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तेलंगाना : भारत का ज्यादा महंगा प्रदेश

तेलंगाना में देश में सबसे अधिक मुद्रास्फीति की दर बनी हुई है। 31 जनवरी को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में कहा गया है कि तेलंगाना में अप्रैल और दिसंबर 2022 के बीच इसी अवधि के राष्ट्रीय औसत 6.8 प्रतिशत के मुकाबले 8.7 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रामीण तेलंगाना में मुद्रास्फीति 9.2 प्रतिशत थी जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.3 प्रतिशत थी। तेलंगाना के शहरी से लेकर गांवों के लोग महंगाई से त्रस्त हैं लेकिन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) को जनता की परवाह ही नहीं है। विकास के पैमाने पर तेलंगाना अन्य राज्यों से पिछड़ती जा रही है। राज्य की जनता केसीआर की कार्यशैली और तुष्टिकरण की नीति और कामकाज से परेशान है। यही वजह है कि केसीआर की लोकप्रियता अब काफी निचले स्तर पर आ गई है।

जनता महंगाई से परेशान, केसीआर को उनकी परवाह नहीं

एक तरफ तेलंगाना की जनता महंगाई से परेशान है वहीं केसीआर प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने की अपनी चाहत को पूरा करने पर पूरा जोर लगा रहे हैं। राज्य की परेशानी से ध्यान हटाने के लिए वह विपक्षी नेताओं को एकजुट करने का नाटक करते हैं। केसीआर के मन में भी पीएम उम्मीदवार बनने की आकांक्षा इस कदर हिलोरे मारी कि उन्होंने अपनी पार्टी का नाम तक बदल दिया। तेलंगाना राष्ट्र समिति(टीआरएस) अब भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) हो गई है। वह बीआरएस को राष्ट्रीय पार्टी बनाकर चाहते हैं, हालांकि इसे अभी राष्ट्रीय पार्टी बनने में लंबा रास्ता तय करना है। लोगों की नाराजगी इस बात से भी बढ़ रही है कि केसीआर पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं जो कि देश के मूड के हिसाब से उनके खिलाफ जा सकती है। उनकी सरकार में उनका बेटा केटी रामाराव, बेटी कविता सहित कई रिश्तेदार भरे-पड़े हैं।

महंगाई के लिए बीआरएस सरकार जिम्मेदारः बंदी संजय

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने उच्च मुद्रास्फीति के लिए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार को दोषी ठहराया। बंदी संजय ने कहा कि महंगाई बढ़ने में ईंधन का बड़ा हाथ है। उन्होंने कहा, “बीआरएस सरकार पेट्रोल/डीजल की कीमतों पर वैट कम नहीं करेगी, भले ही केंद्र और अधिकांश राज्यों ने इसे कम कर दिया हो। केसीआर ने आम आदमी पर बोझ डालना जारी रखा।” भाजपा नेता ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण का बहिष्कार करने के लिए भी बीआरएस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस और मुख्यमंत्री केसीआर का एकमात्र फोकस उनका अपना परिवार है। उन्होंने कहा कि उनके मन में संविधान, परंपराओं और सामान्य शिष्टाचार के लिए कोई सम्मान नहीं है।

पीएम मोदी ने दिया विकास की सौगात, केसीआर को तेलंगाना के विकास की परवाह नहीं

हैरानी की बात यह है कि पिछले साल एक तरफ तो प्रधानमंत्री तेलंगाना राज्य को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देने गए थे लेकिन तब भी केसीआर को राजनीति ही सूझ रही थी। इन परियोजनाओं से जहां राज्य की तरक्की सुनिश्चित होगी वहीं युवाओं के अनेक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि केसीआर को तेलंगाना की जनता की परवाह नहीं है। यही वजह है कि जनता भी अब केसीआर से मुंह मोड़ने लगी है। हाल के चुनाव परिणाम में बीजेपी को मिल रही सफलता इसी ओर संकेत करते हैं। तेलंगाना को हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी राज्य में थे, लेकिन प्रोटोकाल का उल्लंघन करते हुए वे खुद अगवानी के लिए नहीं आए। इतना ही नहीं केसीआर नीति आयोग जैसी संस्था की बैठक में भी भाग लेने से कतराते हैं। इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है। यही वजह है कि वहां की जनता अब उन्हें सत्ता से बेदखल करने का मन बना चुकी है।

अंधविश्वासी हैं केसीआर

मोदी ने अंधविश्वास को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, “इस आधुनिक शहर में अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि तेलंगाना की सरकार ने अंधविश्वास को राज्याश्रय दिया हुआ है। यहां अंधविश्वास के नाम पर क्या हो रहा है ये पूरे देश के लोगों को जानना चाहिए। किसे कहां जाना है’ किस दफ्तर में जाना है’ किसे मंत्री बनाना है’ ये सब अंधविश्वास तय करता है। यहां के विकास के लिए और इसे पिछड़ेपन से निकालने के लिए हर तरह के अंधविश्वास को दूर करना होगा। यहां सुशासन और तेज विकास की अकांक्षा प्रबल है। भ्रष्टाचार और परिवारवाद लोकतंत्र का सहसे बड़ा दुश्मन है। आज आपने देखा होगा कि कुछ लोग कार्रवाई से बचने के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचारियों का गठजोर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और परिवारवाद गरीबों का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। भाजपा सरकार इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और जनता के बीच बिचौलियों की क्या जरूरत है।’”

