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महाराष्ट्र : ‘मुस्लिम प्रेमिका और घरवालों ने जबरन खतना कर वसूले 11 लाख रूपए’: दलित युवक पर इस्लाम अपनाने का दबाव, AIMIM सांसद जलील पर भी आरोप

                                        दीपक सोनवणे और उनके साथी (फोटो साभार: सोशल मीडिया)
"Love Jehad" की शुरुआत 80 दशक में केरल से हुई थी, तब किसी भी पार्टी ने तुष्टिकरण के चलते इसे गंभीरता से नहीं लिया और जनता को 'गंगा-जमुना तहजीब' और संविधान की दुहाई देकर गुमराह किया जाता रहा है। जहाँ तक हिन्दू-मुस्लिम नारों की बात है, किसी में मुस्लिम ठेकेदारों से पूछने का साहस नहीं की हिन्दुओं को जातियों के नाम पर बाँटने से पहले बताओं क्या तुम एक हो, हिन्दुओं में कोई भी जाति हो एक ही मंदिर में जाते हैं और अंतिम संस्कार भी एक ही शमशान घाट पर होता है, जबकि मुस्लिम समाज में स्थिति एकदम विपरीत है। शिया हो, सुन्नी हो, बेरलवी, अहमदी, अथवा वहाबी आदि अनेकों जातियां है जो अपनी अपनी मस्जिदों नमाज पढ़ सकते हैं, शादी कर सकते हैं,और अपने अपने कब्रिस्तानों में मुर्दा दफना सकते हैं, किसी में इसके विरुद्ध जाने अथवा इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का साहस नहीं।  

नवंबर 18 को News18 पर अमिश देवगन के शो "आर पार" पर मौलानाओं का दोगलापन उस समय सामने जब शोएब जमई ने मुग़ल बाबर को हिन्दुस्थान का जीजा बताने पर चर्चा में शामिल सुभिहि  खान ने जवाब देते अपने पति का नाम लेकर कहा कि इस हिसाब से 'मेरे पति तुम्हारे जीजा है', तुरंत शो में शामिल तीनो तथाकथित मुसलमानो ने कहा 'हम तुम्हे मुसलमान ही नहीं मानते।' इस  मुद्दे पर बहस बहुत गरमा गयी। हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई की बात भी बेकार साबित। केवल इन्ही शब्दों ने उन मौलानाओं को बेनकाब भी कर दिया जो टीवी पर आकर चाशनी में डूबी बातें करते हैं, लेकिन टीवी से बाहर कहीं अधिक जहरीले हैं। हर देशप्रेमी हिन्दू-मुसलमान को ऐसे मौलानाओं से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। सरकार को ऐसे दोगलों की गंभीरता से जाँच करवानी चाहिए। बातें और काम इनके हिसाब से होता रहे तो सेकुलरिज्म वरना फिरकापरस्ती तो है ही, क्यों दोगलों? हिन्दू से शादी कर सुभिहि क्यों मुसलमान नहीं? अब इसे तुम्हारा दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए। 

टीवी पर चर्चाओं में ऐसे दोगले मौलानाओं को बेनकाब करने एक्स-मुस्लिमों को भी बुलाया जाए, जैसे News Nation अपने शो 'इस्लाम क्या कहता है' में बुलाते हैं। मौलाना या तो पसीना पोंछते नज़र आते हैं या चर्चा छोड़कर जाते देखे जाते हैं। 

जहाँ तक हिन्दू-मुस्लिम के बीच शादी की बात है, ऐसे अनेक किस्से हैं जहाँ शादी से पहले या बाद में धर्म परिवर्तन की बात ही नहीं हुई। केवल एक उदाहरण देता हूँ: जनाब राईस अहमद साहब का, जो सिनेमा घरों पर फिल्मों के परदे बनाते थे, हिन्दू लड़की से प्यार हो गया, अपनी प्रेमिका पत्नी का धर्म नहीं छुड़वाया, एक छत के नीचे नमाज भी हो रही है और पूजा भी, चार बच्चे हुए दो के नाम हिन्दू और दो के मुस्लिम। और मजे की बात, 1975/76 में बहुचर्चित फिल्म आयी "जय संतोषी माँ", उस फिल्म के परदे बनाने का ठेका उन्ही को मिला था। जिस सिनेमा हॉल पर यह फिल्म का प्रदर्शन हो रहा होता था, वहां सिनेमा घर के बाहर हार-फूल बिकते थे, लोग स्क्रीन पर हार-फूल ही नहीं, पैसे भी चढ़ाते थे। हर शो में हाल में लाइन मैन और सफाई कर्मचारियों को कम से कम 30 रूपए की कमाई होती थी। खैर, जनाब राईस साहब ने अपनी हिन्दू पत्नी के कहने पर एक बहुत ही खूबसूरत मंदिर बनाया जो एक होने की वजह से एक ही सिनेमा घर पर रखा जा सकता था। फिल्म वितरक ने माँगा नहीं दिया, पिताश्री एम बी एल निगम ने माँगा नहीं दिया स्पष्ट शब्दों में कहा यह मंदिर घर जाएगा, इसे अपनी पत्नी के कहने पर बनाया है। कई बार मेरे निवास स्थान पर भी आए। दरिया गंज में उनका स्टूडियो था। ये होता है प्रेम और जो आजकल चल रहा है इसे हिन्दुओं को अपने मकड़जाल में फ़ांस इस्लामीकरण करना। खैर, देखिये मौलानाओं का दोगलापन। वीडियो:

 

श्रद्धा वॉकर की हत्या (Shraddha Walker Murder Case) से पूरा देश सन्न है। इसी बीच शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पीड़ित एक दलित लड़का है। मुस्लिम प्रेमिका होने के कारण इस युवक को तरह-तरह की प्रताड़ना दी जा रही है। इसमें उसकी प्रेमिका का भी हाथ है। इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक नेता का नाम भी सामने आया है।

दलित युवक दीपक सोनवणे महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) में पढ़ाई करता है। यहाँ उसकी एक मुस्लिम लड़की सना फरहीन शाहमीर शेख से दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई। अब दीपक को सना के परिवार से लगातार प्रताड़ना मिल रही है और उससे जबरन वसूली की जा रही है। यहाँ तक कि उसका जबरन खतना भी कर दिया गया।

दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना दर्द साझा किया। दीपक ने बताया कि उसकी मुस्लिम प्रेमिका के परिवार में इस्लामवादियों को इस मामले में हर कदम पर प्रभावशाली स्थानीय सांसद इम्तियाज जलील का लगातार समर्थन मिल रहा है। इम्तियाज जलील AIMIM का सांसद हैं।

दीपक सोनवणे ने अपनी गर्लफ्रेंड सना फरहीन शाहमीर शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस आयुक्त, संभाजीनगर को संबोधित शिकायत में शाहमीर शमशुद्दीन शेख, ख्वाजा सैय्यद, शबाना बेगम शेख, साजिया सदफ शाहमीर शेख, AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील और उनके अंगरक्षकों के नाम हैं।

