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राजस्थान : ‘देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ फेंको, मुफ्त इलाज और 10 हजार रूपए महीना लो’: भरतपुर की चंगाई सभा के आरोपितों ने धर्मांतरण की ली थी ट्रेनिंग

                                 आरोपित रविंद्र, उसकी पत्नी और चंगाई सभा (साभार: भास्कर/पत्रिका)
भारत में घटती हिन्दू आबादी का मुख्य कारण धर्मातरण और अवैध घुसपैठियों का होना है। अब अदालतों ने भी मामले की गंभीरता को भांपते हुए कहना शुरू कर दिया कि 'धर्मातरण रोको और घुसपैठियों को बाहर निकालो', और जब तक राज्य और केंद्र सरकारें सख्ती से इन कामों को दुर नहीं करती, निश्चितरूप से वह दिन भी ज्यादा दूर जब सेकुलरिज्म
 नाम का भी नहीं रहेगा और आज सेकुलरिज्म का ढोल पीटने वाला कोई दूर तक नज़र नहीं आएगा।    

राजस्थान के भरतपुर स्थित एक गाँव में में ईसाई में धर्मांतरण की घटना में 20 महिलाओं सहित 28 लोगों को हिरासत में लेने के बाद उन्हें जमानत मिल गई है। ईसाइयों की चंगाई सभा में धर्मांतरण के लिए 100 से अधिक लोगों को बुलाया गया था। इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। वे लोग हर महीने 10 हजार रुपए देने और कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करने का दावा कर रहे थे।

धर्मांतरण सभा में बुलाए गए लोगों को पैसे के साथ-साथ कैंसर जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज का लालच दिया गया था। सभा में आरोपित हिन्दू-देवी देवताओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। जब इसका एक व्यक्ति ने विरोध किया तो उसे अपमानित किया गया और धमकी दी कि ईसा मसीह उसे भस्म कर देंगे। ईसा मसीह के सामने हिन्दू देवी-देवता कमजोर बताया जाता था।

दरअसल, सिमको रेलवे फाटक संख्या 39 के निकट एक मकान में शुक्रवार (5 जुलाई 2024) की सुबह धर्म-परिवर्तन सभा चल रहा था। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं को जब इसकी जानकारी मिली तो वे पहुँचकर विरोध करने लगे। इसके बाद उन लोगों के साथ मारपीट की गई। इसकी सूचना मिलने पर थाना मथुरा गेट पुलिस मौके पर पहुँची और 28 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

मथुरा गेट थाना इंचार्ज करन सिंह राठौड़ ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ धारा 299 (किसी धर्म को लेकर विद्वेष पूर्ण कार्य करने) और 302 (शब्दों के माध्यम से किसी को धर्म बदलने के लिए प्रेरित करने) में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। शनिवार (6 जुलाई) को कोर्ट ने रविंद्र कुमार को जमानत दे दी। बाकी लोगों को शुक्रवार को ही 5-5 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी गई थी।

इस घटना का मुख्य आरोपित 39 वर्षीय रविंद्र कुमार और 32 साल की उसकी पत्नी रूबी हैं। दोनों फाटक नंबर 39 और एक अन्य आरोपित फूल सिंह डीग के तेलीपाड़ा का निवासी है। दोनों पति-पत्नी शहर में चर्च फाउंडेशन चलाते हैं। इन्होंने पंजाब के चंडीगढ़ से बाकायदा ट्रेनिंग भी ली थी। ये वॉट्सऐप ग्रुप से लोगों को जोड़ते थे और सेंटर में कैंसर जैसी बीमारी को ठीक करने का दावा करते थे।

घटना को लेकर FIR निरंजन सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “आरोपित सभा में शामिल लोगों से कह रहे थे कि देवी-देवताओं की मूर्ति पूजा छोड़कर ईसाई धर्म अपनाओ। हिंदू देवी-देवताओं ने कोई अवतार नहीं लिया। भगवान श्रीकृष्ण के बारे में अपशब्द कहे और हिंदू धर्म को सबसे नीच बताया। यह भी कहा कि यीशु सबसे बड़े भगवान हैं। उनकी सेवा करोगे तो स्वर्ग मिलेगा।”

