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बांग्लादेश : ISKCON के हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास को करो रिहा: शेख हसीना ने यूनुस सरकार को लताड़ते हुए कहा

     चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी की आलोचना पीएम शेख हसीना ने की है (फोटो साभार: Ht & tribune india)
बांग्लादेश के चटगाँव में गिरफ्तार किए गए हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास के 2 और सहायकों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह दोनों चिन्मय कृष्ण दास को खाना देने गए थे। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर यूनुस सरकार को लताड़ा है। वहीं इस बीच ISKCON को बैन करवाने के लिए बांग्लादेश की इस्लामी पार्टियों ने जोर लगाया हुआ है। उन्होंने ISKCON को एक ‘कट्टरपंथी संगठन’ करार दिया है।

रिपब्लिक की एक खबर के अनुसार, देशद्रोह के कथित मामले में जेल भेजे गए हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास को जेल के भीतर खाना देने गए उनके दो सहायकों को गुरुवार (29 नवम्बर, 2024) को गिरफ्तार कर लिया गया। इन दोनों को किस आधार गिरफ्तार किया गया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

चिन्मय कृष्ण दास को मंगलवार को जज काजी नजरुल इस्लाम ने जेल भेज दिया था। उन्हें जमानत भी नहीं दी गई थी। उनके खिलाफ की गई इस कार्रवाई को बांग्लादेशी वकीलों ने गैरकानूनी करार दिया है। चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी की आलोचना तख्तापलट के कारण बांग्लादेश सत्ता से बाहर हुईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने की है।

शेख हसीना ने कहा है कि चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी अवैध है और उन्हें तुरंत ही छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यूनुस सरकार पर प्रश्न उठाए। शेख हसीना ने कहा, “सनातन धर्म के एक बड़े नेता को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।”

शेख हसीना ने आगे कहा, “चटगाँव में एक मंदिर को जला दिया गया है। इससे पहले अहमदिया समुदाय की मस्जिदों, दरगाहों, चर्चों, मठों और घरों पर हमला किया गया, तोड़फोड़ की गई, लूटपाट की गई और आग लगा दी गई।” शेख हसीना ने यूनुस सरकार को सत्ता हथियाने वाला बताया है।

वहीं इस बीच बांग्लादेश ISKCON के खिलाफ षड्यंत्र तेज हो गया है। बांग्लादेश हाई कोर्ट ने हाल ही में ISKCON पर बैन लगाने की माँग करने वाली याचिका को ठुकरा दिया था। इसके बाद अब बांग्लादेश की इस्लामी पार्टियों ने ऐसी ही माँग उठाई है। जमीयत उलेमा ए बांग्लादेश के अब्दुल युसूफ ने ISKCON को ‘कट्टरपंथी संगठन’ बताया है।

इस्लामी पार्टियों ने कहा है कि यूनुस सरकार बिना देरी के ISKCON को बैन कर दे। उन्होंने ISKCON के साधु संतों को ‘हथियारबंद लड़ाके’ करार दिया है। इस्लामी पार्टियों ने यह सारी बातें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही हैं। यह पार्टियाँ बांग्लादेश में कड़े इस्लामी कानून चाहती हैं।

उत्तराखंड : बेशर्म कांग्रेस कह रही – कोर्ट के बजाय मौलवी-मौलानाओं से आदेश लेते: हल्द्वानी में कट्टरपंथियों के साथ खड़ी पार्टी

                     हल्द्वानी दंगा और विधायक सुमित हृदयेश (साभार: अमर उजाला/X-SumitHridayesh)
जिस तरह कांग्रेस इस्लामिक कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक सेकुलरिज्म का ढोल पीट हिन्दुओं को पागल बना राज करती रही, वही काम भाजपा से उम्मीद कर रही है। दूसरे, देश में जितने दंगे कांग्रेस ने करवाए है, और हज़ारों मुसलमानों की जानें गयी, फिर भी मुसलमान कांग्रेस पर विश्वास करता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, वक़्फ़ बोर्ड, शाहबानो के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निरस्त करने, पाकिस्तानी/बांग्लादेशी/रोहिंग्या घुसपैठियों को सरकारी सुविधाएं देकर आबाद करना और अतिक्रमण आदि से मुस्लिम हितैषी नहीं। अब कांग्रेस का इस्लामिक चेहरा हल्द्वानी दंगों में सामने आ गया है। समस्त हिन्दुओं और शांतिप्रिय मुसलमानों को कांग्रेस से सतर्क रहने की जरुरत है। देश में कानून का राज होगा, शरीयत का नहीं, जो अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए मौलवी-मौलानाओं से आदेश लेने को कांग्रेस बोल रही है। 

कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के हल्द्वानी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके बाद कट्टरपंथियों ने इतना उपद्रव मचाया कि इसमें कम-से-कम 6 लोगों की मौत हो गई है। ये अभियान कई दिनों से चल रहा था, जिसके तहत सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाए बनाए गए इमारतों को ध्वस्त किया जा रहा था। इन इमारतों में मकानों और धार्मिक स्थल भी थे।

प्रशासन गुरुवार (8 फरवरी 2024) को हल्द्वानी के बनफूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक के बगीचे’ में पहुँचा और अवैध रूप से बनी मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चला दिया। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले में कई पुलिस वाले घायल भी हो गए हैं।

हमले में पत्थरबाजी के साथ ही पेट्रोल-बम भी चलाए गए। दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दिया गया। उन्मादी भीड़ ने पुलिस थाने को घेर लिया गया और पुलिस वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में अधिकांश पुलिसकर्मी और अधिकारी हैं। हालात को देखकर हल्द्वानी में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया गया है।

दरअसल, कोर्ट के आदेश पर की गई प्रशासन द्वारा अवैध मस्जिदों और मदरसों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ के बाद कट्टरपंथियों की कार्रवाई का कॉन्ग्रेस नेताओं ने एक तरह से समर्थन कर दिया। कॉन्ग्रेस नेताओं ने जिस लहजे में इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी, उससे यही लगता है कि कोर्ट के आदेश बजाय प्रशासन को मौलवी एवं मौलानाओं से आदेश लेना चाहिए था और उनकी सहमति होती, तभी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अधिकारियों को उतावला बताते हुए कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश ने कहा, “ये प्रशासन और अधिकारियों की बहुत बड़ी चूक है। स्थानीय लोगों, मौलानाओं को कॉन्फिडेंस में लेकर बात की जानी चाहिए थी। आप (प्रशासन) एकदम से वहाँ पहुँच जाते हैं और बिना इन्फॉरमेशन के वहाँ ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया। जो भी हुआ, अनुचित हुआ। आजादी के बाद से ऐसा हमने हल्द्वानी शहर में ऐसा कभी नहीं देखा। ये बड़ा काला दिन है।”

ये वही सुमित हृदयेश हैं, जो रेलवे की जमीन पर कब्जा करके बसे हजारों लोगों की बस्तियाँ को हटाने के खिलाफ खड़े हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि यहाँ 20 इबादतगाह भी बनाए गए हैं। मामला जब सुप्रीम कोर्ट में गया तो अवैध कब्जाधारियों को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के सलमान खुर्शीद खड़े हो गए। वहीं, कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश भी खड़े हो गए।

लोगों का तो ये भी कहना है कि इन अवैध बस्तियों को बसाने में सुमित हृदयेश की माँ इंदिरा हृदयेश का भी बड़ा हाथ था। कहा जाता है कि वहाँ जब गफूर बस्ती के सीमांकन का काम होता था, तब भी यहाँ के लोग इसका विरोध करते थे और इंदिरा हृदयेश भी इसमें साथ रहती थीं। इंदिरा हृदयेश भी उत्तराखंड कॉन्ग्रेस की बड़ी नेता रही हैं। इस पूरे मामले में एकमुश्त वोट पाने की नीति की बहुत बड़ी भूमिका है।

दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा में हाल में समान नागरिक संहिता (UCC) पारित किया गया है, जिसको लेकर भी विपक्षी दलों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कहा था कि UCC से राज्य में अशांति हो सकती है। राज्य के हालत मणिपुर में तब्दील हो सकते हैं। उन्होंने UCC के बाद होने वाली हिंसा का उदाहरण कूकी-मैतेई समुदाय से जोड़कर दिया था।

इतना ही नहीं, मुस्लिम मौलानाओं ने भी सड़कों पर उतरने की धमकी दी थी। इसके बाद मुस्लिम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और खुद को पीस पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बताने वाला शादाब चौहान मुस्लिमों की ताकत को कम ना आँकने की धमकी दी थी। शादाब चौहान ने हल्द्वानी दंगे (8 फरवरी, 2024) से दो दिन पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धमकी देते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा था।

