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बिहार : ATS का बड़ा एक्शन, मुजफ्फरपुर से युवक को उठाया; पाकिस्तान से जुड़े तार! क्या बिहार में आ रही थी विदेशी फंडिंग?

                                                                                                                                   प्रतीकात्मक 
बिहार के मुजफ्फरपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल एटीएस (ATS) की टीम ने देश की सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील मामले में मुजफ्फरपुर में बड़ी कार्रवाई की है. ATS ने मुजफ्फरपुर जिले के रतनपुर गांव से मो. मुस्तफा नाम के युवक को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित कुख्यात हथियार तस्कर शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था. जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी भारत विरोधी ताकतों के लिए काम कर रहा था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स व एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से लगातार संपर्क में था.

मोबाइल जांच में खुला बड़ा राज

ATS की तकनीकी टीम ने जब आरोपी के मोबाइल फोन की गहन जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. जांच में मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा, चैट बैकअप और एक्टिव मैसेजिंग एप्लिकेशनों को रिकवर किया गया. जांच में सामने आया कि मो. मुस्तफा पाकिस्तान स्थित हथियार तस्कर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी राणा हुनैन के साथ लगातार संपर्क में था. मोबाइल से कई आपत्तिजनक और देश विरोधी सामग्री भी बरामद हुई है.

संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें और लोकेशन भेजने का आरोप

प्रारंभिक जांच में ATS को आरोपी के मोबाइल से भारत के कई संवेदनशील और रणनीतिक महत्व वाले स्थानों के वीडियो, तस्वीरें और डिजिटल सामग्री मिली हैं. एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ने प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्रों की फोटो-वीडियो बनाकर उनकी सटीक लोकेशन पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजी थी. सूत्रों के मुताबिक यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं.

विदेशी फंडिंग और नेटवर्क की जांच

ATS फिलहाल पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. जांच एजेंसियां आरोपी के यात्रा इतिहास, डिजिटल उपकरण, सोशल मीडिया गतिविधियां, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं. इसके साथ ही अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर जांच की जा रही है. एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और कहीं विदेशी फंडिंग तो नहीं हो रही थी.

जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज

बिहार ATS ने मो. मुस्तफा के खिलाफ जासूसी, देश विरोधी गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

आधी रात गिरफ्तार पप्पू यादव, आवास पर पहुँचे 100 पुलिसकर्मी: 31 साल पुराना मामला जिसमें अरेस्ट हुए सांसद

                                             पप्पू यादव गिरफ्तार (साभार: ABP न्यूज)
बिहार के पूर्णिया से लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को देर रात करीब 12 बजे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 31 साल पुराने एक मामले में पटना की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी आदेश के बाद की गई, जिसमें पप्पू यादव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस की टीम शुक्रवार रात करीब 12 बजे मंदिरी स्थित पप्पू यादव के आवास पर पहुँची थी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान लगभग तीन घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इस दौरान पप्पू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए जिसके बाद उनके समर्थकों में नाराजगी फैल गई और माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति सामान्य होने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और अपने साथ ले गई। गिरफ्तारी के समय पप्पू यादव ने कहा कि उन्हें मामले को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “यह ठीक नहीं है, मेरे साथ क्या होगा यह कहना मुश्किल है।”

गिरफ्तारी के बाद देर रात उन्हें हेल्थ चेक-अप के लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ले जाया गया, जहाँ उनका मेडिकल चेकअप कराया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आज (शनिवार, 7 फरवरी) उन्हें संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा।

पप्पू यादव की गिरफ्तारी के लिए उनके आवास पर बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात किया गया। कार्रवाई के दौरान सिटी एसपी के नेतृत्व में 5 डीएसपी, 6 थानेदार और करीब 100 पुलिसकर्मी मौके पर पहुँचे।

पटना के एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 1995 से जुड़ा हुआ है, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया के तहत ट्रायल चल रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में सांसद को अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन तय तिथि पर उनकी उपस्थिति नहीं हुई। इसी वजह से अदालत के आदेश पर उनकी गिरफ्तारी की गई।

क्या है 31 साल पुराना केस?

विवाद की जड़ वर्ष 1995 का एक मामला है, जिसमें आरोप है कि पप्पू यादव ने पटना के गर्दनीबाग इलाके में स्थित एक मकान को किराए पर लिया था लेकिन उन्होंने इस घर पर कब्जा कर लिया। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल के अनुसार, पप्पू यादव ने मकान को व्यक्तिगत उपयोग के लिए लेने की बात कही थी बकि बाद में उसी मकान को राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया। जब मकान मालिक को इसकी जानकारी हुई तो दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके बाद उन्होंने गर्दनीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।

यह मामला गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/1995 के तहत दर्ज हुआ था, जिसमें पप्पू यादव पर धोखाधड़ी, जालसाजी, घर में अवैध प्रवेश, आपराधिक धमकी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। लंबे समय से यह मामला सांसद-विधायक (MP-MLA) विशेष अदालत में विचाराधीन था और वहाँ इसकी नियमित सुनवाई चल रही थी।

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, पप्पू यादव को कई बार समन जारी कर अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया, लेकिन वे निर्धारित तिथियों पर पेश नहीं हुए। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना मानते हुए पहले उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया और उसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पटना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शुक्रवार आधी रात उन्हें गिरफ्तार किया।

बिहार : जेल में बंद उम्मीदवार के समर्थन में लालू का रोड शो, RJD विधायक रीतलाल यादव जो तीन बार जेल से लड़ा है चुनाव; बिहार के पिछड़ापन का कारण है जातिगत और गुंडों का आतंक