कॉलेज में शुरू हुआ लव अफेयर

दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर के मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सना उसकी सहपाठी थी। दोनों पहले दोस्त बने और फिर दोनों के बीच प्यार हो गया। दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में कहा, “सना शेख और मैं एमआईटी कॉलेज में साल 2018 से हम सहपाठी थे। सना और मैं परिचित हो गए। उसके बाद हमारा यह प्रेम प्रसंग हुआ। सना ने मुझे शादी का लालच दिया और कहा, ‘मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ। तुम इस्लाम कबूल कर लो। नमाज पढ़ो, कुरान पढ़ो’।”
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे लिखा, “मैंने उसे माता-पिता (अब्बू शाहमीर शमशुद्दीन शेख और अम्मी शबाना बेगम शेख) से यह बात कही। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वे अपनी बेटी को ठीक से समझाएँगे और मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए।”

प्रताड़ना की हुई शुरुआत

दीपक सोनवणे ने बताया कि उन्हें किस तरह की यातनाओं से होकर गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा, “मार्च 2021 में उसके अम्मी-अब्बू, चाचा और बहन ने मुझे गुलमंडी इलाके में मिलने के लिए बुलाया। जब मैं वहाँ गया तो उन्होंने मुझे अपनी बाइक वहीं खड़ी करने को कहा और कहा कि ‘हम सभी को कहीं बाहर जाने की जरूरत है। जैसे ही मैंने उन्हें मना किया, ख्वाजा सैय्यद और शाहमीर शेख मुझे जबरन अपने घर ले गए। वहां उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया।”
दीपक सोनवणे ने आगे बताया, “शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मेरे कपड़े उतार दिए। शबाना बेगम और साजिया सदफ ने मेरे हाथ-पैर बाँधकर मेरे मुँह में कपड़ा डाल दिया। इसके बाद शाहमीर शेख ने मेरे शरीर पर पेशाब कर दिया। इसका वीडियो सना और शाहमीर शेख के मोबाइल पर शूट किया गया था। इसके बाद उन्होंने मुझे इस्लाम में धर्मांतरित करने का दबाव बनाने के लिए पीटना शुरू कर दिया।”

जबरन कराया खतना

दीपक सोनवणे ने आगे कहा, “उसके बाद सना और उसकी माँ एवं बहन मुझे सिटी चौक थाने के पीछे की गली में एक अस्पताल ले गए और कहा कि हम यहाँ तुम्हें मुस्लिम बनने के लिए लाए हैं। हम यहाँ तुम्हारा खतना करा रहे हैं। अगर आप यहाँ किसी से कुछ कहोगे तो हम तुम्हारा वीडियो वायरल कर देंगे और समाज में तुम्हें बदनाम करेंगे।”
दीपक ने बताया कि इस दौरान आरोपितों ने उसे और उसके परिवार को मारने की धमकी भी दी। दीपक ने आगे कहा, “हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भी मार डालेंगे। उनकी बात सुनकर मैं बहुत डरा हुआ था, क्योंकि मेरी और मेरे परिवार की जान खतरे में थी। अगर मेरा वीडियो वायरल हुआ तो मैं बदनाम हो जाऊँगा।”
दीपक ने आगे बताया, “उन्होंने इसका फायदा उठाया और मेरा खतना कार दिया। इसके बाद मुझसे कहा कि तुम अब एक सच्चे मुसलमान हो। अगर तुमने किसी को बताया कि क्या हुआ है तो याद रखना, तुम्हें इसका पछतावा होगा। इसके बाद वे लोग मुझे वापस गुलमंडी ले आए। मैं वहाँ से अपने घर आया और फिर मैंने सना से दूर रहने का फैसला कर लिया।”

11 लाख रुपए भी वसूले गए

दीपक के खिलाफ प्रताड़ना यहीं नहीं रूका। उससे लगातार वसूली की जाती रही। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, “सना और उसकी माँ मेरे घर आए और पैसे की माँग करते हुए धमकी दी कि हम दीपक का वीडियो वायरल करेंगे। दीपक के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज करेंगे और उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे। मैंने उसे समय-समय पर 7 लाख रुपए नकद और 4 लाख रुपए ऑनलाइन दिए। मैंने कुल 11 लाख रुपए भेजे, लेकिन उन्होंने मुझसे 25 लाख रुपए की माँग की। इसके बाद मैंने उन्हें मना कर दिया, क्योंकि उस समय मेरे पास पैसे नहीं थे।”
उन्होंने आगे कहा, “तब सना ने मेरे खिलाफ 29-09-2021 को एमआईडीसी सिडको थाने में शिकायत दर्ज कराई। IPC की धारा 354 के तहत मामला दर्ज कराया है। मामला दर्ज करने के बाद सना ने मुझे फोन किया और कहा कि मैंने तुमसे कहा था। तुमने मेरी बात नहीं मानी। मेरे अम्मी-अब्बू तुम्हारे खिलाफ मामला दर्ज कराया है, लेकिन मैं सँभाल लूँगी। उसके बाद 19-12-2021 को मैं सना और उसके माता-पिता से जिला सत्र न्यायालय में मिला और उस समय उन्होंने कहा कि 25 लाख दो या इस्लाम स्वीकार करो, फिर हम केस वापस ले लेंगे।”

जाकिर नाइक का वीडियो दिखाया, जातिसूचक गालियाँ दीं

दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा, “12-08-2022 को सना शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मुझे क्लाउड कैंपस में आने के लिए मजबूर किया। वहाँ उन्होंने मुझे एक प्रोजेक्टर पर मुस्लिम धर्मगुरु जाकिर नाइक के वीडियो दिखाए और मुझे नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया।”
दीपक ने कहा, “अगर मैं उनका विरोध करता तो वे मुझे पीटते और जातिसूचक गालियाँ देते। उन्होंने कहा कि तुम महार जाति के हो। महार जाति नीची जाति है। तुम लोग गंदगी खाने वाले लोग हो। तुम महार नहीं, बल्कि वेश्या समुदाय से हो। वे निचले स्तर पर जाकर मुझे जातिवादी अपमान किया।”

