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शराब नीति बनाने में अरविंद केजरीवाल की थी डायरेक्ट भूमिका, पूरी साजिश में हैं शामिल, उनके जरिए ही मनी लॉन्ड्रिंग: ED ने कोर्ट को बताया क्यों दिल्ली के CM को किया गिरफ्तार

दिल्ली हाई कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मंगलवार (02 अप्रैल 2024) को जवाब दाखिल कर बताया है कि दिल्ली शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल ही मुख्य साजिशकर्ता हैं। ईडी ने अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले के मामले का ‘मुख्य साजिशकर्ता’ बताते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी के जरिए वही मनी लॉन्ड्रिंग कर रहे थे। ईडी ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की वजह भी बताते हुए कहा कि वो लगातार ईडी के समन से भागते रहे और 9 समन जारी होने के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं हुए। वहीं, आम आदमी पार्टी ने ईडी को झूठा बताया है और कहा है कि मनी ट्रेल न मिलने पर ईडी झूठे दावे कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने खुद मनी ट्रेल की बात को नकारा है। बता दें कि अरविंद केजरीवाल की याचिका पर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रही है। केजरीवाल ने खुद की गिरफ्तारी को अवैध बताया है।

हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईडी ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि ‘दिल्ली शराब नीति घोटाले’ के मुख्य सरगना और साजिश कर्ता अरविंद केजरीवाल हैं। उनके ही नेतृत्व में दिल्ली सरकार के मंत्रियों, आम आदमी पार्टी के नेताओं और अन्य व्यक्तियों ने ये नीति तैयार की थी। ये नीति ‘दक्षिण के समूह’ को फायदा पहुँचाने के लिए विजय नायर, मनीष सिसोदिया और दक्षिण ग्रुप से सदस्यों की मिलीभगत से तैयार की गई थी।

ईडी ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया है। ये पीएमएलए एक्ट 2002 की धारा 70 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। ईडी ने बताया कि आम आदमी पार्टी दिल्ली शराब घोटाले की मुख्य लाभार्थी रही है। अरविंद केजरीवाल इसकी सभी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। गवाहों के बयानों में भी यही बात है कि वो इस नीति को बनाने वालों में शामिल थे।

ईडी ने अरविंद केजरीवाल की जमानत का ये कहते हुए विरोध किया है कि अरविंद केजरीवाल को जाँच में शामिल होने के कई मौके दिए गए। उन्हें 9 समन जारी किए गए, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। इस घोटाले से जुड़ी नकदी का हिस्सा 45 करोड़ रुपए साल 2022 में हुए गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किए गए।

अरविंद केजरीवाल ने 23 मार्च को अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था, जिसके बाद कोर्ट ने ईडी से जवाब माँगा था। ईडी ने अपनी बात कोर्ट में रखी थी, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से अरविंद केजरीवाल ईडी की हिरासत में हैं। उन्हें 2 दिन पहले तिहाड़ जेल शिफ्ट कर दिया गया है।

आप ने ईडी को बताया झूठा

ईडी द्वारा हाई कोर्ट में दाखिल जवाब पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। आम आदमी पार्टी ने ईडी को झूठा बताया है और कहा कि ईडी झूठ बोलती है। आप ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट खुद माना है कि इस कथित घोटाले में कोई मनी ट्रेल मिली ही नहीं है। कोई पैसा भी नहीं मिला है। ये ईडी सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में कोई सबूत पेश नहीं कर पाई।

कम हो रहा केजरीवाल का वजन

तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वजन तेजी से गिर रहा है। अरविंद केजरीवाल ने अपने तेजी से घटते वजन को लेकर मॉनिटरिंग की जरूरत बताई है। टाइम्स नाउ ने तिहाड़ के डॉक्टरों के हवाले से बात बताई है। आम आदमी पार्टी के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अरविंद केजरीवाल का वजन 4.5 किलो घट गया है। हालाँकि तिहाड़ जेल के प्रशासन से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये दावा गलत है। अरविंद केजरीवाल का वजन 55 किलो था, वो वजन बरकरार है।

दिल्ली शराब घोटाला : ED ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन किया, सुप्रीम कोर्ट ने भी मानी है 338 करोड़ रूपए के लेनदेन की बात


