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पंजाब : डंडे-तलवारों के साथ चर्च पर हमला, दावा- निहंगों ने की बाइबिल की बेअदबी भी: ईसाई पक्ष ने भी चलाए ईंट-पत्थर

पंजाब के अमृतसर स्थित चर्च पर ईसाइयों की प्रार्थना के दौरान निहंगों का हमला (साभार- @paramaulakh02)
पंजाब के अमृतसर में रविवार (21 मई, 2023) को लोगों द्वारा चर्च पर हमला किया गया। हमलावरों को निहंग सिख बताया जा रहा है। यह हमला चल रही ईसाई प्रार्थना के दौरान किया गया। इस वजह से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हालात तनावपूर्ण हो गए। घटनास्थल पर नारेबाजी और पत्थरबाजी भी हुई। मौके पर पहुँची पुलिस ने स्थिति को काबू किया। ईसाइयों ने निहंगों पर बाइबिल की बेअदबी का आरोप लगा कर कार्रवाई की माँग की है।

वहीं हमलावरों ने सिखों की वेशभूषा में ईसाईयत के प्रचार पर एतराज जताया है। पुलिस की मानें तो अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर निहंग ही थे या कोई और। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (21 मई, 2023) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अमृतसर के गाँव राजेवाल का है। यहाँ के सिखपाल राणा मिनिस्ट्रीज चर्च में 21 मई को दोपहर के समय प्रार्थना चल रही थी। प्रार्थना के ही दौरान निहंगों के वेश में लगभग 25 हमलावर अपने चेहरों को ढँक के आ धमके।

उनके हाथों में डंडे और तलवारें थीं। आरोप है कि हमलावरों ने आते ही चर्च में मौजूद लोगों से मारपीट शुरू कर दी। बाहर खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई और चर्च में रखी बाइबिल की भी बेअदबी हुई। इस अचानक हुए हमले से पहले तो अफरातफरी मची गई और बाद में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इस से हालात तनावपूर्ण हो गए।

बताया जा रहा है कि निहंगों के हमले के जवाब में ईसाई पक्ष से भी ईंट-पत्थर चलाए गए। इस दौरान दोनों तरफ से धार्मिक नारेबाजी भी की गई। हमलावरों का आरोप था कि चर्च के अंदर सिखों के वेश में प्रार्थना करवाई जाती है जिस पर उन्हें एतराज है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किया और समझाया। अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी सतिंदर सिंह के मुताबिक अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार निहंग समूहों ने इस घटना में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। साथ ही उन्होंने ऐसे हमलों के लिए निहंगों की पोशाक पहनने पर भी आपत्ति जताई है। अमृतसर ग्रामीण सतिंदर सिंह के मुताबिक, केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, पुलिस की जांच हमले का मकसद पता करना भी शामिल है।

इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दौड़ रहे निहंगों के हाथों में हथियार और डंडे देखे जा सकते हैं। कुछ लोग खुले मैदान और कुछ सड़क की तरफ भाग रहे हैं। ईसाई पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए अपने टूटे वाहन दिखा रहा है। पादरी जॉन का कहना था कि वो लोग चुपचाप प्रार्थना कर रहे थे कि अचानक ही हमला कर दिया गया। उन्होंने निहंगों पर सख्त कार्रवाई न होने पर पूरे पंजाब में चक्का जाम करने और उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होने का एलान किया।

घटना के बाद ईसाई समुदाय के लोगों ने ण्डली ने जंडियाला गुरु-तरनतारन मार्ग पर दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया और ट्रैफिक जाम किया। पंजाब अल्पसंख्यक आयोग सुभाष थोबा ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। ईसाई समूहों का कहना है कि वो इस मामले को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आगे उठाएँगे।

गौरतलब है साल 2021 में, SGPC ने पंजाब में हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की थी। इसी के साथ पंजाब में चर्चों पर हमलों में भी वृद्धि हुई है। अगस्त 2022 में अमृतसर के ददुआना गाँव में एक ऐसी ही घटना में निहंगों ने जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में ईसाइयों के एक कार्यक्रम को बाधित कर दिया था।


