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राजस्थान : 68,000 स्कूलों में लाखों महिला शिक्षकों और छात्राओं के लिए नहीं अलग टॉयलेट, क्यों?

कुछ मुद्दे अथवा समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी जिम्मेदारी उन सभी पार्टियों को लेनी चाहिए, जिन्होंने राज्य में राज किया या कर रही है। आज राजस्थान में जिस तरह टॉयलेट समस्या को उछाला जा रहा है, ज्वलंत प्रश्न यह है, कांग्रेस के पुरुष मुख्यमंत्री से पूर्व राजस्थान में भाजपा की महिला मुख्यमंत्री थी, उनके रहते इस गंभीर समस्या को क्यों नहीं उठाया गया। पार्टी विरोध अलग विषय है, लेकिन मूल समस्या अलग। दूसरे, किसी भी शिक्षा मंत्री अथवा अधिकारियों के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया? स्कूल नया हो, बात समझ में आती है, स्कूल पुराने हैं, क्यों नहीं प्रधानाचार्य ने शिक्षा विभाग से इसकी शिकायत की? इसका साफ मतलब लापरवाही प्रधानाचार्या से लेकर शिक्षा मंत्रालय की है। जवाबदेही सभी है। 
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा दिया था। लेकिन महिलाओं को सिर्फ चुनावी मोहरा बनाने का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा, क्योंकि महिलाओं ने कांग्रेस के इस नारे पर भरोसा नहीं किया। कांग्रेस ने इससे सबक नहीं लिया और राजस्थान में महिलाओं को अपने हाल पर छोड़ दिया है। अशोक गहलोत सरकार 68,000 स्कूलों में लाखों महिला शिक्षकों और छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट नहीं बना पाई। इससे महिला शिक्षकों और छात्राओं को जो परेशानियां उठानी पड़ रही हैं, उसे सुनकर आप हैरान रह जाए्ंगे।

कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार राज्य के 68 हजार स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहीं प्रदेश की 1.34 लाख से ज्यादा महिला शिक्षकों को अलग टॉयलेट तक नहीं दे पाई। उन्हें छात्राओं के टॉयलेट में जाना पड़ता है। 6803 स्कूलों में तो टॉयलट तक नहीं है। कई महिला टीचर्स ने लिखकर अपनी परेशानी बताई। एक प्राधानाचार्य ने तो प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा है। अखिल राजस्थान महिला शिक्षक संघ की प्रदेशाध्यक्ष कमला लांबा ने राज्य सरकार पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया है। 

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दैनिक भास्कर की एक खबर को शेयर करते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” का नारा देने वाली कांग्रेस राजस्थान में 1.34 लाख महिला शिक्षकों के लिए 68,000 स्कूलों में अलग टॉयलेट नहीं बना पाई है। 6,803 स्कूलों में तो लड़कियों के लिए ही टॉयलेट नहीं हैं। इतनी अमानवीय स्थिति में भला कोई कैसे पढ़ या पढ़ा सकता है? गहलोत सरकार जवाब दे।

कई स्कूलों में टॉयलेट तो है, लेकिन गंदगी से अटे पड़े हैं। सफाई कर्मी तक नहीं है। राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल सरस्वती कुंड जयपुर, राजकीय प्राथमिक स्कूल तीतरवाला की ढाणी जयपुर, राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल बरतानियों की ढ़ाणी ओसियां लूणी, राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल थोब कल्याणपुर जोधपुर में भी टॉयलेट टूटे फूटे हैं। न पानी की व्यवस्था है न कोई सफाईकर्मी।

एक महिला प्राधानाचार्य ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर गुहार लगाई है। इसमें उन्होंने लिखा, “सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए ही पर्याप्त अलग टॉयलेट नहीं हैं। महिला टीचर्स के लिए तो हैं ही नहीं। महिला टीचर्स कम पानी पीती हैं। पीरियड के दौरान छात्राएं तो स्कूल ही नहीं आतीं। महिला टीचर्स को आना पड़ता है, क्योंकि पढ़ाई बाधित होगी। आज ही कुछ करें।”