केसीआरः सचिवालय का ‘भूत’, वास्तु यज्ञ, न्यूमरोलॉजी का चक्कर

सीएम बनने के बाद केसीआर कभी सचिवालय नहीं गये। उन्‍हें किसी ने बताया क‍ि सचिवालय का वास्‍तु ठीक नहीं है। इसके लिए उन्‍होंने 2016 में 50 करोड़ की लागत से घर पर ही एक कार्यालय बनवाया। वे कभी सचिवालय नहीं गए जबकि उनकी सरकार के अध‍िकारी वहीं से काम करते हैं। उन्होंने बेगमपेट में अपने कैंप ऑफिस की मरम्मत कराई और इसे 5 मंजिल ऊंचा और 6 ब्लॉक्स तक बढ़ा दिया। इसके पीछे उन्‍होंने तर्क दिया क‍ि शासक को ऐसी जगह से काम करना चाहिए जो दूसरों की तुलना में ज्यादा ऊंचाई पर हो। पिछले 5 साल से केसीआर सचिवालय की बजाय अपने सरकारी आवास से काम कर रहे हैं।

कोई भी काम ब‍िना मुहूर्त देखे नहीं करते केसीआर

केसीआर 6 नंबर को अपने लिए बहुत लकी मानते हैं। वे जब भी कुछ नया या बड़ा करते हैं तो उसमें 6 अंक जरूर होता है। उनके काफिले की गाड़‍ियों के नंबर में 6 जरूर होता है। कोई भी काम ब‍िना मुहूर्त देखे नहीं करते। मुहूर्त में भी इसका ध्‍यान रखा जाता है क‍ि उसके जोड़ के अंक 6 जरूर हो। वे जब पहली बार सीएम बने तो उन्होंने दोपहर 12:57 मिनट पर शपथ ली, जिसके अंकों का जोड़ 6 होता है। एक बार वह महबूब नगर जिला गए तो वहां 51 बकरों की बलि चढ़ाई गई। लोगों का दावा है कि 51 बकरों की बलि इसीलिए चढ़ाई गई क्योंकि इसका जोड़ भी 6 होता है। चंद्रशेखर राव जो कमेटियां बनाते हैं, उनके सदस्यों की संख्या भी इस तरह रखते हैं जिसके अंकों का जोड़ 6 हो। शायद यही वजह है कि उन्होंने किसानों के लिए जो को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई उसमें 15 सदस्य रखे। उनकी पार्टी की जिला समिति में 24 सदस्य हैं, राज्य स्तरीय समिति में 42 सदस्य हैं और इन सबका जोड़ 6 है।

न्यूमरोलॉजी के चक्कर में केसीआर ने विधानसभा भंग कर दिया

मुख्यमंत्री केसीआर ने सितंबर 2018 में विधानसभा भंग कर दी थी। 6 अंक को शुभ मानने वाले केसीआर ने इस अहम फैसले के लिए 6 सितंबर के दिन को चुना। बैठक भी ज्योतिष के आधार पर बुलाई थी। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की। केसीआर हैदराबाद की मशहूर हुसैन सागर झील कभी नहीं जाते, क्योंकि कहा जाता है कि हुसैन सागर झील जाने के बाद ही एनटी रामाराव से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी छिन गई थी।

केसीआर की ओछी राजनीति

ऐसे में तेलंगाना के मुख्यमंत्री को फिर से चुनाव जीतना मुश्किल लग रहा है। हाल ही में राज्य में उपचुनाव में पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी ने यहां अपना परचम लहरा दिया है। हार के डर से केसीआर बौखला गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर केसीआर की पार्टी के नेताओं ने मोदी गो बैक के नारे लगाए। जगह-जगह मोदी विरोधी पोस्टर भी लगाए। इससे राज्य की जनता में भी मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति गुस्सा है। लोगों का साफ मानना है कि विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करने आ रहे प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर केसीआर गलत कर रहे हैं।

सिकंदराबाद से सांसद और केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी कहा था कि यह तेलंगाना के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात है कि प्रधानमंत्री राज्य को लाभान्वित करने वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ कर रहे हैं और राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी से तेलंगाना नहीं आने के लिए कहने वाले पोस्टर लगाने की निंदा की। भाजपा नेता रामचंदर राव ने कहा, “क्या नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं हैं? या तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं है? केसीआर एक बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वह और उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति दक्षिणी राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से ईर्ष्या कर रहे हैं। रामचंदर राव ने कहा,” एमके स्टालिन और वाईएस जगन मोहन रेड्डी दोनों भाजपा के राजनीतिक विरोधी हैं। अगर वे प्रधानमंत्री का स्वागत कर सकते हैं तो केसीआर क्यों नहीं?”

