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पंजाब : डंडे-तलवारों के साथ चर्च पर हमला, दावा- निहंगों ने की बाइबिल की बेअदबी भी: ईसाई पक्ष ने भी चलाए ईंट-पत्थर

पंजाब के अमृतसर स्थित चर्च पर ईसाइयों की प्रार्थना के दौरान निहंगों का हमला (साभार- @paramaulakh02)
पंजाब के अमृतसर में रविवार (21 मई, 2023) को लोगों द्वारा चर्च पर हमला किया गया। हमलावरों को निहंग सिख बताया जा रहा है। यह हमला चल रही ईसाई प्रार्थना के दौरान किया गया। इस वजह से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हालात तनावपूर्ण हो गए। घटनास्थल पर नारेबाजी और पत्थरबाजी भी हुई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को काबू किया। ईसाइयों ने निहंगों पर बाइबिल की बेअदबी का आरोप लगा कर कार्रवाई की माँग की है।

वहीं हमलावरों ने सिखों की वेशभूषा में ईसाईयत के प्रचार पर एतराज जताया है। पुलिस की मानें तो अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर निहंग ही थे या कोई और। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (21 मई, 2023) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अमृतसर के गाँव राजेवाल का है। यहाँ के सिखपाल राणा मिनिस्ट्रीज चर्च में 21 मई को दोपहर के समय प्रार्थना चल रही थी। प्रार्थना के ही दौरान निहंगों के वेश में लगभग 25 हमलावर अपने चेहरों को ढँक के आ धमके।

उनके हाथों में डंडे और तलवारें थीं। आरोप है कि हमलावरों ने आते ही चर्च में मौजूद लोगों से मारपीट शुरू कर दी। बाहर खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई और चर्च में रखी बाइबिल की भी बेअदबी हुई। इस अचानक हुए हमले से पहले तो अफरातफरी मची गई और बाद में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इस से हालात तनावपूर्ण हो गए।

बताया जा रहा है कि निहंगों के हमले के जवाब में ईसाई पक्ष से भी ईंट-पत्थर चलाए गए। इस दौरान दोनों तरफ से धार्मिक नारेबाजी भी की गई। हमलावरों का आरोप था कि चर्च के अंदर सिखों के वेश में प्रार्थना करवाई जाती है जिस पर उन्हें एतराज है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किया और समझाया। अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी सतिंदर सिंह के मुताबिक अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार निहंग समूहों ने इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने ऐसे हमलों के लिए निहंगों की पोशाक पहनने पर भी आपत्ति जताई है। अमृतसर ग्रामीण सतिंदर सिंह के मुताबिक, केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, पुलिस की जांच हमले का मकसद पता करना भी शामिल है।

इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दौड़ रहे निहंगों के हाथों में हथियार और डंडे देखे जा सकते हैं। कुछ लोग खुले मैदान और कुछ सड़क की तरफ भाग रहे हैं। ईसाई पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए अपने टूटे वाहन दिखा रहा है। पादरी जॉन का कहना था कि वो लोग चुपचाप प्रार्थना कर रहे थे कि अचानक ही हमला कर दिया गया। उन्होंने निहंगों पर सख्त कार्रवाई न होने पर पूरे पंजाब में चक्का जाम करने और उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होने का एलान किया।

घटना के बाद ईसाई समुदाय के लोगों ने ण्डली ने जंडियाला गुरु-तरनतारन मार्ग पर दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया और ट्रैफिक जाम किया। पंजाब अल्पसंख्यक आयोग सुभाष थोबा ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। ईसाई समूहों का कहना है कि वो इस मामले को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आगे उठाएँगे।

गौरतलब है साल 2021 में, SGPC ने पंजाब में हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की थी। इसी के साथ पंजाब में चर्चों पर हमलों में भी वृद्धि हुई है। अगस्त 2022 में अमृतसर के ददुआना गाँव में एक ऐसी ही घटना में निहंगों ने जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में ईसाइयों के एक कार्यक्रम को बाधित कर दिया था।


ताबीज- झाड़-फूंक और चंगाई सभा ठीक तो धीरेंद्र शास्त्री गलत कैसे?

पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को मोहरा बनाकर सनातन धर्म पर हमला करने वाले पाखंडी धर्म-निरपेक्ष मौलवी और पादरियों द्वारा धर्मांतरण करने पर क्यों चुप्पी साधे रहते हैं? जबकि धीरेन्द्र किसी मजहब के विरुद्ध नहीं बोल रहे, बल्कि अपने दरबार में अपने उस मुसलमान मित्र का वर्णन करना भी नहीं भूलते, जिसने अपनी बहन समझ उनकी बहन की शादी करवाई थी। 20,000 रूपए देने के अलावा बहन का सारा दहेज़। मै और मेरी बहन हिन्दू और मुसलमान। 

बापू आसाराम जिन्हें बलात्कार के आरोप में जेल में डाला गया, पाखंडी धर्म-निरपेक्ष जवाब दो कि पीड़िता और उसके माँ-बाप से घंटों पहले मीडिया कमला मार्केट थाने कैसे पहुंचा? क्या मीडिया इतनी अन्तरयामी है कि पीड़िता पुलिस में शिकायत करने आ रही है? सारे चैनल सुबह से लेकर शाम आसाराम को आरोपी सिद्ध करते रहे। रपट कमला मार्केट थाने में ही क्यों? क्या मीडिया ने कभी सच्चाई जानने की कोशिश की? यदि नहीं तो क्यों? देखिए संलग्न मेरी प्रकाशित रपट। जिसका आज तक किसी ने खंडन नहीं किया। 

बापू के विरुद्ध षड्यंत्र जून 2012 से चल रहा था, जब अपने एक समागम में उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी की छत्रसाया में ईसाई मिशनरी देश में धर्मान्तरण करने पर कहा था कि "सोनिया मैडम बहुत हो चूका तुम हिन्दुओं को ईसाई बनवाओगी आसाराम और उसके चेले उन्हें वापस हिन्दू बनाएंगे..." क्यों नहीं मीडिया ने सच्चाई सामने लेकर आयी? कहाँ थी खोजी पत्रकारिता? क्या खोजी पत्रकारिता हिन्दुओं के ही विरुद्ध जागती है?  

बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आजकल चर्चा में हैं। हर चैनल पर बाबा बागेश्वर धाम छाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके बारे में ही चर्चा हो रही है। अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर जादू-टोने और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया है। अगर इस आरोप को सकारात्मक रूप में देखा जाये तो अब उंगलियां दूसरे मजहबों में हो रहे धर्मांतरण पर चर्चा करनी शुरू कर प्रश्नचिन्ह लगाने शुरू कर दिए हैं। यही कारण है कि इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री के पक्ष में भी लोग सामने आ गए हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स बागेश्वर धाम सरकार के समर्थन में खड़े हो गए हैं।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का साफ कहना है कि जब से उन्होंने धर्मांतरण और घर वापसी का मुद्दा उठाया है, तब से इससे जुड़े कुछ लोग उनके पीछे पड़ गए हैं। विदेशी फंडिंग प्राप्त संस्थाओं की ओर से हो रहे धर्मांतरण के खिलाफ अभियान चलाने के कारण बागेश्वर धाम का विरोध हो रहा है। अंधविश्वास के सवाल पर लोगों का साफ कहना है कि क्या पादरियों के सामने पागल बन कर नाचना और दरगाहों पर चादर चढ़ाना सही है? 

हिन्दू लड़कियों से लव जेहादियों से सतर्क रहने की बात करते उन्हें 'बहन' कहकर सम्बोधित करते हैं। इतना ही नहीं, जिस मुस्लिम महिला ने हिन्दू धर्म स्वीकार किया, उसे भी 'बहन' कहकर सम्बोधित किया।  

सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे है कि अगर ताबीज- झाड़-फूंक और ईसाई मिशनरियों की ओर से आयोजित चंगाई सभा ठीक है तो फिर धीरेंद्र शास्त्री गलत कैसे हैं? लोगों का कहना है कि सनातन धर्म पर सवाल उठाने वाले ईसाई मिशनरियों और पीर-बाबाओं के चमत्कार पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं? इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग ईसाई मिशनरियों और पीर-बाबाओं के चमत्कार वाले कई वीडियो शेयर पर तंज कस रहे हैं।

दिल्ली : मदर टेरेसा शिष्य केजरीवाल, मुफ्त बिजली, पानी और शिक्षा की रेवड़ी देकर हिन्दुओं और सिखों का करा रहे हैं धर्मांतरण