AIMIM सांसद जलील कर रहा मदद

संभाजीनगर मुस्लिम बहुल सीट है। AIMIM नेता इम्तियाज जलील इस सीट से लोकसभा सांसद हैं। मुस्लिम सांसद स्थानीय मुस्लिमों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। इस मामले में उनका नाम इस्लामवादियों के प्रमुख संरक्षक के तौर पर सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि जलील ने दलित जाति के लोगों के सहारे अपनी सीट जीती है, लेकिन अब उन पर एक दलित व्यक्ति को प्रताड़ित करने वाले इस्लामवादियों को बचाने का आरोप लगाया गया है।
दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा है, “20-08-2022 को दोपहर 2.00 बजे नामित व्यक्तियों ने मुझे पैठण गेट के पास एक कार में अपने साथ बैठने के लिए मजबूर किया और मुझे सत्यविष्णु अस्पताल रोड पर ‘क्लाउड कैंपस’ के पास ले गए। रोजाबाग इलाके में सांसद इम्तियाज जलील का घर है। वहाँ सांसद इम्तियाज जलील की मौजूदगी में उन्होंने मुझे एक हॉल में बंद कर दिया।”
दीपक ने बताया, “उसके बाद उनके अंगरक्षकों ने मेरे साथ मारपीट की और नामजद लोगों ने रुपए छीन लिए। मेरी ओर से 1,50,000 नकद, एक लैपटॉप और एक प्लस कंपनी का मोबाइल फोन। मुझे वहां पीटा गया, उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी दी और पैसे की माँग की। इसके साथ ही मुझे जातिवादी गालियाँ दीं। यह सब पिछले दो साल से चल रहा है।”
दीपक ने बताया कि इन सबकी शिकायतें उन्होंने पुलिस से कीं। उन्होंने सीपी कार्यालय को कई शिकायतें भेजी, लेकिन किसी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। दीपक सोनवणे और उनके साथियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्या सीपी ऑफिस से ही कोई लिंक है? यह किसके इशारे पर किया गया?”

परमादरणीय श्री जाकिर नाइक साहब! जन्नत में मर्दों को तो हूरें मिल जाती हैं, औरतों को क्या मिलता है?


                                    जन्नत में मर्दों को तो हूरें मिल जाती हैं, औरतों को क्या मिलता है?
परमादरणीय जनाब-ए-आला स्कॉलर श्री जाकिर नाइक साहब,

इस्लाम और दुनिया के तमाम धर्मों के बारे में आपके ज्ञान को देखकर चकित हूँ, लेकिन एक हजार मुद्दों पर जानकारी लेने में मेरी दिलचस्पी कम है। मैं तो बस जन्नत की हूरों के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहती हूँ। आशा है कि जैसे आप भारत से भाग गए हैं, वैसे मेरे इन चंद सवालों से नही भागेंगे।

  1. मैंने सुना है कि मजहबी पुरुष जब जन्नत पहुँचते हैं, तो उन्हें 72 हूरें मिलती हैं, लेकिन जब मजहबी महिलाएँ जन्नत पहुँचती हैं, तो उन्हें कौन मिलता है और जो भी मिलते हैं, उनकी संख्या कितनी होती है?
  2. कहीं ऐसा तो नहीं कि जैसे धरती पर महिलाओं से भेदभाव किया जाता है, वैसे ही जन्नत में भी उनकी अनदेखी की जाती है? वहाँ पुरुष तो हूरों के साथ मगन रहते होंगे, पर महिलाएँ अपना वक्त कैसे काटती हैं?
  3. जन्नत पहुँचे सच्चे मुसलमानों से मिलने के लिए हूरें बुरके में आती हैं या बिकनी में? दुपट्टे सलवार में आती हैं या हॉट पैंट में? 
  4. कृपया हूरों के नैन-नक्श, पहनावे-ओढाबे, खान-पान, रहन-सहन इत्यादि के बारे में विस्तार से बताएँ।
  5. हूरें कौन-सी भाषा बोलती हैं? क्या उन्हें धरती पर बोली जाने वाली भाषाओं की शिक्षा देने के लिए जन्नत में कोई यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है? जब धरती से अलग-अलग भाषाएँ और बोलियाँ बोलने वाले लोग जन्नत पहुँचते होंगे, तो क्या उन्हें उन्हीं की भाषा और बोलियों में बात करने वाली हूरें सप्लाई की जाती हैं?
  6. या फिर वे सभी हूरें कोई एक ही भाषा बोलती हैं और धरती से पहुँचने वाले लोगों के लिए ही वहाँ एक मदरसा स्थापित कर दिया गया है, जहाँ हूरों से मिलाने से पहले उन्हें उस भाषा की मुकम्मल तालीम दी जाती है?
  7. यहाँ से जन्नत जाने वाले लोगों को फौरन हूरें मुहैया करा दी जाती हैं या फिर वहाँ भी उन्हें पहले आयतों रवायतों इत्यादि की किसी जाँच से गुजरना पड़ता है?
  8. हूरों के मामले में जन्नत के रूल्स और रेगुलेशन्स क्या हैं? क्या वे सिर्फ इस्लाम मानने वालों को ही सप्लाई की जाती हैं या फिर अन्य धर्मों के अनुयायियों को भी मुहैया कराई जाती हैं?
  9. कहीं ऐसा तो नहीं कि जैसे धरती पर सभी धर्मों के लोगों के रहने की व्यवस्था है, जन्नत में वैसी व्यवस्था नहीं है और वहाँ सिर्फ इस्लाम मानने वालों की ही एंट्री हो पाती है? इसलिए हूरों का लाभ भी एक्सक्लूसिवली इस्लाम के अनुयायियों को ही मिल पाता है?
  10. अगर हाँ, तो क्या हूरों वाले जन्नत की स्थापना कितने साल पहले हुई मानी जा सकती है? और क्या यह माना जा सकता है कि सभी धर्मों के देवी-देवताओं ने अलग-अलग जन्नतें बसा रखी हैं, जहाँ उनके अनुयायियों को अलग-अलग तरह की सुविधाएँ मुहैया कराई जाती हैं? या फिर सिर्फ़ इस्लाम वाला जन्नत ही सच्चा है और बाकी धर्मों में जन्नत के झूठे दावे किए गए हैं?
