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महाराष्ट्र : उद्योगपतियों के घर से सोना-चाँदी सहित 390 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त

                                                                                                     साभार- @GoodNewsToday
महाराष्ट्र के जालना जिले (Jalna, Maharashtra) में आयकर विभाग (IT) की छापेमारी के दौरान कुल 390 करोड़ रुपए से अधिक की बेहिसाब सम्पत्ति मिली है। बताया जा रहा है कि ये छापेमारी स्टील, कपड़ों और रियल एस्टेट का काम करने वाले उद्योगपतियों के ठिकानों पर हुई है। छापेमारी 1 अगस्त से 8 अगस्त के बीच हुई।

छापेमारी के दौरान 56 करोड़ रुपए कैश और 32 किलो सोना के अलावा हीरा, मोती, चाँदी एवं अन्य संपत्तियों के दस्तावेज मिले। आयकर विभाग को नोटों को गिनने और सीज करने में लगभग 13 घंटों का समय लगा। नोटों की गिनती सुबह 11 बजे से शुरू हो कर रात 1 बजे तक चली। वायरल तस्वीरों में नोटों के कई बंडल दिखाई दे रहे है।

जिस तरह छापेमारी में रुपयों के बंडलों के साथ-साथ सोना और चांदी की बरामदगी हो रही है, बहुत कुछ अनकही बातों को बोल रही हैं, जिनसे आज तक जनता बेखबर थी। रेहड़ी और पटरी पर सौदा बेचने के साथ-साथ भीख मांगना भी एक व्यापार ही है। दो बार जूस बेचने वालों की शादी में जाने का अवसर मिला, इतने भव्य स्तर पर समारोह देख दंग रह गया। एक विवाह में हेलीकाप्टर बनवाकर जयमाला, दूसरे में राजकपूर की प्रदर्शित हुई प्रेम रोग में 'भंवरे ने खिलाया फूल...' गीत में बने फूल का दृश्य की भांति जयमाला हुई। बात उन दिनों की है जब राजकपूर की प्रेम रोग सिनेमा हॉलों पर चल रही थी। वैसे इसी ब्लॉग पर विस्तार "मासिक आय लाखों में फिर भी गरीब' शीर्षक लेख में लिख चूका हूँ।   

रिपोर्ट के मुताबिक, छापेमारी के दौरान आयकर विभाग के लगभग 300 अधिकारी मौजूद थे। इस छापेमारी को आयकर विभाग की नासिक ब्रान्च ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मामले को गुप्त रखने के लिए रेड में स्थानीय पुलिस को शामिल नहीं किया गया था। छापेमारी में शामिल सभी अधिकारी 5 टीमों बँटे हुए थे।

रेड की तैयारी 5 दिनों से की जा रही थी। दावा है कि कालिका स्टील और साईं राम स्टील पर यह रेड डाली गई है। कालिका स्टील के मालिक का नाम घनश्याम गोयल बताया जा रहा है।आयकर विभाग ने इन कंपनियों के घरों, ऑफिसों और कारखानों को खंगाला। मामले की जाँच अभी भी जारी है।

एक रिपोर्ट में दावा है कि ये छापेमारी 3 अगस्त को की गई थी। इस छापेमारी के लिए आयकर विभाग के अधिकारी 100 से अधिक वाहनों से आए थे। इन कारों के शीशे पर राहुल वेड्स अंजलि नाम से शादी का स्टीकर लगा हुआ था। स्थानीय लोग भी इसे किसी शादी समारोह में जाने वाला काफिला समझ रहे थे। छापेमारी बेहद गुप्त तौर पर की गई थी। इस रेड में शामिल कई अधिकारियों को भी ये नहीं पता था कि वो कहाँ जा रहे हैं।

28 जुलाई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पश्चिम बंगाल में हुई छापेमारी में वहाँ के मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से करोड़ों रुपए कैश बरामद किए थे। इस छापेमारी के बाद पार्थ चटर्जी का मंत्री पद छिन गया था।

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला : ईडी की छापेमारी में घर से मिले 20 करोड़ रूपए और 20 मोबाइल

                              ममता और पार्थ चटर्जी के साथ अर्पिता मुखर्जी (फोटो साभार: नई दुनिया)
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्री जनता को लूटने में लगे हैं। इसका खुलासा प्रवर्तन निदेशालय ने किया है। ईडी ने शनिवार (23-07-2022) को शिक्षक भर्ती घोटाले में ममता सरकार में मंत्री और तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को भी हिरासत में ले लिया है। एक दिन पहले ही ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापेमारी की थी, जिसमें करीब 20 करोड़ रुपये के कैश मिले। ईडी ने एक बयान में कहा क‍ि ये कैश शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े हो सकते हैं।

