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जूनागढ़ में पुलिस पर हमले की इस्लामी भीड़ ने पहले से कर रखी थी तैयारी : ट्रक में पत्थर, डम्पर में धारदार हथियार, बाहरी लोगों को थमाए लाठी-डंडे

                                 पूर्व नियोजित था जूनागढ़ में पुलिस पर हमला (चित्र साभार: संदेश)
गुजरात के जूनागढ़ में 16 जून 2023 को दरगाह के आगे पुलिस बल पर इस्लामी भीड़ के हमले की जाँच में अहम खुलासे हुए हैं। यह हिंसा पूर्व नियोजित थी। पुलिस पर हमला करने के लिए बाहर से भी लोगों को बुलाया गया था। हमले से पहले ही लोगों को लाठी-डंडे और पत्थर थमा दिए गए थे। पत्थरों को घटनास्थल पर लाने के लिए ट्रक का प्रयोग किया गया था।

दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की जाँच में यह बात निकल कर सामने आई है कि हिंसा से पहले पूरी तैयारियाँ की गईं थी। नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण को चिन्हित करते हुए कुल 8 जगहों की लिस्ट बनाई थी। इसमें दरगाह के साथ मंदिर भी थे। माना जा रहा है कि नगर निगम में जब इन स्थलों को चिन्हित किया जा रहा था तभी वहाँ के किसी कर्मचारी ने इसकी सूचना बाहरी लोगों को कर दी थी। हालाँकि अभी तक सूचना लीक करने वाले कर्मचारी का नाम सार्वजानिक नहीं किया गया है।

जानकारी लीक होने के बाद कुछ लोगों ने पूरी प्लानिंग के साथ 16 जून की तारीख हंगामे के लिए तय की। इसकी तैयारी के लिए लाठी-डंडे, धारदार हथियार और पत्थर जमा किए गए थे। पत्थरों को ट्रक और डम्पर में भर कर घटनास्थल के आसपास रखा गया था। हमले से ठीक पहले बाहर से हिंसक भीड़ बुलाई गई थी। जूनागढ़ के डीएसपी हतेश धंडालिया ने भी हमले से पहले साजिश का अंदेशा जताया है। उन्होंने कहा कि सब कुछ थोड़े ही समय में घटित हुआ।

दरगाह मजावाड़ी गेट के पास है और यह खुला हुआ है। आसपास CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि ऐसे में अगर पत्थर खुले में रखे जाते तो वे नजर में आ जाते। ऐसे में ईंट-पत्थर रखने के लिए ट्रकों और डम्परों का इस्तेमाल किया गया। ट्रकों को भी ऐसे स्थान देखकर खड़ा किया गया जहाँ वो कैमरे की नजर में न आएँ। कहा जा रहा है कि इन्हीं डम्परों में हथियार भी छिपा कर रखे गए थे जिसे पुलिस पर हमले के लिए प्रयोग किया गया।

दरगाह पर अवैध अतिक्रमण के लगे नोटिस के विरोध में 16 जून को गुजरात के जूनागढ़ में हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में अल्लाह हू अकबर और नारा ए तकबीर चिल्लाती 500 से 600 की भीड़ ने पुलिस बल पर हमला किया था। हमले में महिलाएँ भी शामिल थीं। भीड़ पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए ललकार रही थी। इस हमले में एक हिन्दू नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि आधे दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। महिला पुलिस स्टाफ की शिकायत पर हिंसा में शामिल 31 लोगों को नामजद कर जाँच की जा रही है।