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राजस्थान : भागवत के बाद इंद्रेश कुमार का बड़ा बयान, बोले- अहंकारियों को 241 पर रोक दिया, ये प्रभु का न्याय है; इंद्रेश के मुस्लिम मंच का सदस्य एक मंडल का प्रधान, लेकिन उसी नमक हराम के पोलिंग से बीजेपी को वोट मिला जीरो(0)। यानि उसने भी बीजेपी वोट नहीं दिया। तब कौनसा अहंकार था?

तीसरी बार प्रधानमंत्री बन नरेंद्र मोदी ने अपने विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया। भारत विरोधी विदेशियों की तरह भारत में भी कोई मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री देखना नहीं चाहता था। लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की कीमत मंदबुद्धि वाले क्या जाने। विश्व में मोदी विरोधी तक रो रहे हैं कि हमारा अरबो रूपए बर्बाद हो गया। भूल गए कि मोदी एक तपस्वी है।  

आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि राम सबके साथ न्याय करते हैं। भाजपा को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी।
चर्चा है कि आरएसएस द्वारा मोदी का विरोध करने का कारण बताया जा रहा है कि पिछली सरकारों की तरह मोदी भी लटकाने, भटकाने और टालने की नीति पर चलेगा। और बीजेपी को संघ पर आश्रित पर रहना पड़ेगा, वह हुआ नहीं। मंदिर बन गया, संघ का भ्रम टूट गया। 

इंद्रेश के इस तरह के बयान से हैरान होने वाली बात नहीं, क्योकि ये राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का संयोजक है। क्या इंद्रेश बताने की हिम्मत है कि मुस्लिम मंच के कितने सदस्य बीजेपी को वोट देते हैं। उपदेश देना बहुत आसान है इंद्रेश जिस दिन से सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या में राममंदिर के पक्ष में निर्णय आया था, उसी दिन से तुम्हारे जैसे मंच के सदस्यों ने बीजेपी के खिलाफ प्रोपेगंडा करना शुरू कर दिया था। दो/तीन चुनाव पहले लिखा था कि तुम्हारे मंच का सदस्य एक मंडल का प्रधान, लेकिन उसी नमक हराम के पोलिंग से बीजेपी को वोट मिला जीरो(0)। यानि उसके परिवार तो छोड़ो, उसने भी बीजेपी वोट नहीं दिया। वो कौनसा अहंकार था? वह ब्लॉग उस समय बीजेपी में बहुत प्रसारित हुआ था। बीजेपी या इससे सम्बंधित इकाइयों से जुड़ माल खाएंगे लेकिन वोट नहीं देंगे। इतने बुद्धिजीवी बने फिरते हो, इस बात का आभास नहीं। तुम्हे नहीं मालूम कि भारत में पल रहे मोदी विरोधियों पर भारत विरोधी विदेशियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने अरबों रूपए खर्च किए हैं। 

हरामफरमोशी का एक और नमूना उत्तर प्रदेश में रामपुर का वह पोलिंग, जहां 100%मुस्लिम, 235 प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान, सभी में मुस्लिम, लेकिन वोट मिला जीरो(0)।   

भाजपा की टॉप लीडरशिप और आरएसएस के बीच के मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। सरसंघ चालक मोहन भागवत के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा 'जो अहंकारी हो गए हैं, उन्हें 241 पर रोक दिया, जिनकी राम के प्रति आस्था नहीं थी, अश्रद्धा थी। उन सबको मिलकर 234 पर रोक दिया। यही प्रभु का न्याय है।'
इंद्रेश कुमार गुरुवार(जून 13) को जयपुर के पास कानोता में रामरथ अयोध्या यात्रा दर्शन पूजन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राम सबके साथ न्याय करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव को ही देख लीजिए। जिन्होंने राम की भक्ति की, लेकिन उनमें धीरे-धीरे अहंकार आ गया। उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी घोषित कर दिया। उनको जो पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने राम का विरोध किया, उन्हें बिल्कुल भी शक्ति नहीं दी। उनमें से किसी को भी शक्ति नहीं दी। सब मिलकर (INDIA ब्लॉक) भी नंबर-1 नहीं बने, नंबर-2 पर खड़े रह गए। इसलिए प्रभु का न्याय विचित्र नहीं है, सत्य है, बड़ा आनंददायक है।
जिस पार्टी ने भक्ति की, अहंकार आया, उस पार्टी को 241 पर रोक दिया, पर सबसे बड़ी बना दिया। जिनकी राम के प्रति आस्था नहीं थी, अश्रद्धा थी। उन सबको मिलकर 234 पर रोक दिया। उन्होंने कहा कि तुम्हारी अनास्था की यही दंड है, तुम सफल नहीं हो सकते। 
अयोध्या में भाजपा प्रत्याशी को बताया अत्याचारी
अयोध्या से भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह की हार पर भी इंद्रेश कुमार ने कहा कि जो राम की भक्ति करे, फिर अहंकार करे, जो राम का विरोध करे, उसका अकल्याण अपने आप हो गया। लल्लू सिंह ने जनता पर जुल्म किए थे, तो रामजी ने कहा कि पांच साल आराम करो, अगली बार देख लेंगे।
 पहले मोहन भागवत ने कही थी ये बात
गौरतलब है कि इससे पहले सरसंघ चालक मोहन भागवत ने भी 10 जून को नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लिया था। भागवत ने कहा था कि जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव होता है तो मुकाबला जरूरी होता है। इस दौरान दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए।