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‘भगवा आतंकवाद’ गढ़ने के लिए मालेगाँव ब्लास्ट में मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ को उठाने का दिया गया था आदेश: ATS जाँच से जुड़े अधिकारी मेहबूब मुजावर का खुलासा

          मालेगाँव केस में मोहन भागवत और योगी आदित्यानाथ को फँसाने की थी साजिश (फोटो साभार: आज तक)
मालेगाँव ब्लास्ट मामले की शुरुआती जाँच में शामिल रहे महाराष्ट्र ATS के रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करने के गुप्त आदेश दिए गए थे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी शामिल था।

मुजावर के अनुसार, इन निर्देशों का मकसद ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी गढ़ना था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि उन्हें राम कालसंगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और मोहन भागवत को पकड़ने को कहा गया था।

हालाँकि उन्होंने यह आदेश मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि मोहन भागवत जैसी बड़ी शख्सियत को बिना किसी ठोस वजह के पकड़ना उनके बस की बात नहीं थी। आदेश न मानने के बाद, उनके ऊपर आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह ने एक झूठा केस डाल दिया जिससे उनकी 40 साल की पुलिस सेवा खत्म हो गई।

मुजावर ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी जाँच एक ‘फर्जी अफसर’ के नेतृत्व में हुई थी और जाँच का पूरा ढाँचा ही झूठ पर आधारित था। उन्होंने कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह साबित हो गया है कि उस समय जो कुछ हुआ वह गलत था। अंत में उन्होंने साफ कहा कि कोई ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।

इससे पहले भी एक ऐसा ही खुलासा हुआ था, जिसमें पता चला था कि महाराष्ट्र ATS  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाना चाहती थी। इसके लिए उसने मालेगाँव बम धमाकों के मामले में मुकदमे का सामना करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को भी प्रताड़ित किया था।

कर्नल पुरोहित ने मुंबई के एक कोर्ट को बताया था, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”

अवलोकन करें:-

भगवा आतंकवाद साबित करने की जिद में जुटे परमबीर सिंह पर कब होगी कार्रवाई? कांग्रेस के इशारे पर खे
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 गौरतलब है कि 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

मोदी को कांग्रेस की 100 गालियों से भद्दी है भागवत जी और इंद्रेश कुमार की गाली ; संघ की मर्यादाएं तोड़ कर बोले और विपक्ष को खुश कर दिया दोनों ने; अपने घर को आग लगाने से पड़ोसी ही खुश होते हैं

 सुभाष चन्द्र

दो दिन पहले संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी ने जो बयान दिया उसने हारी हुई कांग्रेस और विपक्ष को मोदी पर वार करने का हथियार दे दिया। सारे नेता मोदी पर बरस पड़े केवल इस बात पर कि भागवत जी ने कह दिया कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है।  जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले और भूपेश बघेल सबको खुजली हुई कि भागवत का तो मोदी को कहना मानना चाहिए और मणिपुर जाना चाहिए।

लेखक 
चर्चित YouTuber 
राममंदिर के बाद बाद काशी पर हो रहे विवाद पर भी भागवत ने कहा कि 'हमें हर मस्जिद में शिवलिंग नहीं देखना चाहिए।' ये बात कहने का क्या मतलब था? भागवत क्या अपना प्रमुख साप्ताहिक Organiser नहीं पढ़ते? या इतिहासिक प्रवचन देने वाले भागवत लगभग 30+वर्ष पूर्व, संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया के कार्यकाल में इस साप्ताहिक में प्रकाशित डॉ गणेशी लाल वर्मा लिखित श्रृंखला "Conversion of Hindu Temples" भूल गए? तब तो कोई विरोध नहीं किया, क्यों?

