बॉलीवुड के ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से मशहूर दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में, दिलीप कुमार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गाँधी के साथ हुई एक मुलाकात को याद करते हुए लोगों के समक्ष उस दौरान हुई बातों का जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। इसमें वह बताते हैं कि किस तरह इंदिरा गाँधी (Indira Gandhi) ने उनके सामने बॉलीवुड फिल्मों की तुलना अन्य देशों की फिल्मों से की और भारतीय सिनेमा को कमतर आँका।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े स्टार में से एक ने उस वाकया को याद करते हुए कहा था, “एक बार मैं जवाहरलाल नेहरू के साथ नाश्ता कर रहा था। उस समय हमारी चर्चा में इंदिरा गाँधी ने हस्तक्षेप किया और मुझे पूछा कि आप लोग कैसी फिल्में बनाते हैं? मैं पेरिस में थी, मास्को गई, मैंने लंदन के सिम्फोनिक आर्केस्ट्रा सुने है, नाटक देखे, वहाँ की फिल्में देखीं। वो कितनी खूबसूरत और उम्दा हैं, ये आपकी हिंदुस्तानी पिक्चरों को क्या होता है? ये हिंदुस्तानी फिल्में इतनी पीछे क्यों हैं?”
This is such a gem. Dilip kumar had such great proficiency in both Urdu & English. Do watch https://t.co/uE0xGHEdZ8
— Gabbar (@GabbbarSingh) January 30, 2023
इस पर अभिनेता ने कहा था कि हमारे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के इतने बड़ी शख्सियत होने के बावजूद उनकी बेटी अपनी हद से आगे बढ़ रही थी। कहती है कि तुम्हारी हिंदुस्तानी पिक्चरों में हिंदुस्तानियत ही नहीं है। ये किस किस्म की इंडस्ट्री है। पूछ डाला था कि भारतीय सिनेमा इतना पीछे क्यों है? दिलीप कुमार ने कहा कि उन्होंने करीब 10-15 मिनट तक उनकी बातों को सुना। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गाँधी की आलोचनाओं का सटीक जवाब देना जरूरी समझा।
‘नया दौर’ फिल्म के अभिनेता ने इंदिरा से कहा था, “10-15 मिनट तक आपने बहुत कुछ कहा, जो वाकई सच था। उससे इनकार करना एक हिमाकत होगी। बेवकूफी होगी कि अगर हम कहें कि हमारा इंडियन सिनेमा उम्दा है, बहुत अच्छा है, बड़ी तरक्की कर रहा है। मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि आप कह रही हैं कि हमारी फिल्मों में हिंदुस्तानियत नहीं है, लेकिन आप जो 12 मिनट से गुफ्तगू कर रही हैं उसमें एक लफ्ज भी हिंदुस्तानी जबान का नहीं है। आप अंग्रेजी में बोल रही हैं। आज सड़कों को सुधारने की जरूरत है। आज हम अपनी सड़कें, सिंचाई, शिक्षा, अस्पताल आदि का विकास कर रहे हैं। अन्य देशों से अपने अच्छे संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”
‘ट्रेजेडी किंग’ कहे जाने वाले दिलीप कुमार ने उनसे (इंदिरा) आगे कहा, “हम हर साल भीख माँगने के लिए दामन फैलाकर निकल जाते हैं, कभी गल्ले के लिए, कभी गेहूँ के लिए, कभी चावल के लिए, कभी तेल के लिए कभी सूखा पड़ता है। अभी तक हमारे लोगों के पास पीने के लिए साफ पानी नहीं है। हमारे पास अच्छी शिक्षा नहीं है। हाँ, हमारी फिल्में खराब हैं। लेकिन केवल हमारी फिल्म इंडस्ट्री ही खराब नहीं है, बल्कि हमारे पास खराब शिक्षा भी है। हमारी सड़कें भी बदतर हैं। मैं आपको बता दूँ, आपके शासन में भी बहुत सारी चीजें भद्दी और कमजोर हैं।”
दिलीप कुमार ने आगे कहा कि पहले उन्होंने सोचा कि जवाहरलाल नेहरू उनकी इन बातों से नाराज होंगे, लेकिन कुछ पल की चुप्पी के बाद वह (नेहरू) कहते हैं कि अगर वो उनकी (अभिनेता) जगह होते तो इतने विनम्र नहीं होते।
दिवंगत अभिनेता का यह भाषण बताता है कि भारत के स्वतंत्रता होने बाद के पहले कुछ दशकों में कॉन्ग्रेस शासन के दौरान बनी फिल्मों में गरीबी को क्यों उजागर किया गया था। जैसा कि दिलीप कुमार ने बताया, इसका मुख्य कारण यह है कि उन दिनों भारत में जीवन के हर क्षेत्र में व्याप्त गरीबी थी। यह आज नए भारत के बिल्कुल विपरीत थी, जहाँ बुनियादी ढाँचे और उद्योगों पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, सभी के लिए शौचालय, और जल जीवन योजना जैसी योजनाएँ हर भारतीय की बुनियादी आवश्कताओं पूरा कर रही हैं, जिससे वे अब तक वंचित थे। यही नहीं आज की फिल्में भी उस दौर में बनी फिल्मों से कहीं अधिक प्रभावशाली हैं।
