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INDI गठबंधन का हाथ पाकिस्तान के साथ, आतंक का साथी राहुल गांधी: अमेठी में कांग्रेस सांसद के खिलाफ लगे पोस्टर


पहलगाम से पहले भारत में इतने इतने आतंकी हमले हुए लेकिन उरी और पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार सर्जिकल और एयर स्ट्राइक कर आतंकवाद पर सफलता मान चुप होकर बैठ गयी। परन्तु देश से जिस तरह पाकिस्तानियों को बाहर निकालना शुरू किया है यह काम बहुत पहले शुरू हो जाना चाहिए था। CAA विरोध में बने शाहीन बागों में क्या सरकार को नहीं मालूम था कि इस जमावड़े में भारतीय मुसलमान नहीं बल्कि पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का जमावड़ा था? 

ये INDI गठबंधन देश को गुमराह करता रहा। मोदी सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यदि समय रहते CAA विरोध के समय से ही सरकार सजग हो गयी पहलगाम नहीं होता। ना ही हिन्दू शोभा यात्राओं पर पत्थरबाज़ी। जिन जगहों पर पत्थरों का जमावड़ा मिला इन जगहों को नेस्ताबूत करना चाहिए था। लेकिन मोदी सरकार “सबका साथ सबका विकास” नारे से गुमराह करने में लगी हुई है। पिछली सरकारें ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ और सेकुलरिज्म के नारों से गुमराह करती रही।  राज्य और केंद्र सरकार को BPL कार्डधारकों की भी गंभीरता से जाँच करनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के अमेठी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी के खिलाफ कई तरह के पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में अमेठी के सांसद राहुल गांधी को आतंक का साथी बताया गया है। इसके साथ ही लगाए गए पोस्टर में इंडी गठबंधन पर आतंकवाद और पाकिस्तान का साथ देने का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी के अमेठी दौरे से पहले लगाए एक पोस्टर पर लिखा है- ‘आतंक का साथी, राहुल गांधी’। जबकि, दूसरे पोस्टर में लिखा है-INDI का हाथ, पाकिस्तान के साथ। शहर भर में लगाए गए एक पोस्टर में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के फोटो के साथ लिखा हुआ है क्या राहुल गांधी और उनकी पार्टी पाकिस्तान और आतंकवादियों का एजेंडा आगे बढ़ा रही है? पहलगाम में आतंकी हमले के बाद कांग्रेसी नेताओं के जिस तरह के बयान आए हैं, उसको लेकर इन सभी पोस्टरों में पार्टी नेताओं पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया। आप भी देखिए किस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं और लोग उसे शेयर कर क्या कह रहे हैं…

उत्तर प्रदेश : अमेठी के उस मंदिर में 20 साल बाद हुई पूजा, गूँजा ‘हर हर महादेव का नारा’, जिसे मुस्लिमों ने कर किया था बंद: दलित जेठूराम ने 120 साल पहले कराया था निर्माण

                अमेठी के पंच शिखर शिव मंदिर में 20 साल बाद पूजा-पाठ (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में मुसाफिरखाना थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गाँव में स्थित 120 साल पुराने पंच शिखर शिव मंदिर में 20 साल बाद पूजा-अर्चना संपन्न हुई। प्रशासन की सख्ती और भारी पुलिस सुरक्षा के बीच रविवार(16 फरवरी 2025) को मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन हुआ। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूँज उठा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मंदिर दलित(अनुसूचित वर्ग) के जेठूराम द्वारा 120 वर्ष पूर्व बनवाया गया था, लेकिन बीते 20 सालों से मुस्लिमों द्वारा अतिक्रमण कर इसे बंद करवा दिया गया था। ग्रामीणों ने पंच शिखर शिव मंदिर की मुक्ति के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए मंदिर को पुनः भक्तों के लिए खोल दिया गया।

पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं ने इसे सनातन धर्म की विजय बताया। मंदिर परिसर और आस-पास पीएसी सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सीओ मुसाफिरखाना अतुल सिंह और तहसीलदार स्वयं मौके पर उपस्थित रहे।

भाजपा के जिला मंत्री अतुल सिंह ने कहा कि यह हिंदू समाज की धार्मिक आस्था की जीत है। वहीं, एक बुजुर्ग श्रद्धालु ने कहा कि वर्षों बाद अपने मंदिर में पजा कर गर्व महसूस हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर पहले पुजारी गणेश तिवारी और उनके परिवार की देखरेख में था, लेकिन दो दशक पहले उन्हें मजबूरी में पलायन करना पड़ा। इसके बाद मंदिर पर मुस्लिमों ने अतिक्रमण कर लिया और पूजापाठ बंद हो गई। अब प्रशासन की कार्रवाई से मंदिर भक्तों के लिए पुनः खुल गया है। धार्मिक संगठनों और हिंदू समाज ने इस फैसले का स्वागत किया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अमेठी और उसके आसपास के क्षेत्रों में ऐसे कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थल हैं, जो विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं या अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं। स्थानीय लोगों की माँग है कि प्रशासन अन्य मंदिरों को भी मुक्त कराए और धार्मिक स्वतंत्रता को बनाए रखे।

उत्तर प्रदेश : ‘हिंदुस्तान में रहना है, या हुसैन कहना है’ : अमेठी के मुसाफिरखाना में मुहर्रम पर हुई नारेबाजी का वीडियो वायरल; I.N.D.I. गठबंधन को वोट देने वाले जिम्मेदार हैं इस उपद्रव के लिए

                                                          अमेठी में मुहर्रम पर लगे नारे
जब से देश में I.N.D.I. गठबंधन को जनता ने खटखट 8500 रूपए हर महीने मिलने के लालच में इनको वोट दिया, सनातन और देश विरोधी ताकतें मुखरित होनी शुरू हो गयी हैं। गनीमत है ये गठबंधन सत्ता में नहीं आया, जो अंजाम होना था, उसके बीज अंकुरित होने शुरू हो चुके हैं। पता नहीं इन घटनाओं को देख इस गठबंधन को वोट देने की बंद अक्ल और आंखें खुल रही है या नहीं।  

उत्तर प्रदेश के अमेठी के मुसाफिरखाना थाना से हाल में एक वीडियो सामने आई है। ये वीडियो मुहर्रम के दिन की बताई जा रही है। इसमें कुछ मुस्लिम लड़के जोर-जोर से भड़काऊ नारेबाजी कर रहे हैं। वीडियो में मुस्लिम लड़कों को उछल-उछलकर कहते सुना जा सकता है- “हिंदुस्तान में रहना है या हुसैन कहना है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पता चला है कि मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में रविवार (14 जुलाई 2024) देर शाम मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था, जिसमें युवकों के झुंड में शामिल लड़कों ने ऐसे नारे लगाने शुरू कर दिए। बाद में वीडियो वायरल हुई और लोगों ने इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद पुलिस ने इस पर संज्ञान लिया।

वीडियो को शेयर करते हुए स्वराज्य की वरिष्ठ पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने एक्स पर कहा कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश के अमेठी की है। इसी समुदाय के लोग और नेता बाद में कहते हैं कि इनके मजहब के लोगों को सताया जा रहा है वो डर में जी रहे है और नरसंहार का सामना कर रहे हैं।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद अमेठी पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई की। उन्होंने वीडियो में शामिल युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही उनके ऊपर सुसंगत धाराओं में अभियोग भी पंजीकृत किया गया है। आगे की कार्रवाई जाँच के बाद होगी।

वायरल वीडियो के बाद अमेठी के संत समाज में भी नाराजगी है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सागरा आश्रम पीठाधीश्वर मौनी महाराज ने वायरल वीडियो पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री व पुलिस अधीक्षक से मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई है और कहाँ है कि ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो जिससे भविष्य में इस तरह का माहौल न बन पाए।

क्या 4 जून के बाद 2 हिस्सों में टूट जाएगी कांग्रेस? क्या कांग्रेस इतिहास बन जाएगी?


