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हिंसा के लिए गिलानी के दामाद को महबूबा मुफ्ती के करीबी पारा ने दिए थे 5 करोड़ रूपए

बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद कश्मीर घाटी में हिंसा जारी रखने के लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ अल्ताफ फंटूश को पाँच करोड़ रुपए दिए गए थे। पैसे जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी और पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा ने दिए थे। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इसका खुलासा विशेष अदालत में हाल ही में दायर की गई चार्जशीट में किया है।

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी 2016 में मारा गया था। पारा को जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादी समूहों को धन मुहैया कराने के रैकेट में शामिल होने के आरोप में जुलाई 2017 में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद शाह पहले ही न्यायिक हिरासत में है।

चार्जशीट में कहा गया है कि पारा जुलाई 2016 में मुठभेड़ में वानी के मारे जाने के बाद अल्ताफ अहमद शाह के संपर्क में था और उसे यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कश्मीर घाटी पूरी तरह अशांत रहनी चाहिए। पथराव और हिंसात्मक घटनाएँ व्यापक पैमाने पर होनी चाहिए। 

अपने वकील के माध्यम से पारा इन आरोपों से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उसे राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अदालत ने पूरक चार्जशीट में नाम न होने पर उसे जमानत दे दी थी। इसके बाद कश्मीर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग द्वारा उसे फिर गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है। श्रीनगर में एनआईए अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी। पीडीपी ने पहले दावा किया था कि केंद्र सरकार पारा पर एक रणनीति के तहत दबाव बना रही थी कि वह पाला बदल कर भाजपा में शामिल हो जाए।

इससे पहले एनआईए की चार्जशीट से यह बात सामने आई थी कि पारा कश्मीर में पत्थरबाजों का गैंग चलाता था। आतंकियों के लिए हथियारों का भी इंतजाम करता था। वहीद उर रहमान सहित 3 लोगों के खिलाफ दायर एक चार्जशीट में बताया गया है कि पीडीपी नेता ‘पत्थरबाजी’ का रैकेट चलाता था और दक्षिण कश्मीर में हथियार की तस्करी का काम भी करता था।

चार्जशीट के अनुसार, पारा ने दक्षिण कश्मीर में पत्थरबाजी का रैकेट चलाया, जिसे उसने साल 2010-11 में संगठित किया था। उसने पॉलिटिकल माइलेज पाने के लिए पुलवामा में ऐसे 20-25 लड़कों को इकट्ठा किया था जो पत्थरबाजी में शामिल थे। इसके अलावा चार्जशीट में बताया गया है पारा ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकी कमांडर अबू दुजाना को 10 लाख रुपए की फंडिंग उपलब्ध कराई थी। वह नियमित रूप से आतंकियों और अलगाववादियों कि फंडिंग कर रहा था, ताकि घाटी में स्थिति खराब बनी रहे। साथ ही चार्जशीट में PDP द्वारा आतंकियों और अलगगववादियों के तुष्टीकरण की नीति के बारे में भी खुलासा किया गया है।

ये पूरा मामला हिजबुल कमांडर नवीद बाबू के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह व अन्य की गिरफ्तारी से जुड़ा है। जाँच में येपाया गया है कि इरफान शफी मीर, दविंदर सिंह और सैयद नवीद मुश्ताक के साथ पारा इस अपराधिक साजिश में शामिल था।

‘जम्मू कश्मीर को 2 पार्टियों ने मिल कर आतंकवाद में झोंका, PM मोदी मेरे आदरणीय’: नज़ीर अहमद लावे, PDP के पूर्व सांसद

                                                                                                         फाइल फोटो साभार: Wiki
‘जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP)’ से राज्यसभा सांसद के रूप में हाल ही में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले नज़ीर अहमद लावे ने कहा है कि जम्मू कश्मीर पर सिर्फ 2 पार्टियों ने मिल कर आतंकवाद थोपा। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्लाह की ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ और कांग्रेस पार्टी ने मिल कर जम्मू कश्मीर को आतंकवाद के रास्ते में झोंक दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों की गलतियों का खामियाजा आज भी जनता भुगत रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक हजारों मासूम बेगुनाह इसकी भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में जम्मू कश्मीर ने अपने हजारों नौजवानों को खो दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को इसकी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ रही है। नज़ीर ने कहा कि इन दोनों पार्टियों के किए का फायदा पाकिस्तान ने उठाया। यही आतंकवाद की वजह है।

बकौल PDP नेता नज़ीर अहमद लावे, इन्हीं कारणों से देश और दुनिया का जम्मू कश्मीर के प्रति नजरिया बदल गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है और जब भी सदन में या पीएम के सामने व्यक्तिगत रूप से कोई बात रखने का मौका मिला तो उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया है। उन्होंने पीएम मोदी को जानकारी दी कि जम्मू कश्मीर बेहद ही गरीब राज्य है। उन्होंने कहा,

“जम्‍मू कश्‍मीर का विशेष राज्‍य का दर्जा खत्‍म करने, अनुच्‍छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्‍य के विभाजन से वहाँ के लोग विकास की दौड़ में और पीछे हो गए हैं। इस फैसले का अब तक कोई फायदा सामने नहीं आया है और आएगा भी नहीं। ये सबसे बड़ा नुकसान वहाँ की जनता को हुआ है। इससे जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों की भावनाएँ जुड़ी हैं। मैंने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए मजबूती से अपनी बात उठाई थी।”

उन्होंने कहा कि उनकी मुहिम विफल रही। महबूबा मुफ़्ती की पार्टी के पूर्व सांसद ने कहा कि उन्होंने संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत ही अपनी बात उठाई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर को दोबारा सही समय पर राज्य का दर्जा देने का वादा किया है, लेकिन ऐसा किया ही क्यों गया? उन्होंने पीएम मोदी को ‘आदरणीय’ बताते हुए कहा कि वो हमेशा गंभीरता से उनकी बातों को सुनते थे।

इस संसद सत्र में गुलाम नबी आज़ाद, शमशेर सिंह, नज़ीर अहमद लावे और मीर मोहम्मद फयाज राज्यसभा से रिटायर हुए हैं। पीएम मोदी ने भी चिंता जताई थी कि गुलाम नबी आज़ाद के बाद इस पद को जो भी नेता संभालेंगे, उन्हें उनसे मैच करने में काफी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा था कि आज़ाद अपने दल के साथ-साथ अपने देश और सदन की भी चिंता करते थे। उन्होंने इस दौरान उस आतंकी हमले को भी याद किया, जिसमें 8 गुजराती पर्यटकों की मौत हो गई थी।

J&K में BJP का डंका: 74 सीटें जीत कर बनी सबसे बड़ी पार्टी, अब्दुल्ला-मुफ्ती-कांग्रेस-वामपंथी सब भगवा के सामने फुस्स