            बाहुबली रीतलाल यादव के लिए लालू ने की 15KM लंबी रोड शो (साभार : MSN & Jansatta)
आज बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बिहारियों को जातिगत और गुंडों के आतंक के विरुद्ध सड़क पर आकर आना होगा। वैसे जातिगत सियासत पूरे भारत में है। हिन्दुओं को सोंचना होगा कि कोई भी पार्टी मुसलमानों और ईसाईयों में भयंकर जातिवाद के विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं और ये कुर्सी के भूखे नेता हिन्दुओं को जातियों में बाँट सियासत करते हैं और महापागल हिन्दू भी इनके मकड़जाल में फंस लड़ते रहते हैं। और इस काम में मीडिया भी पीछे नहीं। देखिए 243 सीटों वाली विधानसभा में देखिए कितनी जातिगत पार्टियां बनी हुई है। सभी चुनावों में सौदेबाज़ी करते हैं। क्या देश या प्रदेश चलाएंगे ऐसे सौदेबाज़? 

हिन्दुओं को हिन्दुओं को जातियों में बांटने वाले नेताओं, पार्टियों और मीडिया के खिलाफ एकजुट होकर सबका विरोध करना होगा   

बिहार के पहले चरण के मतदान में मीडिया हिन्दुओं की जातियों का प्रतिशत दिखाते हैं लेकिन मुसलमानों को एकजुट दिखाता है, क्यों? जातिगत घिनौनी सियासत में फंसे हिन्दुओं को मालूम होना चाहिए कि हिन्दू किसी भी जाति का हो एक ही शमशान पर दाह संस्कार होता है और एक ही मन्दिर में जाकर अपने इच्छित ईश्वर की पूजा अर्चना करते हैं। जबकि मुसलमानों और ईसाईयों में यही स्थिति एकदम उलटी है। एक जाति का मुसलमान या ईसाई दूसरी जाति की मस्जिद या चर्च में नहीं जा सकता। अपने मुर्दे को भी दूसरे जाति के कब्रिस्तान में दफ़न नहीं सकते। हिन्दुओं को हिन्दुओं को जातियों में बांटने वाले नेताओं, पार्टियों और मीडिया के खिलाफ एकजुट होकर सबका विरोध करना होगा। चुनावों में ऐसे नेताओं और उनकी पार्टियों को चारों खाने चित करना होगा।   

पटना की सड़कों पर एक अजीबोगरीब दृश्य देखने को मिला। जिधर देखिए, हरे झंडे लहरा रहे थे और भीड़ में एक पुराना करिश्माई चेहरा, लालू प्रसाद यादव, अपनी बंद गाड़ी से जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। यह रोड शो किसी समाज सुधारक या आम नेता के लिए नहीं था। लालू यादव खुद मैदान में उतरे थे, ताकि बाहुबली कहे जाने वाले उम्मीदवार रीतलाल यादव को जिता सकें।

यह चुनावी प्रचार कम और अपराध के महिमामंडन जैसा ज्यादा लगा, क्योंकि लालू यादव उस उम्मीदवार के लिए वोट माँग रहे थे जो खुद गंभीर आपराधिक आरोपों के चलते जेल में बंद है। यह घटना बिहार की राजनीति के एक गहरे सच को उजागर करती है। अपराध और राजनीति का गठजोड़। आईए एक बार आपको भी वाकिफ करा देते हैं रीतलाल यादव की आपराधिक हिस्ट्री।

लालू यादव ने रीतलाल यादव के लिए किया रोड शो

लालू यादव ने पटना के दानापुर विधानसभा क्षेत्र में 3 नवंबर 2025 को करीब 15 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इसका मकसद था- RJD के उम्मीदवार और सिटिंग विधायक रीतलाल यादव को जीताना।

लेकिन रीतलाल यादव जेल में हैं। हाँ, आपने सही पढ़ा- जेल में बंद उम्मीदवार के लिए रोड शो। रीतलाल 17 अप्रैल से बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगने और धमकी देने के मामले में जेल में हैं। चुनावी नियम के कारण वे खुद प्रचार में नहीं उत सकता था। हालाँकि, रीतलाल यादव ने नामांकन के लिए कोर्ट से अनुमति माँगी, जो नहीं मिली। अब रीतलाल का परिवार ही चुनाव प्रचार संभाल रहा है।

रोड शो का कारण?

लालू यादव का दानापुर में उतरना महज रीतलाल की सीट बचाने की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीतिक चाल थी, जिसका मुख्य उद्देश्य विरोधियों को हराना और अपना वोट बैंक सुरक्षित करना था।
दानापुर विधानसभा क्षेत्र, लालू के दामाद रामकृपाल यादव (जो अब भाजपा में हैं) को हराने वाली मीसा भारती के पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। रीतलाल की जीत मीसा भारती के भविष्य के रास्ते को आसान बनाएगी। लालू का आना यह स्पष्ट संदेश देता है कि परिवार के वर्चस्व के लिए किसी भी कीमत पर सीट जीतनी है, भले ही उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि का हो।
इसके अलावा, दानापुर में यादव वोटर करीब 22% हैं। इसके बाद करीब 20% फॉरवर्ड, करीब 15% दलित, 20-25% EBC और 6-8% मुस्लिम हैं। NDA के उम्मीदवार रामकृपाल यादव (जो खुद लालू के पूर्व शिष्य रहे हैं) की छवि ‘सॉफ्ट’ है। इस इलाके में यादव वोटर बँट सकते थे। खुद को यादवों का सबसे बड़ा नेता मानने वाले लालू यादव ने सड़क पर उतरकर यह सुनिश्चित किया कि यादव वोट एकजुट होकर केवल रीतलाल को ही मिलें। यह एकजुटता अपराध की पृष्ठभूमि को दरकिनार कर केवल जातीय आधार पर वोट डालने का संकेत है।
लालू के करीबी रामकृपाल यादव, 2014 में टिकट न मिलने पर बीजेपी में चले गए थे और उन्होंने मीसा भारती को हराया था। लालू यादव अपने पुराने शिष्य को हराने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। लालू का रोड शो, रामकृपाल के यादव वोटों को अपनी तरफ खींचने के प्रयास को विफल करने की रणनीति का हिस्सा है।

कौन हैं रीतलाल यादव?

