रव करते रहेंगे? संत तुकाराम-संत ज्ञानेश्वर की पालकी लेकर पुणे में यात्रा कर रहे थे हिंदू, मुस्लिम महिला ने फेंके माँस-हड्डियों के टुकड़े: कहा- किसी से डरती नहीं, जो करना है कर लो; क्या फर्क इस जेहादी और आतंकवादी में?

               पुणे में आषाढ़ी वारि जुलूस पर फेंका गया माँस का टुकड़ा (साभार- the free press journal)
जब तक केन्द्र और राज्य सरकारें इन जेहादियों को आतंकवादियों के बराबर मान कार्यवाही नहीं करेगी हिन्दुओं को अपने त्यौहार मनाने मुश्किल हो जाएंगे। मोदी सरकार ने पहलगाम का बदला इसलिए लिया था कि आतंकी पाकिस्तान से थे? लेकिन अपने घर में जो आतंकी पल रहे उन पर क्यों नहीं कार्यवाही की जाती? ये जेहादी मोदी सरकार को वोट नहीं देने वाले, मोदी सरकार इस ग़लतफ़हमी नहीं रहे कि इनके वोट मिल जाएंगे। कितने समय से हिन्दू त्योहारों पर अड़चने डाली जा रही है और सरकारें खामोश बैठी है। जो कार्यवाही होती है उसे कार्यवाही नहीं मुंह पोंछना कहते हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाला विपक्ष पता नहीं किस मातम में है। सब के सब अब सूरदास बने बैठे हैं। अगर स्थिति विपरीत देखों किस तरह कालनेमि सियापा कर रहे होते। सड़क से लेकर संसद तक चील-कौओं की तरह चीख-चीखकर विधवा विलाप कर रहे होते। अब सब बेशर्म हिन्दू विरोधियों के घरों में मातम हो रहा है क्या?      

पुणे के कैंप इलाके में हिन्दुओं में काफी गुस्सा है। दरअसल 21 जून को साल में एक बार निकलने वाली आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा निकली थी। इस दौरान 57 साल की नसीम शेख ने तीर्थयात्रियों पर हड्डियाँ और माँस के टुकड़े फेंक दिए।

नसीम शेख सोलापुर रोड पर मम्मा देवी चौक के पास गैबीपीर दरगाह के पास अपनी झोपड़ी के बाहर खड़ी थी। सालाना आषाढ़ी वारि इस रास्ते से होकर गुजरता है जो पंढरपुर तक जाता है। इसे पंढरपुर आषाढ़ी वारि भी कहा जाता है। महाराष्ट्र में इस जुलूस का हिन्दुओं के लिए काफी महत्व है। सदियों पुरानी इस परंपरा में भक्त संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर की पालकी लेकर जाते हैं। इसका समापन आषाढ़ी एकादशी के दिन भगवान विट्ठल मंदिर में होता है।

नसीम शेख के खिलाफ छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले अक्कलवंत राठौड ने एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर के मुताबिक, ” ये घटना दिनदहाड़े हुई जब जुलूस इलाके से गुजर रहा था। राठौड़ ने बताया कि माया धूमल नाम की भक्त जुलूस में शामिल थी जिसे नसीम शेख की फेंकी गई एक पोटली से चोट लगी। इसमें हड्डियाँ और माँस के टुकड़े थे। जब राठौड़ ने शेख से बात की तो वह गालियाँ देने लगी और कहा, ” जो चाहो करो, मैं डरने वाली नहीं हूँ। ” इस घटना से भक्तों में काफी गुस्सा है।

महाराष्ट्र सरकार ने आषाढ़ी वारि जुलूस के लिए कई नियम लागू किए हैं। इस दौरान जुलूस के गुजरने वाले क्षेत्र में माँस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा पंढरपुर में भी माँस-मदिरा की बिक्री बंद है।