मोहन भागवत की मणिपुर पर कही बात तो बड़ी पसंद आ रही है विपक्ष को लेकिन वो तो बहुत कुछ कहते हैं, कभी आप भी तो उनकी बातें माना करो लेकिन कांग्रेस ने अगले दिन कह दिया कि RSS अब अप्रासंगिक हो गया है। भागवत जी ने कहा कि “जो मर्यादा का पालन करे, अहंकार न करे, वही सच्चा सेवक है। इस मानसिकता से छुटकारा पाना होगा कि सिर्फ हमारा विचार सही है, दूसरे का नहीं। चुनाव प्रचार में झूठ फैलाया गया, झूठ पर आधारित मुकाबला था।आपसी सहमति बनाएं, विपक्ष को विरोधी नहीं, प्रतिपक्ष कहें”। क्या इसका मतलब यह था कि मोदी प्रधान सेवक तो क्या “सेवक” भी नहीं है?

इसके बाद आज संघ के वरिष्ठ नेता जो “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” चलाते हैं, इंद्रेश कुमार ने आग में घी डालने का काम किया और कहा कि “जिस पार्टी ने भक्ति की और जिसे पूरी शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे अहंकार के कारण भगवान ने 241 पर रोक दिया और जिनकी श्रद्धा राम में नहीं थी उन्हें 234 पर रोका और बताया कि तुम सफल नहीं हो सकते”।

इंद्रेश कुमार 'हाँ' अहंकार टूटा है। नरेंद्र मोदी का नहीं तुम्हारा, संघ का, सनातन विरोधियों का, मोदी को हराने विदेशी भीख पर पलने वालों का, अहंकार टूटा है भारत विरोधी विदेशियों और एक मुश्त मोदी के विरुद्ध वोट करने वालों का। 

इंद्रेश कुमार "मुस्लिम राष्ट्रीय मंच" चलाकर अपनी दुकान चमकाते रहो, दुनिया को पागल बनांते रहो कि मुस्लिम संघ से जुड़ रहा है। लेकिन ये लोग संघ और बीजेपी दोनों को पागल बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तिजोरी भर रहे हैं लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दे रहे। इंद्रेश जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया था, उसी दिन मुस्लिम समाज ने बीजेपी को वोट नहीं देने का इरादा कर लिया था। चलाते मुस्लिम मंच और मुस्लिम में क्या चल रहा है, उससे बेखबर हुए बैठ, प्रधानमंत्री पर कटाक्ष कर रहे हैं।

इन दोनों महानुभावों की बातें सुनकर मैं सदमे में हूं क्योंकि उन्होंने बोलते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि ये क्या कह रहे हैं और इसका मतलब क्या निकल सकता है। लगता है ये नड्डा जी के बयान से आहत थे जिसमें उन्होंने कह दिया था कि भाजपा अब सक्षम है और अपना कार्य स्वयं कर सकती है, संघ एक cultural और social organisation है। ये बात 18 मई को कही थी और शायद इसलिए ही मोदी जी नड्डा जी को मंत्री बना कर भाजपा के अध्यक्ष पद से हटने का तो इशारा कर दिया। फिर भी मोदी में “अहंकार” कह कर आप उसे कांग्रेस की 100 गालियों से भी बड़ी गाली दे गए। 

भागवत जी ने 2023 के विजयदशमी के संबोधन में खुलकर कहा था कि मोदी सरकार हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। मणिपुर के बारे में भी विस्तार से विचार रखे थे जब मणिपुर मामला जोरों से चल रहा था लेकिन सरकार पर कोई उंगली नहीं उठाई। आज उसी मणिपुर के लिए मोदी को दोष दे दिया। भागवत जी को शायद आभास भी नहीं है कि कांग्रेस मोदी को मणिपुर जाने के लिए क्यों जिद पकड़े हुए है। पंजाब में मोदी पर हमला होने को था और मणिपुर में शायद कांग्रेस और विदेशी ताकतों ने (जो मणिपुर कलेश को प्रायोजित किए हुए हैं कांग्रेस के साथ) मोदी की हत्या की कोई साजिश रच रखी हो। यदि मोदी को मार दिया गया तो कौन जिम्मेदार होगा?