राजनीति और लोकतंत्र में आरोप लगाना कोई गलत बात नहीं, लेकिन उन आरोपों का आधार होना चाहिए। जब आधारहीन आरोप लगाने में समस्त विपक्ष लामबंद नहीं हुआ, बल्कि अपना ही अस्तित्व ख़त्म कर रहे हैं। माना जिन दिनों तुम्हारी तूती बोलती थी, तुमने लगभग 5 अरबों वर्षों से प्राचीन सनातन और गौरवशाली इतिहास को धूमिल एवं कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आतताई गाज़ियों को महान मुग़ल बादशाह बताकर मुस्लिम तुष्टिकरण की हर पराकाष्ठा को तार-तार करने में शर्म नहीं आयी। भारत में कम्युनिस्ट पार्टी एक अपवाद को छोड़ जितनी भी पार्टियां हैं, सभी कांग्रेस के ही गर्भ से जन्मी हैं, चाहे बीजेपी हो। लेकिन राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर बनी तत्कालीन भारतीय जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस होश में नहीं आयी। 

परिवार भक्त उस समय भी अंधे हो गए, जब सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के लिए तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर फेंक दिया था, उस दिन कांग्रेस ने इतिहास बनने का अध्याय लिख दिया था। तब से देख लो कांग्रेस बैसाखियों पर आ गयी। और अब 2024 लोक सभा चुनाव कांग्रेस के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने जा रहा है। यह भी अटकलें लगाई जा रही है हैं कि कांग्रेस अपना राष्ट्रीय स्तर का स्थान बनाए रखने में सक्षम होगी?   

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को आएँगे, लेकिन उसके बाद देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हो जाएँगे। गाँधी परिवार के बेहद करीबी रहे नेता ने दावा किया है कि 4 जून के बाद कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में टूट सकती है। ऐसा होने पर कांग्रेस के एक धड़े का नेतृत्व राहुल गाँधी करेंगे, तो दूसरे धड़े का नेतृत्व प्रियंका गाँधी वाड्रा। ये दावा किया है प्रियंका गाँधी वाड्रा के बेहद करीबी रहे नेता प्रमोद कृष्णम ने, जिन्हें कांग्रेस पार्टी से 6 साल के लिए निकाला जा चुका है।

प्रमोद कृष्णम ने दावा किया राहुल गाँधी ने रायबरेली से प्रियंका गाँधी की जगह खुद को चुनाव मैदान में उतार कर बड़ी गलती कर दी है, इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। ये नाराजगी 4 जून के बाद खुलकर सामने आ जाएगी, जब पार्टी दो हिस्सों में टूट जाएगी। 

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में प्रमोद कृष्णम ने ये दावा किया है। प्रमोद कृष्णम ने दावा किया है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के भीतर एक साजिश हो रही है, जिसका वो शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का एक बड़ा धरा नहीं चाहता है कि प्रियंका गाँधी संसद के अंदर पहुँचें। इससे पहले भी आचार्य प्रमोद कृष्णम प्रियंका गाँधी का खुलकर समर्थन कर चुके हैं

   

 https://youtube.com/shorts/XqFL8r6iUw0?si=Shlw1g-TZJ0pkxCv

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गाँधी के अमेठी छोड़ने के बाद रायबरेली से लड़ने के फैसले को गलत फैसला बताया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जब राजा मैदान छोड़कर कर भाग जाता है, तो सेना हार मान लेती है। अभी देखना कांग्रेस पार्टी के बहुत नेता भागेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपमान पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा राहुल गाँधी को ये भी नहीं पता होगा द्वारिका कहाँ है? द्वारिकाधीश कौन हैं? उनको तो केवल दिल्ली की द्वारिका का ही पता है।