‘रोड शो में सरकारी खजाने से खर्चे 61 लाख रूपए, शपथग्रहण में लगेंगे 2 करोड़ रूपए’

                                        अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर में किया रोड शो (फोटो साभार: ANI)
पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद रविवार (13 मार्च, 2022) को पंजाब के भावी मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमृतसर में रोड शो किया। इससे पहले मान ने हवाई अड्डे पर केजरीवाल, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राघव चड्ढा का स्वागत किया।

वहीं कांग्रेस नेता अलका लांबा ने रोड शो और भगवंत मान के शपथ ग्रहण समारोह में होने वाले खर्च को लेकर AAP पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रोड शो पर सरकारी क्वार्टर से कुल 2 करोड़ 61 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता और दिल्ली की विधायक अलका लांबा ने विधानसभा चुनावों में पंजाब में जीतने के तुरंत बाद पार्टी के हितों को आगे बढ़ाने के लिए AAP के सरकारी तंत्र के इस्तेमाल का पर्दाफाश करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने एक प्रशासनिक आदेश का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “AAP तो राजनीति बदलने आए थे…? AAP के द्वारा जनता के पैसों की लूट शुरू… 15 लाख रुपए अरविंद केजरीवाल के रोड शो पर खर्च किए जा रहे हैं और 46 लाख रुपए जिलों में रोड शो के लिए सरकारी खजाने से देने का आदेश हुआ है। पंजाब और पंजाबियों को पहली बधाई।”

मुख्य सचिव द्वारा पंजाब के विभिन्न जिलों में नियुक्त किए गए प्रधान सचिवों, आयुक्तों, संभागीय आयुक्तों और एसपी सहित पंजाब में सरकारी अधिकारियों को एक नोटिस जारी किया गया है ताकि मुख्यमंत्री पद के लिए नामित भगवंत मान और निर्वाचित विधायकों के 13 मार्च को अमृतसर दौरे के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा सके। नोटिस में अधिकारियों को प्रस्तावित रोड शो के लिए आवश्यक यातायात और सुरक्षा व्यवस्था करने और हरमंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर और राम तीरथ जैसे धार्मिक केंद्रों की योजनाबद्ध यात्राओं के लिए अलर्ट किया गया है।

नोटिस में आगे आगे कहा गया कि वह रोड शो के लिए तुरंत प्रभाव से 15 लाख रुपए डिप्टी कमिशनर अमृतसर को भेजे। मुख्य सचिव ने पत्र में आदेश दिए हैं कि वह 2-2 लाख रुपए पंजाब के सभी 23 जिलों के उपायुक्तों के खाते में रोड शो के प्रबंधों के लिए डिपॉजिट कराए। सचिव ट्रांसपोर्ट को भी लिखा गया कि वह रोड शो के लिए जाने वाले कार्यकर्ताओं के लिए बसों का प्रबंध करें। कमिश्नर नगर निगम अमृतसर को मुख्य सचिव ने रोड शो के दौरान मदद करने के लिए कहा है। इस प्रकार, पंजाब में आम आदमी पार्टी के रोड शो के लिए सरकारी खजाने से कुल 61 लाख रुपए खर्च किए जाएँगे।

कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सवाल उठाया कि यह सरासर सरकारी पैसे का दुरुपयोग है। एक तरफ पंजाब के सिर पर तीन लाख करोड़ का कर्ज और ऊपर से अपनी पब्लिसिटी के लिए सरकारी खजाने के साथ सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हो रहा है। खैहरा ने ट्वीट में आरोप लगाया कि रोड शो पूरी तरह से राजनीतिक है और पार्टी को प्रोमोट करने के लिए किया गया। यह सब बर्दाश्त करने लायक नहीं है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को टैग करते हुए कहा कि लोगों के पैसे को वह तुरंत सरकार के खजाने में जमा करवा जाए।