इंद्रेश कुमार से मैं पूछना चाहता हूं कि उनके मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के 10,000 सदस्यों ने कितने मुस्लिम वोट मोदी को दिलवाए जो आज आप अहंकार की बातें छौंक रहे हो।

भागवत जी आप विपक्ष को विरोधी न कह कर प्रतिपक्ष कहने की वकालत कर रहे हो जबकि वे लोग “घोर विरोधी” हैं मोदी के ही नहीं, संघ के भी क्योंकि उनका बच्चा बच्चा संघ को केवल एक नज़र से देखता है कि “संघ ने गांधी की हत्या की” और आप उनका सम्मान करने को कह रहे हो। आपके घर में आग लगी हो तो बाहर वाले ही तापते हैं।

ऐतिहासिक जीत, क्यों? मोदी को रोकने मुस्लिमों द्वारा एकमुश्त विरोध में वोट, आरएसएस का विरोध और भारत विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा अरबों खर्च करने के बावजूद जीत ; आखिर कब तक खतरों के खिलाडी मोदी को अग्नि-परीक्षा देनी होगी?

आज(जून 9) नरेंद्र मोदी पहली बार लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री की शपथ ले रहे हैं। मोदी को नेता चुने जाने पर अपने सम्बोधन में बीजेपी जीत को ऐतिहासिक बताया। क्यों? इस रहस्य को समझना होगा। स्पष्ट है जिस मोदी को सत्ता से हटाने मुस्लिम एकमुश्त विरोध में वोट, भारत विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा विपक्ष पर अरबों खर्च करना आदि जीत को ऐतिहासिक बनाता है। इस सबसे अधिक जीत के ऐतिहासिक बनने का कारण है आरएसएस विरोध। 

आखिर क्यों संघ मोदी के विरोध में खड़ा हुआ? क्या मोदी देश और सनातन के विरुद्ध काम कर रहे थे? क्या डॉ हेडगवार ने आरएसएस का गठन सनातन और देशहित के विरुद्ध किया था? यदि नहीं, फिर संघ ने क्यों मोदी का विरोध किया? यह पहली बार नहीं हुआ है, यह विरोध तब से चल रहा है जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मोदी और संघ के बीच मनमुटाव की कहानी से YouTube पर भरमार है। क्या संघ अपनी दादागिरी चलाता रहेगा? यदि संघ ने अपना रवैया नहीं बदला, फिर वह दिन भी अधिक दूर नहीं होगा जब जनता ही इसे उस स्थान पर पहुंचा देगी जहां जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान विपक्ष तक पहुँचाना जा रहा है। आरएसएस को डॉ हेडगवार का सपना साकार करने मोदी विरोध त्याग मोदी के साथ खड़ा होना चाहिए। देखिए संघ विरोध का वीडियो, बहुत हैं ऐसे वीडियो :-

 

मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव है कि नरेंद्र मोदी हर पीड़ित के साथ है, चाहे वह किसी भी संस्था और समुदाय से हो। ऑफिस में मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी को सेवानिर्वित होने पर ग्रेचुटी के नाम पर रूपए देने की बजाए 40,000 रूपए कंपनी को देने को कहा। क्या कभी किसी की ग्रेचुटी minus में हो सकती है? हम दो महीने पहले रिटायर हो गए थे। सब तरफ हाथ-पैर मारने के बाद कुछ नहीं होने पर जब मुझसे संपर्क किया, तुरन्त नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजने को कहने पर जवाब मिला कि 'मोदी विरुद्ध कुछ नहीं करेंगे।' मैंने कहा ऐसी बात नहीं, मोदी हर पीड़ित के साथ है। यह मेरा पत्रकारिता अनुभव कहता है। जो शत-प्रतिशत सही साबित भी हुआ। संक्षेप में, जो कंपनी कर्मचारी से 40,000 रूपए मांग रही थी, उल्टे उसी कंपनी को कर्मचारी को लगभग 3,50,000 रूपए का चैक दिया। केवल उसी कर्मचारी को ही नहीं, मुझ सहित पहले रिटायर हो चुके कर्मचारियों को बुला-बुलाकर बाकी राशि दी। कंपनी इतनी शर्मसार हुई कि किसी को ऑफिस के अंदर नहीं, बल्कि स्वागत कक्ष में रोक, लेखाधिकारी द्वारा नीचे आकर चैक दिए। क्योकि कार्यवाही होने के कारण ऑफिस में प्रवेश की अनुमति नहीं। और बाद में रिटायर होने वालों को उचित ग्रेचुटी दी गयी। ये है मोदी की नियत और नीति।  

