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मोदी को कांग्रेस की 100 गालियों से भद्दी है भागवत जी और इंद्रेश कुमार की गाली ; संघ की मर्यादाएं तोड़ कर बोले और विपक्ष को खुश कर दिया दोनों ने; अपने घर को आग लगाने से पड़ोसी ही खुश होते हैं

 सुभाष चन्द्र

दो दिन पहले संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी ने जो बयान दिया उसने हारी हुई कांग्रेस और विपक्ष को मोदी पर वार करने का हथियार दे दिया। सारे नेता मोदी पर बरस पड़े केवल इस बात पर कि भागवत जी ने कह दिया कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है।  जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले और भूपेश बघेल सबको खुजली हुई कि भागवत का तो मोदी को कहना मानना चाहिए और मणिपुर जाना चाहिए।

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राममंदिर के बाद बाद काशी पर हो रहे विवाद पर भी भागवत ने कहा कि 'हमें हर मस्जिद में शिवलिंग नहीं देखना चाहिए।' ये बात कहने का क्या मतलब था? भागवत क्या अपना प्रमुख साप्ताहिक Organiser नहीं पढ़ते? या इतिहासिक प्रवचन देने वाले भागवत लगभग 30+वर्ष पूर्व, संपादक प्रो वेद प्रकाश भाटिया के कार्यकाल में इस साप्ताहिक में प्रकाशित डॉ गणेशी लाल वर्मा लिखित श्रृंखला "Conversion of Hindu Temples" भूल गए? तब तो कोई विरोध नहीं किया, क्यों?

मोहन भागवत की मणिपुर पर कही बात तो बड़ी पसंद आ रही है विपक्ष को लेकिन वो तो बहुत कुछ कहते हैं, कभी आप भी तो उनकी बातें माना करो लेकिन कांग्रेस ने अगले दिन कह दिया कि RSS अब अप्रासंगिक हो गया है। भागवत जी ने कहा कि “जो मर्यादा का पालन करे, अहंकार न करे, वही सच्चा सेवक है। इस मानसिकता से छुटकारा पाना होगा कि सिर्फ हमारा विचार सही है, दूसरे का नहीं। चुनाव प्रचार में झूठ फैलाया गया, झूठ पर आधारित मुकाबला था।आपसी सहमति बनाएं, विपक्ष को विरोधी नहीं, प्रतिपक्ष कहें”। क्या इसका मतलब यह था कि मोदी प्रधान सेवक तो क्या “सेवक” भी नहीं है?

इसके बाद आज संघ के वरिष्ठ नेता जो “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच” चलाते हैं, इंद्रेश कुमार ने आग में घी डालने का काम किया और कहा कि “जिस पार्टी ने भक्ति की और जिसे पूरी शक्ति मिलनी चाहिए थी, उसे अहंकार के कारण भगवान ने 241 पर रोक दिया और जिनकी श्रद्धा राम में नहीं थी उन्हें 234 पर रोका और बताया कि तुम सफल नहीं हो सकते”।

इंद्रेश कुमार 'हाँ' अहंकार टूटा है। नरेंद्र मोदी का नहीं तुम्हारा, संघ का, सनातन विरोधियों का, मोदी को हराने विदेशी भीख पर पलने वालों का, अहंकार टूटा है भारत विरोधी विदेशियों और एक मुश्त मोदी के विरुद्ध वोट करने वालों का। 

इंद्रेश कुमार "मुस्लिम राष्ट्रीय मंच" चलाकर अपनी दुकान चमकाते रहो, दुनिया को पागल बनांते रहो कि मुस्लिम संघ से जुड़ रहा है। लेकिन ये लोग संघ और बीजेपी दोनों को पागल बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं, तिजोरी भर रहे हैं लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दे रहे। इंद्रेश जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया था, उसी दिन मुस्लिम समाज ने बीजेपी को वोट नहीं देने का इरादा कर लिया था। चलाते मुस्लिम मंच और मुस्लिम में क्या चल रहा है, उससे बेखबर हुए बैठ, प्रधानमंत्री पर कटाक्ष कर रहे हैं।