ईडी की छापेमारी से सु्र्खियों में आई अर्पिता मुखर्जी की बात करें तो वो बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुकी हैं, हालांकि बेहद कम समय के लिए। अर्पिता मुखर्जी ने अपने फिल्मी कॅरियर में ज्यादातर साइड रोल ही किए हैं। उन्होंने बांग्ला फिल्मों के अलावा ओडिया और तमिल फिल्मों में भी काम किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्थ चटर्जी दक्षिण कोलकाता में एक दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक हैं। यह कोलकाता की बड़ी दुर्गापूजा समितियों में एक है। अर्पिता भी इसी दुर्गापूजा समिति से जुड़ी रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान कई बार पूजा पंडलों में लगे पोस्टरों पर उनका नाम अध्यक्ष के रूप में लिखा देखा गया था। दुर्गापूजा समिति के माध्यम से अर्पिता मुखर्जी पार्थ चटर्जी के करीब आईं।

ईडी के अधिकारी शुक्रवार सुबह पार्थ चटर्जी के घर पहुंचे थे और उनसे एसएससी घोटाले की जांच के सिलसिले में पूछताछ शुरू की थी। करीब 26 घंटे तक पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के दो मंत्रियों समेत करीब एक दर्जन लोगों के घरों पर शुक्रवार को एक साथ छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ रुपये कैश मिले। ईडी अधिकारियों को 500 और 2000 के नोटों को गिनने के लिए काउंटिंग मशीन की मदद लेनी पड़ी।

ममता बनर्जी की टीएमसी ने भले ही एक आधिकारिक बयान जारी कर खुद को इस घोटाले से दूर कर लिया हो, लेकिन बीजेपी नेता सुवेंदू अधिकारी सरकार को घेर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अर्पिता मुखर्जी के घर से 20 करोड़ रुपये मिले हैं। वे पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की खास सहयोगी हैं। जानकारी तो ये भी मिली है कि ये पैसा शिक्षा मंत्रालय के लिफाफे में पड़ा मिला है। उस लिफाफे पर भी राष्ट्रीय स्मारक का लोगो प्रिंट किया हुआ है। क्या ये मामले का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है?

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदारी ने तो इसे बंगाल का मॉडल बता दिया। उनके मुताबिक टीएमसी ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। टीएमसी अभी पूरे मामले को करीब से देख रही है। समय आने पर प्रतिक्रिया दी जाएगी। कहा गया है कि जांच में जिनके भी नाम सामने आए हैं, जवाब देना उनका और उनके वकीलों का काम है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर ईडी की टीम पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग भर्ती घोटाले के आरोपी पार्थ चटर्जी के घर पहुंची थी। जब यह कथित घोटाला हुआ था, तब चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे। पार्थ चटर्जी अभी उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री हैं। सीबीआई दो बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। पहली बार 25 अप्रैल को और दूसरी बार 18 मई को पूछताछ की गई थी। प्रवर्तन निदेशालय इस घोटाले में कथित रूप में शामिल लोगों के खिलाफ धनशोधन संबंधी पहलू की जांच कर रहा है। ईडी की रडार पर और भी लोग शामिल हैं। उनके खिलाफ भी छापेमारी जारी है। 

ईडी की छापेमारी से सु्र्खियों में आई अर्पिता मुखर्जी की बात करें तो वो बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुकी हैं, हालांकि बेहद कम समय के लिए। अर्पिता मुखर्जी ने अपने फिल्मी कॅरियर में ज्यादातर साइड रोल ही किए हैं। उन्होंने बांग्ला फिल्मों के अलावा ओडिया और तमिल फिल्मों में भी काम किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्थ चटर्जी दक्षिण कोलकाता में एक दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक हैं। यह कोलकाता की बड़ी दुर्गापूजा समितियों में एक है। अर्पिता भी इसी दुर्गापूजा समिति से जुड़ी रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान कई बार पूजा पंडलों में लगे पोस्टरों पर उनका नाम अध्यक्ष के रूप में लिखा देखा गया था। दुर्गापूजा समिति के माध्यम से अर्पिता मुखर्जी पार्थ चटर्जी के करीब आईं।