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आतंकी इंडस्ट्री के प्रवक्ता पाकिस्तान के बिलावल भुट्टो को विदेश मंत्री जयशंकर की खरी-खरी, कश्मीर में आर्टिकल 370 इतिहास बना, अब POK पर होगी बात


मशहूर कहावत है कि पोंगली में 12 साल रखने के बाद भी पूंछ टेढ़ी की टेढ़ी ही रहती है। गोवा में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने 12 साल बाद पाकिस्तान का कोई विदेश मंत्री भारत आया है, लेकिन जैसी कि पाकिस्तान की पुरानी आदत है, इसके अनुसार न पाकिस्तान आतंकवाद के दमन पर राजी हुआ और न ही उसके कश्मीर का पुराना राग अलापना छेड़ा। यानी इतने सालों के बाद पूंछ टेढ़ी की टेढ़ी ही है। जबकि इस आतंकवाद के ही कारण पाकिस्तान की दुर्दशा हो गयी है। दूसरे, बिलावल के नाना ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो का कहना था कि 'हिन्दुस्तान से हज़ार सालों तक लड़ते रहेंगे...', शायद जनता पर खर्च होने वाला धन आतंकवाद को संरक्षण देने पर खर्च किया जा रहा है।  

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कश्मीर राग पर बिलावल भुट्टो पर तंज कसते हुए उन्हें नींद से जागने की सलाह दे डाली। जयशंकर ने सख्त शब्दों में पाक विदेश मंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि वे यहां आतंक की इंडस्ट्री का प्रवक्ता बनकर आए हैं। पाकिस्तान को आतंक की फैक्ट्रियों को बंद करना ही होगा। भारत ही नहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी के पास तो अपने देश को बताने के लिए कुछ नहीं है कि वो भारत क्यों गए? जबकि एससीओ की दूसरी बैठकों में पाकिस्तान के मंत्रियों ने वर्चुअल शिरकत की। पाकिस्तान की मीडिया भी पूछ रही है कि जब विदेश मंत्री एस जशंकर ने दो-तरफा बातचीत से इनकार कर दिया है, तो वो गोवा क्या भेलपुरी खाने आएंगे?

बिलावल भारत से बे-आबरू होकर निकले, खुद के देश में भी हो रही आलोचना
भारत में तो बिलावल भुट्टो कुछ कर नहीं पाए और बड़े बे-आबरू होकर अपने कूचे को निकल लिए। पाकिस्तान में भी भुट्टो की इस भारत यात्रा की आलोचना हो रही है। पाक के लोगों का कहना है कि जब एससीओ बैठक में पाकिस्तानी मंत्री शेरी रहमान वर्चुअली शामिल हुईं, या फिर एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान वर्चुअली शामिल हुआ तो फिर बिलावल भुट्टो ज़रदारी को गोवा घूमने जाने की इतनी बेताबी क्यों थी? और वो चाहते तो गोवा की बैठक में वे भी वर्चुअल शामिल हो सकते थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा के बारे में भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने बेहद सटीक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भुट्टो के आने का बहुत कुछ मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘वह (भुट्टो) एक सदस्य देश के विदेश मंत्री के रूप में यहां आए. इसे इससे ज्यादा कुछ न देखें, क्योंकि इसका इससे ज्यादा कोई मतलब है भी नहीं।’

अब जी-20 और श्रीनगर पर नहीं, पाक से सिर्फ पीओके पर होगी बात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की मौजूदगी में ही पाकिस्तान पर बड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगातार घट रही है। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि चीन और पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्ते सामान्य नहीं हैं। सीमा पर हालात सुधरने तक ये रिश्ते सामान्य हो भी नहीं सकते। जयशंकर ने पाक विदेश मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवाद के पीड़ित और पोषण करने वाले साथ नहीं बैठ सकते हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग था, है और रहेगा। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी जी-20 की बैठकें हो रही हैं, इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ जी-20 और श्रीनगर मुद्दा है ही नहीं पाकिस्तान के साथ बातचीन के लिए अब सिर्फ और सिर्फ पीओके ही मुद्दा है।

जयशंकर ने पाक-चीन के तथाकथित कॉरिडोर पर भी निशाना साधा
भारत ने पाकिस्तान-चीन के बीच तथाकथित कॉरिडोर के बारे में SCO की बैठक में एक नहीं दो बार ये स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी विकास के लिए जरूरी हो सकती है, लेकिन कनेक्टिविटी किसी की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं कर सकती। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “SCO सदस्य देश के विदेश मंत्री के तौर पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के साथ बाकी सदस्य देशों के विदेश मंत्री की तरह ही व्यवहार किया गया। लेकिन आतंकवाद के प्रोमोटर, प्रोटेक्टर और आतंक के इंडस्ट्री के प्रवक्ता के तौर पर उनका काउंटर किया गया। भारत किसी भी सूरत में आतंकियों का साथ देने वालों का समर्थन नहीं कर सकता। भारत हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले देशों के साथ है।”

राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब
एससीओ की बैठक के दौरान अपने संबोधन में भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया और परोक्ष रूप से पाकिस्तान को निशाने पर लिया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद का कहर जारी है। हमारा ये मानना है कि किसी भी तरह से आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता और इसे रोका जाना चाहिए। इसमें सीमा पार से आतंकवाद और अन्य सभी तरह का आतंकवाद शामिल है। एससीओ की बैठक का मूल उद्देश्य आतंकवाद से मुकाबला है। बिलावल के आतंकवाद को हथियार बनाने के सवाल पर डॉ. जयशंकर ने कहा, ‘हम कूटनीतिक फायदे के लिए नहीं कर रहे. हम राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब कर रहे हैं।

जयशंकर का तंज- वेक अप एंड स्मेल द कॉफी…आर्टिकल 370 अब इतिहास
पाक विदेश मंत्री बिलावल ने एक साक्षात्कार में आर्टिकल 370 का भी जिक्र किया और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात न होने के पीछे इसे वजह बताया। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने बिलावल पर तंज कसते हुए उन्हें नींद से जागने की सलाह दे डाली। बिलावल भुट्टो ने अनुच्छेद 370 रद्द करने की मांग उठाई तो भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को फटकार लगाते हुए नींद से जागने की सलाह दे डाली। एससीओ की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने अंग्रेजी मुहावरे ‘वेक अप एंड स्मेल द कॉफी’ (नींद से जागो और कॉफी की खुशबू लो) का जिक्र करते हुए कहा कि ऑर्टिकल 370 अब इतिहास है। जो लोग इसकी बात कर रहे हैं, उन्हें नींद से जाग जाना चाहिए। जितनी जल्दी इस सच्चाई को मान लें, उतना अच्छा होगा।