केसीआर की सरकार में मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव खुद को मुस्लिम तुष्टिकरण का चैंपियन साबित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पार्टी के विस्तार को पंख लग सके। केसीआर की सरकार में मुस्लिमों को खुश करने के लिए जहां उन्हें पूरी छूट दी जा रही है और उनके निर्देशों को लागू किया जा रहा है, वहीं हिन्दुओं और महिलाओं को दमन का शिकार होना पड़ा रहा है। तेलंगाना में अक्टूबर 2022 में आयोजित Group-1 की परीक्षा के दौरान हिन्दू महिलाओं से भेदभाव करते देखा जा सकता है। परीक्षा केंद्र पर बुर्का और हिज़ाब की खुली छूट थी। सुरक्षाकर्मी बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं की तलाशी भी नहीं ले रही थी। उन्हें सीधे परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दी जा रही थी। वहीं हिन्दू महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया। हिन्दू लड़कियों और महिलाओं की चूड़ियां,पायल और कुंडल तक उतरवाया गया।

हिंदी की जगह उर्दू को दिया दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए राज्य में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने का एलान किया। यानी सरकारी कामकाज में तेलुगू के बाद उर्दू में भी कामकाज होगा। मुख्यमंत्री केसीआर का लंबे समय से मुस्लिमों के प्रति रुझान रहा है। लिहाजा, माना जा रहा है कि उन्होंने तुष्टिकरण की नीति पर चलते हुए उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया है। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि हिन्दी को दूसरी आधिकारिक भाषा होने का गौरव प्राप्त होगा मगर मुख्यमंत्री ने ऐसा नहीं किया।

अडानी विवाद : विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचा रहे भारत के तथाकथित देशप्रेमी नेता


सोशल मीडिया पर वायरल 
जिस विदेशी हिंडनबर्ग की रपट पर अपने आपको देशहितैषी कहने वाले नेता और उनकी पार्टियां विदेशी दान या कहे भीख पर गौतम अडानी पर कर रहे हंगामें से ये लोग देश का हित कर रहे हैं अथवा अहित? इस कटु सच्चाई को हर देशप्रेमी को समझनी होगी। जबसे बिकाऊ नेताओं ने अडानी पर हंगामा बरपाया है, विदेशी उद्योगपतियों के शेयर में बढ़ोतरी देखी जा सकती है यानि ये उपद्रवी नेता किसकी सहायता कर रहे हैं? क्या है इन नेताओं का चरित्र, चुनाव लड़ते किसी पार्टी से और सत्ताभोग के लिए दूसरी पार्टी में जा मिलते हैं। देश को खोखला करते नेता और उनकी पार्टियों को भी चुनावी मैदान में धूल चटाकर इनकी असलियत दिखाने का समय आ गया है।   भारत वैश्विक मंच पर एक ताकत बन गया है। कोराना महामारी से लेकर यूक्रेन-रूस संकट के बावजूद भारत की विकास रफ्तार से विश्व के ताकतवर देशों में खलबली मची हुई है। बहुत सारे ताकतवर देश अब तक भारत को बहुत सारे सामान बेचा करते थे यानी निर्यात किया करते थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जैसे-जैसे आत्मनिर्भर हो रहा है उनकी दुकानदारी पर संकट के बादल छाने लगे हैं। इससे घबराए पश्चिम के देश भारत और पीएम मोदी के खिलाफ षडयंत्र में जुट गए हैं। और हमारे तथाकथित देशप्रेमी नेता उनके हाथ की कठपुतली बन देश का अहित कर रहे हैं। 

देश में होने हैं 10 चुनाव, इसीलिए रची जा रही साजिशें

देश में इस साल 9 विधानसभा चुनाव होने हैं और 2024 में लोकसभा चुनाव भी है। ऐसे में विदेशी ताकतें अपनी पूरी शक्ति झोंककर पीएम मोदी को सत्ता से बाहर करना चाहती हैं। इसीलिए बीबीसी डाक्यूमेंट्री लाई गई और उसके बाद भारत के विकास में योगदान देने वाली प्रमुख कंपनी अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट। लेकिन ऐसी साजिश करने वालों को समझनी चाहिए भारत का मतलब अडानी नहीं है। भारत में विकास की रफ्तार अब थमने वाली नहीं है।

मोदी की लोकप्रियता साजिशकर्ताओं के लिए चिंता

मोदी लगातार तीन साल से लोकप्रियता में वैश्विक स्तर पर सबसे ऊपर बने हुए हैं। यह केवल देश की बात नहीं है विदेशों में भी पीएम मोदी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने कि देश में। भारत के खिलाफ साजिशकर्ताओं के लिए यह भी एक चिंता का सबब है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि भारत को बदनाम कैसे किया जाए जिससे निवेशक दूरी बना लें और पीएम मोदी के विकास के संकल्प पर ब्रेक लगाया जा सके। पद्म विभूषण से सम्मानित आनंद महिंद्रा ने सही ही कहा है कि भारत ने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। इसीलिए भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना।