  11. धरती के मजहबी पुरुषों के लिए हूरों वाला यह जन्नत कहाँ स्थापित है? कृपया इसकी सही-सही लोकेशन बताएँ और यह भी बताएँ कि वहाँ से आप लोगों का कनेक्शन किस प्रकार जुड़ा है? इधर हाल-फिलहाल आपने वहाँ से कोई संवाद कायम किया है या फिर बिना संवाद और कनेक्शन के ही डींगें हाँकते रहते हैं?
  12. क्या धरती पर बढ़ती आबादी के हिसाब से जन्नत में हूरों की सप्लाई भी बढ़ती जाती है? पुरानी हूरों और नई हूरों को मिलाकर उनकी आबादी का एक मुकम्मल आँकड़ा पेश करें। यह भी बताएँ कि इन हूरों का लाभ अभी कुल कितने मजहबी पुरुषों को मिल रहा है? और आने वाले दस-बीस-तीस सालों में वहाँ और कितने सच्चे मुसलमानों की जगहें खाली है?
  13. हूरों की इतनी बड़ी आबादी के साथ पुरुषों को रखने के लिए जन्नत में क्या इंतजाम किए गए हैं? कोठियाँ बनी हैं, मल्टीस्टोरीज़ बिल्डिंगें बनी हैं या रेड लाइट एरिया जैसे इंतज़ाम किए गए हैं, जहाँ हूरों को छोटे-छोटे कमरों में रखा जाता है और धरती के सारे प्यासे मजहबी पुरुष बारी-बारी से वहाँ पहुँचते रहते हैं?
  14. अक्सर युद्ध और दंगे इत्यादि में जब एक साथ हजारों या लाखों लोग शहीद हो जाते हैं, तब जन्नत के दरवाज़े पर भगदड़ तो नहीं मच जाती होगी न? इतने लोगों की एक साथ जन्नत में एंट्री और सबको समय से हूरों की सप्लाई के क्या इंतजामात हैं?
  15. क्या कभी ऐसा भी होता होगा कि हूरों की सप्लाई कम होने की दशा में कुछ पुरुषों को 72 से कम हूरों के साथ ही संतोष करना पड़ता हो? ऐसी दशा में अपने हक से महरूम सच्चे मुसलमान क्या वहाँ फिर से कोई जेहाद छेड़ते होंगे?
  16. जन्नत में पुरुषों की सप्लाई तो धरती से होती है, पर हूरों की सप्लाई किस ग्रह, किस लोक, किस दुनिया से होती है?
  17. धरती पर तो कभी किसी चीज की कमी हो जाती है तो कभी किसी चीज की अधिकता हो जाती है। पर जन्नत में वे कौन-से मैन्यूफैक्चरर और सप्लायर हैं, जो हर पुरुष के लिए 72 हूरों की सप्लाई मेनटेन रख पाते हैं? कृपया जन्नत में हूरों के मैन्यूफैक्चरर और सप्लायर के बारे में विस्तार से बताएँ।
  18. मेरा ख्याल है कि जन्नत पहुँचे लोगों को 72 हूरें तो निःशुल्क ही मुहैया करा दी जाती होंगी, लेकिन अगर इन 72 के अलावा किसी 73वीं-74वीं पर उनका दिल ललचा जाए, तो वो क्या करें? क्या कुछ अतिरिक्त शुल्क इत्यादि के भुगतान से वे हूरें उन्हें दे दी जाएँगी या नहीं दी जाएँगी?
  19. अपनी-अपनी पसंद की हूरें हासिल करने के लिए जन्नत में भी जंग तो नहीं छिड़ जाती होंगी न?
  20. क्या जन्नत में हर व्यक्ति को समान संख्या में हूरें मुहैया कराई जाती हैं? पूछने का मतलब यह है जब आप जैसे बड़े ‘स्कॉलर’ वहाँ पहुँचेंगे, तो आपको भी 72 हूरें, और आपके मामूली फॉलोअर्स को भी 72 ही हूरें? यह कुछ नाइंसाफी नहीं हो जाएगी? इसी तरह, ओसामा बिन लादेन जैसे बड़े जेहादी को भी 72 हूरें और उसकी आर्मी में काम करने वाले एक छोटे जेहादी को भी 72 ही हूरें?
  21. क्या जन्नत पहुँचकर धरती के मजहबी पुरुष हूरों से संतान भी उत्पन्न करते हैं या फिर खाली टाइम पास की ही इजाजत है?
  22. जन्नत पहुँचने वाले मजहबी पुरुषों के लिए कोई कोड ऑफ कंडक्ट भी है क्या? जैसे एक बार आपने बताया था कि मजहबी पुरुष अगर अपनी बीवियों को पीटें, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। उसी तरह जन्नत पहुँचकर वे अगर हूरों की भी पिटाई कर दें, तो कोई दिक्कत तो नहीं न?
  23. धरती की बीवियों एवं जन्नत की हूरों में क्या अंतर है? जैसे बीवी से तीन बार तलाक तलाक बोलकर छुटकारा पा सकते हैं, वैसे ही अगर कोई हूर पसंद नहीं आए, या उससे मन भर जाए, तो क्या उससे भी कोई शब्द बोलकर अलग हुआ जा सकता है? अगर हाँ, तो उस शब्द के बारे में कृपया विस्तार से बताएँ।
  24. धरती के पुरुषों को तो जेहाद और काफिरों के कत्ल इत्यादि विभिन्न मजहबी कार्यों से कमाए ‘पुण्य’ के तौर पर 72 हूरें मिलती हैं, लेकिन उन 72 हूरों को किन पापों की सजा के तौर पर एक ही पुरुष को शेयर करने का अभिशाप मिलता है? क्या अपने पिछले जन्म में उन्होंने आयतों और रवायतों का सही ढंग से पालन नहीं किया होता है?
  25. क्या जन्नत पहुँचकर धरती के मजहबी पुरुष हूरों के साथ फुल टाइम मौज-मस्तियाँ ही किया करते हैं या फिर वहाँ भी किसी तरह के मजहबी और जेहादी कार्यों में हिस्सा लेते हैं?
  26. क्या मजहबी पुरुषों की तमाम गतिविधियों का अंतिम उद्देश्य अधिक से अधिक संख्या में हूरों अर्थात् खूबसूरत स्त्रियों को भोगना ही होता है?
  27. अंतिम सवाल। क्या संक्षेप में हूरों को मजहबी पुरुषों की ‘अनंतकालीन सेक्स स्लेव’ कहा जा सकता है?