खैरा ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि वह तो सोचते थे कि आम आदमी पार्टी अपने वादों के मुताबिक अलग से काम करेगी। इन्होंने तो सत्ता सँभालने से पहले सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग शुरू कर दिया। आप रोड शो के लिए ट्रांसपोर्ट का दुरुपयोग कर रही है। ऐसा कर पार्टी ने साबित कर दिया है कि परंपरागत पार्टियों में और उनमें कोई फर्क नहीं है।

इसके अलावा, आरोप है कि भगवंत मान सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए भी प्रशासन 2 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। अलका लांबा ने इसके लिए भी सरकार के आदेश को शेयर किया, जिससे पता चला कि राजस्व और पुनर्वास विभाग को मेगा समारोह की व्यवस्था करने के लिए शहीद भगत सिंह नगर के डीसी को 2 करोड़ रुपए आवंटित करने के लिए कहा गया है। इस तरह केजरीवाल के रोड शो और AAP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 2 करोड़ 61 लाख खर्च किए गए हैं, जिसकी कॉन्ग्रेस पार्टी ने आलोचना की है। 16 मार्च को होने वाले समारोह में लगभग 1 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

ईद की नमाज: अमृतसर की जामा मस्जिद, लुधियाना में सड़क पर… सैंकड़ों की भीड़, मास्क और कोविड प्रोटोकॉल सब गायब

                                        अमृतसर के जामा मस्जिद की तस्वीर (साभार: ANI)

हरिद्वार में हुए कुंभ पर रोने वालों ने यह नहीं देखा कि नहान के दौरान कोरोना के विस्फोट होने के समाचार मिलते ही नहान को तुरंत रोक दिया और और समापन नहान केवल औपचारिक रूप में सम्पन्न किया था, लेकिन हिन्दू विरोधियों को विरोध करना था, लेकिन भारत में कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप के कारण इस बार भी ईद को लेकर प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए। कई जगह इनका सख्ती से पालन हुआ तो कहीं पर सुरक्षाबलों को तैनात करके भीड़ को आने से रोका गया। इस दौरान पंजाब के अमृतसर से हैरान करने वाली तस्वीरें आईं। यहाँ भारी भीड़ में नमाजियों को एकत्रित हुए देखा जा सकता है।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा जारी की गई तस्वीरों में देख सकते हैं कि भारी भीड़ में बिना किसी कोविड नियम का पालन किए नमाज पढ़ी जा रही है। ये तस्वीर अमृतसर के जामा मस्जिद खैरुद्दीन हॉल बाजार की है। यहाँ ईद-उल-फितर के अवसर पर ये लोग इकट्ठा हुए।

ऐसी ही एक तस्वीर लुधियाना के जामा मस्जिद के बाहर भी देखने को मिली। हालाँकि, इस जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उतनी तादाद में लोग इकट्ठा नहीं थे जितने अमृतसर में नजर आए। लेकिन वीडियो में देखें तो यहाँ भी कई नमाजियों के चेहरे से मास्क गायब है जबकि खुली सड़क पर वह अपनी नमाज पढ़ रहे हैं। वीडियो में दो छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं। इनके मुँह पर भी मास्क नहीं है।

 

एक तस्वीर AIMIM नेता सैयद सोहेल कादरी की भी सामने आई है। सैयद ने अपने ट्वीट में लिखा, “असदुद्दीन ओवैसी साहब के नेतृत्व में पनजेशा के इरानीगल्ली मस्जिद-ए-सरदार यार जंग पर ईद उल फितर की नमाज अदा करने के लिए सहयोग की बात करते हुए।” तस्वीरों में सैयद पुलिस से बात करते दिख रहे हैं। कुछ अन्य लोग भी उनके आसपास सफेद कुर्ते टोपी में दिख रहे हैं।