अडानी ग्रुप के वैश्विक विस्तार मिशन से डरी विदेशी कंपनियां

पिछले कुछ सालों में अडानी ग्रुप ने अपना प्रभाव जमाया है। गौतम अडानी ने अडानी ग्रुप के वैश्विक विस्तार मिशन को आगे बढ़ाया। ऐसे में वैश्विक रूप से अडानी ग्रुप का बढ़ना भला विदेशी कंपनियों को कैसे रास आ सकता है। तब तो और नहीं जब अडानी ग्रुप भारत की पहचान को दिनोदिन और सुदृढ़ करने में आगे की ओर बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी दुनिया में जिस गति से भारत विरोधी नैरेटिव को फैलाया जा रहा है उसमें काफी वृद्धि हुई है।

सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, बिल गेट्स के फंड से आस्ट्रेलिया में हुआ अडानी का विरोध

एनजीओ http://350.org को Tides Foundation द्वारा अत्यधिक वित्त पोषित किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टाइड्स फाउंडेशन को फंड कौन देता है? सिर्फ एक साल के लिए नाम और रकम देखें! इसमें सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर, ओमिडयार और बिल गेट्स के नाम हैं।

वालस्ट्रीट जनरल की प्रोपेगेंडा रिपोर्ट, अडानी को ही भारत बता दिया

बीबीसी डाक्यूमेंट्री और हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद विदेशी प्रोपेगेंडा मीडिया के साथ ही भारत के विपक्षी दलों और लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम को सरकार पर हमला करने का टूल मिल गया। अडानी का मतलब भारत नहीं है लेकिन वालस्ट्रीट जनरल ने अपनी रिपोर्ट में कुछ ऐसा ही लिखकर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की। उसने लिखा- हिंडनबर्ग ने “हिंदू राष्ट्रवादी पीएम” मोदी के आर्थिक विकास के गुजरात मॉडल से भरोसा हिला दिया है और “यह कॉर्पोरेट भारत के बारे में बहुत कुछ कहता है”।

भारत की छवि खराब करने का षड्यंत्र

ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी बीबीसी (BBC) ने अपनी डॉक्टूमेंट्री के माध्यम से पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने की कोशिश की और अब उसके बाद हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के जरिये अडानी ग्रुप पर हमला कर अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचाने की साजिश रची गई। इन सभी का एक साथ आना संयोग नहीं हो सकता। इसके पीछ इन विरोधियों का अपना लाभ तो है ही साथ ही साथ भारत की छवि खराब करने का षड्यंत्र भी है। हिंडनबर्ग जैसे रिपोर्ट भी ऐसे ही षड्यंत्र रच रहे हैं। अब फिच रेटिंग्स ने भी कह दिया है कि फिलहाल अडानी ग्रुप की कंपनियों के रेटिंग्स पर असर नहीं है।

आनंद महिंद्रा ने कहा- भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना

पद्म विभूषण से सम्मानित आनंद महिंद्रा ने अडानी संकट के जरिए भारत की आर्थिक ताकत पर सवाल उठा रहे लोगों को करारा जवाब दिया है। बेबाकी के साथ अपनी बात कहने वाले महिंद्रा ने एक ट्वीट में कहा, ‘ग्लोबल मीडिया में अटकलें लगाई जा रही है कि क्या बिजनस सेक्टर की मौजूदा चुनौतियां भारत की आर्थिक ताकत बनने का सपना पूरा कर सकेगा। मैंने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। मैं केवल यही कहूंगा कि भारत के खिलाफ कभी शर्त मत लगाना।’ इस तरह महिंद्रा ने विदेश ही नहीं बल्कि देश में भी ऐसे लोगों को जवाब दिया है जो अडानी संकट के बहाने सरकार की इकॉनमिक पॉलिसीज पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ट्विटर पर उनके एक करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं।

हिंडनबर्ग रिसर्च के साथ शेयर शार्ट-शेलिंग भी करती है, इसीलिए उसकी भूमिका पर संदेह

