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एक दिन में एक नहीं तीन मक्कारी भरे काम किए Justice (s) खन्ना और दत्ता ने और साबित कर दिया केजरीवाल हिंदुस्तान की किसी भी “फिरदौस” को खरीद सकता है;क्या चुनाव केजरीवाल के लिए है, हेमंत के लिए नहीं?

सुभाष चन्द्र

जस्टिस खन्ना और जस्टिस दत्ता के केजरीवाल को जमानत देने के फैसले ने साबित कर दिया केजरीवाल किसी को भी खरीद सकता है चाहे वह हिंदुस्तान की कोई “फिरदौस” ही क्यों न हो, सुप्रीम कोर्ट के एक चीफ जस्टिस ने वीएन खरे ने रिटायर होने के बाद कहा था कि “पैसा न हो तो न्याय के लिए अदालत की तरफ देखना भी गुनाह है"। आज सुप्रीम कोर्ट के बाहर लिख देना चाहिए कि “हम सब बिकाऊ हैं, खरीदने की हिम्मत होनी चाहिए”

लेखक 
चर्चित यूटूबर 
कल इन दोनों जजों के 2 और मक्कारी भरे काम नज़र आए जब कल रात सोने से पहले news portals को खंगाल रहा था। इसमें एक मामला था झारखंड के हेमंत सोरेन का और केजरीवाल का और दोनों मामले Parallel देखने चाहिए। केजरीवाल के साथ सोरेन पर चर्चा का मतलब यह नहीं है कि मैं उसके पक्ष में खड़ा हूं। दूसरा मामला था केजरीवाल गिरोह के लोगों के केस लड़ने वाले वकीलों को फीस के भुगतान का। 

आज देश सुप्रीम कोर्ट से जानना चाहता है कि जब केजरीवाल को जमानत मिल सकती है, हेमंत सोरेन को क्यों नहीं? अगर केजरीवाल का दिल्ली और पंजाब में प्रभाव है तो हेमंत का झाड़खंड और समीपवर्ती राज्यों में। क्या चुनाव केजरीवाल के लिए है, हेमंत के लिए नहीं? आरोप दोनों पर घोटाले के हैं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ खामोश क्यों? इसका मतलब है जस्टिस वी एन खरे ने जो कहा था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने ही सच साबित कर दिया। इसकी जाँच कौन करेगा? 

केजरीवाल ने कोई अंतरिम बेल की अर्जी नहीं लगाई, उसने कोर्ट में केवल अपनी गिरफ़्तारी को illegal कहा। दूसरी तरफ 29 अप्रैल को सोरेन ने illegal गिरफ़्तारी के सिवाय “अंतरिम जमानत” की भी अर्जी लगाई थी और खन्ना/दत्ता लगाई ED को उस दिन नोटिस जारी कर 6 मई तक जवाब मांगा था

उसके पहले ही 1 मई को खन्ना जी ने हल्ला ठोक दिया कि केजरीवाल को चुनाव में arrest क्यों किया और 3 मई को उन्हें एक भूत चढ़ गया और स्वतः ही केजरीवाल को Interim Bail का मामला उठा दिया। 7 मई को सुनवाई भी पूरी कर ली लेकिन Order नहीं दिया। 

उधर ED ने सोरेन पर 6 मई को जवाब तो दे दिया होगा लेकिन खन्ना जी की बेंच ने सोरेन की Interim Bail के सुनवाई की जरूरत नहीं समझी। 

अब 11 मई को खन्ना जी और दत्ता को केजरीवाल को येन केन प्रकारेण जेल से बाहर करना ही  था और कर दिया चाहे सोशल मीडिया पर जनता उन्हें कुछ भी कहे। उन्हें तो कुछ “ताकतों” का जैसे कर्ज उतरना था ऐसा लग रहा था

लेकिन 11 मई को ही हेमंत सोरेन के 2 मामले लगे थे। एक तो उसने अपील की थी कि हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ़्तारी को illegal कहने की उसकी याचिका पर फैसला करने का आदेश दिया जाए और उसकी interim bail का मामला। लेकिन खन्ना ने arrest के बारे में कह दिया कि हाई कोर्ट 3 मई को फैसला दे चुका है तो आपकी याचिका “infructuas” हो गई जिसके खिलाफ आपने दूसरी बेंच में अपील की। और दूसरी बेंच ही interim bail का मामला भी देख लेगी 13 मई को

मजे की बात है 13 मई को झारखंड में पहले चरण का चुनाव है पर उसके लिए खन्ना जी ने न सुनवाई की और न order दिए और जो चुनाव दिल्ली में 15 दिन के बाद है, उसके लिए केजरीवाल को छोड़ दिया। 

इसके अलावा केजरीवाल सरकार ने LG के 2 आदेशों और गृह मंत्रालय के एक आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसमें LG ने दिल्ली सरकार को अपनी पसंद के वकील नियुक्त करने और उनकी फीस तय करने से रोका था। इसका मतलब साफ़ है अभी वकीलों की न नियुक्ति  हुई और न उनकी फीस तय हुई लेकिन खन्ना/दत्ता ने कल 11 मई को LG को हुकुम दे दिया की सभी वकीलों  की बकाया फीस का भुगतान कर दिया जाए और इसे Prestige Issue न बनाया जाए

इस वकीलों पर फैसले से फिर से यकीन पक्का होता है कि मीलॉर्ड भी जनता के पैसे की लूट में भागीदार हो गए लगते हैं क्योंकि जब वकीलों की फीस तय ही नहीं हुई तो भुगतान क्यों? आखिर क्यों केजरीवाल पर इतने मेहरबान क्यों हैं मीलॉर्ड

दिल्ली : अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करेगी ED: मंत्री आतिशी ने बाँच दिया ‘भविष्य’, शराब घोटाले में होनी है पूछताछ

                                                                                       साभार: News18 & Telegraph India
दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने दावा किया है कि 2 नवम्बर 2023 को आम आदमी पार्टी के मुखिया एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तार कर लेगी। उन्होंने यह दावा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया है। दरअसल, केजरीवाल को ED ने 2 नवम्बर 2023 को घराब घोटालेे में पूछताछ के लिए बुलाया है।

PMLA (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत ED द्वारा जारी किए गए समन पर आतिशी ने कहा, “2 नवम्बर को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल को समन किया है। हर तरफ से खबर आ रही है कि 2 नवम्बर को जब अरविन्द केजरीवाल को बुलाएँगे, तब ED उन्हें भी गिरफ्तार करके जेल में डाल देगी।”

आतिशी ने आगे कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। यही कारण है कि झूठे आरोप बनाकर और केस लगाकर आम आदमी पार्टी के नेताओं को एक-एक करके गिरफ्तार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि वो प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलते हैं।

आतिशी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ED अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद I.N.D.I.A गठबंधन के अन्य नेता जैसे कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, केरल के सीएम पिनाराई विजय और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए ED और CBI का दुरुपयोग किया जाएगा।

हालाँकि, अभी आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सूचना नहीं है कि अरविद केजरीवाल को गिरफ्तार किया जाएगा। उनके विरुद्ध कोई वारंट भी नहीं जारी हुआ है। उन्हें ED शराब घोटाला मामले में हुई पैसों की हेराफेरी को लेकर पूछताछ करने के लिए बुला रही है। हालाँकि, आतिशी गिरफ्तार की आशंका को देखते हुए पहले ही आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।

शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को पहले ही ED गिरफ्तार कर चुकी है। मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में 9 मार्च 2023 को लम्बी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में बंद हैं। तब से कोर्ट भी उन्हें जमानत देने से इनकार करता आ रहा है। 

दिल्ली शराब घोटाला : ED ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन किया, सुप्रीम कोर्ट ने भी मानी है 338 करोड़ रूपए के लेनदेन की बात


शराब घोटाले की आँच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक पहुँच गई है। दिल्ली में AAP सरकार के मुखिया को अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन भेजा है। सोमवार (30 अक्टूबर, 2023) को ये कार्रवाई की गई। इस मामले में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह पहले से ही जेल में बंद हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी 338 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने जा जिक्र करते हुए मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

ED ने अरविंद केजरीवाल से कहा है कि वो गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को जाँच एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हों। 55 वर्षीय अरविंद केजरीवाल को PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत समन किया गया है। दिल्ली में उन्हें जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। ED ने इस मामले की चार्जशीट में कई बार अरविंद केजरीवाल के नाम का जिक्र किया है। इसमें बताया गया है कि शराब घोटाले के आरोपित उनसे संपर्क में थे।

शराब नीति बनाने और इसे लागू करने के क्रम में अरविंद केजरीवाल से ये लोग संपर्क में थे। इससे पहले अप्रैल 2023 में इसी मामले को लेकर CBI भी उन्हें समन कर चुकी है। हालाँकि, अगस्त में जब CBI ने FIR दर्ज की तो उसमें आरोपित के रूप में अरविंद केजरीवाल का नाम बतौर आरोपित नहीं शामिल किया गया था। दिल्ली की शराब नीति को विरोध के बाद वापस लिया जा चुका है। ताज़ा कार्रवाई के बाद भड़के AAP नेताओं ने मोदी सरकार पर किस्म-किस्म के आरोप लगाने भी शुरू कर दिए हैं।