शराब घोटाले की आँच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक पहुँच गई है। दिल्ली में AAP सरकार के मुखिया को अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन भेजा है। सोमवार (30 अक्टूबर, 2023) को ये कार्रवाई की गई। इस मामले में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह पहले से ही जेल में बंद हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी 338 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने जा जिक्र करते हुए मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

ED ने अरविंद केजरीवाल से कहा है कि वो गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को जाँच एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हों। 55 वर्षीय अरविंद केजरीवाल को PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत समन किया गया है। दिल्ली में उन्हें जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। ED ने इस मामले की चार्जशीट में कई बार अरविंद केजरीवाल के नाम का जिक्र किया है। इसमें बताया गया है कि शराब घोटाले के आरोपित उनसे संपर्क में थे।

शराब नीति बनाने और इसे लागू करने के क्रम में अरविंद केजरीवाल से ये लोग संपर्क में थे। इससे पहले अप्रैल 2023 में इसी मामले को लेकर CBI भी उन्हें समन कर चुकी है। हालाँकि, अगस्त में जब CBI ने FIR दर्ज की तो उसमें आरोपित के रूप में अरविंद केजरीवाल का नाम बतौर आरोपित नहीं शामिल किया गया था। दिल्ली की शराब नीति को विरोध के बाद वापस लिया जा चुका है। ताज़ा कार्रवाई के बाद भड़के AAP नेताओं ने मोदी सरकार पर किस्म-किस्म के आरोप लगाने भी शुरू कर दिए हैं।

मंत्री आतिशी ने दावा कर डाला कि BJP आम आदमी पार्टी से डर गई है। उन्होंने केजरीवाल को समन किए जाने को साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए ये सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम जेल जाने से नहीं डरते। वहीं दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जो अपने आप को कट्टर ईमानदार का सर्टिफिकेट देते फिरते हैं, अब उनकी काली परते खुलने लगी हैं। उन्होंने कहा कि जो सवाल दिल्ली की जनता कई महीनों से मुख्यमंत्री जी से पूछ रही है, अब उसका जवाब उन्हें देना होगा।

वीरेंद्र सचदेवा ने सवाल दागे – शराब नीति में बदलाव क्यों किया गया? 5% से 12% कमीशन क्यों की गई? 7% का किकबैक किसे मिला? इतने बड़े घोटाले का पैसा कहाँ खर्च हुआ? उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से कहती आई है कि इस घोटाले के असली साजिशकर्ता अरविंद केजरीवाल हैं। उन्होंने कहा कि खुद को ईमानदार बताने वाली इस जमात के चेहरे बेनकाब हो गए हैं। दिल्ली भाजपा ने कहा कि बहुत हुआ घोटाले का खेल, अब भ्रष्टाचारी केजरीवाल भी जाएगा जेल।

पार्टी ने कहा, “कट्टर भ्रष्ट मनीष सिसोदिया की सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब शराब घोटाले के सरगना केजरीवाल को ईडी ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उम्मीद ही नहीं हमे भरोसा है कि गली गली शराब के ठेके खोलने वाला, दिल्ली को शराब नगरी बनाने वाला, शराब की दलाली खाने वाला भी अब जल्द ही अपने अंजाम तक पहुँचेगा।” भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड अरविंद ही हैं और ‘शीशमहल’ भी इन्हीं पैसों से बना है।

पीएमएलए आया अटल सरकार में और कार्रवाई हो रही है मोदी सरकार में

सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) में जोड़े गए प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। इस बीच केंद्र ने इस एक्ट की तारीफ करके इसे मीडिया चर्चा में ला दिया है। केंद्र का कहना है कि इसी कानून और इसके प्रावधानों के कारण विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़े लोगों से 18 हजार करोड़ रूपए लेकर बैंकों को लौटाए गए और अब भी करीब 67000 करोड़ रुपए के सैंकड़ों केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। 