वारि जुलूस में दूर-दूर से आकर लोग शामिल होते हैं। हर समुदाय में लोकप्रिय इस जुलूस पर सुरक्षा व्यवस्था का खास ख्याल रखा जाता है। लेकिन नसीम शेख के फेंके गए माँस और हड्डियों के टुकड़े ने लोगों को उकसाने का काम किया है।

पिछले कई सालों से इस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ हिन्दू मंदिरों के बाहर या धार्मिक कार्यक्रम में माँस, हड्डियाँ, गाय के सिर फेंके गए। असम के धुबरी जिले में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इस साल बकरीद के दौरान दो बार हनुमान मंदिर के बाहर गाय के सिर फेंके गए। घटना के बाद राज्य सरकार ने देखते ही गोली मारने के आदेश देने पड़े। बदरपुर और लखीपुर के शिव मंदिरों के पास भी माँस के टुकड़े मिले थे। इसके बाद कई मुस्लिम कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया गया था।

यूपी के लखनऊ, प्रयागराज, अमेठी और सोनभद्र के मंदिरों के बाहर भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आईं। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। इस साल मार्च में भी महाकुंभ मेले के बाद हिन्दू घरों के बाहर गाय के कटे सिर मिले, जो सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करती है।

ये पूरा पैटर्न यूपी से असम तक फैल गया है। राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश और झारखंड के पास हिन्दू समारोह में माँस फेंकने की खबरें आई हैं। कई बार सीसीटीवी फुटेज में पुलिस ने आरोपियों को ऐसा कर बाइक या पैदल भागते हुए देखा गया।

दरअसल कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन लगातार हिन्दू धार्मिक स्थलों, समारोहों को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की साजिश कर रहे हैं। बार-बार ऐसी होने वाली घटनाओं के बावजूद सख्ती बरतने में राजनीतिक हिचकिचाहट ऐसे तत्वों को बढ़ावा देता है।

ठाणे की अवैध मस्जिद गिराने में देरी से उखड़ा हाई कोर्ट, श्री स्वामी समर्थ हाउसिंग की जमीन पर खड़ा कर रखा है ढाँचा: पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द

                                                 प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI_Bing)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे नगर निगम को जमकर लताड़ लगाई है। एक अवैध मस्जिद को तोड़ने में देरी पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस एएस गडकरी और कमल खाता की बेंच ने कहा कि कानून का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में साफ निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कुछ मुस्लिम समूह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि विरोध के नाम पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

इस केस में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी। कंपनी के पास कासरवडवली के बोरिवडे गाँव में 18,000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन है। कंपनी ने ठाणे नगर निगम (टीएमसी) से कहा कि उनकी जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को तोड़ा जाए। ठाणे नगर निगम ने 1 जनवरी 2025 को जाँच की, तो पता चला कि ये 3,600 वर्ग फुट की ग्राउंड-प्लस-वन मस्जिद है, जिसमें नमाज हॉल भी है। इसका संचालन परदेसी बाबा ट्रस्ट करता है।

मस्जिद के पक्ष वालों का कहना था कि ये तब बनी थी, जब इलाका ग्राम पंचायत के अधीन था, लेकिन ठाणे नगर निगम के रिकॉर्ड में इसके लिए कोई ऑर्डर नहीं मिला। इस मामले में नोटिस और सुनवाई के बाद 27 जनवरी को थाणे नगर निगम ने इसे अवैध ठहराया और तोड़ने का ऑर्डर दिया। हालाँकि दूसरा पक्ष कोर्ट पहुँच गया और अब हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ठाणे नगर निगम को जल्द से जल्द ये मस्जिद ढहाना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “लोकतंत्र में कोई व्यक्ति, समूह या संगठन यह नहीं कह सकता कि वह कानून नहीं मानेगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो प्रशासन को सख्ती से उसे कानून का पालन करवाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि लोगों के मन में यह बात बैठे कि कानून तोड़ने या उसका विरोध करने की इजाजत नहीं मिलेगी।”

पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला सुनाते हुए पुणे के हाजी मोहम्मद जवाद इस्पाहानी इमामबाड़ा ट्रस्ट का वक्फ दर्जा रद्द कर दिया। महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने 2023 में इसे वक्फ संगठन माना था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया। जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने 2016 में गलत तरीके से इसे वक्फ एक्ट 1995 की धारा 43 के तहत दर्ज किया था। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत रजिस्ट्रेशन से कोई ट्रस्ट अपने आप वक्फ नहीं बन जाता।
पुणे का ये इमामबाड़ा 1953 से मुस्लिम पब्लिक ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड था। ट्रस्ट में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद वक्फ बोर्ड से इसे वक्फ बनाने की माँग उठी। 2016 में वक्फ बोर्ड ने इसे मंजूरी दी, लेकिन ट्रस्ट के ट्रस्टी इसके खिलाफ वक्फ ट्रिब्यूनल गए। ट्रिब्यूनल ने 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी, तो मामला हाई कोर्ट पहुँचा। अब कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को नए सिरे से मामले की सुनवाई करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अपना फैसला खुद ले, बिना हाई कोर्ट के प्रभाव के।

पुणे के पब ने कस्टमर को ‘कंडोम- ORS पैकेट’ के साथ न्यू ईयर पार्टी में आने कहा : AIDS से कर रहे जागरूक

          न्यू ईयर पार्टी के लिए कंडोम बाँटने पर घिरा पुणे का पब (प्रतीकात्मक चित्र साभार- X/Times 360 News)
न्यू ईयर की पार्टी में कंडोम और ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के साथ ग्राहकों को आने का निमंत्रण पुणे का एक पब दे रहा है। उसने अपने रेगुलर कस्टमर को इसके पैकेट भी भेजे हैं। विवाद खड़ा होने पर पब ने अपने कदम का बचाव किया है। वहीं युवा कांग्रेस ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

पब पर पुणे की सांस्कृति और शैक्षणिक विरासत के साथ खिलवाड़ के आरोप लग रहे हैं। हाई स्पिरिट्स कैफे नाम रेस्तरां सह पब पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित है। पब ने कहा है कि इन सामानों को बाँटने का मकसद युवाओं में जागरूकता पैदा करना है। सुरक्षा और जिम्मेदारी से नए साल का जश्न मनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पब ग्राहकों को नए साल के जश्न के निमंत्रण के तौर पर कंडोम और ORS का पैकेट बाँट रहा है। पब की तरफ से आए बयान में इस कदम को ‘सेफ्टी एंड सेलिब्रेशन’ का नाम दिया गया है। यह भी कहा कि वे इस अभियान के तहत लोगों को AIDS जैसी बीमारियों के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं।

पब की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि उन्होंने जिस बैग में ये दोनों चीजें उपहार स्वरूप रखीं थीं, उसमें ध्वनि उपकरण और शराब पी कर गाड़ी न चलाने जैसे दिशा-निर्देश से जुड़ी बुकलेट भी है। महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अक्षय जैन ने हाई स्प्रिट्स कैफे पर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पुणे पुलिस कमिश्नर के पास इसकी शिकायत दर्ज करवाई है।

पुलिस को दी गई शिकायत में अक्षय जैन ने बताया कि हाई स्प्रिट्स कैफे की हरकत महाराष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कामों को बढ़ावा देने से युवाओं में गलत संदेश जाता है जो एक अच्छे समाज के लिए सही नहीं है। फिलहाल पुणे पुलिस इस शिकायत पर जाँच कर रही है।

पुणे के एक गाँव को बांग्लादेशियों ने बना रखा था ठिकाना, फर्जी दस्तावेजों के साथ 21 गिरफ्तार: त्रिपुरा में 3 रोहिंग्या पकड़े गए, जा रहे थे हैदराबाद


महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगाँव में अवैध रूप से रह रहे 21 बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, त्रिपुरा पुलिस ने 3 रोहिंग्या मुस्लिम और 2 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुणे पुलिस ने 10 अवैध घुसपैठियों को कोर्ट में पेश किया, जहाँ अदालत ने उन्हें 24 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इनके पास से पैन-वोटर कार्ड सहित कई फर्जी दस्तावेज मिले हैं। 

इनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज किन अधिकारियों ने किन नेताओं के कहने पर बनाए? जब तक इन लोगों पर भी कार्यवाही नहीं होगी गैंग का पता नहीं चलेगा। इनसे सारी जानकारी लेकर इन्हे जेल में रखने की बजाए देश से बाहर किया जाना चाहिए।  

पुणे ग्रामीण एसपी पंकज देशमुख ने कहा, “कल रंजनगाँव एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में हमने एक अपराध दर्ज किया। पूछताछ के बाद हमें पता चला कि वे रंजनगाँव इलाके में अवैध रूप से रह रहे थे। इसलिए हमने एक अपराध दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट ले जाया गया है। कोर्ट ने 24 अक्टूबर तक 10 ऐसे आरोपियों की पुलिस हिरासत मंजूर की है।”

उन्होंने कहा, “हम पता लगा रहे हैं कि वे कितने समय से भारत में हैं। प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि वे 6 महीने से लेकर 10 साल से ये देश में रहे हैं। हम पता लगा रहे हैं कि इस देश में रहने का उनका मकसद क्या है। उनमें से कई लोग श्रम गतिविधि में लिप्त हैं और उन्हें मजदूरी कर रहे हैं। इसलिए, उनकी वास्तविक स्थिति पर टिप्पणी करना अभी बहुत प्रारंभिक है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने उनके पास से मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों के पास से अवैध रूप से रह रहे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है। हम इस पहलू की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या कोई संगठित रैकेट या एजेंट है, जो बांग्लादेशी नागरिकों को हमारे देश में लाकर स्थापित कर रहा है।”

कहा जा रहा है कि आरोपितों में 15 पुरुष, 4 महिलाएँ और 2 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। इन आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336(2), 336(3), 338, 340(2) और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1920 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जाँच जारी है।

दरअसल, खुफिया सूचना के आधार पर पुणे पुलिस ने रजनगाँव में सोमवार (21 अक्टूबर 2024) को सर्च ऑपरेशन चलाया था और इन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने कहा, “उनमें से नौ के पास फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड थे और उनमें से एक के पास वोटर आईडी कार्ड भी था। बांग्लादेशी नागरिक के पास वोटर आईडी कार्ड था, उसने इसे गुजरात से हासिल किया था।”

एसपी ने कहा कि ये सभी या तो पैदल चलकर सीमा पार करते हुए पश्चिम बंगाल में यहाँ आए या फिर नावों से समुद्री मार्ग से अवैध रूप से यहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से पाँच साल के बीच है। भारत में घुसने के बाद ये गुजरात और मुंबई चले गए। कुछ दिन पहले ये पुणे आए हैं।” उन्होंने कहा कि जाँच चल रही है और 2-3 दिन में यह बात स्पष्ट हो जाएगी।

जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनके नाम हैं- अजमुल शरत खान उर्फ ​​हासिफ खान (50) मोहम्मद अकबर अजीज अकबर सरदार (32) शफीकुल अलीमिया शेख (20) हुसैन मुखिद शेख (30) तारिकुल अतियार शेख (38) मोहम्मद उमर फारूक बाबू उर्फ ​​बाबू बुख्तियार शेख (32) शाहीन शाहजान शेख ( 44) मोहम्मद हुसैन शेख (32) रऊफ अकबर दफादार (35) इब्राहिम काजोल शेख (35) फरीद अब्बास शेख (48) मोहम्मद सद्दाम अब्दुल सखावती (35) मोहम्मद अब्दुल हबीब रहमान सरदार (32) आलिमिया तोहकील शेख (60) मोहम्मद इसराइल फकीर (35) फ़िरोज़ा मुताक़ीन शेख़ (20) लिपिया हसमुख मुल्ला (32) सलमा मलिक रोशन मलिक (23) हिना मुल्ला जुल्फिकार मुल्ला (40) सोनदीप उर्फ ​​काजोल बासुदीप विशेष (30) येनूर शाहदता मुल्ला (25)।