“पीरियड्स के दौरान मुंह में पानी भर कर ले जाती हूं”

  • जयपुर के नजदीक गांव की शिक्षक ने लिखा कि ज्यादा आयु के कारण बैठ नहीं पाती। स्कूल में न अलग टॉयलेट हैं और न कमोड। छात्राओं के टॉयलेट जाना शर्मिंदगी भरा है।
  • जोधपुर में मंडोर के स्कूल की शिक्षक ने कहा कि टॉयलेट से बचने को हम पानी कम पीते हैं। लगातार वर्षों तक ऐसा करने से कई महिला टीचर्स को तरह-तरह की बीमारियां हो गई हैं।
  • फलौदी के स्कूल की शिक्षक ने बताया कि पीरियड के दौरान वे छात्राओं के टॉयलेट में मुंह में पानी भरकर टॉयलेट जाती हैं, ताकि टॉयलेट में खून के धब्बे न रह जाएं। कुल्ला कर धो दें।

राजस्थान चुनाव 2018: मॉब लिंचिंग पर कांग्रेस ने साधी चुप्पी, ध्रुवीकरण का सता रहा डर

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने में अब महज तीन दिन बचे हैं. 7 दिसंबर को होने जा रही वोटिंग से पहले जहां एक ओर राजनीतिक पार्टियों ने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी लड़ाई जोरों पर है. मगर अपने चुनावी अभियान में राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर शोर मचाने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस मॉब लिंचिग पर चुप्पी साधे हुए है. अपने घोषणापत्र से रैलियों, सोशल मीडिया और पोस्टर्स तक में कांग्रेस ने सार्वजनिक सुरक्षा और बढ़ती अपराध दर को मुद्दा बनाया है, लेकिन हिंदू वोट छिटकने के डर से भीड़ की हिंसा पर मौन साध लिया है.
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी राजस्थान खासकर अलवर में विरोधी दल का कोई भी नेता अपने भाषणों में मॉब लिंचिंग का जिक्र तक नहीं कर रहा है. अलवर जिले की बहरोड़ सीट से नौ उम्मीदवारों में से 8 यादव हैं. 2.2 लाख वोटरों वाली बहरोड़ सीट पर यादव समुदाय का 70 फीसदी वोट बैंक है. बता दें कि पूर्व राजस्थान के अलवर जिले में गौकशी के आरोप में हिंसक भीड़ ने पहलू खान की हत्या कर दी थी. 2017 जुलाई में रामगढ़ चुनाव क्षेत्र से 80 किमी दूर रकबर खान को भी मॉब लिंचिंग का शिकार बनाया गया. उसके बाद नवंबर 2017 में उमर खान की हत्या कथित “गौ रक्षकों” ने हत्या कर दी थी.
ऑडियो क्लिप बनी मुद्दा
निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के बागी नेता बलजीत सिंह यादव ने नवंबर 29 को एक रैली के दौरान इस मुद्दे को उठाया. सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो क्लिप का जिक्र करते हुए बलजीत ने दावा किया कि एक मुस्लिम नेता ने कांग्रेस उम्मीदवार आरसी यादव को मॉब लिंचिग की घटना को उठाने के लिए अपना समर्थन दिया. हालांकि, कांग्रेस ने आरोप को खारिज कर दिया. Rajasthan Election 2018: ट्विटर पर फिल्मी डायलॉग्स से लोग कर रहे राजनीतिक दलों पर वार!

कांग्रेस कर रही राजनीति
बलजीत के करीबी एक सूत्र ने कहा, “मासूम यादव समुदाय के लोगों को हिंसा के बाद गिरफ्तार कर लिया गया और कांग्रेस इस पर राजनीतिक करना चाहती है. हमारा इस बारे में कहना है कि निर्दोष लोगों को पहलू खान मामले में जेल में नहीं भेजा जाना था.” बहरोड़ नगर पालिका उपाध्यक्ष राकेश शर्मा की एक शादी में मर्डर के मामले को भी विपक्ष ने उठाया है.