हिंडनबर्ग अमेरिका की इनवेस्टमेंट रिसर्च कंपनी है। 2017 में इसे ‘नाथन एंडरसन’ नाम के एक अमेरिकी व्यक्ति ने स्थापित किया था। इस कंपनी का मुख्य काम शेयर मार्केट, इक्विटी, क्रेडिट और डेरिवेटिव्स पर रिसर्च करना है यानी कि शेयर मार्केट में कंपनियां पैसों की हेरा-फेरी तो नहीं कर रही हैं या फिर बड़ी कंपनियां अपने फायदे के लिए अकाउंट मिसमैनेजमेंट तो नहीं कर रही हैं। लेकिन इनवेस्टमेंट रिसर्च करने के साथ-साथ यह एक शार्ट-शेलर कंपनी भी है जोकि शेयर मार्केट में अलग-अलग कंपनियों के शेयर खरीदती और बेचती है और उससे मुनाफा कमाती है। इससे यह साफ हो जाती है कि हिंडनबर्ग ने शेयर के जरिये अपने मुनाफे के साथ-साथ इस रिसर्च के जरिये विदेशी मीडिया और भारत के विपक्षी दल को सरकार पर हमला करने का एक टूल दिया है।

अडानी के शेयरों में गिरावट से विदेशी कंपनियों को फायदा

अडानी के शेयरो में गिरावट और निवेशकों के नकारात्मक रुझान से इस सेक्टर की विदेशी कंपनियों को फायदा होगा। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कुछ छिपाना और कुछ बताना वाली नीति को अपनाया है यानी उसने अडानी ग्रुप के बारे में उन्हीं चीजों को बताया है जो उसके हित में हैं और जो शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों की कीमत को घटाने का काम करे। अडानी पर हमला करने से बहुत से समूहों को कई गुना लाभ होता है। अडानी साम्राज्य सोलर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इंडस्ट्रियल लैंड, डिफेंस, एयरोस्पेस, फ्रूट्स, डेटा सेंटर्स, रोड, रेल, रियल एस्टेट लेंडिंग, कोल और कई अन्य क्षेत्रों में मौजूद है।

वैश्विक रूप से आगे बढ़ रहा है अडानी ग्रुप

अडानी ग्रुप पिछले 12 साल से ऑस्ट्रेलिया में मौजूद है। ग्रुप ने कई विरोधों के बाद भी कारमाइकल कोयला खदान का विकास किया। 2017 में अडानी ने चीनी बेल्ट एंड रोड पहल में सेंधमारी की। उस वर्ष, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (लिमिटेड) ने कुआलालंपुर से 50 किमी दूर स्थित कैरी द्वीप में कंटेनरों को संभालने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह सभी अपेक्षाओं के विपरीत था इससे भी अधिक, यह मलेशिया में भारत की स्थिति को बढ़ावा देने वाला था।फिर श्रीलंका में चीनी उपस्थिति के बीच अडानी समूह को कोलंबो बंदरगाह पर एक पश्चिमी कंटेनर टर्मिनल के विकास और संचालन का ठेका मिला है। कुछ महीनों के भीतर, समूह ने द्वीप राष्ट्र में दो पवन ऊर्जा परियोजनाओं को समाप्त कर दिया। अडानी की उपस्थिति से बांग्लादेश के बिजली क्षेत्र को भी बढ़ावा मिल रहा है।

इज़राइल ने हाइफा बंदरगाह अडानी समूह को सौंपा

एशिया के बाहर भी अडानी ग्रुप भारत की मौजूदगी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. पिछले साल, अडानी समूह ने इज़राइल के हाइफा बंदरगाह में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 1.18 अरब डॉलर खर्च किए। अडानी अब इज़राइल में चीनी राज्य के स्वामित्व वाले शंघाई इंटरनेशनल पोर्ट ग्रुप के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में है। राष्ट्रवाद के संदर्भ में यह चीनी राज्य के व्यापारिक हितों पर सीधा हमला है। तंजानिया में, अडानी ने पूर्ववर्ती प्रीमियम बीआरआई परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके चीन को भारी झटका दिया। देखना होगा कि समूह तेजी से यूरोप और यहां तक ​​कि अजरबैजान जैसे भौगोलिक क्षेत्रों में अपने पैर फैला रहा है।

यह सच है कि अडानी से पहले टाटा, रिलायंस और कई अन्य कंपनियों ने भी अन्य देशों में विस्तार किया। लेकिन उनके विस्तार के बीच उल्लेखनीय अंतर हैं। एक तो ये कि इन औद्योगिक समूहों ने भारत के बढ़ते दबदबे के समानांतर विस्तार नहीं किया। दूसरा अंतर यह है कि अडानी को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है, जो सच न भी हो तो भी विदेशी ताकतों को झटका देना तय है।

फिच रेटिंग्स ने कहा- फिलहाल अडानी ग्रुप की कंपनियों के रेटिंग्स पर असर नहीं

अडानी समूह के स्टॉक्स में भारी गिरावट के बीच रेटिंग एजेंसी फिच की तरफ से बड़ा बयान आया है। फिच रेटिंग्स ने कहा है कि शार्ट सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का अडानी समूह की कंपनियों के रेटिंग्स और उनके सिक्योरिटिज पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ने वाला है जिसे उसने पहले से रेटिंग दी हुई है। साथ ही फिच ने कहा कि कंपनी के कैश फ्लो के उसके अनुमान में भी कोई बदलाव नहीं आया है। फिच रेटिंग्स के इस बयान से अडानी समूह को राहत मिली है।

