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ऐतिहासिक जीत, क्यों? मोदी को रोकने मुस्लिमों द्वारा एकमुश्त विरोध में वोट, आरएसएस का विरोध और भारत विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा अरबों खर्च करने के बावजूद जीत ; आखिर कब तक खतरों के खिलाडी मोदी को अग्नि-परीक्षा देनी होगी?

आज(जून 9) नरेंद्र मोदी पहली बार लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री की शपथ ले रहे हैं। मोदी को नेता चुने जाने पर अपने सम्बोधन में बीजेपी जीत को ऐतिहासिक बताया। क्यों? इस रहस्य को समझना होगा। स्पष्ट है जिस मोदी को सत्ता से हटाने मुस्लिम एकमुश्त विरोध में वोट, भारत विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा विपक्ष पर अरबों खर्च करना आदि जीत को ऐतिहासिक बनाता है। इस सबसे अधिक जीत के ऐतिहासिक बनने का कारण है आरएसएस विरोध। 

आखिर क्यों संघ मोदी के विरोध में खड़ा हुआ? क्या मोदी देश और सनातन के विरुद्ध काम कर रहे थे? क्या डॉ हेडगवार ने आरएसएस का गठन सनातन और देशहित के विरुद्ध किया था? यदि नहीं, फिर संघ ने क्यों मोदी का विरोध किया? यह पहली बार नहीं हुआ है, यह विरोध तब से चल रहा है जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मोदी और संघ के बीच मनमुटाव की कहानी से YouTube पर भरमार है। क्या संघ अपनी दादागिरी चलाता रहेगा? यदि संघ ने अपना रवैया नहीं बदला, फिर वह दिन भी अधिक दूर नहीं होगा जब जनता ही इसे उस स्थान पर पहुंचा देगी जहां जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान विपक्ष तक पहुँचाना जा रहा है। आरएसएस को डॉ हेडगवार का सपना साकार करने मोदी विरोध त्याग मोदी के साथ खड़ा होना चाहिए। देखिए संघ विरोध का वीडियो, बहुत हैं ऐसे वीडियो :-

 

मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव है कि नरेंद्र मोदी हर पीड़ित के साथ है, चाहे वह किसी भी संस्था और समुदाय से हो। ऑफिस में मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी को सेवानिर्वित होने पर ग्रेचुटी के नाम पर रूपए देने की बजाए 40,000 रूपए कंपनी को देने को कहा। क्या कभी किसी की ग्रेचुटी minus में हो सकती है? हम दो महीने पहले रिटायर हो गए थे। सब तरफ हाथ-पैर मारने के बाद कुछ नहीं होने पर जब मुझसे संपर्क किया, तुरन्त नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजने को कहने पर जवाब मिला कि 'मोदी विरुद्ध कुछ नहीं करेंगे।' मैंने कहा ऐसी बात नहीं, मोदी हर पीड़ित के साथ है। यह मेरा पत्रकारिता अनुभव कहता है। जो शत-प्रतिशत सही साबित भी हुआ। संक्षेप में, जो कंपनी कर्मचारी से 40,000 रूपए मांग रही थी, उल्टे उसी कंपनी को कर्मचारी को लगभग 3,50,000 रूपए का चैक दिया। केवल उसी कर्मचारी को ही नहीं, मुझ सहित पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों को बुला-बुलाकर बाकी राशि दी। कंपनी इतनी शर्मसार हुई कि किसी को ऑफिस के अंदर नहीं, बल्कि स्वागत कक्ष में रोक, लेखाधिकारी द्वारा नीचे आकर चैक दिए। क्योकि कार्यवाही होने के कारण ऑफिस में प्रवेश की अनुमति नहीं। और बाद में रिटायर होने वालों को उचित ग्रेचुटी दी गयी। ये है मोदी की नियत और नीति।  

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम सबके सामने हैं। देश ने NDA की गठबंधन सरकार को जनमत दिया है और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। भाजपा को इन चुनावों में 240 सीटें हासिल हुई हैं। वह अकेले दम पर बहुमत नहीं पा सकी है। उसका वोट प्रतिशत भी देश में 37.3% से 36.6% हो गया है। भाजपा के वोट शेयर में तो मात्र 0.6% की गिरावट है लेकिन उसकी सीटों का आँकड़ा इससे गड़बड़ा गया है। भाजपा 2019 में 303 सीटें आईं थी जबकि 2024 में उसकी सीटें घट कर 240 हो गईं, यानि उसे 63 सीटों का नुकसान हुआ।

चुनाव जैसे-जैसे बढ़ा, भाजपा को हुआ नुकसान

लोकसभा चुनाव में एक ट्रेंड देखने को मिला है, भाजपा को अधिकांश चुनाव के अंतिम चरणों में नुकसान हुआ है। इसके लिए बिहार और उत्तर प्रदेश का उदाहरण लिया जाना चाहिए। भाजपा को भी सबसे बड़ा नुकसान उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। भाजपा को उत्तर प्रदेश में 33 सीट हासिल हुई हैं जबकि सपा यहाँ 38 और कॉन्ग्रेस 6 सीटें जीतने में सफल रही है। चुनाव के बढ़ने के साथ ही भाजपा और सपा की जीत का फासला भी उत्तर प्रदेश में बढ़ता गया है।
वोटिंग के चरणों के हिसाब से देखा जाए तो पहले चरण में हुए चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 8 में से 3 जबकि दूसरे चरण में सभी 8 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा पहले चरण में मुस्लिम बहुल सीटों पर ही पिछड़ी है। भाजपा को तीसरे चरण में भी काफी नुकसान हो गया। 10 में से 6 सीट तीसरे चरण में भाजपा हार गई, यह सीटें सपा ले गई। चौथे चरण में भाजपा को 13 में से 8 सीटों पर विजय श्री मिली। इसमें भी यादव परिवार की सीटों पर ही SP जीत हासिल कर सकी।
वहीं सबसे अधिक नुकसान भाजपा को पाँचवे और छठे चरण में हुआ। पाँचवे चरण में सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 में से 10 सीट जीती। छठे चरण में सपा कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 में से 11 सीट जीती। आखिरी सातवें चरण में 13 में से 6 सीट सपा जीत गई। ऐसे में उत्तर प्रदेश ने जहाँ चौथे चरण तक भाजपा का प्रदर्शन ठीक रहा, वहीं इसके बाद उसको बड़े झटके लगे। सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन की 60% से अधिक सीटें पाँचवे, छठे और सातवें चरण से आई हैं।

बिहार में भी यही कहानी

बिहार में NDA को भी सबसे बड़ा नुकसान अंतिम चरम में ही हुआ है। बिहार में NDA गठबंधन ने 40 में से 30 सीट जीती हैं। बाक़ी की 10 सीटों में 9 विपक्षी INDI गठबंधन को मिली हैं। बिहार में सातवें चरण में 8 सीटों पर चुनाव हुआ था जिसमें विपक्ष को 6 सीट मिलीं।
अंतिम चरण में राजद को पाटलिपुत्र, बक्सर और जहानाबाद की सीट मिली। कॉन्ग्रेस को अंतिम चरण में सासाराम और कम्युनिस्ट पार्टी को सीट मिली। INDI गठबंधन को मिलने वाली बाकी तीन सीटों में दो मुस्लिम प्रभाव वाले इलाकों में थी जबकि एक सीट उसे पहले चरण में ही मिल गई थी। तीसरे, चौथे और पाँचवे चरण में INDI गठबंधन का खाता तक बिहार में नहीं खुला।

देश में भी यही ट्रेंड

शुरूआती चरणों में अच्छा प्रदर्शन और अंतिम चरणों में खराब प्रदर्शन की यह कहानी मात्र उत्तर प्रदेश और बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपा के साथ घटित होती दिखाई दे रही है। देश भर में भाजपा को पहले और दूसरे चरण में 189 में से 76 सीटें मिली हैं। तीसरे और चौथे चरण में भाजपा को सबसे अधिक फायदा देश में हुआ है। तीसरे और चौथे चरण में देश की 190 सीटों पर चुनाव हुआ था और इसमें भाजपा को 96 सीटों पर जीत मिली।
पाँचवे और छठे चरण से भाजपा को बड़ा नुकसान होना चालू हुआ। पाँचवे और छठे चरण में देश में 107 सीट पर चुनाव हुए, इसमें भाजपा 50 सीट जीत पाई। अंतिम चरण में भी भाजपा का प्रदर्शन कुछ खास अच्छा नहीं रहा। अंतिम चरण की 57 सीटों पर हुए मतदान में भी भाजपा को केवल 17 सीटें मिली। ऐसे में भाजपा को देशव्यापी नुकसान आखिरी तीन चरणों में हुआ।

क्या-क्या फैक्टर रहे?