ध्रुवीकरण करेगा मुद्दा
कांग्रेस के प्रभारी सुधांशु जोशी ने कहा, “हमारे लिए पहलू खान के मुद्दे को उठाना फायदेमंद नहीं है. वास्तव में, यह मुद्दा इस चुनाव को ध्रुवीकरण करेगा, जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. पूरी घटना को कुछ और के रूप में चित्रित किया गया था और बहरोड़ को बदनाम किया गया था. हम इस चुनावी इलाके के प्रचार में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जोर देते हैं.”

हजार से भी कम वोट
कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी कहा कि मुसलमानों को बहरोड़ में 1,000 से भी कम वोट हैं. उनके पास वैसे भी कोई विकल्प नहीं है. वे हमारे लिए ही वोट देंगे. एक वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ता ने कहा, हमें यादव समुदाय को यहां नाराज करने की जरूरत नहीं है.

क्राइम रेट बढ़ा
आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बहरोड़ में हिंसक अपराध तेजी से बढ़ रहा है. 2015 और 2018 के बीच, यहां क्रमश: 21, 19, 23 और 25 मर्डर केस दर्ज हुए. वहीं, अपहरण के मामले 2016 में 27 से दोगुना होकर 2018 में 53 हो गए.

प्रॉपर्टी के दाम हैं क्राइम की जड़
एक वरिष्ठ पुलिस अफसर के अनुसार, प्रॉपर्टी के रेट तेजी बढ़ने के साथ पिछले कुछ सालों में यहां हिंसक अपराध बढ़ गया है.” दिल्ली मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई है और इससे अचानक प्रॉपर्टी की कीमतों में इजाफा भी हो गया है. अधिकारी ने कहा कि कई अपराध अब प्रॉपर्टी से जुड़े हुए हैं. राजस्थान पुलिस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2013 में अलवर में साल हत्या, अपहरण और बलात्कार के ज्यादातर मामले दर्ज किए गए. अकेले 2016 में इस जिले में 111 हत्याएं, बलात्कार के 239 केस और 336 अपहरण के मामले दर्ज किए थे.

रैलियों में नहीं आती भीड़
रामगढ़ चुनावी क्षेत्र में एक कांग्रेस नेता ने अपने एक चुनावी भाषण को लेकर बताया, “एक रैली को संबोधित करते हुए मैंने मॉब लिंचिंग का जिक्र किया और कहा कि लोगों को कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए. अगले ही दिन कार्यकर्ताओं ने मुझे बताया कि लोगों ने रैलियों में आने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के बारे में भूल जाओ, हम हिंसा के बारे में बात तक नहीं कर सकते हैं. हमने फैसला किया कि हम केवल अपराध पर ध्यान केंद्रित करेंगे और लिंचिंग का जिक्र तक नहीं करेंगे.” मजे की बात यह है कि कल जो भाजपा विरोधी #mob lynching, #not in my name, #metoo और  #intolerence आदि से देश का सौहार्द ख़राब कर रहे थे, आज वही लोग इन मुद्दों पर बात करने से कतरा रहे हैं, जो प्रमाणित करता है कि इनका मकसद तुष्टिकरण की सियासत खेल कर जनता को सरकार के विरुद्ध कर अपनी तिजोरियाँ भरना था, जिन्हे जनता समझ चुकी है।    

बीजेपी का पलटवार
इस मामले को लेकर पूर्व अलवर बीजेपी अध्यक्ष धर्मवीर शर्मा ने कहा, ”कांग्रेस का प्रचार निराधार है. बीजेपी सरकार ने पूरे क्षेत्र में अपराध पर लगाम लगा रखी है. कांग्रेस केवल झूठ फैला रही है. उनके पास चुनाव में बात करने के लिए कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे ऐसी बातें कर रहे हैं.”