स्कॉलर श्री परम आदरणीय जाकिर साहब, जैसा कि आप भी मानेंगे कि आज दुनिया के नौजवानों के मन में सबसे ज़्यादा सवाल, जिज्ञासाएँ और ख्वाहिशें हूरों को लेकर ही हैं, इसलिए आशा है कि आप मेरे इन सवालों के यथोचित जवाब देंगे। 

सादर शुक्रिया।

डिस्क्लेमर- यह पत्र किसी धर्म का मखौल उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि मजहब के नाम पर मासूम लोगों को गुमराह कर रहे कट्टरपंथियों की पोल खोलने के लिए लिखा गया है।(साभार)

जाकिर नाइक का भी ‘बाप’ है उसका बेटा : जन्म लेने वाला हर बच्चा मुसलमान ; महिलाएँ टाइट कपड़े न पहनें

फरीक जाकिर नाइक,इस्लाम
भारत में सेकुलरिज्म और गंगा-जमुना तहजीब का राग-अलापने वालों देख लो, ज़ाकिर नाइक का बेटा क्या बोल रहा है। आंखे खोलो और हिम्मत है तो मुंह में जमे दही को या तो थूक दो या फिर सटक कर इसकी बातों का जवाब दो। और नहीं जनता को जवाब दो कि यदि यही बात किसी हिन्दू साधु अथवा राजनीतिक नेता ने बोली होती, क्या तब भी इसी तरह खामोश रहते? पता नहीं कितने महिला संगठन भी सड़क पर आकर आसमान सिर पर उठा लिया होता। फरीक के बयान देने के इतने दिन बाद लिखने को मजबूर होना पड़ा। 
आखिर सेकुलरिज्म और गंगा-जमुनी तहजीब के नाम पर कब तक जनता को छला जाता रहेगा? या फिर आप सबको ये शब्द बोलने तो आते हैं, इनका अर्थ नहीं मालूम? कुछ तो गड़बड़ है। या फिर यही अर्थ निकाला जाए कि कुर्सी और तिजोरी की खातिर तुष्टिकरण ने बत्ती ही गुल कर दी है। और यदि यह सच है तो जनता को भी अपनी बत्ती गुल कर सेकुलरिज्म और गंगा-जमुनी तहजीब की लॉलीपॉप देकर तुम सबको अलग बैठा देना चाहिए। इस लॉलीपॉप को देने का काम हर देशप्रेमी और सामान अधिकार मानने वालों को ही करना पड़ेगा। 
किसी छद्दम सेक्युलरिस्ट में इस इस्लामिक उपदेशक से पलटके यह पूछने की हिम्मत नहीं कि "अगर जन्म लेने वाला हर बच्चा मुसलमान होता है, फिर मुसलमानी कर क्यों मुसलमान बनाया जाता है? इस उपदेशक के कथन पर 60 के दशक में निर्माता-निर्देशक बी.आर.चोपड़ा की फिल्म "धूल का फूल" का वह गीत "तू हिन्दू बनेगा या मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान ही बनेगा....." स्मरण होता है। यानि बाप तो बाप, बेटा सुभान अल्लाह, कथन को चरितार्थ कर मुस्लिमों में जहर फैला रहा है कि "बच्चा मुसलमान पैदा होता है, लेकिन बाद में उसका धर्म परिवर्तित कर उसे हिन्दू, सिख या फिर ईसाई बना दिया जाता है। अपने कौम की महिलाओं को क्या करना चाहिए या क्या नहीं पहनना चाहिए, उस बात से कोई मतलब नहीं, लेकिन यह कहना कि "जन्म लेने वाला हर बच्चा मुसलमान" क्या उचित है? इस बात को कहकर क्या सिद्ध करना चाहता है?
मलेशिया में जाकर छिपे इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के बारे में तो आपको पता है ही और साथ में उसके अजीबोगरीब बयान भी सामने आते रहते हैं, जिन्हें जायज ठहराने के लिए वो इस्लामी किताबों का हवाला देता है। अब हम आपको उसके बेटे फरीक जाकिर नाइक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने अब्बा के यूट्यूब पेज पर ही ज्ञान बाँचता है। कट्टरवाद के मामले में वो अपने अब्बा से भी दो कदम आगे है।
फरीक जाकिर नाइक का एक वीडियो है, जिसमें उससे पूछा जाता है कि महिलाओं को घर से बाहर निकल कर जॉब करने का अधिकार है या नहीं, जिसके जवाब में वो कहता है कि इस्लाम में पुरुष को ही घर में रोटी कमाने वाला माना गया है। उसने कहा कि निकाह के पहले पिता व भाई और निकाह के बाद शौहर व बच्चों का काम है कि महिलाओं का ध्यान रखे। उसने यहाँ तक दावा कर दिया कि महिलाओं को काम करने की जरूरत ही नहीं है।
उसने कहा कि महिलाओं को इस्लाम का कोई भी नियम तोड़े बिना ही जॉब करना चाहिए और हिजाब हमेशा पहनना चाहिए। उसने कहा कि महिलाओं की पूरी बॉडी कवर में होनी चाहिए और हाथों व आँखों के अलावा कुछ नहीं दिखना चाहिए, साथ ही टाइट कपड़े नहीं होने चाहिए और ऐसे भी नहीं होने चाहिए जिससे पुरुषों में आकर्षण की फीलिंग आए। साथ ही उसने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ काम नहीं करना चाहिए।
यदि इसी तरह की बात किसी हिन्दू साधु/संत ने कह दी होती, नेताओं ने तूफान ला दिया होता, मीडिया भी पीछे नहीं रहता, स्टूडियो में सज जाती चौपालें। लेकिन जब बात इस्लाम की हो, मुंह में दही जमाकर बैठ जाओ। 
साथ ही उसने कहा कि महिलाओं को ‘हराम’ जॉब्स नहीं करने चाहिए, जैसे शराब सर्व करना, या फिर डैन्सिंग, सिंगइंग या अभिनय करना, क्योंकि इन जॉब्स में वो हिजाब नहीं पहन पाएँगी। उसने कहा कि महिलाओं के मेन फोकस ये रहना चाहिए कि एक अच्छी पत्नी के रूप में वो क्या कर सकती है, या बच्चों को लेकर। उसने महिलाओं के लिए शिक्षक और काउंसलिंग व इस्लामी शिक्षा देने को महिलाओं के लिए अच्छा जॉब बताया।
एक अन्य वीडियो में वो बताता है कि भाषा के मामले में काफिर का अर्थ होता है छिपने वाला, जबकि इस्लाम में काफिर वो है जो इस्लाम को स्वीकार नहीं करता। उसने कहा कि इस तरह से सारे नॉन-मुस्लिम काफिर हुए। फरीक के मुताबिक, नॉन-मुस्लिमों को काफिर कहने की पूरी अनुमति है क्योंकि काफिर का इस्लाम के हीसब से अँग्रेजी अनुवाद ही होगा नॉन-मुस्लिम। उसने कहा कि अगर किसी काफिर को नॉन-मुस्लिम कहा जाना पसंद नहीं है तो वो इस्लाम स्वीकार कर ले।
वैसे काफिर कोई गाली नहीं है, लेकिन इन जैसों ने काफिर को गाली बना दिया है। हकीकत में, हर उसको काफिर कहते हैं जो दूसरे के धर्म अथवा मजहब को नहीं मानता।  
फरीक जाकिर नाइक एक अन्य वीडियो में जकात के बारे में भी समझाता है। एक वीडियो में उसने कहा कि नॉन-मुस्लिमों को जकात नहीं दिया जा सकता, चाहे वो कितना भी जरूरतमंद ही क्यों न हो। उसने इस्लामी किताबों के हवाले से कहा कि जकात (चैरिटी) केवल मुसलमानों को दी जा सकती है या फिर उन्हें, जिनका दिल इस्लाम की तरफ झुका हुआ हो। इसका मतलब समझाते हुए उसने कहा कि जिनसे उम्मीद है कि वो इस्लाम अपना लेंगे, उन्हें जकात दिया जा सकता है।
इसके अलावा एक अन्य वीडियो में फरीक जाकिर नाइक इस सवाल का जवाब देता है कि इस्लाम में ऑनलाइन बिजनेस करने का अधिकार है या नहीं। उसने बताया कि ये किया जा सकता है लेकिन इस्लाम और शरीया के नियमों के अंदर रह कर ही। उसने कहा कि किसी भी हराम प्रोडक्टस को नहीं बेचना चाहिए। साथ ही उसने गैम्ब्लिंग या लक से जुड़े गेम्स को भी हराम बताया। उसने एडवर्टाइजमेंट में बिना हिजाब की महिला को डालना या उसमें म्यूजिक डालना भी हराम बताया।