पहले चरण से अंतिम चरण की तरफ जाते हुए भाजपा को यह चुनावी नुकसान क्यों हुआ, इसके कई कयास लगाए जा रहे हैं। एक कयास यह है कि शुरूआती चरणों में देश में गर्मी कम पड़ रही थी और तब वोटर बाहर निकल रहे थे जिससे भाजपा को फायदा हुआ। बाद के चरणों में देश में गर्मी बढ़ गई और वोटर निकलने से कतराने लगे जिससे भाजपा को नुकसान हुआ। इसके अलावा एक कयास यह है कि पहले चरण में भाजपा के पास फीडबैक पहुँचा और उसने अपना चुनावी अभियान दुरुस्त किया जिसका फायदा तीसरे और चौथे चरण में मिला।
यह सुधार की गति बाद के चरणों में नहीं बनी रही जिसके कारण इन चरणों में नुकसान हुआ। चुनाव प्रचार की दिशा और हर चरण में बदलते मुद्दे भी इसका एक कारण माने जा रहे हैं। हालाँकि, यह सभी केवल कयास हैं और इनको प्रमाणित करने वाले तथ्य अभी नहीं पुष्ट हो पाए हैं, ऐसे में अभी यह नहीं कहा जा सकता कि भाजपा को शुरूआती चरणों में फायदा और बाद के चरणों में फायदा क्यों हुआ।

जिस दिल्ली में केजरीवाल ने कहा- मुझे जेल जाने से बचाना है तो AAP को जिताएँ, वहाँ INDI का सूपड़ा साफ

जनता ने कालनेमि बनी पार्टियों को वोट देकर कालनेमि के नाम को भी कलंकित कर दिया। कालनेमि अपनी राक्षस जाति को बचाने ढोंगी रामभक्त बना, जबकि I.N.D.I. गठबंधन संविधान और देशप्रेमी होने का स्वांग का खेल खेल कालनेमि बन जनता को भ्रमित किया। लेकिन मूर्ख जनता कालनेमि को पहचान कर भी सूरदास बन उनको वोट दे दिया। दूसरे, वामपंथियों को तो 1962 में इंडो-चीन युद्ध के बाद ही नकार देना चाहिए था, क्योकि इस पार्टी ने जवानों को खून देने के लिए मना कर दिया था। तीसरे, बंगाल में ममता बनर्जी के आने के बाद से हिन्दुओं पर जानलेवा हमले होने के बावजूद TMC को वोट दिया यानि वहां का हिन्दू पीटने में ही खुश है।   
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है। लगातार 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत का प्राप्त होना जनमानस का स्पष्ट संदेश है। इस बीच, बीजेपी ने कई राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने मध्य प्रदेश में अपना चुनावी प्रदर्शन बेहतर से भी बेहतरीन किया है। ऐसे कई राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मदद की है। आइए, आपको बताते हैं कि किन-किन राज्यों में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में भी क्लीन स्वीप किया था। दिल्ली में बीजेपी द्वारा क्लीनस्वीप की हैट्रिक लगा दी गई है। यहाँ बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर जोर लगाया। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो जनता से यहाँ तक अपील की थी कि अगर उन्हें जेल जाने से बचाना है, तो आम आदमी पार्टी को जिताना होगा। इसके बावजूद दिल्ली में विपक्षी दलों की सभी कोशिशों को ध्वस्त करते हुए बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की है।

मध्य प्रदेश : भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी 29 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत इस बार इंदौर में मिली है। इंदौर में बीजेपी प्रत्याशी शंकर लालवानी ने 11.75+ लाख वोटों से जीत हासिल किया है। यही नहीं, इस बार बीजेपी ने कांग्रेस और कमलनाथ परिवार का गढ़ मानी जाने वाली छिंदवाड़ा की सीट भी फतह कर ली है।

त्रिपुरा : कभी कम्युनिष्टों का गढ़ रहा त्रिपुरा अब भगवा ध्वज उठाए हुए है। त्रिपुरा की दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। यहाँ विपक्षी दल कोई खास चुनौती तक पेश नहीं कर पाए।

उत्तराखंड : देवभूमि उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटें हैं। उत्तराखंड की पाँचों लोकसभा सीटों पर एक बार फिर से बीजेपी ने क्लीवस्वीप किया है। बीजेपी के हरेक उम्मीदवार को प्रचंड जीत मिली है। कांग्रेस पार्टी का कोई उम्मीदवार किसी भी सीट पर टक्कर देने की स्थिति में नहीं दिखा। यही वजह रही कि चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उत्तराखंड से दूरी बनाए रखी, मानों उन्हें पता हो कि हर बार की तरह इस बार भी जनता कांग्रेस को भाव नहीं देने वाली।

हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश राज्य की विधानसभा में कांग्रेस की सरकार है। इसके बावजूद हिमाचल की सभी 4 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ ही मंडी की सीट से कंगना रनौत तक ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन को सुधारा है।

अंडमान & निकोबार द्वीप समूह : देश के सुदूर दक्षिण-पूर्वी द्वीपीय केंद्र शासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। अंडमान & निकोलबार द्वीप समूह पर भी भगवा लहरा रहा है।

गुजरात : लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के विजय रथ को गुजरात में रोकने की कोशिश कर रहे कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने यहाँ भी हाथ मिला। इसके बावजूद दोनों ही दलों को असफलता का मुँह देखना पड़ा। गुजरात में बीजेपी ने गुजरात की 26 में से 25 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस को बनासकाँठा(सुरक्षित) सीट से एकमात्र जीत मिली, वहीं 2 सीटों पर लड़ी आम आदमी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।

छत्तीसगढ़ : बीजेपी ने छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से 10 पर प्रचंड जीत हासिल की। कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। कोरबा सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी को जीत मिली, बाकी की सभी 10 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को भी हार झेलनी पड़ी।

ओडिशा में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन : भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया है। विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत तो मिला ही, लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में बीजेपी ने 19 सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की है। ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी को महज 1-1 सीटों पर जीत मिली है।

इन राज्यों के अलावा भी बीजेपी ने कई राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया है। फिलहाल बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत से अधिक संख्या में सीटों को हासिल किया है। जल्द ही इस बात की घोषणा हो जाएगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तारीख को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।

Exit Polls : 2024 में NDA की ही बनेगी सरकार, टूटेगा 2019 का रिकॉर्ड भी ; मोदी PM बने तो सिर मुंडवा लूंगा: सोमनाथ भारती, आप नेता

लोकसभा चुनाव 2024 के सातवें चरण के मतदान के साथ 1 जून को सम्पन्न होने के बाद अब मीडिया संस्थानों ने एक्जिट पोल देना शुरू कर दिया है। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व में की सरकार बनती नजर आ रही है। वहीं पूरा विपक्ष इकट्ठा होने के बाद भी हारता दिख रहा है। 

केजरीवाल पार्टी ने नेता जबरदस्त घोषणा की है कि "अगर मोदी तीसरी बार PM बने तो सिर मुंडवा लूंगा", जबकि Exit Polls नरेंद्र मोदी को ही PM बनने के स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।    

अलग-अलग एग्जिट पोल्स के अनुमान अलग हैं लेकिन सबमें कॉमन बात एनडीए की जीत है। जैसे-

इंडिया न्यूज के डी डायनामिक्स में एनडीए को 371 सीटें मिलती दिखाई गई हैं, INDI ब्लॉक को 125 और अन्य को 47।

इसी तरह जन की बात के एग्जिट पोल ने एनडीए को 362-392 सीटें मिलती हुई दिखाई हैं, INDI ब्लॉक को 141-161 सीट मिली है और अन्य को 10-20।

रिपब्लिक भारत के मैटरिज ने एनडीए को 353-368, INDI ब्लॉक के 118-133 और अन्य को 43-48।

रिपब्लिक टीवी-पी के MARQ ने एनडीए को 359 सीट दी है, INDI गठबंध को 154 और अन्य को 30।

एग्जिट पोल मतदान केंद्रों से बाहर निकलने के तुरंत बाद मतदाताओं के सर्वेक्षण पर आधारित होता है। आमतौर पर, समाचार पत्रों और TV चैनलों के लिए काम करने वाली निजी सर्वेक्षण फर्म या संस्थाएँ मतदाताओं से पूछती हैं कि उन्होंने वास्तव में किसे वोट दिया और यह मानते हुए कि उन्हें सही उत्तर मिले हैं, वे परिणाम के रुझान की भविष्यवाणी करते हैं।