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राजस्थान में एससी/एसटी वोटबैंक ने उड़ाई भाजपा-कांग्रेस की नींद
राजस्थान विधान सभा चुनाव में इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दोबरा सत्ता में वापसी करने आसान नहीं होने वाला है, जबकि अंदरूनी कलह से जूझ रही कांग्रेस लगातार प्रदेश में पार्टी की संभावनाओं को बेहतर करने में जुटी है। प्रदेश के मतदाताओं पर दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों की पैनी नजर है। प्रदेश में राजपूत, जाट, एसएसी, एसटी वोटबैंक को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी के रणनीतिकार अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पिछले बार के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा 2013 में प्रदेश की 59 आरक्षित सीटों में से 50 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी, ऐसे में एसएसी और एसटी सीटों पर एक बार फिर से विजय पताका फहराना भाजपा के लिए शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है। हालांकि जिस तरह से पिछले कुछ सालों में दलितों के खिलाफ शोषण और मॉब लिंचिंग के मामले सामने आए थे, उसके बीच भाजपा के लिए यह आसान चुनौती नहीं होने वाली है।
कांग्रेस ने जीती थी 34 सीटें 

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने प्रदेश की कुल 200 विधानसभा सीटों में से उन 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जोकि एससी और एसटी के लिए आरक्षित थीं। प्रदेश में अगर एससी और एसटी वोटबैंक पर नजर डालें तो 17.8 फीसदी एससी वोटर हैं, जबकि 13.5 फीसदी वोटर एसटी हैं। जोकि कुल मिलाकर तकरीबन 31.3 फीसदी हैं, लिहाजा पिछले दो विधानसभा चुनाव में एससी एसटी मतदाताओं ने सरकार गठन में अहम भूमिका निभाई है।
भाजपा की रणनीति 

एससी वोटर मुख्य रूप से राजस्थान के सात डिवीजन में बंटे हैं, जबकि एसटी वोटर मुख्य रूप से उदयपुर डिवीजन में हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपना चुनावी अभियान उदयपुर से ही शुरू किया था, अगस्त माह में उन्होंने यहां के चारभुजा मंदिर से अपने अभियान की शुरुआत की थी। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान में अपनी पहली जनसभा सागवारा में सितंबर माह में की थी। एक तरफ जहां भाजपा ने अपनी पार्टी ने आदिवासी नेता किरोड़ी लाल मीणा को शामिल किया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने आदिवासी नेता रघुवीर सिंह मीणा को पार्टी में अहम जिम्मेदारी सौंपी है, उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है, जिससे कि ये दोनों नेता आदिवासी मतदाताओं को अपनी ओर खींच सके।
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सवर्णों के भारत बंद बुलाने के बाद से भाजपा सरकार पर दवाब की रणनीति काम कर रही है। एसएसी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट ...



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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों पर सात दिसंबर को मतदान होंगे. इसको लेकर मुख्यमंत्री वसु.....

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राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक तेज होती जा रही है। इस बीच राज्य विधानसभा का अब तक का इतिहास देखें त.....

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राजस्थान में चुनाव की बिसात बिछ चुकी है. यहां की परंपरा है कि हर पांच साल में सरकार बदलती रही है. भैरोसिंह शेखावत को ....

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कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची नवम्बर 17 को जारी कर दी। पार्टी ने भारती.....

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कुछ समय पहले राजस्‍थान से ताल्‍लुक रखने वाले वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता डॉ सीपी जोशी को बिहार के राज्‍य प्रभारी पद से ...