त्रिपुरा में बांग्लादेशी और रोहिंग्या गिरफ्तार

वहीं, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) की सुबह तीन रोहिंग्या मुस्लिम और दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी अधिकारी तपस दास ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक त्रिपुरा से बाहर जाने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पर आएँगे।
दास ने कहा, “सूचना के आधार पर जीआरपी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और बीएसएफ के जवान सादे कपड़ों में स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे। जब वे लोग पहुँचे तो हमने उनमें से पाँच को हिरासत में लिया। शुरू में उन्होंने भारतीय नागरिक होने का दावा किया, लेकिन पूछताछ के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि उनमें से तीन रोहिंग्या और दो बांग्लादेशी हैं। वे अवैध रूप से राज्य में घुसे थे।”
तपस दास ने आगे बताया कि पूछताछ में पता चला कि रोहिंग्या नागरिक हैदराबाद जाने वाले थे, जबकि बांग्लादेशी नागरिक मुंबई जाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “हमने उनके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन जब्त किए हैं। हम उन्हें अदालत में पेश करके आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड माँगेंगे।”

आतंकी कोई नियम-कानून से हमला नहीं करते, उनको जवाब भी नियम-कानून मानकर नहीं दिया जाएगा: विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा आतंकियों में यह सोच नहीं आनी चाहिए कि हम सीमा के दूसरी तरफ बैठे हैं तो हमें कोई छू नहीं सकता। विदेश मंत्री जयशंकर ने 26/11 मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई ना किए जाने को लेकर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकी अपनी ही भाषा में जवाब पाएँगे।

यह टिप्पणियाँ उन्होंने शुक्रवार (12 अप्रैल, 2024) को महाराष्ट्र के पुणे में अपनी किताब ‘व्हाई भारत मैटर्स’ के मराठी अनुवाद के लॉन्च के मौके पर कहीं। यहाँ वह एक बातचीत कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे।

उन्होंने कहा, “मुंबई में 26/11 हमले के बाद UPA सरकार ने हमलों के बाद खूब चर्चा की और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि पाकिस्तान पर हमला करने की कीमत, उस पर हमला ना करने की कीमत से ज्यादा होगी। कुछ मुंबई जैसा होता है, और आप उस पर जवाब नहीं देते तो अगला ऐसा हमला आप कैसे रोकेंगे।”

उन्होंने सीमा पार आतंकियों के मारे जाने को लेकर कहा, “आतंकियों के मन में यह ख्याल नहीं आना चाहिए कि अगर वह सीमा के उस पार बैठे हैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं हो सकता। आतंकी कोई नियम कानून नहीं मानते, उनका सफाया करने में भी कोई नियम क़ानून माना नहीं जा सकता।”

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों को चलाना सबसे मुश्किल काम है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज से नहीं और ना ही मुंबई हमलों के समय से बल्कि 1947 से ही भारत में आतंकी हमले कर रहा है। उन्होंने इसके लिए 1947 में जम्मू-कश्मीर पर किए गए हमले का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “कश्मीर में पाकिस्तान से हमलावर आए, यह आतंकी थे। इन लोगों ने शहर जलाए, लूटे, लोगों को मारा। पाकिस्तान की फ़ौज ने इन्हें कश्मीर में आगे भेज दिया और कहा कि हम तुम्हारे पीछे पीछे आते हैं।” जयशंकर ने कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने पर भी प्रश्न खड़े किए।