प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राहुल गाँधी ने प्रियंका गाँधी के खिलाफ साजिश रची है। इसकी वजह से 4 जून के बाद कांग्रेस में एक और टूट होगी। एक कांग्रेस होगी राहुल गाँधी की और एक होगी प्रियंका गाँधी की। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अंदर ज्वालामुखी धधक रहा है। इस पूरे षडयंत्र के बारे में प्रियंका गाँधी को जानकारी है।

शायद यही कारण है कि इस चुनाव में प्रियंका प्रचार करेंगी, चुनाव नहीं लड़ रही। राहुल से तेज प्रियंका नज़र आ रही है। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। यानि अब पछताए क्या होय जब चिड़ियाँ खेत चुग जाएं। अब प्रियंका को जनता को इस ज्वलंत प्रश्न का भी जवाब देना पड़ेगा कि जिस अपने पिता राजीव की हत्या को बलिदान की संज्ञा क्यों दी जा रही है? क्यों पिता के हत्यारों को माफ़ किया? क्या कोई अपने पिता के हत्यारों को माफ़ करता है? क्या इस हत्या के पीछे कोई पारिवारिक षड़यंत्र था?     

अमेठी-रायबरेली में हार का डर: डरो मत, भागो मत: इंडो-पाक युद्ध के दौरान पायलट राजीव छुट्टी पर क्यों गए? क्यों नहीं राजीव को नौकरी से बर्खास्त किया? जबकि युद्ध के दौरान किसी भी एयरलाइन्स के पायलट को 24 घंटे नौकरी पर रहने का नियम है

सारे दल और मीडिया राहुल गाँधी के आगे-पीछे क्यों भागते रहते हैं? राहुल गाँधी केवल एक सांसद है, लेकिन इतना उछाला जा रहा है मानो कोई तोप हो। कहते हैं परिवार ने देश के लिए बलिदान दिए हैं। 

बलिदान देखिए: 

युद्ध एवं किसी भी आपात स्थिति के दौरान हर पायलट को, चाहे वह किसी भी एयरलाइन में हो, 24 घंटे ड्यूटी के लिए तैयार रहना होता है। लेकिन राजीव गाँधी 1971 के युद्ध के दौरान छुट्टी पर थे, क्या कार्यवाही हुई? नहीं हुई, क्योकि वह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का बेटा था। काश राजीव की बजाए कोई अन्य पायलट छुट्टी पर होता, नियमानुसार इस पायलट की नौकरी से ही छुट्टी हो गयी होती। 

दूसरे, समाचार(अगर समाचार सत्य है) था कि राजीव गाँधी की मानव बम में हत्या हुई, लेकिन परिवार हत्यारों प्रति नरमी क्यों? क्या कारण है कोई पत्नी एवं बच्चे अपने पिता/पति के लिए नरमी बरते, देखा है कहीं परिवार को अपने पति/पिता के हत्यारों के लिए नरमी बरते?

तीसरे, इंदिरा गाँधी की हत्या हुई खालिस्तान के कारण और उसी इंदिरा की कांग्रेस तथाकथित किसान आंदोलन में खालिस्तान के नारे लगने पर उस आंदोलन का समर्थन करती है, क्या इसीका नाम देश के लिए बलिदान कहते हैं? 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार, 3 मई को पश्चिम बंगाल के बर्धमान-दुर्गापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के अमेठी छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ने पर भी तंज कसा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वे डर के कारण रायबरेली भाग गए। उन्होंने कहा कि ‘मैंने पहले ही ये भी बता दिया था कि शहजादे वायनाड में हार के डर से अपने लिए दूसरी सीट खोज रहे हैं। अब इन्हें अमेठी से भागकर रायबरेली सीट चुननी पड़ी है। ये लोग घूम-घूम कर सबको कहते हैं- डरो मत। मैं भी इन्हें यही कहूंगा- डरो मत, भागो मत। आज मैं एक और बात कहूंगा कांग्रेस इस बार पहले से भी कम सीटों पर सिमटने जा रही है। अब देश भी समझ रहा है कि ये लोग चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ रहे हैं, ये सिर्फ देश को बांटने के लिए चुनाव के मैदान का उपयोग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे पर तंज कसते हुए कहा कि वो वायनाड से भी हार रहे हैं और अमेठी सीट से लड़ने से डर गए हैं, इसलिए रायबरेली से रास्ता खोज रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। लोग वीडियो को शेयर कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ट्रोल कर रहे हैं।