मंत्री आतिशी ने दावा कर डाला कि BJP आम आदमी पार्टी से डर गई है। उन्होंने केजरीवाल को समन किए जाने को साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए ये सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम जेल जाने से नहीं डरते। वहीं दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जो अपने आप को कट्टर ईमानदार का सर्टिफिकेट देते फिरते हैं, अब उनकी काली परते खुलने लगी हैं। उन्होंने कहा कि जो सवाल दिल्ली की जनता कई महीनों से मुख्यमंत्री जी से पूछ रही है, अब उसका जवाब उन्हें देना होगा।

वीरेंद्र सचदेवा ने सवाल दागे – शराब नीति में बदलाव क्यों किया गया? 5% से 12% कमीशन क्यों की गई? 7% का किकबैक किसे मिला? इतने बड़े घोटाले का पैसा कहाँ खर्च हुआ? उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से कहती आई है कि इस घोटाले के असली साजिशकर्ता अरविंद केजरीवाल हैं। उन्होंने कहा कि खुद को ईमानदार बताने वाली इस जमात के चेहरे बेनकाब हो गए हैं। दिल्ली भाजपा ने कहा कि बहुत हुआ घोटाले का खेल, अब भ्रष्टाचारी केजरीवाल भी जाएगा जेल।

पार्टी ने कहा, “कट्टर भ्रष्ट मनीष सिसोदिया की सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब शराब घोटाले के सरगना केजरीवाल को ईडी ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उम्मीद ही नहीं हमे भरोसा है कि गली गली शराब के ठेके खोलने वाला, दिल्ली को शराब नगरी बनाने वाला, शराब की दलाली खाने वाला भी अब जल्द ही अपने अंजाम तक पहुँचेगा।” भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड अरविंद ही हैं और ‘शीशमहल’ भी इन्हीं पैसों से बना है।

छत्तीसगढ़ : 2000 करोड़ रूपए के NAN और शराब घोटाले की आँच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 6 मई 2023 को कांग्रेस नेता एवं रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था। इस घोटाले की आँच अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुँच रही है। जिन अधिकारियों की देखरेख में 2000 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ, उन्हें बचाने का आरोप मुख्यमंत्री बघेल पर लगते रहे हैं।

ED ने अनवर की गिरफ्तार के बाद कहा था कि अनवर ढेबर शराब कारोबार का सरगना है। वहीं, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा उस पैसे का प्रबंधन करते थे। एजेंसी ने दावा किया था कि शराब घोटाले की अवैध कमाई का इस्तेमाल चुनावों में किया गया। IAS टुटेजा वर्तमान में छत्तीसगढ़ के उद्योग और वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

अनिल टुटेजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास माने जाते हैं। ये वही अधिकारी हैं, जिनका नाम राज्य के NAN घोटाले में सामने आया था। हालाँकि, भूपेश बघेल ने इन पर कार्रवाई करने के बजाए, इन्हें उद्योग एवं वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव का पद दे दिया। आरोप है कि सीएम बघेल टुटेजा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

दरअसल, ED ने पहले इस मार्च में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इसके साथ ही विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान यह निकल कर सामने आया कि साल 2019 से 2022 के बीच 2000 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के किया गया है। ED ने इसके सबूत भी एकत्र किए हैं।

ED का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग जाँच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर की आड़ में उच्च स्तर के राजनीतिक अधिकारियों और नौकरशाहों द्वारा अवैध काम को अंजाम दिया जा रहा था। इसके लिए उन लोगों ने व्यक्तियों एवं संस्थाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।

दरअसल, अनवर ढेबर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बेहिसाब देसी शराब बनवाना शुरू किया था और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचता था। इस तरह वह सरकारी खजाने में एक रुपए भी जमा किए बिना बिक्री की सारी आय खुद रख लेता था। 2019 से 2022 के बीच यह अवैध बिक्री राज्य की कुल शराब बिक्री का लगभग 30-40 प्रतिशत थी।

इस घोटाले को तीन तरीके से अंजाम दिया गया। पहला सरकारी शराब की बोतलों पर 70-150 रुपए प्रति केस अनवर दुकानदारों से कमीशन लेता था। दूसरे पैटर्न में वह नकली शराब बनाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाता था और उसका पैसा खुद रखता था। तीसरा पैटर्न था कि लाइसेंस में कमीशन लेता था। यह एक वार्षिक कमीशन था, जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था।

छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री 800 सरकारी दुकानों के जरिए की जाती है। निजी दुकानों को शराब बेचने का अधिकार नहीं है। दुकान चलाने वाले लोगों के मैन पावर से लेकर कैश कलेक्शन तक का काम राज्य की सरकारी कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) देखती है। अनवर ढेबर अपने राजनीतिक आकाओं एवं अधिकारियों के सहयोग से CSMCL के एक आयुक्त और एमडी तक पहुँच बनाने में कामयाब हो गया।

ईडी का कहना है कि सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह, नेता और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। फरवरी 2019 में ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी राज्य सरकार के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) में शामिल हुए। ढेबर के कहने पर तीन महीने के भीतर त्रिपाठी को इसका प्रबंध निदेशक बना दिया गया। त्रिपाठी का काम था- रिश्वत संग्रह को अधिकतम करना। आईएएस अधिकारी विकास अग्रवाल पैसा इकट्ठा करने और आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को रसद इकट्ठा करने के काम में लगाया गया था।

इस सिंडिकेट में मैनपावर का इस्तेमाल अग्रवाल के एक सहयोगी की कंपनी सुमसेट फैसिलिटीज लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी। होलोग्राम का ठेका प्रिज्म होलोग्राफी एंड फिल्म्स सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कैश कलेक्शन का काम टॉप्स सिक्योरिटीज को दिया गया था, जिसके मालिक सिद्धार्थ सिंघानिया थे, जो अग्रवाल के करीबी सहयोगी थे।

जाँच में ED ने पाया कि मार्च 2019 में देशी शराब निर्माता कंपनी छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने ढेबर और त्रिपाठी से मुलाकात की। डिस्टिलर्स को 75 रुपए प्रति केस कमीशन देने का आदेश दिया गया। बदले में ढेबर ने अपनी उधार दरों को बढ़ाने का वादा किया। सिंडिकेट ने कमीशन में एक बड़ी राशि एकत्र की। इसका एक बड़ा हिस्सा एक राजनीतिक दल को दिया गया था।

इतना सब कुछ फिक्स करने के बाद सिंडिकेट ने बेहिसाब कच्ची शराब बनाना शुरू कर दिया। इसे सरकारी दुकानों पर बेचा जा रहा था। इन कच्ची शराब को असली दिखाने के लिए इन पर डुप्लीकेट होलोग्राम भी लगाया गया। डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं और एक डिस्टिलर को सप्लाई की गईं, जो उन्हें भरने का काम करता था।

ढेबर ने मासिक लक्ष्य निर्धारित किए। डिस्टिलर्स द्वारा हर महीने 800 पेटी देशी शराब से लदे 200 ट्रकों की आपूर्ति की जाती थी। 560 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से शराब की सप्लाई की जाती थी। एमआरपी 2,880 रुपए प्रति केस था। बाद में इसे बढ़ाकर 3,880 रुपए कर दिया गया।

इसके अलावा, विदेशी शराब की माँग को देखते हुए और विदेशी शराब निर्माताओं से पैसे लेने में आने वाली समस्याओं को देखते हुए Fl-10A लाइसेंस को लाया गया। यह ढेबर के तीन परिचितों को मिला। इन लोगों ने विदेशी शराब खरीदने के लिए बिचौलियों की तरह काम किया और इसे सरकारी गोदामों में बेच दिया और विदेशी शराब निर्माताओं से लगभग 10% का कमीशन प्राप्त किया।

ED ने पाया कि इस सिंडिकेट की ‘ऊपर’ तक पहुँच थी। इसमें अन्य कई नेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने की आशंका है, जिसकी जाँच केंद्रीय एजेंसी कर रही है। उधर भाजपा ने सीएम भूपेश बघेल की सरकार पर हमला बोला है। भाजपा ने कहा, “भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला… भूपेश जी, जरा आँख उठाकर बताइये तो सही, कितना बँटा और कितना घर पहुँचा?”