फिच रेटिंग्स ने मौजूदा समय में अडानी समूह के 8 कंपनियों को रेटिंग दी हुई है। जिसमें अडानी ट्रांसमिशन को BBB-/Stable, अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड के सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स को BBB- रेटिंग हासिल है। अडानी इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड को सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स को BBB-/Stable, अडानी ट्रांसमिशन को BBB-/Stable, अडानी ग्रीन एनर्जी के सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स को BBB-/Stable, मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को सीनियर सिक्योर्ड डॉलर नोट्स BB+/Stable रेटिंग्स हासिल है।

अडानी पर हमला 2017 में ही शुरू हो गया था

यह हमला हिंडनबर्ग शोध रिपोर्ट के बाद 25 जनवरी 2023 को शुरू नहीं हुआ है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया से 2016/17 में शुरू हुआ था। अडानी को 2010 में ऑस्ट्रेलिया में कारमाइकल कोल माइन का प्रोजेक्ट मिला था। 2017 में http://350.org एनजीओ के नेतृत्व में कुछ एनजीओ द्वारा अडानी के खिलाफ विरोध शुरू किया गया था। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए एक ग्रुप #StopAdani बनाया।

भारतीय एनजीओ NFI को भी सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन देती है फंड

सीमा चिश्ती एनएफआई में मीडिया फेलोशिप सलाहकार

भारत में एक एनजीओ नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया (NFI) है। अब एनएफआई के दानदाताओं की एक सूची देखिए। इसमें सोरोस, फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर, ओमिड्यार, बिल गेट्स और अजीम प्रेमजी के नाम भी हैं। सीमा चिश्ती एनएफआई में मीडिया फेलोशिप सलाहकार हैं। वह द वायर में संपादक हैं। वह कारवां के लिए लिखती हैं और वह माकपा नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं!

अजीम प्रेमजी के नेतृत्व में एनजीओ IPSMF शुरू हुआ

अजीम प्रेमजी के नेतृत्व में एक एनजीओ IPSMF शुरू हुआ, जो Altnews, The Wire, The Caravan, The News Minute, आदि प्रचार समाचार वेबसाइटों को फंड करता है। अब IPSMF के संस्थापक सदस्यों की सूची में नाम देखें। अगर आप प्रोपगंडा वेबसाइटों से जुड़े लोगों की टाइमलाइन चेक करेंगे, तो आपको अडानी के खिलाफ लगभग वही प्रॉपेगैंडा ट्वीट और समन्वित हमले मिलेंगे। इस कार्टेल ने अडानी के खिलाफ अपने प्रचार लेख और ट्वीट के साथ सोशल मीडिया और उनकी वेबसाइटों पर समन्वित हमले की शुरुआत की है।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के किरदार अलीशान जाफरी को एक विदेशी फंडेड NFI में फेलोशिप मिली। उन्हीं के साथ शुरू हुई थी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री! सीमा चिश्ती ने उनकी मदद की और उनका मार्गदर्शन किया। सीमा चिश्ती दस साल तक बीबीसी की संपादक रहीं और अब वह द वायर की संपादक हैं।

भीख में गेहूँ-तेल माँगते हैं, पीने का पानी तक नहीं है… जब दिलीप कुमार ने नेहरू के सामने ही इन्दिरा गाँधी की कर दी थी बोलती बंद

बॉलीवुड के ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से मशहूर दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में, दिलीप कुमार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गाँधी के साथ हुई एक मुलाकात को याद करते हुए लोगों के समक्ष उस दौरान हुई बातों का जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें वह बताते हैं कि किस तरह इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) ने उनके सामने बॉलीवुड फिल्मों की तुलना अन्य देशों की फिल्मों से की और भारतीय सिनेमा को कमतर आँका।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े स्टार में से एक ने उस वाकया को याद करते हुए कहा था, “एक बार मैं जवाहरलाल नेहरू के साथ नाश्ता कर रहा था। उस समय हमारी चर्चा में इंदिरा गाँधी ने हस्तक्षेप किया और मुझे पूछा कि आप लोग कैसी फिल्में बनाते हैं? मैं पेरिस में थी, मास्को गई, मैंने लंदन के सिम्फोनिक आर्केस्ट्रा सुने है, नाटक देखे, वहाँ की फिल्में देखीं। वो कितनी खूबसूरत और उम्दा हैं, ये आपकी हिंदुस्तानी पिक्चरों को क्या होता है? ये हिंदुस्तानी फिल्में इतनी पीछे क्यों हैं?”