दैनिक भास्कर के अनुसार, FIR में कहा गया है, “सभा में आरोपितों ने लोगों से कहा कि देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़कर फेंक दो। सभा में आने वालों को 10,000 रुपए बोनस और फ्री इलाज का लालच दिया गया। लगातार आने पर बोनस बढ़ने की बात भी कही। जब हमने विरोध किया तो रविंद्र ने कहा- भाग जा यहाँ से, वरना यीशु तुझे भस्म कर देंगे। तेरे देवता यीशु के सामने नहीं रुक सकते।”

पुलिस की जाँच में रविंद्र के घर से करीब 5 बाइबिल और ईसाई धर्म की अन्य प्रचार सामग्री मिली है। उन सबको जब्त कर लिया गया है। आरोपित रविन्द्र कुमार के मोबाइल में कई वॉट्सऐप ग्रुप भी मिले हैं। इनमें लोगों को सेंटर से जुड़ने को लेकर मैसेज किए गए थे। पुलिस इस मामले में रविंद्र कुमार के बैंक खातों को खंगाल रही है और फंडिंग के स्रोत के बारे में पता लगा रही है।

विहिप के जिला अध्यक्ष लाखन सिंह ने बताया कि रविंद्र कुमार भरतपुर के अजान गाँव का रहने वाला है। वह कई सालों से भरतपुर में धर्म परिवर्तन का सेंटर चला रहा है। इसमें उसकी पत्नी भी साथ देती है। रविंद्र की पत्नी ने चंडीगढ़ में धर्म परिवर्तन की ट्रेनिंग ली। इसके बाद दोनों ने धर्म परिवर्तन का सेंटर शुरू किया। वे गाँव-गाँव और बस्तियों में जाकर लोगों को ईसाई धर्म के बारे में बताने लगे।

अवलोकन करें:-

क्यों अदालतें कह रहीं- धर्मांतरण रोको, घुसपैठियों को भगाओ?

लाखन सिंह ने बताया कि रविंद्र ने अपने घर से देवी-देवताओं की तस्वीरें निकालकर नाली में फेंक दी थी। अजान गाँव के लोगों को जब पता चला तो उसे और उसकी बीवी को पीटकर गाँव से भगा दिया। उसके बाद दोनों भरतपुर के एकता विहार कॉलोनी में प्लाॅट लेकर उस पर धर्मांतरण सेंटर चलाने लगे। वहाँ से लोगों ने भगाया तो वे रेलवे फाटक आ गए। इस दौरान इस काम में रविंद्र का भाई भी जुड़ गया।

‘भाषण’ देना नहीं आया केजरीवाल के काम, कोर्ट ने 1 अप्रैल तक के लिए ED को सौंपा: ASG बोले – मुख्यमंत्री कानून से ऊपर नहीं

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की हिरासत अवधि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 4 दिन और बढ़ा दी है। हालाँकि, ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने उनकी 7 दिनों की रिमांड की माँग की थी। वो पिछले एक सप्ताह से ED की कस्टडी में हैं। अब सोमवार (1 अप्रैल, 2024) तक दिल्ली के मुख्यमंत्री ED की कस्टडी में रिमांड पर रहेंगे। उनके खिलाफ शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने उनकी रिमांड की अवधि बढ़ाने वाला आदेश दिया।