इन दोनों महानुभावों की बातें सुनकर मैं सदमे में हूं क्योंकि उन्होंने बोलते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि ये क्या कह रहे हैं और इसका मतलब क्या निकल सकता है। लगता है ये नड्डा जी के बयान से आहत थे जिसमें उन्होंने कह दिया था कि भाजपा अब सक्षम है और अपना कार्य स्वयं कर सकती है, संघ एक cultural और social organisation है। ये बात 18 मई को कही थी और शायद इसलिए ही मोदी जी नड्डा जी को मंत्री बना कर भाजपा के अध्यक्ष पद से हटने का तो इशारा कर दिया। फिर भी मोदी में “अहंकार” कह कर आप उसे कांग्रेस की 100 गालियों से भी बड़ी गाली दे गए। 

भागवत जी ने 2023 के विजयदशमी के संबोधन में खुलकर कहा था कि मोदी सरकार हर क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है। मणिपुर के बारे में भी विस्तार से विचार रखे थे जब मणिपुर मामला जोरों से चल रहा था लेकिन सरकार पर कोई उंगली नहीं उठाई। आज उसी मणिपुर के लिए मोदी को दोष दे दिया। भागवत जी को शायद आभास भी नहीं है कि कांग्रेस मोदी को मणिपुर जाने के लिए क्यों जिद पकड़े हुए है। पंजाब में मोदी पर हमला होने को था और मणिपुर में शायद कांग्रेस और विदेशी ताकतों ने (जो मणिपुर कलेश को प्रायोजित किए हुए हैं कांग्रेस के साथ) मोदी की हत्या की कोई साजिश रच रखी हो। यदि मोदी को मार दिया गया तो कौन जिम्मेदार होगा?

इंद्रेश कुमार से मैं पूछना चाहता हूं कि उनके मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के 10,000 सदस्यों ने कितने मुस्लिम वोट मोदी को दिलवाए जो आज आप अहंकार की बातें छौंक रहे हो।

भागवत जी आप विपक्ष को विरोधी न कह कर प्रतिपक्ष कहने की वकालत कर रहे हो जबकि वे लोग “घोर विरोधी” हैं मोदी के ही नहीं, संघ के भी क्योंकि उनका बच्चा बच्चा संघ को केवल एक नज़र से देखता है कि “संघ ने गांधी की हत्या की” और आप उनका सम्मान करने को कह रहे हो। आपके घर में आग लगी हो तो बाहर वाले ही तापते हैं।

राजस्थान : भागवत के बाद इंद्रेश कुमार का बड़ा बयान, बोले- अहंकारियों को 241 पर रोक दिया, ये प्रभु का न्याय है; इंद्रेश के मुस्लिम मंच का सदस्य एक मंडल का प्रधान, लेकिन उसी नमक हराम के पोलिंग से बीजेपी को वोट मिला जीरो(0)। यानि उसने भी बीजेपी वोट नहीं दिया। तब कौनसा अहंकार था?

तीसरी बार प्रधानमंत्री बन नरेंद्र मोदी ने अपने विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया। भारत विरोधी विदेशियों की तरह भारत में भी कोई मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री देखना नहीं चाहता था। लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की कीमत मंदबुद्धि वाले क्या जाने। विश्व में मोदी विरोधी तक रो रहे हैं कि हमारा अरबो रूपए बर्बाद हो गया। भूल गए कि मोदी एक तपस्वी है।  

आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि राम सबके साथ न्याय करते हैं। भाजपा को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी।
चर्चा है कि आरएसएस द्वारा मोदी का विरोध करने का कारण बताया जा रहा है कि पिछली सरकारों की तरह मोदी भी लटकाने, भटकाने और टालने की नीति पर चलेगा। और बीजेपी को संघ पर आश्रित पर रहना पड़ेगा, वह हुआ नहीं। मंदिर बन गया, संघ का भ्रम टूट गया। 