एक सवाल के जवाब में उसने कहा कि अल्लाह नॉन-मुस्लिमों पर भी दया करते हैं क्योंकि उन्होंने उनलोगों को भोजन और घर दिया है। उसने कहा कि पानी या हवा, ये सब नॉन-मुस्लिमों को भी दिया गया है क्योंकि इसके बिना वो मर जाएँगे – ये दिखाता है कि अल्लाह उस पर भी दया करते हैं। उसने कहा कि अल्लाह लोगों तक खुद ये संदेश पहुँचाते हैं कि हर एक बच्चा मुसलमान ही जन्म लेता है, उसे बाद में हिन्दू या ईसाई बना दिया जाता है।
यह इतना गुमराह करने वाला बयान जिसे सुन सभी को हंसी आती होगी। कोई इन जनाब से पूछे कि "जब हर पैदा होने वाला, मुस्लिम पैदा होता है, फिर उसका खतना क्यों किया जाता है? हिन्दुओं में तो ऐसी कोई रस्म ही नहीं है कि छोटे से बच्चे का मांस काटकर हिन्दू बनाया जाए। 
उसने दावा किया कि अगर कोई इस्लाम अपना रहा है तो इसका मतलब ये नहीं कि वो कन्वर्ट हो रहा है बल्कि इसका अर्थ हुआ कि वो अपने मजहब में लौट रहा है क्योंकि वो जन्मा तो मुसलमान ही था। उसने दावा किया कि अल्लाह लोगों को समझाने के लिए किसी न किसी रूप में संदेश भेजते रहते हैं कि वो इस्लाम अपना लें क्योंकि काफिर अगर इस्लाम अपना ले तो उसे अल्लाह क्षमा कर देते हैं।
किसी ने उससे पूछ दिया था कि अल्लाह बार-बार क़ुरान में खुद को ‘We’ कह कर क्यों सम्बोधित करते हैं, जिसके जवाब में उसने कहा कि Plural दो प्रकार के होते हैं। उसने समझाया कि संख्याओं का प्लुरल अलग होता है और अल्लाह वाला जो प्लुरल है, वो ‘रॉयल प्लुरल’ या ‘प्लुरल ऑफ रेस्पेक्ट’ है, जो इंग्लैंड की महारानी भी प्रयोग करती हैं। उसने कहा कि भारत के पीएम भी ‘हम’ कहते हैं, जो प्लुरल है लेकिन रेस्पेक्ट और रॉयल वाला।
इसी तरह फरीक के अब्बा जाकिर नाइक ने कहा था कि रवीश कुमार हों या ‘मुस्लिमों का पक्ष लेने वाले’ अन्य नॉन-मुस्लिम, उन सभी के लिए समान सज़ा की ही व्यवस्था है। ज़ाकिर नाइक ने अपने अनुयायियों को समझाया था कि जन्नाह अलग-अलग तरह के होते हैं, जैसे फिरदौस और फिरदौस आला। ज़ाकिर नाइक ने स्पष्ट कहा कि गैर-मुस्लिमों का नरक में जाना तय है। बकौल नाइक, अगर कोई मरते समय मुसलमान नहीं है तो उसके लिए नरक की ही व्यवस्था है।

राजीव गांधी फाउंडेशन : चीन, जाकिर नायक और फरार मेहुल चोकसी से भी मिला था दान

राजीव गांधी फाउंडेशन को लेकर एक और खुलासा हुआ है। भारत स्थित चीनी दूतावास, चीन सरकार, जाकिर हुसैन, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF), मंत्रालय, सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ करोंड़ों रुपये के घोटाले में फरार मेहुल चोकसी ने भी राजीव गांधी फाउंडेशन को दान दिया था। पंजाब नेशनल बैंक को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर देश से फरार हुए हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने राजीव गांधी फाउंडेशन को ये दान अपनी कंपनी नवराज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के जरिए दिया था। चोकसी ने एंटिगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले रखी है। चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी 13,500 करोड़ रुपये के पीएनबी धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी है।
इसका खुलासा करते हुए टाइम्स नाउ ने यह भी कहा कि चीन सरकार की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा वित्त पोषित चाइना एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल फ्रेंडली कॉन्टैक्ट (CAIFC) ने भी राजीव गांधी फाउंडेशन को वित्तीय सहायता दी थी। एफबीआई CAIFC  पर नजर रख रहा था और यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की एक रिपोर्ट में अमेरिकी कांग्रेस में कहा गया था कि वह विदेशों में जासूसी गतिविधियों में शामिल था।
7 मंत्रालय और 11 पीएसयू ने भी दिए दान
ऑपइंडिया की खबर के अनुसार कई सरकारी उपक्रमों ने भी राजीव गांधी फाउंडेशन में दान किया था। इनमें गृह मंत्रालय समेत 7 मंत्रालय और 11 बड़े सार्वजानिक उपक्रम भी शामिल थे। यह सब दान तब किए गए जब देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उस समय यूपीए की चेयरपर्सन थीं।

दान देने वाले मंत्रालय और सरकारी विभाग-
*गृह मंत्रालय
*प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय, मानव संसाधन मंत्रालय
*स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
*पर्यावरण और वन मंत्रालय 
*लघु उद्योग मंत्रालय
*राष्ट्रीय स्वरोजगार मिशन, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एक परियोजना
*महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा सबला

दान देने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम
*एलआईसी
*सेल
*गेल (इंडिया) लिमिटेड
*ऑयल इंडिया लिमिटेड
*ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
*स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
*बैंक ऑफ महाराष्ट्र
*आवास और शहरी विकास निगम लिमिटेड
*ओएनजीसी
*आईडीबीआई बैंक
*भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मिला दान
यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से राजीव गांधी फाउंडेशन को दिए गए दान के खुलासे ने भी कांग्रेस के चेहरे से नकाब हटा दिया है। कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) का गलत इस्तेमाल किया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड से राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा दान किया गया। यह पैसा उस समय दान किया गया, जब सोनिया गांधी पीएमएनआरएफ के बोर्ड में भी थीं और आरजीएफ की अध्यक्ष भी थीं। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, ‘संकट में लोगों की मदद करने के लिए बना पीएमएनआरएफ, यूपीए के कार्यकाल में राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था। पीएमएनआरएफ बोर्ड में कौन बैठा? सोनिया गांधी। राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्षता कौन करता है? सोनिया गांधी। यह पूरी तरह से निंदनीय है।’

आरोप का आधार क्या?
बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने 2005-2006 और 2007-2008 में राजीव गांधी फाउंडेशन को दान देने वालों की लिस्ट शेयर की हैं, इनमें प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड का भी नाम है।



राजीव गांधी फाउंडेशन क्या है?
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए 21 जून 1991 को सोनिया गांधी ने इसकी शुरुआत की थी। सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं। इस फाउंडेशन में सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी, बेटी प्रियंका वाड्रा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा पी. चिदंबरम ट्रस्टी हैं।

कांग्रेस ने चीन से भी ली रिश्वत 
इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए। उन्होंने पूछा था कि कांग्रेस ये बताए की ये प्रेम कैसे बढ़ गया। इनके कार्यकाल में चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी? गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बीच इस खुलासा से सनसनी फैल गई है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को दान के नाम पर चीन से काफी ज्यादा वित्तीय मदद मिली थी। 

