‘अंबेडकर अंग्रेजों के एजेंट थे’: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के वकील अनिल मिश्रा की टिप्पणी पर बवाल, राष्ट्रद्रोह समेत कई धाराओं में FIR; खुद गिरफ्तारी देने पहुँचे SP ऑफिस

डॉ भीमराव अंबेडकर पर विवादित टिप्पणी से बवाल, बसपा और अहीरवार समाज सड़कों पर, एडवोकेट अनिल मिश्रा पर राष्ट्रद्रोह समेत गंभीर धाराओं में FIR दर्ज (साभार: NDTV)
मध्य प्रदेश के ग्वालियर के अशोकनगर में डॉ भीमराव अंबेडकर के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर विरोध बढ़ गया है। मंगलवार (7 अक्टूबर 2025) को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अहिरवार समाज संगठन ने अलग-अलग समय पर कलेक्ट्रेट पहुँचकर अपना विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपे हैं।

दोनों संगठनों ने एडवोकेट अनिल मिश्रा के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई की माँग की। बसपा के ज्ञापन में कहा गया कि अनिल मिश्रा ने ‘आचरण ग्वालियर पर लाइव’ नामक सोशल मीडिया कार्यक्रम में डॉ अंबेडकर के बारे में निंदनीय, अमर्यादित और भड़काऊ टिप्पणी की। बसपा ने इसे संविधान प्रेमियों की आस्था पर आघात और राष्ट्र के खिलाफ साजिश बताया।

पार्टी ने कहा कि डॉ अंबेडकर न केवल भारत रत्न और संविधान निर्माता हैं, बल्कि करोड़ों वंचितों के मसीहा भी हैं। इसलिए उनके खिलाफ की गई टिप्पणी संविधान और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। बसपा ने माँग की कि अनिल मिश्रा पर राष्ट्रद्रोह और धार्मिक वैमनस्य फैलाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

वहीं, अहिरवार समाज संघ ने भी राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने कहा कि डॉ अंबेडकर ने अपना जीवन समता, न्याय और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित किया था  और अनिल मिश्रा की टिप्पणी अपमानजनक होने के साथ-साथ समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास है।

दोनों संगठनों ने प्रशासन से अपील की कि वह संविधान और डॉ अंबेडकर के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करे और ऐसी टिप्पणी करने वालों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करे।

क्या है पूरा मामला?

ग्वालियर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा पर डॉ भीमराव अंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और फोटो शेयर करने का आरोप है। दरअसल रविवार (5 अक्टूबर 2025) की सुबह क्राइम ब्रांच की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम को एक व्हाट्सएप ग्रुप में डॉ अंबेडकर से जुड़ी विवादित वीडियो और फोटो मिली।

जाँच में पता चला कि यह पोस्ट अनिल मिश्रा के मोबाइल नंबर से अपलोड की गई थी। वीडियो में अंबेडकर के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था और उनके फोटो में छेड़छाड़ की गई थी। पोस्ट में उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर पर तीखा हमला किया और लिखा, “अंबेडकर अंग्रेजों के एजेंट थे उनका बनाया संविधान देश के लिए घातक है, इसे जलाना चाहिए।” यह पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई।

पहले भी मिश्रा कई बार विवादित बयान दे चुके हैं, लेकिन इस बार मामला संविधान निर्माता पर था, इसलिए मामला गंभीर हो गया। भीम आर्मी और अन्य दलित संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो वे सड़कों पर उतरेंगे। BSP और अहिरवार समाज संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

दर्ज हुई FIR और एडवोकेट मिश्रा ने दी सफाई

6 अक्टूबर 2025 की शाम ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने कई शिकायतों के आधार पर मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज की। उन पर IPC की धारा 153A (समुदायों में नफरत फैलाना), 295A (धार्मिक भावनाएँ आहत करना), 505(2) (शांति भंग करने वाले बयान) और IT एक्ट की धारा 66A के तहत केस दर्ज किया गया।

FIR में कहा गया कि मिश्रा की पोस्ट अंबेडकर की छवि खराब करने और समाज में तनाव फैलाने वाली है। पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर अपना पक्ष बताने को कहा। लेकिन मिश्रा ने खुद ही सामने आकर बयान दिया कि वे बेगुनाह हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कोई गलत बात नहीं कही, मैं सिर्फ इतिहास की सच्चाई बता रहा था।” उन्होंने सवाल उठाया, “हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणियाँ करने वालों पर पुलिस चुप क्यों है?”

7 अक्टूबर 2025 की सुबह असली ड्रामा शुरू हुआ। अनिल मिश्रा अपने समर्थक वकीलों और ‘रक्षक मोर्चा’ के सदस्यों के साथ ग्वालियर SP ऑफिस पहुँचे। हाथों में तख्तियाँ लेकर नारे लगाए, “मुझे गिरफ्तार करो, मैं खुद आ गया हूँ।” मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अंबेडकर के विरोध में रहूँगा, ये विदेशी जातंकवादी नहीं सुधरेंगे।”

SP ऑफिस में हंगामा मच गया। समर्थक नारे लगाने लगे ‘अनिल भाई को छोड़ो, नहीं तो हाईकोर्ट बंद’ लेकिन SP प्रतीक ठाकुर ने साफ कहा कि अभी जाँच चल रही है और गिरफ्तारी का समय नहीं आया। उन्होंने मिश्रा को फिर से नोटिस थमाया और पूछताछ के लिए थाने बुलाया। मिश्रा अपने समर्थकों के साथ नारे लगाते हुए लौटे, “अगर जेल जाना है तो जेल जाएँगे।”

परशुराम सेना ने दी विरोधियों को चुनौती

एक तरफ जहाँ भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और कई एससी, एसटी, ओबीसी संगठनों ने मिश्रा के बयान का विरोध किया है। वहीं इसी बीच, भिंड जिले की परशुराम सेना ने अनिल मिश्रा के समर्थन में खुलकर मैदान में उतरने की घोषणा की है।

सेना के जिला अध्यक्ष देवेश शर्मा ने कहा, “जो लोग जूते की माला पहनाने जैसी बातें कर रहे हैं, उनमें दम है तो 15 अक्टूबर 2025 को ग्वालियर आकर दिखाएँ।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि परशुराम सेना वहाँ बड़ी संख्या में मौजूद रहेगी और किसी भी तरह की बदसलूकी का जवाब दिया जाएगा।

शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज शांत है, लेकिन अगर मर्यादा लांघी गई तो जवाब देना भी जानता है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

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