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कांग्रेस अपनी जीत मान रही लेकिन भटकती फिर रही है - उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए - सत्ता नहीं मिली लेकिन Emergency लगा रही है -

सुभाष चन्द्र

कांग्रेस की फितरत में मोदी से नफरत के सिवा कोई दूसरी सोच है ही नहीं जो उसके हर काम में कमी निकालती है। 

दो दिन पहले G7 में वेटिकन से आए पोप ने मोदी को गले लगा कर बड़ी आत्मीयता के साथ भेंट की लेकिन यह कांग्रेस को रास नहीं आई और निशाना साधना चाहा मोदी पर। इसके लिए केरल कांग्रेस ने X पर लिखा - “Finally the Pope Get chance to meet God”

जब भाजपा ने आड़े हाथों लिया तो ट्वीट हटा दिया और ईसाई समुदाय से माफ़ी मांग ली। लेकिन कांग्रेस ने अपमान किसका किया? पोप का या मोदी का? मेरा मानना है कांग्रेस ने मोदी को God कह दिया और जीसस से भी उपर कर दिया मोदी को (भगवान कह दिया)।  

एलन मस्क के EVM पर बोलते ही राहुल गांधी ने उल्टा तीर पकड़ लिया और कूद पड़ा बीच में जबकि EVM के रहते ही भाजपा की सीट 240 रह गई और कांग्रेस की 52 से 99 हो गई।  मतलब,  तू कौन, मैं खामख्वाह?

लेखक 
चर्चित YouTuber 
खुदा ने गंजे को नाखून नहीं दिए। अभी तो कांग्रेस सत्ता में आई नहीं और बिना आये ही Emergency का माहौल बना रही है। 

जो हमें पसंद है, वही बात करो। वरना केस पर केस ठोक देंगे। 

अर्नब गोस्वामी पर ठोके 100 केस; कांग्रेस जो मर्जी बोले लेकिन अर्नब के सोनिया को original नाम से पुकार लिया तो उस पर 100 FIR कर दी। मतलब बोलने की आज़ादी नहीं देना चाहती कांग्रेस।  

अजित भारती पर बेंगलुरु में केस ठोक दिए falsely claimed that Rahul Gandhi intended to restore the Babri Masjid in place of Ram Mandir in Ayodhya.

तो क्या राहुल गांधी राम मंदिर का समर्थन करता है? अजीत भारती ने वही दोहराया जो आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया था कि राहुल गांधी ने कुछ खास लोगों के साथ मीटिंग में कहा था कि यदि कांग्रेस सरकार होती तो Super Commission बना कर राम मंदिर का फैसला पलट देते। प्रमोद कृष्णम पर तो कोई FIR न होने का मतलब है आचार्य कृष्णम ने और अजीत भारती दोनों ने सही कहा।

 

इसी राहुल गांधी ने पादरी George Ponnaiah से मुलाकात की थी भारत जोड़ो तोड़ो यात्रा में जबकि पादरी ने भारत माता का अपमान करते हुए कहा कि ईसाई जूते इसलिए पहनते हैं क्योंकि भारत की भूमि देवी की गंदगी हमारे पैर में न लगे।  

George Ponnaiah ने राहुल से मुलाकात में कहा था कि “Jesus is the only God unlike Shakti (& other Gods)".   

शायद तब ही राहुल गांधी के दिमाग में “शक्ति” से लड़ने का भूत सवार हुआ था।  

भारत माता का और हिंदू धर्म का अपमान करने वाले और मोदी अमित शाह के लिए अपशब्द कहने वाले पादरी से राहुल गांधी मिलता है तो हिंदू धर्म का समर्थक कैसे हो गया?

आए दिन मुस्लिम और उनके संगठन राम मंदिर को तोड़ने की धमकी देते हैं। कभी राहुल ने विरोध किया है क्या? एक दिन पहले बकरे पर राम लिख कर काटने की तैयारी थी, क्या राहुल ने और कांग्रेस ने विरोध किया?