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईसाई संत मदर टेरेसा के शिष्य रहे हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो किस विचारधारा से प्रेरित है। आम तौर पर माना जाता है कि शिष्य पर गुरु के उपदेशों का असर होता है। केजरीवाल पर भी उनके गुरु के उपदेश का असर दिखाई दे रहा हैे। वो उन्हीं के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। जिस तरह मदर टेरेसा ने गरीबों की मुफ्त सेवा के बहाने दलितों और आदिवासियो के बीच पैठ बनाई। उसके बाद ईसाई मिशनरियों ने चमत्कारिक मुफ्त इलाज, मुफ्त शिक्षा और पैसे का लालच देकर और ऊंच-नीच, जात-पात का एहसास दिलाकर गरीब दलितों और आदिवासियों का धर्मांतरण कराया। उसी तरह केजरीवाल भी मुफ्त रेवड़ी कल्चर के जरिए गरीब दलितों, आदिवासियों, सिखों में पैठ बनाकर उनके बौद्ध और ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहे हैं। 

सेवा की आड़ में दलितों और आदिवासियों का धर्मांतरण

दरअसल मदर टरेसा ने गरीबों की सेवा की आड़ में ईसाई मिशनरियों के लिए भारत में एक मैदान तैयार किया, जिसमें वो धर्मांतरण का खेल बखूबी खेल सके। मदर टेरेसा ने तथाकथित नि:स्वार्थ सेवाभाव से भारतीय जनमानस में एक दीन-दुखियों के उद्धारक के रूप में अपनी छवि बनाई, उसका फायदा आगे चलकर ईसाई मिशनरियोंं ने भी उठाया। पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित और खुद को प्रगतिशील बताने वाले वामपंथियों, सेक्युलर और लिबरल गैंग ने मदर टरेसा का खूब महिमामंडन किया। उन्होंने मदर टेरेसा को गरीबों का मसीहा बताकर जनता के सामने पेश किया। लेकिन मदर टेरेसा और ईसाई मिशनरियों का मकसद सेवा की आड़ में दलितों और आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराना था।

दिल्ली में दलित हिन्दुओं का बौद्ध धर्म में धर्मांतरण

इसी तरह केजरीवाल मुफ्त इलाज, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त पानी और बिजली का ललच देकर मदर टेरेसा का सबसे बड़ा अनुयायी और शिष्य होने का सबूत दे रहे हैं। जिस तरह ईसाई मिशनरी ईश्वर की अनुकंपा का बखान कर सभी दुखों से छुटकारे का स्वपन्न दिखाती है, उसी तरह केजरीवाल जनता को झूठे सपने दिखा रहे हैं। केजरीवाल ने मुफ्त रेवड़ी का चारा डालकर भोले भाले हिन्दुओं, दलितों, आदिवासियों और मध्यम वर्ग को मूर्ख बनाकर वोट लिया और दो राज्यों में सत्ता मेंं आ गए। दिल्ली और पंजाब में सत्ता में आने बाद केजरीवाल गुजरात जैसे दूसरे राज्यों की जनता को अपने मायावी रेवड़ी जाल में फंसाने निकल पड़े है। वहीं अपने मंत्रियों को हिन्दुओं के धर्मांतरण के अभियान में लगा दिया है। राजेंद्र पाल गौतम केजरीवाल के इसी अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।

हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करने की शपथ

दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ‘मिशन जय भीम’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग हिंदू देवी-देवताओं को ईश्वर ना मानने और उनकी पूजा ना करने की शपथ लेते दिख रहे हैं। इस कार्यक्रम में केजरीवाल सरकार के मंंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल हुए थे। 05 अक्टूबर, 2022 को विजयादशमी के अवसर पर दिल्ली के करोलबाग स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित ‘मिशन जय भीम’ कार्यक्रम में 10 हजार लोगों ने बौद्ध दीक्षा ली। इसके साथ ही उन्हें हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करने शपथ दिलाई गई।

पंजाब में दलित सिखों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण 

पहले देश के दूर-दराज और आदिवासी बाहुल्य वाले राज्यों में धर्मांतरण की खबरें आती थी, अब पंजाब जैसे समृद्ध राज्य में सिखों के धर्मांतरण की खबरें आ रही हैं। अकाल तख्त का आरोप है कि मिशनरियां सीमा पर स्थित गांवों में सिखों का ईसाइयत में धर्मांतरण करा रही है। अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह का कहना है कि सीमा पर स्थित गांवों में क्रिश्चन मिशनरियां सिख परिवारों का जबरन धर्म परिवर्तन करा रही हैं। जत्थेदार ने आगे यह भी आरोप लगाया है कि सिख समुदाय के कई सदस्यों को पैसों का लालच दिया जा रहा है।