भाजपा के खिलाफ रोष 
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि राजस्थान में भाजपा सरकार को लेकर प्रदेश के तकरीबन हर तबके में नाराजगी है, ऐसे में इस बार के चुनाव में वसुंधरा राजे की राह आसान नहीं होने वाली है। राजनीतिक विशेषज्ञ एमएल यादव ने कहा कि 2 अप्रैल से ही भाजपा के खिलाफ लोगों में गुस्सा काफी बढ़ता जा रहा है। ये लोग शांति बनाए हुए हैं और आगामी चुनाव में मतदान केंद्र पर ये लोग अपना गुस्सा जाहिर कर सकते हैं। वहीं आदिवासियों की बात करें तो उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है कि जिस तरह से मनरेगा को कमजोर किया गया है वह उनके लिए काफी नुकसानदायक साबित हुआ है। मनरेगा के कमजोर होने की वजह से आदिवासियों को पलायन करना पड़ा है, उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है।

मैं राजस्थान की बहू, इटली से आई हैं सोनिया गांधी--वसुंधरा राजे

Vasundhara Rajeअगले महीने होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने टाइम्स नाउ के कार्यक्रम 'फ्रैंकली स्पीकिंग' में मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार से खास बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों पर भी जवाब दिया। विरोधियों द्वारा खुद को बाहरी कह जाने पर राजे ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'मैं समझ नहीं पा रही हूं कि वे मुझे बाहरी के रूप में क्यों याद करते हैं, जबकि मैं राज्य की बहू हूं। जबकि विदेश से आने वाले लोगों के बारे में क्या?'
मुख्यमंत्री राजे ने कहा, 'कोई बाहरी नहीं कहता, कुछ लोग ऐसे हैं जो ऐसा कहता है। अपनी बहू को कौन आउटसाइडर कह सकता है। मेरी शादी यहां हुई, मेरे बच्चे यहां पैदा हुए, मेरे पोता-पोती बड़े हुए है। राजस्थान में मेरी जिंदगी कटी है और यहीं कटेगी। मुझे समझ नहीं आता ये आउटसाइडर का टैग कहां से आता है, परंतु मुझे याद है श्रीमती सोनिया गांधी कहीं इटली से नहीं आतीं। मुझे समझ नहीं आता कांग्रेसियों को मेरी याद आ जाती है, जबकि मैं घर की बहू हूं और जो बाहर से लोग आए हैं, वो दिखाई नहीं देते। ऐसा लगता है इटली भी देश का कोई जिला है।'
 
'I can't understand why they remember me as an outsider even though I am State's very own daughter-in-law. What about people who have actually come from abroad?', says CM @VasundharaBJP in conversation with @navikakumar
इसके अलावा राजे ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया कि राजपूत उनसे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि हमने हर किसी के लिए काम किया है। विकास का काम सबके लिए हुआ है। 
2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज की। इसका श्रेय वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से मोदी लहर थी क्योंकि तथ्य यह है कि वह एक बहुत ही करिश्माई नेता हैं।'