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी से औपचारिक गठबंधन करने के बावजूद कांग्रेस एक तरह से प्रदेश में मटियामेट हो गई। सबसे पुरानी पार्टी की दुहाई देने में नहीं थकने वाली पार्टी सीटों के मामले में वहां अबतक के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुकी है। लोकसभा चुनावों में मोदी लहर के चलते पार्टी को अमेठी और रायबरेली के गढ़ को बचाने में पसीने छूट गए थे। विधानसभा चुनाव परिणामों से तय हो चुका है कि वहां भी उनकी लुटिया डूबनी तय है। अंग्रेजी अखबार इकॉनोमिक्स टाइम्स के मुताबिक अमेठी और रायबरेली के चुनावी आंकड़ों को देखने से पता चल जाएगा कि कांग्रेस, एक हाथ से समाजवादी पार्टी की साइकिल और दूसरे से बीएसपी के हाथी की पूंछ पकड़ने के लिए क्यों छटपटा रही है।

कांग्रेस के रणनीतिकार जानते हैं कि यूपी विधानसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन बहुत बड़ी गलती थी। लेकिन फिर भी पार्टी नेतृत्व में बसपा से तालमेल की भी ललचाहट दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंधी में कांग्रेस और बाकी पार्टियां एक के बाद एक राज्यों से उखड़ती चली जा रही हैं। कांग्रेस को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं अबकी बार रायबरेली से सोनिया गांधी (या प्रियंका वाड्रा) और अमेठी से राहुल गांधी भी न हार जाएं। क्योंकि ले-देकर इन्हीं दो सीटों पर तो पिछली लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लाज बची थी।

अमेठी में हार जाएंगे राहुल ?
हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में अमेठी लोकसभा की पांच विधानसभा सीटों के वोटों के आंकड़े को देखें तो कांग्रेस, भाजपा से एक लाख से भी अधिक वोटों से पिछड़ रही है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि कांग्रेस और सपा ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा, फिर भी 5 में से 4 सीटें बीजेपी जीती और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस सीट से 1 लाख 8 हजार वोटों से जीते थे। तब समाजवादी पार्टी ने यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था, फिर भी 2009 के मुकाबले राहुल के करीब 25 प्रतिशत वोट घट गए थे। यानी 2014 में कांग्रेस ने जिस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देखा था, उनके लिए आज की तारीख में अपनी सीट बचाने के भी लाले पड़ गए हैं।

रायबरेली सीट भी सुरक्षित नहीं
रायबरेली में विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां कांग्रेस को 30 हजार वोटों की बढ़त तो हासिल है, लेकिन 5 विधानसभा सीटों में से 2 पर कब्जा करके बीजेपी ने कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के लिए भय की वजह ये भी है कि 2014 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस सीट से 3.5 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीती थीं। यानी तीन साल से कम वक्त में ही यहां पार्टी का जनाधार बुरी तरह खिसक चुका है। सपा ने तब भी सोनिया के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा था। यानी अब रायबरेली सीट भी गांधी परिवार के लिए सुरक्षित नहीं बची है, तो दक्षिण भारत की किसी सीट से उम्मीद रखना ही बेमानी लगता है।