चंद्रचूड़ का लाड़ले मोहम्मद जुबैर ने भारती के बड़ा वीडियो को 40 सेकंड का बना कर झूठ फैला दिया। लेकिन बंगाल में हुई गऊ हत्या पर उसके घर ईद के दिन मातम होने की वजह से बोल नहीं पा रहा। बंगाल में बकरीद मनाने का दृश्य.. 200 से ज्यादा गाय काटी गई इस रेसिडेंसियल कॉप्लेक्स के सामने वो बकरीद पर खून की नदिया भी बहाए तो सही हम होली को पानी भी बहाए तो अपराध।

भारती ने अगर झूठ बोला भी है तो क्या गलत है क्योंकि चंद्रचूड़ तो मणिपुर के अपने फैसले में कह चुके हैं कि पत्रकार गलत रिपोर्टिंग भी कर सकते हैं। 

अमन चोपड़ा, youtuber मनीष कश्यप के खिलाफ भी ऐसे ही फर्जी केस दागे गए और तजिंदर बग्गा का अपहरण करके पंजाब ले जाने की कोशिश की गई। 

मतलब साफ़ है हम सत्ता में हों या नहीं “Emergency” लगा देंगे, हम किसी को बोलने की आजादी नहीं देंगे। 

विपक्ष का नेता नहीं बना पा रहे लेकिन Speaker NDA का न बने इसका जुगाड़ लगा रहे हो। 

आज जयराम रमेश कह रहा है 2014 के बाद से NCERT RSS की शाखा बनकर काम कर रहा है। ये संगठन 1961 में बना था और और 2014 तक 3 साल जनता पार्टी और 6 साल अटल जी की सरकार के निकाल दो तो, फिर  44 साल तक को कांग्रेस का Mouthpiece रहा होगा?

बेशर्म हरामफरमोश 'राष्ट्रीय मुस्लिम मंच' मुस्लिमों का उपयोग नहीं कर पायेगा लेकिन मुस्लिम, RSS का उपयोग कर लेंगे 

क्या हुआ? कितने मुगलमान वोट मिले इसके पदाधिकारियों के क्षेत्र में? स्वयं इसके पदाधिकारियों ने वोट नहीं दिए। 

इसी तरह सरसंघचालक का 'डीएनए' बयान हो या मोदी जी का 'अब्बास', इनकी आवश्यकता क्या है? 

अल्पसंख्यक योजनाओं में नोटों की बारिश और यूपीएससी, सेना में बढ़ते मुगलमान। 

बंगाल में हिन्दुओं के जेनो साइड पर चुप्पी। 

मोदी सरकार की इस आत्ममुग्ध कूटनीति को न तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय मान्यता देता है और ना मुगलमान, लेकिन हां सनातन समुदाय के शत्रुताबोध को जरूर कन्फ्यूज कर देते हैं। 

संघ के अंदर चल रहा राष्ट्रीय मुग्लिम मंच का नाटक बंद किया जाए ।

राजस्थान : होली आते ही बाड़मेर में लगी धारा-144 : ना रंग फेंकें ना गुब्बारे, ना गाना बजाएँ

सेकुलरिज्म के नाम पर आखिर कब तक हिन्दुओं पर अत्याचार किया जाता रहेगा? आखिर कब तक छद्दम सेक्युलर मुस्लिम तुष्टिकरण के आगे घुटनों पर बैठे रहेगें? आखिर कब तक हिन्दुओं के संयम की अग्नि-परीक्षा ली जाती रहेगी? कहाँ है 'गंगा-जमुनी तहजीब', 'संविधान की दुहाई' और 'अधिकारों की दुहाई' देने वाला गैंग? क्या इस गैंग के सामाजिक बहिष्कार का समय आ गया है? क्योकि जब तक इन तुष्टिकरण पुजारियों का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, इन्हें सेकुलरिज्म का अर्थ समझ नहीं आने वाला। क्या इसी का नाम सेकुलरिज्म है? क्या हर हिन्दू को योगी आदित्यनाथ बनने का समय आ गया है? राजस्थान को कोई वसुंधरा नहीं अब योगी की जरुरत है। 

राजस्थान में हिंदुओं के त्योहार आते ही प्रशासन प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिया। बाड़मेर जिले के कलेक्टर की ओर से जिले में धारा 144 लगा दी है। प्रशासन के इस निर्णय पर विवाद हो गया है। ऑर्डर में लिखा है कि कोई भी इस तरीके से रंग न खेले कि किसी दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे। इसका भाजपा और हिंदू संगठनों ने विरोध किया है।

बाड़मेर के जिलाधिकारी लोकबंधु द्वारा जारी किए गए इस ऑर्डर पर राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ कुठाराघात है। यह आदेश अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर कलंक है।