4 दिनों के लिए बढ़ाई गई अरविंद केजरीवाल की ED कस्टडी

ED पहले ही अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बता चुकी है। आरोप है कि 2021-22 में शराब नीति बनाने के लिए दारू माफियाओं की ‘साउथ लॉबी’ से 100 करोड़ रुपए बतौर घूस लिए गए और इस रकम को गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किया गया। अरविंद केजरीवाल पर जाँच में सहयोग न करने का आरोप लगा है। ASG SV राजू ने कोर्ट में अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आखिर शराब नीति को भाजपा से क्यों जोड़ा जा रहा है?
उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल भाजपा के पास पैसे आने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसका शराब नीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कानून से ऊपर नहीं है, वो एक आम आदमी है। उन्होंने बताया कि जाँच एजेंसी के पास कई सबूत हैं कि खुद दिल्ली के CM ने 100 करोड़ रुपए की घूस की माँग की थी। अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका डाली गई थी, लेकिन 22 मार्च को अगले ही दिन उसे वापस ले लिया गया।
अब अरविंद केजरीवाल को 1 अप्रैल, 2024 को सुबह के साढ़े 11 बजे कोर्ट में फिर से पेश किया जाएगा। हाईकोर्ट पहले ही उन्हें अंतरिम राहत देने की याचिका ठुकरा चुका है, और कह चुका है कि 3 अप्रैल को ED की प्रतिक्रिया जानने के बाद ही फैसला सुनाया जाएगा। AAP के गोवा के प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर को भी जाँच एजेंसी ने समन भेजा है। बता दें कि ED के 9 समन ठुकराने के बाद अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था।

शराब घोटाला: कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

आतिशी, सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय जैसे दिल्ली के मंत्रीगण सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता भी इस दौरान वहाँ थीं। कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान मीडिया से अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी गिरफ़्तारी एक राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसका जनता जवाब देगी। ASG (एडिशनल सॉलिसिटर जनरल) SV राजू ने ED की तरफ से पेश होते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल का बयान रिकॉर्ड किया जा चुका है, उन्होंने गोलमोल जवाब दिए हैं।
उन्होंने बताया कि ED अब उन्हें कुछ अन्य आरोपितों के साथ आमने-सामने बिठा कर पूछताछ करेगी। AAP के गोवा के 4 अन्य उम्मीदवारों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं, उनके साथ भी दिल्ली सीएम को आमने-सामने बिठाया जाएगा। बता दें कि शराब घोटाले में माफियाओं की साउथ लॉबी से मिली 100 करोड़ रुपए की घूस को गोवा के चुनाव प्रचार में खर्च किया गया था। अब तक अरविंद केजरीवाल ने अपने गैजेट्स के पासवर्ड्स ही नहीं बताए हैं, जिस कारण ED उनका डिजिटल डेटा नहीं मिल पाया है।
बकौल ASG, अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि वो अपने वकीलों से बात कर के तय करेंगे कि पासवर्ड्स देने हैं या नहीं। अगर वो पासवर्ड्स नहीं देते हैं तो ED गैजेट्स की छानबीन के लिए दूसरा रास्ता अख्तियार करेगी। बकौल ED, अरविंद केजरीवाल जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और अपने ITR (आयकर विवरण) भी नहीं दिखा रहे हैं। पंजाब के एक्साइज अधिकारियों को भी समन किया गया है। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने भी कोर्ट में अपनी बात रखी।
उन्होंने खुद बोलते हुए कहा कि वो ED अधिकारियों को धन्यवाद देना चाहते हैं, ये मामला 2 वर्षों से चल रहा था। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें अब तक अदालत ने दोषी साबित नहीं किया है, वो सिर्फ गिरफ्तार हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि 31,000 पन्ने CBI ने दायर किए हैं और 25,000 पन्नों के विवरण ED ने, लेकिन उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया इसका जवाब इनमें नहीं है। कोर्ट ने जब उनसे पूछा कि वो ये सब लिखित में क्यों नहीं दे रहे, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि वो बोलना चाहते हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा, “मेरा नाम 4 जगह आया है बस। एक C अरविंद है जिसने कहा है कि उसने मेरी उपस्थिति में कुछ दस्तावेज मनीष सिसोदिया को दिए। मेरे घर रोज विधायक आते रहते हैं। क्या एक वर्तमान CM को गिरफ्तार करने के लिए ये एक बयान काफी है? आरोपितों को बयान बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ED का मिशन है – केवल मुझे और मुझे फँसाना। अगर 100 करोड़ रुपए का शराब घोटाला शुरू हुआ तो पैसा किधर है? असली शराब घोटाला ED की जाँच के बाद शुरू हुआ। ED का मकसद है – AAP को खत्म करना।”
अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे एक वसूली का रैकेट चलने के लिए ये सब किया जा रहा है, जिसके जरिए पैसे इकट्ठे किए जा रहे हैं। उन्होंने मामले के एक गवाह सार्थक रेड्डी पर भाजपा को 50 करोड़ रुपए गिरफ़्तारी के बाद दान देने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ED जितने दिन मन उन्हें कस्टडी में रखे, वो रिमांड का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन ये घोटाला है। ASG ने आपत्ति जताते हुए कहा कि केजरीवाल को कैसे पता कि ED के पास कितने दस्तावेज हैं, ये सब उनकी कल्पना की उपज है।
अधिवक्ता रमेश गुप्ता जब अरविंद केजरीवाल के लिए बोलने उठे तो कोर्ट ने उनसे कहा कि उनके मुवक्किल तो पहले ही बोल चुके, इस पर भड़कते हुए वकील ने पूछा कि आखिर उन्हें बोलने से कैसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि वो पूरे एक घंटे बोलेंगे, जिस पर जज ने कहा, “ठीक है, आप शांत हो जाइए।” कोर्ट ने कहा कि ED ने रिमांड एप्लिकेशन दिया है और ये जज निर्णय करेंगे कि वो सही है या नहीं। इसके बाद ऑर्डर रिजर्व रख लिया गया। फिर कुछ देर बाद फैसला सुनाया कि आरोपित की रिमांड की अवधि 4 दिन बढ़ाई जाती है।