एग्जिट पोल पर आधारित चुनावी भविष्यवाणियों ने पिछले एक दशक में टेलीविजन की पहुँच को भारत में डिजिटल समाचार पोर्टलों के बढ़ने के साथ काफी बढ़ा दिया है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे एग्जिट पोल अक्सर फेल होते हैं, जिसकी बड़ी वजह है सैंपल साइज का छोटा होना और दूसरा जिनसे पूछा गया – उन्होंने कितना सही जवाब दिया।

पिछले साल एग्जिट पोलों में भाजपा के नेतृत्व में जीत दिखाई गई थी। उस समय भाजपा ने अकेले 300 का आँकड़ा पार करते हुए 303 सीटें पर कब्जा कर लिया था जबकि एनडीए की सीटें 352 थी। वहीं कॉन्ग्रेस के कुल 52 सीट मिली थी।


सोनिया, राहुल और प्रियंका ने पहली बार कांग्रेस को और केजरीवाल ने आप को वोट नहीं दिया वोट

अब लोक सभा चुनाव 2024 अपने आखरी पड़ाव पर आने पर कांग्रेस की भयंकर गलती पर चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस का आम आदमी पार्टी(आप) से समझौता करना ही भयंकर फैसला था। जिस शराब घोटाले पर केजरीवाल पार्टी पर घोर संकट आया है, उसे लाने वाली कांग्रेस ही है, अजय माकन की ही शिकायत पर शराब घोटाला सामने आया। समय था इस मुद्दे को भुनाने का, लेकिन आप की तरह कांग्रेस ने भी बीजेपी को कसूरवार ठहराना शुरू कर दिया, अंजाम ये हुआ कि कांग्रेस की गेंद को तुरंत बीजेपी ने लपक मुद्दा बना दिया। जैसाकि सभी जानते हैं कि दिल्ली बीजेपी यूनिट पूर्णरूप से नाकारा है, ये पूरी तरह से मोदी-योगी पर आश्रित है। अगर कांग्रेस ने गठबंधन में केजरीवाल को अलग रख चुनाव लड़ा होता, चुनाव का रंग कुछ बदल सकता था। इस चुनाव में बीजेपी विरोधियों द्वारा गठबंधन करना ही भयंकर गलती रही। पंजाब में अकेले चुनाव लड़ना कांग्रेस को कुछ फायदा पहुंचा सकता है। पंजाब में पुनः खड़ा होने के लिए कांग्रेस को केजरीवाल पार्टी का घोटालों को लेकर खुलकर विरोध करना चाहिए। स्वाति मालीवाल कांड को भी उछालने की जरुरत है। दिल्ली विधानसभा चुनाव भी ज्यादा दूर नहीं, केजरीवाल सरकार की कमियों को उछाल और अपने संगठन को मजबूत करना चाहिए। 

केजरीवाल ने भी चुनाव का बहाना कर जमानत लेना, ऊपर से राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल कांड कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। जेल में रहते जो सहानभूति केजरीवाल पार्टी को मिलती वह नहीं मिल पायी। बीजेपी विरोध में बने गठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान केजरीवाल से समझौता करना बहुत भारी पड़ने जा रहा है। दूसरे राहुल द्वारा मुस्लिम कार्ड खेलना, टुकड़े-टुकड़े गैंग को टिकट देना, गठबंधन को बहुत नुकसान कर रहा है, जिस वजह से वोट का ध्रुवीकरण बीजेपी को फायदा कर रहा है। 
वोट डालने में भी घपला कर दिया नटवर लाल जी ने
जब हम लोग वोट डालते हैं तो स्याही बाएँ हाथ की उँगली में लगाई जाती है!
इस फोटो में साफ़ दिखाई दे रहा है कि सुनीता जी ने दाएँ हाथ की उँगली में स्याही लगवाई हुई है अब इसमें क्या घपला है मेरी समझ से परे है इसका जवाब तो दिल्ली के महा ठग जी ही दे सकते हैं!
अपने आप को इनका पूरा परिवार बहुत पढ़ा लिखा बताता है सुनीता जी तो ख़ुद एक govt अफ़सर रह चुकी हैं क्या इनको नहीं पता कि वोट देते समय स्याही बाएँ हाथ की उँगली में लगाई जाती है या इन्होंने अपनी ताना साही दिखा कर के मना कर दिया की मैं तो दाएँ हाथ की उँगली में ही स्याही लगवाऊँगी या यहाँ भी सुनीता जी ने अपनी अकड़ दिखाई?
इलेक्शन कमीसन के निर्देशा अनुसार अगर बाएँ हाथ की वोट वाली उँगली में कोई दिक़्क़त हो तो उसके बाएँ हाथ की किसी अन्य उँगली में स्याही लगाई जा सकती है और अगर वोटर के पूरे बाएँ हाथ में कोई दिक़्क़त हो तो दाएँ हाथ की उँगली में स्याही लगाई जा सकती है तो मैं जानना चाहता हूँ कि सुनीता जी ने दाएँ हाथ की उँगली में स्याही क्यों लगवाई क्या उन्हें यह रूल नहीं पता या कोई और बात है?

25 मई को लोकसभा चुनाव के छठे चरण में दिल्ली की सात सीटों पर वोट डाले गए। लेकिन यह जानकर हैरानी होगी कि यह पहली बार है कि किसी लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार के किसी सदस्य ने अपनी पार्टी कांग्रेस को वोट नहीं दिया। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के वोटर हैं। प्रियंका वाड्रा के पति और बच्चे भी दिल्ली के ही वोटर हैं। फिर भी ऐसा पहली बार है कि इन लोगों ने कांग्रेस के लिए मतदान नहीं किया। कांग्रेस दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। और नई दिल्ली लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी को मिला है। इसलिए यहां कांग्रेस अपना उम्मीदवार नहीं उतार सकी और गांधी परिवार के सदस्य पहली बार अपनी कांग्रेस पार्टी को वोट नहीं दे सके।

यही हालत आम आदमी पार्टी संयोजक अरविन्द केजरीवाल और परिवार की है, क्योकि इनके क्षेत्रों में INDI गठबंधन के उम्मीदवार थे।   

सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं। करीब 60 साल तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस की हालत ये हो गई है कि उसके दो पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पार्टी के लिए वोट नहीं डाल सके। इसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी किरकिरी हो रही है। 


मध्य प्रदेश : मनमोहन की सरकार में मंत्री रहे कांति लाल भूरिया 4 निकाह वालों के लिए खजाना खोलेगी कांग्रेस : 1 बीवी पर 1 लाख रूपए, 2 पर 2 लाख रूपए…

लोक सभा चुनाव 2024 को कांग्रेस ने लगभग हिन्दू बनाम मुस्लिम की ओर मोड़ दिया है। राहुल गाँधी द्वारा अपने निकटस्थों को सत्ता में आने पर शाहबानो की तरह राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदलने की बात पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम द्वारा बताया गया। वैसे तो दूर तक भी कांग्रेस या INDI गठबंधन सत्ता के जाते नहीं दिख रही, फिर अगर असंभव सम्भव हो गया और राममंदिर निर्णय को बदल दिया, निश्चितरूप कांग्रेस देश को गृह युद्ध की तरफ धकेल देगी। 

दूसरे, गाँधी परिवार द्वारा देश की आज़ादी के लिए क़ुरबानी देने की बात कहकर क्यों देश को गुमराह किया जा रहा है? जवाहरलाल नेहरू को जेल हुई, 2 दिन में माफ़ी मांग बाहर आ गए, जो वीर सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार से माफ़ी मांगने के दुष्प्रचार के दिनों में TimesNow के 'नवभारत' चैनल पर नेहरू के माफीनामा को दिखाया गया था। रही बात इंदिरा गाँधी की हत्या की, जिस खालिस्तान ने इंदिरा  जान ली, वही खालिस्तान तथाकथित किसान आंदोलन में नज़र आया, फिर भी कांग्रेस ने अपना समर्थन क्यों दिया? राजीव गाँधी की मानव बम में हत्या हुई, लेकिन परिवार दोषियों को माफ़ कर देती है, क्यों?   