अपने पोस्ट में शादाब ने लिखा था, “किसी की औकात नहीं है जो भारत के मुसलमानों को अल्लाह के हुकुम और हमारे नबी के तरीके पर चलने से रोक सके। अगर तुम हमको कमजोर समझ रहे हो तो गलती कर रहे हो, हमारी ताकत का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते। हम हर संवैधानिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। हमारी ताकत संविधान का अनुच्छेद 25 है, जिसके सामने तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस, तुम्हारी भी जिम्मेदारी है कि इसके लिए संवैधानिक संघर्ष करो।”

ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे ने पिछले साल जनवरी 2023 में वहाँ जाकर स्थानीय लोगों से बात करके हालात को जानने का प्रयास किया था। हमें स्थानीय लोगों से पता चला था कि कैसे हल्द्वानी में बाहरी मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रामपुर, नजीमाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर जैसी जगहों से मजदूरी के लिए वे आए और फिर जमीनों पर कब्जा करके बस गए। इनमें अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों की भी बड़ी संख्या है।

दरअसल, हल्द्वानी में जिस बनफूलपुरा में ये सारा बवाल हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था।

प्रशासन की कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी, तभी वहाँ कट्टरपंथियों की भारी भीड़ पहुँची। इनमें महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया और हमला बोल दिया गया।

डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए।”

डीएम वंदना सिंह ने कहा, “पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद दूसरी टीम आई। उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढाँचे को तोड़ने में लगी रही।”

‘कितना भी सर्वे कराओ कोई मस्जिद नहीं देंगे, इंशाअल्लाह सड़कों पर होगी लड़ाई’: ज्ञानवापी पर मौलाना तौकीर रज़ा का ऐलान, सुप्रीम कोर्ट को बताया ‘बेईमान’

मौलाना तौकीर रज़ा ने अब किसी भी मस्जिद पर कोई भी समझौता न करने का एलान किया (चित्र साभार- X/@KhanUsama78255)
अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात मौलाना तौकीर रज़ा ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। तौकीर रज़ा ने ज्ञानवापी के लिए सड़कों पर लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। मथुरा और काशी मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वो अब कोई मस्जिद देने को तैयार नहीं हैं भले ही कोई कितना भी सर्वे क्यों न करा ले। उन्होंने राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी बेईमानी बताया। तौकीर ने यह बयान सोमवार (18 दिसंबर, 2023) को दिल्ली में दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 दिसंबर, 2023 को दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब हॉल में मुस्लिम पंचायत आयोजित की गई थी। यह पंचायत इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) ने बुलाई गई थी। इसी आयोजन में बोलते हुए तौकीर ने अपनी आस्था का हवाला देते हुए कहा, “बाबरी मस्जिद के बाद अब बस। हमने बाबरी को सब्र किया है ज्ञानवापी पर सब्र नहीं करेंगे। इंशाअल्लाह यह लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी।” वकील महमूद प्राचा को मंच पर बुलाते हुए तौकीर ने उन्हें कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाला बताया और खुद अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर उतरने का ऐलान किया। 

तौकीर शायद यह भूल रहे है कि ज्ञानवापी के पीछे 30,000+ की लम्बी सूची है, जिन्हे मुग़ल आतताइयों ने मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान में बदल दिया था, कब तक बेगुनाहों को भड़काते रहोगे? अभी 4/5 मुद्दे और सुलझने दो, फिर आम मुसलमान इनके भड़काऊ बयानों से दूरी बनाएंगे और इन्हीं से पूछेंगे कि 'बताओ सच्चाई क्या है?' 'क्या इस्लाम किसी विवादित जगह पर नमाज़ अदा करने की इजाजत देता है?' नूपुर शर्मा विवाद में कुछ चैनलों पर कुरान, हदीसों और शरीयत खुलकर सामने आने पर किसी की 'सर तन से जुदा' की आवाज़ नहीं उठी। क्यों? क्योकि बेपर्दा करने वाले मुसलमान ही थे और मौलाना वातानुकूलित कमरों में बैठने के बावजूद पसीने पोछने पर लताड़ पड़ती, कि A C में बैठकर भी पसीना क्यों आ रहा है? क्यों बेगुनाहों को गुमराह किये हुए हो। उस समय के देखिए Jaipur Dialogue, Sach, News Nation पर 'इस्लाम क्या कहता है' आदि कई चैनल है, जिन पर सब कुछ खुलकर जगजाहिर हो गया।      

आखिर सच्चाई से क्यों पीछे भाग रहे हो? कब तक झूठ और फरेब पर अपनी दुकानदारी चलाते रहोगे? 