कश्मीर में जी-20 बैठक से बिलावल को लगी मिर्ची, जयशंकर बोले हमारा अभिन्न हिस्सा
इसके पहले बिलावल भुट्टो ने कश्मीर में जी20 के आयोजन पर भी आपत्ति जताई थी। कश्मीर में जी-20 बैठक से तिलमिलाए बिलावल ने बैठक के बाद पाकिस्तानी मीडिया से कहा कि हम इसकी निंदा करते हैं। समय आने पर इसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा, विवादित क्षेत्र में बैठक का आयोजन गलत है। इस पर एस जयशंकर ने कहा था कि उनका जी20 से कोई लेना-देना नहीं है। कश्मीर से भी कोई लेना-देना नहीं है। कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी जी-20 की बैठकें हो रही हैं, इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। बातचीत का सिर्फ एक ही मुद्दा है, वह है पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर। सवाल सिर्फ यह है कि पाकिस्तान अवैध कब्जे को कब खाली करेगा। उन्हें इस बारे में बात करनी चाहिए कि वे जम्मू कश्मीर से अवैध कब्जे को कब खाली कर रहे हैं।

मुझे नहीं लगता कॉन्ग्रेस को 300 सीटें मिलेगी, 370 बहुमत वाली सरकार ही बहाल कर सकती : गुलाम नबी आजाद

                                                                       साभार: ANI
कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर निराशाजनक दावा किया है। उनका कहना है, “अगर मौजूदा स्थिति बरकरार रहती है तो मुझे नहीं लगता है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 300 सीटें भी जीत पाएगी।” जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को फिर से बहाल करने के मसले पर विचार प्रकट करते हुए उन्होंने यह बात कही। 

आजाद ने कहा है जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट या केंद्र सरकार ही फिर से बहाल कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है। बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया है, इसलिए वह इसे बहाल नहीं करेगी। वे पुँछ जिले के कृष्णाघाटी इलाके में एक रैली को संबोधित कर रहे थे।

उन्‍होंने कहा, “मैं लोगों को खुश करने के लिए नहीं बोलूँगा। यह हमारे हाथ में नहीं है। मैं आपसे झूठे वादे करूँ, अनुच्छेद-370 की बात करूँ, ये सही नहीं है। अनुच्छेद 370 को लोकसभा में बहुमत वाली सरकार ही बहाल कर सकती है। सरकार बनाने के लिए 300 सांसद चाहिए। हमारे पास सरकार बनाने के लिए 300 सांसद कब होंगे? इसलिए, मैं अनुच्‍छेद 370 बहाल करने का वादा नहीं कर सकता कि 2024 में हमारे 300 सांसद आएँगे तो मैं इसको करूँगा। अल्लाह करे कि 300 आएँ लेकिन मुझे अभी तो यह नहीं दिख रहा है। इसलिए मैं कोई झूठा वादा नहीं करूँगा। इसलिए अनुच्‍छेद 370 के बारे में बात नहीं करूँगा।”

आजाद ने उमर अब्दुल्ला की उस टिप्पणी का भी खंडन किया जिसमें उनके बयान पर निराशा जताई गई थी। गुलाम नबी ने कहा, “मैं अकेले ही पिछले तीन सालों से संसद में इस बारे में बोल रहा हूँ। सरकार के साथ हमारी लड़ाई यह है कि जब अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया और राज्य का विभाजन किया गया, तो मैंने कहा कि केंद्र सरकार को संविधान में बदलाव लाने का अधिकार है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के माध्यम से आएगा, न कि संसद के माध्यम से आएगा।”

जम्‍मू कश्‍मीर के पुँछ और राजौरी के दौरे के दौरान आजाद ने हाल ही में कहा था क‍ि अनुच्‍छेद 370 पर बात करना अप्रासंगिक है। उनका कहना था कि उनकी मुख्‍य माँगें जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य का दर्जा बहाल करना और विधानसभा चुनाव जल्‍दी कराना है। उनके इस बयान की नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला ने निंदा की थी। उनका कहना था कि आजाद ने पहले ही हार मान ली है, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित है।

हाल ही में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति से हटा दिया था। उन्होंने कठुआ में एक बड़ी रैली कर शक्ति-प्रदर्शन भी किया था। रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि वो वही करेंगे जो राज्य के लोग चाहते हैं। इसके बाद उनके खिलाफ यह एक्शन लिया गया था।

बैठक छोड़ निकले CM केजरीवाल : ‘370 हटाने का समर्थन क्यों किया? ये किसानों का मुद्दा है’

                                                                                                                                        साभार 
पंजाब में किसानों के साथ मिलने गए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बैठक बीच में छोड़ कर निकलना पड़ा। अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के समर्थन पर किसानों ने उन्हें घेरा। ‘आम आदमी पार्टी’ सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल फ़िलहाल गोवा के दौरे पर हैं। इससे पहले वो पंजाब गए थे। दोनों ही राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और AAP वहाँ पाँव पसारने की जुगत कर रही है। दोनों ही राज्यों में भाजपा और कॉन्ग्रेस से उसकी टक्कर है।

पंजाब में अरविंद केजरीवाल ने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की, लेकिन इस बैठक में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के भाजपा सरकार के फैसले का मुद्दा उठा। किसान नेताओं ने अरविंद केजरीवाल से पूछा कि उन्होंने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन क्यों किया था? दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इसे ‘राजनीतिक सवाल’ करार दिया और कहा कि इन सवालों पर वो बाहर जवाब देंगे।

अरविंद केजरीवाल ने बैठक में कहा, “दिल्ली की सारी शक्तियाँ तो इन्होंने पहले से ही छीन रखी है। मैं किसी राज्य के अधिकार छीनने का समर्थन क्यों करूँगा? मैं रोज लड़ रहा हूँ दिल्ली के लिए और हमने सुप्रीम कोर्ट में केस कर रखा है। किसानों के सम्बन्ध में आपके पास प्रश्न हैं तो पूछ सकते हैं, राजनीतिक प्रश्नों का जवाब बाहर दूँगा। अगर मैं किसानों के हक़ में नहीं हूँ तो देश का कोई नेता नहीं है। बड़ी से बड़ी क़ुरबानी देने के लिए तैयार हूँ। हमारी सरकार ने 7 वर्षों में दिल्ली के लिए जितना किया है, मुझे नहीं लगता किसी अन्य सरकार ने किया होगा।”