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में हर महिला को जो 1 लाख रुपए देने का वादा किया है, उसके पीछे मंशा क्या है इसका खुलासा हाल में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के बयान से हुआ। मध्य प्रदेश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और रतलाम के कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने यहाँ जनसभा को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि कॉन्ग्रेस बाकी महिलाओं को 1 लाख रुपए देगी और दो बीवी वाले लोगों को 2 लाख रुपए देगी।

उनकी यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में वह कहते दिखाई पड़ रहे हैं कि कांग्रेस हर महिला को एक लाख रुपए देगी। सरकार आते ही एक लाख देगी। इसके बाद मुँह पर हँसते हुए बोले जिस व्यक्ति की दो पत्नियाँ हैं, उसे दो लाख रुपए सालाना दिए जाएँगे। इसके अलावा कांग्रेस ने चुनावी घोषणापत्र में सभी महिलाओं के खातों में एक-एक लाख रुपये देने की बात कही है।

बताया जा रहा है कि जिस रैली में कांग्रेस प्रत्याशी ने ऐसी बात कही है उस रैली में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे। मंच पर बैठकर इन लोगों ने भूरिया की बात पर न केवल उनका समर्थन किया था बल्कि ये तक कहा था कि जिसकी दो पत्नियाँ, उसको डबल।

 कांतिलाल भूरिया की बात सुनने के बाद जहाँ कांग्रेस के नेता उनको समर्थन करने से पीछे नहीं हट रहे। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स इस बयान को सुनने के बाद कह रहे हैं कि क्या कांग्रेस अप्रत्यक्ष रूप से यह कहना चाह रही है कि वो मुस्लिमों को (जिन्हें इस्लाम में 4 निकाह करने की इजाजत है) उन्हें चार लाख रुपए तक देगी।

कुछ तो यह भी कह रहे हैं कि इस तरह की स्कीमें सिर्फ मुस्लिमों को ज्यादा निकाह करने में बढ़ावा देंगी, इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं। वहीं कुछ स्पष्ट पूछ रहे हैं कि आखिर हिंदू जब दो शादी कर नहीं सकते तो ये पार्टी इस स्कीम के जरिए किस समुदाय तक पहुँचने के लिए अपना प्रचार कर रही है।

हैदराबाद : हिंदुओं को ’15 मिनट’ की धमकी देने वाले ’15 सेकेंड’ की दहाड़ से बौखलाए, माधवी लता के लिए हैदराबाद आईं नवनीत राणा, कहा- पता नहीं चलेगा ओवैसी कहाँ गए

हैदराबाद की BJP प्रत्याशी माधवी लता के समर्थन में 8 मई 2024 को महाराष्ट्र के अमरावती की सांसद नवनीत राणा ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हिंदुओं को ’15 मिनट’ की धमकी दिए जाने का ऐसा जवाब दिया कि AIMIM बौखला उठी। जिस पार्टी के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कभी कहा था कि ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’, उस पार्टी के नेता अब नैतिकता की बात करने लग गए हैं।

नवनीत राणा ने कहा, “एक छोटा भाई है, एक बड़ा भाई है…छोटा (अकबरुद्दीन ओवैसी) बोलता है कि पुलिस को 15 मिनट हटा दो तो हम दिखाएंगे की क्या कर सकता है। छोटे को मेरा कहना है कि तेरे को 15 मिनट लगेंगे और हमको सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे। 15 सेकेंड पुलिस को हटाया तो छोटे और बड़े (असदुद्दीन ओवैसी) को पता नहीं लगेगा कि कहाँ से आया और कहाँ से गया। सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे।”

राणा के इस बयान की वीडियो क्लिप जगह-जगह वायरल है। AIMIM के लोग इस बयान से काफी आहत कहे जा रहे हैं। वह इस बयान को लेकर राणा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में पार्टी प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा राणा का यह बयान आयोग के नियमों का उल्लंघन करता है क्योंकि इससे दो समुदायों के बीच तनाव हो सकता है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, अगर नवनीत जैसा भाषण वारिस पठान देते तो वो जेल की सलाखों के पीछे होते। अकबरुद्दीन ओवैसी ने 15 मिनट पुलिस हटा दो वाले बयान के बाद खुद सरेंडर किया था। वो 40-42 दिन जेल में रहे थे। दस साल उन्होंने अदालत में लड़ाई लड़ी और बरी हुए। चुनाव आयोग नवनीत राणा पर कब कार्रवाई करेगी और कब उन्हें जेल भेजेगी। आए दिन मुसलमानों के विरोध में बयान दिए जाते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।

साल 2013 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने ’15 मिनट हटा लो पुलिस को’ वाला विवादित बयान दिया था। अपने भड़काऊ बयान में उन्होंने कहा था, “अगर 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हम (मुसलमान) 100 करोड़ (हिंदुओं) को खत्म कर देंगे।” इस भड़काऊ बयान को सुनने के बाद उनपर आईपीसी की धारा 120 बी और 153ए व अन्य धाराओं के तहत लंबा केस चला था। 2022 में उन्हें इस मामले में जाकर बरी किया गया था। बाद में उन्होंने जेल से निकलकर अपने ऊपर भड़काऊ बयानबाजी करने वाले आरोपों को खारिज करने की कोशिश की थी।

क्या 4 जून के बाद 2 हिस्सों में टूट जाएगी कांग्रेस? क्या कांग्रेस इतिहास बन जाएगी?


राजनीति और लोकतंत्र में आरोप लगाना कोई गलत बात नहीं, लेकिन उन आरोपों का आधार होना चाहिए। जब आधारहीन आरोप लगाने में समस्त विपक्ष लामबंद नहीं हुआ, बल्कि अपना ही अस्तित्व ख़त्म कर रहे हैं। माना जिन दिनों तुम्हारी तूती बोलती थी, तुमने लगभग 5 अरबों वर्षों से प्राचीन सनातन और गौरवशाली इतिहास को धूमिल एवं कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आतताई गाज़ियों को महान मुग़ल बादशाह बताकर मुस्लिम तुष्टिकरण की हर पराकाष्ठा को तार-तार करने में शर्म नहीं आयी। भारत में कम्युनिस्ट पार्टी एक अपवाद को छोड़ जितनी भी पार्टियां हैं, सभी कांग्रेस के ही गर्भ से जन्मी हैं, चाहे बीजेपी हो। लेकिन राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर बनी तत्कालीन भारतीय जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस होश में नहीं आयी। 

परिवार भक्त उस समय भी अंधे हो गए, जब सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के लिए तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर फेंक दिया था, उस दिन कांग्रेस ने इतिहास बनने का अध्याय लिख दिया था। तब से देख लो कांग्रेस बैसाखियों पर आ गयी। और अब 2024 लोक सभा चुनाव कांग्रेस के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने जा रहा है। यह भी अटकलें लगाई जा रही है हैं कि कांग्रेस अपना राष्ट्रीय स्तर का स्थान बनाए रखने में सक्षम होगी?   

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को आएँगे, लेकिन उसके बाद देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हो जाएँगे। गाँधी परिवार के बेहद करीबी रहे नेता ने दावा किया है कि 4 जून के बाद कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में टूट सकती है। ऐसा होने पर कांग्रेस के एक धड़े का नेतृत्व राहुल गाँधी करेंगे, तो दूसरे धड़े का नेतृत्व प्रियंका गाँधी वाड्रा। ये दावा किया है प्रियंका गाँधी वाड्रा के बेहद करीबी रहे नेता प्रमोद कृष्णम ने, जिन्हें कांग्रेस पार्टी से 6 साल के लिए निकाला जा चुका है।

प्रमोद कृष्णम ने दावा किया राहुल गाँधी ने रायबरेली से प्रियंका गाँधी की जगह खुद को चुनाव मैदान में उतार कर बड़ी गलती कर दी है, इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। ये नाराजगी 4 जून के बाद खुलकर सामने आ जाएगी, जब पार्टी दो हिस्सों में टूट जाएगी। 

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में प्रमोद कृष्णम ने ये दावा किया है। प्रमोद कृष्णम ने दावा किया है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के भीतर एक साजिश हो रही है, जिसका वो शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का एक बड़ा धरा नहीं चाहता है कि प्रियंका गाँधी संसद के अंदर पहुँचें। इससे पहले भी आचार्य प्रमोद कृष्णम प्रियंका गाँधी का खुलकर समर्थन कर चुके हैं

   

 https://youtube.com/shorts/XqFL8r6iUw0?si=Shlw1g-TZJ0pkxCv

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गाँधी के अमेठी छोड़ने के बाद रायबरेली से लड़ने के फैसले को गलत फैसला बताया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जब राजा मैदान छोड़कर कर भाग जाता है, तो सेना हार मान लेती है। अभी देखना कांग्रेस पार्टी के बहुत नेता भागेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपमान पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा राहुल गाँधी को ये भी नहीं पता होगा द्वारिका कहाँ है? द्वारिकाधीश कौन हैं? उनको तो केवल दिल्ली की द्वारिका का ही पता है।

प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राहुल गाँधी ने प्रियंका गाँधी के खिलाफ साजिश रची है। इसकी वजह से 4 जून के बाद कांग्रेस में एक और टूट होगी। एक कांग्रेस होगी राहुल गाँधी की और एक होगी प्रियंका गाँधी की। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अंदर ज्वालामुखी धधक रहा है। इस पूरे षडयंत्र के बारे में प्रियंका गाँधी को जानकारी है।

शायद यही कारण है कि इस चुनाव में प्रियंका प्रचार करेंगी, चुनाव नहीं लड़ रही। राहुल से तेज प्रियंका नज़र आ रही है। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। यानि अब पछताए क्या होय जब चिड़ियाँ खेत चुग जाएं। अब प्रियंका को जनता को इस ज्वलंत प्रश्न का भी जवाब देना पड़ेगा कि जिस अपने पिता राजीव की हत्या को बलिदान की संज्ञा क्यों दी जा रही है? क्यों पिता के हत्यारों को माफ़ किया? क्या कोई अपने पिता के हत्यारों को माफ़ करता है? क्या इस हत्या के पीछे कोई पारिवारिक षड़यंत्र था?     