मौलाना तौकीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें दिखाना है कि वो बर्दाश्त नहीं करेंगे। तौकीर ने इसी भाषण में अयोध्या के विवादित ढाँचे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अब हम ये कहते हैं कि हमारी आस्था कोर्ट से ऊपर है क्योंकि हम एक बार अदालत की बेईमानी देख चुके हैं।” तौकीर का यह भी कहना है कि बाबरी मस्जिद पर मुस्लिमों के सब्र के बदले उनको बुजदिल समझा गया। उसने उकसाते हुए कहा कि अगर लोग बेजार नहीं हुए तो बाबरी की तरह ज्ञानवापी भी छीन ली जाएगी।

तौकीर ने आगे बताया कि ज्ञानवापी के बाद मुस्लिमों से मथुरा और बदायूँ की मस्जिदें छीनी जाएँगी। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जामा मस्जिद पर भी हमला बोला जाएगा। बकौल तौकीर कहीं तो मुस्लिमों को खड़े हो कर अपनी बात रखनी होगी। अंत में अपने अनुभव का हवाला देते हुए तौकीर ने बताया कि वो महसूस कर रहे हैं कि सभा में मौजूद लोगों के लिए ये तक़रीर नहीं बल्कि तकलीफ का समय है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी पर ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति अपनाने का भी आरोप लगा।

मौलाना तौकीर ने केंद्र के साथ उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों का खुलेआम एनकाउंटर हो रहा है और कानून का राज खत्म हो चुका है। बकौल तौकीर तो सत्ता में हिस्सेदारी चाहते हैं न कि मोहताजी। मौलाना तौकीर ने आगे बताया कि कॉन्ग्रेस और भाजपा की सोच एक जैसी ही है।



‘मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी’: सगे भाई से निकाह करने वाली इल्हान उमर, पाकिस्तान परस्त अमेरिकी सांसद ने दिखाई हिंदू घृणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी (PM Modi US Visit) दौरे पर हैं। अमेरिका के बड़े कारोबारी और विचारकों ने उनसे मुलाकात की है। उनके नेतृत्व की प्रशंसा कर रहे हैं। दूसरी ओर इल्हान उमर (Ilhan Omar) जैसे कुछ अमेरिकी सांसद भी हैं जो इस मौके पर भी भारत और हिंदुओं को लेकर अपनी घृणा का प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी काॅन्ग्रेस की महिला सदस्य ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में शामिल नहीं होंगी। पीएम मोदी अमेरिकी काॅन्ग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। दो बार अमेरिकी सदन को संबोधित करने वाले वे पहले भारतीय नेता हैं।

21 जून 2023 को एक ट्वीट में इल्हान उमर ने कहा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है। हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को गले लगाया है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी।” उन्होंने आगे लिखा है, “मैं पीएम मोदी के दमन और हिंसा के रिकॉर्ड पर चर्चा करने के लिए मानवाधिकार समूहों के साथ एक ब्रीफिंग करूँगी।”

 

अपने भारत विरोधी इस रुख के लिए इल्हान उमर नेटिजंस के भी निशाने पर हैं। @DruzeSaher ने पूछा, “आपने पाकिस्तान का दौरा किया और आप अल्पसंख्यकों के दमन की शिकायत कर रही हैं? वहीं राष्ट्र सर्वोपरि नाम के एक अन्य यूजर ने इल्हान उमर के मोदी के कार्यक्रम में न जाने के एलान पर कहा, “जाने की जरूरत भी नहीं है। वो ऐसे लोगों को पसंद भी नहीं करते जिसने अपने भाई से ही निकाह कर लिया हो।” रिकी नाम के यूजर ने भी इल्हान उमर के भाई से निकाह वाली बात दोहराई है।

                                                       साभार- @IlhanMN के ट्वीट पर आए जवाब

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

पाकिस्तान परस्त डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर अफ्रीकी मूल की हैं। पिछले साल उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा किया था। आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने भी उनका जोरदार स्वागत किया था। लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया था। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया था।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। उन्हें मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है। कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। 
इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं। उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुसलमानों के प्रति नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।” अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।
इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?” यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी। डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

 

मध्य प्रदेश : दमोह के 'गंगा जमुना स्कूल' ने हिंदू छात्राओं को पहनाया हिजाब, वहाँ महिला शिक्षकों का भी बदला धर्म ; यादव हुई खान, जैन बनी तबस्सुम, श्रीवास्तव कहलाती है बेगम…