PMLA की जरूरत

मौजूदा जानकारी के अनुसार, ईडी इस कानून के अंतर्गत 4, 700 केसों की जाँच कर रही है। मात्र पाँच सालों में इस कानून के अंतर्गत 2, 086 केस दर्ज हुए हैं। इस कानून का उद्देश्य काले धन को सफेद में बदलने वाली प्रक्रिया जिसे मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं, उससे लड़ना है। हमने भले ही मोदी सरकार के आने के बाद इस कानून को लेकर मीडिया में ज्यादा खबरें पढ़ीं। कभी मेहूल चोकसी, नीरव मोदी, विजय माल्या केस में तो कभी महाराष्ट्र के 100 करोड़ वसूली केस में। लेकिन हकीकत ये है कि ये कानून हाल फिलहाल में भारत में अस्तित्व में नहीं आया है। इसकी नींव भारत में 20 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान पड़ी थी, जिसके बाद इसके तहत अब तक इस मामले में 313 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
ये आँकड़ा अन्य देशों में रजिस्टर होने वाले प्रति वर्ष केसों से बहुत कम है। लेकिन इसकी जरूरत और इसमें  हुए संशोधनों की आवश्यता भारत में कम नहीं है। सबसे पहले भारत में मनी लॉन्ड्रिंग कानून, 2002 में अधिनियमित किया गया था, लेकिन इसके बाद इसमें 3 बार संशोधन (2005, 2009 और 2012) हुए। आखिरी संशोधन साल 2012 में हुआ था। जिसमें अपराधों की लिस्ट में धन को छुपाना, अधिग्रहण, कब्ज़ा और धन का आपराधिक कामों में उपयोग करना शामिल था।

PMLA के तहत चर्चित मामलों में कार्रवाई

पिछले कुछ सालों में PMLA एक्ट के तहत कई बड़े घोटालों में कार्रवाई हुई है। इनमें एक घोटाला पोंजी एक्ट से जुड़ा है। जिसकी कार्रवाई में ईडी ने IMA समूह और इसके प्रबंध निदेशक, मोहम्मद मंसूर ख़ान के ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए 20 अचल सम्पत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत 209 करोड़ रुपए ज़ब्त किए थे।
इसके अलावा पिछले साल बसपा नेता हाजी इकबाल पर इस मामले में कार्रवाई हुई थी। ईडी ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया था।  ऐसे ही केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही जानकारी दी थी कि कोर्ट के द्वारा पीएमएलए के अंतर्गत जारी किए ऑर्डर के तहत ईडी ने विजय माल्या, नीरव मोदी और चोकसी के मामलों में अब तक 18 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त किया है। इनमें विजय माल्या पर देश से 9 हजार करोड़ और नीरव मोदी पर 14 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। अभी हाल में पीएमएलए के तहत एबीजी शिपयार्ड कंपनी पर भी कार्रवाई हुई है। शिपयार्ड पर आरोप हैं कि 23 हजार करोड़ का घोटाला कंपनी ने बैंकों से किया।

PMLA में दोषी पाए जाने पर दंड

धन शोधन कानून के तहत अगर कोई अपराधी पाया जाता है तो उसे कम से कम 3 साल की जेल जिसे 7 साल भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अपराध की प्रवृत्ति देखते हुए इसमें जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। इस कानून का उद्देश्य यही है कि केंद्रीय एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई कर सकें और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल या उससे प्राप्त संपत्ति को जब्त कर सकें।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को ED ने किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र में नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता व उद्धव सरकार में मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) को प्रवर्तन निदेशालय (ED/ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी ‘मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और दाऊद से कनेक्शन’ पर चली 8 घंटे की पूछताछ के बाद हुई है। इससे पहले खबर आई थी कि आज सुबह कुर्ला में मलिक के आवास पर जाकर ईडी के कुछ अधिकारियों ने मलिक को पूछताछ में सहयोग देने को कहा और करीब 7: 30 बजे उन्हें अपने साथ ईडी के बलार्ड एस्टेट कार्यालय ले गए।

ईडी ने मलिक से कथिततौर पर उनसे 1993 में हुए मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट के दोषियों में से एक से कुछ संपत्ति खरीदने के संबंध में पूछताछ की है। इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उन्हें विश्वास है नवाब मलिक शाम तक घर लौंटेंगे और ये जो गिरफ्तारी महा विकास अघाड़ी सरकार में नेताओं की करवाई जा रही हैं इन सब पर 2024 के बाद जाँच होगी।

कुछ महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाब मलिक के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि मलिक परिवार ने उस जमीन की कीमत को साढ़े तीन करोड़ रुपए दिखाया, जिससे उन्हें स्टैम्प ड्यूटी कम भरनी पड़े। जब इसका पेमेंट करने की बात आई तो इसकी कीमत 25 रुपए प्रति स्क्वायर फुट की दर से बताई गई लेकिन असल में पेमेंट 15 रुपए प्रति स्क्वायर फीट के रेट से हुई। मलिक पर आरोप है कि उन्होंने यह जमीन अंडरवर्ल्ड दाऊद के लोगों से खरीदी थी।