राजीव गांधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट 2005-06 में भी कहा गया है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना के दूतावास से फंडिंग हुई है।
कांग्रेस के थिंक-टैंक ने की FTA की पैरवी, व्यापार घाटा 33 गुणा बढ़ा
राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीन के साथ एफटीए की पैरवी की, जिसके बाद 2003-04 और 2013-14 के बीच व्यापार घाटा 33 गुणा बढ़ गया। इसके अलावा 2008 में कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के बीच  एमओयू का राजीव गांधी फाउंडेशन के साथ संबंध को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चीन से साथ सीमा विवाद के समय कांग्रेस के नरम रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसका कारण यहीं तो नहीं है।

क्या इसलिए चीन का साथ दे रही हैं कांग्रेस? राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से करोड़ों रुपये मिलने का हुआ खुलासा

सोनिया-राजीव
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बीच इस खुलासा से सनसनी फैल गई है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को दान के नाम पर चीन से काफी ज्यादा वित्तीय मदद मिली थी। कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एमओयू के बाद अब यह खबर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है।
भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को आरोप लगाया कि यूपीए के वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था और सार्वजनिक धन परिवार के खातों में डाइवर्ट कर दिया गया था। गौरतलब है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।
 UPA सरकार ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक नहीं, तीन-तीन बार PMNRF का पैसा दिया 
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन को परिवार द्वारा चलाए जाने वाले संगठन के लिए इस्तेमाल किया गया और यह न केवल एक ‘धोखाधड़ी’ है, बल्कि भारत की जनता के साथ एक ‘बड़ा विश्वासघात’ भी है। यूपीए सरकार में लोग राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान करते थे, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गाँधी थीं।



कांग्रेस पर हमला करते हुए भाजपा अध्‍यक्ष ने कहा कि PMNRF का पैसा संकट के समय लोगों की मदद के लिए होता है लेकिन यूपीए के दौर में राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था। उन्होंने कहा – “PMNRF बोर्ड में कौन बैठा था? सोनिया गाँधी। RGF की अध्यक्षता कौन करता है? सोनिया गाँधी।”
ट्वीट करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि यह पूरी तरह से निंदनीय है, इसमें नैतिकता की अवहेलना की गई और पारदर्शिता की परवाह तक नहीं की गई है। उन्होंने आगे कहा कि धन के लिए एक परिवार की भूख ने देश का बहुत खर्च किया है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस को अपने लाभ के लिए बेहिसाब लूट के लिए माफी माँगने को कहा है।
UPA के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन की सरकार द्वारा किए गए डोनेशन ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर भारत की जमीन चीन को सौंपने का दुष्प्रचार किया जा रहा था।
राजीव गाँधी फाउंडेशन ने पीएमएनआरएफ से एक बार नहीं तीन बार डोनेशन प्राप्त किया था     
ऑपइंडिया ने बताया था कि किस प्रकार राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।
चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा किए गए इस पहली ‘सहायता’ में 10 लाख रुपए और दूसरी में 90 लाख रुपए दीए गए थे। रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस से सवाल उठाए गए थे और इसकी शुरुआत करते हुए, बीजेपी ने पूछा था कि कांग्रेस का चीन को लेकर हमेशा से ही लचीला रुख था और साथ ही गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच चीन और कॉन्ग्रेस के बीच हुए ‘व्यापारिक समझौते’ के कारण ही इस प्रकार के बयान दे रही थी।
राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट में चीन की सरकार से वित्तीय सहायता मिली थी, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गाँधी ने की है और इसमें राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। जैसा कि वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है, यूपीए के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दान मिला था।
वर्ष 2005-2006 में, वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दान मिला। 2006-2007 की रिपोर्ट में भी यही खुलासा किया गया है। और इसके बाद 2007-2008 में भी पीएमएनआरएफ से फाउंडेशन को ‘दान’ मिला था।
हालाँकि, इस तरह के दान की राशि अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह निश्चित है कि वास्तव में दान किया गया था। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) वर्ष 1948 में स्थापित किया गया था। प्रारंभ में, निधि का उद्देश्य भारत के विभाजन के बाद और उसके ठीक बाद पाकिस्तान से विस्थापित लोगों को सहायता प्रदान करना था।
पीएमएनआरएफ के संसाधनों का उपयोग अब मुख्य रूप से बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिवारों को और प्रमुख दुर्घटनाओं और दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत देने के लिए किया जाता है। इस फंड में पूरी तरह से सार्वजनिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय समर्थन नहीं मिलता है।
पीएमएनआरएफ और कांग्रेस की पारदर्शिता 
इससे पहले, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के लिए पीएमएनआरएफ के बोर्ड में होना आवश्यक था। हालाँकि, बाद में इसे बदल दिया गया था और यह अनिवार्य किया गया था कि प्रधानमंत्री के विवेक पर पीएमएनआरएफ से फंड संवितरण किया जाएगा। इससे पीएमएनआरएफ से राजीव गाँधी फाउंडेशन को किया गया ‘दान’ और अधिक संदिग्ध हो जाता है।
यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि 2005 से 2008 तक, जिस अवधि में पीएमएनआरएफ से राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान दिया गया था, तब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे, जिनका सरकार पर थोड़ा बहुत ही नियंत्रण था। सोनिया गाँधी के पास ही उस दौरान सरकार का पूरा नियंत्रण था। वास्तव में, एनएसी फाइलों से पता चला था कि सोनिया गाँधी वास्तव में ‘सुपर पीएम’ थीं और मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए निर्णयों पर उनका पूरा नियंत्रण था।
PMNRF में सभी धन भारत के नागरिकों द्वारा दिया गया योगदान होता है और इसका उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं और आपदाओं के दौरान किया जाता है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि लोगों के धन का उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं के दौरान लोगों को राहत देने के लिए किया जाना था, जिसे सोनिया गाँधी द्वारा निजी तौर पर नियंत्रित कोष (RGF) में बदल दिया गया था। 
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PMNRF बनाम  PM CARES Fund 
ये वही सोनिया गाँधी हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस की महामारी के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए PM CARES (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) पर संदेह था और लगातार इसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल करती देखी जा रहीं थीं। सोनिया गाँधी और यहाँ तक ​​कि राहुल गाँधी ने बार-बार जोर देकर कहा था कि पीएमएनआरएफ इस से कहीं अधिक पारदर्शी है और जब राष्ट्रीय आपात स्थितियों से लड़ने के लिए इस तरह के फंड मौजूद थे, तो ‘पीएम-केयर्स’ की आवश्यकता नहीं थी। पूरा ‘लिबरल’ वर्ग भी यह बताते नजर आया कि पीएम केयर्स फंड के तहत मिलने वाले फंड का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और पारदर्शी तरीके से नहीं किया जाएगा।
मजे की बात यह है कि पीएमएनआरएफ को ट्रस्ट मानने के बाद से पीएमएनआरएफ ‘पीएमकेयर्स’ के मुकाबले काफी कम पारदर्शी है। क्योंकि आज तक किसी को भी यह नहीं पता कि पीएमएनआरएफ को संचालित करने वाले दिशा निर्देश क्या हैं।
पीएमएनआरएफ के तहत निधियों के रोजगार में पारदर्शिता की कमी अब इस बात से स्पष्ट हो गई है कि सोनिया गाँधी द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन में जनता के धन को कैसे डाइवर्ट कर दिया गया और कैसे हस्तांतरित किया गया, इसकी जानकारी किसी ‘खुलासे’ के जरिए ही सामने आ सकी है।
भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना 
इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए। उन्होंने पूछा था कि कॉन्ग्रेस ये बताए की ये प्रेम कैसे बढ़ गया। इनके कार्यकाल में चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। कॉन्ग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी?