मध्य प्रदेश के दमोह स्थित गंगा जमुना स्कूल में प्रिंसिपल समेत 3 शिक्षिकाओं के इस्लामी धर्मांतरण की बात सामने आई
मध्य प्रदेश के दमोह में एक पोस्टर में हिन्दू छात्राओं को भी हिजाब में दिखाया गया था। ‘गंगा जमुना स्कूल’ से जुड़े इस प्रकरण को लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य बाल आयोग की टीम के साथ-साथ जिले के डीएम को भी जाँच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्कूल में मजहबी शिक्षा से लेकर धर्मांतरण तक की घटनाएँ हो चुकी हैं।

इस्लामी धर्मांतरण के सबूत भी जाँच टीम को मिले हैं। राज्य बाल आयोग ने तहकीकात के क्रम में जानकारी दी है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत 3 महिला शिक्षिकाओं ने इस्लाम अपना लिया। प्रिंसिपल का नाम अफसरा बेगम है, जबकि उनके पिता का सरनेम श्रीवास्तव है। इसी तरह तबस्सुम नाम की एक शिक्षिका के बारे में पता चला कि पहले वो जैन थी। इसी तरह यादव सरनेम वाली एक महिला शिक्षिका भी अब नाम में ‘खान’ लगाती है।

अब इन शिक्षिकाओं से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि ये मामला तब खुला था, जब स्कूल की 18 विद्यार्थियों की तस्वीर एक बोर्ड पर लगाई गई थी। इन्होंने 12वीं की परीक्षा टॉप की थी। इनमें हिन्दू छात्रों को भी हिजाब में दिखाया गया था। पहले स्कूल ने इसे स्कार्फ बता कर टालमटोल की। अब इस बात की जाँच चल रही है कि कहीं स्कूल में नौकरी के लिए मुस्लिम बनने का दबाव तो नहीं डाला जाता था। जाँच में गैर-मुस्लिम बच्चों को कुरान की आयतें पढ़वाए जाने की बात भी सामने आई है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने भी कहा है कि इस स्कूल ने ‘लव जिहाद’ का साम्राज्य खड़ा किया। स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। शर्मा ने कहा कि हमारी बेटियों को जबरन हिजाब पहनने के लिए बाध्य किया गया। स्कूल चलाने वाले इदरीस, जलील और मुश्ताक के टेरर फंडिग कनेक्शन की जाँच का भी उन्होंने आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जबलपुर कोर्ट में NIA द्वारा दबोचा गया एक वकील और कटनी का एक मुस्लिम व्यक्ति भी इनके संपर्क में था।

वहीं भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भी इस मामले को लेकर कहा कि विधर्मी अपना कार्य करते रहते हैं, धर्म पर चलने वाले लोग जब शिथिल पड़ने लगते हैं तो अधर्म बढ़ता चला जाता है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों को देवस्थान कहा गया है, ऐसे में जिहादी मानसिकता वाली इस कुकृत्य को धिक्कार है। स्कूल के दस्तावेजों से पता चला है कि धर्मांतरण के बाद इन शिक्षिकाओं को नौकरी में परमानेंट किया गया। प्रिंसिपल का सरनेम ‘खरे’ था, लेकिन फिर वो ‘खान’ लगाने लगी।

महाराष्ट्र : ‘मुस्लिम प्रेमिका और घरवालों ने जबरन खतना कर वसूले 11 लाख रूपए’: दलित युवक पर इस्लाम अपनाने का दबाव, AIMIM सांसद जलील पर भी आरोप

                                        दीपक सोनवणे और उनके साथी (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
"Love Jehad" की शुरुआत 80 दशक में केरल से हुई थी, तब किसी भी पार्टी ने तुष्टिकरण के चलते इसे गंभीरता से नहीं लिया और जनता को 'गंगा-जमुना तहजीब' और संविधान की दुहाई देकर गुमराह किया जाता रहा है। जहाँ तक हिन्दू-मुस्लिम नारों की बात है, किसी में मुस्लिम ठेकेदारों से पूछने का साहस नहीं की हिन्दुओं को जातियों के नाम पर बाँटने से पहले बताओं क्या तुम एक हो, हिन्दुओं में कोई भी जाति हो एक ही मंदिर में जाते हैं और अंतिम संस्कार भी एक ही शमशान घाट पर होता है, जबकि मुस्लिम समाज में स्थिति एकदम विपरीत है। शिया हो, सुन्नी हो, बेरलवी, अहमदी, अथवा वहाबी आदि अनेकों जातियां है जो अपनी अपनी मस्जिदों नमाज पढ़ सकते हैं, शादी कर सकते हैं,और अपने अपने कब्रिस्तानों में मुर्दा दफना सकते हैं, किसी में इसके विरुद्ध जाने अथवा इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का साहस नहीं।  

