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‘कितना भी सर्वे कराओ कोई मस्जिद नहीं देंगे, इंशाअल्लाह सड़कों पर होगी लड़ाई’: ज्ञानवापी पर मौलाना तौकीर रज़ा का ऐलान, सुप्रीम कोर्ट को बताया ‘बेईमान’

मौलाना तौकीर रज़ा ने अब किसी भी मस्जिद पर कोई भी समझौता न करने का एलान किया (चित्र साभार- X/@KhanUsama78255)
अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात मौलाना तौकीर रज़ा ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। तौकीर रज़ा ने ज्ञानवापी के लिए सड़कों पर लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। मथुरा और काशी मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वो अब कोई मस्जिद देने को तैयार नहीं हैं भले ही कोई कितना भी सर्वे क्यों न करा ले। उन्होंने राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी बेईमानी बताया। तौकीर ने यह बयान सोमवार (18 दिसंबर, 2023) को दिल्ली में दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 दिसंबर, 2023 को दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब हॉल में मुस्लिम पंचायत आयोजित की गई थी। यह पंचायत इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) ने बुलाई गई थी। इसी आयोजन में बोलते हुए तौकीर ने अपनी आस्था का हवाला देते हुए कहा, “बाबरी मस्जिद के बाद अब बस। हमने बाबरी को सब्र किया है ज्ञानवापी पर सब्र नहीं करेंगे। इंशाअल्लाह यह लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी।” वकील महमूद प्राचा को मंच पर बुलाते हुए तौकीर ने उन्हें कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाला बताया और खुद अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर उतरने का ऐलान किया। 

तौकीर शायद यह भूल रहे है कि ज्ञानवापी के पीछे 30,000+ की लम्बी सूची है, जिन्हे मुग़ल आतताइयों ने मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान में बदल दिया था, कब तक बेगुनाहों को भड़काते रहोगे? अभी 4/5 मुद्दे और सुलझने दो, फिर आम मुसलमान इनके भड़काऊ बयानों से दूरी बनाएंगे और इन्हीं से पूछेंगे कि 'बताओ सच्चाई क्या है?' 'क्या इस्लाम किसी विवादित जगह पर नमाज़ अदा करने की इजाजत देता है?' नूपुर शर्मा विवाद में कुछ चैनलों पर कुरान, हदीसों और शरीयत खुलकर सामने आने पर किसी की 'सर तन से जुदा' की आवाज़ नहीं उठी। क्यों? क्योकि बेपर्दा करने वाले मुसलमान ही थे और मौलाना वातानुकूलित कमरों में बैठने के बावजूद पसीने पोछने पर लताड़ पड़ती, कि A C में बैठकर भी पसीना क्यों आ रहा है? क्यों बेगुनाहों को गुमराह किये हुए हो। उस समय के देखिए Jaipur Dialogue, Sach, News Nation पर 'इस्लाम क्या कहता है' आदि कई चैनल है, जिन पर सब कुछ खुलकर जगजाहिर हो गया।      

आखिर सच्चाई से क्यों पीछे भाग रहे हो? कब तक झूठ और फरेब पर अपनी दुकानदारी चलाते रहोगे? 

मौलाना तौकीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें दिखाना है कि वो बर्दाश्त नहीं करेंगे। तौकीर ने इसी भाषण में अयोध्या के विवादित ढाँचे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अब हम ये कहते हैं कि हमारी आस्था कोर्ट से ऊपर है क्योंकि हम एक बार अदालत की बेईमानी देख चुके हैं।” तौकीर का यह भी कहना है कि बाबरी मस्जिद पर मुस्लिमों के सब्र के बदले उनको बुजदिल समझा गया। उसने उकसाते हुए कहा कि अगर लोग बेजार नहीं हुए तो बाबरी की तरह ज्ञानवापी भी छीन ली जाएगी।

तौकीर ने आगे बताया कि ज्ञानवापी के बाद मुस्लिमों से मथुरा और बदायूँ की मस्जिदें छीनी जाएँगी। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जामा मस्जिद पर भी हमला बोला जाएगा। बकौल तौकीर कहीं तो मुस्लिमों को खड़े हो कर अपनी बात रखनी होगी। अंत में अपने अनुभव का हवाला देते हुए तौकीर ने बताया कि वो महसूस कर रहे हैं कि सभा में मौजूद लोगों के लिए ये तक़रीर नहीं बल्कि तकलीफ का समय है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी पर ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति अपनाने का भी आरोप लगा।