इस दौरान सांसद भगवंत मान भी उनके साथ मौजूद थे। केजरीवाल अपनी व्यस्तता का हवाला देकर बैठक से निकल गए, जिसके बाद भगवंत मान किसान नेताओं का माँ-मनव्वल करते नजर आए। ‘पंजाब किसान यूनियन’ के जिला उपाध्यक्ष गुरजंत सिंह मनसा ने केजरीवाल से ये सवाल पूछा था। केजरीवाल ने पूछा कि ये किसानों का मसला कैसे हैं? इस पर किसान नेताओं ने कहा कि ये किसानों और राज्यों के अधिकार का मसला है, इसे लागू करने वाले वही लोग हैं जो तीनों कृषि कानून लेकर आए।

‘J&K को वापस आतंक के काल में ले जाना चाहता है गुपकार गैंग, सोनिया-राहुल साफ करें स्टैंड’: अमित शाह

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के रहते वहां किस स्तर पर महिला अधिकारों का हनन किया जा रहा था, किसी से छुपा नहीं, यानि वहां की महिला का राज्य से बाहर किसी पुरुष से विवाह होने पर पिता की संपत्ति आदि से बेदखल हो जाती थी, लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने से राज्य से बाहर विवाहित महिलाओं को खोया अधिकार मिलने से वहां जनहित के नाम से गुमराह कर रही स्थानीय पार्टियां पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कांफ्रेंस की नींद होने से इतने हताश हो गए हैं कि आज जनहित की बजाए अपने हित की खातिर एकजुट हो रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर यूजर्स पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) को फटकार लगा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पिछली बार बीडीओ चुनावों में अलगाव और शर्मिंदगी का सामना करने बाद पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को डीडीसी चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वे अपने समर्थन आधार और विशेषाधिकार को खोना नहीं चाहते हैं इसलिए हताशा में बहिष्कार ना कर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

इसके पहले पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में बने जम्मू-कश्मीर के गुपकार गुट को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बड़ा हमला बोला। अमित शाह ने गुपकार गुट को ‘गुपकार गैंग’ करार देते हुए ट्वीट कर कहा कि गुपकार गैंग ग्लोबल हो रहा है। वे चाहते हैं कि विदेशी ताकतें जम्मू-कश्मीर में दखल करें। गुपकार गैंग भारत के तिरंगे का अपमान करता है। क्या सोनिया जी और राहुल जी गुपकार गैंग के ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं? उन्हें देश की जनता के सामने अपना स्‍टैंड साफ करना चाहिए। अमित शाह के ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे इस बार चुनाव का बहिष्कार करने नहीं जा रहे हैं। फिर क्या था सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें निशाना बनाने लगे।

जम्मू कश्मीर में स्थानीय पार्टियों ने साथ मिल कर ‘गुपकार गठबंधन’ बनाया है और कॉन्ग्रेस भी उसके साथ जुड़ी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, जो अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा। अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है।

अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यही कारण है, जिससे गुपकार गठबंधन और कॉन्ग्रेस को देश में हर जगह जनता द्वारा नकारा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि अब ‘गुपकार गैंग’ वैश्विक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करें। उन्होंने ‘गुपकार गैंग’ पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगाया। शाह ने कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो इन चीजों का समर्थन करते हैं?

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अब इस मामले में अपना स्टैंड साफ़ कर देना चाहिए। एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया-राहुल से पूछा था कि वो अनुच्छेद-370 पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के साथ हैं या विरोध में? जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायती चुनाव में कॉन्ग्रेस द्वारा गुपकार के साथ हाथ मिलाने पर उन्होंने कहा कि ये लोग चीन से समर्थन माँग रहे हैं, क्या कॉन्ग्रेस इसके पक्ष में है?

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग ये चाहते हैं कि अनुच्छेद-370 वापस आ जाए, वो यहाँ भ्रष्टाचार को जारी रहते देखना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जम्मू कश्मीर की कोई ‘मुस्लिम बेटी’ राज्य से बाहर शादी करती थी तो उसे संपत्ति के अधिकार से बाहर कर दिया जाता था, जिसे मोदी सरकार ने बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से जम्मू कश्मीर को संकीर्ण मानसिकता की तरफ ढकेलने का प्रयास हो रहा है।

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के बारे में पूछा था कि ये निर्णय किसका है? साथ ही जवाब देते हुए कहा था कि ये पूरे देश का निर्णय है, क्योंकि भारत का कोई भी कानून लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन में विचार-विमर्श के बाद ही बनता है। उन्होंने कहा था, ‘मै राहुल गाँधी और सोनिया जी से पूछता हूँ कि इस गठबंधन की एक पार्टी चीन के साथ अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कहती है, वहीं महबूबा मुफ्ती तिरंगा नहीं उठाना चाहतीं।

जम्मू काश्मीर में "रोशनी विधेयक" रद्द!


खेल देखिये, हिन्दुओं, कैसे अब्दुल  ने पड़ोसी हिन्दू को मार-भगाकर उसकी जमीन, मकान पर कब्जा जमा लिया १९९० में!


फिर कब्जाई जमीन उस कथित शांतिदूतों के नाम करने का षड्यंत्र रचा गया!


बिजली कनेक्शन देने की आड़ लेकर, एक "रोशनी एक्ट" बनाया फारुख अब्दुल्ला सरकार ने!


कब्जाई हिन्दूभूमि को मुस्लिम के नाम करने की फीस रखी गई मात्र १०१ रुपए!


१०१ रुपये जमा करने मात्र से राशि जमा करने वाले के नाम वो जमीन का मालिकाना हक "रोशनी एक्ट" के अंतरगत पट्टा जारी कर दिया जाता, और फिर उस पर बिजली कनेक्शन देकर उस हिन्दूभूमि को सदा के लिए मुसलमान के नाम कर दिया गया!


खेल बहुत गहरा खेला गया फारुख अब्दुल्ला द्वारा!


१९९० की कत्ल वाली रात के पस्चात, जो जमीन जिसके कब्जे में थी, उसे "रोशनी एक्ट" द्वारा उसका मालिक बनाने का कानून फारुख अब्दुल्ला ने बनाया!


१९९० के बाद से मुसलमानों के नाम की गई हिन्दूभूमि के कागजात, जो कि "रोशनी एक्ट" द्वारा जारी किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाएगा, और उसके असली स्वामी हिन्दू को ढूंढा जाएगा!


जम्मू-काश्मीर में हिन्दुओ के अच्छे दिनों को आरंभ करता हिन्दू प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी!