नवंबर 18 को News18 पर अमिश देवगन के शो "आर पार" पर मौलानाओं का दोगलापन उस समय सामने जब शोएब जमई ने मुग़ल बाबर को हिन्दुस्थान का जीजा बताने पर चर्चा में शामिल सुभिहि  खान ने जवाब देते अपने पति का नाम लेकर कहा कि इस हिसाब से 'मेरे पति तुम्हारे जीजा है', तुरंत शो में शामिल तीनो तथाकथित मुसलमानो ने कहा 'हम तुम्हे मुसलमान ही नहीं मानते।' इस  मुद्दे पर बहस बहुत गरमा गयी। हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई की बात भी बेकार साबित। केवल इन्ही शब्दों ने उन मौलानाओं को बेनकाब भी कर दिया जो टीवी पर आकर चाशनी में डूबी बातें करते हैं, लेकिन टीवी से बाहर कहीं अधिक जहरीले हैं। हर देशप्रेमी हिन्दू-मुसलमान को ऐसे मौलानाओं से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। सरकार को ऐसे दोगलों की गंभीरता से जाँच करवानी चाहिए। बातें और काम इनके हिसाब से होता रहे तो सेकुलरिज्म वरना फिरकापरस्ती तो है ही, क्यों दोगलों? हिन्दू से शादी कर सुभिहि क्यों मुसलमान नहीं? अब इसे तुम्हारा दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए। 

टीवी पर चर्चाओं में ऐसे दोगले मौलानाओं को बेनकाब करने एक्स-मुस्लिमों को भी बुलाया जाए, जैसे News Nation अपने शो 'इस्लाम क्या कहता है' में बुलाते हैं। मौलाना या तो पसीना पोंछते नज़र आते हैं या चर्चा छोड़कर जाते देखे जाते हैं। 

जहाँ तक हिन्दू-मुस्लिम के बीच शादी की बात है, ऐसे अनेक किस्से हैं जहाँ शादी से पहले या बाद में धर्म परिवर्तन की बात ही नहीं हुई। केवल एक उदाहरण देता हूँ: जनाब राईस अहमद साहब का, जो सिनेमा घरों पर फिल्मों के परदे बनाते थे, हिन्दू लड़की से प्यार हो गया, अपनी प्रेमिका पत्नी का धर्म नहीं छुड़वाया, एक छत के नीचे नमाज भी हो रही है और पूजा भी, चार बच्चे हुए दो के नाम हिन्दू और दो के मुस्लिम। और मजे की बात, 1975/76 में बहुचर्चित फिल्म आयी "जय संतोषी माँ", उस फिल्म के परदे बनाने का ठेका उन्ही को मिला था। जिस सिनेमा हॉल पर यह फिल्म का प्रदर्शन हो रहा होता था, वहां सिनेमा घर के बाहर हार-फूल बिकते थे, लोग स्क्रीन पर हार-फूल ही नहीं, पैसे भी चढ़ाते थे। हर शो में हाल में लाइन मैन और सफाई कर्मचारियों को कम से कम 30 रूपए की कमाई होती थी। खैर, जनाब राईस साहब ने अपनी हिन्दू पत्नी के कहने पर एक बहुत ही खूबसूरत मंदिर बनाया जो एक होने की वजह से एक ही सिनेमा घर पर रखा जा सकता था। फिल्म वितरक ने माँगा नहीं दिया, पिताश्री एम बी एल निगम ने माँगा नहीं दिया स्पष्ट शब्दों में कहा यह मंदिर घर जाएगा, इसे अपनी पत्नी के कहने पर बनाया है। कई बार मेरे निवास स्थान पर भी आए। दरिया गंज में उनका स्टूडियो था। ये होता है प्रेम और जो आजकल चल रहा है इसे हिन्दुओं को अपने मकड़जाल में फ़ांस इस्लामीकरण करना। खैर, देखिये मौलानाओं का दोगलापन। वीडियो:

 

श्रद्धा वॉकर की हत्या (Shraddha Walker Murder Case) से पूरा देश सन्न है। इसी बीच शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पीड़ित एक दलित लड़का है। मुस्लिम प्रेमिका होने के कारण इस युवक को तरह-तरह की प्रताड़ना दी जा रही है। इसमें उसकी प्रेमिका का भी हाथ है। इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक नेता का नाम भी सामने आया है।

दलित युवक दीपक सोनवणे महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) में पढ़ाई करता है। यहाँ उसकी एक मुस्लिम लड़की सना फरहीन शाहमीर शेख से दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई। अब दीपक को सना के परिवार से लगातार प्रताड़ना मिल रही है और उससे जबरन वसूली की जा रही है। यहाँ तक कि उसका जबरन खतना भी कर दिया गया।

दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना दर्द साझा किया। दीपक ने बताया कि उसकी मुस्लिम प्रेमिका के परिवार में इस्लामवादियों को इस मामले में हर कदम पर प्रभावशाली स्थानीय सांसद इम्तियाज जलील का लगातार समर्थन मिल रहा है। इम्तियाज जलील AIMIM का सांसद हैं।

दीपक सोनवणे ने अपनी गर्लफ्रेंड सना फरहीन शाहमीर शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस आयुक्त, संभाजीनगर को संबोधित शिकायत में शाहमीर शमशुद्दीन शेख, ख्वाजा सैय्यद, शबाना बेगम शेख, साजिया सदफ शाहमीर शेख, AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील और उनके अंगरक्षकों के नाम हैं।

कॉलेज में शुरू हुआ लव अफेयर

दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर के मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सना उसकी सहपाठी थी। दोनों पहले दोस्त बने और फिर दोनों के बीच प्यार हो गया। दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में कहा, “सना शेख और मैं एमआईटी कॉलेज में साल 2018 से हम सहपाठी थे। सना और मैं परिचित हो गए। उसके बाद हमारा यह प्रेम प्रसंग हुआ। सना ने मुझे शादी का लालच दिया और कहा, ‘मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ। तुम इस्लाम कबूल कर लो। नमाज पढ़ो, कुरान पढ़ो’।”
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे लिखा, “मैंने उसे माता-पिता (अब्बू शाहमीर शमशुद्दीन शेख और अम्मी शबाना बेगम शेख) से यह बात कही। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वे अपनी बेटी को ठीक से समझाएँगे और मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए।”

प्रताड़ना की हुई शुरुआत

दीपक सोनवणे ने बताया कि उन्हें किस तरह की यातनाओं से होकर गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा, “मार्च 2021 में उसके अम्मी-अब्बू, चाचा और बहन ने मुझे गुलमंडी इलाके में मिलने के लिए बुलाया। जब मैं वहाँ गया तो उन्होंने मुझे अपनी बाइक वहीं खड़ी करने को कहा और कहा कि ‘हम सभी को कहीं बाहर जाने की जरूरत है। जैसे ही मैंने उन्हें मना किया, ख्वाजा सैय्यद और शाहमीर शेख मुझे जबरन अपने घर ले गए। वहां उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया।”
दीपक सोनवणे ने आगे बताया, “शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मेरे कपड़े उतार दिए। शबाना बेगम और साजिया सदफ ने मेरे हाथ-पैर बाँधकर मेरे मुँह में कपड़ा डाल दिया। इसके बाद शाहमीर शेख ने मेरे शरीर पर पेशाब कर दिया। इसका वीडियो सना और शाहमीर शेख के मोबाइल पर शूट किया गया था। इसके बाद उन्होंने मुझे इस्लाम में धर्मांतरित करने का दबाव बनाने के लिए पीटना शुरू कर दिया।”

जबरन कराया खतना

दीपक सोनवणे ने आगे कहा, “उसके बाद सना और उसकी माँ एवं बहन मुझे सिटी चौक थाने के पीछे की गली में एक अस्पताल ले गए और कहा कि हम यहाँ तुम्हें मुस्लिम बनने के लिए लाए हैं। हम यहाँ तुम्हारा खतना करा रहे हैं। अगर आप यहाँ किसी से कुछ कहोगे तो हम तुम्हारा वीडियो वायरल कर देंगे और समाज में तुम्हें बदनाम करेंगे।”
दीपक ने बताया कि इस दौरान आरोपितों ने उसे और उसके परिवार को मारने की धमकी भी दी। दीपक ने आगे कहा, “हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भी मार डालेंगे। उनकी बात सुनकर मैं बहुत डरा हुआ था, क्योंकि मेरी और मेरे परिवार की जान खतरे में थी। अगर मेरा वीडियो वायरल हुआ तो मैं बदनाम हो जाऊँगा।”
दीपक ने आगे बताया, “उन्होंने इसका फायदा उठाया और मेरा खतना कार दिया। इसके बाद मुझसे कहा कि तुम अब एक सच्चे मुसलमान हो। अगर तुमने किसी को बताया कि क्या हुआ है तो याद रखना, तुम्हें इसका पछतावा होगा। इसके बाद वे लोग मुझे वापस गुलमंडी ले आए। मैं वहाँ से अपने घर आया और फिर मैंने सना से दूर रहने का फैसला कर लिया।”