                                                        जम्मू कश्मीर में बीजेपी का डंका
जम्मू कश्मीर में डीडीसी चुनावों (DDC Election) के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। बीजेपी ने इन चुनावों में 74 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि स्थानीय पार्टियाँ अकेले इस आँकड़े के पास नहीं पहुँच पाईं।

गुपकार गैंग ने जिला विकास परिषद के चुनावों में 100 से ज्यादा सीटों (101+) के साथ विजय जरूर पाई। मगर, पार्टी लिहाज से देखें तो इसमें 7 राजनीतिक दल एक साथ थे और किसी भी दल को अकेले इतनी सीटों (जितनी पर BJP ने जीत दर्ज की) पर जीत नहीं मिली।

इस गठबंधन में नेशनल कॉन्फ़्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी, पीपल्स कॉन्फ़्रेंस, CPI-CPIM, अवामी नेशनल कॉन्फ़्रेंस और जम्मू और कश्मीर पीपल्स मूवमेंट जैसी क्षेत्रीय पार्टियाँ शामिल थीं। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को 67 सीटें मिली हैं, जबकि पीडीपी को केवल 27।

ऐसे ही पीपल्स कॉन्फ्रेंस को 8, सीपीआई (एम) को 5 और पीपल्स मूवमेंट को 3 मिली हैं। जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी को 12 सीटें मिलने की खबर है और निर्दलीय ने इस चुनाव में 49 सीटें जीत कर उल्लेखनीय बढ़त बनाई है। वहीं कांग्रेस के हिस्से इस बार 26 सीट आई हैं।

अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पहली बार कुल 280 सीटों पर चुनाव हुए हैं। इन चुनावों में प्रदेश में भाजपा की पकड़ साफ देखने को मिली। लोगों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में अपना विश्वास जताया।

मुस्लिम बहुल क्षेत्र में 3 सीटों पर बीजेपी की जीत बताती है कि उनके प्रयास व्यर्थ नहीं हुए। श्रीनगर की खोनमोह-2 में बीजेपी के एजाज हुसैन जीते हैं, बांदीपोरा में एजाज अहमद खान ने जीत हासिल की है और पुलवामा के काकपोरा से मिन्हा लतीफ को जीत मिली है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बीजेपी की इस बड़ी जीत पर कहा, “श्रीनगर से भाजपा के तीन उम्मीदवारों को जीत मिली है। यह सत्यापित करता है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को केन्द्र शासित प्रदेश के विकास के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण पर भरोसा है।” वहीं बीजेपी के महासचिव विबोध गुप्ता ने पार्टी के विजेता उम्मीदवारों को, विशेष रूप से घाटी के उम्मीदवारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि घाटी के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपना विश्वास जताया है।

उधर, नतीजों के स्पष्ट होने के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों ने गुपकार के हक में वोट दिया है और केंद्र द्वारा जिस तरह गलत तरीके से अनुच्छेद 370 को हटाया गया, उसे पूरी तरह नकार दिया गया है। उनके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इन चुनावों उनकी पार्टी ने रेफरेंडम नहीं बनाया, ना ही उन्होंने अधिक कैंपेन किया, फिर भी लोगों ने उनका साथ दिया है।

रोशनी एक्ट : जिसका गुनाह छिपाने के लिए हंगामा कर रहा है घोटालेबाज गुपकार गैंग

                                            घोटालेबाज़ गुपकार गैंग 
1947 में जब से भारत स्वतंत्र हुआ है, तब से लेकर आज तक देश में घोटाले थमने का नाम ही नहीं ले रहे। जबकि देश में इतनी अधिक भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ बन चुके हैं, उसके बावजूद घोटाले होना सिद्ध करता है कि जिस तरह जनसेवा के नाम पर नेता और पार्टियां घोटालों में लिप्त हैं, इस स्थिति में इन भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ का क्या है औचित्य, यह ज्वलंत प्रश्न है। 

भ्रष्टाचार करने वाले भ्रष्टाचार दूर करने के नाम पर जनता से वोट मांगते हैं और जनता किसी भी मौसम--सर्दी, गर्मी अथवा बारिश-- में वोट देने लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े होकर अपना वोट देने जाती हैं। लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात। विश्व में भारत ही ऐसा अनूठा देश है, जहाँ सबसे अधिक पार्टियां है। कोई धर्म के नाम पर तो कोई जाति के नाम पर अपनी-अपनी दुकानें खोलकर बैठ अपनी ही तिजोरियां भर रहे हैं, समस्याएं जस की तस बनी हुई है।  

जम्मू-कश्मीर इतना बड़ा राज्य नहीं, लेकिन वह भी इस भ्रष्टाचार से अछूता नहीं। कभी जनता को अनुच्छेद 370 के नाम पर, कभी अलगाववाद के नाम पर, कभी हिन्दू राष्ट्र ने नाम से तो कभी धर्म एवं जाति के नाम पर उकसाया जाता है। जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 की आड़ में किस तरह देश में अराजकता फ़ैला भ्रष्टाचार किया जा रहा था, सुनकर एवं देखकर आंखें फटी रह जाती हैं।

इस घोटाले की जाँच CBI ने अपने हाथों में ली हुई है। अभी तक के जाँच में कई खुलासे हुए हैं और इन सब के तार जम्मू कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों से जुड़ रहे हैं, जिनमें से एक फारूक अब्दुल्लाह का नाम पहले ही सामने आ चुका है। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, अब पता चला है कि महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP ने जम्मू के संजवान क्षेत्र में तीन कनाल सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा जमा लिया।
इसके बाद इस जमीन पर पार्टी के दफ्तर का निर्माण कराया गया। इसी ऑफिस के पहले फ्लोर पर विवादास्पद नेता राशिद खान ने डेरा जमा लिया। जिस समय ये सब हुआ, उस वक़्त राज्य में मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार थी। 2 बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे सईद काफी विवादित नेता थे और उनके केंद्रीय गृह मंत्री रहते ही घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ था। उनके निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा सीएम बनी थीं।
‘न्यूज़ 18’ की खबर में एक CBI अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि गुजरे जमाने की फ़िल्मी हस्तियाँ फिरोज खान और संजय खान की बहन दिलशाद शेख ने भी राजधानी श्रीनगर में 7 कनाल सरकारी जमीन पर कब्ज़ा जमा लिया। दिलशाद ने जमीन को नियमित करने के लिए राशि भी नहीं जमा कराई लेकिन रोशनी एक्ट का इस्तेमाल किया। इसी तरह एक अन्य PDP नेता असलम मट्टू ने भी राजधानी में भूमि कब्जाई।
उन्होंने भी इसके तहत जमा कराई जाने वाली रकम नहीं दी। जम्मू-कश्मीर के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री बख्शी गुलाम मोहम्मद के परिवार के एक सदस्य ने भी इस एक्ट का गलत तरीके से फायदा उठा कर सरकारी भूमि पर कब्ज़ा किया। फारूक अब्दुल्लाह ने दावा किया था कि अवैध रूप से कब्ज़ा की गई सरकारी जमीन के बदले चुकाई गई रकम से राज्य में बिजली आएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

‘रोशनी एक्ट’ या ‘रोशनी स्कीम’ जैसा नाम सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बिजली से जुड़ी कोई योजना होगी। जी नहीं, यह जम्मू कश्मीर में ‘अंधेरगर्दी’ से जुड़े एक घोटाले का नाम है। बेशक, रियल एस्टेट सेक्टर में सरकारी स्तर पर अरबों रुपए के घपले को अंजाम देने के लिए यह एक्ट लाया गया था। इस भूमि घोटाले के तहत हुए तमाम आवंटन और प्रक्रियाएँ निरस्त कर दी गई और हाई कोर्ट ने इसे पूरी तरह ‘गैर कानूनी और असंवैधानिक’ करार दे दिया।

जम्मू-कश्मीर के ‘रोशनी एक्ट’ भूमि घोटाले की लिस्ट सार्वजनिक होने पर हड़कंप मच गया है। क्योंकि फेरिस्त में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए हैं। अब्दुल्ला पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप है। हालाँकि, उन्होंने इसे एक बड़ी साजिश करार देते हुए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। फारुक अब्दुल्ला का कहना है कि इस इलाके में सिर्फ उनका ही घर नहीं है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से साफ पता चलता है कि सरकार की मंशा सिर्फ उन्हें फँसाने की है और कुछ नहीं।


अगर फ़ारूक़ की बात को सच भी माना जाए, तो एक भारतीय सांसद होते हुए क्यों जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 वापस लाने के लिए चीन से सहायता लेने की बात बोल रहे हैं? क्या ऐसे लोग नेता कहलवाने योग्य हैं? क्या ऐसे नेता वोट के अधिकारी हैं?

फ़ारूक़ पर जमीन हड़पने का आरोप 

फारुक अब्दुल्ला पर सरकारी जमीन कब्जा कर घर बनाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि जम्मू के सजवान में उनका जो घर है, वो जंगल की जमीन पर है। ये घर 10 कनाल में बना हुआ है। इनमें से 7 कनाल जंगल की जमीन है जबकि 3 कनाल जमीन उनकी अपनी है। आरोप ये है कि जमीन रोशनी एक्ट के तहत गलत तरीके से ली गई। हालाँकि पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

PDP और NC  नेताओं के नाम 

वहीं इससे पहले पीडीपी, एनसी समेत कांग्रेस के कई नेताओं के नाम इस घोटाले में सामने आए थे। इनमें से एक नाम जम्मू कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू का भी था। दरअसल 25,000 करोड़ रुपए के कथित रोशनी भूमि घोटाले के मामले की जाँच हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने इस गड़बड़ी को ‘बेशर्म’ और ‘राष्ट्रहित को नुकसान पहुँचाने वाला’ बताते हुए सीबीआई जाँच के आदेश दिए। आरोप है कि कश्मीर में प्रदेश के दो बड़े राजनीतिक दलों को करोड़ों की जमीन तय मूल्य से 85 प्रतिशत तक के कम मूल्य पर दी गई। 

जम्मू कश्मीर के इतिहास में 25,000 करोड़ रुपए के सबसे बड़े घोटाले के तौर पर देखे जा रहे इस एक्ट को सिरे से खारिज कर दिया गया और हाई कोर्ट ने इसकी सीबीआई जाँच के आदेश दे दिए थे। सियासी कद्दावरों और ब्यूरोक्रेटों को सीधे तौर पर फायदा पहुँचाने के लिए बनाई गई इस खुराफाती स्कीम के बारे में सब कुछ जानिए।

क्या है ऐतिहासिक भूमि घोटाला?

इस स्कीम का आधिकारिक नाम जम्मू और कश्मीर राज्य भूमि एक्ट 2001 था, जिसे ‘रोशनी स्कीम’ के नाम से भी जाना गया। इसके तहत राज्य सरकार ने मामूली कीमतें तय कर उन लोगों को उन ज़मीनों पर स्थाई कब्जा देने की बात कही, जिन्होंने सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण कर रखा था। यानी सरकारी जमीनों पर गैर कानूनी कब्जों को कानूनी तौर पर मालिकाना हक देने की कवायद की गई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला सरकार द्वारा 2001 में लाई गई इस स्कीम के तहत 1990 से हुए अतिक्रमणों को इस एक्ट के दायरे में कट ऑफ सेट किया गया था। सरकार का कहना था कि इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जो सरकारी जमीन पर कई सालों से खेती कर रहे है। लेकिन नेताओं ने जमीनों पर कब्जे जमाने का काम शुरू कर दिया। वर्ष 2005 में तब की मुफ्ती सरकार ने 2004 के कट ऑफ में छूट दी। उसके बाद गुलाम नबी आजाद ने भी कट ऑफ ईयर को वर्ष 2007 तक के लिए सीमित कर दिया।

इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लग जाता है कि जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने सीबीआई डायरेक्टर को इसकी जाँच के लिए एसपी रैंक के पुलिस अफसरों से कम की टीम नहीं बनाने को कहा था और गहराई से जाँच के बाद मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। रोशनी ऐक्ट के तहत तत्कालीन राज्य सरकार का लक्ष्य 20 लाख कनाल सरकारी जमीन अवैध कब्जेदारों के हाथों में सौंपना था, जिसकी एवज में सरकार बाजार भाव से पैसे लेकर 25,000 करोड़ रुपए की कमाई करती।

रोशनी ऐक्ट सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को मालिकाना हक देने के लिए बनाया गया था। इसके बदले उनसे एक रकम ली जाती थी, जो सरकार तय करती थी। 2001 में फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जब ये कानून लागू किया था, तब सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को मालिकाना हक देने के लिए 1990 को कट ऑफ वर्ष निर्धारित किया गया था। लेकिन, उसके बाद की हर सरकारों ने इस कट ऑफ साल को बढ़ाना शुरू कर दिया, जिसकी आड़ में सरकारी जमीन की बंदरबाँट की आशंका जताई जा रही है। कोर्ट ने कहा था कि मुफ्ती मोहम्मद सईद (2004) और गुलाम नबी आजाद (2007) की सरकारों ने इस कानून में और संशोधन किए ताकि गैर-कानूनी रूप से जमीन हथियाने वालों को फायदा पहुँचाई जा सके।

जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने लगाई थी फटकार

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों और सतर्कता अधिकारियों को ‘लूट की’ इस नीति के प्रति आँखें मूँदकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोताही बरतने के लिए जमकर लताड़ लगाई। अदालत ने सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी कब्जा करने वालों को लेकर कहा कि इन लुटेरों की सत्ता में इतनी गहरी पैठ रही है कि यह अपने फायदे के लिए कानून भी बनवा सकते थे। 

अदालत ने यह भी आशंका जताई कि जिस तरह से जमीन के ये लुटेरे प्रभावी रहे हैं, उससे लगता है कि उन्होंने नीति निर्धारण से लेकर उसके लागू करवाने तक में हर स्तर पर भूमिका निभाई है। अदालत की ऐसी टिप्पणी उन राजनेताओं के लिए भी सख्त संकेत हैं, जिनके कार्यकाल में ऐसे कानून बनाए गए हैं। अदालत ने यहाँ तक टिप्पणी की कि उन्होंने अब तक ऐसी आपराधिक गतिविधि नहीं देखी है, जिसमें सरकार ने राष्ट्रीय और जनता के हित को ताक पर रखकर कोई कानून बनाया हो और जनता के खजाने और पर्यावरण को होने वाले नुकसान का कोई आँकलन भी नहीं किया गया हो।

कितनी जमीन पर अवैध कब्जे?