इंच इंच हिन्दूभूमि पुनः काश्मीरी हिन्दुओं को दिलाने के लिए संघर्ष करता हिन्दूराज


हिन्दू पंडितों को मार-भगाकर काश्मीर में मुस्लिमों द्वारा कब्जा की गई हिन्दूभूमि को मात्र ₹१०१ में मुसलमानों के नाम करने के लिए फारुख अब्दुल्ला के द्वारा बनाये गए "रोशनी एक्ट" को हिन्दू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रद्द कर दिया है!


साथ ही २००१ में काश्मीर में मुस्लिम नेताओं व उनके रिश्तेदारों के नाम बंदरबांट द्वारा "रोशनी एक्ट" द्वारा कब्जाई हिन्दूभूमि के सारे रिकॉर्ड को भी खंगालने के आदेश जारी किए गए हैं!


भागते हिन्दुओं के बंगले, कोठियां, कारखाने, उद्योग, बाग बगीचे, केशर के बागान मुसलमानों ने कब्जा कर लिए थे!


उन हिन्दूभूमि को आतंकी मुस्लिमों व उनके रिश्तेदारों के नाम करने के लिए "रोशनी एक्ट", जो कि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति के लिए तैयार किया गया था, उसकी आड़ में बिजली कनेक्शन देने के लिए केवल ₹१०१ में कब्जा जमीनों व बागानों, बंगलों, अन्य हिन्दूभूमि को मुस्लिमों के नाम पर पट्टा जारी कर दिया गया!


काश्मीर को हिन्दुविहीन करने के षड्यंत्र में फारुख अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती दोनों के पिता की मुख्य भूमिकायें थी!


इन्होंने भी अकूत हिन्दूभूमि अपने व अपने रिश्तेदारों के नाम "रोशनी एक्ट" द्वारा पट्टा जारी करते हुए कब्जाई!


अब हिन्दू  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आदेशों से "रोशनी एक्ट" रद्द कर दिया गया है, और १९९० के बाद में जो भी सम्पति मुसलमानों के नाम की गई थी, सब की जांच आऱभ करने का मार्ग खोल दिया है!


हिन्दू   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसालमिक आतंकवाद की असली जड़ पर चोट कर दिए हैं!


इसी काश्मीर से "संविधान" की आड़ लेकर, हिन्दुओं के विरुद्ध आधुनिक "गजवा-ए-हिन्द" का षड्यंत्र फारुख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सैयद के द्वारा आरंभ किया गया था! जिसको "रोशनी एक्ट" बनाकर, काश्मीर में से हिन्दुविहीन करने का सफल षड्यंत्र रचा! राजनीतिक आतंकवादियों के बूरे दिन आरंभ हुए हैं!


हिन्दुओं, शीघ्रपतन के शिकार हो कर, नरेन्द्र मोदी को मत कोसो!


वो अखण्ड भारत के लक्ष्य को लेकर, चाणक्य नीति के आधार पर, राजधर्म निभा रहे हैं!


मगर कुछ मूर्खों को तो स्वयं के जागरूक नागरिक होने का सार्वजनिक प्रमाण पत्र लेने की इतनी हड़बड़ाहट लगी रहती है, कि देश में कहीं पर भी किसी सेकुलर हिन्दू के साथ कुछ घटना घटित हुई नहीं, कि लग गए मोदी को गालियां देने!


तरह तरह के सुझावों की झड़ी लगा देते हैं, कि मोदी तो विश्वास जीतने में लग गया है, मोदी ने तो हिन्दुओं के लिए क्या किया है?


ऐसे शीघ्रपतन के शिकार अत्यंत बुद्धिजीवी वर्ग के तथाकथित जागरूक हिन्दुओं को कहना चाहता हूँ कि ७२ वर्षों में जितना षड्यंत्र हिन्दुओं के विरुद्ध कांग्रेस के ईसाई व मुस्लिम नेतृत्व ने किया है, उसकी सटीक जानकारी आपको नहीं है!


आप केवल बरसाती मेंढकों की तरह टर्र टर्र करके मोदी-विरोधी गद्दारों के लिए वातावरण बनाने का अनसमझा पाप ही कर रहे हो!


अगर आपको ये लगता है कि मोदी के अच्छे निर्णयों पर कुछ लिखने मात्र से आपके पाप क्षीण हो गए हैं, तो  ये आपकी मूर्खता ही है!


बुद्धिमान व्यक्ति के तमगे लगाए आप लोग असल में जागते हिन्दुओं को पथभ्रष्ट करने का अनदेखा पाप कर रहे हो!


राजनीतिक धर्म युद्ध में कोई निष्पक्ष नहीं होता!


करोड़ों ग़द्दार मोदी के विरोध में हैं, और करोड़ों हिन्दू मोदी के पक्ष में!


अब आप ही तय करिए कि आप किस पक्ष के साथ हो!


आपके व्यवहार से किसे अधिक लाभ होता है? मोदी को या विपक्ष को?


स्वयं आंकलन करिए व अपनी कलम की दिशा धर्मरक्षार्थ गुप्त व दृश्यतामक निर्णय लेने वाले नरेंद्र मोदी के पक्ष में शाब्दिक करे मोदी-विरोधी पृष्ठभूमि के भंवरजाल में फंसे हिन्दुओं को बाहर निकल आने में साक्षी बनें

एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है: PM मोदी का खुला खत

Narendra Modi (@narendramodi) | Twitterआज से ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार दूसरी बार देश की ज़िम्मेदारी सँभाली थी। अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के अवसर पर PM मोदी ने देश की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में जनता को धन्यवाद देते हुए देश के लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति को पूरे विश्व के लिए मिसाल बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस खुले पत्र में लिखा है कि इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है और यह अवसर जनता को नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति इस निष्ठा को प्रणाम करने का है।
'मैं आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ'
मेरे प्रिय स्नेहीजन,
आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति आपकी इस निष्ठा को प्रणाम करने का।
यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता। लेकिन, वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियाँ बनी हैं, उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। बीते वर्ष में आपके स्नेह, शुभाशीष और आपके सक्रिय सहयोग ने मुझे निरंतर एक नई ऊर्जा, प्रेरणा दी है।
इस दौरान आपने लोकतंत्र की जिस सामूहिक शक्ति के दर्शन कराए वह आज विश्व के लिए एक मिसाल बन चुकी है। वर्ष 2014 में आपने, देश की जनता ने, देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पाँच वर्षों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है।
उन पाँच वर्षों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए गवर्नेंस को परिवर्तित होते देखा है। उस कार्यकाल में जहाँ विश्व में भारत की आन-बान-शान बढ़ी, वहीं हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर, शौचालय बनवाकर, घर बनवाकर, गरीब की गरिमा भी बढ़ाई।
उस कार्यकाल में जहाँ सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई, वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स- GST, किसानों की MSP की बरसों पुरानी माँगों को भी पूरा करने का काम किया। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा। वर्ष 2019 में आपका आशीर्वाद, देश की जनता का आशीर्वाद, देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था।
भारत की ऐतिहासिक यात्रा में जनता का योगदान 
और इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है। आज जन-जन से जुड़ी जन-मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए कदम भी बढ़ाए। भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति ने बखूबी अपना दायित्व निभाया है।
‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है।
अनुच्छेद 370, अयोध्या में राम मन्दिर, तीन तलाक और CAA  जैसे ऐतिहासिक फैसले 
राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम- राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियाँ आप सभी को स्मरण हैं।
इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले, अनेक बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति दी है, नए लक्ष्य दिए हैं, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन ने जहाँ सेनाओं में समन्वय को बढ़ाया है, वहीं मिशन गगनयान के लिए भी भारत ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं।
इस दौरान गरीबों, किसानों, महिलाओं-युवाओं को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता रही है। अब पीएम किसान सम्मान निधि के दायरे में देश का प्रत्येक किसान आ चुका है। बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत 9 करोड़ 50 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 72 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई गई है।
देश के 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी पाइप से मिले, इसके लिए जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। हमारे 50 करोड़ से अधिक के पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मुफ्त टीकाकरण का बहुत बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है।
देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेत मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद 3 हज़ार रुपए की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।
मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएँ बढ़ाने और ब्लू इकॉनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। इसी तरह व्यापारियों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए व्यापारी कल्याण बोर्ड के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 7 करोड़ बहनों को भी अब ज्यादा वित्तीय सहायता दी जा रही है। हाल में ही स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी के ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर दोगुना यानी 20 लाख कर दिया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश में 450 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण का अभियान भी शुरू किया गया है।
 सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी तेज गति से कार्य हुआ है। संसद ने अपने कामकाज से दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि चाहे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेज़ी से बन पाए हैं।
कम हुआ रूरल और अर्बन के बीच का अंतराल  
सरकार की नीतियों और निर्णयों की वजह से शहरों और गाँवों के बीच की खाई कम हो रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब गाँव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10% ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं।
लेकिन, मैं इतना अवश्य कहूँगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है, संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं। देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना ने भारत को भी घेर लिया।
एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी 
आज सभी देशवासियों ने ये सिद्ध करके दिखाया है कि विश्व के सामर्थ्यवान और संपन्न देशों की तुलना में भी भारतवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और क्षमता अभूतपूर्व है। ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कर्फ्यू या लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने ये दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है।
निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है।
इनकी परेशानियाँ दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना है कि जीवन में हो रही असुविधा, जीवन पर आफत में न बदल जाए। इसके लिए प्रत्येक भारतीय के लिए प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन करना बहुत आवश्यक है। जैसे अभी तक हमने धैर्य और जीवटता को बनाए रखा है, वैसे ही उसे आगे भी बनाए रखना है।
ये लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं और विजयी होना हम सबका सामूहिक संकल्प है। अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहाँ के लोगों ने स्थितियों का मुकाबला किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं।
आत्मनिर्भर भारत : भारत को अपने पैरों पर खड़ा होना है 
आज समय की माँग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है – आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्ट अप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा। भारतीयों के पसीने से, परिश्रम से और उनकी प्रतिभा से बने लोकल उत्पादों के दम पर भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा।
अभी बहुत कुछ करना बाकी है : मुझमे कमी हो सकती है, देश में नहीं 
बीते छह वर्षों की इस यात्रा में आपने निरंतर मुझ पर आशीर्वाद बनाए रखा है, अपना प्रेम बढ़ाया है। आपके आशीर्वाद की शक्ति से ही, देश पिछले एक साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन फिर भी मुझे पता है कि अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।
देश के सामने चुनौतियाँ अनेक हैं, समस्याएँ अनेक हैं। मैं दिन-रात प्रयास कर रहा हूँ। मुझ में कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। और इसलिए, मेरा विश्वास स्वयं से ज्यादा आप पर है, आपकी शक्ति, आपके सामर्थ्य पर है।
कोई आपदा भारत का भविष्य तय नहीं कर सकती 
मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है।
हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती।
हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूँ। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए !!!
जागृत रहिए, जागरूक रखिए !!!

आपका प्रधान सेवक 
नरेन्द्र मोदी 


J&K: एलजी के शपथ ग्रहण में भाग लेने पर म​हबूबा मुफ्ती ने सांसद को पार्टी से निकाला

नजीर अहमद और महबूबा मुफ़्ती (फ़ाइल फोटो)जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर को केंद्र शासित प्रदेश बन गया। गिरीशचंद्र मुर्मू ने पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी ने अपने एक सांसद को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। श्रीनगर में पीडीपी के प्रवक्ता ने कहा “राज्यसभा के सदस्य नजीर अहमद को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।” उन्होंने बताया कि उप-राज्यपाल के शपथ ग्रहण में शामिल होने के चलते नजीर पर यह कार्रवाई की गई है।
प्रवक्ता ने बताया कि कार्यक्रम में सांसद की भागीदारी वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए पीडीपी के खिलाफ है। उन्होंने यह भी बताया कि नजीर अहमद ने राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल पर बहस के बाद वोटिंग में उसके खिलाफ मतदान नहीं किया था। वे पहले भी कई मुददों पर पार्टी के घोषित स्टैंड के खिलाफ जा चुके हैं। गौरतलब है कि नजीर वही सांसद हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किए जाने के दौरान पीडीपी के एक अन्य सांसद मीर मोहम्मद फैयाज के साथ विरोध स्वरुप विधेयक को फाड़ दिया था।

कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को लिए गए बड़े निर्णय के बाद से ही पीडीपी का चेहरा रहीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को गिरफ्तार कर नज़रबंद रखा गया है। बता दें कि सरकार द्वारा संसद में कानून के जरिए अनुच्छेद 370 पर कार्यवाही के बाद उसे ख़त्म कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया था। दोनों ही प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र के अंतर्गत संचालित किए जाएँगे। हालाँकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का प्रावधान है। गुरुवार को केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश के पहले उप-राज्यपाल के तौर पर पूर्व आईएएस गिरीश चन्द्र मुर्मू ने शपथ ली। राज्य के हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने उन्हें शपथ दिलाई थी।

आर्टिकल 370 : कोई विरोध नहीं, कुछ भी नहीं, बस जिहाद: ब्रिटिश मुस्लिम ‘सुंदरी’ सुमैरा फारुख

सुमैरा फारूख
सुमैरा फारूख (फोटो साभार: Daily Mail)
कभी ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवॉर्ड के लिए नामांकित होने वाली सुमैरा फारुख के खिलाफ पुलिस ने जाँच शुरू कर दिया है। दरअसल, सुमैरा ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद पिछले महीने बर्मिंघम में विरोध रैली का आयोजन किया था। इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए थे, जो कश्मीर से 370 निरस्त होने का विरोध कर रहे थे। इस दौरान सुमैरा खान ने लोगों को संबोधित करते हुए बयान दिया था कि ‘जिहाद ही इसका एकमात्र उपाय है।’ बता दें कि वह 2017 में ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवार्ड्स में ‘बिज़नेसवुमन ऑफ़ द ईयर’ कैटेगरी में हारने वाली फाइनलिस्ट थीं।
सुमैरा फारुख, जो पहले प्रिंस चार्ल्स के साथ फोटो खिंचवा चुकी हैं, ने सैकड़ों लोगों की भीड़ से कहा कि कश्मीर से कर्फ्यू हटाने के लिए आज एक सिर्फ एक ही नारा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को एक बात सच-सच बताना है कि इसका केवल एक ही समाधान है, और वो है जिहाद। कोई विरोध नहीं, कुछ भी नहीं, बस जिहाद।
सुमैरा फारूख, एक बिजनेसवुमैन होने के साथ ही एक पत्रकार भी हैं। उन्होंने भारतीय संघ के साथ जम्मू और कश्मीर को पूरी तरह से एकीकृत करने के भारत के फैसले के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। ठीक 24 घंटे पहले, वहाँ के उप नेता टॉम वाटसन, जैक ड्रोमी और लियाम बायरन समेत शीर्ष श्रम सांसदों के एक मेजबान ने उसी स्थान पर एकसमान विरोध में भाषण दिए थे।
अपने ऊपर लगे आरोपों पर बचाव करते हुए समैरा फारुख ने हिंसा भड़काने से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक मुखर महिला हैं। अपनी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “जिहाद का कोई विशेष अर्थ नहीं है। यदि आपको यूके की सरकार के साथ कोई समस्या है और आप अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, तो इस्लाम के अर्थ में संघर्ष को जिहाद कहा जाता है। मुसलमान उस संदर्भ में शब्द का अर्थ जानते हैं। क्या आपको लगता है कि मैं ऐसी इंसान हूँ, जो उस शब्द का उपयोग लोगों को लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए करूँगी? मैं समुदायों और ब्रिटिश सेना के साथ काम करती हूँ, जो एशियाई समुदाय को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है। मैं हिंसा को कैसे प्रोत्साहित कर सकती हूँ?”
वहीं, जब सुमैरा फारूख से पूछा गया कि उन्होंने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, क्या उन्हें करना चाहिए था, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा, “जो लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं, वे वही हैं जो नहीं चाहते हैं कि एक महिला बोले। वहाँ लोग कह रहे हैं कि हम बंदूकों के साथ आज़ादी पाने जा रहे हैं। लोग बुरे शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं, कह रहे हैं बाहर आओ और लड़ो, लेकिन वे जाँच नहीं करते हैं। लोग हमेशा मुझ पर हमला करते हैं क्योंकि मैं एक मुखर महिला हूँ।”
पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि वे इस मामले की जाँच कर रहे हैं। वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम यह देखने के लिए उपलब्ध कॉन्टेंट का आकलन कर रहे हैं कि क्या कोई अपराध किया गया है।”

पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का है, पाकिस्तान तुरंत PoK को छोड़ दे : लंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन

बॉब ब्लैकमैन, रूचि घनश्यामलंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर पर खरी-खरी सुनाई है। ब्लैकमैन ने साफ़ कर दिया कि पाकिस्तान को पीओके छोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर पूरी तरह भारतीय गणराज्य का हिस्सा है। बॉब ब्लैकमैन के बयान से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेइज्जती का रिकॉर्ड बना रहे पाकिस्तान को नया झटका लगा है। शनिवार (सितम्बर 12, 2019) को कश्मीरी पंडितों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए सांसद बॉब ब्लैकमैन जम्मू कश्मीर पर यूएन रेजॉल्यूशन की भी चर्चा की।
लंदन में ब्रिटेन स्थित कश्मीरी पंडितों के एक समूह को संबोधित करते हुए  कंजरवेटिव पार्टी के एमपी बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे पर यूएन में प्रस्ताव पेश करने की योजना पर सवाल खड़े किये ब्लैकमैन बलिदान दिवस पर आयोजित खास कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे  इस कार्यक्रम का आयोजन कश्मीरी पंडित कल्चरल सोसायटी और ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (AIKS) ने किया था कार्यक्रम में एक नाटक का भी मंचन किया गया जिसका शीर्षक था- 'वी रिमेंबर: द जर्नी ऑफ कश्मीरी पंडित्स.' जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही नॉर्थ लंदन से एमपी बॉब ब्लैकमैन इस फैसले का समर्थन करते रहे हैं और भारत के पक्ष में बोलते रहे हैं वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी प्रशंसक हैं हाल ही में सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटा दिया इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है बॉब ब्लैकमैन ने कहा, 'पूरा जम्मू-कश्मीर संप्रभु भारत का हिस्सा है ऐसे लोग, जो वहां संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने की बात करते हैं, वे उस प्रस्ताव को भूल जाते हैं, जिसके मुताबिक राज्य के एकीकरण के लिए पाकिस्तानी सेना को कश्मीर छोड़ देना चाहिए'   
यूएन रेजॉल्यूशन को लागू करने की माँग पाकिस्तान भी करता रहा है। शुरुआत में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की माँग ठुकरा दी थी लेकिन अब वह हमेशा इसकी माँग करता है। बॉब ब्लैकमैन ने याद दिलाया कि यूएन की रिजॉल्यूशन के मुताबिक़, सबसे पहले पाकिस्तान और उसकी फ़ौज को कश्मीर छोड़ना पड़ेगा, जिससे पूरे राज्य का एकीकरण हो सके। इस कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त रूचि घनश्याम भी उपस्थित थीं। 
कश्मीरी पंडितों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने काफ़ी अच्छी प्रस्तुतियाँ दी, जिनकी प्रशंसा रूचि ने भी की। उच्चायुक्त ने बॉब ब्लैकमैन को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि बॉब ब्लैकमैन कंजर्वेटिव पार्टी की ‘1922 कमिटी (प्राइवेट मेंबर्स कमिटी)’ के जॉइंट एग्जीक्यूटिव सेक्रटरी हैं और वह 2012 से ही इस पद पर बने हुए हैं। लंदन के अनुभवी नेताओं में से एक ब्लैकमैन पिछले 9 साल से हैरो ईस्ट के सांसद बने हुए हैं।

बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को भी पत्र लिखा था। बॉब के पत्र का जवाब देते हुए ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री इस जयशंकर से बात की है। उन्होंने साफ़ किया कि जम्मू कश्मीर भारत-पाक्सितान के बीच का मुद्दा है और ब्रिटेन का शुरू से यही मानना रहा है। बॉब ब्लैकमैन कश्मीरी पंडितों को उनकी मातृभूमि से निकाल बाहर किए जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे हैं।
इससे पहले सांसद बॉब ने लेबर पार्टी के कुछ सांसदों को हिन्दू-विरोधी करार देते हुए याद दिलाया था कि अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा का चुनावी वादा था और उसे अपने घोषणा-पत्र के वादों को पूरा करने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी याद कहा था कि यह मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल है और लेबर पार्टी के सांसदों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अबकी वह पिछली बार से भी अधिक मजबूत बहुमत लेकर सत्ता में आए हैं। सांसद बॉब ने पूछा था कि क्या एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अपने वादे पूरा करने का अधिकार नहीं है?

अनुच्छेद 370: यूरोपियन पार्लियामेंट भी साथ, कहा- आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने में मिलेगी मदद

यूरोपियन पार्लियामेंट
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने का मामला यूरोपियन पार्लियामेंट (ईपी) में भी उठा। दुनिया भर के देशों की तरह ही ईपी ने भी भारत सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्य टॉमस चेकोवस्की ने इसे भारत का आतंरिक मामला बताते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 खत्म होने से कश्मीर में आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने में मदद मिलेगी। टॉमस ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को प्रधानमंत्री मोदी का आतंकियों के खिलाफ बड़ा फैसला बताया।
ईपी के मासिक अखबार ET टुडे में रविवार (सितंबर 1, 2019) को प्रकाशित खबर के मुताबिक, चेकोवस्की ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से कुछ आतंकी संगठन कश्मीर घाटी में आतंक फैला रहे हैं। ये सशस्त्र समूह जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक संगठनों से जुड़े या संबद्ध व्यक्तियों पर हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। हाल में कम से कम राजनीतिक दल के 6 कार्यकर्ता और एक अलगाववादी नेता की हत्या में भी ये शामिल रहे हैं।

टॉमस ने आगे कहा कि कश्मीर में अक्टूबर 2018 में स्थानीय चुनावों के दौरान आतंकी हमलों की घटनाएँ सबसे ज्यादा हुई। जो नेता चुनावों में हिस्सा ले रहे थे, उन्हें धमकियाँ मिल रही थी। उन्होंने कहा कि ज्यादातर पाकिस्तानी आतंकी संगठन पीओके से ही संचालित हो रहे हैं। 
संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट का कहना है कि 1990 से लेकर अब तक कश्मीर में कई आतंकी संगठनों का उदय हुआ है। वर्तमान समय में चार बड़े आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन और हरकत उल-मुजाहिद्दीन की सक्रियता सबसे ज्यादा है। इन सभी आंतकी संगठनों को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है। 

100वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत में नहीं रहेगा कश्मीर, भाजपा इसे बर्बाद कर देगी : MDMK प्रमुख वाइको

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज समाज सेवा के नाम पर जो लूट मची हुई है, उसे देख नेता शब्द एक ग्लानि बनता जा रहा है। जिसे देखों जनसेवा के नाम पर अपनी दुकान यानि पार्टी बना कर जनमानस को पागल बना रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लगभग हर पार्टी देशहित की बजाए केवल स्वार्थ सिद्ध करने में व्यस्त है। देश जाए भाड़ में, लेकिन हमें तुष्टिकरण पुजारी बन दुश्मन की बोली, अपनी रोटियां सेंकनी हैं। क्या देश के विरुद्ध बोलने वाले तथाकथित नेता एक भी वोट पाने के अधिकारी हैं? क्या कश्मीर या देश के किसी भी अन्य भाग में अनुच्छेद 370 हितकारी है? वोट के भूखे नेताओं का यह कहना कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने से यह भारत से अलग हो जाएगा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी को ऐसे नेताओं का संज्ञान लेकर ऐसे नेताओं की दुकानों की आय की निगरानी करने की जरुरत है। क्योकि ऐसे नेता कभी देशहित के बारे में सोंच भी नहीं सकते। 
इनसे पूछा जाए कि "अगर कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा, तो पाकिस्तान में जाएगा? क्या ऐसे नेताओं ने दुकान देशहित में खोली है या दुश्मन हित के लिए? 
पोलैंड ने दिया पाकिस्तान को झटका 
जबकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। पाकिस्तान ने इस विषय को संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाने का फैसला किया है। लेकिन वर्तमान में यूएनएससी की अध्यक्षता संभाल रहे पोलैंड ने साफ कर दिया है कि दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच विवादित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही होना चाहिए। भारत भी पहले ही साफ कर चुका है कि अनुच्छेद 370 के विषय में पाकिस्तान को ऐतराज जताने का नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। जम्मू-कश्मीर, भारत का आंतरिक मामला है और प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारत फैसला कर सकता है।  
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मुहिम के बाद यह पहला मौका है जब पोलैंड ने खुलकर अपनी राय रखी है। इसका अर्थ ये है कि पाकिस्तान के सामने इस विषय को हटाने के विकल्प नहीं है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थाई सदस्य रूस भी पाकिस्तान का विरोध कर चुका है। रूस ने कहा था कि नियमों के दायरे में ही भारत ने फैसला किया था। इसमें पाकिस्तान की आपत्ति का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पोलैंड के राजदूत  एडम बर्कोवस्की ने कहा कि वो मानते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जो माहौल बना है या पाकिस्तान की तरफ से आपत्ति दर्ज की गई है उसमें समाधान या बातचीत का आधार सिर्फ और सिर्फ द्विपक्षीय है।वो कहते हैं कि जब वो द्विपक्षीय शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो नजरिया साफ है। कोई भी देश किसी दूसरे मुल्क के प्रशासनिक मुद्दे को यूएन नहीं ले जा सकता है। यही नहीं विवादों को सुलझाने के लिए कानूनी रास्ते की जगह आपसी बातचीत ही सबसे बड़ा आधार होता है और इसे दुनिया ने यूरोपीय यूनियन के केस में देखा भी है।
जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाने के बाद एक तरफ जहां केंद्र सरकार वहां पर शांति व्यवस्था कायम करने का जी-तोड़ प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर सियासी दल इस मुद्दे को लेकर अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं। तमिलनाडु के प्रमुख नेता और एमडीएमके (MDMK) पार्टी के प्रमुख वाइको (Vaiko) ने कुछ ऐसा ही विवादित बयान दिया है, जो न सिर्फ देश के खिलाफ है, बल्कि यह कश्मीरी अलगाववादियों के रुख का समर्थन करता दिखता है। वाइको ने अपने बयान में कहा है कि भारतीय जनता पार्टी कश्मीर को बर्बाद करने पर तुली है। ऐसा ही रहा तो देश जब अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, उस समय कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रह जाएगा
MDMK प्रमुख के इस विवादित बयान से कश्मीर को लेकर राजनीति और गर्मा सकती है. वाइको ने अगस्त 12 को मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान यह बयान दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘भारत जब अपनी आजादी की सौवीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा होगा, उस समय कश्मीर इस देश का हिस्सा नहीं रहेगा। उन्होंने (भाजपा) कश्मीर को कीचड़ में धकेल दिया है।’ कश्मीर को लेकर अपनी बात को स्पष्ट करते हुए वाइको ने कहा, ‘मैंने कश्मीर मुद्दे को लेकर पहले भी अपनी बात रखी है। मैं इसके लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों को दोषी मानता हूं। कश्मीर मुद्दे को लेकर मैंने दोनों पार्टियों पर हमले किए, 30 फीसदी कांग्रेस पर तो 70 फीसदी भाजपा के ऊपर।’

