लालू यादव के लिए जंगलराज का शब्द पटना हाई कोर्ट की तरफ से 1997 में कहा गया था (साभार : ABP & Kanchana Yadav)
बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है। एक बार फिर बिहार में नीतीश राज के विकास और लालू राज के ‘जंगलराज’ को लेकर जमीनी स्तर पर चर्चा होने लगी है। RJD के नेता और प्रवक्ता किसी भी तरह खुद को अपनी ‘जंगलराज’ की छवि से बचाने में लगे हैं। इसी बीच, RJD प्रवक्ता कंचन यादव ‘जंगलराज’ शब्द कहाँ से जन्मा है इसका सबूत आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप से लाइव डिबेट में माँगा।
अब तक तेजस्वी यादव में जितना चुनावी प्रचार किया है अपने आपको प्रसारित किया है लालू का नाम तक नहीं लिया, क्योकि सच्चाई जानते हैं पिता का नाम लेने पर जनता के दिमाग में "जंगल राज" और "नौकरी के बदले जमीन घोटाला" आ गया तो चुनाव ही हाथ से निकल जाएगा।
कहाँ से आया जंगलराज शब्द?- RJD प्रवक्ता
हाल ही में एक टीवी डिबेट में RJD प्रवक्ता कंचन यादव ने जब आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप से यह सवाल किया गया कि ‘जंगलराज’ शब्द का जन्म कहाँ से हुआ?, तो अंजना ओम कश्यप ने जवाब दिया, “पटना हाई कोर्ट ने यह शब्द मौखिक रूप से इस्तेमाल किया था।”
अंजना ओम कश्यप जी
— Kanchana Yadav (@Kanchanyadav000) October 6, 2025
और पूरी बीजेपी को चुनौती है कि कोर्ट का वो आदेश निकालकर दिखा दें जहाँ कोर्ट ने आरजेडी सरकार को "जंगलराज" कहा हो।
अखबार में कोई कुछ भी दे तो वो कोर्ट का बयान नहीं हो जाता है। अखबार में तो मैं भी कुछ भी लिख दूँ।
कभी कोर्ट ने ऐसा कहा ही नहीं था, फिर भी मीडिया,… pic.twitter.com/cM3jPHwBa7
आरजेडी प्रवक्ता कंचन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया और चुनौती दी कि अगर कोर्ट ने ऐसा कहा हो तो आदेश निकालकर दिखाएँ। आरजेडी की प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह शब्द बीजेपी और मीडिया ने मिलकर फैलाया है, कोर्ट ने कभी ‘जंगलराज’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।
जब हाईकोर्ट ने कहा था ‘बिहार में कोई सरकार नहीं, जंगलराज है’
सच्चाई यह है कि 1997 में पटना हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी में कहा था कि ‘बिहार में नाम के लायक कोई सरकार नहीं है, और यहाँ जंगलराज चल रहा है’। यह टिप्पणी जस्टिस बीपी सिंह और जस्टिस धर्मपाल सिन्हा की बेंच ने की थी। टिप्पणी किसी राजनीतिक केस में नहीं, बल्कि पटना की बदहाल नगर व्यवस्था और जलजमाव को लेकर थी। जजों ने पटना को ‘Veritable Hell’ यानी ‘वास्तविक नरक’ कहा था।
यह टिप्पणी सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और शहर की गंदगी पर थी, न कि किसी आपराधिक मामले पर। कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया था कि पटना भारत की सबसे गंदी राजधानी होने का दावा कर सकता है। कोर्ट ने भ्रष्ट नौकरशाहों को प्रशासन चलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
जंगलराज 2.0: अब भी डर कायम है?
आज तेजस्वी यादव खुद को ‘नई सोच का नेता’ कहकर पेश करते हैं। लेकिन सच यही है कि लालू यादव की RJD का नाम आते ही अब भी बिहार के कई हिस्सों में लोग डरने लगते हैं। पटना से गया तक कई जगहों पर युवाओं, व्यापारियों, महिलाओं में अब भी यह चिंता बनी रहती है कि अगर राजद सत्ता में लौटी तो क्या फिर वही 90 के दशक जैसा डर लौट आएगा?
जंगलराज कोई अखबार की हेडलाइन नहीं, वह बच्चा है जो स्कूल जाने से पहले माँ की आँखों में डर देखता है। वह व्यापारी है जो दुकान की गल्ले पर बैठा हर आहट पर चौंकता है। वह बेटी है जो कॉलेज जाते वक्त हर मोड़ पर डरती है कि कहीं पीछे कोई बाइक न आ जाए।
और इसीलिए, जंगलराज सिर्फ एक शब्द नहीं, बिहार के उस दौर की बदनसीबी का नाम है… एक ऐसा नाम, जिसे आज भी सुनते ही लोग सिहर उठते हैं।
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