ED ने अनवर की गिरफ्तार के बाद कहा था कि अनवर ढेबर शराब कारोबार का सरगना है। वहीं, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा उस पैसे का प्रबंधन करते थे। एजेंसी ने दावा किया था कि शराब घोटाले की अवैध कमाई का इस्तेमाल चुनावों में किया गया। IAS टुटेजा वर्तमान में छत्तीसगढ़ के उद्योग और वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
He is the main kingpin on ground in the liquor scam in which around Rs 2000 Crore was illegally generated by the criminal syndicate. PMLA Court has granted 4 day of ED Custody.
— ED (@dir_ed) May 8, 2023
अनिल टुटेजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास माने जाते हैं। ये वही अधिकारी हैं, जिनका नाम राज्य के NAN घोटाले में सामने आया था। हालाँकि, भूपेश बघेल ने इन पर कार्रवाई करने के बजाए, इन्हें उद्योग एवं वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव का पद दे दिया। आरोप है कि सीएम बघेल टुटेजा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
दरअसल, ED ने पहले इस मार्च में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इसके साथ ही विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान यह निकल कर सामने आया कि साल 2019 से 2022 के बीच 2000 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के किया गया है। ED ने इसके सबूत भी एकत्र किए हैं।
ED का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग जाँच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर की आड़ में उच्च स्तर के राजनीतिक अधिकारियों और नौकरशाहों द्वारा अवैध काम को अंजाम दिया जा रहा था। इसके लिए उन लोगों ने व्यक्तियों एवं संस्थाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।
दरअसल, अनवर ढेबर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बेहिसाब देसी शराब बनवाना शुरू किया था और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचता था। इस तरह वह सरकारी खजाने में एक रुपए भी जमा किए बिना बिक्री की सारी आय खुद रख लेता था। 2019 से 2022 के बीच यह अवैध बिक्री राज्य की कुल शराब बिक्री का लगभग 30-40 प्रतिशत थी।
इस घोटाले को तीन तरीके से अंजाम दिया गया। पहला सरकारी शराब की बोतलों पर 70-150 रुपए प्रति केस अनवर दुकानदारों से कमीशन लेता था। दूसरे पैटर्न में वह नकली शराब बनाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाता था और उसका पैसा खुद रखता था। तीसरा पैटर्न था कि लाइसेंस में कमीशन लेता था। यह एक वार्षिक कमीशन था, जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था।
छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री 800 सरकारी दुकानों के जरिए की जाती है। निजी दुकानों को शराब बेचने का अधिकार नहीं है। दुकान चलाने वाले लोगों के मैन पावर से लेकर कैश कलेक्शन तक का काम राज्य की सरकारी कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) देखती है। अनवर ढेबर अपने राजनीतिक आकाओं एवं अधिकारियों के सहयोग से CSMCL के एक आयुक्त और एमडी तक पहुँच बनाने में कामयाब हो गया।
ईडी का कहना है कि सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह, नेता और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। फरवरी 2019 में ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी राज्य सरकार के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) में शामिल हुए। ढेबर के कहने पर तीन महीने के भीतर त्रिपाठी को इसका प्रबंध निदेशक बना दिया गया। त्रिपाठी का काम था- रिश्वत संग्रह को अधिकतम करना। आईएएस अधिकारी विकास अग्रवाल पैसा इकट्ठा करने और आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को रसद इकट्ठा करने के काम में लगाया गया था।
इस सिंडिकेट में मैनपावर का इस्तेमाल अग्रवाल के एक सहयोगी की कंपनी सुमसेट फैसिलिटीज लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी। होलोग्राम का ठेका प्रिज्म होलोग्राफी एंड फिल्म्स सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कैश कलेक्शन का काम टॉप्स सिक्योरिटीज को दिया गया था, जिसके मालिक सिद्धार्थ सिंघानिया थे, जो अग्रवाल के करीबी सहयोगी थे।
जाँच में ED ने पाया कि मार्च 2019 में देशी शराब निर्माता कंपनी छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने ढेबर और त्रिपाठी से मुलाकात की। डिस्टिलर्स को 75 रुपए प्रति केस कमीशन देने का आदेश दिया गया। बदले में ढेबर ने अपनी उधार दरों को बढ़ाने का वादा किया। सिंडिकेट ने कमीशन में एक बड़ी राशि एकत्र की। इसका एक बड़ा हिस्सा एक राजनीतिक दल को दिया गया था।
इतना सब कुछ फिक्स करने के बाद सिंडिकेट ने बेहिसाब कच्ची शराब बनाना शुरू कर दिया। इसे सरकारी दुकानों पर बेचा जा रहा था। इन कच्ची शराब को असली दिखाने के लिए इन पर डुप्लीकेट होलोग्राम भी लगाया गया। डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं और एक डिस्टिलर को सप्लाई की गईं, जो उन्हें भरने का काम करता था।
ढेबर ने मासिक लक्ष्य निर्धारित किए। डिस्टिलर्स द्वारा हर महीने 800 पेटी देशी शराब से लदे 200 ट्रकों की आपूर्ति की जाती थी। 560 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से शराब की सप्लाई की जाती थी। एमआरपी 2,880 रुपए प्रति केस था। बाद में इसे बढ़ाकर 3,880 रुपए कर दिया गया।
इसके अलावा, विदेशी शराब की माँग को देखते हुए और विदेशी शराब निर्माताओं से पैसे लेने में आने वाली समस्याओं को देखते हुए Fl-10A लाइसेंस को लाया गया। यह ढेबर के तीन परिचितों को मिला। इन लोगों ने विदेशी शराब खरीदने के लिए बिचौलियों की तरह काम किया और इसे सरकारी गोदामों में बेच दिया और विदेशी शराब निर्माताओं से लगभग 10% का कमीशन प्राप्त किया।
ED ने पाया कि इस सिंडिकेट की ‘ऊपर’ तक पहुँच थी। इसमें अन्य कई नेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने की आशंका है, जिसकी जाँच केंद्रीय एजेंसी कर रही है। उधर भाजपा ने सीएम भूपेश बघेल की सरकार पर हमला बोला है। भाजपा ने कहा, “भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला… भूपेश जी, जरा आँख उठाकर बताइये तो सही, कितना बँटा और कितना घर पहुँचा?”
भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला...
— BJP Chhattisgarh (@BJP4CGState) May 7, 2023
भूपेश जी, जरा आंख उठाकर बताइये तो सही, कितना बंटा और कितना घर पहुंचा?#भूपेश_सरकार_का_शराब_घोटाला pic.twitter.com/SMeLNiYitv
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