विवादित IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और NAN

साल 2015 में रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर कॉन्ग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद रमन सिंह की सरकार ने आरोपों की जाँच का आदेश दिया था। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने NAN (नागरिक आपूर्ति निगम या सार्वजनिक वितरण निगम घोटाला) घोटाले का पर्दाफाश किया।
इस घोटाले में 27 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, उनमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित थे। साल 2015 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद राज्य में चुनाव हुए और सत्ता बदल गई। कॉन्ग्रेस की सरकार आते ही शुक्ला और टुटेजा के लिए चीजें बदल गईं।
टुटेजा पर लगे आरोपों को अनुचित बताते हुए बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एक SIT का गठन किया। तब से टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को घोटाले में फँसाने की कोशिश की जा रही है। साल 2020 में टुटेजा को मामले में जमानत दिए जाने के तुरंत बाद उन्हें बघेल सरकार ने वाणिज्य और उद्योग का संयुक्त सचिव बना दिया। वहीं, शुक्ला को शिक्षा व अन्य विभागों का प्रभारी प्रमुख सचिव बनाया गया है।
भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा था कि भूपेश बघेल की सरकार ने SIT के प्रमुख GP सिंह को कहा था कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनकी पत्नी और तत्कालीन प्रमुख सचिव अमन सिंह को फँसाना है। जब जीपी सिंह ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उन्हें साजिश रचने का अभियुक्त बनाकर उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई।
राजेश मूणत ने कहा था कि भाजपा नेताओं को फँसाने के लिए अधिकारी चैट करते थे। इसमें आलोक शुक्ला निर्देश देते थे और अनिल टुटेजा इसे इसका संचालन करते थे। मूणत ने कहा कि आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा से कॉन्ग्रेस के क्या रिश्ते हैं, ये पार्टी को बताना चाहिए।

ऑपइंडिया को मिले ह्वाट्सएप चैट से हुआ था खुलासा

फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान IPS अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के फोन जब्त कर लिए गए थे। व्हाट्सएप पर टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ चैट में विभाग को कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। ऑपइंडिया के पास भी यह एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप उपलब्ध है। चैट में टुटेजा के एसआरपी कल्लूरी, इंदिरा कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख जैसे अधिकारियों के साथ की गई बातचीत उपलब्ध है।
चैट में उपलब्ध बातचीत से यह साफ हो गया है कि अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के इशारे पर राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। व्हाट्सएप चैट से यह भी स्पष्ट होता है कि कैसे राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी NAN घोटाले के मुख्य अभियुक्तों के सहायक बनकर रह गए हैं। चैट से पता चलता है कि राज्य के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला आरोपित टुटेजा के साथ मिलकर उनके केस को कमजोर करने और उनके विरोधियों पर मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रच रहे थे।
राज्य के एक प्रमुख आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह द्वारा दिए गए शपथ पत्र और अनिल टुटेजा के साथ हुई व्हाट्सएप चैट से भी मामले में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जानकारी के मुताबिक आलोक शुक्ला के निर्देशन में अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, अन्य बड़े पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिलकर राजनीतिक विरोधियों की एक हिटलिस्ट तैयार की थी।
मुख्यमंत्री बघेल न सिर्फ टुटेजा की मदद कर रहे थे बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे अधिकारियों को भी फँसाने की कोशिश कर रहे थे।
19 अक्टूबर 2022 को छत्तीसगढ़ के NAN घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दावा किया कि मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत है। जो उन्हें बचाने की कोशिश में लगे हैं। ईडी ने मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने की अपील की थी।

CBI-ED पर 14 विपक्षी दलों ने मुँह की खाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नेताओं के लिए अलग नियम नहीं बना सकते

                      सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की, कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी थे वकील
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (5 अप्रैल, 2023) को 14 राजनीतिक पार्टियों द्वारा दर्ज की गई याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ED और CBI जैसी जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि मोदी सरकार विरोध के स्वर को दबाने के लिए ED-CBI का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रही है, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पार्डीवाला की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वो तथ्यात्मक परिप्रेक्ष्य के बिना कोई सामान्य निर्देश जारी नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि अगर किसी का कोई व्यक्तिगत मामला हो, तभी वो याचिका को सुन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी सलाह दी कि राजनेता खुद को आम जनता से ऊपर नहीं रख सकते, इसीलिए उनके मामलों में कोई विशेष दिशानिर्देश जारी नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को अपना काउंसल वकील बना रखा था। जब उन्होंने देखा कि सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई को तैयार नहीं है, इसीलिए उन्होंने याचिका वापस ले ली। उन्होंने कुछ आँकड़े दिखा कर दावा किया कि जाँच एजेंसियों का इस्तेमाल सिलेक्टेड और टार्गेटेड मामलों में किया जा रहा है। उन्होंने गिरफ़्तारी, रिमांड और जमानत के लिए ऐसे मामलों में अलग से दिशानिर्देश जारी किए जाने की माँग की थी।

इन पार्टियों की माँग की कि गिरफ्तारी से पहले ये देखा जाए कि आरोपित के फ्लाइट से भागने की आशंका है या नहीं, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है या नहीं और ऐसे मामलों में अदालतों ने पहले गिरफ़्तारी को सही ठहराया है या नहीं। जाँच के लिए हाउस अरेस्ट की सलाह भी दी गई थी। दावा किया गया कि लोकतंत्र में ये विषम है, केवल विपक्ष पीड़ित है। हालाँकि, CJI ने कहा कि राजनेताओं को आम आदमी से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

बंगाल भर्ती घोटाला, वकील का दावा: 6वीं पास भी बना टीचर

        घोटाले की लिस्ट तथा सीएम ममता के साथ पार्थ और अर्पिता (फोटो साभार: दैनिक भास्कर एवं इंडिया टुडे)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  की कैबिनेट के पूर्व सहयोगी पार्थ चटर्जी जिस शिक्षक भर्ती (Teacher Recruitment Scam) में गिरफ्तार हुए हैं, उसकी परतें खुलने लगी हैं। मामले में गिरफ्तार अर्पिता मुखर्जी सहित TMC के कई नेताओं ने अपने-अपने लोगों की नौकरी की सिफारिश की थी।

खबर सामने आ रही है कि साल 2014 के इस घोटाले को कई तरह से अंजाम दिया गया था। इसमें बिना मेरिट वालों को नौकरी दी गई। जो छठी कक्षा पास थे, उन्हें भी टीचर बना दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्होंने एग्जाम ही नहीं दिया, उनका भी सिलेक्शन हो गया था।

जब छठी पास को अध्यापक बनाया जाना साबित करता है कि भर्ती में कितना जबरदस्त घोटाला होता है और यह काम होता है दलालों के माध्यम से, कोई सीधा मंत्री के पास तो पहुँच नहीं सकता। क्या सरकार दलालों को भी गिरफ्तार करेगी? क्योकि बिना दलालों पर कार्यवाही किये बिना भ्रष्टाचार पर काबू नहीं किया जा सकता। 

इन भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लिए गए। इस भर्ती घोटाले से संबंधित तीन सूची सामने आई है। इसकी एक लिस्ट किसी एजेंट की बताई जा रही है। इस लिस्ट में उन लोगों के नाम दिए गए हैं, जिनसे रिश्वत ली गई थी। इसमें उनके नाम, मोबाइल नंबर और कितना पैसा लिया गया है, दर्ज है।

इसके साथ ही एक दूसरी लिस्ट है। यह लिस्ट बंगाल के सत्ताधारी दल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायकों से जुड़ी है। इसमें उन विधायकों और मंत्रियों के नाम दिए गए हैं, जिन्होंने उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया था।

दैनिक भास्कर ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया है कि TMC नेता मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय, पार्टी के राज्य सचिव असीम माझी और अखिल गिरी के साइन किए हुए अलग-अलग लेटर मिले हैं। ये पत्र साल 2013 में लिखे गए हैं और इनमें परीक्षार्थियों के नाम और उनके रोल नंबर लिखकर भर्ती बोर्ड को भेजे गए थे।

यह बात भी सामने आई है कि पार्थ चटर्जी के पूर्व बॉडीगार्ड के परिवार के 13 लोगों को शिक्षा विभाग में नौकरी दी गई है। इनमें एक महिला ऐसी भी है, जो छठी पास है। इसी तरह अर्पिता की सिफारिश पर भी उसके कई रिश्तेदारों को नौकरी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पिटीशन दाखिल करने वाले वकील तरुण ज्योति तिवारी ने बताया कि शिक्षक भर्ती का पैसा TMC के कई नेताओं के जरिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री तक पहुँच रहा था। तिवारी के मुताबिक, यह पूरा घोटाला 5,000 करोड़ का है, क्योंकि हर कैंडिडेट से 18-20 लाख रुपए लिए गए और यह सब पिछले 10 साल से चल रहा था।

हाईकोर्ट के निर्देश पर इस भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। दूसरी तरफ, भर्ती प्रक्रिया में शामिल विद्यार्थी पिछले 503 दिनों से कोलकाता के मेयो रोड पर कोर्ट की अनुमति के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। हालाँकि, इन अवैध भर्ती वालों में से अभी तक किसी को हटाया नहीं गया है।