रीतलाल यादव, जिन्हें मीडिया में ‘बाहुबली‘ कहा जाता है, लालू यादव के पुराने संपर्क वाले हैं। रीतलाल का राजनीतिक सफर 2003 में लालू यादव की ‘तेल पिलावन, लाठी घुमावन‘ रैली के दौरान शुरू हुआ था। एक दौर ऐसा भी कहा जाता है कि जब दानापुर डिवीजन से रेलवे के जितने भी टेंडर निकलते थे, वो रीतलाल यादव ही डील करते थे।

रीतलाल 50 लाख रुपए की रंगदारी माँगने और धमकी देने के मामले में जेल में बंद हैं। यह मामला बिल्डर कुमार गौरव से जुड़ा है। रीतलाल के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन पर हत्या, रंगदारी, वसूली और धमकी देने जैसे कुल 11 आपराधिक मामले लंबित हैं।

रीतलाल तब चर्चा में आए जब उन पर भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या का आरोप लगा। 2010 में विधानसभा चुनाव से पहले रीतलाल ने सरेंडर कर दिया था। रीतलाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जेल से ही चुनाव लड़ा और हारे। हालाँकि, रीतलाल को भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की हत्या मामले में हाल ही में जमानत मिली, लेकिन वे रंगदारी के मामले में फिर जेल में गए और पुलिस की हिरासत में नामांकन करने पहुँचे।

एक ऐसे उम्मीदवार के लिए, जिस पर संगीन आरोप हैं और जो चुनाव प्रचार की अनुमति के बावजूद जेल से बाहर नहीं आ सका, खुद पार्टी सुप्रीमो का प्रचार के लिए उतरना यह दिखाता है कि पार्टी की प्राथमिकता ‘अपराधमुक्त छवि’ नहीं, बल्कि ‘वोट बैंक की जीत’ है। यह सीधे तौर पर एक बार फिर से ‘जंगलराज’ और आपराधिक तत्वों को राजनीति में संरक्षण देने की मानसिकता को दर्शाता है।

अपराधी को टिकट: ‘दोहरी सोच’ की राजनीति

यह घटना लालू यादव की ‘दोहरी सोच‘ को उजागर करती है। एक तरफ, उनके परिवार के सदस्य (जैसे तेजस्वी यादव) अक्सर आपराधिक छवि वाले नेताओं पर बयान देते हैं, लेकिन जब दानापुर में रीतलाल यादव जैसे जेल में बंद उम्मीदवार की बात आती है, तो वे खुद प्रचार में उतर आते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लालू के लिए नैतिकता या कानून मायने नहीं रखता, बल्कि केवल चुनाव जीतना मायने रखता है। एक ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारना, जो गंभीर आरोपों में फँसा है और जिसके लिए खुद पार्टी मुखिया को उतरना पड़े, यह दिखाता है कि RJD की राजनीति में अपराध और राजनीति को अलग-अलग मानने की सोच है। यदि कोई नेता बीजेपी का हो तो वह अपराधी है, लेकिन अगर RJD का हो, तो उसे ‘साजिश का शिकार’ बताकर उसे समर्थन दिया जाता है।

सुनो कंचना यादव! जंगलराज सिर्फ एक शब्द नहीं, इसलिए आज भी डरता है बिहार: TV पर गों-गों मत करो, हाई कोर्ट ने लालू-राबड़ी राज को ‘नरक’ भी कहा था

लालू यादव के लिए जंगलराज का शब्द पटना हाई कोर्ट की तरफ से 1997 में कहा गया था (साभार : ABP & Kanchana Yadav)
बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है। एक बार फिर बिहार में नीतीश राज के विकास और लालू राज के ‘जंगलराज’ को लेकर जमीनी स्तर पर चर्चा होने लगी है। RJD के नेता और प्रवक्ता किसी भी तरह खुद को अपनी ‘जंगलराज’ की छवि से बचाने में लगे हैं। इसी बीच, RJD प्रवक्ता कंचन यादव ‘जंगलराज’ शब्द कहाँ से जन्मा है इसका सबूत आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप से लाइव डिबेट में माँगा।

अब तक तेजस्वी यादव में जितना चुनावी प्रचार किया है अपने आपको प्रसारित किया है लालू का नाम तक नहीं लिया, क्योकि सच्चाई जानते हैं पिता का नाम लेने पर जनता के दिमाग में "जंगल राज" और "नौकरी के बदले जमीन घोटाला" आ गया तो चुनाव ही हाथ से निकल जाएगा।      

कहाँ से आया जंगलराज शब्द?- RJD प्रवक्ता

हाल ही में एक टीवी डिबेट में RJD प्रवक्ता कंचन यादव ने जब आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप से यह सवाल किया गया कि ‘जंगलराज’ शब्द का जन्म कहाँ से हुआ?, तो अंजना ओम कश्यप ने जवाब दिया, “पटना हाई कोर्ट ने यह शब्द मौखिक रूप से इस्तेमाल किया था।”

आरजेडी प्रवक्ता कंचन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया और चुनौती दी कि अगर कोर्ट ने ऐसा कहा हो तो आदेश निकालकर दिखाएँ। आरजेडी की प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह शब्द बीजेपी और मीडिया ने मिलकर फैलाया है, कोर्ट ने कभी ‘जंगलराज’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।

जब हाईकोर्ट ने कहा था ‘बिहार में कोई सरकार नहीं, जंगलराज है’