जम्मू-कश्मीर में लाखों एकड़ सरकारी जमीन पर नेताओं, पुलिस, प्रशासन और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अफसरों का कब्जा था। इस एक्ट के जरिए ही करीब ढाई लाख एकड़ जमीन पर कब्जे को कानूनी रूप दे दिया गया। करोड़ों रुपए की ये जमीनें नाम मात्र की कीमतों पर दी गई थीं। शुरुआती जाँच में पता चला है कि राज्य के कई पूर्व मंत्रियों ने खुद के साथ रिश्तेदारों के नाम पर भी कई एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किया था।

क्यों मिला ‘रोशनी’ नाम और कैसे हुआ ‘अंधेर’?

अब्दुल्ला सरकार ने इस एक्ट को बनाते समय कहा कि जमीनों के कब्ज़ों को कानूनी किए जाने से जो फंड जुटेगा, उससे राज्य में पावर प्रोजेक्टों का काम किया जाएगा, इसलिए इस एक्ट का नाम ‘रोशनी’ रखा गया, जो मार्च 2002 से लागू हुआ। 1 एकड़ में 8 कनाल होते हैं और इस लिहाज़ से ढाई लाख एकड़ से ज्यादा अवैध कब्जे वाली जमीन को हस्तांतरित करने की योजना बनाई गई।

‘अंधेर’ ये था कि ज़मीन को मार्केट वैल्यू के सिर्फ 20 फीसदी दर पर सरकार ने कब्जेदारों को सौंपा। यानी कुल मिलाकर इससे 25 हज़ार करोड़ रुपए का घोटाला होने की बात सामने आई। अंधेर ये भी रहा कि अब्दुल्ला सरकार के बाद की सरकारों ने भी इसका फायदा उठाया। 2005 में सत्तारूढ़ मुफ्ती सरकार ने कट ऑफ को 2004 तक बढ़ा दिया था और फिर गुलाम नबी आजाद सरकार ने 2007 तक।

किसे मिलता रहा नाजायज़ फायदा?

इस विवादास्पद रोशनी एक्ट से किस किसको फायदा हुआ? इस बारे में आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि ‘स्थानीय स्तरों पर जो भी प्रभावशाली था या प्रभावशालियों के संपर्क में था’, हर उस व्यक्ति को फायदा पहुँचा। मंत्रियों, कारोबारियों, नौकरशाहों और इन सबके रिश्तेदारों या करीबियों को ज़मीनें कौड़ियों के भाव मिलीं। हसीब द्रबू, मेहबूब बेग, मुश्ताक अहमद चाया, कृशन अमला, खुर्शीद अहमद गनी और तनवीर जहान जैसे प्रभावशाली नाम इस लिस्ट में सामने आ चुके हैं।

इस घोटाले की गहराई की अंदाजा इस बात से लगाइए कि श्रीनगर शहर के बीचों बीच ‘खिदमत ट्रस्ट’ के नाम से कॉन्ग्रेस के पास कीमती जमीन का मालिकाना हक पहुँचा, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस का भव्य मुख्यालय तक ऐसी ही ज़मीन पर बना हुआ है, जो इस भूमि घोटाले से तकरीबन मुफ्त के दाम ​हथियाई गई।

एक लाख हेक्टेयर जमीन बाँट दी

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के विवादित रोशनी एक्ट के तहत 20.55 लाख कनाल (1,02,750 हेक्टेयर) सरकारी जमीन लोगों को औने-पौने दाम में बाँट दी गई थी। इसमें से मात्र 15.58 प्रतिशत जमीन को ही मालिकाना हक के लिए मंजूरी दी गई। योजना का उद्देश्य था कि जमीन के आवंटन से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल राज्य में बिजली ढाँचे को सुधारने में किया जाएगा। इस एक्ट के तहत रसूखदारों ने अपने तथा अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन आवंटित करा ली।

एक्ट निरस्त होने का मतलब क्या है?

जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अगुवाई वाली राज्य प्रशासनिक परिषद यानी SAC ने 2018 में रोशनी एक्ट को निरस्त किया, तो इसका शुरुआती मतलब यही था कि इस स्कीम में जो आवेदन या प्रक्रियाएँ पेंडिंग थीं, उन्हीं को निरस्त माना जाए। लेकिन, बाद में इसे लेकर हलचल बढ़ी और हाई कोर्ट ने इसे गैरकानूनी, अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक और असंगत करार दे दिया।

हाई कोर्ट ने जब इसे सिरे से खारिज किया तो इस एक्ट की शुरुआत से हुई तमाम प्रक्रियाएँ और आवंटन गैर कानूनी हो गए। हाल में, जस्टिस गीता मित्तल व राजेश बिंदल की हाई कोर्ट बेंच ने सीबीआई जाँच के आदेश देकर यह भी कहा कि हर आठ हफ्ते में केस की जाँच के स्टेटस की रिपोर्ट दी जाती रहे।

‘रोशनी’ करा सकती है जम्मू-कश्मीर के ‘राजघरानों’ में ‘अंधेरा’, गुपकार से नहीं होगा बचाव

सुरक्षा एवं राजनीतिक विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के मुताबिक महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और कॉन्ग्रेस पार्टी को आखिर ‘गुपकार’ समझौता करने के लिए साथ आना पड़ा। दरअसल, ये लोग खुद को रोशनी एक्ट के घोटाले से बचाने के लिए ‘गुपकार’ बैठकें कर रहे हैं। इनका मकसद है कि देश-दुनिया का ध्यान ‘रोशनी’ जैसे बड़े घोटाले से हट कर गुपकार पर आ जाए।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता बताते हैं कि कई जगह की जमीन तो अब दूसरे व तीसरे व्यक्ति को बेची जा चुकी है। पावर अटॉर्नी का जबरदस्त खेल चला है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जम्मू और सांबा जिलों में जमीन हड़पने के मामलों की जाँच शुरू कर दी है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही इन नेताओं के चेहरे उतरे हुए थे। अब रही सही कसर ‘रोशनी’ एक्ट की जाँच ने पूरी कर दी।