पैसों की जानकारी पार्टी में सभी टॉप नेताओं को, जो बरामद हुआ… वह सिर्फ छोटा सा हिस्सा: पार्थ चटर्जी

                                                  पार्थ चटर्जी ने भ्रष्टाचार मामले में सबको लपेटा
पार्टी से सस्पेंड कर दिए गए TMC नेता पार्थ चटर्जी सुर्खियों में हैं। ममता सरकार में मंत्री रहे पार्थ की करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी में करोड़ों रुपए नकद और सोना बरामद किया। अब पार्थ चटर्जी का कहना है कि इन पैसों की जानकारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में सभी शीर्ष नेताओं को थी। आपको बता दें कि TMC की सबसे बड़ी नेता और सर्वेसर्वा ममता बनर्जी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पूछताछ में अर्पिता मुखर्जी ने बताया था कि पार्थ उनके फ्लैटों को बैंक की तरह प्रयोग करते थे। फिलहाल पार्थ चटर्जी गिरफ्तार हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया है कि उनके द्वारा लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में सभी शीर्ष नेताओं को थी।

पैसों के बारे में TMC के टॉप लीडर को सब पता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी से सस्पेंड होने और मंत्री पद से हटा दिए जाने के बाद पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को खुद ही सब कुछ बताना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा:
“स्कूल में अध्यापक बनाने के नाम पर कैंडिडेट्स से लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में शीर्ष नेतृत्व सहित बाकी सबको थी। मैंने तो सिर्फ पैसों को अपने पास रखा था। न ही मैंने किसी कैंडिडेट से पैसे लिए और न ही माँगे। यह पार्टी का एक आदेश था, जिसे मैंने माना। पैसे कई अन्य नेताओं ने भी लिए, जो सब मुझे रखने को दे दिया गया था।”

जो मिला वो तो एक छोटा सा हिस्सा

पार्थ चटर्जी ने आगे कहा, “जो पैसे मेरे पास रखे हुए थे, उसमें से सैकड़ों करोड़ रुपए पार्टी ने प्रयोग कर डाले। मेरे पास जो बरामद हुआ, वह तो एक छोटा सा हिस्सा है। मेरे अलावा कई अन्य नेताओं ने अपने पैसे से अर्पिता मुखर्जी के नाम पर जमीनें खरीदी हैं। सबके पैसे मेरे पास रखने के लिए पार्टी ने लम्बा समय विचार करने में लिया था। अब पार्टी द्वारा मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया गया है।”

टीचरों के अलावा रेलवे में नौकरियों के लिए भी पैसे

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को जानकारी दी है कि न सिर्फ टीचरों बल्कि रेलवे की नौकरियों के लिए भी TMC नेताओं ने कैंडिडेट्स से पैसे लिए हैं। उन्होंने बताया, “मेरा काम दूसरे नेताओं द्वारा बनाए गए कागजातों पर साइन करने तक सीमित था। मजेरहाट इलाके में बाकायदा ऐसी डील करने के लिए ऑफिस खोले गए हैं। रेलवे की नौकरियों के नाम पर भी पैसे जमा किए गए हैं।”
पार्थ चटर्जी के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जब सत्ता में नहीं थी, तब भी वो पैसे लेकर नौकरी लगा देने के खेल खेलती थी। तृणमूल को पैसे देकर रेलवे में कई लोगों ने नौकरी जॉइन की है। पार्थ चटर्जी की मानें तो शिक्षा और रेलवे के अलावा भी कई अन्य विभागों में पैसे लेकर नौकरी देने का भ्रष्टाचार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने किया है।

अर्पिता को उसके पैरों पर खड़ा करना चाहता था

अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयां की। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने बताया: “मैं अर्पिता को आत्मनिर्भर बनाना चाहता था। मैं चाहता था कि वो मॉडलिंग और फिल्म इंडस्ट्री में अपना खुद का मुकाम हासिल करे। पार्टी को अपने ढेर सारे पैसे छिपाने के लिए एक सेफ जगह की तलाश थी। इस काम के बदले अर्पिता को कमीशन देने का वादा किया गया था। कई बड़े अधिकारी अर्पिता के नाम पर लिए गए घरों का दौरा भी कर चुके हैं।”

पहली बार नहीं लगा पैसे के बदले नौकरी का आरोप

नौकरी के बदले पैसे का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर पहली बार नहीं लगा है। अप्रैल 2022 में भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने TMC कार्यकर्ताओं पर मेडिकल कॉलेजों में ग्रुप बी, सी कैटेगरी में नौकरी दिलाने का झाँसा देकर पैसे लेने का आरोप लगाया था। भाजपा नेता के मुताबिक तब टीएमसी पार्षद ने लगभग 530 ऐसे लोगों को 50 हजार रुपए से 1 लाख रुपए के बीच में ठगा था, जो गरीब परिवारों से आते थे।

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला : ईडी की छापेमारी में घर से मिले 20 करोड़ रूपए और 20 मोबाइल

                              ममता और पार्थ चटर्जी के साथ अर्पिता मुखर्जी (फोटो साभार: नई दुनिया)
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्री जनता को लूटने में लगे हैं। इसका खुलासा प्रवर्तन निदेशालय ने किया है। ईडी ने शनिवार (23-07-2022) को शिक्षक भर्ती घोटाले में ममता सरकार में मंत्री और तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में ले लिया है। एक दिन पहले ही ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापेमारी की थी, जिसमें करीब 20 करोड़ रुपये के कैश मिले। ईडी ने एक बयान में कहा क‍ि ये कैश शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े हो सकते हैं।

ईडी की छापेमारी से सु्र्खियों में आई अर्पिता मुखर्जी की बात करें तो वो बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुकी हैं, हालांकि बेहद कम समय के लिए। अर्पिता मुखर्जी ने अपने फिल्मी कॅरियर में ज्यादातर साइड रोल ही किए हैं। उन्होंने बांग्ला फिल्मों के अलावा ओडिया और तमिल फिल्मों में भी काम किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्थ चटर्जी दक्षिण कोलकाता में एक दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक हैं। यह कोलकाता की बड़ी दुर्गापूजा समितियों में एक है। अर्पिता भी इसी दुर्गापूजा समिति से जुड़ी रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान कई बार पूजा पंडलों में लगे पोस्टरों पर उनका नाम अध्यक्ष के रूप में लिखा देखा गया था। दुर्गापूजा समिति के माध्यम से अर्पिता मुखर्जी पार्थ चटर्जी के करीब आईं।

ईडी के अधिकारी शुक्रवार सुबह पार्थ चटर्जी के घर पहुंचे थे और उनसे एसएससी घोटाले की जांच के सिलसिले में पूछताछ शुरू की थी। करीब 26 घंटे तक पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के दो मंत्रियों समेत करीब एक दर्जन लोगों के घरों पर शुक्रवार को एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ रुपये कैश मिले। ईडी अधिकारियों को 500 और 2000 के नोटों को गिनने के लिए काउंटिंग मशीन की मदद लेनी पड़ी।

ममता बनर्जी की टीएमसी ने भले ही एक आधिकारिक बयान जारी कर खुद को इस घोटाले से दूर कर लिया हो, लेकिन बीजेपी नेता सुवेंदू अधिकारी सरकार को घेर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ रुपये मिले हैं। वे पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की खास सहयोगी हैं। जानकारी तो ये भी मिली है कि ये पैसा शिक्षा मंत्रालय के लिफाफे में पड़ा मिला है। उस लिफाफे पर भी राष्ट्रीय स्मारक का लोगो प्रिंट किया हुआ है। क्या ये मामले का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है?

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदारी ने तो इसे बंगाल का मॉडल बता दिया। उनके मुताबिक टीएमसी ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। टीएमसी अभी पूरे मामले को करीब से देख रही है। समय आने पर प्रतिक्रिया दी जाएगी। कहा गया है कि जांच में जिनके भी नाम सामने आए हैं, जवाब देना उनका और उनके वकीलों का काम है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर ईडी की टीम पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग भर्ती घोटाले के आरोपी पार्थ चटर्जी के घर पहुंची थी। जब यह कथित घोटाला हुआ था, तब चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे। पार्थ चटर्जी अभी उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री हैं। सीबीआई दो बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। पहली बार 25 अप्रैल को और दूसरी बार 18 मई को पूछताछ की गई थी। प्रवर्तन निदेशालय इस घोटाले में कथित रूप में शामिल लोगों के खिलाफ धनशोधन संबंधी पहलू की जांच कर रहा है। ईडी की रडार पर और भी लोग शामिल हैं। उनके खिलाफ भी छापेमारी जारी है। 