पंजाब के 12,000 गांवों में से 8,000 गांवों में ईसाई धर्म की समितियां

ईसाई मिशनरियां सिख परिवारों और अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले सिखों का जबरन धर्म परिवर्तन कराने के लिए कई बड़े कार्यक्रम चला रही हैं। यह कार्यक्रम पंजाब के बॉर्डर इलाकों में चलाया जा रहा है। मिशनरियां पैसे और अन्य सभी साधनों का इस्तेमाल कर सिख परिवारों पर दबाव बना रही हैं कि वो ईसाई बन जाएं। विशेष रूप से गांवों में रहने वाले दलित आसान लक्ष्य हैं। वे क्षुद्र लालच के बदले अपना धर्म परिवर्तित करते हैं। यूनाइटेड क्रिश्चियन फ्रंट के मुताबिक पंजाब के 12,000 गांवों में से 8,000 गांवों में ईसाई धर्म की समितियां हैं। अमृतसर और गुरदासपुर जिलों में चार ईसाई समुदायों के 600-700 चर्च हैं। पंजाब में भगवंत मान सरकार बनने के बाद चर्चों की सख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

खिलजी, औरंगजेब और ईसाई मिशनरियों से भी चार कदम आगे निकले केजरीवाल

दरअसल केजरीवाल का मकसद जनता की सेवा नहीं बल्कि विदेशी ईसाई मिशनरियों की सेवा पसंद थी। आज केजरीवाल ईसाई मिशनरियों की मदद कर रहे हैं। वो अलाउद्दीन खिलजी, औरंगजेब, अंग्रेज और ईसाई मिशनरियों से भी चार कदम आगे निकल गए हैं। जो काम मुगल, अंग्रेज और ईसाई मिशनरी नहीं कर सके वो केजरीवाल कर रहे हैं। केजरीवाल हिन्दू धर्म के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और गुजरात में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया हिन्दू धर्म को खत्म करने में उनकी पूरी मदद कर रहे हैं। जहां राजेंद्र पाल गौतम राम, कृष्ण जैसे देवताओं को नहीं मानते हैं, वहीं गोपाल इटालिया सत्यनारायण भगवान की पूजा को फालतू मानते हैं और हिन्दुओं को ब्राह्मणों से पूजा नहीं कराने की सलाह देते हैं। 

मदर टेरेसा को संत की उपादी देने के कार्यक्रम में शामिल हुए थे केजरीवाल

गौरतलब है कि 4 सितंबर, 2016 को वेटिकन सिटी में मदर टेरेसा को पोप फ्रांसिस की मजूदगी में संत की उपाधी दी गई। उपाधी देने के लिए आयजित इस कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए थे। अरविंद केजरीवाल मदर टेरेसा को बहुत मानते थे। इसी समय उन्होंने मदर टेरेसा को याद करते हुए एक लेख आउटलुक पत्रिका में लिखा था। लेख में केजरीवाल ने 1992 मेंं मदर टेरेसा से मिलने और मिशनरीज ऑफ चैरिटी के कालिघाट आश्रम में बिताये गए पलों का जिक्र किया था। उस लेख का कुछ अंश यहां दिया जा रहा है…

मिशनरीज ऑफ चैरिटी और केजरीवाल का संस्मरण

“टाटा स्टील से इस्तीफा दे दिया और मदर टेरेसा से मिलने कोलकाता चला गया। ये सुबह का समय था और वहां लंबी कतारें लगी हुई थीं। वह सभी लोगों से कुछ सेकेंड के लिए मिल रही थी। जैसे ही मेरा नंबर आया उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और पूछा तुम क्या चाहते हो? मैंने मदर से कहा कि मां, मैं आपके साथ काम करना चाहता हूं।

उन्होंने मुझसे कलिघाट आश्रम जाने की बात कही। ये मिशनरीज ऑफ चैरिटी के अहम केंद्रों में से एक था। उन्होंने मुझसे वहां जाकर काम करने के लिए कहा। उस समय कोलकाता ऐसा स्थान था जहां दोनों तरह के लोग मिल जाते थे, जिसमें कुछ तो बहुत गरीब थे, वहीं कुछ बहुत अमीर। फिलहाल वहां अभी के हालात मुझे नहीं पता हैं। मुझे काम दिया गया कि मैं शहर में घूमकर गरीब, असहाय, बेबस लोगों को कलिघाट आश्रम ले जाऊं और उनकी सेवा करूं, मैंने ऐसा ही किया।