चीन के पैसे से चलता है अभिसार शर्मा वाला ‘न्यूजक्लिक’: अर्बन नक्सलियों का पूरा नेटवर्क

                                                अभिसार शर्मा वाले न्यूज़क्लिक को चीन से फंडिंग
90 के दशक तक फिल्म पत्रकारिता को Yellow Journalism कहते थे, लेकिन 90 
के दशक के अंत होते-होते लगभग सारी ही पत्रकारिता Yellow Journalism में परिवर्तित हो गयी। यूपीए के कार्यकाल में जब 'हिन्दू आतंकवाद' और 'भगवा आतंकवाद' के नाम से सनातन को बदनाम किया जा रहा था, अधिकतर चैनल तत्कालीन सरकार के इस दुष्प्रचार का समर्थन कर रहे थे। लेकिन आज कुछ चैनल अपनी कार्यशैली में परिवर्तन कर चुके हैं, परन्तु विदेशी फंडिंग पर चल रहे चैनल अपनी उसी पुरानी परिपाटी पर चल रहे हैं। 

अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में अमेरिकी व्यवसायी के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया गया।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में कहा है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के मुद्दों को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है।

नेविल रॉय सिंघम के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के साथ मजबूत संबंध हैं। वह चीन की ‘स्मोक लेस’ वार नीति को सफल बनाने में सबसे आगे रहा है। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपने लेख में यह भी कहा है, “चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने शासन काल में सरकारी मीडिया तंत्र का तेजी विस्तार किया है। इसके लिए चीन ने विदेशी मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के प्रभावशाली लोगों को अपने प्रचार तंत्र में शामिल किया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से चीनी प्रोपेगेंडा को स्वतंत्र मीडिया सामग्री के रूप में दिखाना है।”

NYT ने यह भी कहा है, “इसका यह नतीजा सामने आ रहा है कि धुर वामपंथी संगठन उभर रहे हैं। ये संगठन चीनी सरकार की बातों को दोहराते हैं या इनके विचार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मेल खाते हैं। यही नहीं चीन का सरकारी मीडिया भी इन संगठनों की बात करता दिखाई देता है।” अपनी जाँच में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाया है कि नेविल रॉय सिंघम ने भारत में स्थित ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को भी फंडिंग की है। अमेरिकी अखबार ने पाया है कि न्यूजक्लिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुद्दों पर बात करता दिखाई दिया है।

नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट फाइलिंग से भी पता चलता है कि नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क ने प्रोपेगेंडा पोर्टल न्यूज़क्लिक को फंडिंग की थी। इसके तहत न्यूजक्लिक ने अपनी कवरेज को चीनी सरकार के मुद्दों से जोड़ते हुए एक वीडियो में कहा था, “चीन का इतिहास श्रमिक वर्गों को प्रेरित करता रहा है।”

‘न्यूज़क्लिक’ को मिली विदेशी फंडिंग का ईडी ने भी किया था खुलासा

9 फरवरी 2021 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने न्यूजक्लिक के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर छापा मारा था। ईडी के सूत्रों के अनुसार, न्यूज़क्लिक को एक अमेरिकी कंपनी से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के तहत 10 करोड़ रुपए मिले थे। दिलचस्प बात यह है कि पुरकायस्थ को इस बात का पता ही नहीं था कि अमेरिकी कंपनी ने उनकी कंपनी के खाते में पैसा क्यों ट्रांसफर किया। वास्तव में, अमेरिकी कंपनी से मिले फंड के बदले उन्होंने क्या काम किया था वह उस बारे में कोई सबूत नहीं दे पाए थे।
आगे की जाँच में पता चला कि अमेरिका स्थित एक अन्य कंपनी ने न्यूज़क्लिक को 20 करोड़ रुपए दिए और इसे ‘एक्स्पोर्ट रेमिटेंस’ के रूप में बताया गया था। यह फंड इसलिए ट्रांसफर किया गया था क्योंकि न्यूजक्लिक ने पीपल्स डिस्पैच नामक पोर्टल पर कंटेंट अपलोड किया था।
सूत्रों से यह भी पता चला है कि न्यूजक्लिक के संस्थापक पुरकायस्थ ने रखरखाव के नाम पर 1.5 करोड़ रुपए भी लिए थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने कार्यालय में रखरखाव के लिए 9वीं कक्षा पास इलेक्ट्रीशियन को काम पर रखा था। यही नहीं उन्होंने जो पैसा लिया था वह बिना किसी कागजी कार्यवाही के उन्हें मिला था। ऐसे में वह इस लेन देन के बारे में ED को कुछ भी नहीं बता पाए थे।
जुलाई 2021 में, ED ने बताया था कि ‘न्यूज़क्लिक’ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच से पता चला है कि इसके प्रमोटरों को करीब 38 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। इस फंडिंग के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े होने का संदेह है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रहे एक अधिकारी ने खुलासा किया था कि ‘न्यूज़क्लिक’ का नेविल रॉय सिंघम नामक श्रीलंकाई-क्यूबा स्थित व्यवसायी के साथ वित्तीय लेनदेन था।
सिंघम ने ही कथित तौर पर विदेश से 2018 से 2021 के बीच ‘पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड’ को 38 करोड़ रुपए दिए थे। ‘न्यूजक्लिक’ को मिले पैसों की जाँच करने वाले अधिकारियों का कहना है कि नेविल रॉय सिंघम कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CCP) के प्रोपेगेंडा फैलाने वाली शाखा के लिए काम करता है।

पैसों की जानकारी पार्टी में सभी टॉप नेताओं को, जो बरामद हुआ… वह सिर्फ छोटा सा हिस्सा: पार्थ चटर्जी

                                                  पार्थ चटर्जी ने भ्रष्टाचार मामले में सबको लपेटा
पार्टी से सस्पेंड कर दिए गए TMC नेता पार्थ चटर्जी सुर्खियों में हैं। ममता सरकार में मंत्री रहे पार्थ की करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी में करोड़ों रुपए नकद और सोना बरामद किया। अब पार्थ चटर्जी का कहना है कि इन पैसों की जानकारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में सभी शीर्ष नेताओं को थी। आपको बता दें कि TMC की सबसे बड़ी नेता और सर्वेसर्वा ममता बनर्जी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पूछताछ में अर्पिता मुखर्जी ने बताया था कि पार्थ उनके फ्लैटों को बैंक की तरह प्रयोग करते थे। फिलहाल पार्थ चटर्जी गिरफ्तार हैं। पूछताछ में उन्होंने बताया है कि उनके द्वारा लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में सभी शीर्ष नेताओं को थी।