ईडी की छापेमारी से सु्र्खियों में आई अर्पिता मुखर्जी की बात करें तो वो बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुकी हैं, हालांकि बेहद कम समय के लिए। अर्पिता मुखर्जी ने अपने फिल्मी कॅरियर में ज्यादातर साइड रोल ही किए हैं। उन्होंने बांग्ला फिल्मों के अलावा ओडिया और तमिल फिल्मों में भी काम किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्थ चटर्जी दक्षिण कोलकाता में एक दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक हैं। यह कोलकाता की बड़ी दुर्गापूजा समितियों में एक है। अर्पिता भी इसी दुर्गापूजा समिति से जुड़ी रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान कई बार पूजा पंडलों में लगे पोस्टरों पर उनका नाम अध्यक्ष के रूप में लिखा देखा गया था। दुर्गापूजा समिति के माध्यम से अर्पिता मुखर्जी पार्थ चटर्जी के करीब आईं।

मेधा पाटकर के NGO : 20 अकाउंट, एक ही ​दिन में हर खाते से आए 596294 रुपए

मेधा पाटकर (फाइल फोटो/ साभार: TNIE)
एक गैर सरकारी संगठन (NGO) है। नाम है- नर्मदा नवनिर्माण अभियान (NNA)। इसकी मुख्य ट्रस्टी हैं मेधा पाटकर। जी हाँ, वही स्वयंभू सामाजिक/पर्यावरण कार्यकर्ता मेधा पाटकर जो नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan) की प्रवर्तक रहीं हैं।आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि इस एनजीओ के खाते में एक ही दिन 20 अलग-अलग खातों से एक समान रकम आई। अब यह कोई संयोग है या गोलमाल, इसकी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जाँच शुरू की है। संदिग्ध लेनदेन को लेकर शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर ली है। हैरत की बात यह भी है कि यह मामला करीब 17 साल तक दबा रहा।

मामला साल 2005 का है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 5 मार्च 2004 को इस NGO का बृहन्मुंबई चैरिटी कमिश्नर के पास रजिस्ट्रेशन हुआ। 18 जून 2005 को NGO के बैंक ऑफ़ इंडिया के अकाउंट नंबर 001010100064503 से 1,19,25,880 रुपए का चंदा आया। इस लेन-देन को लेकर मिली शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय एजेंसियों ने जाँच शुरू की है। ईडी के अलावा राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और आयकर विभाग में भी अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गई हैं।

                            मेधा पाटकर के NGO का अकाउंट डिटेल (फोटो साभार: dailypioneer)

18 जून 2005 को 20 अलग-अलग खातों से NGO को दान मिला। हैरानी की बात यह है कि सभी खातों से आई राशि एक समान थी। इन सभी 20 खातों से NGO के खाते में 5,96,294 रुपए की राशि आई। इस तरह एक ही दिन में 1,19,25,880 रुपए राशि आई। इससे भी हैरत की बात तो यह है कि दान देने वालों में एक नाबालिग भी शामिल थी, जिसका नाम पल्लवी प्रभाकर भेलकर बताया गया है। वह उस समय नाबालिग थी। इसके अलावा NGO को मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) से जनवरी 2020 से मार्च 2021 तक लगभग 62 लाख रुपए का दान भी मिला। यह दान 6 बार में अलग-अलग तारीखों को किया गया था।

मेधा पाटकर के खिलाफ शिकायत करने वाले संजीव झा हैं। उन्होंने कहा कि लेन-देन का यह डिटेल गंभीर सवाल उठाता है कि कैसे 20 अलग-अलग लोगों ने एक ही दिन में एक समान राशि जमा की। आमतौर पर फंडिंग राउंड फिगर में किया जाता है लेकिन इन डोनर्स को इतने विषम अंकों में पैसा जमा करने के लिए किसने प्रेरित किया, यह भी जाँच का विषय है। यह एक संगठित सिंडिकेट फंडिंग की ओर भी इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि देश के हर परियोजना/नीति का विरोध करने का पाटकर और उनके NGO का इतिहास रहा है। चाहे वह सरदार सरोवर परियोजना हो, परमाणु परियोजनाएँ हों, कोयला खदान परियोजनाएँ हों या फिर हाल ही में CAA और केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानून। मेधा पाटकर ने मोदी सरकार की हर परियोजना का मुखरता से विरोध किया है। बता दें कि इससे पहले संजीव झा की शिकायत पर मुंबई पासपोर्ट अधिकारियों ने मेधा पाटकर का पासपोर्ट जब्त कर लिया था।

PFI नेताओं के विदेशों में बार रेस्टोरेंट, ED की छापेमारी में कई संपत्तियों के मिले सबूत

                                      PFI नेताओं के आबूधाबी में बार और रेस्टोरेंट सहित कई संपत्तियाँ
देश विरोधी गतिविधियों के लिए कुख्यात पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई कार्रवाई में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पीएफआई के नेताओं और पदाधिकारियों के केरल स्थित चार ठिकानों पर 8 दिसंबर की गई छापेमारी में उनके विदेशों में बीयर बार और रेस्टोरेंट सहित कई संपत्तियाँ के ठोस प्रमाण मिले हैं। इस दौरान पीएफआई के सदस्यों ने छापेमारी में बाधा डालने का प्रयास किया, लेकिन केंद्रीय पुलिस बल (सीआरपीएफ) की मौजूदगी के कारण वे इसमें सफल नहीं हो सके।

ईडी ने बताया कि पीएफआई के सदस्य शफीक पेयथ के घर, पीएफआई के मलाप्पुरम में पेरमपादप्पु के डिविजनल अध्यक्ष बीपी अब्दुल रजाक, एर्नाकुलम के मुवाट्टुपुझा में पीएफआई नेता एमके अशरफ उर्फ तमर अशरफ के मुन्नार के मनकुलम स्थित मुन्नार विला विस्टा परियोजना परिसर पर छापेमारी की गई। इस दौरान एजेेंसी को कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, विदेश से धन प्राप्त करने और विदेश में संपत्ति रखने के सबूत मिले।

ईडी ने बताया कि छापेमारी में बरामद किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि मुन्नार विला विस्टा परियोजना सहित केरल में विभिन्न परियोजनाओं के जरिए पीएफआई मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त है। ईडी ने अपने बयान में कहा, “पीएफआई के नेताओं द्वारा अबू धाबी में बार और रेस्टोरेंट सहित विदेश में संपत्तियाँ जमा करने के मामले संज्ञान में आए हैं। इसकी जाँच की जा रही है।”

दरअसल पीएफआई के खिलाफ ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही है। पीएफआई पर समाज में उन्माद फैलाने और देश विरोधियों गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में सीएए विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में भी इसकी भूमिका सामने आई थी। विरोध को उकसाने, सरकार के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काने, सिमी से नजदीकी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों के कारण पीएफआई और इसकी राजनीतिक इकाई एसडीपीआई सरकारी एजेंसियों के रडार पर है।

इस पर केरल में हत्याएँ करने, हथियार रखने, बम बानने से संबंधित दस्तावेज मिले थे। इसके बाद इस पर अलकायदा जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ संबंध होने के आरोप लगे। इतना ही नहीं, केरल सहित दक्षिण भारत में लव जिहाद को बढ़ावा देने के भी इस आरोप लगे हैं। कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और इसकी देश विरोधी गतिविधियों देेखते हुए साल 2012 से ही इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग उठ रही है।

पीएफआई खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाला संगठन बताता है। इस संगठन की जड़ें केरल के कालीकट में और मुख्यालय नई दिल्ली में है। नवभारत टाइम्स के अनुसार, दिल्ली के गोकुलपुरी स्थित जन्नते मस्जिद के प्रेसिडेंट खुर्शीद अंसारी का कहना है कि किसी भी मुसलमान के लिए शराब या उसका कारोबार वर्जित है। उन्होंने कहा कि शराब का बिजनस इस्लाम में बिल्कुल हराम है।

महाराष्ट्र : शिव सेना सांसद ने अपनी ही मिल को कंगाल घोषित कर खुद खरीद लिया, जिस बैंक से डील वो भी खुद का ही

                                                       शिवसेना सांसद भावना गवली 
जब भी देश में चुनाव होते हैं, भ्रष्टाचार का मुद्दा खूब उछाला जाता है, जबकि सबसे बड़े घोटाले ये ही नेता ईमानदारी का चोला ओड कर करते हैं। नेताओं के इतने घोटाले सामने आने के बाद भी जब जनता इनको वोट देकर जिताती है तो भ्रष्टाचार की जिम्मेदार जनता ही है। आज देश में कौन-सा विभाग भ्रष्टाचार मुक्त है? पांच साल में निर्वाचित सदस्यों की तिजोरियां इतनी भर जाती हैं, कम से कम दो पीढ़ी को नौकरी की जरुरत नहीं। जनसेवकों को पेंशन क्यों? इतनी मुफ्त सुविधाएं क्यों? जब एक दसवीं फेल किसी ऑफिस में चपरासी नहीं बन सकता, फिर नेताओं के लिए शिक्षा की अनिवार्यता क्यों नहीं? 