उन्होंने कहा कि जब इन कबायलियों ने हमले किए तब हमने क्या किया, हम संयुक्त राष्ट्र पहुँच गए जहाँ इस मामले में आतंकी हमले का कोई जिक्र ही नहीं है। उन्होंने कहा कि कबायली हमले के बाद जब सेना भेजी गई तो उसने कश्मीर समस्या का लगभग समाधान कर दिया था लेकिन हमने उसे रोक कर संयुक्त राष्ट्र में मामला उठाया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने इसी कार्यक्रम में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की नीतियों पर प्रश्न उठाए। जयशंकर ने कहा कि जब चीन ने 1950 में तिब्बत कब्जाया था, तब नेहरू को सरदार वल्लभ भाई पटेल चेताया था और कहा था कि उन्हें चीन की मंशा ठीक नहीं लगती। जयशंकर ने कहा कि नेहरू ने इन चिंताओं को दरकिनार कर दिया और कहा कि चीनी लोग भी एशियाई हैं और हमारे भाई है इसलिए वह भारत पर हमला नहीं करेंगे।

जयशंकर ने कहा कि चीन को लेकर जहाँ सरकार वल्लभभाई पटेल की सोच एकदम धरातल से मेल खाती हुई और यथार्थवादी थी तो नेहरू एक वामपंथी और आदर्शवादी थे।


पुणे : समोसे में कंडोम, पत्थर, तंबाकू भर कर्मचारियों को खिलाया: कैंटीन कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने से भड़का था कंपनी का मालिक रहीम शेख

पुणे में समोसे के अंदर कंडोम और पत्थर भर कर बेचने वाले रहीम शेख सहित 5 लोगों पर FIR (चित्र साभार- AI/gencraft.com)
आखिर ये जेहादी मुसलमान को किस मोड़ पर लेकर जा रहे हैं? कभी खाने के सामान में थूक! क्या ये जेहादी चाहते हैं कि सभी गैर-मुस्लिम मुस्लिम दुकानदारों का बहिष्कार करें? क्या इस तरह के घिनौने अपराध से मुसलमान को संदेह के घेरे में खड़ा करना चाहते हैं? क्यों मुसलमानों को तबाही की ओर धकेल रहे हो?
महाराष्ट्र के पुणे में एक कम्पनी की कैंटीन में समोसे के अंदर कंडोम, पत्थर और तम्बाकू जैसी चीजें मिलने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। 1 आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। आरोपितों के नाम रहीम शेख, अजहर शेख, मजार शेख, अजर शेख और विक्की शेख हैं। बताया जा रहा है कि सभी आरोपितों ने कंपनी द्वारा अपना कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने से नाराज हो कर ऐसा कदम उठाया था। घटना बुधवार (27 मार्च, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पुणे के पिंपरी चिंचवड इलाके की है। यहाँ के चिखली स्थित एक कम्पनी के अधिकारी कीर्तिकुमार शंकरराव देसाई ने रविवार (7 मार्च, 2024 ) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। चिखली थाने में दी गई इस शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनकी कम्पनी को चिखली की ही एक अन्य बड़ी कम्पनी से खाना सप्लाई का ऑर्डर मिला है। इसी ऑर्डर में समोसे की सप्लाई के लिए कीर्तिकुमार ने SRS एंटरप्राइजेज नाम की एक कम्पनी के साथ समझौता कर लिया।

SRS कम्पनी के मालिक का नाम रही शेख है। कीर्तिकुमार के अनुसार, SRS कम्पनी से सप्लाई हो रहे समोसे में एक दिन घावों पर लगाने वाली पट्टी निकली। इसकी शिकायत मिलने के बाद कीर्तिकुमार की कम्पनी ने रहीम खान की कम्पनी SRS से अपना अनुबंध समाप्त कर लिया और समोसे सप्लाई करने का ऑर्डर पुणे की एक अन्य कम्पनी मनोहर इंटरप्राइजेज को दे दिया। SRS का मालिक रहीम खान इस बात से नाराज हो गया। उसने अपने साथियों अज़हर शेख और मजार शेख के साथ मिल कर बड़ी साजिश रच डाली। 