जो वोट देने नहीं जा रहे, वो अपना और अपनी पीढ़ियों का दुर्भाग्य अपने हाथ से लिख रहे हैं; मोदी से सब कुछ लेकर कुछ हैं जो उसे वोट नहीं दे रहे और कुछ सब कुछ लेकर वोट ही नहीं दे रहे ; देखें वीडियो

 सुभाष चन्द्र

एक व्यक्ति नरेंद्र मोदी अकेला ऐसा है जिसके परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा और जो जन जन के लिए, देश के लिए अपना पसीना बहा रहा है, हर किसी को हर सुविधा बिना भेदभाव के दे रहा है, किसी का धर्म नहीं देख रहा और जिसने देश को 10 साल में सशक्त बना दिया, फिर भी अनेक लोग ऐसे हैं जो वोट डालने से कतरा रहे है। इससे बड़ी अहसानफरामोशी हो नहीं सकती। 

मेरे क्षेत्र में 26 अप्रैल को वोट पड़ने थे और मेरा वोटिंग सेंटर मेरे घर से मात्र 500 मीटर दूर था लेकिन कुछ परिस्थिति ऐसी थी कि मैं वोट डालने नहीं जा सकता था लेकिन जीवन में ऐसा हुआ नहीं कि वोट न डाला हो, इसलिए अपने एक निजी टैक्सी वाले को बुलाया जो मुझे हर संभव मदद करके वोट करा कर एक घंटे में वापस ले आया और उसे मैंने 600 रुपए बतौर भाड़ा दिए, लेकिन संतोष था कि कठिनाई होने के बावजूद मैं वोट कर सका।  वह उस महामानव के लिए एक प्रणाम था जिसने अपना सब कुछ देश के लिए दाव पर लगा दिया है। 

लेखक 
चर्चित यूटूबर 
मैं अनेक वीडियो देखता हूं जिनमे एक कौम के लोग मानते हैं, उन्हें मोदी से सब कुछ मिला, फ्री राशन मिला, घर मिला, शौचालय मिला, नल से जल मिला, बच्चे के जन्म के लिए 6000 रुपए भी मिले, गैस कनेक्शन मिला, आयुष्मान भारत में फ्री इलाज भी मिला और ट्रिपल तलाक से  ऐसी मुक्ति मिली कि अब रात के अंधेरे में शौहर के तलाक तलाक तलाक कह कर घर से निकालने का डर भी मोदी ने ख़त्म कर दिया लेकिन फिर भी दृढ हैं कि मोदी को वोट नहीं देंगे। 

दूसरी तरफ हमारे लोग हैं जो हर सुविधा पा रहे हैं, बढ़िया ट्रेन हैं, बढ़िया हाईवे हैं, बढ़िया हवाई यात्रा करते हैं, देश में चारो तरफ धार्मिक टूरिज्म समेत हर तरह के टूरिज्म का मजा लेते है, बढ़िया से बढ़िया मोबाइल जेब में रहते हैं और डाटा भी फ्री जैसा है, रेलवे स्टेशन भी चमकते दिखाई देते हैं, जिन बसों में ट्रेन्स में सफर करते हैं उनमे और बाज़ारो में आतंकी हमले नहीं होते उन्हें महसूस होते है जो पहले आए दिन होते थे, कश्मीर में ख़ुशी की बयार है, शेयर मार्किट में पैसा भी कमा रहे होंगे लेकिन वोट के दिन वोट देने के जाने को तैयार नहीं हैं। 

एक बार कभी ऐसे लोग दिल पर हाथ रख कर सोचने की कोशिश करें कि उनका वोट न देना क्या देश और समाज के साथ गद्दारी नहीं है।  आप अगर यह चाहते हैं कि मोदी आपके लिए सब कुछ करता रहे और आप वोट देने भी न जाएं तो एक दिन कुदरत आपका भी हिसाब कर सकती है।  याद रखें कि इस वोट के अधिकार के लिए लाखों लोग बलिदान हो गए थे। देखें वीडियो और आंखें खोलो: 

जो कार्यक्रम कांग्रेस दे रही है, उसे देख कर भी यदि हमारे लोग घर बैठना चाहते हैं तो ऐसा करके वे अपने हाथ से अपना और अपनी पीढ़ियों का दुर्भाग्य लिख रहे हैं, उस दिन नींद खुलने से कोई लाभ नहीं होगा जब कांग्रेस की लुटेरी सरकार ऐसे लोगों के दरवाजे पर खड़ी होगी। 

अब समय आ गया है ऐसे लोगों की हमारे समाज के लोग ही जानकारी जुटा कर रखें और उनका सामाजिक बहिष्कार करें।  ऐसे लोग यदि सरकार के मंत्रियों या विधायकों के पास अपनी समस्या लेकर जाएं तो उन्हें पिकनिक पर जाने के लिए कह दिया जाए।  मुसलमानों का तो कुछ नहीं हो सकता, इक्का दुक्का मुस्लिमों के मोदी के हक़ में बयान देने से कुछ नहीं होगा, अधिकांश मुस्लिम क्या कर रहा है, ये देखिए - जिन मुस्लिमों को लगता है मोदी सब कुछ देकर भी उन्हें प्रताड़ित कर रहा है और या भेदभाव कर रहा है तो वे इस देश में रहने योग्य नहीं हैं, उन्हें वहां जाना चाहिए जहां मोदी न हो और सब कुछ मिले। 

पश्चिम बंगाल : ‘तुम (हिंदू) 30%, हम (मुस्लिम) 70%… 2 घंटे में भागीरथी में बहा दूँगा’: TMC विधायक हुमायूँ कबीर ने चुनाव प्रचार के दौरान धमकाया; कहाँ है संविधान और हिन्दू-भाईचारा का रोना रोने वाले?

लोकसभा चुनाव 2024 के तीसरे चरण के लिए मतदान की तैयारियों के बीच पश्चिम बंगाल के तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक हुमायूँ कबीर ने हिंदुओं को धमकी दी है। चुनाव प्रचार करने के दौरान हुमायूँ कबीर ने कहा है कि वह हिंदुओं को दो घंटे में भागीरथी नदी (गंगा) में डूबो देंगे। कबीर के इस बयान की जमकर आलोचना हो रही है।

यदि हुमायूँ की बजाए किसी हिन्दू ने मुसलमानों के लिए ऐसी बात बोल दी होती अब तक मीडिया समेत जितने भी कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स गली-कूचों से आसमान तक चील-कौओं की तरह चीख पुकार कर रहे होते। हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा और संविधान खतरे में चिखचिल्ली मचा रहे होते, लेकिन बेशर्म मीडिया समेत सब संविधान और हिन्दू-मुस्लिम के पुरोधाओं के घरों में हो रहे मातम की वजह से मुंह में दही जमाए बैठे हैं। 

हुमायूँ कबीर भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। भरतपुर मुर्शिदाबाद जिले में आता है। बीते दिनों उन्होंने बहरामपुर से TMC के उम्मीदवार यूसुफ पठान के लिए भी चुनाव प्रचार किया था। इसके अलावा, वे पार्टी के कई उम्मीदवारों के प्रचार में शामिल हुए। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह विवादित टिप्पणी की है। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए हुमायूँ कबीर ने कहा, “तुम लोग (हिंदू) 70 फीसदी हो और हम लोग भी 30 फीसदी हैं। यहाँ पर तुम काजीपाड़ा का मस्जिद तोड़ोगे और बाकी मुसलमान हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे, यह कभी नहीं होगा। भाजपा को मैं यह बता देना चाहता हूँ कि यह कभी भी नहीं होगा। अगर 2 घंटे के अंदर भागीरथी नदी में बहा न दिया तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा।”

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC ने लोकसभा चुनाव के लिए क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद हुमायूँ कबीर ने कहा था कि अगर पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बदला तो वह बहरामपुर से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। कबीर ने कहा था कि दूसरे राज्य से किसी को लाकर कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को नहीं हराया जा सकता है। 

मुर्शिदाबाद जिला मुस्लिम बहुल है। यहाँ की कुल जनसंख्या में लगभग 75 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। यहाँ की अधिकांश आबादी बीड़ी बनाने के व्यवसाय से जुड़ी हुई है। मुर्शिदाबाद कभी बंगाल की राजधानी भी रही थी। यहाँ का हजारद्वारी महल इसके गौरवशाली अतीत का आईना है, फिर भी अधिकांश लोग गरीबी में जीने को मजबूर हैं

इसको लेकर भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने बंगाल सरकार पर हमला बोला है। शक्तिपुर में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में कबीर की टिप्पणी पर उन्होंने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “मुर्शिदाबाद में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। सिर्फ 28 प्रतिशत। अब यह उनके साथ किया जा रहा है। कल्पना कीजिए, अगर हिंदू बंगाल के बाकी हिस्सों में अल्पसंख्यक हो जाएँ तो क्या होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति नए निचले स्तर पर पहुँच गई है। ममता बनर्जी को धन्यवाद। बंगाल में हिंदू अब दोयम दर्जे के नागरिकों से भी बदतर हैं। क्या वह इस विधायक को पार्टी से बाहर निकालने की हिम्मत करेगी? क्या वे बुद्धिजीवी, जो नियमित रूप से हिंदुओं के खिलाफ जहर फैलाते हैं, एक शब्द भी बोलने का साहस कर सकते हैं?”