महाराष्ट्र से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ शिवसेना सांसद भावना गवली ने अपनी ही मिल को कंगाल घोषित कर के उसे औने-पौने दाम में खुद ही खरीद लिया। मामला एक चीनी मिल का है, जिसका नियंत्रण यवतमाल-वाशिम लोकसभा क्षेत्र की शिवसेना सांसद भावना गवली के परिवार के पास है। उन्होंने अपनी चीनी मिल के लिए एक बड़ा लोन लिया, इसके बाद कंपनी को कंगाल घोषित कर दिया। उन्होंने खुद ही ‘Liquidator’ बन कर इस कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में इसे कंगाल घोषित करवाया।

इसके बाद शिवसेना सांसद ने अपनी ही एक अन्य कंपनी के जरिए उस कंगाल घोषित चीनी मिल को औने-पौने दाम में खरीद लिया। स्पष्ट है, ऐसा इसीलिए किया गया क्योंकि उन्होंने चीनी मिल के जरिए बैंक के लोन को नहीं चुकाया। ये सब हमारा नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का कहना है। इस मामले में जाँच एजेंसी ने भावना गवली के अलावा उनके सहयोगी सईद खान के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। भावना गवली यवतमल-वाशिम से लगातार तीसरी बार सांसद बनी हैं।

उससे पहले इस लोकसभा क्षेत्र का नाम वाशिम था। तब भी 1999 और 2004 में भावना गवली ने यहाँ से बतौर सांसद उम्मीदवार जीत दर्ज की थी। इस तरह वो 2024 में बतौर सांसद 25 वर्ष पूरे कर लेंगी। फ़िलहाल वो महाराष्ट्र की सब वरिष्ठ लोकसभा सांसद हैं। ये भी जानने लायक बात है कि अपनी अन्य कंपनी के जरिए अपनी ही कंगाल चीनी मिल को खरीदने वाली भावना गवली के इस करार को एक जिस बैंक के माध्यम से पूरा किया गया, वो भी उनका ही था।

ED इस ‘श्री बालाजी सहकारी पार्टिकल कारखाना डील’ की जाँच कर रही है। अगस्त 2021 में उनके कई ठिकानों पर जाँच एजेंसी ने छापेमारी भी की। स्पेशल PMLA कोर्ट में दायर की गई चार्जशीट में ED ने इस गड़बड़झाले का खुलासा किया है। ‘श्री बालाजी सहकारी पार्टिकल लिमिटेड’ की स्थापना भावना गवली के पिता पुण्डरीकराव गवली ने की थी। 72 वर्षीय पुण्डरीकराव गवली खुद भी वाशिम से 1996 में सांसद रह चुके हैं। मिल की स्थापना उन्होंने 1992 में की थी।

1997 से 2001 के बीच इस मिल ने ‘नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन बैंक’ से 43 करोड़ रुपए का लोन ले लिया। पुण्डरीकराव तब इस मिल के चेयरमैन हुआ करते थे। जिस प्रोजेक्ट के लिए ये लोन लिया गया था, उसे पूरा नहीं किया जा सका। मिल के प्रबंधन ने इसके बाद एक लिक्विडेटर की नियुक्ति की, जो 35 एकड़ वाले इस मिल को नीलाम करेगी। नीलामी से बैंक को लोन चुकाना था। पुण्डरीकराव ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर के अपनी बेटी को ही लिक्विडेटर बोर्ड का अध्यक्ष बनवा दिया।

इसके बाद लिक्विडेटर ने अख़बारों में एक विज्ञापन निकाला। इसके बाद ‘भावना एग्रो प्रोडक्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ को इस मिल को खरीदने का पात्र बता कर चुना गया। इस कंपनी का नियंत्रण उसके ही पास था। कंपनी को ये मिल 7.09 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। इसके बाद मिल की 35 एकड़ जमीन को भी ‘महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान ट्रस्ट’ को बेच दिया गया। इस कंपनी का नियंत्रण भी गवली परिवार के पास ही है। इसके बाद इस ट्रस्ट को एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी में बदल दिया गया।

11 ट्रस्टियों वाले इस ट्रस्ट को नॉन-प्रॉफिट कंपनी में बदलने के लिए ‘कंपनी एक्ट’ के सेक्शन-8 का इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत भावना गवली की माँ शालिनी और सहयोगी सईद खान को डायरेक्टर नियुक्त किया गया। इसके माध्यम से गवली परिवार इस 35 एकड़ जमीन का स्वामी बन गया। ED ने पाया है कि ये ट्रस्ट 22 शैक्षिक संस्थान चलाता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल कॉलेज भी शामिल हैं। ये ट्रस्ट हर साल डोनेशन के रूप में हर साल कैश में 20 करोड़ रुपए जुटाता है।

‘भावना एग्रो प्रोडक्ट एंड सर्विसेज’ के निदेशकों में से एक अशोक गंडोले ने ED को अपने बयान में बताया कि अप्रैल 2010 में ये कंपनी बनी और उसी साल अगस्त में मिल को खरीद लिया। इस दौरान 75 लाख रुपए दिए गए और बाकी के 6.84 करोड़ रुपए के लिए बैंक गारंटी दी गई। जिस ‘रिसोड अर्बन कोऑपरेटिव बैंक’ की गारंटी दी गई, उसका प्रबंधन भी गवली परिवार के पास ही है। ट्रस्ट को कंपनी में बदलने के दौरान भी 18 करोड़ रुपए की गड़बड़ी के आरोप हैं।

सुकेश चंद्रशेखर ने अमित शाह के ऑफिस नंबर को किया था ‘स्पूफ’

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 200 करोड़ रुपए की रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज का भी जिक्र है। इसमें बताया गया है कि कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर ने किस तरह जैकलीन को दोस्ती के लिए अप्रोच किया।

जयललिता के परिवार से!

ईडी के चार्जशीट के मुताबिक, ठग सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज से दोस्ती करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय नंबर को ‘स्पूफ’ करके फोन किया। उसने यह दावा किया कि वह तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता के “राजनीतिक परिवार” से है। ईडी ने धनशोधन रोधी कानून (PMLA) के तहत दाखिल आरोपपत्र में यह जानकारी दी है।

क्या होता है कॉल स्पूफ

‘कॉल स्पूफ’ का अर्थ होता है कि फोन की घंटी बजने के दौरान फोन करने वाले का वास्तविक नंबर नहीं, बल्कि किसी और का नंबर दिखता है।
ईडी ने कहा, “दिसंबर, 2020 और जनवरी, 2021 में कई हफ्तों से जैकलीन फर्नांडीस से संपर्क करने की कोशिश चंद्रशेखर कर रहा था। हालाँकि जैकलिन ने उसका जवाब नहीं दिया था क्योंकि उन्हें कई कॉल आए थे और उन्हें यह पता नहीं था कि वह व्यक्ति कौन था।”
एजेंसी ने कहा, “जैकलिन के मेकअप आर्टिस्ट शान मुथाथिल से एक सरकारी कार्यालय के नंबर से संपर्क किया गया और कहा गया कि जैकलीन फर्नांडीस को शेखर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और उनसे बात करना चाहते हैं।”
ईडी ने कहा कि उनके मेकअप आर्टिस्ट को “गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय से फोन आया था, जिसमें उन्हें शेखर उर्फ सुकेश चंद्रशेखर से संपर्क करने के लिए कहा गया क्योंकि वह सरकार में एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं”। एजेंसी ने कहा, “उक्त कॉल गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय से की गई थी, जो जाँच के अनुसार एक फर्जी कॉल थी और आरोपित सुकेश चंद्रशेखर द्वारा की गई थी।”
आरोप पत्र में कहा गया है कि कई हिंदी फिल्मों में अभिनय कर चुकीं श्रीलंकाई नागरिक जैकलीन फर्नांडीस ने बाद में ठग सुकेश चंद्रशेखर से संपर्क किया। इसके बाद ठग ने सन टीवी के मालिक के रूप में अपना परिचय दिया। उसने (चंद्रशेखर) यह भी कहा कि वह जयललिता के राजनीतिक परिवार से हैं और वे चेन्नई से हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि वह उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उन्हें दक्षिणी फिल्म उद्योग में फिल्में करनी चाहिए और सन टीवी के पास उनके लिए कई प्रोजेक्ट्स हैं।