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम सबके सामने हैं। देश ने NDA की गठबंधन सरकार को जनमत दिया है और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। भाजपा को इन चुनावों में 240 सीटें हासिल हुई हैं। वह अकेले दम पर बहुमत नहीं पा सकी है। उसका वोट प्रतिशत भी देश में 37.3% से 36.6% हो गया है। भाजपा के वोट शेयर में तो मात्र 0.6% की गिरावट है लेकिन उसकी सीटों का आँकड़ा इससे गड़बड़ा गया है। भाजपा 2019 में 303 सीटें आईं थी जबकि 2024 में उसकी सीटें घट कर 240 हो गईं, यानि उसे 63 सीटों का नुकसान हुआ।

चुनाव जैसे-जैसे बढ़ा, भाजपा को हुआ नुकसान

लोकसभा चुनाव में एक ट्रेंड देखने को मिला है, भाजपा को अधिकांश चुनाव के अंतिम चरणों में नुकसान हुआ है। इसके लिए बिहार और उत्तर प्रदेश का उदाहरण लिया जाना चाहिए। भाजपा को भी सबसे बड़ा नुकसान उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। भाजपा को उत्तर प्रदेश में 33 सीट हासिल हुई हैं जबकि सपा यहाँ 38 और कॉन्ग्रेस 6 सीटें जीतने में सफल रही है। चुनाव के बढ़ने के साथ ही भाजपा और सपा की जीत का फासला भी उत्तर प्रदेश में बढ़ता गया है।
वोटिंग के चरणों के हिसाब से देखा जाए तो पहले चरण में हुए चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 8 में से 3 जबकि दूसरे चरण में सभी 8 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा पहले चरण में मुस्लिम बहुल सीटों पर ही पिछड़ी है। भाजपा को तीसरे चरण में भी काफी नुकसान हो गया। 10 में से 6 सीट तीसरे चरण में भाजपा हार गई, यह सीटें सपा ले गई। चौथे चरण में भाजपा को 13 में से 8 सीटों पर विजय श्री मिली। इसमें भी यादव परिवार की सीटों पर ही SP जीत हासिल कर सकी।
वहीं सबसे अधिक नुकसान भाजपा को पाँचवे और छठे चरण में हुआ। पाँचवे चरण में सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 में से 10 सीट जीती। छठे चरण में सपा कॉन्ग्रेस गठबंधन ने 14 में से 11 सीट जीती। आखिरी सातवें चरण में 13 में से 6 सीट सपा जीत गई। ऐसे में उत्तर प्रदेश ने जहाँ चौथे चरण तक भाजपा का प्रदर्शन ठीक रहा, वहीं इसके बाद उसको बड़े झटके लगे। सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन की 60% से अधिक सीटें पाँचवे, छठे और सातवें चरण से आई हैं।

बिहार में भी यही कहानी

बिहार में NDA को भी सबसे बड़ा नुकसान अंतिम चरम में ही हुआ है। बिहार में NDA गठबंधन ने 40 में से 30 सीट जीती हैं। बाक़ी की 10 सीटों में 9 विपक्षी INDI गठबंधन को मिली हैं। बिहार में सातवें चरण में 8 सीटों पर चुनाव हुआ था जिसमें विपक्ष को 6 सीट मिलीं।
अंतिम चरण में राजद को पाटलिपुत्र, बक्सर और जहानाबाद की सीट मिली। कॉन्ग्रेस को अंतिम चरण में सासाराम और कम्युनिस्ट पार्टी को सीट मिली। INDI गठबंधन को मिलने वाली बाकी तीन सीटों में दो मुस्लिम प्रभाव वाले इलाकों में थी जबकि एक सीट उसे पहले चरण में ही मिल गई थी। तीसरे, चौथे और पाँचवे चरण में INDI गठबंधन का खाता तक बिहार में नहीं खुला।