इस मामले को राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में भी उठाया और कहा कि होली का पर्व रंगों का त्योहार है। उन्होंने कहा, “बाड़मेर कलेक्टर का एक आदेश मेरे हाथ में है। कलेक्टर ने 2 से 12 मार्च तक धारा 144 लागू की है। होली पर धारा 144 लागू करना हमारी धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने सरकार इस ऑर्डर पर जवाब दे।

                              बाड़मेर जिलाधिकारी द्वारा निकाला गया आदेश (साभार: दैनिक भास्कर)

जिला कलेक्टर द्वारा निकाले गए आदेश में गाना बजाने और नारे लगाने पर पाबंदी लगाई है। आदेश में कहा गया है कि किसी भी धर्म का कोई व्यक्ति कोई ऐसा ऑडियो गाना नहीं चलाएगा और ना ही नारे लगाएगा, जिससे किसी दूसरे धर्म या व्यक्ति की भावना को ठेस पहुँचे।

आदेश में आगे कहा गया है कि होली पर इस तरह रंग ना खेलें कि दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचे। किसी व्यक्ति की इच्छा के विरूद्ध उस पर रंग ना डाले, जिससे कि साम्प्रदायिक या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे।

उधर, कलेक्टर ने कहा कि यह ऑर्डर सभी त्योहारों से पहले निकाले जाते हैं। इसमें लोगों के इकट्ठा होने पर रोक नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर लोग शराब ना पीएँ, धारदार हथियार ना निकालें और लड़ाई-झगड़े आदि ना हों, इसलिए ऑर्डर निकाला गया है। ये ऑर्डर कई सालों से निकल रहे हैं।

पिछले साल भी हिंदुओं के त्योहारों से पहले राजस्थान के कई जिलों में धारा 144 लागू की गई थी। पिछले साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) ने अजमेर जिले में हिंदू त्योहारों से पहले धारा 144 लागू किया था। इस फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक चिन्ह वाले झंडों को नहीं लगाने की हिदायत दी गई थी।

उस भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर नीरज जैन हिंदुस्तानी ने कॉन्ग्रेस शासन की तुलना मुगलराज से की थी। नीरज जैन ने ट्वीट कर लिखा था, “कोटा, बीकानेर, जोधपुर और अब अजमेर सहित अन्य शहर में गहलोत साब का नादिरशाही फ़रमान। किसी धार्मिक चिन्ह के झण्डे लगाना, DJ बजाना अपराध है! गौरतलब है कि एक और महावीर जयंती, दुर्गा अष्टमी, अम्बेडकर जयंती, राम नवमी और हनुमान जयंती के जुलूस और शोभा यात्रा पर ये आदेश।“

उस साल 10 अप्रैल को रामनवमी, 14 अप्रैल को महावीर जयंती और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती थी। इन अवसरों पर हिंदू समुदाय धूमधाम से झाँकी एवं जुलूस निकालते हैं और पर्व को मनाते हैं। हालाँकि, राजस्थान सरकार ने फरमान जारी कर आयोजनों के दौरान धार्मिक झंडे पर रोक लगा दी थी। इसके बाद काफी बवाल हुआ था।

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 को पथराव की घटना के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने घरों पर धार्मिक झंडे फहराने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा जुलूसों और शोभा यात्राओं के दौरान डीजे बजाने को लेकर पाबंदियाँ लगाई थी। ये पाबंदियाँ दुर्गा अष्टमी, राम नवमी, महावीर जयंती और हनुमान जयंती आदि हिंदू त्योहारों को चिह्नित करने के लिए की गईं।

राज्य के कई जिलों में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू कर दी गई है। राजस्थान सरकार ने अपने आदेश में यहाँ तक कहा था कि इस दौरान लोगों को घर के आगे से गुजरने वाली शोभा यात्रा को देखने के लिए अपने घरों की छतों पर खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इससे पहले 28 अक्टूबर 2021 को झुंझनू जिले के जिलाधिकारी उमर दीन खान ने दीपावली त्योहार के चलते धारा 144 लागू करने का आदेश जारी कर दिया था। इस दौरान धार्मिक ऑडियो चलाने से लेकर जयकारा लगाने तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद खूब बवाल हुआ। बवाल के बाद जिलाधिकारी को अपने आदेश में बदलाव करना पड़ा था।

इस्लाम और ईसाई पर चुप्पी, लेकिन हिन्दू धर्म पर टिप्पणी संवैधानिक अधिकार?: कांग्रेसी नेता उदित राज का ‘थेथरई’ वीडियो वायरल

    कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज के मुताबिक सिर्फ हिन्दू धर्म पर टिप्पणी उनका संवैधानिक अधिकार (चित्र साभार- आज तक)
रामचरितमानस विवाद में अब कांग्रेस प्रवक्ता डॉ उदित राज की भी टिप्पणी सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘आज तक’ की डिबेट में उन्होंने मुस्लिम या ईसाई धर्म पर कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया लेकिन हिन्दू धर्म पर टिप्पणी को अपना संवैधानिक अधिकार बताया है। एंकर द्वारा उदित राज का धर्म पूछे जाने पर उन्होंने खुद को बौद्ध बताया।

भारतीय जनमानस को ऐसे दोगले नेताओं और इनको समर्थन दे रही पार्टियों को पहचानकर उनको उनकी हैसियत दिखानी होगी। सनातन धर्म का उपहास करने वाले इस्लाम और ईसाई धर्म की कमियों पर क्यों चुप्पी साध लेते हैं? क्या इसी को लोकतंत्र कहते हैं? अभिव्यक्ति की आज़ादी एकतरफा क्यों? क्या इसी का नाम धर्म-निरपेक्षता है?

2 मिनट 3 सेकेण्ड के वायरल वीडियो में ‘आज तक’ के एंकर शुभांकर मिश्रा ने उदित राज से हिन्दू होने पर सवाल किया तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। इसके बाद उदित राज ने खुद को बौद्ध बताया। इसी वीडियो में शुभांकर ने उदित राज से ईसाई और इस्लाम पर सवाल नहीं करने का कारण पूछा तो कांग्रेस प्रवक्ता कन्नी काट गए। हालाँकि वो लगातार हिन्दू धर्म के खिलाफ बोलने की कोशिश करते रहे और इसे उन्होंने अपना संवैधानिक हक बताया।

आज तक द्वारा ये वीडियो शनिवार (4 फरवरी 2023) को शेयर किया गया। यह वीडियो 6 मिनट 38 सेकेण्ड लम्बा है। डिबेट में भाजपा की तरफ से राकेश त्रिपाठी, AIMIM की तरफ से वारिस पठान के साथ सुनील सिंह व विशाल मिश्रा नाम के 2 अन्य पैनलिस्ट भी मौजूद थे। इस बहस की शुरुआत एंकर शुभांकर मिश्रा ने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से की। उन्होंने कांग्रेस के सहयोगियों द्वारा की जा रही अशोभनीय टिप्पणियों का हवाला देकर उदित राज से स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस पर की गई टिप्पणी से संबंधित सवाल किया।

उदित राज ने इसी वीडियो में सनातन धर्म को व्यक्तिगत धर्म बताते हुए कहा कि उन्हें इस धर्म की न तो कोई किताब कहीं मिली है और न ही उसकी नियमावली। उन्होंने कहा कि इस धर्म को कुछ लोग सनातन, कुछ अन्य लोग हिन्दू तो कुछ लोग वैदिक धर्म कहते हैं, इसलिए उन्हें कुछ समझ में नहीं आता। उदित राज ने हिन्दू राष्ट्र के मुद्दे को भाजपा द्वारा वोटों का ध्रुवीकरण बताया।

डॉ उदित राज ने आगे कहा कि इस्लाम या ईसाई धर्म में कमियों से दलितों या पिछड़ों का कोई लेना-देना नहीं क्योंकि उन्हें पीड़ा जिससे है, उसी की बात की जाएगी। उदित राज का कहना था कि जिस धर्म में उन्हें छुआछूत जैसी पीड़ा मिली, वो उसी के बारे में बोलेंगे। उदित राज जैसे नेताओं को उस सच्चाई को भी जनमानस को बताना होगा कि देश विभाजन के बाद पाकिस्तान में हिन्दुओं को किस कारण और किस काम को करने के लिए रोका गया था? उदित राज सच बहुत कड़वा होता है, लेकिन सच बोलने की हिम्मत नहीं कर पाओगे। हिम्मत सिर्फ सनातन धर्म का उपहास करने की हो सकती है। भारत को उदित राज ने धर्मनिरपेक्ष बताते हुए कहा कि यह हिन्दूराष्ट्र नहीं है। इस बावत उन्होंने बाबा भीमराव अम्बेडकर का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी कल्पना भी गलत होगी।