11 लाख रुपए भी वसूले गए

दीपक के खिलाफ प्रताड़ना यहीं नहीं रूका। उससे लगातार वसूली की जाती रही। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, “सना और उसकी माँ मेरे घर आए और पैसे की माँग करते हुए धमकी दी कि हम दीपक का वीडियो वायरल करेंगे। दीपक के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज करेंगे और उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे। मैंने उसे समय-समय पर 7 लाख रुपए नकद और 4 लाख रुपए ऑनलाइन दिए। मैंने कुल 11 लाख रुपए भेजे, लेकिन उन्होंने मुझसे 25 लाख रुपए की माँग की। इसके बाद मैंने उन्हें मना कर दिया, क्योंकि उस समय मेरे पास पैसे नहीं थे।”
उन्होंने आगे कहा, “तब सना ने मेरे खिलाफ 29-09-2021 को एमआईडीसी सिडको थाने में शिकायत दर्ज कराई। IPC की धारा 354 के तहत मामला दर्ज कराया है। मामला दर्ज करने के बाद सना ने मुझे फोन किया और कहा कि मैंने तुमसे कहा था। तुमने मेरी बात नहीं मानी। मेरे अम्मी-अब्बू तुम्हारे खिलाफ मामला दर्ज कराया है, लेकिन मैं सँभाल लूँगी। उसके बाद 19-12-2021 को मैं सना और उसके माता-पिता से जिला सत्र न्यायालय में मिला और उस समय उन्होंने कहा कि 25 लाख दो या इस्लाम स्वीकार करो, फिर हम केस वापस ले लेंगे।”

जाकिर नाइक का वीडियो दिखाया, जातिसूचक गालियाँ दीं

दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा, “12-08-2022 को सना शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मुझे क्लाउड कैंपस में आने के लिए मजबूर किया। वहाँ उन्होंने मुझे एक प्रोजेक्टर पर मुस्लिम धर्मगुरु जाकिर नाइक के वीडियो दिखाए और मुझे नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया।”
दीपक ने कहा, “अगर मैं उनका विरोध करता तो वे मुझे पीटते और जातिसूचक गालियाँ देते। उन्होंने कहा कि तुम महार जाति के हो। महार जाति नीची जाति है। तुम लोग गंदगी खाने वाले लोग हो। तुम महार नहीं, बल्कि वेश्या समुदाय से हो। वे निचले स्तर पर जाकर मुझे जातिवादी अपमान किया।”

AIMIM सांसद जलील कर रहा मदद

संभाजीनगर मुस्लिम बहुल सीट है। AIMIM नेता इम्तियाज जलील इस सीट से लोकसभा सांसद हैं। मुस्लिम सांसद स्थानीय मुस्लिमों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। इस मामले में उनका नाम इस्लामवादियों के प्रमुख संरक्षक के तौर पर सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि जलील ने दलित जाति के लोगों के सहारे अपनी सीट जीती है, लेकिन अब उन पर एक दलित व्यक्ति को प्रताड़ित करने वाले इस्लामवादियों को बचाने का आरोप लगाया गया है।
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा है, “20-08-2022 को दोपहर 2.00 बजे नामित व्यक्तियों ने मुझे पैठण गेट के पास एक कार में अपने साथ बैठने के लिए मजबूर किया और मुझे सत्यविष्णु अस्पताल रोड पर ‘क्लाउड कैंपस’ के पास ले गए। रोजाबाग इलाके में सांसद इम्तियाज जलील का घर है। वहाँ सांसद इम्तियाज जलील की मौजूदगी में उन्होंने मुझे एक हॉल में बंद कर दिया।”
दीपक ने बताया, “उसके बाद उनके अंगरक्षकों ने मेरे साथ मारपीट की और नामजद लोगों ने रुपए छीन लिए। मेरी ओर से 1,50,000 नकद, एक लैपटॉप और एक प्लस कंपनी का मोबाइल फोन। मुझे वहां पीटा गया, उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी दी और पैसे की माँग की। इसके साथ ही मुझे जातिवादी गालियाँ दीं। यह सब पिछले दो साल से चल रहा है।”
दीपक ने बताया कि इन सबकी शिकायतें उन्होंने पुलिस से कीं। उन्होंने सीपी कार्यालय को कई शिकायतें भेजी, लेकिन किसी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। दीपक सोनवणे और उनके साथियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्या सीपी ऑफिस से ही कोई लिंक है? यह किसके इशारे पर किया गया?”