एक बार मैंने मदर से पूछा कि आप जरूरतमंद लोगों को सेवा मुहैया कराती हैं, आखिर आप उन्हें ठीक होने के बाद आत्मनिर्भर बनाने पर विचार क्यों नहीं करती हैं? इस पर उन्होंने कहा कि ये काम सरकार और दूसरे एनजीओ का है। उनका काम जरूरतमंदों की सेवा करना है। ये पूरा अनुभव मेरे लिए आध्यात्मिक था। मैं वहां कुछ महीने तक रहा।

जब मैं नागपुर में नेशनल एकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्स की ट्रेनिंग के लिए पहुंचा, जहां आईआरएस ट्रेनियों को भेजा जाता है, वहां मुझे मदर टेरेसा का आश्रम एकेडमी के बिल्कुल पास ही मिल गया। एकेडमी में ही मेरी सुनीता (पत्नी) से मुलाकात हुई। हम अकसर सप्ताह के आखिर में आश्रम जाते थे। नागपुर का आश्रम बिल्कुल अलग था। यहां कलिघाट आश्रम की तरह वॉलंटियर नहीं बल्कि नन्स होती थी जो सेवा कार्य करती थी। इसलिए यहां हमारे लिए ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं था।”

केजरीवाल नागपुर तो गए लेकिन आरएसएस मुख्यालय से बनायी दूरी

अब सवाल उठता है कि केजरीवाल नागपुर तो गए लेकिन विश्व के सबसे बड़े स्वयं सेवक संगठन के मुख्यालय क्यों नहीं गए ? जबकि आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संगठन है, जिसने हमेशा समाज में जात-पात, ऊंच-नीच व रंग-भेद जैसे भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया है। गरीबों, दलितों और आदिवासियों के बीच काम किया है। इसके कई स्वयं सेवकों ने गुमनाम रहकर जंगलों और दूर-दराज के इलाकों में गरीबों और वंचितों के लिए जीवनप्रयंत काम किया। आज भी लाखों स्वयं सेवक अपना घर, परिवार, सांसारिक सुख-सुविधा छोड़कर गरीबों की सेवा में लगे हैं। लेकिन केजरीवाल को आरएसएस के माध्यम से गरीबों की सेवा का रास्ता पसंद नहीं आया। क्योंकि उनकी पसंद तो हिन्दू धर्म न होकर ईसाई धर्म है। इसलिए उन्होंने ईसाई मिशनरियों के साथ काम करने की प्राथमिकता दी।

अवलोकन करें:-

दिल्ली : हिन्दुओं के धर्मांतरण : केजरीवाल और AAP मंत्री पर दंगा भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस म
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दिल्ली : हिन्दुओं के धर्मांतरण : केजरीवाल और AAP मंत्री पर दंगा भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस म

ईसाई मिशनरी स्कूलों में ‘उपदेश’ देने वाला डायरेक्टर : ‘तुम बिना कपड़ों के सोती हो?’

                 ईसाई मिशनरी संस्था 'स्क्रिप्चर यूनियन' के राज्य निदेशक का मैसेज वायरल (साभार: ट्विटर)
ट्विटर यूजर जोएल गिफ़्ट्सन ने ट्विटर पर एक थ्रेड के जरिए ईसाई मिशनरी स्कूलों के बारे में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने लिखा कि ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई करने वालों को ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ नामक संस्था के बारे में पता होगा – जो एक ईसाई मिशनरी संस्था है और दुनिया भर के ईसाई मिशनरी स्कूलों में उपदेश देता है। अब इसी ईसाई मिशनरी संस्था के एक अधिकारी द्वारा नाबालिग छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजने की बात सामने आई है।

उन्होंने लिखा कि सैम जयसुंदर तमिलनाडु में कई वर्षों तक ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का डायरेक्टर था। ये कई ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजते हुए उन्हें वीडियो कॉल करने और अकेले में मिलने की माँग करते हुए उन्हें आलिंगन करने की इच्छा जता रहा था। उन्होंने बताया कि ये सब 2016 से ही चल रहा है और अब कई लड़कियों ने आगे आकर इसका खुलासा किया है।

अब तक उस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई भी नहीं की गई है। कई छात्राओं और उनके माता-पिता ने आवाज़ उठाई है कि सैम जयसुंदर नाबालिग लड़कियों को आपत्तिजनक मैसेज भेजता है। वो भारत के ईसाई मिशनरी स्कूलों में जीसस और गॉस्पेल के बारे में पढ़ाता है। साथ ही उस पर लड़कियों पर अश्लील टिप्पणियाँ करने के आरोप भी हैं। लड़कियों ने कई बार उसकी शिकायत भी की लेकिन ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का सदस्य होने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हुई।