कुछ माह पहले ईडी ने महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के 7 ठिकानों पर छापेमारी की थी। राज्य में वक्फ बोर्ड NCP नेता नवाब मलिक के मंत्रालय के अंतर्गत आता है। वक्फ बोर्ड लैंड केस में ये कार्रवाई की गई। पुणे में वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर घोटाले का मामला सामने आया था, जिसकी जाँच ED ने अपने हाथों में ले ली थी।

अभिसार शर्मा ‘वाले’ Newsclick को 38 करोड़ रूपए की चायनीज फंडिंग

दुश्मन देशों के हाथ कठपुतली बनने वाले पत्रकार जनता को किस अंधकार में धकेल रहे हैं, शायद ये भी जानते। लेकिन इतना जरूर स्पष्ट है कि जो देश का नहीं हुआ किस आधार पर जनहित में समाचार दिखा सकते हैं। मोदी विरोध में ऐसे पत्रकार इतने अधिक अंधे हो चुके हैं कि दुश्मन देशों से फंडिंग लेने में संकोच नहीं कर रहे। 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को न्यूज़ पोर्टल ‘Newsclick’ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच में कुछ अहम सबूत मिले हैं। इस न्यूज़ पोर्टल और इसके प्रोमोटरों ने श्रीलंका-क्यूबा मूल के एक कारोबारी नेविले रॉय सिंघम से एक करार किया था, जो शक के घेरे में है। ‘PPK Newsclick Studio Pvt Ltd’ को जो 38 करोड़ रुपए की बड़ी फंडिंग मिली थी, उसका मुख्य स्रोत इसी कारोबारी को माना जा रहा है, जिसके सम्बन्ध चीन से हैं।

वेबसाइट को ये रकम 2018-21 के बीच विदेश से भेजी गई थी। TOI की खबर के अनुसार, इस मामले की जाँच कर रहे ED के सूत्रों ने बड़ी जानकारी दी है कि कारोबारी नेविले का सम्बन्ध चीन की सत्ताधारी पार्टी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC)’ के एक प्रोपेगंडा संगठन से है। ‘भीमा-कोरेगाँव’ हिंसा से भी इस न्यूज़ पोर्टल के तार जुड़ रहे हैं क्योंकि जो रकम इसे मिली, उसका कुछ हिस्सा तथाकथित एक्टिविस्ट्स को गया।

इसमें ‘एल्गार परिषद’ के गौतम नवलखा का नाम भी शामिल है, जो फ़िलहाल जेल में बंद है। न्यूजक्लिक के संस्थापक और मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्था से संबंधों को लेकर ED ने जेल में ही गौतम नवलखा से पूछताछ भी की है। वेबसाइट को जो रकम मिली, उसके एक बड़े हिस्से को उसने ‘सेवाओं का निर्यात (Export Of Services)’ के रूप में प्रदर्शित किया है। पुरकायस्था ने सिंघम के CPC से सम्बन्ध होने या फिर खुद के पोर्टल के चीनी सरकार से सम्बन्ध होने से इनकार किया है।

उन्होंने बताया कि सिंघम एक अमेरिकी कारोबारी हैं, जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाया करते थे। उन्होंने उस कंपनी को 700-800 मिलियन डॉलर (522.27 करोड़ से लेकर 596.88 करोड़ रुपए तक) में बेच दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जो भी फंड्स मिले हैं, वो अमेरिका के जाने-माने संस्थाओं से प्राप्त हुए हैं। साथ ही उन्होंने इन मामलों में RBI के दिशानिर्देशों का पालन करने का भी दावा किया।

जबकि ED के सूत्रों का कहना है कि ‘Newsclick’ को अमेरिका के ‘जस्टिस एंड एजुकेशन फंड्स इंक’, ‘GSPAN LLC’ और ‘ट्राइकनटिनेंटल लिमिटेड इंक’ से फंड्स प्राप्त हुए। दिलचस्प ये है कि इन सभी कंपनियों का पता समान ही है। इसके अलावा ब्राजील के ‘सेंट्रो पॉपुलर डेमिदास’ से भी फंड्स मिले हैं। ED ने हाल ही में ‘Newsclick’ के शेयरधारकों के ठिकानों की तलाशी ली थी। उस समय CPC से जुड़े कई ईमेल कन्वर्सेशन हाथ लगे थे।