चुनाव की तारीखें ही कारण बन गईं कम “मतदान” का; चुनाव आयोग ने 7 चरणों का मतदान ऐसे दिनों पर तय किया जिससे कम मतदान हो

सुभाष चन्द्र

बहुत लोग हैं जो मतदान करने से कतराते हैं, किसी के पास जायज कारण हो सकते हैं वोट न देने के लिए लेकिन अधिकांश वोट न देने वाले वोट देना जरूरी नहीं समझते और चुनाव तिथि से लगते दिनों को जोड़ कर छुट्टी पर चले जाते हैं। चुनाव आयोग ने इस बार ऐसी ही तिथियों पर 7 चरणों के मतदान रखें जो लोगों को गायब होने और मतदान न करने का मौका दे सकें। 

आइए देखते हैं चुनाव आयोग ने कैसी लापरवाही की है?

पहले 2 चरणों के चुनाव 19 और 26 अप्रैल को थे और दोनों दिन शुक्रवार था। शुक्रवार के दिन मतदान रखना चुनाव को पूरी तरह सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश होता है क्योंकि मुस्लिम हर मस्जिद में जुड़ते हैं चुनाव के लिए और वहां उनके लीडर उन्हें उटपटांग हिदायतें देने हैं भाजपा को हराने के लिए वोट देने के लिए। दूसरी तरफ शुक्रवार की छुट्टी लेकर शनिवार रविवार जोड़कर 3 दिन की छुट्टी बनती है। चलो जी क्या करना है वोट कर, पिकनिक पर जाते हैं, उन्हें कोई धर्म का पाठ पढ़ाने वाला तो है नहीं जो वोट देने के लिए Motivate कर सके। “तो कम मतदान का जिम्मेदार कौन -चुनाव आयोग”?

लेखक 
चर्चित यूटूबर 

यह बात ओवैसी ने अपने किसी बयान में कही भी है कि जुमे के दिन कोई ताकत मुसलमानों की इच्छा पूरी होने से नहीं रोक सकती वो जिसे वोट देंगे वो हर हाल में जीतेगा। आखिर क्या सोच कर आयोग ने 2 दिन मतदान शुक्रवार को रखा।

3rd चरण का मतदान 7 मई को हैं जिस दिन मंगलवार है। अधिकांश सरकारी कार्यालय शनिवार रविवार को बंद रहते हैं और एक सोमवार की छुट्टी लेकर मंगलवार का चुनाव का दिन मिलाकर 4 दिन की छुट्टी बनेगी। बहुत होंगे ऐसा सोचने वाले कि मतदान करके क्या करना है। “फिर कम मतदान होना तो तय है और जिम्मेदार होगा चुनाव आयोग”।

4th और 5th चरण 13 और 20 मई को हैं और दोनों दिन “सोमवार” हैं। और चुनाव आयोग ने बना दी 3 दिन की छुट्टी, यानी शनिवार रविवार और सोमवार को मतदान। मतदान कम क्यों नहीं होगा और जिम्मेदार चुनाव आयोग क्यों नहीं माना जाए?

6th और 7th चरण का मतदान है 25 मई और 1 जून को और दोनों दिन “शनिवार”। मिला रविवार के साथ बन गई 2 छुट्टी। किसी के पास 2 casual leave हैं तो शुक्रवार और सोमवार की छुट्टी लेकर 4 दिन मौज के लिए जा सकता है। फिर मतदान कैसे कम नहीं होगा लेकिन उम्मीद है चुनाव आयोग उसके लिए जिम्मेदारी नहीं लेगा।

चुनाव के समय मतदान के आसपास की तिथियों पर किसी को छुट्टी दी ही जाए और ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। सरकार से मिलने वाली सुविधाएं ऐसे लोगों के बंद कर देनी चाहिए।

दिल्ली : आम आदमी पार्टी उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने मुस्लिम वक़ार चौधरी को परोस दिया सूअर का मीट

                  वकार चौधरी के घर पहुँच कर AIMIM नेता शोएब जमाई व अन्य ने सहानुभूति जताई
दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेता वकार चौधरी ने आरोप लगाया है कि पूर्वी दिल्ली से पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी कुलदीप कुमार ने उन्हें जंगली मीट परोस दिया। उन्होंने एक वीडियो के जरिए ये जानकारी दी और कहा कि वो बहुत दुःखी और आहत हैं। वकार चौधरी ने कहा कि वो सो नहीं पा रहे हैं, उन्हें सुकून नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि रात के समय चुनाव प्रचार निपटा कर वो कुलदीप कुमार के दफ्तर पहुँचे, उन्हें काफी तेज़ भूख लगी हुई थी तो कुलदीप कुमार से पूछा कि क्या कुछ खाने को है?

वक़ार ही नहीं समस्त मुस्लिम समाज को अब जान जाना चाहिए कि anarchy मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का विधायक, वर्तमान लोक सभा उम्मीदवार, शरीफ कैसे हो सकता है। संभव है, पूर्व में हुई दावत में यही मीट खिलाया गया हो, भेद अब खुला है।  

 वकार चौधरी ने बताया कि कोंडली से AAP विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि नॉनवेज है, खा लीजिए। बकौल वकार चौधरी, कुलदीप कुमार ने कहा कि सब नॉनवेज एक तरह का ही होता है। वकार चौधरी का कहना है कि इसके बाद उन्हें शक हुआ, क्योंकि एक बार कुलदीप कुमार उनके घर भी आए थे और पूछा था कि आप तो जंगली का मांस खा लेते होंगे। वकार चौधरी के अनुसार, उन्होंने जवाब दिया कि इस तरह का मजाक ठीक नहीं है। वकार चौधरी ने कुलदीप कुमार की सोच को छोटी बताते हुए पूछा कि आप एक मुस्लिम को जंगली का गोश्त ऑफर कर रहे हैं?

वकार चौधरी ने कहा कि इसका नाम तक लेने से कई दिनों तक दुआएँ कबूल नहीं होती, और आप एक हाजी को जंगली का गोश्त खिलाना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी आलाकमान से कहा कि कुलदीप कुमार को हटा कर किसी भी अन्य नेता को प्रत्याशी बना दिया जाए। इस मामले के सामने आने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई अपने साथी नेताओं के साथ वकार चौधरी के यहाँ पहुँचे और उनके प्रति सहानुभूति जताई।

AIMIM नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया। बता दें कि मुस्लिमों में सूअर का मांस हराम माना जाता है। इस दौरान वहाँ जुटे मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने ‘कुलदीप कुमार वापस जाओ’ और ‘कुलदीप कुमार माफ़ी माँगो’ के नारे भी लगाए। वकार चौधरी ने समर्थन के लिए शोएब जमाई का समर्थन भी दिया। इसी तरह आंध्र प्रदेश के ‘नव रंग पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जलील शेख़ ने कुलदीप कुमार के विरोध में वकार चौधरी को अपना और पूरी पार्टी का समर्थन दिया।

वकार चौधरी ने ट्विटर के माध्यम से कहा, “कुलदीप कुमार क्या खाते हैं, मुझे इससे कोई एतराज नहीं है पर में चाहता हूँ की वो मेरे मजहब की भी उसी तरह से इज्जत करे जैसे कि मैं उनके धर्म की इज्जत करता हूँ। मैं अपने हक़ और अपने मजहब को बचाने की लड़ाई लड़ रहा हूँ, आपसे दरखास्त है इस मुहीम में आप मेरा साथ दे मुझे इंसाफ चाहिए आप मेरा साथ देंगे।” उन्होंने कुलदीप कुमार को ‘मुस्लिमों का गुनहगार’ करार दिया। सभा में मंत्री आतिशी भी आने वाली थीं, लेकिन विरोध के कारण वो नहीं आईं।

दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष ने पद से दिया इस्तीफा: AAP से गठबंधन और कन्हैया कुमार को टिकट देने पर जताई नाराजगी INDI गठबंधन हो गया उरांझू

मैनिफेस्टो में मुस्लिम हितों की बात होने की वजह से कट्टरपंथी मुसलमानों से एकतरफा यानि कांग्रेस को ही वोट देने की अपील/फतवा कर रहे है, लेकिन कांग्रेस में फूट होने से कांग्रेस ही नहीं, INDI गठबंधन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिससे गठबंधन में शामिल सारी पार्टियां डरी हुई है। अगर गठबंधन में आम आदमी पार्टी(आप) को नहीं लिया होता, तब भी बात संभले हुए थी, क्योकि जिस घोटाले को कांग्रेस ने उछाल अरविन्द केजरीवाल और कई नेताओं को जेल पहुँचाया, उसी को शामिल कर कांग्रेस ने खुद ही रायता फैला दिया, और घोटाले का श्रेय बीजेपी ले गयी। रही बात मुस्लिमों की, जब तक यह कट्टरपंथियों के मकरजाल से बाहर नहीं आएगा, यह उपेक्षित ही होता रहेगा। 
लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन 
कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। अब दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने टिकट बँटवारों में अनदेखी और दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से गठबंधन का आरोप लगाया है।

लवली ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को चार पेज का अपना त्याग पत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया। अरविंदर सिंह लवली को अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस को राजधानी में स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए।

 लवली ने कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “प्रभारी ने मुझे पंगु बना रखा है। वह मुझे पार्टी नहीं चलाने दे रहे हैं। मेरी सलाह पर कोई नियुक्ति नहीं की जाती है। प्रदेश कांग्रेस की रजामंदी नहीं होने पर भी AAP के साथ गठबंधन किया गया।” उन्होंने आरोप दिल्ली के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “दिल्ली कांग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, जो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के एकमात्र आधार पर गठित की गई थी। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया।” बता दें कि गठबंधन के बाद दिल्ली की कुल सात सीटों में से तीन कांग्रेस को मिली है।

लवली कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी से भी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि स्थानीय उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया। अपने पत्र में लवली ने आगे लिखा है, “तीन सीटों पर प्रत्याशी चुनने में भी प्रदेश इकाई की सहमति नहीं ली गई। उत्तर पूर्वी में कन्हैया कुमार और उत्तर पश्चिमी दिल्ली से उदित राज को टिकट दिया गया, जबकि स्थानीय उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया गया।”

उन्होंने पार्टी हाईकमान पर सवाल उठाते हुए कहा, “पार्टी उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय लेना हाईकमान का विशेषाधिकार है। हालाँकि, चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार जब हाईकमान ने उपरोक्त 2 उम्मीदवारों के संबंध में निर्णय ले लिया तो औपचारिक घोषणा से पहले पीसीसी को सूचित भी नहीं किया गया।”

फिर उठ रहा कांग्रेस के घोषणा पत्र पर सवाल; सरकारी ठेका लेने के लिए क्या हिंदुओं को मुस्लिम बनना होगा? कांग्रेस ने चुनाव को हिन्दू बनाम मुस्लिम बना दिया ; देखिए अन्य मजहबों में कितनी जातियां एक दूसरे के जानी दुश्मन है

इतिहास लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है, वर्तमान 2024 का चुनाव हिन्दू बनाम मुस्लिम बन चूका है, जिसकी जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस जिम्मेदार है। विधाता भी कांग्रेस के पतन के पक्ष में काम कर रहे हैं। कांग्रेस मैनिफेस्टो बनने पर लगता है या तो किसी ने नज़र भर भी देखा नहीं, और अगर देखा है तो बीजेपी द्वारा मैनिफेस्टो में विवादित बिन्दुओं पर देश को विभाजन की ओर धकेलने पर प्रहार करने पर चुनाव आयोग जाने का ड्रामा क्यों? बल्कि कहा जाए कि अपने गुप्त मुस्लिम एजेंडे को जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक खुलकर नहीं बोल पाया, जितना सोनिया गाँधी के हाथ में कांग्रेस की बागडोर आने के बाद से खुलकर सामने आ गया है। पहले हिन्दुओं पर प्रहार सुधार एवं रूढ़िवादी परम्पराओं को समाप्त कर वर्तमान परिवेश में जीने का साधन बताया गया। दरअसल कांग्रेस को जो रायता सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद से फैलना शुरू हुआ वह राहुल और प्रियंका के आने के बाद से और ज्यादा तेजी से फैलना शुरू हो गया है, जिसका सिमटना अब बिलकुल असंभव हो चूका है, और वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं जब कांग्रेस बहुत जल्दी एक इतिहास बनने वाली है। 

सोशल मीडिया पर चल रहे इस चित्र में बहुत वजन है, जो चीख-चीखकर कह रहा है कि कांग्रेस को बहुत बड़ा नुकसान हो गया है। कांग्रेस में जान फूंकने का अब सिर्फ रास्ता है गाँधी अपनी अरबों की पूंजी(देश-विदेशों में जमा) को बाँटने का लिखित बयान देते, और अपने वायदे से पलटने पर सजा देने का जनता को अधिकार है, कोई कानून परिवार के पक्ष में नहीं आए। बहुत हो चुका हिन्दू-मुसलमान।  

कांग्रेस ने मैनिफेस्टो में मुस्लिम हितों की बात कर अप्रत्यक्ष रूप से INDI गठबंधन को बाय-बाय कर दिया है। क्योकि मुसलमानों से एक तरफ़ा कांग्रेस को ही वोट करने का खूब प्रचार किया जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर भी सामने आ गया है। अब गठबंधन में शामिल पार्टियों को इस गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस से प्रश्न करना होगा।  

अब अगर कोई हिन्दुओं से एक तरफ़ा वोट करने को बोले किसी को इसे साम्प्रदायिकता कहने का अधिकार नहीं। 

हिन्दुओं को जातियों में बाँटने कर खूब बंदरबाट होती रही, लेकिन अन्यों पर बोलने की किसी में आज तक हिम्मत नहीं हुई या कहा जाए कि इनके विरुद्ध बोलने के लिए किसी ने माँ का दूध नहीं पिया। लेकिन नूपुर शर्मा के बयान को विवादित बनाए जाने एक्स-मुस्लिम ग्रुप खुलकर सामने आकर मुल्लावाद पर जो कुठाराघात हमले शुरू हुए है, आज तक धमने का नाम नहीं ले रहे। यह कटु सत्य है कि हिन्दुओं के अधिक जातिवाद अन्य धर्मों में है, देखिए :

 ईसाई धर्म

ईसा एक है, बाइबिल एक

फिर भी, लेटिन कैथलिक, सीरियन कैथलिक, मारथोमा, पेंटेकोस्ट, सैल्वेशन आर्मी, सेवेंथ डे एडवांटिष्ट, ऑर्थोडॉक्स, जेकोबाइट जैसे 146 फिरके आपस में किसी के भी चर्च में नहीं जाते।

इस्लाम:

अल्लाह एक, कुरान एक, नबी एक

फिर भी शिया, सुन्नी, अहमदिया, सूफी, मुजाहिद्दीन जैसे 13 फिरके एक दुसरे के खून के प्यासे। सबकी अलग मस्जिदें। साथ बैठकर नमाज नहीं पढ़ सकते। धर्म के नाम पर एक-दूसरे का कत्ल करने को सदैव आमादा।

सनातन धर्म

1280 धर्म ग्रन्थ,10 हज़ार से ज्यादा जातियां, अनगिनत पर्व एवं त्योहार,असंख्य देवी-देवता।

एक लाख से ज्यादा उपजातियां, हज़ारों ऋषि-मुनि, सैकड़ों भाषाएँ।

फिर भी सारे हिन्दू सभी मन्दिरों में जाते हैं और सारे त्योहारों को मनाते हुए आपस में शान्ति एवं शालीनता से रहते हैं।

यह है भव्यता, सुन्दरता और खूबसूरती हिन्दू धर्म की! फिर क्यों न गर्व हो हिन्दुओं को हिन्दू धर्म पर। 