सच्चाई यह है कि 1997 में पटना हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी में कहा था कि ‘बिहार में नाम के लायक कोई सरकार नहीं है, और यहाँ जंगलराज चल रहा है’। यह टिप्पणी जस्टिस बीपी सिंह और जस्टिस धर्मपाल सिन्हा की बेंच ने की थी। टिप्पणी किसी राजनीतिक केस में नहीं, बल्कि पटना की बदहाल नगर व्यवस्था और जलजमाव को लेकर थी। जजों ने पटना को ‘Veritable Hell’ यानी ‘वास्तविक नरक’ कहा था।

यह टिप्पणी सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और शहर की गंदगी पर थी, न कि किसी आपराधिक मामले पर। कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया था कि पटना भारत की सबसे गंदी राजधानी होने का दावा कर सकता है। कोर्ट ने भ्रष्ट नौकरशाहों को प्रशासन चलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

जंगलराज 2.0: अब भी डर कायम है?

आज तेजस्वी यादव खुद को ‘नई सोच का नेता’ कहकर पेश करते हैं। लेकिन सच यही है कि लालू यादव की RJD का नाम आते ही अब भी बिहार के कई हिस्सों में लोग डरने लगते हैं। पटना से गया तक कई जगहों पर युवाओं, व्यापारियों, महिलाओं में अब भी यह चिंता बनी रहती है कि अगर राजद सत्ता में लौटी तो क्या फिर वही 90 के दशक जैसा डर लौट आएगा?

 जंगलराज कोई अखबार की हेडलाइन नहीं, वह बच्चा है जो स्कूल जाने से पहले माँ की आँखों में डर देखता है। वह व्यापारी है जो दुकान की गल्ले पर बैठा हर आहट पर चौंकता है। वह बेटी है जो कॉलेज जाते वक्त हर मोड़ पर डरती है कि कहीं पीछे कोई बाइक न आ जाए।

और इसीलिए, जंगलराज सिर्फ एक शब्द नहीं, बिहार के उस दौर की बदनसीबी का नाम है… एक ऐसा नाम, जिसे आज भी सुनते ही लोग सिहर उठते हैं।

बिहार बंद : उपद्रव करवा भाषणबाजी कर भाग गए राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव: चुनाव आयोग के अधिकारी करते रहे इंतजार, नहीं बताया वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में क्या है आपत्ति; INDI गठबंधन की गुलाम मीडिया खामोश, क्यों?

                                     पटना में राहुल - तेजस्वी और पप्पू समेत अन्य (फोटो साभार: Swadeshi)

किस तरह जनता को गुमराह किया जाता है जुलाई 9 को INDI गठबंधन द्वारा बुलाया बिहार बंद में सामने आ गया। पुलिस के लठ खाए कार्यकर्ताओं ने लेकिन तेजस्वी और राहुल भाषणबाज़ी कर भाग गए। चुनाव आयोग अधिकारी इंतज़ार में सूखे जा रहे हैं। आखिर चुनाव आयोग कार्यालय गठबंधन का कोई नेता नहीं पहुंचा, क्यों? दरअसल बात है कि जो चोर होता है उसको सारे ही चोर नज़र आते हैं। मालूम है तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कांग्रेस की 400+ सीटें कैसे आयी थी। इंदिरा हत्या की सहानुभूति नहीं बल्कि वोटर लिस्ट से लाखो विरोधियों के वोट ही निकाल दिए थे। यानि तब चुनाव आयोग कांग्रेस के इशारे पर काम करता था। सच्चाई जानने के उस समय Organiser Weekly के प्रथम पृष्ठ पर मेरी रपट "Lakhs of BJP voters deleted from Voter list" पढ़ लो। इतने वर्षो बाद भी इस समाचार कर खंडन नहीं हुआ।  

संविधान की धज्जियां उड़ाने वाले हाथों में संविधान लेकर इसकी दुहाई देकर जनता को गुमराह कर देश में उपद्रव करना चाहा रहे हैं। आखिर कब तक और कितना झूठ परोसकर वोट लेते रहोगे उपद्रवियों। अब कल की INDI गठबंधन की हरकत देख इन्हे नेता की बजाए उपद्रवी नहीं कहा जाए तो क्या कहा जाए। आम जनता परेशान, प्रशासन परेशान मदारी तमाशा कर भाग गए। अगर मतदाता सूची ठीक जा रही है तो इन्हे तकलीफ क्यों हो रही है? ऐसे अब चुनाव को एक काम और करना चाहिए कि कटने वाले नाम किस पार्टी ने जुड़वाए थे, उन पर कार्यवाही करे।  

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर बवाल मचा हुआ है। हर तरफ प्रदर्शन हो रहे हैं। सड़कें, रेल बंद हैं। लेकिन नेता लोग अपना भाषण देकर गायब हो गए। वहीं, अब भी कार्यकर्ता सड़कों पर लोट रहे हैं।

दरअसल, विपक्षी महागठबंधन ने इसे बीजेपी और चुनाव आयोग की साजिश बताकर बुधवार (9 जुलाई 2025) को ‘बिहार बंद’ बुलाया। सुबह से ही सड़कों पर हंगामा शुरू हो गया। पटना से लेकर दरभंगा, आरा, कटिहार तक महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर दिया।

कहीं ट्रेनें रोकी गईं, कहीं हाईवे जाम किए गए। पटना के आयकर गोलंबर पर तो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर चादर बिछाकर लेट गए, बोले – “गाड़ी भी चढ़ जाए, हम नहीं उठेंगे!” वैशाली में RJD के लोग भैंस लेकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। कोई रेलवे ट्रैक पर लेटा, तो कोई गाँधी सेतु पर आगजनी करता दिखा। पूरे बिहार में बाजार बंद, बस-ट्रेन ठप, जनता परेशान।