ईद से पहले भी उडी थी नियमों की धज्जियां 

कोविड महामारी के कारण भीड़ को रोकने के लिए जारी की गई गाइडलाइन्स का उल्लंघन पिछले कई दिनों से होता रहा है। अभी कल ईद की खरीददारी पर निकले लोगों ने बाजार पहुँचकर खूब नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं। न सोशल डिस्टेंशिंग का पालन हुआ, न लोगों के चेहरे पर मास्क लगे दिखे।

हैदराबाद के चारमीनार इलाके में लॉकडाउन से पहले ईद की खरीदारी करने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ गई। दो गज की दूरी तो छोड़िए, दो कदम की दूरी भी बमुश्किल दिखी।

इसी तरह मुंबई के भिंडी बाजार में ईद की शॉपिंग करने हजारों लोग पहुँचे। यूपी के फिरोजाबाद में भी लोग घरों से निकल कर खरीदारी करने बाजारों में गए। दिल्ली के सीलमपुर में भी लोगों की भीड़ उमड़ी दिखी।

इंग्लैंड के सबसे वरिष्ठ पादरी ने जलियाँवाला नरसंहार के लिए माँगी माफ़ी

जलियाँवाला नरसंहार, पादरी वेबलीजालियाँवाला बाग़ नरसंहार के बारे में तो आपने पढ़ा ही होगा। अप्रैल 1919 में ब्रिटिश जनरल डायर और उसके सैनिकों ने यहाँ ऐसा आतंक मचाया था कि जान बचाने के लिए कई महिलाएँ और बूढ़े-बच्चे तक भी कुँए में कूद गए थे। स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं के मुताबिक़, इस हत्याकांड में कम से कम 1000 लोग मारे गए और इससे काफ़ी ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए। अमृतसर के हरमिंदर साहिब के नजदीक स्थित जालियाँवाला बाग़ के बाहर निकलने के सारे रास्ते बंद कर के अंग्रेजों ने वैशाखी मना रहे लोगों का नरसंहार किया था।
अब इंग्लैंड के सबसे वरिष्ठ पादरी ने इस घटना को लेकर माफ़ी माँगी है। जलियाँवाला नरसंहार के 100 वर्ष पूरे होने के बाद उन्होंने माफ़ी माँगते हुए कहा कि वे इसके लिए शर्मिंदा हैं। दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के कैंटरबरी चर्च के 105वें आर्चबिशप जस्टिन पोर्टल वेबली ने जालियाँवाला बाग़ पहुँच कर उस नरसंहार को याद करते हुए दुःख जताया।
‘चर्च ऑफ इंग्लैंड’ के सबसे वरिष्ठ पादरी वेबली ने कहा कि जलियाँवाला बाग़ में जो अपराध हुआ था, उसके लिए वह शर्मिंदा हैं और एक धार्मिक नेता होने के तौर पर वह इस त्रासदी की निंदा करते हैं। उन्होंने माफ़ी माँगते हुए कहा कि इसकी यादें हमेशा रहेंगी। उन्होंने ज़मीन पर लेट कर प्रार्थना भी की। बिशप जस्टिन अपनी पत्नी कैरोलिन वेबली के साथ 2 दिवसीय अमृतसर दौरे पर पहुँचे हुए हैं।

वेबली ने कहा कि वह ब्रिटिश सरकार की तरफ से नहीं बोल सकते हैं क्योंकि वह सरकार के आदमी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह जीसस क्राइस्ट के नाम पर बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए और इंग्लैंड-भारत के रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रार्थना करने आए हैं। इस दौरान उन्होंने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि यह दौरा एक तीर्थयात्रा के समान रहा है।