मौलाना तौकीर ने केंद्र के साथ उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों का खुलेआम एनकाउंटर हो रहा है और कानून का राज खत्म हो चुका है। बकौल तौकीर तो सत्ता में हिस्सेदारी चाहते हैं न कि मोहताजी। मौलाना तौकीर ने आगे बताया कि कॉन्ग्रेस और भाजपा की सोच एक जैसी ही है।



जमाती झगड़े पर केरल हाई कोर्ट : मस्जिद में नमाज पढ़ने और कब्रिस्तान में दफनाने से नहीं रोक सकते

फोटो साभार: लॉबिट
हिन्दुओं को जातिवाद के नाम पर विभाजित कर गन्दी सियासत करने वालों को केरल हाई कोर्ट के निर्णय को गंभीरता से देखना चाहिए। यह निर्णय है आंखें खोलने का यानि हिन्दुओं को जातियों में बाँटने वाले यह नहीं देख रहे कि इतनी जातियां होने के बावजूद मुसलमान सिर्फ इस्लाम के नाम पर एक हैं, वरना नफरत इतनी की दूसरे की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने और कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़नाने के लिए कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, लालू यादव, मायावती, चंद्रशेखर "रावण", राजभर और चिराग पासवान आदि जैसे जाति के नाम पर पार्टियां बनाकर अपना कल्याण करने वालों को शर्म आनी चाहिए कि जिनकी वोटों की खातिर हिन्दुओं को जाति के नाम बांट गन्दी सियासत करते हो, उनमें इतने मन-मुटाव होने के बावजूद इस्लाम के नाम पर एक हैं। 
केरल हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि मुस्लिमों की कोई भी जमात, किसी भी मस्जिद में नमाज पढ़ सकती है और किसी भी कब्रिस्तान में लाशों को दफना सकता है। ऐसा करने से कोई उन्हें रोक नहीं सकता।

न्यायमूर्ति एसवी भट्टी और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की खंडपीठ ने यह फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के एक मामले में सुनवाई के दौरान दी। अदालत एर्नाकुलम में वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा जारी एक आदेश के खिलाफ जमात द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

ट्रिब्यूनल (तत्काल में प्रतिवादी) के समक्ष मूल मुकदमे में वादी उक्त जमात (जमा-आठ) के सदस्य थे, लेकिन केरल नदावुथुल मुजाहिदीन संप्रदाय द्वारा आयोजित एक धार्मिक प्रवचन में भाग लेने के कारण उन्हें बहिष्कृत कर दिया गया था।

इसके बाद ट्रिब्यूनल ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि वादी को समान रूप से प्रतिवादी की मस्जिद में नमाज पढ़ने और परिवार के सदस्यों के लाशों को कब्रिस्तान में दफनाने का अधिकार है। इसके बाद इस मामले को हाईकोर्ट में लाया गया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “मस्जिद इबादत की जगह होती है और हर मुस्लिम मस्जिद में नमाज अता करता है। पहले प्रतिवादी (जामा-आठ) को जमात के सदस्य या किसी अन्य मुस्लिम को नमाज़ पढ़ने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है। लाशों को दफनाना भी एक नागरिक अधिकार है। वादी अनुसूची संपत्ति में स्थित कब्रिस्तान एक सार्वजनिक कब्रिस्तान है। प्रत्येक मुस्लिम नागरिक अधिकारों के अनुसार सभ्य तरीके से दफन होने का हकदार है।”

पुनरीक्षण याचिकाकर्ता की ओर से उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए अधिवक्ता पी जयराम ने कहा कि जमात और मुजाहिदीन संप्रदाय की धार्मिक मान्यताएँ और प्रथाएँ कई मामलों में भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ेगी। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 15 और 25 उल्लंघन भी बताया।

दूसरी ओर, वादी की ओर से पेश अधिवक्ता अब्दुल अज़ीज़ ने तर्क दिया कि वादी को नमाज़ अदा करने या अपने मृतकों को दफनाने से रोकना, केवल इसलिए कि वे मुजाहिदीन संप्रदाय के एक तकरीर में शामिल हुए थे, अवैध था।