मीडिया संस्थान ने इन आरोपों से कई बार इनकार किया था। पोर्टल के संस्थापक ने कहा कि अगर ED के पास उनके खिलाफ कोई भी सबूत है कि उन्हें कोर्ट के सामने चार्जशीट में पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो सुनवाई का सामना करने और कानूनी रूप से आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। हाल ही में उन्होंने अदालत से निवेदन किया था कि ED उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न करे।

अदालत ने उन्हें फ़िलहाल राहत प्रदान किया हुआ है। उन्होंने इस बात का जवाब नहीं दिया कि सिंघम चीन से काम कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कोरोना संक्रमण के कारण उन्होंने चीन को सुरक्षित समझ कर वहाँ अपना ठिकाना बना लिया हो। ED के सूत्रों ने कहा कि न्यूजक्लिक को मिले पेमेंट कुछ खास कामों से जुड़े थे, जैसे अफ्रीका में चीन के कामकाज को मजबूत बनाना, इत्यादि।

अफ्रीका में अक्सर चीन पर तानाशाही और कैपिटलिस्ट होने के आरोप लगते हैं। इसमें जैक मा के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करना भी शामिल है। बता दें कि ‘अलीबाबा’ के कंपनी के संस्थापक ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना की थी, जिसके बाद उन पर और उनकी संपत्तियों पर कड़ी कार्रवाई हुई थी। एक बाप्पादित्य सिन्हा नाम के व्यक्ति को भी मीडिया संस्थान से पेमेंट्स गए हैं, जो CPM नेताओं के ट्विटर हैंडल्स मैनेज करता है।

पुरकायस्था ने बाप्पादित्य के साथ अपने संबंधों को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने कंपनी को सॉफ्टवेयर सर्विसर्ज दी थीं, जिसके बाद उन्हें पेमेंट किया गया। कई देशों में चीन किस तरह अपने नैरेटिव के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया को भारी फंडिंग कर रहा है, ये छिपी हुई बात नहीं है। ‘Newsclick’ कंपनी के लॉन्च के कुछ ही महीनों के भीतर कैसे इतने बड़े फंड्स उसे आने शुरू हो गए, ये भी इस मामले को संदेहास्पद बनाता है।

वित्तीय लेनदेन की जाँच के समय के समय केंद्रीय एजेंसी को पता चला कि एक इलेक्ट्रिसियन को 1.55 करोड़ रुपए का पेमेंट किया गया है। ये किस प्रकार की सेवाओं के बदले किया गया, इसकी डिटेल्स माँगी गई है। पुरकायस्था ने दावा किया कि उनके पीछे ED के अलावा आयकर विभाग और दिल्ली पुलिस का इकोनॉमिक ऑफेंस विंग भी लगा है। उन्होंने कंपनी के प्रत्येक शेयर के दाम 11,00 रुपए होने का भी बचाव किया। 29 जय तक ED की गिरफ़्तारी से उन्हें अदालती राहत मिली हुई है।

‘न्यूज़क्लिक’ ही वो वेबसाइट है, जिस पर पत्रकार अभिसार शर्मा अपने वीडियो पोस्ट करते हैं। धान को गेहूँ बताकर चर्चा में आने वाले पत्रकार से ट्विटर ट्रोल बने अभिसार शर्मा ने फरवरी 2021 में ये जानकारी दी थी कि ‘न्यूज़क्लिक’ वेबसाइट के मालिकों और शेयर होल्डर्स के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रेड मारी है। उन्होंने बताया था कि वो इसी चैनल (न्यूज़क्लिक) पर अपने शो ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ और ‘न्यूज़ चक्र’ करते हैं।