कई लड़कियों ने सोशल मीडिया पर बताया है कि वो एक ‘पीडोफाइल’ और ‘प्रिडेटर’ है। लड़कियों ने कहा है कि इस मामले में दो तरफ का कोई पक्ष ही नहीं है क्योंकि कई लड़कियों ने उसके इस व्यवहार का सामना किया है। लड़कियों ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो सैम जयसुंदर का बचाव कर रहे हैं। इंस्टाग्राम और व्हाट्सप्प पर स्टोरीज लगा कर इन लड़कियों ने कहा कि जो भी पीड़ित आरोपित के खिलाफ सामने आ रही हैं, वो काफी बहादुरी का कार्य कर रहीं।

साथ ही जोएल गिफ्टसन ने कई मैसेजों का स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया, जो ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ के लोगों ने उन लड़कियों को भेजे थे। एक मैसेज में संस्था का एक व्यक्ति एक लड़की को स्कर्ट में अपनी ‘सुंदर तस्वीर’ भेजने को कह रहा है। एक अन्य लड़की से सैम जयसुंदर ‘साइड वाली तस्वीर’ भेजने को कह रहा है। इसके अलावा एक लड़की को उसने लिखा, “तुमने मेरी तस्वीरें लाइक की हैं, जिससे मुझे ख़ुशी हुई। अब अपनी सबसे क्यूट सी तस्वीर मुझे भेजो।“

एक लड़की से उसने पूछा कि क्या तुम कभी नंगा (फिर समझाते हुए उसने फिर पूछा- ‘बिना कपड़ों के?’) सोती हो? साथ ही वो लड़कियों को ‘स्वीटी’ कहते हुए उनसे फ्री होकर उससे बात करने को कहता भी दिख रहा है। एक 14 वर्षीय लड़की से उसने पूछा कि क्या वो और उसके साथी लड़का-लड़की एक-दूसरे को गले लगाते हैं? सैम ने नाबालिग से पूछा कि क्या किसी ने उसे आलिंगन में लिया है या किस किया है?

9वीं वर्ग की एक छात्रा से उसने कहा कि जब बारिश के दिनों में वो खेल रही थी तो उसके कपड़े भींग गए थे और उसके शरीर से चिपक रहे थे। एक लड़की को अपने बारे में बताते हुए उसने कहा कि चौथी वर्ग की एक छात्रा ने उसे गले लगाया था और किस भी किया था। उसने कहा कि उस लड़की के पिता नहीं हैं, वो उसे पसंद आई। एक छात्रा से उसने कहा कि वो ‘छोटे स्कर्ट्स में’ एकदम क्यूट दिख रही थी।

वो छात्राओं को अपने फोन नंबर देकर उन्हें कॉल करने को भी कहता था और कहता था कि वो उसकी आवाज़ सुनना चाहता है। साथ ही एक रुबेन क्लेमेंट नामक व्यक्ति का भी स्क्रीनशॉट वायरल हुआ है, जो ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ से ही जुड़ा हुआ है। एक मैसेज में वो एक लड़की से पूछ रहा है कि उसके ‘पसंदीदा नाइट ड्रेस’ कौन सा है। वहीं सैम लड़कियों से उनके ‘बॉयफ्रेंड’ के बारे में भी पूछा करता था।

एक लड़की से उसने पूछा कि वो अपने पिता के साथ क्यों सोई हुई है? एक अन्य छात्रा से उसने ऐसी ड्रेस में तस्वीर भेजने को कहा, जिसमें उसका टीशर्ट ‘एक कंधे से नीचे’ लटक रहा हो। साथ ही उसने पूछा कि उसने अंतिम बार किस कब किया था? वो कई महीनों और सालों तक लड़कियों के पीछे पड़ा रहता था और उन्हें मैसेज भेजता रहता था। अधिकतर मैसेजों में वो तस्वीरों की डिमांड्स ही करता था।

बता दें कि मिशनरी स्कूलों में और चर्चों में यौन शोषण की कई ख़बरें अक्सर सामने आती रहती हैं और अधिकतर मामलों में आरोपित इतने पॉवरफुल होते हैं कि उन पर कार्रवाई नहीं होती। केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा में खुलासा किया था कि पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।