जैकलीन से दो बार हो चुकी है पूछताछ

एजेंसी ने इस साल दो बार 36 वर्षीय जैकलीन फर्नांडीज का बयान दर्ज किया, जिसमें उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने खुद का परिचय “शेखर रत्न वेला” के रूप में दिया था। एजेंसी ने इस महीने की शुरुआत में विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष आरोपपत्र दायर किया था और चंद्रशेखर, उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल और छह अन्य को नामजद किया था।
ED की चार्जशीट के मुताबिक, सुकेश ने जैकलीन को एक विदेशी घोड़ा, गुच्ची के तीन डिजाइनर बैग, शेनल और गुच्ची (Gucci) के कपड़े, लुई वीटॉन (Louis Vuitton) के शूज, दो डायमंड ईयररिंग, मल्टीस्टोन ईयररिंग और दो हरमेस ब्रेसलेट गिफ्ट किए थे, जिनकी कीमत करोड़ों रुपए में हैं।
सुकेश ने जैकलीन को एक मिनी कूपर कार भी गिफ्ट की थी, जो उन्होंने वापस कर दी थी। सुकेश ने जैकलीन के जीजा वारेन फर्नांडिस के अकाउंट में भी 15,00,000 रुपए ट्रांसफर किए थे, जो ऑस्ट्रेलिया में रहता है। जैकलीन ने बताया कि इसके अलावा सुकेश ने जैकलीन को 15 लाख रुपए कैश भी भेजे थे।
अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीस ने अपने बयान में इस बात की पुष्टि की है कि वह चंद्रशेखर को शेखर रत्न वेला के रूप में जानती थी और उसने कहा था कि वह सन टीवी का मालिक है। जैकलीन ने इस बात को भी माना कि सुकेश ने यूएसए में जैकलीन की बहन गेराल्डिन फर्नांडीस को 1,50,000 अमरीकी डॉलर उधार दिए थे।

 

अभिसार शर्मा ‘वाले’ Newsclick को 38 करोड़ रूपए की चायनीज फंडिंग

दुश्मन देशों के हाथ कठपुतली बनने वाले पत्रकार जनता को किस अंधकार में धकेल रहे हैं, शायद ये भी जानते। लेकिन इतना जरूर स्पष्ट है कि जो देश का नहीं हुआ किस आधार पर जनहित में समाचार दिखा सकते हैं। मोदी विरोध में ऐसे पत्रकार इतने अधिक अंधे हो चुके हैं कि दुश्मन देशों से फंडिंग लेने में संकोच नहीं कर रहे। 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को न्यूज़ पोर्टल ‘Newsclick’ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच में कुछ अहम सबूत मिले हैं। इस न्यूज़ पोर्टल और इसके प्रोमोटरों ने श्रीलंका-क्यूबा मूल के एक कारोबारी नेविले रॉय सिंघम से एक करार किया था, जो शक के घेरे में है। ‘PPK Newsclick Studio Pvt Ltd’ को जो 38 करोड़ रुपए की बड़ी फंडिंग मिली थी, उसका मुख्य स्रोत इसी कारोबारी को माना जा रहा है, जिसके सम्बन्ध चीन से हैं।

वेबसाइट को ये रकम 2018-21 के बीच विदेश से भेजी गई थी। TOI की खबर के अनुसार, इस मामले की जाँच कर रहे ED के सूत्रों ने बड़ी जानकारी दी है कि कारोबारी नेविले का सम्बन्ध चीन की सत्ताधारी पार्टी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC)’ के एक प्रोपेगंडा संगठन से है। ‘भीमा-कोरेगाँव’ हिंसा से भी इस न्यूज़ पोर्टल के तार जुड़ रहे हैं क्योंकि जो रकम इसे मिली, उसका कुछ हिस्सा तथाकथित एक्टिविस्ट्स को गया।

इसमें ‘एल्गार परिषद’ के गौतम नवलखा का नाम भी शामिल है, जो फ़िलहाल जेल में बंद है। न्यूजक्लिक के संस्थापक और मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्था से संबंधों को लेकर ED ने जेल में ही गौतम नवलखा से पूछताछ भी की है। वेबसाइट को जो रकम मिली, उसके एक बड़े हिस्से को उसने ‘सेवाओं का निर्यात (Export Of Services)’ के रूप में प्रदर्शित किया है। पुरकायस्था ने सिंघम के CPC से सम्बन्ध होने या फिर खुद के पोर्टल के चीनी सरकार से सम्बन्ध होने से इनकार किया है।

उन्होंने बताया कि सिंघम एक अमेरिकी कारोबारी हैं, जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाया करते थे। उन्होंने उस कंपनी को 700-800 मिलियन डॉलर (522.27 करोड़ से लेकर 596.88 करोड़ रुपए तक) में बेच दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जो भी फंड्स मिले हैं, वो अमेरिका के जाने-माने संस्थाओं से प्राप्त हुए हैं। साथ ही उन्होंने इन मामलों में RBI के दिशानिर्देशों का पालन करने का भी दावा किया।

जबकि ED के सूत्रों का कहना है कि ‘Newsclick’ को अमेरिका के ‘जस्टिस एंड एजुकेशन फंड्स इंक’, ‘GSPAN LLC’ और ‘ट्राइकनटिनेंटल लिमिटेड इंक’ से फंड्स प्राप्त हुए। दिलचस्प ये है कि इन सभी कंपनियों का पता समान ही है। इसके अलावा ब्राजील के ‘सेंट्रो पॉपुलर डेमिदास’ से भी फंड्स मिले हैं। ED ने हाल ही में ‘Newsclick’ के शेयरधारकों के ठिकानों की तलाशी ली थी। उस समय CPC से जुड़े कई ईमेल कन्वर्सेशन हाथ लगे थे।

मीडिया संस्थान ने इन आरोपों से कई बार इनकार किया था। पोर्टल के संस्थापक ने कहा कि अगर ED के पास उनके खिलाफ कोई भी सबूत है कि उन्हें कोर्ट के सामने चार्जशीट में पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो सुनवाई का सामना करने और कानूनी रूप से आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। हाल ही में उन्होंने अदालत से निवेदन किया था कि ED उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न करे।

अदालत ने उन्हें फ़िलहाल राहत प्रदान किया हुआ है। उन्होंने इस बात का जवाब नहीं दिया कि सिंघम चीन से काम कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कोरोना संक्रमण के कारण उन्होंने चीन को सुरक्षित समझ कर वहाँ अपना ठिकाना बना लिया हो। ED के सूत्रों ने कहा कि न्यूजक्लिक को मिले पेमेंट कुछ खास कामों से जुड़े थे, जैसे अफ्रीका में चीन के कामकाज को मजबूत बनाना, इत्यादि।

अफ्रीका में अक्सर चीन पर तानाशाही और कैपिटलिस्ट होने के आरोप लगते हैं। इसमें जैक मा के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करना भी शामिल है। बता दें कि ‘अलीबाबा’ के कंपनी के संस्थापक ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना की थी, जिसके बाद उन पर और उनकी संपत्तियों पर कड़ी कार्रवाई हुई थी। एक बाप्पादित्य सिन्हा नाम के व्यक्ति को भी मीडिया संस्थान से पेमेंट्स गए हैं, जो CPM नेताओं के ट्विटर हैंडल्स मैनेज करता है।

पुरकायस्था ने बाप्पादित्य के साथ अपने संबंधों को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने कंपनी को सॉफ्टवेयर सर्विसर्ज दी थीं, जिसके बाद उन्हें पेमेंट किया गया। कई देशों में चीन किस तरह अपने नैरेटिव के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया को भारी फंडिंग कर रहा है, ये छिपी हुई बात नहीं है। ‘Newsclick’ कंपनी के लॉन्च के कुछ ही महीनों के भीतर कैसे इतने बड़े फंड्स उसे आने शुरू हो गए, ये भी इस मामले को संदेहास्पद बनाता है।

वित्तीय लेनदेन की जाँच के समय के समय केंद्रीय एजेंसी को पता चला कि एक इलेक्ट्रिसियन को 1.55 करोड़ रुपए का पेमेंट किया गया है। ये किस प्रकार की सेवाओं के बदले किया गया, इसकी डिटेल्स माँगी गई है। पुरकायस्था ने दावा किया कि उनके पीछे ED के अलावा आयकर विभाग और दिल्ली पुलिस का इकोनॉमिक ऑफेंस विंग भी लगा है। उन्होंने कंपनी के प्रत्येक शेयर के दाम 11,00 रुपए होने का भी बचाव किया। 29 जय तक ED की गिरफ़्तारी से उन्हें अदालती राहत मिली हुई है।

‘न्यूज़क्लिक’ ही वो वेबसाइट है, जिस पर पत्रकार अभिसार शर्मा अपने वीडियो पोस्ट करते हैं। धान को गेहूँ बताकर चर्चा में आने वाले पत्रकार से ट्विटर ट्रोल बने अभिसार शर्मा ने फरवरी 2021 में ये जानकारी दी थी कि ‘न्यूज़क्लिक’ वेबसाइट के मालिकों और शेयर होल्डर्स के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रेड मारी है। उन्होंने बताया था कि वो इसी चैनल (न्यूज़क्लिक) पर अपने शो ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ और ‘न्यूज़ चक्र’ करते हैं।

ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के पास 118 करोड़ रूपए की अवैध संपत्ति और 4.5 किलो सोना मिला

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने ईसाई मजहब के प्रचारक पॉल दिनाकरन के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद उसकी 118 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। तमिलनाडु के ईसाई प्रचारक और उसकी कई संस्थाओं के खिलाफ बड़ी रकम की धोखाधड़ी और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने और कर चोरी के कई आरोप हैं। विभाग ने उसके 25 ठिकानों पर छापा मारा था, जिसके बाद ये खुलासा हुआ।