देश में भी यही ट्रेंड

शुरूआती चरणों में अच्छा प्रदर्शन और अंतिम चरणों में खराब प्रदर्शन की यह कहानी मात्र उत्तर प्रदेश और बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपा के साथ घटित होती दिखाई दे रही है। देश भर में भाजपा को पहले और दूसरे चरण में 189 में से 76 सीटें मिली हैं। तीसरे और चौथे चरण में भाजपा को सबसे अधिक फायदा देश में हुआ है। तीसरे और चौथे चरण में देश की 190 सीटों पर चुनाव हुआ था और इसमें भाजपा को 96 सीटों पर जीत मिली।
पाँचवे और छठे चरण से भाजपा को बड़ा नुकसान होना चालू हुआ। पाँचवे और छठे चरण में देश में 107 सीट पर चुनाव हुए, इसमें भाजपा 50 सीट जीत पाई। अंतिम चरण में भी भाजपा का प्रदर्शन कुछ खास अच्छा नहीं रहा। अंतिम चरण की 57 सीटों पर हुए मतदान में भी भाजपा को केवल 17 सीटें मिली। ऐसे में भाजपा को देशव्यापी नुकसान आखिरी तीन चरणों में हुआ।

क्या-क्या फैक्टर रहे?

पहले चरण से अंतिम चरण की तरफ जाते हुए भाजपा को यह चुनावी नुकसान क्यों हुआ, इसके कई कयास लगाए जा रहे हैं। एक कयास यह है कि शुरूआती चरणों में देश में गर्मी कम पड़ रही थी और तब वोटर बाहर निकल रहे थे जिससे भाजपा को फायदा हुआ। बाद के चरणों में देश में गर्मी बढ़ गई और वोटर निकलने से कतराने लगे जिससे भाजपा को नुकसान हुआ। इसके अलावा एक कयास यह है कि पहले चरण में भाजपा के पास फीडबैक पहुँचा और उसने अपना चुनावी अभियान दुरुस्त किया जिसका फायदा तीसरे और चौथे चरण में मिला।
यह सुधार की गति बाद के चरणों में नहीं बनी रही जिसके कारण इन चरणों में नुकसान हुआ। चुनाव प्रचार की दिशा और हर चरण में बदलते मुद्दे भी इसका एक कारण माने जा रहे हैं। हालाँकि, यह सभी केवल कयास हैं और इनको प्रमाणित करने वाले तथ्य अभी नहीं पुष्ट हो पाए हैं, ऐसे में अभी यह नहीं कहा जा सकता कि भाजपा को शुरूआती चरणों में फायदा और बाद के चरणों में फायदा क्यों हुआ।

जमीयत प्रमुख मदनी का विवादित बयान : ‘इस्लाम सबसे पुराना मजहब, भारत मुस्लिमों के पहले पैगंबर की जमीन’

आज मोदी-योगी मदरसों के आधुनिकरण पर क्यों जोर दे रहे हैं, जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द के प्रमुख महमूद मदनी ने विवादित बयान देकर दुनियां को अपनी मदरसा-छाप तालीम का प्रमाण दे दिया है। फिर मेरा अपना विश्वास है कि ये बोल मदनी के नहीं हो सकते। उनके ऐसा बोलने का प्रमुख कारण है कि वह बोल तो खुद रहे थे, लेकिन किसी का लिखा हुआ। अब किस दबाव में लिखा हुआ पढ़ विवाद खड़ा किया, इसका जवाब तो मदनी ही दे सकते हैं। मुस्लिम समाज को जो भड़काने का काम था वो तो हो गया। अब बस पत्तल साफ करने की बात रह गयी है। 

ऐसी कोई बात बोलने से पहले कुछ इतिहास का ज्ञान भी होना बहुत जरुरी है। किस आधार पर मदनी इस्लाम को सबसे पुराना बता रहे हैं? मदनी को इतना भी नहीं मालूम की इस्लाम आया 1400+ वर्ष पहले यानि कलयुग में, इतना ही नहीं कलयुग प्रारम्भ होने के हज़ारों वर्ष बाद और कलयुग से पहले इस धरती पर सतयुग, त्रेता और द्वापर युग थे। मदनी बस इतना बता दे कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण इस्लाम आने से पहले लिखी या बाद में, सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। संत तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखी 400+ वर्ष पहले यानि कलयुग शुरू होने के हज़ारों वर्ष बाद। फिर पोरस से मार खाकर सिकंदर क्यों भागा और कहाँ भागा? 