जिन लोगों ने रोशनी एक्ट की आड़ लेकर करोड़ों रुपए की जमीनों पर कब्जे कराए हैं, वही लोग अब ‘गुपकार’ समझौते के जरिए देश दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाह रहे हैं। हालाँकि वे इसमें कामयाब नहीं होंगे, क्योंकि सीबीआई जब अपनी चार्जशीट दाखिल करेगी तो उस वक्त इन नेताओं के पास कोई जवाब नहीं होगा।

जम्मू-कश्मीर के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव पहले ही कह चुके हैं कि एक जनवरी 2001 के आधार पर सरकारी जमीन का ब्योरा एकत्र कर उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे। कौन सी जमीन पर किसका कब्जा है, इस बाबत सभी अवैध कब्जा धारकों के नाम सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

अब नेताओं और उनके रिश्तेदारों के अलावा उन नौकरशाहों को भी पसीना आ रहा है, जिन्होंने जमीन पर कब्जा कराने में मदद की थी। सांबा जिले में राजस्व अधिकारियों ने रोशनी एक्ट के प्रावधानों का जान-बूझकर उल्लंघन कर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कराया है।

बता दें कि यही वो गुपकार गैंग है, जिन्होंने अपने शासनकाल के दौरान जम्मू की डोगरा संस्कृति को खत्म करने का भरसक प्रयास किया है। साठ साल के शासन में इन लोगों ने सिलसिलेवार तरीके से गौरवशाली संस्कृति पर प्रहार किए हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी भी इसके लिए बराबर की जिम्मेदार है। यही वजह है कि अब जम्मू-कश्मीर में उसका अपना कोई वजूद नहीं रहा। 

पिछले दिनों श्रीनगर में गुपकार समझौता हुआ है। यह समझौता केवल इसी बात को लेकर हुआ है कि अब रोशनी एक्ट घोटाले से खुद को कैसे बचाएँ। इन तीनों दलों के नेताओं ने थोक के भाव में रोशनी एक्ट का फायदा उठाया था। अनिल गुप्ता का कहना है कि अब उन्हें यह डर सताने लगा है कि जब अखबारों में उनके नाम सार्वजनिक होंगे तो जनता के बीच उनका नकाब उतर जाएगा।

इसी के चलते उन्होंने आपस में गुपकार समझौता कर लिया। इसमें उन्होंने अनुच्छेद 370 को दोबारा से लाने की माँग दोहराई है, जबकि हकीकत यह है कि वे रोशनी एक्ट से खुद को कैसे बचाएँ, लोगों तक किसी तरह इसकी सच्चाई न पहुँचे, इस बाबत रणनीति बना रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता यह बात अच्छे से जानते हैं कि बिना साथ आए वे रोशनी एक्ट पर लोगों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। इसके लिए मिलकर रणनीति बनानी जरूरी है। हालाँकि अब इन तीनों दलों के नेताओं की पोल खुलनी तय है। जनता समझ चुकी है कि रोशनी एक्ट में क्या कुछ हुआ है। जल्द ही इनके चेहरे का नकाब उतरेगा और इनका असली चेहरा लोगों के सामने आएगा।                                                            (साभार एवं एजेंसीज इनपुट्स सहित)

गुपकार गैंग ने मांगी चीन से मदद ; नगरौटा में मारे गए आतंकियों से मिले हथियारों पर लिखा है मेड इन चाइना

मारे गए आतंकवादियों से बरामद चाइना निर्मित हथियारों का जखीरा 
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में एक नया गठबंधन बना है- गुपकार गठबंधन। इस गठबंधन में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती की पार्टी समेत कश्मीर के कई दल शामिल हैं। गुपकार का मुख्य एजेंडा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35-A बहाली है। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि वो इस बहाली के लिए चीन से भी मदद लेने को तैयार हैं। हैरानी की बात यह है कि गुपकार गैंग ने पिछले हफ्ते ही चीन से मदद मांगी और आज, 19 नवंबर को नगरौटा में मारे गए आतंकियों के पास से जो हथियार मिले हैं उन पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा है।
जब से गुपकार गैंग नज़रबंदी से मुक्त हुआ है, जम्मू-कश्मीर में अराजकता का माहौल बनाने का पुनः प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार को इनकी और इनके समर्थकों की भी हर गतिविधि पर गिद्द की नज़र रखनी होगी। ये लोग अपनी तिजोरी की खातिर कुछ भी कर सकते हैं। इन्हें देश से अधिक अपनी तिजोरी और रोटी की चिंता है। ये लोग अनुच्छेद 370 की आड़ में अपनी तिजोरियां भर रहे थे। 

चीन में बने हथियारों से भारत में तबाही की थी साजिश

जम्मू कश्मीर के नगरौटा में गुरुवार सुबह सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए। मारे गए चारों आतंकी पाकिस्तानी थे। चारों आतंकी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ट्रक में जा रहे थे। नगरोटा के पास एक टोल प्लाजा पर रोकने पर आतंकवादियों ने पुलिस पार्टी पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। जिसके बाद मुठभेड़ में चारों आतंकी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों के पास से आरडीएक्स, एके-56 राइफल, पिस्टल, ग्रेनेड, मोबाइल सेल, मैगजीन और अन्य हथियार भी बरामद हुए हैं। इन हथियारों पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा हुआ है। चीन के इतने हथियार मिलने पर संविधान की दुहाई देने वाले समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष क्यों चुप्पी साधे हुए हैं, इसी से सम्बंधित लोग ट्विटर पर प्रश्न भी कर रहे हैं। ये देश भक्ति का चोला ओढ़े बहुरूपियों पर सख्ती से निपटने की मांग भी हो रही है :-

मुठभेड़ के बाद एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि ऐसा पहली बार सामने आया है कि एक-एक आतंकवादी के पास चार-चार एके-47 हथियार थे। इसके अलावा उनके पास से तीन पिस्टल, सैटेलाइट फोन, कम्पास और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। अधिकारी ने आशंका जताई कि राज्य में डीडीसी के चुनाव होने हैं, ऐसे में आतंकवादी चुनाव में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन आतंकवादियों के मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबल पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

जम्मू जोन के आईजी मुकेश सिंह ने कहा है कि ट्रक चालक फरार है, हम उसकी तलाश कर रहे हैं। यह संभव है कि वे एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे। इस तरह की जब्ती अभूतपूर्व है। यह संभव है कि वे डीडीसी चुनाव को निशाना बना रहे थे। हालांकि, हम जांच कर रहे हैं।


‘J&K को वापस आतंक के काल में ले जाना चाहता है गुपकार गैंग, सोनिया-राहुल साफ करें स्टैंड’: अमित शाह