इधर, तेजस्वी यादव और राहुल गाँधी ने पटना में खुले ट्रक पर चढ़कर जोरदार भाषण दिए। तेजस्वी ने कहा, “ये बीजेपी की चाल है, गरीबों-दलितों का वोट छीनने की।” राहुल ने महाराष्ट्र के ‘वोट चोरी’ वाले आरोप को बिहार से जोड़ते हुए आयोग पर निशाना साधा।

राहुल गाँधी हो या तेजस्वी यादव, दोनों ने कार्यकर्ताओं को भड़काया और मार्च की शुरुआत की, लेकिन शहीद स्मारक के पास पुलिस ने रोक लिया। भाषण खत्म, फोटो खिंचवाए और दोनों नेता गायब। राहुल दिल्ली लौट गए, तेजस्वी घर। चुनाव आयोग के दफ्तर में अफसर इंतजार करते रह गए कि शायद कोई प्रतिनिधिमंडल आए, उनकी शिकायत सुने। लेकिन कोई नहीं पहुँचा।

              नेताओं के आने का इंतजार करते चुनाव आयोग के अधिकारी (फोटो साभार: Live Hindustan)  

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के लिए माँगे गए 11 दस्तावेजों में आधार कार्ड जैसी चीजें शामिल नहीं, जिससे गरीबों के नाम कट सकते हैं। तेजस्वी ने सवाल उठाया, “आयोग को ये हक किसने दिया?” उधर, आयोग का कहना है कि ये काम संविधान और कानून के तहत हो रहा है। ईसी का कहना है कि “किसी वैध वोटर का नाम नहीं कटेगा, सिर्फ घुसपैठियों और फर्जी नाम हटाए जाएँगे।” सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर 10 जुलाई को सुनवाई है, लेकिन उससे पहले बिहार की सड़कों पर सियासत गरमा गई।

बंद की वजह से आम लोग खासे परेशान दिखे। एक ऑटो ड्राइवर ने कहा, “नेता तो भाषण देकर चले गए, हमारी कमाई का क्या?” स्कूल-कॉलेज बंद, दुकानें सूनी, मरीज अस्पताल नहीं पहुँच पाए। विपक्ष का दावा है कि ये ‘लोकतंत्र बचाने’ की लड़ाई है, लेकिन सड़क पर भैंस और चादर लेकर प्रदर्शन देख जनता भी हैरान है। अब सवाल ये कि क्या ये बंद वाकई गरीबों की आवाज उठा रहा है या सिर्फ सियासी ड्रामा?

बैठक के लिए बुलाया, फिर तेजस्वी यादव के घर में नजरबंद कर दिए गए RJD के सभी MLA, क्यों? क्या विधायक भेड़-बकरी हैं जो खुला छोड़ने पर भाग जायेंगे?

जब भी किसी राज्य में बहुमत सिद्ध करने की बात होती है, हर पार्टी अपने-अपने विधायकों को किसी रिसोर्ट/होटल में कैद करने में कितना धन बर्बाद करते है, वह भी उन पर जिन्हे पार्टी अपना सिपाही मानती है। या फिर यह कहा जाए कि राजनीति एक व्यापार है, जब कोई अनपढ़ कहीं नौकरी न कर पाए तो सियासत में आ जाओ। इतना धन कहाँ से आता है? जब इतना धन विधायकों को अपनी मुठ्ठी में रखने के लिए खर्च होगा, उस धन की वसूली भ्रष्टाचार से ही होगी, फिर किस आधार पर नेता और पार्टियां भ्रष्टाचार दूर करने की बात कर जनता को गुमराह किया जाता है? या फिर दूसरे शब्दों में यही कहा जा सकता है कि इस तरह कैद होने वाले विधायक किसी भेड़-बकरी से कम नहीं। ऐसे विधायकों को वोट देना वोट का खुला अपमान है। ऐसे विधायकों को इस कटु अपवाद का जवाब देना होगा। 

तेजस्वी कितनी कक्षा पास है और उनकी पार्टी के विधायक कितनी कक्षा पास है और नगर निगम से लेकर सरकार तक में जितने भी शिक्षित है, क्या वह अपने से कम शिक्षित के अंतर्गत नौकरी करने को तैयार है?

बिहार की राजनीति में हलचल अब भी जारी है। सोमवार (12 फरवरी, 2024) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है। भाजपा और जदयू को मिला कर बहुमत का आँकड़ा पार हो जाता है, लेकिन साथ में जीतन राम माँझी की HAM और मुकेश साहनी की VIP भी है। इधर अब खबर आ रही है कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने आवास पर ही राजद के विधायकों एवं विधान पार्षदों को नज़रबंद कर के रख लिया है।

‘न्यूज़ 18’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पटना के 5, देशरत्न मार्ग स्थित अपने आवास में पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने विधायकों और विधान पार्षदों को कैद कर के रखा हुआ है। फ्लोर टेस्ट संपन्न होने से पहले इनमें से किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। खबर के अनुसार, तेजस्वी यादव ने सभी विधायकों और विधान पार्षदों को कह दिया है कि वो अपने-अपने घर से पहनने वाले अतिरिक्त कपड़े मँगा लें।

फ्लोर टेस्ट में शामिल होने के लिए इन सभी विधायकों को तेजस्वी यादव के आवास से ही विधानसभा से लेकर जाया जाएगा। तेजस्वी यादव ने बैठक में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट के भी सभी विधायकों और विधान पार्षदों को एकजुट रहने के लिए कहा है। इस दौरान विधायकों ने हाथ उठा कर तेजस्वी यादव का समर्थन किया। तेजस्वी यादव के आवास पर फ़िलहाल सुरक्षा भी कड़ी कर के रखी गई है। साथ ही मीडियाकर्मियों के प्रवेश करने पर भी रोक लगा दी गई है।