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी (Mahmood Madani) ने कहा है कि इस्लाम सभी धर्मों से पुराना है और यह भारत में बाहर से नहीं आया है। मदनी ने शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को कहा कि भारत जितना नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) का है, उतना ही उनका भी है।

दरअसल, दिल्ली के रामलीला मैदान में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद का आम सत्र आयोजित चल रहा है। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महमूद मदनी ने कहा, “भारत हमारा देश है। यह देश जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है, उतना ही यह देश महमूद का भी है। न तो महमूद उनसे एक इंच आगे है और न ही वे महमूद से एक इंच आगे हैं।”

मदनी ने यह भी कहा है कि भारत खुदा के सबसे पहले पैगंबर अब्दुल बशर सईदाला आलम की जमीन है। भारत मुस्लिमों की पहली मातृभूमि है। इसलिए यह कहना कि इस्लाम बाहर से आया, पूरी तरह गलत और आधारहीन है। इस्लाम इसी देश का मजहब है। इस्लाम सभी धर्मों में सबसे पुराना महजब है। भारत हिंदी मुसलमानों के लिए सबसे अच्छा देश है।

साथ ही उन्होंने कहा है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों को सजा देने के लिए एक अलग कानून बनाया जाए। मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत और उकसावे के मामलों के अलावा इस्लामोफोबिया में वृद्धि हाल के दिनों में देश में खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है।

मदनी ने आगे है कि आज देश में नफरत का माहौल है। बेबुनियाद प्रोपेगेंडा फैलाने का काम तेजी से किया जा रहा है। ऐसे लोगों को सुप्रीम कोर्ट भी छोड़कर कर उनका हौसला अफजाई कर रहा है। जो देश के लिए खतरा हैं, उन्हें खुला छोड़ा जा रहा है।

मदनी ने कहा कि आज के हालात में अगर स्वामी विवेकानंद, मोहनदास करमचंद गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और चिश्ती के आदर्शों को मानने वाले नेता इसी तरह तमाशाबीन बने रहे तो पता नहीं देश की हालत क्या होगी।

मुस्लिमों की छवि बदलने के लिए किए जाएँ कार्यक्रम

जमीयत के इस सत्र में मुस्लिमों द्वारा बड़ी संख्या में इस्लाम छोड़ने और ‘एक्स मुस्लिम’ अभियान को लेकर भी चिंता जताई गई। इस बैठक में प्रस्ताव लाकर मुस्लिमों को गुमराह होने से बचाने के लिए प्रयास करने की बात कही गई।
इसमें यह भी कहा गया कि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मुस्लिमों की छवि एक मददगार और भरोसेमंद बनाकर प्रस्तुत की जाए ताकि फिल्मों, टीवी सीरियलों और किताबों से जो छवि बनाई गई है, उसको सुधारा जा सके। साथ ही महमूद मदनी ने इस्लामवादी युवाओं से हिंसा और जिहाद का रास्ता न अपनाने की भी बात कही।

नसीरुद्दीन के भाई जमीर उद्दीन शाह ने की हिंदू-मुस्लिम के बीच शांति की वकालत, भड़के इस्लामी कट्टरपंथियों ने उन्हें ट्विटर पर घेरा

जमीर उद्दीन शाह (बाएँ) और उनके भाई नसीरुद्दीन शाह
हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वाले बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह के भाई और एक्स इंडियन आर्मी ऑफिसर जमीर उद्दीन शाह (Zameer Uddin Shah) को हिंदू-मुस्लिमों के बीच सौहार्द के लिए बातचीत की सलाह देना भारी पड़ गया है। इस सुझाव के बाद सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी इस्लामिस्ट उनके खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।

दरअसल, पिछले साल सेना के पूर्व अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आर्टिकल लिखा था। जिसका शीर्षक था, “क्यों मोहन भगत की हिंदू-मुस्लिम संचार की अपील सही रास्ते में एक कदम है।” बस उसी लेख को लेकर अब वो कट्टरपंथियों को निशाने पर आ गए हैं। उनकी आलोचना की शुरुआत मुस्लिम स्पेसेस नाम के एक ट्विटर यूजर ने की।