राजस्थान में 197 में से 141 विधायक करोड़पति, अधिकांश अल्‍पशिक्षित

Image result for राजस्थान में करोड़पति विधायकराजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक तेज होती जा रही है। इस बीच राज्य विधानसभा का अब तक का इतिहास देखें तो सदन में दागियों की तादाद में बढ़ोतरी के साथ ही करोड़पति विधायकों की संख्या में भी कुछ सालों से खासा इजाफा हुआ है। अगर किसी चीज में बढ़ोतरी नहीं हुई है तो वह है विधायकों की शैक्षणिक योग्यता।
प्रदेश में पिछले कुछ सालों में हुए राजनीतिक बदलावों के बीच जहां बागियों और दागियों की संख्या में इजाफा हुआ है, वहीं कई ऐसे विधायकों की तादाद भी बेतहाशा बढ़ी है, जो संपत्ति के लिहाज से अच्छे-खासे रईस हैं। 2008 में विधायकों की औसत संपत्ति दो करोड़ आठ लाख 56 हजार 474 रुपये थी, जो कि 2013 में बढ़कर पांच करोड़ 81 लाख 44 हजार 654 रुपये हो गई।
Image result for राजस्थान में करोड़पति विधायक
वर्तमान में प्रदेश के 141 विधायक ऐसे हैं, जो करोड़पति हैं। इन विधायकों की संपति लाखों में नहीं करोड़ों में है। विधायकों द्वारा दिए गए अपनी संपति के ब्यौरे और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिर्फोंस (एडीआर) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा के 157 विधायकों में से 115 विधायक करोड़पति हैं।
Related imageकांग्रेस के 25 में से 16, सात निर्दलियों में चार, राजपा के चारों, जमींदारा पार्टी के दो में से एक और बसपा के दो में से एक विधायक करोड़पति है। इस हिसाब से कुल 197 में से 141 विधायकों के नाम करोड़पतियों की श्रेणी में हैं।
कौन-कितना पढ़ा लिखा
आंकड़ों के अनुसार 200 में से छह विधायक साक्षर हैं, जबकि आठ 5वीं कक्षा पास। 14 विधायक 8वीं पास, 19 विधायक 10वीं कक्षा पास, 24 विधायक 12वीं कक्षा पास, 42 विधायक ग्रेजुएट, 35 विधायक ग्रेजुएट , 40 विधायक पोस्ट ग्रेजुएट, छह विधायक डॉक्ट्रेट, चार विधायक अन्य और एक विधायक द्वारा अपनी शैक्षणिक योग्यता का ब्योरा नहीं दिया जाना बताया गया है।
जिंदल सबसे अमीर विधायक
आंकडों के मुताबिक जमींदारा पार्टी की विधायक कामिनी जिंदल सबसे अधिक पैसे वाली विधायक हैं। इनकी संपति 198 करोड़ 42 लाख 60 हजार 802 रुपये है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस विधायक विश्वेन्द्र सिह हैं, जिनकी संपति 118 करोड़ 96 लाख 54 हजार 123 रुपये है। तीसरे नंबर पर भाजपा के प्रेमसिंह बाजौर हैं।
बाजौर की संपति 87 करोड़ 70 लाख 22 हजार 406 रुपये है। चौथे नंबर पर भाजपा के ही गोपाल कृष्ण व्यास हैं। व्यास की संपति 27 करोड़ 88 लाख सात हजार 215 रुपये है । संपति के मामले में पांचवें नंबर पर कांग्रेस के राजेन्द्र यादव हैं, जिनकी संपति 27 करोड़ 39 लाख तीन हजार 326 रुपये है।
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कोई प्रत्याशी अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों पर पर्दा नहीं डाल पाएगा। सुप्र...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों पर सात दिसंबर को मतदान होंगे. इसको लेकर मुख्यमंत्री वसु.....

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आपको अगर बैंक में कोई भी ट्रांजैक्शन करनी हो या कोई लोन लेना हो तो आपसे बार-बार परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) डिटेल मांगी ....

