अमेठी-रायबरेली में हार का डर: डरो मत, भागो मत: इंडो-पाक युद्ध के दौरान पायलट राजीव छुट्टी पर क्यों गए? क्यों नहीं राजीव को नौकरी से बर्खास्त किया? जबकि युद्ध के दौरान किसी भी एयरलाइन्स के पायलट को 24 घंटे नौकरी पर रहने का नियम है

सारे दल और मीडिया राहुल गाँधी के आगे-पीछे क्यों भागते रहते हैं? राहुल गाँधी केवल एक सांसद है, लेकिन इतना उछाला जा रहा है मानो कोई तोप हो। कहते हैं परिवार ने देश के लिए बलिदान दिए हैं। 

बलिदान देखिए: 

युद्ध एवं किसी भी आपात स्थिति के दौरान हर पायलट को, चाहे वह किसी भी एयरलाइन में हो, 24 घंटे ड्यूटी के लिए तैयार रहना होता है। लेकिन राजीव गाँधी 1971 के युद्ध के दौरान छुट्टी पर थे, क्या कार्यवाही हुई? नहीं हुई, क्योकि वह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का बेटा था। काश राजीव की बजाए कोई अन्य पायलट छुट्टी पर होता, नियमानुसार इस पायलट की नौकरी से ही छुट्टी हो गयी होती। 

दूसरे, समाचार(अगर समाचार सत्य है) था कि राजीव गाँधी की मानव बम में हत्या हुई, लेकिन परिवार हत्यारों प्रति नरमी क्यों? क्या कारण है कोई पत्नी एवं बच्चे अपने पिता/पति के लिए नरमी बरते, देखा है कहीं परिवार को अपने पति/पिता के हत्यारों के लिए नरमी बरते?

तीसरे, इंदिरा गाँधी की हत्या हुई खालिस्तान के कारण और उसी इंदिरा की कांग्रेस तथाकथित किसान आंदोलन में खालिस्तान के नारे लगने पर उस आंदोलन का समर्थन करती है, क्या इसीका नाम देश के लिए बलिदान कहते हैं? 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार, 3 मई को पश्चिम बंगाल के बर्धमान-दुर्गापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के अमेठी छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ने पर भी तंज कसा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वे डर के कारण रायबरेली भाग गए। उन्होंने कहा कि ‘मैंने पहले ही ये भी बता दिया था कि शहजादे वायनाड में हार के डर से अपने लिए दूसरी सीट खोज रहे हैं। अब इन्हें अमेठी से भागकर रायबरेली सीट चुननी पड़ी है। ये लोग घूम-घूम कर सबको कहते हैं- डरो मत। मैं भी इन्हें यही कहूंगा- डरो मत, भागो मत। आज मैं एक और बात कहूंगा कांग्रेस इस बार पहले से भी कम सीटों पर सिमटने जा रही है। अब देश भी समझ रहा है कि ये लोग चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ रहे हैं, ये सिर्फ देश को बांटने के लिए चुनाव के मैदान का उपयोग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे पर तंज कसते हुए कहा कि वो वायनाड से भी हार रहे हैं और अमेठी सीट से लड़ने से डर गए हैं, इसलिए रायबरेली से रास्ता खोज रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। लोग वीडियो को शेयर कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ट्रोल कर रहे हैं।

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी से औपचारिक गठबंधन करने के बावजूद कांग्रेस एक तरह से प्रदेश में मटियामेट हो गई। सबसे पुरानी पार्टी की दुहाई देने में नहीं थकने वाली पार्टी सीटों के मामले में वहां अबतक के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुकी है। लोकसभा चुनावों में मोदी लहर के चलते पार्टी को अमेठी और रायबरेली के गढ़ को बचाने में पसीने छूट गए थे। विधानसभा चुनाव परिणामों से तय हो चुका है कि वहां भी उनकी लुटिया डूबनी तय है। अंग्रेजी अखबार इकॉनोमिक्स टाइम्स के मुताबिक अमेठी और रायबरेली के चुनावी आंकड़ों को देखने से पता चल जाएगा कि कांग्रेस, एक हाथ से समाजवादी पार्टी की साइकिल और दूसरे से बीएसपी के हाथी की पूंछ पकड़ने के लिए क्यों छटपटा रही है।

कांग्रेस के रणनीतिकार जानते हैं कि यूपी विधानसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन बहुत बड़ी गलती थी। लेकिन फिर भी पार्टी नेतृत्व में बसपा से तालमेल की भी ललचाहट दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंधी में कांग्रेस और बाकी पार्टियां एक के बाद एक राज्यों से उखड़ती चली जा रही हैं। कांग्रेस को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं अबकी बार रायबरेली से सोनिया गांधी (या प्रियंका वाड्रा) और अमेठी से राहुल गांधी भी न हार जाएं। क्योंकि ले-देकर इन्हीं दो सीटों पर तो पिछली लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लाज बची थी।

अमेठी में हार जाएंगे राहुल ?
हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में अमेठी लोकसभा की पांच विधानसभा सीटों के वोटों के आंकड़े को देखें तो कांग्रेस, भाजपा से एक लाख से भी अधिक वोटों से पिछड़ रही है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि कांग्रेस और सपा ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा, फिर भी 5 में से 4 सीटें बीजेपी जीती और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस सीट से 1 लाख 8 हजार वोटों से जीते थे। तब समाजवादी पार्टी ने यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था, फिर भी 2009 के मुकाबले राहुल के करीब 25 प्रतिशत वोट घट गए थे। यानी 2014 में कांग्रेस ने जिस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देखा था, उनके लिए आज की तारीख में अपनी सीट बचाने के भी लाले पड़ गए हैं।

रायबरेली सीट भी सुरक्षित नहीं
रायबरेली में विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां कांग्रेस को 30 हजार वोटों की बढ़त तो हासिल है, लेकिन 5 विधानसभा सीटों में से 2 पर कब्जा करके बीजेपी ने कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के लिए भय की वजह ये भी है कि 2014 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस सीट से 3.5 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीती थीं। यानी तीन साल से कम वक्त में ही यहां पार्टी का जनाधार बुरी तरह खिसक चुका है। सपा ने तब भी सोनिया के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा था। यानी अब रायबरेली सीट भी गांधी परिवार के लिए सुरक्षित नहीं बची है, तो दक्षिण भारत की किसी सीट से उम्मीद रखना ही बेमानी लगता है।


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