पाकिस्तान से अमृतसर आए नमक के ट्रक से 100 किलो हेरोइन बरामद


पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा। आतंकवाद पर लगे लगाम के बावजूद भारत में ड्रग्स स्मगल पर रोक नहीं लगाई है। जबकि आतंकवाद के गंभीर मुद्दे पर विश्व से लगभग अलग हो चुका है। 
पंजाब के अमृतसर में पाकिस्तान से आए नमक के ट्रक में 100 किलो के करीब हेरोइन बरामद हुई है ! इंटरनेशनल चेक पॉइंट पर कस्टम और सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में हेरोइन की कीमत करीब 500 करोड़ है ! जून 28 को पाकिस्तान से ट्रक आया था। फिलहाल ट्रक वापस पाकिस्तान जा चुका है !
इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी देहली से सटे ग्रेटर नोएडा की बादलपुर थाना पुलिस ने तीन शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की गिरफ्त में आए, इन तीन तस्करों में से एक एलएलबी का छात्र था। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इन पर आरोप है कि, ये देहली समेत एनसीआर में युवाओं को नशीले पदार्थ की सप्लाई करते थे और उनको नशे में धकेल रहे थे !
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तस्करों में से एक एलएलबी का छात्र था, जबकि दूसरा आरओ प्लांट चलाता था। इसके अलावा तीसरा आरोपी मकानों में पुताई का काम करता था। इनके कब्जे से पुलिस ने 745 ग्राम हेरोइन बरामद की थी, जिसकी बाजार में कीमत 70 से 80 लाख रुपये बताई जा रही है ! हालांकि अभी तक इनका सरगना वशिष्ठ कुमार पुलिस की गिरफ्तार से बाहर था, जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे। वशिष्ठ कुमार बिहार के मुंगेर का रहनेवाला है !
स्त्रोत : आज तक

आखिर अमृतसर हादसे में नवजोत सिंह सिद्धू को कौन बचा रहा है?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अमृतसर हादसे के बाद पंजाब में कांग्रेस सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू सवालों में हैं। इस मामले में उनकी पत्नी नवजोत कौर और करीबी कांग्रेसी पार्षद सौरभ मदन मिट्ठू का नाम सामने आ चुका है। हादसे के बाद सिद्धू की पत्नी मौके से भाग गई थीं जिसे लेकर हर तरफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पंजाब कांग्रेस में अमरिंदर सिंह खेमे से जुड़े सूत्र ने बताया है कि मुख्यमंत्री इस मामले में नवजोत सिद्धू की पत्नी के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में हैं, लेकिन दिल्ली से दबाव है कि न तो सिद्धू या उनकी पत्नी या न ही किसी आयोजक के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई की जाए। यही कारण है कि पंजाब सरकार ने इस हादसे की जो पहली एफआईआर लिखी उसमें आयोजकों का नाम तक नहीं लिखा गया है। ये एफआईआर ‘कुछ अज्ञात लोगों’ के नाम पर दर्ज की गई है। इस फैसले से पंजाब सरकार पर विपक्ष हमलावर है, साथ ही कांग्रेस के अंदर भी इस पूरे मामले को लेकर दो धड़े बन गए हैं। एक पक्ष इस मामले में कम से कम नवजोत कौर की जिम्मेदारी तय करने के पक्ष में है और उनकी मांग है कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया जाए। लेकिन ऐसा लगता है कि सिद्धू और उनकी पत्नी के सिर पर हाईकमान का हाथ है।
पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले अमृतसर रेल हादसे के बाद लगातार राज्य सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर लोगों और विरोधियों के निशाने पर हैं, जहां विरोधीगण सिद्धू से इस मसले पर इस्तीफा मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अपने दल के नेतागण भी इस मुद्दे पर सिद्धू से खफा चल रहे हैं।
पार्टी नहीं उठा सकती है लोगों की लाशों का बोझ