उसके पास से 4.5 किलो सोना भी मिला, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। साथ ही 120 करोड़ रुपए की ऐसी आय का पता चला, जिसका कोई पुष्ट दस्तावेज नहीं था। सोना उसके घर से ही पाया गया।

चेन्नई और कोयंबटूर में दिनाकरन की संस्था ‘Jesus Calls Ministries’ से जुड़े 25 ठिकानों पर बुधवार (जनवरी 20, 2021) को छापा मारा गया था। सुबह 6 बजे ही शुरू हुई छापेमारी में 200 के करीब इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने अलग-अलग टीमों में बँट कर एक साथ 25 ठिकानों पर छापेमारी की। उसकी संस्थाओं को विदेशी फंडिंग भी जम कर मिली थी, जिसे लेकर जाँच की जा रही है।बता दें कि ‘Jesus Calls Ministries’ और ‘Karunya University’ की स्थापना पॉल दिनाकरन के पिता डीजीएस दिनाकरन ने की थी। उनका 2008 में निधन हो गया था। इसके बाद दोनों संस्थानों की कमान ईसाई प्रचारक पॉल दिनाकरन के हाथ में आ गई थी। इस परिवार का तमिलनाडु में खासा प्रभाव है और सभी सत्तारूढ़ दलों के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं। जब डीजीएस दिनाकरन का निधन हुआ था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि और नेता प्रतिपक्ष जे जयललिता, इन दोनों बड़े नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की थी।

पॉल दिनाकरन, टीवी पर लगातार ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने और उसके जरिए फंड इकट्ठा करने वाले डीजीएस दिनाकरन का बेटा है। पॉल तमिलनाडु में ईसाई धर्म प्रचारक के रूप में जाना जाता है। उसके काफी फॉलोवर्स हैं और वो ईसाई प्रचार-प्रसार के लिए कई संगठन भी चलाता है। आईटी विभाग को दिनाकरन और जीसस कॉल्स के खिलाफ टैक्स चोरी और विदेशी फंडिंग में अनियमितता की शिकायत मिली थी। 

चीनी मिल घोटाले : बहुजन पार्टी के पूर्व MLC मो. इकबाल की 1097 करोड़ रूपए की संपत्ति अटैच

BSP के पूर्व MLC मोहम्मद इकबाल

कृषि कानूनों को लेकर हो रहे धरनों पर प्रारम्भ से एक बात प्रमुखता से कहीं जा रही है कि जिन मुद्दों को लेकर किसानों को धरना एवं प्रदर्शन करना चाहिए, उनमें से किसी एक भी मुद्दे पर कोई नहीं बोल रहा। किसानों को लूटने वाले कोई और नहीं सियासतखोर हैं।  

उत्तर प्रदेश में बीएसपी शासनकाल में हुए 1100 करोड़ के चीनी मिल घोटाला केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया। ईडी ने मोहम्मद इकबाल की कुल सात संपत्तियों को अटैच किया है। हाजी इकबाल पर कई और भी आरोप हैं, जिनमें अवैध खनन से नामी, बेनामी संपत्ति खरीदने जैसे मामले हैं। बताया जा रहा है कि 2500 करोड़ की संपत्तियाँ ईडी के निशाने पर हैं।

बीएसपी चीफ मायावती के शासनकाल में वर्ष 2010 से लेकर 2011 के दौरान करीब 11 चीनी मिलों को औने- पौने दाम पर बेचा गया था। पूरे प्रदेश में कुल 21 से ज्यादा चीनी मिल को बेहद कम दाम पर बेचने का आरोप है। इनमें से कई चीनी मिलों की बिक्री पर अब भी जाँच चल रही है। आरोप है कि इस फर्जीवाड़े से केंद्र और राज्य सरकार को करीब 1,179 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 अप्रैल, 2018 को चीनी मिल घोटाले की सीबीआई जाँच कराने की सिफारिश की थी। सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने अप्रैल, 2019 में चीनी मिल घोटाले का केस दर्ज किया था। सीबीआई ने लखनऊ के गोमतीनगर थाने में सात नवंबर 2017 को दर्ज कराई गई एफआईआर को अपने केस का आधार बनाते हुए सात चीनी मिलों में हुई धांधली में रेगुलर केस दर्ज किया था, जबकि 14 चीनी मिलों में हुई धांधली को लेकर 6 प्रारंभिक जाँच दर्ज की गईं थीं। 

करोड़ों के भ्रष्टाचार के इस मामले में सीबीआई के साथ-साथ ईडी ने भी सक्रियता बढ़ा दी थी। घोटाले में सीबीआई के बाद प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया था। लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई की थी।

सीबीआई ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज, हरदोई, रामकोला, छितौनी व बाराबंकी स्थित सात चीनी मिल खरीदने के मामले में दिल्ली निवासी राकेश शर्मा, उनकी पत्नी सुमन शर्मा, गाजियाबाद निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर निवासी सौरभ मुकुंद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद वाजिद अली व मोहम्मद नसीम अहमद के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। 

संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खाते में भेजे गए 67 लाख रूपए, कंस्ट्रक्शन कंपनी में भी हैं पार्टनर: प्रवीण राउत की 72 करोड़ रूपए की संपत्ति अटैच

                                                  वर्षा राउत के खाते में भेजे गए थे 67 लाख रुपए
प्रवर्तन निदेशालय (ED) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खिलाफ जाँच कर रहा है। आरोप है कि PMC बैंक के आरोपित प्रवीण राउत की पत्नी और एक अन्य कंपनी ने कुल मिला कर वर्षा के अकाउंट में 67 लाख रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी दी है कि प्रवीण राउत ने हाउसिंग डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL) के नाम पर अवैध लोन्स और अन्य मद में कुल 95 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।

प्रवीण राउत को किए गए पेमेंट्स के कोई कागजात तक नहीं थे। HDIL के अकाउंट बुक से पता चला है कि प्रवीण राउत ने पालघर में घर लेने के लिए ये रुपए लिए थे। इस आपराधिक लेनदेन में प्रवीण ने अपनी पत्नी माधुरी के अकाउंट में भी 1.6 करोड़ रुपए भेजे थे। ED ने जानकारी दी है कि इस रकम में से 55 लाख रुपए इंटरेस्ट फ्री लोन के नाम पर वर्षा राउत को ट्रांसफर किए गए। इनमें से 50 लाख रुपए दिसंबर 23, 2010 को ट्रांसफर किए गए थे।

बाकी के 5 लाख रुपए मार्च 15, 2011 को भेजे गए थे। ED ने बताया कि इस रकम का इस्तेमाल मुंबई के दादर ईस्ट में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया। M/s अवनी कंस्ट्रक्शंस नामक कंपनी में वर्षा और माधुरी पार्टनर्स भी हैं। ओवरड्रॉन कैपिटल को लोन में बदल कर इस कंपनी के द्वारा भी वर्षा राउत को 12 लाख रुपए भेजे गए। मात्र 5625 रुपए के कंट्रीब्यूशन को आधार बना कर ये रकम वर्षा को भेजी गई। वर्षा राउत को मंगलवार (जनवरी 5, 2020) को पेश होने के लिए ED ने समन भेजा है। इससे पहले राकेश कुमार वाधवान और उससे जुड़ी 293 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया गया और साथ ही 63 करोड़ रुपए की ज्वेलरी को भी जब्त किया गया। राकेश के अलावा सारंग वाधवान, वरयाम सिंह, जॉय थॉमस (PMC बैंक के चेयरमैन और एमडी) सहित अन्य के खिलाफ मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने 4355 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में FIR दर्ज की थी, जिसकी जाँच अब ED कर रही है।

HDIL-PMC बैंक घोटाला मामले में ED ने शुक्रवार को ताज़ा कार्रवाई में प्रवीण राउत की 72 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया। वहीं संजय राउत ने हाल ही में कहा था कि उनसे ED ने कुछ कागजात माँगे हैं और जाँच में सहयोग करते हुए वो कागजात सबमिट कर दिए गए हैं। वर्षा राउत को इससे पहले दिसंबर 29 को जाँच एजेंसी के समक्ष पेश होना था, लेकिन उन्होंने तारीख आगे बढ़ाने की गुजारिश की थी।

संजय राउत की पत्नी से पूछताछ के संबंध में ED अब तक 4 बार समन जारी कर चुकी है। इससे पूर्व भी वो दो दफा स्वास्थ्य आधार पर जाँच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुईं थी। इस मामले को लेकर उनके पति व शिवसेना नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि भाजपा महाराष्ट्र सरकार को गिराने के लिए जाँच एजेंसी का इस्तेमाल कर रही है। ED की नोटिस पर भड़के शिवसैनिकों ने मुंबई के कोलाबा में ईडी दफ्तर के सामने भाजपा प्रदेश कार्यालय का पोस्टर लगाया था और शिवसेना भवन के सामने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की थी।