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के रहते वहां किस स्तर पर महिला अधिकारों का हनन किया जा रहा था, किसी से छुपा नहीं, यानि वहां की महिला का राज्य से बाहर किसी पुरुष से विवाह होने पर पिता की संपत्ति आदि से बेदखल हो जाती थी, लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने से राज्य से बाहर विवाहित महिलाओं को खोया अधिकार मिलने से वहां जनहित के नाम से गुमराह कर रही स्थानीय पार्टियां पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कांफ्रेंस की नींद होने से इतने हताश हो गए हैं कि आज जनहित की बजाए अपने हित की खातिर एकजुट हो रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर यूजर्स पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) को फटकार लगा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पिछली बार बीडीओ चुनावों में अलगाव और शर्मिंदगी का सामना करने बाद पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को डीडीसी चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वे अपने समर्थन आधार और विशेषाधिकार को खोना नहीं चाहते हैं इसलिए हताशा में बहिष्कार ना कर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

इसके पहले पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में बने जम्मू-कश्मीर के गुपकार गुट को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बड़ा हमला बोला। अमित शाह ने गुपकार गुट को ‘गुपकार गैंग’ करार देते हुए ट्वीट कर कहा कि गुपकार गैंग ग्लोबल हो रहा है। वे चाहते हैं कि विदेशी ताकतें जम्मू-कश्मीर में दखल करें। गुपकार गैंग भारत के तिरंगे का अपमान करता है। क्या सोनिया जी और राहुल जी गुपकार गैंग के ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं? उन्हें देश की जनता के सामने अपना स्‍टैंड साफ करना चाहिए। अमित शाह के ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे इस बार चुनाव का बहिष्कार करने नहीं जा रहे हैं। फिर क्या था सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें निशाना बनाने लगे।

जम्मू कश्मीर में स्थानीय पार्टियों ने साथ मिल कर ‘गुपकार गठबंधन’ बनाया है और कॉन्ग्रेस भी उसके साथ जुड़ी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, जो अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा। अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है।

अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यही कारण है, जिससे गुपकार गठबंधन और कॉन्ग्रेस को देश में हर जगह जनता द्वारा नकारा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि अब ‘गुपकार गैंग’ वैश्विक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करें। उन्होंने ‘गुपकार गैंग’ पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगाया। शाह ने कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो इन चीजों का समर्थन करते हैं?

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अब इस मामले में अपना स्टैंड साफ़ कर देना चाहिए। एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया-राहुल से पूछा था कि वो अनुच्छेद-370 पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के साथ हैं या विरोध में? जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायती चुनाव में कॉन्ग्रेस द्वारा गुपकार के साथ हाथ मिलाने पर उन्होंने कहा कि ये लोग चीन से समर्थन माँग रहे हैं, क्या कॉन्ग्रेस इसके पक्ष में है?

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग ये चाहते हैं कि अनुच्छेद-370 वापस आ जाए, वो यहाँ भ्रष्टाचार को जारी रहते देखना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जम्मू कश्मीर की कोई ‘मुस्लिम बेटी’ राज्य से बाहर शादी करती थी तो उसे संपत्ति के अधिकार से बाहर कर दिया जाता था, जिसे मोदी सरकार ने बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से जम्मू कश्मीर को संकीर्ण मानसिकता की तरफ ढकेलने का प्रयास हो रहा है।

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के बारे में पूछा था कि ये निर्णय किसका है? साथ ही जवाब देते हुए कहा था कि ये पूरे देश का निर्णय है, क्योंकि भारत का कोई भी कानून लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन में विचार-विमर्श के बाद ही बनता है। उन्होंने कहा था, ‘मै राहुल गाँधी और सोनिया जी से पूछता हूँ कि इस गठबंधन की एक पार्टी चीन के साथ अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कहती है, वहीं महबूबा मुफ्ती तिरंगा नहीं उठाना चाहतीं।

जम्मू काश्मीर में "रोशनी विधेयक" रद्द!


खेल देखिये, हिन्दुओं, कैसे अब्दुल  ने पड़ोसी हिन्दू को मार-भगाकर उसकी जमीन, मकान पर कब्जा जमा लिया १९९० में!


फिर कब्जाई जमीन उस कथित शांतिदूतों के नाम करने का षड्यंत्र रचा गया!


बिजली कनेक्शन देने की आड़ लेकर, एक "रोशनी एक्ट" बनाया फारुख अब्दुल्ला सरकार ने!


कब्जाई हिन्दूभूमि को मुस्लिम के नाम करने की फीस रखी गई मात्र १०१ रुपए!


१०१ रुपये जमा करने मात्र से राशि जमा करने वाले के नाम वो जमीन का मालिकाना हक "रोशनी एक्ट" के अंतरगत पट्टा जारी कर दिया जाता, और फिर उस पर बिजली कनेक्शन देकर उस हिन्दूभूमि को सदा के लिए मुसलमान के नाम कर दिया गया!


खेल बहुत गहरा खेला गया फारुख अब्दुल्ला द्वारा!


१९९० की कत्ल वाली रात के पस्चात, जो जमीन जिसके कब्जे में थी, उसे "रोशनी एक्ट" द्वारा उसका मालिक बनाने का कानून फारुख अब्दुल्ला ने बनाया!


१९९० के बाद से मुसलमानों के नाम की गई हिन्दूभूमि के कागजात, जो कि "रोशनी एक्ट" द्वारा जारी किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाएगा, और उसके असली स्वामी हिन्दू को ढूंढा जाएगा!


जम्मू-काश्मीर में हिन्दुओ के अच्छे दिनों को आरंभ करता हिन्दू प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी!


इंच इंच हिन्दूभूमि पुनः काश्मीरी हिन्दुओं को दिलाने के लिए संघर्ष करता हिन्दूराज


हिन्दू पंडितों को मार-भगाकर काश्मीर में मुस्लिमों द्वारा कब्जा की गई हिन्दूभूमि को मात्र ₹१०१ में मुसलमानों के नाम करने के लिए फारुख अब्दुल्ला के द्वारा बनाये गए "रोशनी एक्ट" को हिन्दू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रद्द कर दिया है!


साथ ही २००१ में काश्मीर में मुस्लिम नेताओं व उनके रिश्तेदारों के नाम बंदरबांट द्वारा "रोशनी एक्ट" द्वारा कब्जाई हिन्दूभूमि के सारे रिकॉर्ड को भी खंगालने के आदेश जारी किए गए हैं!


भागते हिन्दुओं के बंगले, कोठियां, कारखाने, उद्योग, बाग बगीचे, केशर के बागान मुसलमानों ने कब्जा कर लिए थे!


उन हिन्दूभूमि को आतंकी मुस्लिमों व उनके रिश्तेदारों के नाम करने के लिए "रोशनी एक्ट", जो कि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति के लिए तैयार किया गया था, उसकी आड़ में बिजली कनेक्शन देने के लिए केवल ₹१०१ में कब्जा जमीनों व बागानों, बंगलों, अन्य हिन्दूभूमि को मुस्लिमों के नाम पर पट्टा जारी कर दिया गया!