लेकिन कांग्रेस ही नहीं, हिन्दुत्व विरोधी हिन्दू ही जातियों के नाम पर दुकानें(पार्टियां) खोलकर अपनी पीढ़ियों के लिए बैंक बैलेंस, और तिजोरियों भर रहे हैं और पागल, बुद्धि विहीन, लालची और पदभ्रष्ट हिन्दू इन हिन्दुओं को विभाजित करने वालों पर विश्वास कर रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी से सीखो, जब मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बोलता है तो केवल मुस्लिम हितों पर बोलता है, लेकिन हिन्दुओं के बीच आकर दलितों का हितैषी बन हिन्दुओं को विभाजित करता है। ऐसी ही दोगली सियासत दूसरे दल भी अपना कर अपनी दुकानें चलाकर हिन्दुओं का दमन करने में तुले हुए हैं। 

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के अपने घोषणा पत्र में जिस तरह के वादे किए हैं, उसकी तह में छिपी हुई उसकी तुष्टिकरण की नीति खुल-खुलकर सामने आ रही है। कभी मुस्लिमों की तुष्टिकरण के लिए बदनाम हो चुकी कांग्रेस इस दाग को धोना भी नहीं चाहती है। पीएम मोदी ने अपने भाषणों में कांग्रेस की घोषणा पत्र का पोल खोल दिया है।

उधर कांग्रेस बार-बार ये दोहरा रही है कि वह अपने घोषणा पत्र में किसी धर्म या मजहब का जिक्र नहीं किया है, लेकिन घोषणा पत्र पर शब्दों के साथ की गई जादूगरी को ध्यान से देखा जाए तो कांग्रेस की यह बात झूठ साबित होती है। कांग्रेस ने अल्पसंख्यक शब्द की आड़ में इस पूरे खेल को अंजाम दिया है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस के इस खेल को अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर साझा किया है। उन्होंने कांग्रेस के घोषणा पत्र के एक प्वॉइंट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इसमें लिखा है, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अल्पसंख्यक शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी ठेके, कौशल विकास, खेल और सांस्कृतिक विकास में बिना किसी भेदभाव के उचित साझेदारी का अवसर प्राप्त करें।”

शिक्षा-स्वास्थ्य आदि विषयों की बात तक तो ठीक है, लेकिन कांग्रेस सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी की सरकारी ठेकों में मुस्लिम वर्ग को उचित भागीदारी का अवसर मिले। सार्वजनिक कार्यों का ठेका कई नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत जारी किया जाता है। इसमें किसी तरह का धार्मिक भेदभाव की गुंजाइश नहीं होती है, लेकिन कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इसका जिक्र करके तुष्टिकरण की एक नई कोशिश की है।

अमित मालवीय अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखते हैं, “कांग्रेस यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि अल्पसंख्यकों (मुस्लिम पढ़ें) को ‘सार्वजनिक कार्य ठेका’ में उचित हिस्सा मिले? क्या तकनीकी और वित्तीय बोली के साथ अब धार्मिक कोटा भी होगा? क्या मुस्लिमों के पक्ष में योग्य बोलीदाताओं की अनदेखी की जाएगी?”

भाजपा IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पार्टी से पूछा, “क्या सार्वजनिक ठेका हासिल करने के लिए हिंदुओं को अल्पसंख्यकों बनना होगा, भले ही वे स्वयं ऐसा करने में सक्षम हों? क्या यह ‘टेंडर घोटाला’ की नींव नहीं रख रहा है?”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस न केवल एससी/एसटी/ओबीसी की संपत्ति पर कब्जा करना चाहती है, सोना और उनके मंगलसूत्र सहित हिंदू महिलाओं की छोटी बचत को अपने कब्जे में लेना चाहती है और इसे अल्पसंख्यकों के बीच वितरित करना चाहती है, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ आजीविका कमाने के अवसरों से भी वंचित करना चाहती है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह विरासत कर, सोना और मंगलसूत्र सहित कांग्रेस के विभाजनकारी मुद्दों को जनता के सामने ला चुके हैं। इन दोनों नेताओं ने अपनी कई जनसभाओं में इन मुद्दों का जिक्र किया है। कांग्रेस के घोषणा पत्र की वास्तविक सच्चाई सामने आने के पार्टी बौखलाई हुई भी नजर आ रही है।                                                     

केरल : बोगस वोटिंग दिखाने पर मुस्लिम लीग गुंडों ने पत्रकार को पीट दिया ; चुनाव आयोग ने क्या कार्यवाही की? क्या वहां का चुनाव रद्द होगा?

                              सीपीएम विधायक सीएच कुन्हाबु से धक्का मुक्की (साभार: onmanorama)
केरल के कासरगोड में शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को फर्जी मतदान की रिपोर्टिंग करने गए चार पत्रकारों पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के संदिग्ध कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। इस दौरान पत्रकारों से मारपीट की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं ने पिटाई करने के बाद पत्रकारों को वहाँ से भगा दिया।
चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त स्टाफ और पुलिस ने उच्च अधिकारीयों को तुरंत सूचित किया? क्या  उन्होंने Returning Officer को सूचित किया? यदि नहीं, क्यों? अगर सूचित किया तो Returning Officer ने क्या कार्यवाही की? यह सिर्फ कासरगोड ही नहीं, भारत में शायद हो कोई ऐसा अनोखा पोलिंग बूथ होगा, जहां फर्जी वोटिंग न होता हो। लेकिन इसको रोकने में आज तक चुनाव आयोग पूरी तरफ से नकारा ही है। यह आरोप नहीं, कटु सत्य है। पोलिंग एजेंट से लेकर चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त स्टाफ तक कोई झूठला नहीं सकता। आधार कार्ड, चुनाव मतदान कार्ड सब बेकार। एक सुहागन को 500 रूपए के लिए अपना सिन्दूर पोंछ बुर्का पहनकर फर्जी वोट डालते देखा गया है। पार्टियों के प्रतिनिधियों को सुबह और शाम पोलिंग बूथ में EVM चैक करने और सील करने के लिए अंदर जाने की अनुमति होनी चाहिए। समाजसेवक के नाम पर किसी को बूथ में जाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। 

घटना कासरगोड के चेंगला स्थित सरकारी हाई स्कूल के बूथ की है। यहाँ पर फर्जी मतदान की खबर मिलते ही कैराली न्यूज के रिपोर्टर शिजू कन्नन, चैनल के कैमरामैन शैजू पिलाथारा, मातृभूमि न्यूज के रिपोर्टर सारंग और मातृभूमि अखबार के रिपोर्टर प्रदीप जीएन बूथ पर पहुँचे और रिपोर्टिंग की कोशिश की। इसी दौरान IUML कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की।

दरअसल, मतदान के दिन दोपहर में मार्क्सवादी पार्टी के एजेंटों ने स्कूल में बूथ संख्या 113, 114 और 115 में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदान की सूचना अपने पार्टी के अधिकारियों को दी। उन्होंने यह भी बताया कि IUML के कार्यकर्ता उन्हें मतदान केंद्र पर बैठने नहीं दे रहे हैं। इसके बाद CPM चुनाव प्रबंधक कासरगोड विधानसभा क्षेत्र में IUML के गढ़ चेंगला के स्कूल पहुँचे।

एलडीएफ चुनाव समिति के संयोजक केपी सतीश चंद्रम ने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता उन लोगों के वोट डाल रहे थे, जो केरल में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा, “हमने जिला निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई है।” सतीश चंद्रम ने इसकी जानकारी मीडिया को भी दी। इसके साथ ही उदमा के विधायक और सीपीएम के जिला सचिव को भी इसके बारे में बताया।

जब मीडिया घटना की रिपोर्टिंग के लिए पहुँची तो IUML के कार्यकर्ताओं ने रिपोर्टिंग नहीं करने के लिए कहा और वहाँ से तुरंत भागने के लिए धमकाया। उसी समय उदमा विधायक और कार्यवाहक सीपीएम जिला सचिव कुन्हाम्बु स्कूल पहुँचे। उन्होंने कहा, “IUML कार्यकर्ताओं ने विधायक के साथ मारपीट करने की कोशिश की, लेकिन कासरगोड विधायक एनए नेल्लिकुन्नु ने हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाया।”

इधर, हमले के शिकार पत्रकारों ने इसकी शिकायत पुलिस और जिला कलेक्टर से की है। कलेक्टर इनबासेकर ने एक बयान में कहा कि उन्होंने बूथ संख्या 115 पर फर्जी मतदान पर कार्रवाई की है। हालाँकि, उन्होंने की गई कार्रवाई के बारे में विस्तार से नहीं बताया।

अवलोकन करें:-

केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) गठबंधन में कॉन्ग्रेस की सहयोगी दल है। इस गठबंधन में और भी कई छोटे-छोटे दल हैं। वहीं, दूसरी तरफ CPM की अगुवाई वाली LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) गठबंधन है। इसमें सीपीएम और सीपीआई सहित कई दल हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री विजयन पिनराई के नेतृत्व में केरल में LDF की सरकार है।