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मध्य प्रदेश : दमोह के 'गंगा जमुना स्कूल' ने हिंदू छात्राओं को पहनाया हिजाब, वहाँ महिला शिक्षकों का भी बदला धर्म ; यादव हुई खान, जैन बनी तबस्सुम, श्रीवास्तव कहलाती है बेगम…

मध्य प्रदेश के दमोह स्थित गंगा जमुना स्कूल में प्रिंसिपल समेत 3 शिक्षिकाओं के इस्लामी धर्मांतरण की बात सामने आई
मध्य प्रदेश के दमोह में एक पोस्टर में हिन्दू छात्राओं को भी हिजाब में दिखाया गया था। ‘गंगा जमुना स्कूल’ से जुड़े इस प्रकरण को लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आदेश के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य बाल आयोग की टीम के साथ-साथ जिले के डीएम को भी जाँच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्कूल में मजहबी शिक्षा से लेकर धर्मांतरण तक की घटनाएँ हो चुकी हैं।

इस्लामी धर्मांतरण के सबूत भी जाँच टीम को मिले हैं। राज्य बाल आयोग ने तहकीकात के क्रम में जानकारी दी है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत 3 महिला शिक्षिकाओं ने इस्लाम अपना लिया। प्रिंसिपल का नाम अफसरा बेगम है, जबकि उनके पिता का सरनेम श्रीवास्तव है। इसी तरह तबस्सुम नाम की एक शिक्षिका के बारे में पता चला कि पहले वो जैन थी। इसी तरह यादव सरनेम वाली एक महिला शिक्षिका भी अब नाम में ‘खान’ लगाती है।

अब इन शिक्षिकाओं से पूछताछ की जा रही है। बता दें कि ये मामला तब खुला था, जब स्कूल की 18 विद्यार्थियों की तस्वीर एक बोर्ड पर लगाई गई थी। इन्होंने 12वीं की परीक्षा टॉप की थी। इनमें हिन्दू छात्रों को भी हिजाब में दिखाया गया था। पहले स्कूल ने इसे स्कार्फ बता कर टालमटोल की। अब इस बात की जाँच चल रही है कि कहीं स्कूल में नौकरी के लिए मुस्लिम बनने का दबाव तो नहीं डाला जाता था। जाँच में गैर-मुस्लिम बच्चों को कुरान की आयतें पढ़वाए जाने की बात भी सामने आई है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने भी कहा है कि इस स्कूल ने ‘लव जिहाद’ का साम्राज्य खड़ा किया। स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। शर्मा ने कहा कि हमारी बेटियों को जबरन हिजाब पहनने के लिए बाध्य किया गया। स्कूल चलाने वाले इदरीस, जलील और मुश्ताक के टेरर फंडिग कनेक्शन की जाँच का भी उन्होंने आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जबलपुर कोर्ट में NIA द्वारा दबोचा गया एक वकील और कटनी का एक मुस्लिम व्यक्ति भी इनके संपर्क में था।

वहीं भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भी इस मामले को लेकर कहा कि विधर्मी अपना कार्य करते रहते हैं, धर्म पर चलने वाले लोग जब शिथिल पड़ने लगते हैं तो अधर्म बढ़ता चला जाता है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों को देवस्थान कहा गया है, ऐसे में जिहादी मानसिकता वाली इस कुकृत्य को धिक्कार है। स्कूल के दस्तावेजों से पता चला है कि धर्मांतरण के बाद इन शिक्षिकाओं को नौकरी में परमानेंट किया गया। प्रिंसिपल का सरनेम ‘खरे’ था, लेकिन फिर वो ‘खान’ लगाने लगी।