काश्मीर को हिन्दुविहीन करने के षड्यंत्र में फारुख अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती दोनों के पिता की मुख्य भूमिकायें थी!


इन्होंने भी अकूत हिन्दूभूमि अपने व अपने रिश्तेदारों के नाम "रोशनी एक्ट" द्वारा पट्टा जारी करते हुए कब्जाई!


अब हिन्दू  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आदेशों से "रोशनी एक्ट" रद्द कर दिया गया है, और १९९० के बाद में जो भी सम्पति मुसलमानों के नाम की गई थी, सब की जांच आऱभ करने का मार्ग खोल दिया है!


हिन्दू   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसालमिक आतंकवाद की असली जड़ पर चोट कर दिए हैं!


इसी काश्मीर से "संविधान" की आड़ लेकर, हिन्दुओं के विरुद्ध आधुनिक "गजवा-ए-हिन्द" का षड्यंत्र फारुख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सैयद के द्वारा आरंभ किया गया था! जिसको "रोशनी एक्ट" बनाकर, काश्मीर में से हिन्दुविहीन करने का सफल षड्यंत्र रचा! राजनीतिक आतंकवादियों के बूरे दिन आरंभ हुए हैं!


हिन्दुओं, शीघ्रपतन के शिकार हो कर, नरेन्द्र मोदी को मत कोसो!


वो अखण्ड भारत के लक्ष्य को लेकर, चाणक्य नीति के आधार पर, राजधर्म निभा रहे हैं!


मगर कुछ मूर्खों को तो स्वयं के जागरूक नागरिक होने का सार्वजनिक प्रमाण पत्र लेने की इतनी हड़बड़ाहट लगी रहती है, कि देश में कहीं पर भी किसी सेकुलर हिन्दू के साथ कुछ घटना घटित हुई नहीं, कि लग गए मोदी को गालियां देने!


तरह तरह के सुझावों की झड़ी लगा देते हैं, कि मोदी तो विश्वास जीतने में लग गया है, मोदी ने तो हिन्दुओं के लिए क्या किया है?


ऐसे शीघ्रपतन के शिकार अत्यंत बुद्धिजीवी वर्ग के तथाकथित जागरूक हिन्दुओं को कहना चाहता हूँ कि ७२ वर्षों में जितना षड्यंत्र हिन्दुओं के विरुद्ध कांग्रेस के ईसाई व मुस्लिम नेतृत्व ने किया है, उसकी सटीक जानकारी आपको नहीं है!


आप केवल बरसाती मेंढकों की तरह टर्र टर्र करके मोदी-विरोधी गद्दारों के लिए वातावरण बनाने का अनसमझा पाप ही कर रहे हो!


अगर आपको ये लगता है कि मोदी के अच्छे निर्णयों पर कुछ लिखने मात्र से आपके पाप क्षीण हो गए हैं, तो  ये आपकी मूर्खता ही है!


बुद्धिमान व्यक्ति के तमगे लगाए आप लोग असल में जागते हिन्दुओं को पथभ्रष्ट करने का अनदेखा पाप कर रहे हो!


राजनीतिक धर्म युद्ध में कोई निष्पक्ष नहीं होता!


करोड़ों ग़द्दार मोदी के विरोध में हैं, और करोड़ों हिन्दू मोदी के पक्ष में!


अब आप ही तय करिए कि आप किस पक्ष के साथ हो!


आपके व्यवहार से किसे अधिक लाभ होता है? मोदी को या विपक्ष को?


स्वयं आंकलन करिए व अपनी कलम की दिशा धर्मरक्षार्थ गुप्त व दृश्यतामक निर्णय लेने वाले नरेंद्र मोदी के पक्ष में शाब्दिक करे मोदी-विरोधी पृष्ठभूमि के भंवरजाल में फंसे हिन्दुओं को बाहर निकल आने में साक्षी बनें

J&K: एलजी के शपथ ग्रहण में भाग लेने पर म​हबूबा मुफ्ती ने सांसद को पार्टी से निकाला

नजीर अहमद और महबूबा मुफ़्ती (फ़ाइल फोटो)जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर को केंद्र शासित प्रदेश बन गया। गिरीशचंद्र मुर्मू ने पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी ने अपने एक सांसद को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। श्रीनगर में पीडीपी के प्रवक्ता ने कहा “राज्यसभा के सदस्य नजीर अहमद को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।” उन्होंने बताया कि उप-राज्यपाल के शपथ ग्रहण में शामिल होने के चलते नजीर पर यह कार्रवाई की गई है।
प्रवक्ता ने बताया कि कार्यक्रम में सांसद की भागीदारी वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए पीडीपी के खिलाफ है। उन्होंने यह भी बताया कि नजीर अहमद ने राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल पर बहस के बाद वोटिंग में उसके खिलाफ मतदान नहीं किया था। वे पहले भी कई मुददों पर पार्टी के घोषित स्टैंड के खिलाफ जा चुके हैं। गौरतलब है कि नजीर वही सांसद हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किए जाने के दौरान पीडीपी के एक अन्य सांसद मीर मोहम्मद फैयाज के साथ विरोध स्वरुप विधेयक को फाड़ दिया था।

कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को लिए गए बड़े निर्णय के बाद से ही पीडीपी का चेहरा रहीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को गिरफ्तार कर नज़रबंद रखा गया है। बता दें कि सरकार द्वारा संसद में कानून के जरिए अनुच्छेद 370 पर कार्यवाही के बाद उसे ख़त्म कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया था। दोनों ही प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र के अंतर्गत संचालित किए जाएँगे। हालाँकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का प्रावधान है। गुरुवार को केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश के पहले उप-राज्यपाल के तौर पर पूर्व आईएएस गिरीश चन्द्र मुर्मू ने शपथ ली। राज्य के हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने उन्हें शपथ दिलाई थी।