डिप्टी मेयर सिद्धू पर करारा वार किया है अमृतसर शहर के डिप्टी मेयर रमन बख्शी ने, जिनका कहना है कि इस हादसे के लिए नवजोत सिंह सिद्धू की जवाबदेही तय होनी चाहिए, 60 लाशों का बोझ कांग्रेस पार्टी नहीं उठा सकती है, ये वो ही उठाएं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं। बक्शी का ये बयान बताने के लिए काफी है कि सिद्धू को लेकर पार्टी के अंदर भी विरोध हो रहा है। आपको बता दें कि शिरोमणि अकाली दल ने भी सिद्धू के इस्तीफे की मांग की है।
सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर विरोधियों के निशाने पर
नवजोत सिंह सिद्धू अपनी पत्नी नवजोत कौर के साथ 
सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर विरोधियों के निशाने पर 
दरअसल ऐसा कहा जा रहा है कि जिस जगह पर रावण दहन हुआ था तब वहां पर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर उपस्थित थीं, हालांकि नवजोत कौर के मुताबिक वो हादसे से पहले ही वहां से जा चुकी थी।
अमरिंदर के खिलाफ हथियार सिद्धू
ऐसा माना जाता है कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर राहुल गांधी ज्यादा भरोसा नहीं करते हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव के समय अमरिंदर सिंह ने अकेले दम पर पूरे राज्य में प्रचार किया था और राहुल गांधी को घुसने नहीं दिया था। तब यह बात सामने आई थी कि अमरिंदर मानते हैं कि अगर राहुल ने पंजाब में प्रचार किया तो पार्टी को नुकसान होगा। यह बात सही भी निकली क्योंकि राहुल गांधी के प्रचार के बिना पंजाब में कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की। इसी का नतीजा हुआ कि राहुल गांधी के मन में अमरिंदर को लेकर एक खटास है। सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते वक्त अमरिंदर की काट के लिए प्रताप सिंह बाजवा को आगे बढ़ाया जाता था। लेकिन राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद से बाजवा के बुरे दिन चल रहे हैं। राहुल नवजोत सिद्धू पर अधिक भरोसा करते हैं और वो उन्हें अमरिंदर के विकल्प के तौर पर खड़ा करना चाहते हैं। लिहाजा हर विवाद में राहुल गांधी नवजोत सिद्धू के साथ खड़े हो जाते हैं। कुछ दिन पहले इमरान खान के शपथ ग्रहण में सिद्धू पाक सेना के प्रमुख से गले मिले थे। इस पर अमरिंदर ने खुले तौर पर नाराजगी जताई थी। लेकिन बाद में हाईकमान का इशारा मिलने पर उन्हें मुंह बंद करना पड़ा। उस मामले में भी अमरिंदर चाहकर भी सिद्धू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सके थे। 
ट्रेन ड्राइवर से हो रही पूछताछनवजोत सिद्धू को मिला हुआ है ‘फ्री हैंड’
हमारे सूत्र ने बताया कि नवजोत सिद्धू को कांग्रेस हाईकमान की तरफ से ‘फ्री हैंड’ मिला हुआ है। सिद्धू पिछले दिनों कई विवादों में फंसे हर बार कांग्रेस हाईकमान ने उनका बचाव किया। यहां तक कि जब उन्होंने पाकिस्तान के पक्ष में बयान देने शुरू किए तब भी कांग्रेस का कोई बड़ा नेता उनके खिलाफ कुछ भी नहीं बोला। क्योंकि सबको पता है कि सिद्धू के सिर पर किसका हाथ है। अमृतसर हादसे में भी कांग्रेस हाईकमान ने साफ इशारा कर दिया है कि वो सिद्धू के समर्थन में है। जबकि इस मामले में सिद्धू की पत्नी की भूमिका से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। यहां तक जानकारी सामने आई है कि दशहरा मेले का आयोजक सौरभ मदन मिट्ठू नवजोत सिद्धू की पत्नी का काफी मुंहलगा था। उसका रसूख इतना था कि पुलिस और प्रशासन में अपने काम वो बहुत ही आसानी से करवा लिया करता था। अमृतसर में वो सिद्धू का सबसे करीबी आदमी माना जाता है। ऐसे में अगर आयोजक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है तो समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि इसकी असली वजह क्या है।