पुरुष एवं महिला विधायकों-विधान पार्षदों के रुकने के लिए आवास के भीतर ही अलग-अलग व्यवस्था की गई है। साथ ही मुख्य दरवाजे पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। उनके खाने-पीने से लेकर आराम करने तक के सारे इंतज़ाम कर दिए गए हैं। इस दौरान कुछ लोगों को सामान लेकर तेजस्वी यादव के आवास के भीतर जाते हुए भी देखा गया। बता दें कि बिहार में नीतीश कुमार ने राजद का साथ छोड़ कर भाजपा का दामन थामा है। 9वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना है।

राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा है कि हमारे लिए 12 फरवरी कोई सामान्य तारीख़ नहीं है। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि विधायकों ने निर्णय लिया है कि वो अगले 48 घंटे तक एक साथ रहेंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि विधायक अंदर अंतराक्षरी खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस खेल को शुरू नहीं किया, लेकिन तेजस्वी यादव इसे खत्म करेंगे। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार खुद ही गठबंधन करने आए थे।


क्या बिहार में लौट आया लालू के नाम पर गुंडागर्दी का दौर? ‘मैं लालू यादव का पोता हूँ’: अधिकारी को रोड पर इतना पीटा कि दिल्ली करना पड़ा रेफर

अधिकारी अरविंद कुमार सिंह की हालत गंभीर, दिल्ली रेफर (फोटो साभार: लाइव हिंदुस्तान)
क्या बिहार में वह दौर फिर से लौट आया है जब लालू प्रसाद यादव के नाम पर गुंडागर्दी होती थी? लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री रहते करीब डेढ़ दशक तक चले इस दौर को ‘जंगलराज’ कहते हैं जो आज भी बिहार के लोगों को डराते हैं। अब राजधानी पटना में एक अधिकारी की इस कदर पिटाई की गई है कि उन्हें इलाज के लिए दिल्ली रेफर करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आरोपितों ने यह गुंडई लालू प्रसाद यादव का नाम लेकर अंजाम दी है।

रिपोर्टों के अनुसार पटना के बोरिंग रोड इलाके में खुद को लालू प्रसाद यादव का ‘पोता’ बताने वाले आरोपितों ने राज्य सरकार के एक अधिकारी को मार-मार कर अधमरा कर दिया है। अधिकारी वेंटिलेटर पर है और पटना से दिल्ली रेफर किया जा चुका है। आरोपितों के नाम तनुज और नयन यादव हैं। दोनों लालू यादव के भतीजे नागेंद्र यादव के बेटे हैं। नागेंद्र यादव पर खुद आधा दर्जन से अधिक गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।

घटना मंगलवार (16 जनवरी 2024) की है। पीड़ित अधिकारी उप नगर आयुक्त अरविंद कुमार सिंह हैं। सिंह अपने चचेरे भाई और ड्राइवर के साथ जा रहे थे। बोरिंग रोड पर उनकी गाड़ी को कई लोगों ने रोक लिया। एक ने गाड़ी की चाबी लेने की कोशिश की। अरविंद कुमार सिंह ने जैसे ही गाड़ी से उतरकर उनसे सवाल-जवाब की कोशिश की, उन लोगों ने रॉड से हमला कर दिया। काफी देर तक सिंह को बुरी तरह से पीटा और फरार हो गए।

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित अधिकारी के भाई विजय कुमार ने बताया है कि अरविंद कुमार सिंह गोपालगंज में तैनात हैं। वे निजी काम से पटना आए थे। बोरिंग रोड पर कुछ लोगों ने कार की चाबियाँ छीनने की कोशिश की। बीच-बचाव की कोशिश में उन्होंने अरविंद पर हमला कर दिया। उनमें से एक ने कहा, ”मेरा नाम तनुज यादव है और मैं नागेंद्र यादव का बेटा हूँ। जो उखाड़ना हो, उखाड़ लेना।” इंडिया टीवी की रिपोर्ट में विजय सिंह के हवाले से बताया गया है, “मारपीट के दौरान वे (आरोपित) चिल्लाकर बोल रहे थे कि मुझे नहीं पहचानते हो, मैं लालू प्रसाद यादव का पोता हूँ…तनुज यादव।”

लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक, नागेंद्र यादव उर्फ नागेंद्र राय लालू प्रसाद यादव के भाई के बेटे यानी भतीजे हैं। नागेंद्र यादव पर आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। उन पर उगाही, हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं। पिछले साल मार्च में दानापुर के एक बिल्डर ने नागेंद्र पर 2 करोड़ की रंगदारी माँगने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। ये एफआईआर 11 मार्च 2023 को दर्ज हुई थी।

अरविंद कुमार सिंह की हालत गंभीर

इस मामले में पीड़ित को पारस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। अरविंद कुमार सिंह को एयर एंबुलेस उपलब्ध न होने की वजह की वजह से राजधानी एक्सप्रेस के साथ अटैच एंबुलेस से दिल्ली ले जाया गया है। अरविंद कुमार सिंह के चेहरे की अधिकांश हड्डियाँ टूट गई हैं। उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

पुलिस बोली कार्रवाई हो रही, बीजेपी बोली-जंगलराज की वापसी

अरविंद कुमार सिंह के भाई विजय कुमार सिंह ने इस मामले में रूपसपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, पटना एसएसपी का प्रभार सँभाल रहे डीआईजी राजीव मिश्रा ने कहा कि तनुज यादव और नयन यादव मुख्य आरोपित हैं। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
इस मामले में बीजेपी ने बिहार में जंगल राज के लौटने की बात कही। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने आरोप लगाया कि हमलावर लालू यादव के परिवार से हैं, इसलिए उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ये जंगलराज नहीं तो और क्या है?