वहीं ‘टाइम्स नाउ’ न्यूज़ चैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, UPA के दौरन फ्री ट्रेड के नाम पर किए गए चीन की सरकार और गाँधी परिवार के बीच अन्य गोपनीय समझौतों के साथ ही यह वित्तीय मदद करीब 300000 अमेरिकी डॉलर (उस समय के एक्सचेंज रेट के हिसाब से करीब 15 करोड़ रुपए) के आस-पास थी।
यह सब समझौते चीन के साथ खराब सम्बन्ध होने के बावजूद कॉन्ग्रेस ने गठबंधन सरकार में रहने के दौरान साइन किए थे और देश से समझौते का ब्योरा छुपाया गया। समझौते के ब्‍यौरे को सार्वजनिक नहीं किया गया।
2006 में चीन ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 10 लाख रूपए की सहायता दी थी 
एक और खुलासे में गाँधी परिवार के चीन के साथ अपने गोपनीय संबंधों के दावों को और मजबूती मिलती है। नए खुलासे से पता चलता है कि चीनी सरकार ने वर्ष 2006 में ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ को ‘वित्तीय सहायता’ के लिए 10 लाख रुपए दान दिए थे।
चीनी दूतावास पर उपलब्ध एक दस्तावेज़ के अनुसार, भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी (Sun Yuxi) ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 10 लाख रुपए दान दिए थे, जो कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है और कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा चलाया जाता है।
क्या इसलिए चीन का साथ दे रही हैं कांग्रेस? राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से करोड़ों रुपये मिलने का हुआ खुलासा  टाइम्स नाउ न्यूज चैनल के अनुसार यह वित्तीय मदद 300000 अमेरिकी डॉलर (उस समय के हिसाब से करीब 15 करोड़ रुपए) के करीब है। टाइम्स नाउ के अनुसार भारत स्थित चीनी दूतावास राजीव गांधी फाउंडेशन को फंडिंग करता रहा है। खबर के अनुसार चीन की सरकार वर्ष 2005, 2006, 2007 और 2008 में राजीव गांधी फाउंडेशन में डोनेशन करती है और इसके बाद वर्ष 2010 में एक अध्ययन जारी कर बताया जाता है कि भारत और चीन के बीच व्यापार समझौतों को बढ़ावे की जरूरत है। राजीव गांधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट 2005-06 में भी कहा गया है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना के दूतावास से फंडिंग हुई है। चीनी दूतावास के अनुसार, भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी ने 10 लाख रुपए दान दिए थे। इस फंडिंग का नतीजा ये रहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन ने भारत और चीन के बीच मुक्त व्यापार समझौते के बारे में कई स्टडी की और इसे जरूरी बताया। आजतक के अनुसार इस राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। इसके बोर्ड में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, पी. चिदंबरम और प्रियंका गांधी हैं। अब चीन से साथ सीमा विवाद के समय कांग्रेस के नरम रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसका कारण यहीं तो नहीं है। राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी का चीनी कन्युनिस्ट पार्टी के साथ एमओयू, डोकलाम विवाद के समय राहुल का चोरीछिपे चीनी दूतावास के अधिकारियों से मिलना, चीनी झड़प के दौरान सरकार-सेना पर सवाल उठाना, सरकार की जगह पार्टी से परिवार के लोगों का चीन जाना, कैलास मानसरोवर की यात्रा के दौरान चीनी अधिकारियों से गुपचुप मुलाकात करना यह सब कांग्रेस पार्टी के साथ गांधी परिवार को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। सोशल मीडिया पर भी लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं।

त्यागपत्र : जाकिर नाइक को शरण और भारत के खिलाफ जहर उगलना मलेशियाई PM को पड़ा महंगा

मलेशिया, महातिर मोहम्मदमलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आज अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 94 वर्षीय महातिर ने सोमवार(फरवरी 24, 2020) को अपना त्यागपत्र देश के राजा को सौंप दिया। देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने खुद इसकी सूचना दी। मलेशिया के पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से सरकार गिराने की कोशिशों के बीच प्रधानमंत्री ने अपना इस्तीफा किंग को सौंप दिया है।
विश्व के सबसे उम्रदराज नेता 94 वर्ष के महातिर ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा सरकार गिराने की कोशिशों के बाद यह फैसला लिया है। इस चौंकाने वाली खबर आने से 24 घंटे पहले तक मलेशिया की राजनीति में काफी नाटक देखने को मिला था, जिसमें ‘पैक्ट ऑफ होप’ गठबंधन के प्रतिद्वंद्वी और विपक्षी नेता नई सरकार बनाने का प्रयास करते नजर आए थे। इसके अलावा ये भी खबर थी कि गठबंधन महातिर के संभावित उत्तराधिकारी अनवर को बाहर करने की योजना बना रहा था और उनकी पार्टी के ज्यादातर सांसद किसी भी वक्त उनके प्रधानमंत्री बनने की राह में परेशानी खड़ी करने की फिराक में थे।
कुछ समय पहले तक अनवर और महातिर के बीच संबंध अच्छे नहीं थे, लेकिन 2018 के चुनावों से पहले उनमें मित्रता हो गई थी। महातिर ने उनके पूर्व दुश्मन को सत्ता सौंपने की बात कई बार दोहराई थी। मगर, सोमवार(फरवरी 24) की सुबह कोशिशें बेकार होती दिखीं जब उनके कार्यालय ने घोषणा की कि महातिर ने मलेशिया के प्रधानमंत्री के तौर पर दोपहर एक बजे राजा को अपना इस्तीफा भेज दिया है। अब आगे क्या होगा इस बारे में फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

हिन्दुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाले भगोड़े जाकिर नाइक को शरण देने वाले मलेशिया के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए महातिर पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहे थे। मुसलमानों का नया मसीहा बनने की कोशिश में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर पर गलतबयानी करते हुए भारत पर कई आरोप मढ़े थे। रोहिंग्या मुसलमानों पर कथित अत्याचार का रोना रोया था। लेकिन, चीनी बर्बरता झेलने को मजबूर उइगर मुसलमानों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया था।
महातिर ने अपने भाषण में कहा था कि जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर क़ब्ज़ा किया गया। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और कानूनों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को शांतिपूर्ण तरीके से समस्या का समाधान करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करना चाहिए। इतना ही नहीं, मलेशिया ने पिछले दिनों ही पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने का भी फैसला किया था।