इस पर अभिनेता ने कहा था कि हमारे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के इतने बड़ी शख्सियत होने के बावजूद उनकी बेटी अपनी हद से आगे बढ़ रही थी। कहती है कि तुम्हारी हिंदुस्तानी पिक्चरों में हिंदुस्तानियत ही नहीं है। ये किस किस्म की इंडस्ट्री है। पूछ डाला था कि भारतीय सिनेमा इतना पीछे क्यों है? दिलीप कुमार ने कहा कि उन्होंने करीब 10-15 मिनट तक उनकी बातों को सुना। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गाँधी की आलोचनाओं का सटीक जवाब देना जरूरी समझा।

‘नया दौर’ फिल्म के अभिनेता ने इंदिरा से कहा था, “10-15 मिनट तक आपने बहुत कुछ कहा, जो वाकई सच था। उससे इनकार करना एक हिमाकत होगी। बेवकूफी होगी कि अगर हम कहें कि हमारा इंडियन सिनेमा उम्दा है, बहुत अच्छा है, बड़ी तरक्की कर रहा है। मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि आप कह रही हैं कि हमारी फिल्मों में हिंदुस्तानियत नहीं है, लेकिन आप जो 12 मिनट से गुफ्तगू कर रही हैं उसमें एक लफ्ज भी हिंदुस्तानी जबान का नहीं है। आप अंग्रेजी में बोल रही हैं। आज सड़कों को सुधारने की जरूरत है। आज हम अपनी सड़कें, सिंचाई, शिक्षा, अस्पताल आदि का विकास कर रहे हैं। अन्य देशों से अपने अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

‘ट्रेजेडी किंग’ कहे जाने वाले दिलीप कुमार ने उनसे (इंदिरा) आगे कहा, “हम हर साल भीख माँगने के लिए दामन फैलाकर निकल जाते हैं, कभी गल्ले के लिए, कभी गेहूँ के लिए, कभी चावल के लिए, कभी तेल के लिए कभी सूखा पड़ता है। अभी तक हमारे लोगों के पास पीने के लिए साफ पानी नहीं है। हमारे पास अच्छी शिक्षा नहीं है। हाँ, हमारी फिल्में खराब हैं। लेकिन केवल हमारी फिल्म इंडस्ट्री ही खराब नहीं है, बल्कि हमारे पास खराब शिक्षा भी है। हमारी सड़कें भी बदतर हैं। मैं आपको बता दूँ, आपके शासन में भी बहुत सारी चीजें भद्दी और कमजोर हैं।”

दिलीप कुमार ने आगे कहा कि पहले उन्होंने सोचा कि जवाहरलाल नेहरू उनकी इन बातों से नाराज होंगे, लेकिन कुछ पल की चुप्पी के बाद वह (नेहरू) कहते हैं कि अगर वो उनकी (अभिनेता) जगह होते तो इतने विनम्र नहीं होते।

दिवंगत अभिनेता का यह भाषण बताता है कि भारत के स्वतंत्रता होने बाद के पहले कुछ दशकों में कॉन्ग्रेस शासन के दौरान बनी फिल्मों में गरीबी को क्यों उजागर किया गया था। जैसा कि दिलीप कुमार ने बताया, इसका मुख्य कारण यह है कि उन दिनों भारत में जीवन के हर क्षेत्र में व्याप्त गरीबी थी। यह आज नए भारत के बिल्कुल विपरीत थी, जहाँ बुनियादी ढाँचे और उद्योगों पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सभी के लिए शौचालय, और जल जीवन योजना जैसी योजनाएँ हर भारतीय की बुनियादी आवश्कताओं पूरा कर रही हैं, जिससे वे अब तक वंचित थे। यही नहीं आज की फिल्में भी उस दौर में बनी फिल्मों से कहीं अधिक प्रभावशाली हैं।

जम्मू-कश्मीर अलगाववाद, आतंकवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार से मुक्त हुआ : पीएम नरेंद्र मोदी

Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार(अगस्त 8) को देश के नागरिकों को टेलीविजन के जरिए संबधित किया. उन्होंने कहा कि हमने पूरे देश में एक ऐतिहासिक फैसला किया. आर्टिकल 370 एक ऐसी व्यवस्था थी जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग विकास से वंचित थे, वह समस्या अब दूर हो गई है.
मोदी ने कहा कि सरदार पटेल, श्यामाप्रसाद मुखर्जी और करोड़ों देशभक्तों का सपना पूरा हो गया. यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नए युग की शुरुआत है. जम्मू-कश्मीर और देश के लोगों को बहुत-बहुत बधाई.
पीएम मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 के बारे में मान लिया गया था कि यह बदलेगा ही नहीं. इससे जो हानि हो रही थी, उसकी चर्चा ही नहीं हो रही थी. अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में क्या लाभ हुआ? जम्मू-कश्मीर को अलगाववाद, आतंकवाद, परिवारवाद और व्यवस्था में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सहना पड़ा.
PM Modi: I congratulate people of Jammu and Kashmir, Ladakh and the whole nation. When some things are their forever we presume they will never change or go away. Article 370 was something similar

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नरेंद्र मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 का कुछ लोगों की भावनाएं भड़काने के लिए किया गया. इस अनुच्छेद का शस्त्र के रूप में पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल किया जा रहा था. आतंकवाद से 82 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का वह विकास नहीं हो पाया जिसका वह हकदार था.
PM Narendra Modi addresses the nation:We as a nation, as a family, have taken a historic decision. A system due to which brothers & sisters of Jammu, Kashmir & Ladakh were deprived of many rights & which was a big obstacle to their development, that system has been done away with