इंद्रेश के इस तरह के बयान से हैरान होने वाली बात नहीं, क्योकि ये राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का संयोजक है। क्या इंद्रेश बताने की हिम्मत है कि मुस्लिम मंच के कितने सदस्य बीजेपी को वोट देते हैं। उपदेश देना बहुत आसान है इंद्रेश जिस दिन से सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या में राममंदिर के पक्ष में निर्णय आया था, उसी दिन से तुम्हारे जैसे मंच के सदस्यों ने बीजेपी के खिलाफ प्रोपेगंडा करना शुरू कर दिया था। दो/तीन चुनाव पहले लिखा था कि तुम्हारे मंच का सदस्य एक मंडल का प्रधान, लेकिन उसी नमक हराम के पोलिंग से बीजेपी को वोट मिला जीरो(0)। यानि उसके परिवार तो छोड़ो, उसने भी बीजेपी वोट नहीं दिया। वो कौनसा अहंकार था? वह ब्लॉग उस समय बीजेपी में बहुत प्रसारित हुआ था। बीजेपी या इससे सम्बंधित इकाइयों से जुड़ माल खाएंगे लेकिन वोट नहीं देंगे। इतने बुद्धिजीवी बने फिरते हो, इस बात का आभास नहीं। तुम्हे नहीं मालूम कि भारत में पल रहे मोदी विरोधियों पर भारत विरोधी विदेशियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने अरबों रूपए खर्च किए हैं। 

हरामफरमोशी का एक और नमूना उत्तर प्रदेश में रामपुर का वह पोलिंग, जहां 100%मुस्लिम, 235 प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान, सभी में मुस्लिम, लेकिन वोट मिला जीरो(0)।   

भाजपा की टॉप लीडरशिप और आरएसएस के बीच के मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। सरसंघ चालक मोहन भागवत के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा 'जो अहंकारी हो गए हैं, उन्हें 241 पर रोक दिया, जिनकी राम के प्रति आस्था नहीं थी, अश्रद्धा थी। उन सबको मिलकर 234 पर रोक दिया। यही प्रभु का न्याय है।'
इंद्रेश कुमार गुरुवार(जून 13) को जयपुर के पास कानोता में रामरथ अयोध्या यात्रा दर्शन पूजन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राम सबके साथ न्याय करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव को ही देख लीजिए। जिन्होंने राम की भक्ति की, लेकिन उनमें धीरे-धीरे अहंकार आ गया। उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी घोषित कर दिया। उनको जो पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने राम का विरोध किया, उन्हें बिल्कुल भी शक्ति नहीं दी। उनमें से किसी को भी शक्ति नहीं दी। सब मिलकर (INDIA ब्लॉक) भी नंबर-1 नहीं बने, नंबर-2 पर खड़े रह गए। इसलिए प्रभु का न्याय विचित्र नहीं है, सत्य है, बड़ा आनंददायक है।
जिस पार्टी ने भक्ति की, अहंकार आया, उस पार्टी को 241 पर रोक दिया, पर सबसे बड़ी बना दिया। जिनकी राम के प्रति आस्था नहीं थी, अश्रद्धा थी। उन सबको मिलकर 234 पर रोक दिया। उन्होंने कहा कि तुम्हारी अनास्था की यही दंड है, तुम सफल नहीं हो सकते। 
अयोध्या में भाजपा प्रत्याशी को बताया अत्याचारी
अयोध्या से भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह की हार पर भी इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो राम की भक्ति करे, फिर अहंकार करे, जो राम का विरोध करे, उसका अकल्याण अपने आप हो गया। लल्लू सिंह ने जनता पर जुल्म किए थे, तो रामजी ने कहा कि पांच साल आराम करो, अगली बार देख लेंगे।
 पहले मोहन भागवत ने कही थी ये बात
गौरतलब है कि इससे पहले सरसंघ चालक मोहन भागवत ने भी 10 जून को नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लिया था। भागवत ने कहा था कि जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव होता है तो मुकाबला जरूरी होता है। इस दौरान दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए।