राजस्थान : डस्टबिन में ही नहीं फेंकी गई, 12 फ़ीट गहरे गड्ढे में भी गाड़ दी गई कोरोना वैक्सीन

टीवी पर चर्चा हो या दीवारों पर चिपके पोस्टर "हमारे बच्चों की वैक्सीन बाहर क्यों भेज दी", लेकिन इस बात पर शोर मचाने वाले राजस्थान में बर्बाद हो रही वैक्सीन पर खामोश क्यों? क्यों चुप हैं राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा? जनता की लाशों पर गन्दी सियासत खेलने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को क्यों नहीं बर्खास्त किया? 12 फीट गहरे गड्डे में वैक्सीन गाड़ने का क्या मतलब हैं? किस षड्यंत्र के तहत इतना घिनौना काम किया जा रहा है? यह कोई सोंची-समझी साज़िश है, जिसका भांडा फोड़ना वैक्सीन लगाने से कहीं अधिक जरुरी है।  
राजस्थान सरकार ने मीडिया संस्थान ‘दैनिक भास्कर’ द्वारा राज्य में कोरोना वैक्सीन की बर्बादी सम्बंधित ग्राउंड रिपोर्ट को नकार दिया था और साथ ही केंद्र सरकार के आँकड़ों को भी गड़बड़ बताया था। अब ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल की पुष्टि के लिए कुछ तस्वीरें जारी की हैं और उनके आधार पर दावा किया है कि राजस्थान में वैक्सीन की हजारों डोज न सिर्फ डस्टबिन में डाले गए, बल्कि जमीन में भी गाड़ दिए गए।

अख़बार ने अपने एक पत्रकार की तस्वीर भी जारी की है, जिसने 12 फ़ीट गहरे गड्ढे में उतर कर देखा तो पाया कि वहाँ वैक्सीन के कई वायल बर्बाद कर दिए गए थे। इनमें से अधिकतर वायल ऐसे थे, जो 80% तक भरे हुए थे। बता दें कि वैक्सीन की एक वायल से 10 डोज बनती है। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री लगातार इस बात को नकार रहे हैं कि राजस्थान में कोरोना वैक्सीन कचरे में फेंकी गई है। उन्होंने बर्बादी के प्रतिशत को महज 2 बताया।

‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल में पाया कि 80% तक भरी हुई वैक्सीन की वायलें जमीन में गाड़ दी जा रही हैं। बुधवार को ऐसे 10 स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल के बाद अख़बार ने कहा कि वो सच दिखा रहा है और अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री को सम्बोधित करते हुए अख़बार ने उन्हें वैक्सीन की बर्बादी रोकने की नसीहत दी और कहा कि उन्हें जो भी सबूत चाहिए, वो दिए जाएँगे पर टीके बर्बाद न हों।

                                      राजस्थान में गड्ढे में गाड़ दी गई वैक्सीन (साभार: दैनिक भास्कर)
राजस्थान के अस्पताल परिसरों में वैक्सीन की सैकड़ों डोज कचरे के ढेर में पड़ी हुई है। खुद डॉक्टरों का ही कहना है कि वो वैक्सीन की पुरानी वायलों को जमीन में गाड़ दे रहे हैं। अब तक इसके जाँच के आदेश भी नहीं दिए गए हैं। अख़बार ने बर्बाद की गई 500 में से 20 वायलों के बैच नंबर भी शेयर किए। अखबार ने कहा, “भास्कर सरकार से अपील करता है कि इन वायल की जाँच कराएँ और जो भी सच सामने आए, उसे सार्वजनिक करें। हमारा मकसद सिस्टम की उस लापरवाही को सामने लाना है, जिसकी वजह से हमारी कीमती वैक्सीन बर्बाद हो रही हैं।”

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के अनुसार, प्रदेश में 2% वैक्सीन ही बर्बाद हुई है, जबकि देश का औसत 6% है। उन्होंने बूँदी जिले का आँकड़ा शेयर करते हुए कहा कि वहाँ महज 5.35% वैक्सीन ही बर्बाद हुए हैं, जबकि मीडिया की पड़ताल में ये आँकड़ा साढ़े 4 गुना से भी अधिक 25% है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन को पत्र भी लिखा, जिसमें बताया कि ये वायलें डिस्पोजल के लिए भेजी गई थीं।

हालाँकि, ये अजीब है कि वैक्सीन की भरी हुई वायलों को डिस्पोजल के लिए भेज दिया जाए। राजस्थान के उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कॉन्ग्रेस की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो ‘दोषी भी मैं, जाँचकर्ता भी मैं, निर्णयकर्ता भी मैं’ वाले सिद्धांत पर चल रही है, जबकि उसे कोरोना प्रबंधन पर ध्यान देते हुए वैक्सीन की बर्बादी की जाँच किसी थर्ड पार्टी से करानी चाहिए। ‘दैनिक भास्कर’ ने अपने दफ्तर का पता देते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से कहा है कि वो वायलों को जाँच के लिए मँगवा लें।

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राजस्थान में 11.50 लाख डोज बर्बाद ; 8 जिलों में डस्टिबन में मिले कोरोना के टीके

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वहीं ‘पत्रिका’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कुल 11.5 लाख (करीब 7 फीसदी) वैक्सीन के डोज खराब हो गए हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भारत सरकार पर भी वैक्सीन विदेश में बाँट देने का आरोप लगाते हैं। राजस्थान के चूरू जिले में तो सबसे ज्यादा 39.7 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गई है। इस मामले में 24.60 फीसदी के साथ हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर है, जबकि 17.13 प्रतिशत वैक्सीन भरतपुर में बेकार हो गई है। 

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