दागी विधायकों में भी इजाफा, 46 से बढ़कर हुए 72 फीसदी 
आंकड़ों के मुताबिक, दागी विधायकों की संख्या 2008 की तुलना में 2013 में 26 प्रतिशत तक बढ़ी है। 2008 में आपराधिक रिकॉर्ड वाले 46 प्रतिशत थे, जो बढ़कर वर्तमान में 72 प्रतिशत हो गए । भाजपा के 25 विधायकों पर मामले दर्ज थे, जिनमें 16 गंभीर आपराधिक मामले थे। कांग्रेस के छह विधायकों पर मामले दर्ज थे। सात निर्दलीय विधायको में से दो के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
Image result for वसुंधरा राजेराजे सरकार में सभी मन्त्रियों ने संपत्ति सार्वजनिक नहीं करके 
उड़ाया मोदी का मजाक 
राजस्थान की मौजूदा भाजपा सरकार के, कुछ मन्त्रियों को छोड़, एक भी मंत्री ने पांच वर्ष के अपने कार्यकाल में अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया, जबकि केन्द्र सरकार के नियम के अनुसार सरकार के हर मंत्री को प्रतिवर्ष अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करना होता है।
केन्द्र में यूपीए सरकार के समय वर्ष 2010 में एक नियम बनाया गया था, जिसके तहत सभी केन्द्रीय व राज्य सरकारों के मंत्रियों को हर वर्ष 31 अगस्त तक अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करना होता है। राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार ने इस नियम का पूरी तरह पालन किया और हर वर्ष मंत्रियों और मुख्यमंत्री की सम्पत्ति सार्वजनिक की गई। इसके लिए राजस्थान सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर अलग से लिंक दिया गया था। इस पर हर वर्ष मंत्रियों और उनके जीवनसाथी की सम्पत्ति और आयकर रिटर्न का ब्यौरा होता था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस नियम का पालन एक बार भी नहीं किया।
मंत्रियों ने या तो सम्पत्ति की जानकारी ही नहीं भेजी, भेजी तो पूरी नहीं भेजी और सरकार ने इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया। सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर सम्पत्तियों वाले लिंक तो मौजूद है, लेकिन इस पर आज भी पूर्व मंत्रियो की सम्मपत्ति का ब्यौरा ही है और इसका शीर्षक संशोधित कर पूर्व मंत्रियों की सम्पत्ति के ब्यौरा कर दिया गया है।
नियमानुसार सम्पत्ति का ब्यौरा लेने के लिए कैबिनेट सचिवालय को भी मंत्रियों को बार बार स्मरण पत्र भेजने पडे। कैबिनेट सचिवालय के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 13 कैबिनेट मंत्री, पांच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों और 6 राज्यमंत्रियों ने सरकार के रिमांइडर के बाद एक या दो बार सम्पत्ति का ब्यौरा भेजा, लेकिन पूरे पांच वर्ष तक किसी भी मंत्री ने जानकारी नहीं भेजी। वहीं तीन केबिनेट और एक राज्यमंत्री तो ऐसे रहे, जिन्होंने एक बार भी सम्पत्ति की जानकारी सरकार को नहीं भेजी।
यह देनी होती है जानकारी 
*मंत्री को अपने और अपने जीवनसथी की परिसम्पत्तियों, देयताओं और व्यापारिक हितों की जानकारी देनी होती है।
*इस ब्यौरे में सभी अचल सम्पत्ति, शेयर-डिबेंचर, नकदी, आभूषण की कुल अनुमानित कीमत बतानी होती है।
*मंत्री बनने के बाद उसे और उसकी पत्नी को व्यापार और कार्यों के प्रबंधन-स्वामित्व छोडने की जानकारी शामिल होती है।
अब चुनाव में देना पडेगा ब्यौरा
सरकार के ये मंत्री पांच साल तक किसी तरह बचे रहे, लेकिन अब चुनाव लड़ने के लिए इन्हें अपनी और पूरे परिवार की सम्पत्ति का ब्यौरा देना पडेगा। यह जनकारी नामांकन पत्र के साथ ही देनी पड़ेगी। तभी सामने आ पाएगा कि पांच वर्ष में मंत्रियों की सम्पत्ति कितनी बढ़ी या कम हुई।
इन्होंने दिया ब्यौरा 
गुलाब चंद कटारिया 
राजेन्द्र सिंह राठौड़
कालीचरण सराफ
प्रभु लाल सैनी 
यूनुस खान 
गजेन्द्र सिंह खींवसर
डॉ रामप्रताप 
गजेन्द्र सिंह खींवसर
बाबू लाल वर्मा 
हेमसिंह भड़ाना
अरूण चतुर्वेदी
जसवंत सिंह यादव 
श्रीचंद कृपलानी
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
वासुदेव देवनानी 
कृष्णेन्द्र कौर दीपा
अनीता भदेल 
राजकुमार रिणवा
सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी
राज्य मन्त्री 
पुष्पेन्द्र सिंह 
ओटाराम देवासी
बंसीधर 
धनसिंह रावत
सुशील कटारा 
कमसा मेघवाल