एमडीएम पार्टी के प्रमुख वाइको का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कश्मीर में धारा 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने के बाद शांति कायम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते संसद में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश कर राज्य को मिला विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य का विभाजन कर इस दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर ऐसा केंद्रशासित प्रदेश होगा जहां दिल्ली की तरह विधानसभा होगी, वहीं लद्दाख को चंडीगढ़ की तरह का केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया है

सुनी जानी चाहिए जम्मू कश्मीर के लोगों की आवाज : डॉ मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमन्त्री 

मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चलो बोलना तो आ गया, लेकिन देखना यह है कि वह अपनी मर्जी से बोल रहे हैं या फिर रिमोट के द्वारा। उन्होंने अगस्त 12 को कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने का सरकार का फैसला देश के अधिकतर लोगों की अभिलाषा के अनुसार नहीं है और भारत के विचार को जीवंत रखना है तो जम्मू कश्मीर के नागरिकों की आवाज सुनी जानी चाहिए

सिंह ने कहा कि भारत गहरे संकट से गुजर रहा है और इसे समान विचार वाले लोगों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि देश की अधिकांश जनता की अभिलाषा का इसमें ध्यान नहीं रखा गया। महत्वपूर्ण है कि इन सभी लोगों की आवाज सुनी जाए. हम केवल अपनी आवाज उठाकर सुनिश्चित कर सकते हैं कि दूरगामी रूप से भारत का विचार जीवंत रहे, जो हमारे लिए बहुत पवित्र है।
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शोभा डे जानी-मानी लेखिका हैं और अक्सर विवादों में रहती हैं। खासतौर पर जब से नरेंद्र मोदी सत्ता में हैं, वो अक्सर अपन...

मनमोहन सिंह ने अपने पूर्व कैबिनेट सहयोगी एस जयपाल रेड्डी को श्रद्धांजलि देने के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी

पाकिस्तान सरकार के निर्णय के विरुद्ध मुशर्रफ के रिश्तेदार की बगावत : शादी में मीका सिंह को बुलाया

मुशर्रफ के रिश्तेदार की शादी में मीका सिंह ने गाया गाना तो भड़के फैन्स, बोले- पासपोर्ट कैंसल कर दो...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पाकिस्तानी ही अपने निर्णय का मजाक बनाने पर उतारू हैं, क्योकि एक तरफ पाकिस्तान सरकार भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर पाबन्दी लगा रही है, तो इसके पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज़ मुसर्रफ के रिश्तेदार गायक मीका सिंह को शादी समारोह में आमन्त्रित कर रहे हैं। क्या पाकिस्तान सरकार उनके निर्णय के विरुद्ध किसी भारतीय गायक को अपने किसी कार्यक्रम में आमन्त्रित करने पर कार्यवाही करेगी? 
सिंगर मीका सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। हाल ही में सिंगर पाकिस्तान के कराची में एक शो करने पहुंचे, जिसके बाद वो ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए। बता दें जम्मू-कश्मीर से 'आर्टिकल 370' हटाया गया है, जिसको लेकर पाकिस्तान ने भारतीय सामान के साथ फिल्मों को भी बैन कर दिया है। लेकिन मीका कराची में परवेज मुशर्रफ के रिश्तदारों की शादी में परफॉर्म करने पहुंच गए। शो के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो के वायरल होते ही मीका को अब खूब ट्रोल किया जा रहा है। इस वीडियो में मीका मस्ती में झूमते और गाते नजर आ रहे हैं। 
इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस वीडियो को पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने परवेज मुशर्रफ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'ये जानकर खुश हूं कि जनरल परवेज मुशर्रफ की रिश्तेदार की मेंहदी में भारतीय सिंगर मीका सिंह ने कराची में परफॉर्म किया..' पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में भी मीका सिंह को काफी ट्रोल किया जा रहा है। एक ट्विटर यूजर ने तो यह तक कह दिया कि इसका पासपोर्ट कैंसल कर देना चाहिए और इसे पाकिस्तान में ही रहने देना चाहिए


एक ट्विटर यूजर ने लिखा, 'पाजी हम भारतीयों ने आपको इतना प्यार दिया। और इस स्थिति में जब पाकिस्तान ने हमसे सारे ट्रेड तोड़ दिए हैं और आतंकवादियों को बॉर्डर पार भेज रहे हैं। इस समय हमें बहुत टेंशन हैं। आप पाकिस्तान में शो के लिए क्यों गए? क्या आपके लिए कुछ पैसे देश से बड़े हैं।'
5 अगस्त को देश के गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने को लेकर एक बिल पेश किया था। ये बिल दोनों सदनों से पूर्ण बहुमत से पास हुआ और जम्मू-कश्मीर  से आर्टिकल 370 हट गया. अब जम्मू-कश्मीर भी भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया है। हालांकि भारत के इस फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है
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