27 मार्च, 2024 को रहीम खान ने अपने मजदूरों को ऑर्डर दे कर समोसे में कंडोम, गुटखा और पत्थर भरवा दिए। इस समोसे को रहीम ने सुबह साढ़े 7 से 9 बजे के बीच चिखली स्थित उसी कम्पनी में बँटवा दिए जहाँ से उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने वाला था। जब कम्पनी के स्टाफ ने इसकी शिकायत की तो कीर्तिकुमार ने 7 मार्च को इसकी शिकायत पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई। पुलिस ने रहीम शेख, फ़िरोज़ शेख, विक्की शेख, अजर शेख और मजार शेख के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

इन सभी पर IPC की धारा 328, 120- बी और 34 के तहत कार्रवाई की गई है। अब तक 1 आरोपित को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। मामले की जाँच की जा रही है।

अवलोकन करें:-

वडोदरा : गोमांस भरकर समोसा बेच रहा था ‘हुसैनी समोसे वाला’

हाल ही में गुजरात के वडोदरा से भी इसी प्रकार का मामला सामने आया था। तब चिपवाड इलाके में मौजूद ‘हुसैनी समोसे वाला’ की दुकान से उठाए गए सैम्पल में गोमांस मिलने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर के 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जिनकी पहचान युसूफ शेख, नसीम शेख, हनीफ भाटियारा, दिलावर पठान मोइन हबदल और मोबिन शेख के तौर पर हुई है। यह धंधा बिना लाइसेंस के एक बिल्डिंग के 5वें फ्लोर पर चल रहा था। ‘हुसैन समोसे वाला’ वडोदरा की कई दुकानों पर कच्चे समोसे सप्लाई करता था जहाँ दुकानदार इसे तलकर ग्राहकों को बेचते थे।

भारत का संविधान हराम, काफिरों को मारने का प्लान: NIA की चार्जशीट से सामने आए ISIS पुणे मॉड्यूल के मंसूबे, शरजील इमाम से जुड़े हैं तार

                                      सीरिया में आईएसआईएस, एनआईए का लोगो, शरजील इमाम
मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते संविधान में बदलाव करना और Secular शब्द को जोड़ना हिन्दुओं के लिए जानलेवा बन रहा। छद्दम सेक्युलर के नाम पर हिन्दुओं को दबाया जाता रहा और मुस्लिम कट्टरपंथी मौज करते रहे। CAA के विरोध में बने शाहीन बागों में हिन्दुओं की गैर मौजूदगी में क्या होता था, भूल गए। देखिये सर्वाधिक पढ़ा गया लेख, नीचे दिए लिंक शीर्षक "
सेकुलरिज्म सिर्फ तब तक, जब तक भारत में इस्लाम की हुकूमत नहीं ले आते : अरफ़ा खानुम, मुस्लिम पत्रकार", फिर भी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स नेता और पार्टियां तुष्टिकरण से बाज नहीं आ रही। क्या ऐसे नेताओं के हाथ देश सौंपना तो दूर विश्वास भी नहीं करना चाहिए। आखिर सेकुलरिज्म का नंगा नाच कब तक होता रहेगा? केंद्र और राज्य सरकारें और अदालतें ऐसी मानसिकता वालों पर कब सख्ती से पेश आएँगी? इस वीडियो को भी देखिए:

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के पुणे मॉड्यूल के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में कहा गया है कि मॉड्यूल के सदस्य काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या की योजना बना रहे थे और वे भारतीय संविधान को ‘हराम’ (गैर-इस्लामी) मानते हैं। आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल के सदस्यों के शरजील इमाम से संबंध थे, जो 2020 के दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंडों में से एक होने का आरोपित है और अभी जेल में बंद है।