Money laundering case: आय से ज्यादा संपत्ति मामले में पूर्व सीएम वीरभद्र को नहीं मिली राहत

delhi high court denies stay on money laundering case on virbhadraकानूनी दांव पेंचों के जरिए अपने खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले को अब हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह लंबा नहीं खींच पाएंगे। वीरभद्र के बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका मिला है। दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि वीरभद्र के खिलाफ निचली अदालत की कार्रवाई नहीं रुकेगी। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में वीरभद्र सिंह अपनी पत्नी के साथ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया क निचली अदालत की कार्रवाई जारी रहेगी। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुनील गौर ने कहा कि मैं कोई भी अंतरिम आदेश पास नहीं कर रहा हूं। निचली अदालत की ओर से उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप पत्र दायर करने की कार्रवाई पूरी होने देते हैं। हालांकि अदालत ने सीबीआई से इस मामले में 16 अप्रैल को जवाब दायर करने को कहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट में पिछली पेशी के दौरान वीरभद्र सिंह दंपत्ति के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के चल रहे मामले में एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस नज़्मी वजीरी ने सुनवाई करने से इंकार कर कर दिया था। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने 24 जनवरी को बिना कोई कारण बताए मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध कराने व सुनवाई अब 6 फरवरी को तय की थी। इसी कड़ी में आज जस्टिस सुनील गौर की अदालत में सुनवाई हुई। वहीं दूसरी ओर निचली अदालत में वीरभद्र सिंह दंपत्ति की पेशी 22 फरवरी को है। निचली अदालत ने आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले में वीरभद्र व उनकी पत्नी समेत नौ आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में आरोप तय किए थे। इस आदेश को आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी,लेकिन वहां कोई राहत नहीं मिली।
सीबीआई की जांच में वीरभद्र सिंह पर केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनकी संपत्ति घोषित आय से 192 फीसदी अधिक पाई गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी वीरभद्र सिंह और उनके एलआइसी एजेंट आनंद चौहान के खिलाफ भी आरोप निर्धारित होने हैं। वीरभद्र सिंह की पत्नी व पूर्व कांग्रेस सांसद प्रतिभा सिंह, सेब के आढ़ती चुन्नी लाल, वीरभद्र सिंह परिवार के कारोबारी मित्र वाक्कामूल्ला चंद्रशेखर के खिलाफ सात जनवरी को ही आरोप निर्धारित हो चुके हैं।

IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू एंड फैमिली की कोर्ट में होगी पेशी

आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य अक्टूबर 6 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होंगे. दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने लालू एंड फेमली के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. साथ ही कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य लोगों को बतौर आरोपी समन जारी कर 6 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था.
आईआरसीटीसी होटल आवंटन मामले में सीबीआई के बाद ईडी ने पटियाला हाउस कोर्ट में लालू एंड फेमली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.चार्जशीट में ईडी ने कई अहम सबूत की बात कही थी. चार्जशीट में ईडी ने लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री प्रेमचंद्र गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता और तत्कालीन एमडी बीके अग्रवाल के अलावा अन्य लोगों को आरोपी बनाया था.  
इससे पहले आईआरसीटीसी टेंडर मामले में जहां एक ओर घोटाले की सीबीआई जांच कर रही थी. वहीं, दूसरी ओर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही थी.इससे पहले सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए लालू एंड फेमली को तलब किया था.
तेजस्वी यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से 31 अगस्त को राहत मिल गई थी. तेजस्‍वी यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मिली थी जबकि जेल में रहने की वजह से लालू यादव कोर्ट में पेश नहीं हो सकते थे, इसलिए कोर्ट ने सीबीआई की मांग पर प्रोडक्शन वारंट जारी कर लालू यादव को 6 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया था. 
क्या है पूरा मामला?  

यह मामला इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (आईआरसीटीसी) द्वारा रांची और पुरी में चलाए जाने वाले दो होटलों की देखरेख का काम सुजाता होटल्स नाम की कंपनी को देने से जुड़ा है. विनय और विजय कोचर इस कंपनी के मालिक हैं. इसके बदले में कथित तौर पर लालू को पटनामेंबेनामी संपत्ति के रूप में तीन एकड़ जमीन मिली. 
एफआईआर में कहा गया था कि लालू ने निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया. इसके बदले में उन्हें एक बेनामी कंपनी डिलाइट मार्केटिंग की ओर से बेशकीमती जमीन मिली.सुजाता होटल को ठेका मिलने के बाद  2010 और  2014 के बीच डिलाइट मार्केटिंग कंपनी का मालिकाना हक सरला गुप्ता से राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास आ गया. हालांकि इस दौरान लालू रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके थे.