सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) में जोड़े गए प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। इस बीच केंद्र ने इस एक्ट की तारीफ करके इसे मीडिया चर्चा में ला दिया है। केंद्र का कहना है कि इसी कानून और इसके प्रावधानों के कारण विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़े लोगों से 18 हजार करोड़ रूपए लेकर बैंकों को लौटाए गए और अब भी करीब 67000 करोड़ रुपए के सैंकड़ों केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
PMLA की जरूरत
मौजूदा जानकारी के अनुसार, ईडी इस कानून के अंतर्गत 4, 700 केसों की जाँच कर रही है। मात्र पाँच सालों में इस कानून के अंतर्गत 2, 086 केस दर्ज हुए हैं। इस कानून का उद्देश्य काले धन को सफेद में बदलने वाली प्रक्रिया जिसे मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं, उससे लड़ना है। हमने भले ही मोदी सरकार के आने के बाद इस कानून को लेकर मीडिया में ज्यादा खबरें पढ़ीं। कभी मेहूल चोकसी, नीरव मोदी, विजय माल्या केस में तो कभी महाराष्ट्र के 100 करोड़ वसूली केस में। लेकिन हकीकत ये है कि ये कानून हाल फिलहाल में भारत में अस्तित्व में नहीं आया है। इसकी नींव भारत में 20 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान पड़ी थी, जिसके बाद इसके तहत अब तक इस मामले में 313 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
ये आँकड़ा अन्य देशों में रजिस्टर होने वाले प्रति वर्ष केसों से बहुत कम है। लेकिन इसकी जरूरत और इसमें हुए संशोधनों की आवश्यता भारत में कम नहीं है। सबसे पहले भारत में मनी लॉन्ड्रिंग कानून, 2002 में अधिनियमित किया गया था, लेकिन इसके बाद इसमें 3 बार संशोधन (2005, 2009 और 2012) हुए। आखिरी संशोधन साल 2012 में हुआ था। जिसमें अपराधों की लिस्ट में धन को छुपाना, अधिग्रहण, कब्ज़ा और धन का आपराधिक कामों में उपयोग करना शामिल था।
PMLA के तहत चर्चित मामलों में कार्रवाई
पिछले कुछ सालों में PMLA एक्ट के तहत कई बड़े घोटालों में कार्रवाई हुई है। इनमें एक घोटाला पोंजी एक्ट से जुड़ा है। जिसकी कार्रवाई में ईडी ने IMA समूह और इसके प्रबंध निदेशक, मोहम्मद मंसूर ख़ान के ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए 20 अचल सम्पत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत 209 करोड़ रुपए ज़ब्त किए थे।
इसके अलावा पिछले साल बसपा नेता हाजी इकबाल पर इस मामले में कार्रवाई हुई थी। ईडी ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया था। ऐसे ही केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही जानकारी दी थी कि कोर्ट के द्वारा पीएमएलए के अंतर्गत जारी किए ऑर्डर के तहत ईडी ने विजय माल्या, नीरव मोदी और चोकसी के मामलों में अब तक 18 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त किया है। इनमें विजय माल्या पर देश से 9 हजार करोड़ और नीरव मोदी पर 14 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। अभी हाल में पीएमएलए के तहत एबीजी शिपयार्ड कंपनी पर भी कार्रवाई हुई है। शिपयार्ड पर आरोप हैं कि 23 हजार करोड़ का घोटाला कंपनी ने बैंकों से किया।
PMLA में दोषी पाए जाने पर दंड
धन शोधन कानून के तहत अगर कोई अपराधी पाया जाता है तो उसे कम से कम 3 साल की जेल जिसे 7 साल भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अपराध की प्रवृत्ति देखते हुए इसमें जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। इस कानून का उद्देश्य यही है कि केंद्रीय एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई कर सकें और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल या उससे प्राप्त संपत्ति को जब्त कर सकें।
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