बिहार : महागबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है : तेजस्वी के सामने नीतीश ने लालू-राबड़ी शासन की बखिया उधेड़ी

                              नीतीश और DCM तेजस्वी यादव (चित्र साभार: @NitishKumar/x)
इंडी गठबंधन पर यकायक एक शायर का एक शेर याद आ रहा है:

बर्बाद करने को एक ही उल्लू काफी है 

यहाँ हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा। 

बिहार में जदयू और राजद के गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके संकेत लगातार मिल रहे हैं। बिहार के मुखिया नीतीश कुमार राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल राजद को सरकार के किसी भी काम का क्रेडिट देने से परहेज कर रहे हैं। बड़े कार्यक्रमों के पोस्टरों से तेजस्वी यादव गायब हैं। उनमें सिर्फ नीतीश कुमार ही दिख रहे हैं। इतना ही नहीं, नीतीश कुमार ने अब लालू-राबड़ी के दौर की सरकार की बखिया उधेड़ी है, वह भी तेजस्वी यादव के सामने।

भारतीय राजनीति में नीतीश कुमार और अरविन्द केजरीवाल ये दो ऐसे नेता हैं, कब गिरगिट की तरह रंग बदल लें किसी को नहीं पता। वैसे लगभग यही स्थिति सभी पार्टियों की है। या कहा जाए तो हमाम में नंगे सभी है। 

बिहार की राजधानी पटना के गाँधी मैदान में 13 जनवरी 2024 को शिक्षकों की नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने 1990 से लेकर 2005 तक बिहार की सत्ता पर काबिज रहे लालू यादव और राबड़ी देवी सरकार की कमियाँ गिनवाई। इस कार्यक्रम में बिहार में शिक्षक भर्ती में सफल हुए 96 हजार से अधिक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया जाना था।

उन्होंने लालू और राबड़ी के नेतृत्व वाली सरकार की विफलताओं को गिनवाते हुए कहा कि जब वह 2005 में मुख्यमंत्री बने थे तब बिहार में 12.5% बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। इसके लिए उन्होंने टोला सेवक और तालीमी मरकज की नियुक्ति की। बिहार सरकार द्वारा नियुक्त ये लोग स्कूल ना जाने वाले बच्चों के अभिभावकों से बात करके उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते थे।

नीतीश कुमार ने इस बयान के जरिए तेजस्वी के सामने ही उनकी पार्टी की सरकार की विफलता गिनाने की कोशिश की। वहीं, इस कार्यक्रम के लिए लगाए पोस्टरों में भी तेजस्वी तेजस्वी यादव की फोटो नदारद रही। यहाँ तक कि राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य कर रहे राजद विधायक चन्द्रशेखर यादव का नाम तक नहीं लिखा गया।

पोस्टर के ऊपर स्लोगन में सिर्फ नीतीश कुमार का ही जिक्र किया गया था। स्लोगन में लिखा था, “रोजगार मतलब नीतीश सरकार।” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो फोटो इस आयोजन की साझा की थीं, उनमें भी तेजस्वी यादव हाशिए में दिख रहे हैं। इस फोटो में सारा फोकस नीतीश पर ही है।

                                                   पोस्टर में नीतीश ही नीतीश, तेजस्वी गायब

बीते कुछ दिनों से तेजस्वी यादव बिहार में हुई शिक्षक भर्ती का खूब प्रचार प्रसार कर रहे हैं। राजद समर्थक इसका सारा क्रेडिट तेजस्वी को देने में लगे हैं। तेजस्वी भी शिक्षा और पुलिस विभाग में हुई भर्तियों को गठबंधन सरकार की सफलता के रूप में पेश कर रहे थे। हालाँकि, नीतीश कुमार ने अपने पोस्टर बैनर में मात्र अपना ही नाम छपवाया है।

उधर INDI गठबंधन के तहत सीट बँटवारा भी दोनों पार्टियों के बीच समस्या बन सकता है। बिहार की कुल 42 सीट में से कॉन्ग्रेस 10 सीट चाहती है, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी भी कुछ सीटों पर दावा कर रही है। नीतीश कुमार अपनी 16 सीट को बनाए रखना चाहेंगे। राजद भी इसी संख्या में सीट चाहती है। ऐसे में इन पार्टियों के बीच विवाद की स्थिति जल्दी नहीं सुलझने वाली है।

हिन्दू धर्म सभा में 'अल्लाह-हु-अकबर' और 'या अली' नारों की मांग करने वाले क्या मुस्लिम सम्मलेन में 'जय श्रीराम' या 'जय हिन्दुत्व' बुलवा सकते हैं?

महंत धीरेन्द्र शास्त्री के बिहार प्रवास के दौरान सनातन विरोधियों द्वारा जिस प्रकार विरोध किया गया, उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि उन्हें किसी हिन्दुत्व नहीं बल्कि तुष्टिकरण कर कुर्सी प्यारी है। इतना ही नहीं, एक मुस्लिम विधायक द्वारा यह कहना कि बाबा 'या अली' और 'अल्लाह हु अकबर' भी बोलें। जिसका मीडिया ने भी खूब प्रचार-प्रसार किया। लेकिन किसी ने उस मुस्लिम विधायक एवं उसकी पार्टी से यह पूछने का साहस नहीं किया कि इस तरह के नारे कब लगते हैं? दूसरे, क्या किसी मुस्लिम अधिवेशन में 'हिन्दू धर्म की जय' या 'जय श्रीराम' बुलवाने का साहस कर सकते है, यदि नहीं, फिर किसी हिन्दू धर्म सभा में मुस्लिम नारों की मांग क्यों? इनके इस षड्यंत्र को समझना होगा। देश में शांति बनाये रखने के लिए इन षड्यंत्रकारियों का बहिष्कार करना होगा।   
तमाम विवादों के बीच मध्य प्रदेश के बागेश्वर के महंत धीरेंद्र शास्त्री का बिहार की राजधानी पटना में आयोजन हनुमंत कथा का बुधवार (17 मई 2023) को समापन हो गया। इस बीच पटना में उनके पोस्टर्स पर कालिख पोत दी गई और उस पर 420 और चोर लिख दिया गया है। हालाँकि, ऐसा करने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘दिल से कैसे निकालोगे’।