पैसों के बारे में TMC के टॉप लीडर को सब पता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी से सस्पेंड होने और मंत्री पद से हटा दिए जाने के बाद पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को खुद ही सब कुछ बताना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा:
“स्कूल में अध्यापक बनाने के नाम पर कैंडिडेट्स से लिए जा रहे पैसों की जानकारी पार्टी में शीर्ष नेतृत्व सहित बाकी सबको थी। मैंने तो सिर्फ पैसों को अपने पास रखा था। न ही मैंने किसी कैंडिडेट से पैसे लिए और न ही माँगे। यह पार्टी का एक आदेश था, जिसे मैंने माना। पैसे कई अन्य नेताओं ने भी लिए, जो सब मुझे रखने को दे दिया गया था।”

जो मिला वो तो एक छोटा सा हिस्सा

पार्थ चटर्जी ने आगे कहा, “जो पैसे मेरे पास रखे हुए थे, उसमें से सैकड़ों करोड़ रुपए पार्टी ने प्रयोग कर डाले। मेरे पास जो बरामद हुआ, वह तो एक छोटा सा हिस्सा है। मेरे अलावा कई अन्य नेताओं ने अपने पैसे से अर्पिता मुखर्जी के नाम पर जमीनें खरीदी हैं। सबके पैसे मेरे पास रखने के लिए पार्टी ने लम्बा समय विचार करने में लिया था। अब पार्टी द्वारा मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया गया है।”

टीचरों के अलावा रेलवे में नौकरियों के लिए भी पैसे

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पार्थ चटर्जी ने जाँचकर्ताओं को जानकारी दी है कि न सिर्फ टीचरों बल्कि रेलवे की नौकरियों के लिए भी TMC नेताओं ने कैंडिडेट्स से पैसे लिए हैं। उन्होंने बताया, “मेरा काम दूसरे नेताओं द्वारा बनाए गए कागजातों पर साइन करने तक सीमित था। मजेरहाट इलाके में बाकायदा ऐसी डील करने के लिए ऑफिस खोले गए हैं। रेलवे की नौकरियों के नाम पर भी पैसे जमा किए गए हैं।”
पार्थ चटर्जी के अनुसार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) जब सत्ता में नहीं थी, तब भी वो पैसे लेकर नौकरी लगा देने के खेल खेलती थी। तृणमूल को पैसे देकर रेलवे में कई लोगों ने नौकरी जॉइन की है। पार्थ चटर्जी की मानें तो शिक्षा और रेलवे के अलावा भी कई अन्य विभागों में पैसे लेकर नौकरी देने का भ्रष्टाचार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने किया है।

अर्पिता को उसके पैरों पर खड़ा करना चाहता था

अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयां की। पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) ने बताया: “मैं अर्पिता को आत्मनिर्भर बनाना चाहता था। मैं चाहता था कि वो मॉडलिंग और फिल्म इंडस्ट्री में अपना खुद का मुकाम हासिल करे। पार्टी को अपने ढेर सारे पैसे छिपाने के लिए एक सेफ जगह की तलाश थी। इस काम के बदले अर्पिता को कमीशन देने का वादा किया गया था। कई बड़े अधिकारी अर्पिता के नाम पर लिए गए घरों का दौरा भी कर चुके हैं।”

पहली बार नहीं लगा पैसे के बदले नौकरी का आरोप

नौकरी के बदले पैसे का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर पहली बार नहीं लगा है। अप्रैल 2022 में भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने TMC कार्यकर्ताओं पर मेडिकल कॉलेजों में ग्रुप बी, सी कैटेगरी में नौकरी दिलाने का झाँसा देकर पैसे लेने का आरोप लगाया था। भाजपा नेता के मुताबिक तब टीएमसी पार्षद ने लगभग 530 ऐसे लोगों को 50 हजार रुपए से 1 लाख रुपए के बीच में ठगा था, जो गरीब परिवारों से आते थे।