धारा 370: ऐतिहासिक गलती सुधारी गई : जनार्दन द्विवेदी, कांग्रेस वरिष्ठ नेता

रहस्य-रोमांच से भरपूर फिल्म जैसा रहा अनुच्छेद 370 को हटाने का घटनाक्रम
अमित शाह की पीठ थप-थपाते मोदी 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का घटनाक्रम रहस्य-रोमांच से भरी किसी फिल्म जैसा रहा जिसमें हर कोई अंदाज लगाता रहा और पता तब चला जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद में घोषणा की. किसी धमाकेदार फिल्म की तरह सुरक्षबलों की तैनाती हुई, आतंकी खतरे के मद्देनजर परामर्श जारी हुआ, कश्मीर घाटी के राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया, इंटरनेट सहित अन्य संचार सेवाएं रोक दी गईं और बीती आधी रात अत्यंत गहमागहमी रही. यह सब जुलाई के अंतिम सप्ताह में तब शुरू हुआ जब केंद्र ने आतंकवाद रोधी अभियानों की मजबूती और कानून व्यवस्था की स्थिति के आधार पर घाटी में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों (करीब दस हजार केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों) की तैनाती का आदेश दिया. 
हालांकि, राज्य के राजनीतिक दलों और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के 'इरादों' पर चिंता जाहिर की और दावा किया कि केंद्र 'कुछ बड़ा करने' की योजना बना रहा है. कश्मीर घाटी में चिंता का माहौल उत्पन्न हो गया जहां श्रीनगर के संवेदनशील इलाकों और कश्मीर के अन्य हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई. इनमें से ज्यादातर सुरक्षाकर्मी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से थे. यह तैनाती 100 कंपनियों के अतिरिक्त थी. स्थिति शुक्रवार को तब चरम पर पहुंच गई जब सेना ने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी अमरनाथ तीर्थयात्रियों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर प्रशासन ने परामर्श जारी कर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से तत्काल घाटी छोड़ने को कहा. कयास लगाए जाने लगे कि कश्मीर में हो रहे घटनाक्रम आतंकी खतरे से जुड़े हैं. वहीं, अनेक लोग अनुच्छेद 35-ए और अनुच्छेद 370 पर कोई बड़ी घोषणा होने की अटकलें लगाने लगे. अमरनाथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों ने सरकार के परामर्श के बाद शनिवार को घाटी को छोड़ना शुरू कर दिया. 
अटकलें तब और बढ़ गईं जब सरकार ने एअरलाइनों से कहा कि वे जम्मू कश्मीर से बाहर जाने वाली उड़ानों के किराए पर नियंत्रण रखें. वहीं, रेलवे ने घोषणा की कि वह कश्मीर से बाहर जा रहे यात्रियों से टिकट रद्द कराने का कोई शुल्क वसूल नहीं करेगा. इस बीच, राज्य के राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने समर्थकों से शांत रहने और घाटी में 'उड़ रहीं अफवाहों' पर विश्वास न करने को कहें. अनुच्छेद 35-ए तथा अनुच्छेद 370 को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच जम्मू कश्मीर में क्षेत्रीय दलों ने रविवार को सर्वसम्मत संकल्प लिया कि वे राज्य को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों को खत्म करने या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने के किसी भी प्रयास के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे. 
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कांग्रेस में अनुच्छेद 370 पर मतभेद; अधिकतर नेता सरकार के समर्थन में  
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव जब राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया तो समर्थन और विरोध में लोग खुलकर सामने आने लगे. सरकार को इस कदम पर उम्मीद से बेहतर समर्थन मिला. इस मसले पर कांग्रेस सदन के अंदर ज्यादा मजबूत नजर नहीं आई. शाम होते-होते पार्टी इस मसले पर बंटी हुई नजर आई. कांग्रेस के कई नेताओं ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया. इस लिस्ट में हरियाणा के दीपेंद्र हुड्डा, महाराष्ट्र के मिलिंद देवड़ा से लेकर सीनियर कांग्रेसी जनार्दन द्विवेदी शामिल हैं. दीपेंद्र हुड्डा ने तो इस अनुच्छेद को लेकर ट्वीट किया कि 21वीं सदी में इसकी कोई जगह ही नहीं है. हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने अपना यह ट्वीट हटा लिया. अपने इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक अखबार की पुरानी खबर भी ट्वीट की थी, जिसमें उनके हवाले से 370 हटाने की वकालत की गई थी. 
मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट कर कहा कि दुर्भाग्य से आर्टिकल 370 के मसले को लिबरल और कट्टर की बहस में उलझाया जा रहा है. पार्टियों को अपने वैचारिक मतभेदों को किनारे कर भारत की संप्रभुता, कश्मीर शांति, युवाओं को रोजगार और कश्मीरी पंडितों के लिए न्याय के लिहाज से सोचना चाहिए. 
Very unfortunate that Article 370 is being converted into a liberal vs conservative debate.

Parties should put aside ideological fixations & debate what’s best for India’s sovereignty & federalism, peace in J&K, jobs for Kashmiri youth & justice for Kashmiri Pandits.
उनके अलावा जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि राम मनोहर लोहिया भी इसके समर्थन थे. द्विवेदी ने कहा कि मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे. हम लोग छात्र आंदोलन में इसका विरोध किया करते थे. जहां तक मेरा व्यक्तिगत विचार है तो उसके हिसाब से यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है. 
धारा 370: कांग्रेस के इस दिग्गज नेता ने मोदी सरकार के कदम का किया स्वागत, कहा- ऐतिहासिक गलती सुधारी गईधारा 370: ऐतिहासिक गलती सुधारी गई
कांग्रेस के सीनियर नेता जनार्दन द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित क्षेत्रों में बांटने के केंद्र सरकार के कदम का समर्थन किया और अपनी पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि सरकार ने एक 'ऐतिहासिक गलती' सुधारी है. द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है. उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है. स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे. मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे. मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है. 
सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने संबंधी अनुच्छेद 370 समाप्त करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों.... जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने का फैसला किया है. इससे संबंधित दो संकल्पों एवं एक विधेयक को सोमवार को राज्यसभा की मंजूरी मिल गयी. धेयक के पक्ष में 125 वोट और विपक्ष में 61 वोट पड़े. वहीं एक सदस्य गैर हाजिर रहा.
धारा 370 हटाए जाने के फैसले पर क्या कहते हैं कश्मीरी पंडित?
अटकलों और अफवाहों का गर्म होता बाजार 
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बैठक में स्वीकार किया गया प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि दलों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के पास प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है जो संविधान के अनुच्छेद 35-ए तथा अनुच्छेद 370 को हटाने या निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने के किसी भी प्रयास के दुष्परिणामों के बारे में अवगत कराएंगे. बैठक के तुरंत बाद घाटी में तेजी से होते घटनाक्रमों से रहस्य गहरा गया क्योंकि अधिकारियों ने रविवार की रात महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं तथा कई नेताओं को या तो 'गिरफ्तार' कर लिया या 'हिरासत' में ले लिया गया. 
दो पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें नजरबंद कर दिया गया है. वहीं, कांग्रेस नेता उस्मान माजिद और माकपा नेता एमवाई तारिगामी ने दावा किया कि उन्हें आधी रात के करीब गिरफ्तार कर लिया गया. रात में गहराए रहस्य के बाद सोमवार की सुबह केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई. 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सेवा निर्वित उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते सितम्बर 2014 में आमुख लेख शीर्.....

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हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में क्या चर्चा हुई, इसके ब्योरे का खुलासा नहीं किया गया. बैठक के तत्काल बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संदेश दिया कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान देंगे. इससे कश्मीर के बारे में किसी बड़ी घोषणा की खबरें हवा में तेजी से तैरने लगीं. राज्यसभा की बैठक शुरू होते ही शाह ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की, और इस तरह कई दिनों से चली आ रही अटकलों, चिंता और रहस्य-रोमांच पर विराम लग गया. (एजेंसीज इनपुट्स)