पटना में आयोजित पाँच दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने कथा सुनने आए श्रद्धालुओं से ‘माला और भाला’ साथ रखने का आह्वान किया। भगवान हनुमान को शास्त्र और अंगद को शस्त्र बताते हुए उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में शास्त्र और शस्त्र दोनों की जरूरत है। शास्त्र और शस्त्र दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। एक डंडा निकाला तो शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है, लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए माला और भाला दोनों होना जरूरी है।”

पटना में पोस्टर फाड़े जाने को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “पोस्टर तो फाड़ा जा सकता है, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे।” इस दौरान उन्होंने शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “सितारों को आँखों में महफूज रखना, क्योंकि बहुत देर तक रात ही रात होगी। मुसाफिर हो तुम भी… मुसाफिर हैं हम भी, बालाजी ने चाहा तो किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।।”

अंतिम में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी पहुँचीं और उनसे मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी पास बैठे हुए थे। कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री पटना एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से चार्टर्ड प्लेन में सवार होकर मध्य प्रदेश के लिए निकल गए। पटना में उनकी कथा में जुटे लोगों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने एयरपोर्ट पर सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ा दी थी।

कहा जा रहा है कि पटना के नौबतपुर के तरेत पाली मठ के बाद अब धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा गया में आयोजित की जाएगी। उन्होंने 15 मई 2023 को ऐलान किया था कि 29 सितंबर 2023 को गया में हनुमंत कथा का आयोजन होगा और दरबार लगेगा।

राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, न कि धर्म से। उन्होंने कहा कि बिहार में बाबा बागेश्वर ने जिस तरह से हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही गई है, यह ठीक नहीं है। 

धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर पर कालिख पोतने और चोर लिखने पर भाजपा और लोजपा (रामविलास) भड़क गई है। भाजपा ने कहा कि यह काम राजनीतिक प्रवृत्ति के लोगों ने किया है और वोट की राजनीति को लेकर किया है। वहीं, चिराग पासवान ने भी इसकी निंदा की है।

हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉक्टर सुमन ने दिसंबर 2022 में झारखंड में जनजाति समुदाय के खिलाफ लव जिहाद और लैंड जिहाद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिन्दू एक हाथ में माला ले तो दूसरे हाथ में भाला ले, ताकि धर्मांतरण करने वाले सचेत हो जाएँ।

बिहार : कहीं महावीरी शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी, कहीं मस्जिद से निकली भीड़ ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

सीवान में महावीरी शोभायात्रा पर मस्जिद से पुलिस के सामने पथराव (चित्र साभार- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
बिहार के सीवान जिले में महावीरी अखाड़ा की शोभायात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं पर पथराव किया गया है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया। हालात सँभालने पहुँचे पुलिस बल पर भी पथराव की सूचना है। इस झड़प के चलते दोनों पक्षों के एक दर्जन लोग घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। घटना में आधे दर्जन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस द्वारा अब तक कुल 10 आरोपितों को हिरासत में लेने की सूचना है। घटना 8 सितम्बर, 2022 की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बड़हरिया थानाक्षेत्र का है। घटना के दिन यहाँ पुरानी बाजार इलाके में महावीरी शोभा यात्रा निकली थी। जब यह यात्रा मस्जिद के सामने से गुजरी तब किसी बात को ले कर मुस्लिम पक्ष से शोभा यात्रा में शामिल लोगों का विवाद हो गया। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग मस्जिद पर चढ़ कर पत्थरबाजी करने लगे। इस पथराव से अफरातरफी मच गई और कुछ लोग घायल हो गए। इस हमले के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हमले के जवाब में शोभायात्रा में शामिल लोगों ने भी खुद का बचाव करने के लिए पत्थर फेंके। इसी बीच पान की एक गुमटी को आग के हवाले कर दिया गया। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालात काबू करने की कोशिश की तो उपद्रवियों ने उन पर भी पत्थर फेंके। इस पत्थरबाजी के चलते 2 पुलिसकर्मियों के सिर फट गए। अब तक पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के कुल 10 आरोपित हिरासत में लेने की सूचना है जिनसे पूछताछ की जा रही है।

बड़हरिया थाने के प्रभारी प्रभाकर के मुताबिक, पथराव और आगजनी की घटना में शामिल लोगों की शिनाख्त करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हमले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पटना में भी पुलिस पर हमला

वहीं एक अन्य घटनाक्रम में बिहार की राजधानी पटना में पुलिस पर हमले की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में पुलिस वालों को भागना पड़ा लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा कर के पिटाई की। मामला पीर बहोर थानाक्षेत्र का है। यहाँ शिया मस्जिद के पास हथियारों से लैस 4 संदिग्धों की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी थी। आरोपितों की तलाशी के दौरान आस-पास की भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल कर संदिग्धों को छुड़ा लिया।
बाद में भीड़ ने थाने पर पहुँच कर हंगामा भी किया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपितों पर FIR दर्ज की है, जिसमें पुलिस पर हमले और सरकारी कार्यों में बाधा डालने की धाराएँ लगाई गईं है। थाना प्रभारी के मुताबिक घायल कांस्टेबल सुभाष का इलाज करवाया जा रहा है। आरोपितों की पहचान वीडियो और CCTV फुटेज के आधार पर करवाई जा रही है।