इसके बाद कई अन्य इस्लामवादियों ने भी उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। पूर्व सैन्य अधिकारी को ट्रोल करते हुए ट्विटर पर इस्लामवादियों ने कहा कि उनकी यह ‘मंकी बैलेंसिंग’ की कोशिश ही उन्हें आगे ले जाएगी।

अपने आर्टिकल में जमीर उद्दीन शाह ने 4 जुलाई 2021 को गाजियाबाद में मेवाड़ संस्थान में RSS प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) द्वारा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के ख्वाजा इफ्तिखार अहमद की पुस्तक, ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स-ए ब्रिजिंग इनिशिएटिव’ के विमोचन के दौरान किए गए संबोधन का जिक्र किया था। भागवत के भाषण का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा था कि वो भी दोनों समुदायों के बीच शांति स्थापित करने के लिए हिंदू-मुस्लिम बातचीत के पक्षधर हैं।

हालाँकि, जमीर उद्दीन शाह के द्वारा लिखा गया उनका ये पुराना आर्टिकल अब उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है। ट्विटर पर उनके ही समुदाय के लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शायद इस्लाम में शांति और सुधार की बात करना इस्लामवादियों के लिए सच्चा मुस्लिम नहीं है।

बहरहाल उन्होंने मुस्लिम स्पेसेस के ट्वीट का जबाव देते हुए ट्वीट किया, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच लगातार वार्ता ही सौहार्द और प्रगति की कुंजी है। दुर्भाग्य से दोनों तरफ हार्ड लाइनर्स हैं। लेकिन ये अधिक उत्साहजनक है कि समझदार लोगों की बढ़ती जमात कट्टरता से नफरत करती है।”

इसके बाद मुस्लिम स्पेस ने जमीर उद्दीन शाह के ट्वीट का जबाव देते हुए उनके द्वारा 11 अक्टूबर, 2019 को लिखे गए दूसरे आर्टिकल का स्क्रीनशॉट शेयर किया। जिसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने कहा था, “स्थायी शांति के लिए मुस्लिमों को अयोध्या की जमीन हिंदुओं को सौंप देनी चाहिए।”

फिर क्या था जमीर उद्दीन शाह ने अपने बयान ट्विटर पर सही ठहराया। उन्होंनें लिखा, “मेरे पास ऐसा कहने के अच्छे कारण थे। मुझे पता था कि न्यायाधीश शायद ही कभी जनता की राय के खिलाफ जाते हैं और मुझे यकीन था कि अयोध्या का फैसला क्या होगा। हम मस्जिद को फिर से हासिल नहीं करते, लेकिन हारे नहीं होते। अब हम न केवल केस हार चुके हैं बल्कि चौतरफा हार चुके हैं।”

जमीरुद्दीन शाह पर बरसे कट्टरपंथी

अपने आर्टिकल के जबाव में ज़मीर उद्दीन शाह कल से ऐसे कई कट्टरपंथी इस्लामवादियों को जवाब दे रहे हैं, जिनके मन और मस्तिष्क में लंबे वक्त से हिंदुओं के लिए नफरत भरी हुई है।
ये बड़ी ही दिलचस्प बात है कि कट्टरपंथी इस्लामी नसीरुद्दीन शाह के भाई को निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वो उनकी चरमपंथी विचारधारा के खिलाफ हैं। लेकिन इन चरमपंथियों ने उस वक्त चुप्पी साध ली थी, जब उन्होंने 2002 के गोधरा दंगों को लेकर गुजरात की तत्कालीन नरेंद्र मोदी सरकार के बारे में झूठ बोला था।

जमीरुद्दीन शाह ने गुजरात दंगे पर बोला था झूठ

नसीरुद्दीन शाह के भाई लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) जमीर उद्दीन शाह की आगामी पुस्तक ‘द सरकार मुसलमान’ के कुछ अंश 6 अक्टूबर 2018 में प्रकाशित किए गए थे। इसमें उन्होंने दावा किया था कि फरवरी 2002 में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के नरसंहार के बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। अयोध्या से लौटने वाले तीर्थयात्रियों को जिंदा जला दिया गया था। लेकिन, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार सेना को तत्काल परिवहन प्रदान नहीं करा पाई थी, जिससे दंगा प्रभावित राज्य में सेना की तैनाती में देरी हुई थी।
उन्होंने दावा किया था कि अगर मोदी सरकार आवश्यक साजो-सामान मुहैया कराती तो जानमाल की हानि को कम किया जा सकता था। हालाँकि, उसके बाद ऑपइंडिया ने इस बात खुलासा किया था कैसे लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के दावे बिल्कुल निराधार और अनुचित थे।