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाल ही में जम्मू-कश्मीर को लेकर संसद में लिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद यह राष्ट्र के नाम पहला संबोधन है. जम्मू-कश्मीर के लिए लागू संविधान के आर्टिकल 370 के करीब सभी प्रावधान हटा दिए गए हैं और इसके साथ ही इसमें शामिल आर्टिकल 35 ए भी समाप्त हो गया है.
PM Narendra Modi: In different states of the country sanitation workers come under the sanitation worker act, but workers from J&K were deprived of it. In many states strong laws are their to stop atrocities against dalits, but this was not the case in J&K.

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भारतीय संसद के इस फैसले के बाद से पाकिस्तान की ओर से तनावपूर्ण प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. पाकिस्तान ने भारत के साथ रजनयिक और व्यापारिक संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी है. दोनों देशों के बीच चलने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस की परिचालन भी बंद कर दिया है. पाकिस्तान ने अपने देश में भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी है. इसके अलावा पाकस्तान ने धमकी दी है कि वह आर्टिकल 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के मामले को संयुक्त राष्ट्र में लेकर जाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतिम बार देश को लोकसभा चुनाव से पहले 27 मार्च को सैटेलाइट रोधी मिसाइल द्वारा एक जीवित सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता की घोषणा करते हुए राष्ट्र को संबोधित किया था.
  • जम्मू कश्मीर में चुनाव होते रहेंगे। राज्य के अपने विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री होंगे। हम चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में आने वाले समय में चुनाव हों- पीएम मोदी
  • हम इस नई व्यवस्था से जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त कराएंगे। धरती का स्वर्ग कश्मीर एक बार फिर पूरे विश्व को आकर्षित करेगा। नागरिकों को जो हक मिलना चाहिए वो बेरोकटोक मिलेगा। जैसे ही सारी चीजें सही हो जाएंगी तो मुझे नहीं लगता है कि फिर केंद्र शासित बनाने की जरूरत रहेगी- पीएम मोदी
  • जम्मू कश्मीर ने कुछ काल खंड के लिए ही जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित बनाया है। यह इसलिए किया गया है, जब से राज्य में गवर्नर शासन लगा है वहां गुड गवर्नेंस का फायदा जमीन पर देखने को मिल रहा है। दशकों से लटके हुए परियोजनाओं को गति मिल रही है। हमने एक नई कार्य संस्कृति लाने का भरसक प्रयास किया है- पीएम मोदी
  • सेना और अद्धसैनिक बलों द्वारा स्थानीय युवाओं की भर्ती के लिए रैलियों का आयोजन किया जा सके और स्कॉलरशिप योजनाओं को लाया जाएगा जिससे युवाओं को फायदा मिल सके। केंद्र सरकार राज्य के राजस्व घाटे को कम करने का प्रयास करेगी- पीएम मोदी
  • नई व्यवस्था में केंद्र की व्यवस्था रहेगी कि राज्य के कर्मचारियों को दूसरे राज्यों की भांति सुविधा मिले। अभी केंद्र शासित प्रद्शों में कई सुविधाएं, जिसमें कई सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें अधिकांश जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को नहीं मिलती। अब जल्द ही ये सारी सुविधाएं यहां के सरकारी कर्मचारियों/पुलिस कर्मचारियों को दी जाएंगी- पीएम मोदी
  • अनुच्छेद 370 से सिर्फ आतंकवाद मिला अब इसके हटने से जम्मू कश्मीर के लोगों को सारे हक मिलेंगे। कश्मीर में बेटियों को अधिकार नहीं मिलता था, सफाई कर्मचारियों को हक नहीं मिलता था, अब इस कानून के हटने से सबको फायदा मिलेगा- पीएम मोदी
  • इस अनुच्छेद का पाकिस्तान द्वारा एक शस्त्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। अब सबके अधिकार बराबर हैं। 370 की वजह जम्मू कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा मिलता था। 370 की वजह से घाटी में 42 हजार लोगों की जान गई- पीएम मोदी
  • एक राष्ट्र के तौर पर एक परिवार के तौर पर आपने, हमने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अनुच्छेद 370 विकास में बाधक थी। इस फैसले से करोड़ों देशवासियों का सपना पूरा हुआ। इससे जम्मू कश्मीर और लद्दाख का विकास होगा- पीएम मोदी
  • प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से पहले 70 आतंकियों और पाकिस्तान परस्त अलगाववादियों को को श्रीनगर से आगरा से शिफ्ट किया गया। इंडियन एयरफोर्स के प्लेन से किया गया शिफ्ट। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पाकिस्तान जितनी तेजी से बौखलाहट में एक के बाद एक कदम उठा रही है, उससे स्पष्ट हो गया है, .....