एनआईए की चार्जशीट में पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल के सात सदस्यों की जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि इस आतंकवादी संगठन के सदस्य गैर-मुस्लिमों पर हमले की योजना बना रहे थे। ये लगातार विभिन्न तरीकों से गैर-मुस्लिमों को जान से मारने पर चर्चा कर रहे थे। इनका लक्ष्य मुस्लिम युवाओं को शिक्षा देकर देश में शरिया कानून स्थापित करना था।

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि इन आतंकियों ने मुस्लिमों के बीच यह धारणा बनाने की कोशिश की कि इस्लाम में लोकतंत्र ‘हराम’ है और केवल आईएसआईएस ही शरिया का पालन करता है। इसके अलावा उन्होंने सभी मुस्लिमों से आईएस का समर्थन करने का आह्वान किया था। चार्जशीट में गवाहों के दर्ज बयान के आधार पर कहा गया है कि ये वॉट्सऐप पर कट्टरपंथी ग्रुप से जोड़े गए थे, जिसमें मुस्लिमों पर अत्याचार की कहानियाँ बताकर उन्हें गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़काया जा रहा था।

 इस चार्जशीट में पुणे मॉड्यूल के दिल्ली दंगों से जुड़ाव को भी बताया गया है। मॉड्यूल के सदस्यों के शरजील इमाम से संबंध थे, जो 2020 के दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंडों में से एक होने का आरोपित है। इससे जुड़े आईएसआईएस के तमाम आतंकवादियों की धरपकड़ जारी है, जिसमें हाल ही में दिल्ली, लखनऊ, मुरादाबाद, अलीगढ़ और छत्तीसगढ़ के दुर्ग से कई आतंकियों को पकड़ा गया है।

एनआईए चार्जशीट की खास बातें

एनआईए की चार्जशीट में कहा गया है कि पडघा गाँव निवासी जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और पुणे निवासी जुबैर शेख ने साल 2015 में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर आईएसआईएस के समर्थन में पोस्ट किए जाते थे। एनआईए ने एक गवाह के हवाले से विस्तार में इसकी जानकारी दी है कि कैसे वह 2011-2012 में जुबैर शेख के संपर्क में आया था, जिसे एनआईए ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। एक गवाह ने कहा है कि साल 2014 में शेख ने उसे ‘यूनिटी इन मुस्लिम उम्मा’ और ‘उम्मा न्यूज’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुपों में जोड़ा था।
मिडडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गवाह ने अपने बयान में कहा, “हमारी शुरुआती मुलाकातों में हमारी दोस्ताना और कैजुअल बातचीत हुई। हालाँकि, धीरे-धीरे जुल्फिकार उर्फ ​​लालाभाई, सिमाब काजी और तल्हा खान ने शिर्क, खलीफा, जिहाद, इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एंड इराक (आईएसआईएस) आदि विषयों पर चर्चा शुरू कर दी। कई बार उन्होंने मेरे सहित अन्य सदस्यों को भी आईएसआईएस में भर्ती करने की कोशिश की। यही नहीं, गैर-मुस्लिमों को मारने के बारे में भी इन ग्रुपों पर चर्चा होती थी। इसमें आईएसआईएस के आतंकी कहते थे कि हमें काफिरों को मारना है और इसके लिए हमारे पास सारी चीजें हैं। सही समय आएगा तब तुम्हें सब बता देंगे।”
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सेकुलरिज्म सिर्फ तब तक, जब तक भारत में इस्लाम की हुकूमत नहीं ले आते : अरफ़ा खानुम, मुस्लिम पत्रकार
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आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल का दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से कनेक्शन

पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल का लिंक दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से भी है। पुणे मॉड्यूल से जुड़े शाहनवाज और अरशद वारसी का शरजील इमाम से कनेक्शन सामने आ चुका है। इस पर ऑपइंडिया ने विस्तार से पूरी जानकारी दी है। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के बाद भी किस तरह से आईएसआईएस का पुणे मॉड्यूल दिल्ली से लेकर अलीगढ़ और प्रयागराज तक फैलता रहा, इसकी जानकारी भी इस रिपोर्ट में दर्ज है।