मोहन भागवत और RSS मुख्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, एफआईआर दर्ज

किसान आंदोलन पर असामाजिक तत्वों का कब्ज है, इसकी पुष्टि तथाकथित किसान नेताओं के बयानों से हो रही है, जो किसान के वेश में अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति में लगे हैं। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस ने जनवरी 5 को महाराष्ट्र के किसान नेता अरुण बानकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बानकर ने एक भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय के साथ-साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। जो इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि ये किसानों की आड़ में अराजक तत्व हैं, जिन्हे मोदी विरोधी विशेषकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल का समर्थन प्राप्त है। 

बीजेपी के बैतूल जिला अध्यक्ष आदित्य बाबला शुक्ला ने कहा कि अरुण बानकर जनता को भड़काकर समाज में शांति और सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी शिकायत पर धारा 505 (2) (सार्वजनिक कुप्रथाओं को अंजाम देने के इरादे से और जनता को उकसाने के इरादे से) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत बानकर के खिलाफ बैतूल के कोतवाली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। हालांकि मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

थाना प्रभारी संतोष पंद्रे के मुताबिक नागपुर से दिल्ली आते समय किसान नेता अरुण बानकर ने सोमवार को जिले के मुलताई में शहीद किसान स्तम्भ पर श्रद्धांजलि अर्पित की और किसानों को भी संबोधित किया। इस दौरान अपने भाषण में बानकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी किसानों पर गोलियां चलाएंगे, तो हम नागपुर में आरएसएस के प्रमुख के साथ आरएसएस मुख्यालय को उड़ा देंगे। अब किसान दिल्ली में घुस गए हैं। मोदी के सामने एक ही रास्ता है या तो कानून पीछे लें नहीं तो उन्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी।

बानकर का विवादित बयान सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इटारसी में कथित किसान नेता बानकर ने मीडिया से चर्चा में कहा कि उसे किसी बात का डर नहीं है। मैं नागपुर में भी ऐसा बयान दे चुका हूं। मैं एक बार फिर खुलेआम कह रहा हूं कि हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, हम आरएसएस के गढ़ को उड़ा देंगे, इसके लिए वे पूरी तैयारी कर चुके हैं।गौरतलब है कि बानकर महाराष्ट्र राज्य किसान महासभा के सचिव हैं।

यह पहली बार नहीं है, जब किसानों की तरफ से इस तरह की धमकी दी गई है। इससे पहले पीएम मोदी को मारने की धमकी मिल चुकी है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें गाजीपुर बॉर्डर पर एक तथाकथित बुजुर्ग किसान खुलेआम कह रहा था कि मोदी को मारूंगा; कत्ल करूंगा। आप भी सुनिए और फैसला कीजिए कि ये किसानों का आंदोलन है या देश विरोधी ताकतों का, जो दिल्ली को बंधक बनाकर लाखों लोगों की जान को जोखिम डाले हुए है और अपनी बात जबरन मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखाई दे रहे हैं।

देखिए किसानों के प्रदर्शन की सच्चाई-

 

इसी तरह एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक सिख किसान बोल रहा है, “मोदी MSP देगा तब भी मरेगा और नहीं देगा तब भी मरेगा….।”

इससे पहले भी सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिनसे किसानों की आड़ में हो रहे इस प्रदर्शन की सच्चाई सामने आ चुकी है। प्रदर्शन में शामिल एक किसान ने कहा था कि अगर हम कनाडा जा के गोरों को ठोक सकते हैं तो ये दिल्ली तो कुछ भी नही हैं हमारे पास… इंदिरा ठोक दी, मोदी की छाती पे…. ”